नौणी विवि के धौलाकुआं स्टेशन को मिला राष्ट्रीय स्तर का डेहलिया टेस्टिंग केंद्र का दर्जा

0
62
Dahlia in full bloom at RHRTS Dhaulakuan

सोलन-डॉ॰वाई॰एस॰ परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं को देश में डेहलियाफूल की टेस्टिंग का ‘लीड सेंटर’ (Lead centre of dahlia testing) के रूप में नामित किया गया है।

भारत सरकार के कृषिसहकारिता और किसान कल्याण विभाग के पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने धौलाकुआं अनुसंधान केंद्र को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर का ‘लीड सेंटर’ बनाया है जिससेआने वाले समय में राज्य में डेहलिया की खेती को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि यह पहली बार है किसी परियोजना के तहत इस फूल को विभिन्न क़िस्मों को हिमाचल में टेस्टिंग के लिए लाया गया है। स्टेशन पर चल रहे अनुसंधान से आने वाले समय में प्रदेश के किसानों के बीच डेहलिया की व्यावसायिक खेती को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी।

इस अनुसंधान केंद्र को फूलों पर शोध कार्य करते ज्यादा समय नहीं हुआ है। वर्ष 2012 में सजावटी पौधों पर काम शुरू किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र ने काफी प्रगति की है। पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने 2016-17 में 18 लाख रुपये की राशि की एक परियोजना इस केंद्र को स्वीकृत की थी। इसके तहत डेहलियाकेविभिन्न रंग, आकार और श्रेणियों की 50 से अधिककिस्में उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों से केंद्र पर लाई गई।

मुख्य अन्वेषकडॉ प्रियंका ठाकुर ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य डेहलियाका डी॰यू॰एस॰ टेस्टिंग (DUSTesting)के दिशा-निर्देशों का विकास और फूल कि विभिन्न प्रजातियों और कल्टीवार का मूल्यांकन करना है। रूपात्मक लक्षण वर्णन, डीयूएसपरीक्षण दिशानिर्देशों का विकास और स्टेशन पर डेहलिया के लिए डीयूएस केंद्र की स्थापना का कार्य वर्तमान में चल रहा है।

हिमाचल के किसान इस नई फसल को कट फ्लावर के साथ-साथ,पॉट प्लांट प्रोडक्शन के लिए भी अपना सकते हैंजो न केवल फसल विविधीकरण में मददगार होगा बल्कि प्रदेश कि अर्थव्यवस्था और किसानों कि आय बढ़ा सकती है। डेहलिया पॉट प्लांट प्रोडक्शन, बॉर्डर, मास प्लांटेशन और कट फ्लावर आदि के लिए उपयुक्त है। केंद्र द्वारा किए गए शोध में पाया है कि माटुंगिनी, मदर टेरेसा, सिस्टर निवेदिता, तेनजिन, सूर्यदेव, जिशु, गिलोडी, एसपी कमला जैसी किस्में निचली पहाड़ी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त पाई गई है। कट फ्लावर उत्पादन के लिए माटुंगिनी, जिशु, सोहिनी, ब्लैक इटरनिटी, सूर्यदेव, मां शारदा किस्में उपयुक्त पाए गए हैं।

डेहलिया’फूलों का राजा’ नाम से भी मशहूर है। पौधों की ऊँचाई विभिन्न क़िस्मों में अलग अलग पाई जाती है और दो इंच लॉलीपॉप शैली से लेकर विशाल 10-15 इंच ‘डिनर प्लेट’ स्टाइल के फूल 4-5 फीट की ऊंचाई तक बढ़ सकते हैं। फरवरी से मई माह तक यह फूल खिला रेहता है। किसान कटफ्लावर, गमले और लैंडस्केप पौधों और पौधों के उत्पादन से लाभांश कमा कर सकते हैं। नौणी विश्वविद्यालय के छात्र भी हिमाचल प्रदेश की निचली पहाड़ी परिस्थितियों के लिए डेहलिया की किस्मों के मूल्यांकन पर काम कर रहे हैं।

इस अवसर पर क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं के एसोशिएट डाइरेक्टर डॉ॰ ए॰के॰जोशी ने बताया कि डेहलिया परीक्षण के राष्ट्रीय स्तर के लीड सेंटर की मान्यता पाना एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह सर्दियों में खिलने वाला बहुत ही लोकप्रियऔर उपयोगी फूलहै।

डॉ॰ जोशी ने कहा कि इस मान्यता से अनुसंधान स्टेशन द्वारा किए जा रहे कार्यको देश में पहचान मिलने के साथ साथ राज्य में इस फूल की व्यावसायिक खेती को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्यमें और अधिक जर्मप्लाज्म भी स्टेशन पर जोड़ा जाएगा और किसानों को पौधों भीउपलब्ध होंगें। नौणी विवि के कुलपति डॉ॰ एचसी शर्मा और अनुसंधान निदेशक डॉ॰ जेएन शर्मा ने इस मौके पर वैज्ञानिकों को बधाई दी।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें