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डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार

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UHF nauni's new VC Dr Parvinder Kaushal

सोलन- डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे।

हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी विवि के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। उन्होनें अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है जिसके बादफ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

डॉ कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण,अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएँ दी। इनमें से प्रमुख हैं, इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांचीमें वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के रूप डॉ कौशल ने कई वर्षो तक कार्य किया।

UHF Nauni's New VC

डॉ कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं। उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार द्वारा भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी। इसके अलावा,उन्होंने फ्रांस, इटली, यूनाइटेड किंगडम, मैक्सिको, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, यूगोस्लाविया, बेल्जियम, हॉलैंड, स्पेन, एस्टोनिया, कनाडा, फिनलैंड, तुर्की, मलेशिया और श्रीलंका सहित कई देशों का दौरा किया है।

डॉ परविंदर कौशल ने विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों और समूहों के सदस्य के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख हैं क्षेत्रीय डीन समिति दक्षिण एशिया (2009); कृषि विज्ञान में पीजी पाठ्यक्रम की समीक्षा और पुनर्गठन के लिए नेशनल कोर ग्रुप (आईसीएआर) के सदस्य; आईसीएआर की वानिकी में ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया कमेटी (BSMA)के संयोजक (2007); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरल रेसिंस अँड गम्स के लिए क्विनक्वीनियल रिव्यू टीम (QRT) के सदस्य(2001-2007);शेर-ए-कशमीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की मान्यता के लिए पीयर रिव्यू टीम (आईसीएआर प्रत्यायन बोर्ड) के सदस्य(2008); यूजीसी की कृषि,बागवानी और वानिकी,पर्यावरण,कौशल विकास आदि पर विभिन्नविशेषज्ञ समितियों के सदस्य (2013-2016);आईसीएआर-केंद्रीय कृषि-वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित सदस्य अनुसंधान सलाहकार समितिके सदस्य (2015-17)। डॉ कौशल ने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (IUFRO)के रिसर्च ग्रुप ‘फॉरेस्ट स्टैंड एस्टेब्लिशमेंट ऑपरेशंस एंड टेक्नीक्स’के डिप्टी लीडर(2000-05)के रूप में भी काम किया है। वह वृक्षारोपण प्रतिष्ठान (1990-2000) पर IUFROवर्किंग पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।

इस अवसर पर डॉ कौशल ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रीमण्डल का धन्यवाद किया। उन्होनें कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि नौणी विश्वविद्यालय को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके।

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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nauni university himachal pradesh

शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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