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शिमला में पीलिया का प्रकोप जारी प्रतिदिन आ रहे 25 मामले, सोलन व मंडी में भी गिरफ्त में
शिमला- प्रदेश में हुई बर्फबारी और बारिश से बागवानों व किसानों को भले राहत मिली है मगर पीलिया के वायरस पर तापमान में कमी के कारण कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस कम तापमान में अधिक फैलता है और उच्च तापमान का प्रभाव इस पर सीधा पड़ता है। लिहाजा बारिश और बर्फबारी के बीच लोगों को सेहत संभालने की अधिक आवश्यकता है। एहतियात के तौर पर जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे फिलहाल बनाए रखें।
आईजीएमसी अस्पताल शिमला के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कांगा ने कहा कि लोग पीलिया के प्रबंधों पर सुस्त न हों। प्रदेश में अब तक स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पीलिया पीड़ितों की संख्या 1300 के पार हो गई है। प्रतिदिन अब 25 के आसपास मामले अकेले शिमला से सामने आ रहे हैं। दूसरे जिले सोलन व मंडी में भी पीलिया का प्रकोप जारी है। श्वास से संबंधित बीमारियों पर ही मौसम को लेकर असर पड़ता है। गला खराब, बुखार व जुकाम बीमारियां ही मौसम के बरसने से खत्म होती हैं मगर पीलिया पर लगाम इसके परिणामस्वरूप नहीं लगेगी।
संभल कर रहें लोग
स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि इस मौसम की कोई गारंटी नहीं है कि पीलिया का वायरस नष्ट हो जाएगा। इस मौसम का पीलिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए लोग संभल कर रहें।
ब्यास में घूल रही डंपिंग साइट की गंदगी
मनाली चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंडी शहर से करीब चार किलोमीटर दूर क्वारी से एक संपर्क मार्ग मंडी नगर परिषद की डंपिंग साइट की ओर जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 50 मीटर ऊपर की ओर यह साइट स्थित है। साइट में तीन ओर पहाड़ हैं। जबकि चौथी दिशा ब्यास नदी की ओर खुलती है। पिछले करीब दो दशक से इस जगह पर नगर परिषद की ओर से एकत्र की जाने वाली गंदगी खुले क्षेत्र में फेंक दी जाती है। इस गंदगी को अकसर नगर परिषद की ओर से आग लगा दी जाती है।
इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को विषैले धुंए का कोप भाजन बनना पड़ता है। डंपिंग साइट में सभी तरह का कूड़ा कर्कट फेंका जाता है। इसमें एक्सपायर दवाइयां भी शामिल रहती हैं। कई बार मृत पशु भी यहीं फेंक दिए जाते हैं। अकसर यहां पर लावारिस पशु गंदगी में जुगाली करते देखे जा सकते हैं। गर्मियों में यहां से उठने वाली दुर्गंध राष्ट्रीय राजमार्ग व नजदीकी गांवों तक फैल जाती है। यहां से गुजरते समय जब दुर्गंध के झोंकों की मार सहनी पड़ती है तब इसका अहसास होता है कि नजदीक ही डं¨पग साइट है।
बारिश में साइट के तीन ओर स्थित पहाड़ों की ढलानों के पानी का प्रवाह नाला बनकर साइट में आता है और वहां पड़ी सभी तरह की गंदगी को एक नाली के रास्ते से ब्यास नदीं में धकेल देता है। डंपिंग साइट से कितनी ज्यादा गंदगी ब्यास नदी में पहुंचती है इसका अनुमान उस नाली को देखकर लगाया जा सकता है जो गंदगी के अरक से पीले रंग की हो गई है। यही गंदगी ब्यास नदी में मिल कर इसकी धारा को जहरीला बना देती है।
कुछ दूरी के बाद ब्यास का यही पानी मंडी शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए लिफ्ट किया जाता है। जिसे आईपीएच विभाग की ओर से मंडी के घर-घर में नलों के माध्यम से लोगों को मुहैया करवाया जाता है। कमोवेश यही स्थिति सुंदरनगर में हैं। यहां चांदपुर की डं¨पग साइट भी पूरी तरह से लबालब भर चुकी है। डंपिंग साइट की गंदगी सीधे सुकेती ख्खड्ड में जाकर मिल रही है।
क्या कहना है नगर परिषद का
नगर परिषद मंडी व सुंदरनगर की कार्यकारी अधिकारी उर्वशी वालिया का कहना है कि डंपिंग साइट से गारबेज का पानी ब्यास नदी में नहीं जाता बल्कि वहां स्थित एक पानी के सोर्स से नाली में पानी जाता है। डंपिंग साइट में लावारिस पशु न जाएं इसके लिए यहां पर फेंसिंग करवाई जा रही है और साइट को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यहां पर प्लेटफार्म और एंटी ली¨चग चेंबर बनाए गए हैं। डंपिंग साइट के चारों ओर नाली बनाई गई है। ब्यास नदी में जाने वाली गंदगी को रोकने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
डंपिंग साइट से गंदगी का हो रहा रिसाव
मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष का कहना है कि डंपिंग साइट से गंदगी का रिसाव लगातार जारी रहता है, जो नाली से बहकर सारा साल ब्यास में मिलता है। इससे ब्यास दूषित हो रही है।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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