उम्मीदों की सरकार

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“हर पांच साल बाद जनता करती है परिवर्तन की प्रदेश को मिल सके सही नेत्तृव और मिल सके सम्मस्याओं से निजात ”

“कांग्रेस 36 सीटों जीत बनाते हुए पुर्ण बहुमत में आई वहीं सतारुढ़ भाजपा सरकार को 26 सीटांे तक ही पहुंच पाई,जहां हिलोपा से केवल अध्यक्ष महेश्वर सिंह ही जीत पाए, वहीं तृणमूल कांग्रेस ,बसपा,सपा,एनसीपी और लोजपा जैसे दलों का तो खाता खाली ही रहा “

हिमाचल विधानसभा चुनावी परिणामां को लेकर सबका इंतजार आखिर 20 दिस्बर को खत्म हो गया, 68 विधानसभा सिटों के लिए मतदान 4 नवम्बर को हुए थे जिनके परिणाम 20 दिस्बर को आने घोषित हुए थे, अभी तक तो कयास ही लगाए जा रहें थे कि प्रदेश में किस पार्टि की सरकार बनेगी भाजपा अपना मिश्न रिपीट पुरा कर पायेगी या फिर सता में आने के लिए तत्पर कांग्रेस प्रदेश में सता में आने का अपना सपना पुरा कर पायेगी ।

वहीं इस बार प्रदेश में तीसरे र्मोचे की सम्भावना भी उभर कर आ रही थी ,चुनावी परिणाम आने तक सभी पार्टियां अपनी – अपनी जीत को लेकर सुनिश्चित थी।
पर 20 दिस्बर को चूनावी परिणाम घोषित होने से धुधंली तस्वीर साफ हो गई और कांग्रेस पार्टि ने अपनी जीत का परचम पुरे देश में लहरा दिया ओर अपनी जीत पक्की कर ली। वहीं मिशन रिपीट का सपना देख रही भाजपा सरकार की नींद टुटी तो मिशन रिपीट का सपना भी चुर -चुर हो गया , वैसे कांग्रेस और भाजपा दोनों अपनी – अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे वहीं इस बार तीसरे मोंर्चे ने भी जीत को लेकर काफि उम्मीदें लगाई थी जिन्हे हिमाचल की जनता ने सिरे से ही नकार दिया।

भाजपा सरकार ने जहां चुनाव जीतने के लिए विकास के नारे को उपर उठाया और कहा की जनता विकास चाहती है जो सिर्फ भाजपा के कार्यकाल में ही सम्मभव हो पाया है और वहीं दूसरा पेतंरा कंेन्द्र सरकार के द्वारा गैस सिलेंडरों के दामों की वृद्वि करने पर भाजपा सरकार ने जनता को इड़क्शन चुल्हें का उपहार दें डाला पर जनता के निर्णय के आगे न विकास का नारा टिक पाया न इड़क्शन चूल्हे का उपहार। वहीं कांग्रेस सरकार ने भी भाजपा के शासन को बुरा औेर भ्रष्ट बताने और रियायती गैस सिलेडरों पर अपना दाव खेला था, जिसका जादु शायद चल भी गया।

प्रदेश में चाहे सरकार किसी की भी रहें विकास के नाम पर जनता से मजाक तो हर बार होता ही है ,और यही वजह है जो हर पांच साल बाद जनता इस उम्मीद में सतासीन सरकार को पलट कर दुसरी सरकार को इस आशा से चुनती है, कि शायद सता परिवर्तन से प्रदेश की स्थिति में भी परिवर्तन देखने को मिल सकें और इस बार भी जनता ने इसी उम्मीद से सता में परिवर्तन कर डाला है। पर अब देखना यही होगा की अब पांच साल प्रदेश की जनता को अपनी समस्याओं का कांग्रेस सरकार से समाधान मिलता है या फिर अगले पांच सालों तक जनता होगी गुमराह। सड़के होंगी बेहाल ,स्वास्थ्य सेवाओं के होगें खस्ता हाल ,फिर होगा बिजली ,पानी का रोना ,शिक्षा स्थिति में होगा गड़बड़ झोल , क्या लाखों बेरोजगारों का होगा बुरा हाल ,कितना और बोलबाला होगा भ्रष्टचार का, सम्मस्याए हर बार होती है आम पर इन पांच सालों में कांग्रेस के कार्यकाल मंे क्या मिलेगा सामाधान देखना बाकी है।

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