कैम्पस वॉच
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले 2 सालों से बंद है 24×7 लाइब्रेरी
शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों को लेकर पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन किया। एसएफआई इकाई के पवन ने इस धरने प्रदर्शन में बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पिछले 2 सालों से 24 घंटे चलने वाली लाइब्रेरी बंद है। विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं लेकिन विश्वविद्यालय की मुख्य लाइब्रेरी के 24×7 सेक्शन को अभी तक नहीं खोला गया है।
उन्होंने कहा कि एसएफआई के आंदोलन के चलते लाइब्रेरी को छात्रों के लिए सुबह 9:00 बजे से शाम 9:00 तक तो खोल दिया गया है। लेकिन छात्र यह मांग कर रहे हैं कि इसे 24 घंटे खुला रखा जाए ताकि जो विद्यार्थी दिन में किसी न किसी कारण अपनी पढ़ाई नही कर पाते हैं वो रात को लाइब्रेरी में बैठ कर अपनी पढ़ाई कर सकें। एसएफआई इकाई ने ये भी कहा कि इसके अलावा जो शोधार्थी दिन भर अपने शोध का कार्य कर रहे होते हैं वो भी रात में अपनी पढ़ाई कर सकते हैं।
पवन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 24×7 सेक्शन को न खोलने से छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है । इस विश्वविद्यालय में ऐसे भी छात्र पढ़ते हैं जो दिन भर मेहनत करते हैं और रात को अपनी पढ़ाई के लिए समय देते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे मेहनती छात्रों के लिए 24×7 लाइब्रेरी को न खोल कर इन छात्रों को पढ़ाई से महरूम कर रहा है।
अपनी दूसरी महत्वपूर्ण मांग को रखते हुए एसएफआई इकाई ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यूजीसी की गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए अपने चहेतों की पीएचडी के अंदर एडमिशन बिना प्रवेश परीक्षा के करवाई है वह भी न्याय संगत नहीं है। एसएफआई ने कहा कि वे जानते हैं कि जब भी विश्वविद्यालय के अंदर पीएचडी में डायरेक्ट एडमिशन होती हैं तो उसके लिए छात्रों को जेआरएफ क्वालीफाई करना पड़ता है। इसके अलावा दूसरा कोई भी रास्ता पीएचडी के अंदर प्रवेश लेने के लिए नहीं है लेकिन जब आम छात्रों द्वारा प्रशासन से इस पर जवाब मांगा जाता है तो प्रशासन द्वारा ईसी (EC) की मीटिंग का हवाला देते हुए कहा जाता है कि यह फैसला ईसी (EC) द्वारा पास किया गया है।
एसएफआई ने कहा कि वीसी इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि उनका इस विश्वविद्यालय के अंदर वीसी के पद पर यह अंतिम वर्ष है तो वे किसी तरह अपने चहेतों को इस विश्वविद्यालय के अंदर पिछले दरवाजे से उन्हें लाना चाहते हैं। इसका भी उनके पास अंतिम अवसर है ।
एसएफआई ने कहा कि पीएचडी के अंदर जो एडमिशन होगी वह एचपीयू वार्ड के उन कर्मचारियों के बच्चों की होगी जो निम्न वर्ग से संबंध रखते हैं लेकिन जब हम एडमिशन के लिए चुने गए लोगों के नाम देखते हैं तो पता चलता है कि उसके अंदर जो पहली एडमिशन होती है वह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के बेटे की है। इसके अलावा जो दो एडमिशन होती हैं वह एक डायरेक्टर की बेटी की और एक डीन के बेटे की होती है।
एसएफआई ने कहा कि वे यह मांग कर रहे हैं यदि आप पीएचडी के अंदर एडमिशन करवाना चाहते हैं तो जो नियम यूजीसी द्वारा निर्धारित किए गए हैं उन नियमों के आधार पर ही पीएचडी के अंदर एडमिशन होनी चाहिए परंतु यहां यह हो रहा है की जो लोग दिन रात लाइब्रेरी के अंदर पढ़ाई करते हैं उन लोगों से समान अवसर का अधिकार छीना जा रहा है जो कि कतई उचित नहीं है एसएफआई यह मांग कर रही है की जितनी भी एडमिशन बिना प्रवेश परीक्षा के विश्वविद्यालय के अंदर की जा रही हैं उनको वापस लेना होगा और यदि पीएचडी के अंदर एडमिशंस होगी तो उसका आधार प्रवेश परीक्षा होगा।
एसएफआई ने अपनी तीसरी मुख्य मांग को सामने रखते हुए कहा कि जिस तरह से यूनिवर्सिटी अथॉरिटी द्वारा विश्वविद्यालय के अंदर प्राइवेटाइजेशन की मुहिम चलाई गई है उसे बंद किया जाना चाहिए ।
एसएफआई ने कहा कि तमाम लोग जानते हैं कि पिछले लंबे समय से कैफेटेरिया एरिया को बंद रखा गया है जहां पर छात्रों को कम मूल्य पर भोजन मिलता था।प्रशासन द्वारा कैफेटेरिया को ना खोल कर विश्वविद्यालय के अंदर नेसकैफे और कामधेनु जैसी निजी दुकानों को खोला जा रहा है। जहां पर यदि मूल्यों की बात करें तो मूल्य आसमान छू रहे हैं, मूल्यों की बात करें तो एक चाय 20 रुपए तो एक परांठे का मूल्य 60 रुपए है।
एसएफआई ने कहा कि एक और तो बात की जाती है कि यूनिवर्सिटी के अंदर सब्सिडाइज शिक्षा छात्रों को दी जानी चाहिए और दूसरी और हमारे शिक्षण संस्थान का निजीकरण जोरो से किया जा रहा है। एसएसआई ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि यह जितनी भी दुकाने विश्वविद्यालय के अंदर खोली गई है या तो यह विश्वविद्यालय के नियमों के तहत चलनी चाहिए, नहीं तो इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई के मुकेश ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन का इन मांगों को लेकर एक नकारात्मक रवैया रहा है एसएफआई पहले भी इन मांगों को प्रमुखता से उठा चुकी है। यदि जल्द छात्र मांगों के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया गया तो आने वाले समय में एसएफआई विश्वविद्यालय के अंदर उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन स्वयं होगा।
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HP University में हॉस्टलों की स्थिति खराब, कमरों में सीलन, शौचालय जर्जर, मरमम्त के नाम पर कई सालों से बंद पड़े है हॉस्टल
शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे है। हॉस्टलों की हालत दयनीय बनी हुई है और लंबे समय से मरम्मत कार्य के नाम पर बंद पड़े है।
श्रीखंड हॉस्टल 2 सालों से बंद
पिछले दो वर्षों से श्रीखंड हॉस्टल बंद होने के कारण सैंकड़ों विद्यार्थियों को आवास की समस्या से जूझना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि हर वर्ष हॉस्टलों की सीमित उपल्बधता के कारण विद्यार्थियों को मंहगे किराए के मकानों में रहना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय
