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शिमला मे पीलिया के 60 नए मामले, एक महिला की मौत, अआईजीएमसी व केएनएच ने साधी चुप्पी
शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है।
शिमला के निगम विहार की रहने वाली सुनीता (29) की मौत पीलिया से आईजीएमसी में हुई है। रिपोर्ट में हेपेटाईटिस ई होने का हवाला दिया गया है। आईजीएमसी में मंगलवार देर रात को सुनीता की मौत हुई है। सुनीता गर्भवती थी व उसका पति रॉबिन सिंह आठ जनवरी को उसे केएनएच में ले गया। वहां चिकित्सकों ने चेकअप करने पर बताया कि सुनीता को पीलिया है। ऐसे में प्रसव में काफी परेशानी हो सकती है। यहां तक कि मां या बच्चे में से एक की मौत भी हो सकती है। नौ जनवरी को सुबह छह बजे सुनीता ने बेटे को जन्म दिया व इसके बाद कोमा में चली गई।
10 जनवरी को केएनएच की चिकित्सकों ने सुनीता को आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। उसे आईसीयू में रखा गया। वह तीन दिन आईजीएमसी में रही। मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। वहीं बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बच्चे को पीलिया है या नहीं। इस मामले पर आईजीएमसी व केएनएच दोनों अस्तपाल प्रबंधनों ने चुप्पी साध ली है। हालांकि चिकित्सकों का तर्क है कि प्रसव के दौरान लीवर फेल होने से सुनीता की मौत हुई है मगर यह बात उसके परिजन मान नहीं रहे हैं।
पति रॉबिन सिंह ने कहा कि डॉक्टरों ने डिलीवरी के दौरान सुनीता को पीलिया की बीमारी बताई थी। उन्होंने बताया था कि नार्मल डिलीवरी के बाद सुनीता का लीवर खराब हो गया था। वहीं, वाल्मीकि महासभा के महासचिव ने कहा है कि रॉबिन सिंह गरीब परिवार से संबंध रखता है। उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। शहर में पीलिया काफी फैलता जा रहा है। इस पर रोकथाम जरूरी है।
अभी मैं बैठक में हूं। इस मामले में बाद में बात करता हूं।
डॉ. एलएस चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक,केएनएच
राजधानी शिमला में बुधवार को पीलिया के 60 नए मामले सामने आए। अकेले डीडीयू अस्पताल में पीलिया के 26 मामले सामने आए हैं। करीब 100 लोगों कें सैंपल लिए गए थे। इनमें से 60 सैंपल पॉजीटिव आए हैं।
पीलिया से शिमला शहर में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। प्रशासन अब तक पीलिया पर काबू पाने में नाकाम रहा है व अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। लैब्स के बाहर लोगों को टेस्ट करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लोग अब शिमला शहर का पानी पीने से भी डरने लगे हैं।
सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों से पानी पीने से शिमला के लोग परहेज कर रहे हैं। अस्पतालों में आए मरीज और तीमारदार अपने साथ पानी की बोतल साथ ला रहे हैं। शहर में पीलिया फैले को एक महीना होने को है। अश्वनि खड्ड से पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इसके बावजूद शहर में पीलिया के मामलों का आना चिंता का विषय है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजना राव ने बताया कि पीलिया के 60 नए मामले सामने आए हैं। लोगों को स्वच्छ और उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए।
शहर में नहीं हुआ अलर्ट जारी
हैरानी इस बात की है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया को लेकर कोई जागरूकता अभियान शहर में नहीं चलाया है। यहां तक कि शहर में कोई अलर्ट भी जारी नहीं किया है। लोगों को पीलिया से बचने के संबंध में उपाय भी नहीं बताए जा रहे हैं। वहीं अधिकारी कार्यालय में बैठ कर फाइलों को निपटाने में लगे हुए हैं। नगर निगम शहर के कुछ हिस्सों में जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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