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दिल्ली-हिमाचल पुलिस विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा – समन्वय से कार्य किया होता तो स्थिति पैदा ही नहीं होती
शिमला: शुक्रवार को दिल्ली पुलिस और हिमाचल पुलिस के बीच हुए विवाद मामले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस को किसी भी कार्रवाई से पहले हिमाचल पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पुलिस को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि बिना वर्दी, बिना सूचना और बिना समन्वय के किसी भी राज्य से लोगों को उठाकर ले जाना पूरी तरह अनुचित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के तहत सभी राज्यों को अपने अधिकार प्राप्त हैं और हिमाचल प्रदेश की अपनी संप्रभुता है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। बाहर से आने वाली कोई भी पुलिस एजेंसी अपनी मर्जी से हिमाचल से लोगों को नहीं ले जा सकती।
ट्रांजिट रिमांड दिखाने की मांग
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली पुलिस से ट्रांजिट रिमांड दिखाने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने संबंधित रिसॉर्ट से सीसीटीवी रिकॉर्ड भी लिया, लेकिन इसकी जानकारी रिसॉर्ट मालिक को नहीं दी गई। यदि दिल्ली पुलिस ने समन्वय से कार्य किया होता या हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को पूर्व सूचना दी होती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
भाजपा पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस मुद्दे पर भाजपा के रवैये को हिमाचल विरोधी करार देते हुए कहा कि जब हिमाचल पुलिस कानून के दायरे में रहकर बेहतर कार्य कर रही है, तब उसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते है। विपक्ष को समझना चाहिए कि यदि दूसरे राज्यों की पुलिस बिना प्रक्रिया अपनाए हिमाचल से लोगों को उठाकर ले जाएगी, तो राज्य पुलिस की भूमिका ही समाप्त हो जाएगी।
यह था पूरा मामला
दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित एएआई इंपैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। जानकारी के अनुसार, तीन युवा कार्यकर्ता शिमला के चिरगांव स्थित एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए थे।
सिविल कपड़ों में आई थी दिल्ली पुलिस
हिमाचल पुलिस के अनुसार, चांगुल रिज़ॉर्ट, चिरगांव से सूचना मिली कि कुछ लोग सिविल कपड़ों में रिज़ॉर्ट में ठहरे तीन व्यक्तियों को अपने साथ ले गए हैं। साथ ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिनमें एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी शामिल था, अपने साथ ले जाया गया। जिन गाड़ियों का उपयोग किया गया, वे हिमाचल के बाहर के पंजीकरण नंबर की थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और सोलन पुलिस के साथ समन्वय बनाकर शोगी, आईएसबीटी शिमला और धर्मपुर में संबंधित व्यक्तियों को इंटरसेप्ट किया। जांच में सामने आया कि यह समूह दिल्ली और हरियाणा पुलिस के कर्मियों का था, जो दिल्ली में दर्ज एक मामले के संबंध में इन तीन व्यक्तियों की तलाश कर रहा था।
शिमला पुलिस ने सभी संबंधित व्यक्तियों को स्थानीय सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत तीनों का रिपन अस्पताल, शिमला में मेडिकल परीक्षण करवाया गया। इसके बाद माननीय एसजेएम-II न्यायालय, शिमला द्वारा लगभग 18 घंटे का ट्रांजिट रिमांड स्वीकृत किया गया। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम को संबंधित व्यक्तियों के साथ दिल्ली जाने की अनुमति दी गई।
इस मामले में चांगुल रिज़ॉर्ट, चिरगांव के मालिक की शिकायत पर थाना चिरगांव में दिनांक 25 फरवरी 2026 को एफआईआर संख्या 18/2026 संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट किसी दल का नहीं, बल्कि देश की छवि से जुड़ा कार्यक्रम था, जिसे राजनीतिक साजिश का रूप दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी सरकारी संरक्षण में हिमाचल लाए गए और जब दिल्ली पुलिस कार्रवाई के लिए पहुंची, तो धर्मपुर में पुलिस टीम को ही डिटेन कर दिया गया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को निदंनीय बताते हुए कहा कि ऐसा प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है।
नरेश चौहान ने मामले को बताया गंभीर
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने किसी भी प्रकार का प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया, जो एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को कानून के तहत तीनों लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए था। हिमाचल पुलिस की टीमों ने उन्हें तय प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य किया, जिसमें गिरफ्तार व्यक्तियों का मेडिकल परीक्षण और ट्रांजिट रिमांड शामिल था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरीके से दिल्ली पुलिस कार्य करना चाहती थी, वह पूरी तरह गलत था।
साथ ही उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष पहले स्वयं मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसके बावजूद उनका दिल्ली पुलिस के पक्ष में खड़ा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पहले यह देखना चाहिए था कि बाहरी राज्य की पुलिस ने कानून और तय नियमों का पालन किया था।
उन्होंने कहा कि एक उदाहरण सेट होना चाहिए कि जब आप दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो आपको पूरे नियम और कानून का दायरा फॉलो करना चाहिए।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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