छात्रों का कहना है कि एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। कई कमरों में सीलन, टूटे दरवाजे-खिड़कियां, खराब विद्युत व्यवस्था और जर्जर शौचालयों जैसी गंभीर समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं, जिससे छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन समस्याओं को लेकर आज एक छात्र संगठन ने चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक बार फिर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि हॉस्टलों के लिए अलग से बजट बनाकर जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। साथ ही मरम्मत कार्य की स्पष्ट समय-सीमा तय कर उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि आगामी सत्र से पहले हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके। संगठन ने यह भी मांग रखी कि छात्र प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो मरम्मत कार्य की निगरानी करेगी, ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
जिम उपकरण और मशीनें भी खराब
इसके अलावा संगठन ने बताया कि हॉस्टलों में जिम उपकरण और मशीनें भी खराब पड़ी है, जो उपयोग योग्य नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से नए उपकण उपल्बध करवाने और पुराने उपकरणों को जल्द ठीक करवाने की मांग की है। वहीं, चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने आश्वासन देते हुए कहा कि मांगो पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कैम्पस वॉच
HP University: 8 से सिर्फ 3 रह गई बसें, छात्रावासों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी
शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। विश्वविद्यालय में बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पहले जहां आठ बसें सुविधा के लिए उपलब्ध थीं, वहीं वर्तमान में केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों को रोजाना आने – जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को समय पर कक्षाओं में पहुंचने में बाधा आ रही है, जिससे उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
इन्ही समस्याओं को लेकर छात्र संगठन ने वित्त विभाग के अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। छात्रों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से नई बसों की खरीद की जाए , साथ ही बसों की नियमित मेंटेनेंस और समय सारणी को सुव्यवस्थित किया जाए , ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके। इसके साथ ही छात्र संगठन ने ज्ञापन में वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक करने और छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि के विवरण की भी मांग की है।
वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक की जाए
संगठन की मांग है कि, 10 दिसंबर 2025 को हुई विश्वविद्यालय वित्त समिति की बैठक की कार्यवाही को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए। विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों और निर्णयों का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वित्त समिति में लिए गए निर्णयों, स्वीकृत बजट, व्यय और प्रस्तावों की जानकारी पारदर्शी तरीके से छात्रों और शिक्षकों के समक्ष लाई जाए। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर वित्त समिति की कार्यवाही अपलोड करने की भी मांग की है।
छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि का विवरण
संगठन ने वित्त अधिकारी से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि लड़के और लड़कियों के छात्रावासों के नवीनीकरण के लिए कुल कितनी राशि आवंटित की गई है और अब तक उस राशि में से कितना व्यय किया जा चुका है। छात्रों का आरोप है कि छात्रावासों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे – शौचालयों की मरम्मत, विद्युत व्यवस्था और कमरों की मरम्मत की आवश्यकता है। संगठन का कहना है छात्र-छात्राओं ने कईं बार इन समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है।
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HP University में कार्यरत सहायक प्रोफेसर की 12वीं की मार्कशीट फर्जी, एफआईआर दर्ज
शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नियुक्त एक सहायक प्रोफेसर के शैक्षणिक प्रमाणपत्र कथित रुप से फर्जी पाए जाने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान सिंह सागर ने पुलिस थाना बालूगंज में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि लोक प्रशासन विभाग में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर विजय सिंह को 28 सितम्बर, 2024 को जारी नियुक्ति पत्र के आधार पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के समय संबंधित व्यक्ति ने अपने शैक्षणिक दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा करवाए थे, जिनमें स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल थे।
जांच पर 12वीं की मार्कशीट निकली फर्जी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 फरवरी 2025 को जब दस्तावेजों को स्कूल शिक्षा बोर्ड से सत्यापित कराया तो 12वीं की मार्कशीट फर्जी निकली और बोर्ड के रिकॉर्ड में ऐसे प्रमाणपत्रों का कोई उल्लेख नहीं मिला। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहायक प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन प्रोफेसर की तरफ से संतोषजनक जवाब न मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ बालूगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
मामले में जांच जारी
एसएसपी शिमला गौरव ने बताया की मामले में जांच शुरु कर दी गई है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार दस्तावेजों की सत्यता, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार किए गए थे और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी की भी भूमिका रही है।
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