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एमसी में घोटाला, फोन पर तय हुआ कहां लगेंगी स्ट्रीट लाइटें!
शिमला- सरकार में ऊंची पहुंच रखने वाले कुछ प्रभावशाली लोगों के फोन पर ही नगर निगम ने शहर में नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए स्थान चिन्हित कर दिए। स्ट्रीट लाइटों के गड़बड़झाले की जांच में यह बात सामने आई है। सूची में नजर दौड़ाई जाए तो यह बात खुद ही साफ हो जाएगी की लाइटें लगाने के लिए फील्ड सर्वे करने की जहमत तक नहीं उठाई गई।
तत्कालीन अधिकारी या कर्मचारी अगर यह कहते हैं कि उन्होंने फील्ड सर्वे किया था तो वह यह जवाब नहीं दे पाएंगे कि फिर उन्होंने एक ही जगह चार से पांच लाइटों के प्वाइंट कैसे दर्शा रखे हैं। हैरत इस बात की है कि ढली में एक ही जगह 18 और विकासनगर में एक निजी अस्पताल के आसपास स्ट्रीट लाइटों के 21 प्वाइंटों की दरकार सूची में दिखा रखी है। हाउस में मामला उठने के बाद इस पूरे मामले की अब जांच शुरू हो गई है।
इसके साथ ही लाइटें लगाने का काम भी रोक दिया है। कायदे कानूनों को ताक पर रखकर नगर निगम ने नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए 112 स्थानों की सूची तैयार की थी। इसमें से 47 जगह स्ट्रीट लाइटें लगा भी दी हैं। नगर निगम में 2012 से स्ट्रीट लाइटें लगाने के काम पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। अब मेयर संजय चौहान के आदेशों पर निगम प्रबंधन ने स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए बनाई सूची की जांच शुरू कर दी है।
जांच रिपोर्ट इस माह के अंत में होेने वाले नगर निगम के मासिक हाउस में रखी जानी है। मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस की अनुमति के बगैर ही नई स्ट्रीट लाइटों पर दो करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। शहर के जिन इलाकों में सालों से अंधेरा पसरा है वहां रोशनी की कोई उम्मीद नहीं दिख रही और जो इलाके पहले से रोशन हैं उन्हें नगर निगम जगमग करने की कोशिशों में लगा है।
स्ट्रीट लाइटें लगाने में इस कदर लापरवाही बरती है कि शहर के कुछ क्षेत्रों में ऊपर हाई मास्ट लाइट लगा दी हैं और नीचे स्ट्रीट लाइट सोडियम लैंप लगा लगे हैं। 112 में से 47 स्थानों पर नगर निगम नई स्ट्रीट लाइटें लगा चुका है।
निगम के सहायक आयुक्त को जांच अधिकारी बनाया है। इस हाउस में सहायक आयुक्त अपनी रिपोर्ट रखेंगे। हाउस में चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
– संजय चौहान मेयर, एमसी शिमला
एक माह में मांगी है रिपोर्ट- निगम महापौर संजय चौहान ने स्ट्रीट लाइट फर्जीवाड़े की जांच का जिम्मा निगम सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक को सौंपा था। स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए किस आधार पर प्राथमिकता तय की गई इसकी जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
एमसी हाउस में पार्षदों ने उठाया था मामला- एमसी के पिछले हाउस में पार्षदों ने स्ट्रीट लाइटों का मामला उठाया था। जाखू वार्ड से पार्षद मनोज कुठियाला के सवाल के जवाब में नगर निगम की ओर से दिए विवरण से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। निगम पार्षद शैलेंद्र चौहान, कुसुम ठाकुर, सरोज ठाकुर, रजनी सिंह, कांता स्याल, कल्याण चंद और भारती सूद ने पार्षद प्राथमिकता को दरकिनार कर मनमाने तरीके से स्ट्रीट लाइट प्वाइंट चिन्हित करने पर सवाल उठाए।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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