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एनएसयूआई और एसएफआई ने पीएचडी (PhD) प्रवेश घोटाले को लेकर किया धरना प्रदर्शन, राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन

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NSUI and SFI hpu protest

शिमला– हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एनएसयूआई (NSUI) इकाई ने आज विश्वविद्यालय में पीएचडी में अवैध प्रवेश को लेकर राज्यपाल के काफिले के सामने नारेबाजी कर के विरोध जताया, क्योंकि कुछ दिनों पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० सिकंदर कुमार और उनके प्रशासन के द्वारा हिमाचल विश्वविद्यालय में पीएचडी में अयोग्य लोगों को विश्वविद्यालय के नियमों को ताक पे रखकर प्रवेश दिया गया।

एनएसयूआई ने कहा कि विश्वविद्यालय के द्वारा 21 अगस्त को आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय के प्रोफेसरों के परिवार के सदस्यों को पीएचडी में सीधे दाखिले देने का प्रस्ताव पास किया गया और इस प्रस्ताव के तहत विश्विद्यालय में नेट, जेआरएफ पास न करने पर भी कुलपति, यूआईआईटी (UIIT) के निदेशक, डीन प्लानिंग एंड डेवलोपमेन्ट के बच्चों को सीधे पीएचडी में प्रवेश दे दिया गया है।

एनएसयूआई ने कहा कि यह विश्विद्यालय के छात्रों के साथ धोखाधड़ी है और प्रदेश विश्वविद्यालय की गुणवत्ता पे बहुत बड़ा हमला है। इसी संदर्भ में एनएसयूआई ने  राज्पाल को ज्ञापन दिया है। एनएसयूआई ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हे आश्वासन दिया कि छात्र राजभवन में आये और वहां पे इस विषय पे चर्चा की जाएगी और इसका समाधान किया जाएगा।

एसएफआई ने राज्यपाल को सौंपा मांग पत्र

विश्वविद्यालय के अंदर हुए पीएचडी (PhD) घोटाले को लेकर एक बार फिर से SFI ने प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिसर सचिव रौकी ने विश्वविद्यालय में हुई हाल ही में पीएचडी (PhD) भर्ती पर आपत्ति जताते हुए इसे अध्यादेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की अवहेलना बताया।

सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मात्र अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की धांधलियां पीएचडी के अंदर कर रहा है। विश्वविद्यालय में जो भी दाखिलें पीएचडी के अंदर हुए हैं, वह यूजीसी और विश्वविद्यालय के अध्यादेश के नियमों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा अपने फायदे के लिए किए गए हैं।

रॉकी ने कहा कि कार्यकारी परिषद (EC) में तय किया गया कि हाल ही में जिन प्रोफेसरों की भर्तियां हुई है और जिन अध्यापकों की पीएचडी पूरी नहीं हुई है। वह  पीएचडी में दाखिला बिना किसी प्रवेश परीक्षा के ले सकते हैं। उनके लिए कार्यकारी परिषद के अंदर एक सुपरन्यूमैरेरी सीट का प्रस्ताव पास किया गया। एसएफआई (SFI) ने कहा है कि यदि इस तरह की सुपरन्यूमैरेरी सीट विश्वविद्यालय प्रशासन रख रहा है, तो इसमें जितने भी प्राध्यापक कॉलेजों और विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ाते हैं, उन्हें समान अवसर का मौका मिलना चाहिए, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया।

रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश की सरकार अपने चहेतों की भर्तियां पीएचडी के अंदर करवाना चाहती है और इस विश्वविद्यालय को एक विशेष विचारधारा का अड्डा बनाना चाहती है। एसएफआई (SFI) ने सवाल उठाया है कि अगर एक छात्र पीएचडी में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर सकता है तो एक अध्यापक क्यों नहीं?

रौकी ने आरोप लगाया है कि वाइस चांसलर ने कहीं ना कहीं अपने बेटे का फर्जी दाखिला पीएचडी (PhD) के अंदर प्रदेश सरकार की पूरी शय के तहत किया है, क्योंकि जब कार्यकारी परिषद (EC) के द्वारा इस कोटे के तहत यह सीटें निकाली गई, तो इन सीटों को विज्ञापित भी नही किया गया और न ही प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया।

रौकी ने बताया कि विश्वविद्यालय के अंदर दीनदयाल उपाध्याय नाम से एक पीठ का गठन किया गया है, जिसके अंदर डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है पर इसकी  अपनी कोई मास्टर डिग्री नहीं है। रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अयोग्य लोगों को भर्ती करने के लिए इस पीठ में पीएचडी का प्रावधान किया। अब सवाल यह है कि जिस पीठ की मास्टर डिग्री ही नहीं है वह पीएचडी कैसे करवा रही है।

रॉकी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के अंदर यह होता आ रहा है कि जितनी सीटें पीएचडी के लिए विज्ञापित की जाती हैं उससे ज्यादा भर्तियां की जा रही हैं।
डीडीयू के अंदर भी इसी तरह की धांधली सामने आई थी, जिसमें पहले पाँच सीटों को विज्ञापित किया गया था परंतु अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आठ और लोगों को एडमिशन पीएचडी के अंदर दिलाई गई।

एसएफआई ने आरोप लगाए हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन तथा कुलपति प्रदेश सरकार और आरएसएस के इशारे पर इस विश्वविद्यालय के अंदर नियमों को दरकिनार करते हुए, एक विशेष विचारधारा को इस विश्वविद्यालय के अंदर आरक्षण दे रही है, फिर चाहे किसी भी नियम को ताक पर रखना हों।

