राष्ट्रीय
सेना का चॉपर तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में क्रैश, CDS जनरल बिपिन रावत भी थे सवार
नई दिल्ली-सेना का एक हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस हेलीकॉप्टर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), जनरल बिपिन रावत, उनका स्टाफ और परिवार के सदस्य सहित 14 लोग सवार थे। इसमें पांच क्रू मेंबर शामिल हैं। दुर्घटनास्थल से अब तक पांच शव मिले हैं जबकि गंभीर रूप से झुलसे दो लोगों को अस्पताल ले जाया गया है तथा सात अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
#WATCH | Latest visuals from the spot (between Coimbatore and Sulur) where a military chopper crashed in Tamil Nadu. CDS Gen Bipin Rawat, his staff and some family members were in the chopper.
(Video Source: Locals involved in search and rescue operation) pic.twitter.com/YkBVlzsk1J
— ANI (@ANI) December 8, 2021
भारतीय वायुसेना ने ट्विटर पर इस बात की पुष्टि की है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ इसमें थे। उन्होंने आज सुबह दिल्ली से सुलुर के लिए फ्लाइट ली थी। ट्वीट में कहा गयाा है, ‘वायुसेना के Mi-17V5 हेलीकॉप्टर,जिसमें सीडीएस जनरल बिपिन रावत सवार थे आज कूनूर (तमिलनाडु ) के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया गया है।
An IAF Mi-17V5 helicopter, with CDS Gen Bipin Rawat on board, met with an accident today near Coonoor, Tamil Nadu.
An Inquiry has been ordered to ascertain the cause of the accident.— Indian Air Force (@IAF_MCC) December 8, 2021
हादसे में चार लोगों की जान गई है जबकि दो बचने में सफल रहे हैं। घटना को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। Mi सीरीज के हेलीकॉप्टर ने सुलुर आर्मी बेस से उड़ान भरी थी, इसके कुछ ही देर बाद यह नीलिगिरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
यह वेलिंगटन डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट की ओर बढ़ रहा था। स्थानीय टीवी चैनल पर दुर्घटनास्थल की तस्वीरों में गहरे धुएं और आग के साथ हेलीकॉप्टर का मलबा भी दिखाई दे रहा है।
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दिल्ली-हिमाचल पुलिस विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा – समन्वय से कार्य किया होता तो स्थिति पैदा ही नहीं होती
शिमला: शुक्रवार को दिल्ली पुलिस और हिमाचल पुलिस के बीच हुए विवाद मामले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस को किसी भी कार्रवाई से पहले हिमाचल पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पुलिस को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि बिना वर्दी, बिना सूचना और बिना समन्वय के किसी भी राज्य से लोगों को उठाकर ले जाना पूरी तरह अनुचित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के तहत सभी राज्यों को अपने अधिकार प्राप्त हैं और हिमाचल प्रदेश की अपनी संप्रभुता है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। बाहर से आने वाली कोई भी पुलिस एजेंसी अपनी मर्जी से हिमाचल से लोगों को नहीं ले जा सकती।
ट्रांजिट रिमांड दिखाने की मांग
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली पुलिस से ट्रांजिट रिमांड दिखाने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने संबंधित रिसॉर्ट से सीसीटीवी रिकॉर्ड भी लिया, लेकिन इसकी जानकारी रिसॉर्ट मालिक को नहीं दी गई। यदि दिल्ली पुलिस ने समन्वय से कार्य किया होता या हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को पूर्व सूचना दी होती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
भाजपा पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस मुद्दे पर भाजपा के रवैये को हिमाचल विरोधी करार देते हुए कहा कि जब हिमाचल पुलिस कानून के दायरे में रहकर बेहतर कार्य कर रही है, तब उसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते है। विपक्ष को समझना चाहिए कि यदि दूसरे राज्यों की पुलिस बिना प्रक्रिया अपनाए हिमाचल से लोगों को उठाकर ले जाएगी, तो राज्य पुलिस की भूमिका ही समाप्त हो जाएगी।
यह था पूरा मामला
दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित एएआई इंपैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। जानकारी के अनुसार, तीन युवा कार्यकर्ता शिमला के चिरगांव स्थित एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए थे।
सिविल कपड़ों में आई थी दिल्ली पुलिस
हिमाचल पुलिस के अनुसार, चांगुल रिज़ॉर्ट, चिरगांव से सूचना मिली कि कुछ लोग सिविल कपड़ों में रिज़ॉर्ट में ठहरे तीन व्यक्तियों को अपने साथ ले गए हैं। साथ ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिनमें एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी शामिल था, अपने साथ ले जाया गया। जिन गाड़ियों का उपयोग किया गया, वे हिमाचल के बाहर के पंजीकरण नंबर की थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और सोलन पुलिस के साथ समन्वय बनाकर शोगी, आईएसबीटी शिमला और धर्मपुर में संबंधित व्यक्तियों को इंटरसेप्ट किया। जांच में सामने आया कि यह समूह दिल्ली और हरियाणा पुलिस के कर्मियों का था, जो दिल्ली में दर्ज एक मामले के संबंध में इन तीन व्यक्तियों की तलाश कर रहा था।
शिमला पुलिस ने सभी संबंधित व्यक्तियों को स्थानीय सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत तीनों का रिपन अस्पताल, शिमला में मेडिकल परीक्षण करवाया गया। इसके बाद माननीय एसजेएम-II न्यायालय, शिमला द्वारा लगभग 18 घंटे का ट्रांजिट रिमांड स्वीकृत किया गया। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम को संबंधित व्यक्तियों के साथ दिल्ली जाने की अनुमति दी गई।
