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केंद्र व प्रदेश सरकार दलित विरोधी, मनुवाद के विचार को लेकर बढ़ रही आगे: सुभाषिनी अली
शिमला-दलित शोषण मुक्ति मंच का राज्य स्तरीय सेमिनार भारतीय संविधान और मनुस्मृति की चुनौतियों के विषय पर शिमला के कालीबाड़ी हॉल में रविवार को सम्पन हुआ। मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषणी अली ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के अंदर जो संविधान पर हमले हो रहे है उससे हिमाचल प्रदेश भी अछूता नही है। उन्होंने कहा कि आज देश के अन्दर सरकार मनुवाद के विचार को लेकर आगे बढ़ रही है जिसके लिए सरकार संविधान को दरकिनार कर रही है।
सुभाषिनी अली ने कहा कि आज देश मे जंहा एक तरफ आरक्षण को खत्म करने और एट्रोसिटी एक्ट को खत्म करने की बात हो रही है वंही आज भी देश मे किसी की हत्या हो जाती है तो सबसे पहले मरने वालों और मारने वालों की जाति पूछी जाती है और उसके आधार पर कानून व्यवस्था इस आधार पर काम करती है।
उन्होंने संविधान के मूल्यों की रक्षा करने, संविधान की प्रस्तावना को सभी कार्यालयों में स्थापित करने, दलितों पर बढ़ते हमलों को रोकने, अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून को सख्ती से लागू करने, निजी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था लागू करने, सरकारी नौकरियों में नियमित भर्तियां करने व आरक्षण व्यवस्था लागू करने, दलितों के रिक्त पदों को तुरन्त भरने तथा अनुसूचित जाति, जनजाति उप योजना के बजट को दलितों के विकास के लिए खर्च करने व इसके दुरुपयोग को रोकने आदि मुद्दों पर अपनी बात रखी।
उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगते हुए कहा कि आज संविधान को चुनौती देते हुए एक तबका सरेआम आरक्षण व अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून की शवयात्रा निकाल रहा है व सरकार द्वारा इसकी इज़ाज़त देकर संविधान की हत्या कर रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में देश व प्रदेश में दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। उन पर शारीरिक हमले बढ़े हैं। उनकी हत्याएं तक हुई हैं। इस दौर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता थी परन्तु इस कानून को सरकार ने कमज़ोर करने की निरन्तर कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी दलितों पर उत्पीड़न व हमलों की घटनाओं में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। प्रदेश सरकार इन हमलों व उत्पीड़न पर खामोश रही है। हिमाचल प्रदेश के अन्दर जहां आज जाति के नाम पर ध्रुवीकरण किया जा रहा है उसके लिए हिमाचल सरकार जिमेवार है क्योंकि या तो सरकार स्थिति को संभाल नही पा रही है या फिर अपनी नाकामियां छुपाने के लिए ये सब कर रही है।
दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक जगत राम एवं सह संयोजक आशीष कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि आज हिमाचल प्रदेश दलित उत्पीड़न का केंद्र बना हुआ है। जंहा एक और दलित वर्ग कानून में प्रावधनों को लागू करवाने के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ता है वंही दूसरी तरफ उत्पीडन और शोषण को संस्थागत बनाने के लिए आरएसएस के अजेंडा पर कुछ लोग आंदोलन कर रहे है।
जगत राम एवम आशीष कुमार ने बताया कि आने वाले तीन महीनों में घर-घर जा कर अभियान चलाया जाएगा और सामाजिक एकता को कायम रखते हुए सबको शिक्षा और रोजगार की मांग की जाएगी। इस सेमिनार में हिमाचल प्रदेश के 11 जिलों से 300 के करीब लोगों ने भाग लिया।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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