एसएफआई ने अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल को भी मांग पत्र सौंपा और इस मामले की न्यायिक जांच करने की मांग की। एसएफआई ने मांग की है कि जो दोषी अधिकारी इसमें शामिल है, उन पर कड़ी कारवाई की जाए।

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HP University में हॉस्टलों की स्थिति खराब, कमरों में सीलन, शौचालय जर्जर, मरमम्त के नाम पर कई सालों से बंद पड़े है हॉस्टल

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शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे है। हॉस्टलों की हालत दयनीय बनी हुई है और लंबे समय से मरम्मत कार्य के नाम पर बंद पड़े है।

श्रीखंड हॉस्टल 2 सालों से बंद

पिछले दो वर्षों से श्रीखंड हॉस्टल बंद होने के कारण सैंकड़ों विद्यार्थियों को आवास की समस्या से जूझना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि हर वर्ष हॉस्टलों की सीमित उपल्बधता के कारण विद्यार्थियों को मंहगे किराए के मकानों में रहना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय

छात्रों का कहना है कि एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। कई कमरों में सीलन, टूटे दरवाजे-खिड़कियां, खराब विद्युत व्यवस्था और जर्जर शौचालयों जैसी गंभीर समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं, जिससे छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इन समस्याओं को लेकर आज एक छात्र संगठन ने चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक बार फिर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि हॉस्टलों के लिए अलग से बजट बनाकर जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। साथ ही मरम्मत कार्य की स्पष्ट समय-सीमा तय कर उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि आगामी सत्र से पहले हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके। संगठन ने यह भी मांग रखी कि छात्र प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो मरम्मत कार्य की निगरानी करेगी, ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

जिम उपकरण और मशीनें भी खराब

इसके अलावा संगठन ने बताया कि हॉस्टलों में जिम उपकरण और मशीनें भी खराब पड़ी है, जो उपयोग योग्य नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से नए उपकण उपल्बध करवाने और पुराने उपकरणों को जल्द ठीक करवाने की मांग की है। वहीं, चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने आश्वासन देते हुए कहा कि मांगो पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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HP University: 8 से सिर्फ 3 रह गई बसें, छात्रावासों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी

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शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। विश्वविद्यालय में बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पहले जहां आठ बसें सुविधा के लिए उपलब्ध थीं, वहीं वर्तमान में केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों को रोजाना आने – जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को समय पर कक्षाओं में पहुंचने में बाधा आ रही है, जिससे उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

इन्ही समस्याओं को लेकर छात्र संगठन ने वित्त विभाग के अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। छात्रों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से नई बसों की खरीद की जाए , साथ ही बसों की नियमित मेंटेनेंस और समय सारणी को सुव्यवस्थित किया जाए , ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके। इसके साथ ही छात्र संगठन ने ज्ञापन में वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक करने और छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि के विवरण की भी मांग की है।

वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक की जाए

संगठन की मांग है कि, 10 दिसंबर 2025 को हुई विश्वविद्यालय वित्त समिति की बैठक की कार्यवाही को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए। विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों और निर्णयों का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वित्त समिति में लिए गए निर्णयों, स्वीकृत बजट, व्यय और प्रस्तावों की जानकारी पारदर्शी तरीके से छात्रों और शिक्षकों के समक्ष लाई जाए। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर वित्त समिति की कार्यवाही अपलोड करने की भी मांग की है।

छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि का विवरण

संगठन ने वित्त अधिकारी से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि लड़के और लड़कियों के छात्रावासों के नवीनीकरण के लिए कुल कितनी राशि आवंटित की गई है और अब तक उस राशि में से कितना व्यय किया जा चुका है। छात्रों का आरोप है कि छात्रावासों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे – शौचालयों की मरम्मत, विद्युत व्यवस्था और कमरों की मरम्मत की आवश्यकता है। संगठन का कहना है छात्र-छात्राओं ने कईं बार इन समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है।

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HP University में कार्यरत सहायक प्रोफेसर की 12वीं की मार्कशीट फर्जी, एफआईआर दर्ज

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HPU

शिमला :  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नियुक्त एक सहायक प्रोफेसर के शैक्षणिक प्रमाणपत्र कथित रुप से फर्जी पाए जाने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान सिंह सागर ने पुलिस थाना बालूगंज में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि लोक प्रशासन विभाग में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर विजय सिंह को 28 सितम्बर, 2024 को जारी नियुक्ति पत्र के आधार पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के समय संबंधित व्यक्ति ने अपने शैक्षणिक दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा करवाए थे, जिनमें स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल थे।

जांच पर 12वीं की मार्कशीट निकली फर्जी 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 फरवरी 2025 को जब दस्तावेजों को स्कूल शिक्षा बोर्ड से सत्यापित कराया तो 12वीं की मार्कशीट फर्जी निकली और बोर्ड के रिकॉर्ड में ऐसे प्रमाणपत्रों का कोई उल्लेख नहीं मिला। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहायक प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन प्रोफेसर की तरफ से संतोषजनक जवाब न मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ बालूगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

मामले में जांच जारी

एसएसपी शिमला गौरव ने बताया की मामले में जांच शुरु कर दी गई है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार दस्तावेजों की सत्यता, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार किए गए थे और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी की भी भूमिका रही है।

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