इस मामले में चांगुल रिज़ॉर्ट, चिरगांव के मालिक की शिकायत पर थाना चिरगांव में दिनांक 25 फरवरी 2026 को एफआईआर संख्या 18/2026 संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट किसी दल का नहीं, बल्कि देश की छवि से जुड़ा कार्यक्रम था, जिसे राजनीतिक साजिश का रूप दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी सरकारी संरक्षण में हिमाचल लाए गए और जब दिल्ली पुलिस कार्रवाई के लिए पहुंची, तो धर्मपुर में पुलिस टीम को ही डिटेन कर दिया गया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को निदंनीय बताते हुए कहा कि ऐसा प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है।
नरेश चौहान ने मामले को बताया गंभीर
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने किसी भी प्रकार का प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया, जो एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को कानून के तहत तीनों लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए था। हिमाचल पुलिस की टीमों ने उन्हें तय प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य किया, जिसमें गिरफ्तार व्यक्तियों का मेडिकल परीक्षण और ट्रांजिट रिमांड शामिल था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरीके से दिल्ली पुलिस कार्य करना चाहती थी, वह पूरी तरह गलत था।
साथ ही उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष पहले स्वयं मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसके बावजूद उनका दिल्ली पुलिस के पक्ष में खड़ा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पहले यह देखना चाहिए था कि बाहरी राज्य की पुलिस ने कानून और तय नियमों का पालन किया था।
उन्होंने कहा कि एक उदाहरण सेट होना चाहिए कि जब आप दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो आपको पूरे नियम और कानून का दायरा फॉलो करना चाहिए।
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मुफ्त व्यापार समझौते से हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बागवानों को होगा सीधा नुकसान: मुख्यमंत्री सुक्खू
शिमला : हाल ही में हुए मुफ्त व्यापार समझौते हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। सेब, अखरोट, बादाम और अन्य फलों का आयात विदेशों से बढ़ेगा, जिससे स्थानीय किसानों और बागवानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। यह बात वीरवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
बागवानों के साथ सीधा अन्याय: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। कृषि और बागवानी दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सेब बागवानी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 5,000 करोड़ रुपये का योगदान है और यह 2.5 लाख परिवारों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका का आधार है। इसके लिए केंद्र से कोई भी सहायता या समर्थन नहीं मिला, यह बागवानों के साथ सीधा अन्याय और हिमाचल तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों की आर्थिकी पर प्रहार है।
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बागवानों को होगा सीधा नुकसान: मुख्यमंत्री
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूज़ीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ मुफ्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनके तहत सेब और सूखे मेवों पर आयात शुल्क में कमी की गई है। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों को सीधा नुकसान होगा। ऐसे समझौते देश के किसानों और आम जनता के हित में नहीं हैं।
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हिमाचल में बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए बढ़ा शुल्क, जानें किस वाहन पर कितना शुल्क लगेगा
शिमला : अब हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों के वाहनों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बैरियर नीति अधिसूचित कर दी है। राज्य सरकार के अनुसार, राज्य में आर्थिक संकट को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नईं दरें प्रदेश में एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। नईं दरों के अनुसार यह रहेगा एंट्री शुल्क :
| वाहन श्रेणी | पुराना शुल्क (₹) | नया शुल्क (₹) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| बाहरी राज्यों से आने वाले निजी वाहन | 70 | 170 | +100 |
| 12+1 सवारी क्षमता वाले वाहन | 110 | 170 | +60 |
| भारी वाहन | 720 | 900 | +180 |
| निर्माण मशीनरी (जेसीबी आदि) | 570 | 800 | +230 |
| ट्रैक्टर | 70 | 100 | +30 |
| डबल एक्सल बस व ट्रक | 570 | 570 | कोई बदलाव नहीं |
नोट: नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।
बैरियर पर लगेंगे फास्ट टैग
जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार ने बद्दी, परवाणू और बिलासपुर जिला के गरामोड़ा, नूरपुर के कंडवाल, ऊना के मैहतपुर, सिरमौर जिला के गोविंदघाट बैरियर पर फास्ट टैग लगाने के निर्देश दिए है। इन बैरियर्स की ऑनलाइन नीलामी होगी, जिसके लिए डीसी की अध्यक्षता में समिती गठित की गई है। इस समिती में आबकारी और एवं कराधान विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे।
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