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एचपीयू में सीईसी की दो दिवसीय राष्ट्र स्तरीय फिल्म प्रतियोगिता का आयोजन, दिखाई जायेंगी 23 फिल्मे

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कार्यक्रम के आरम्भ में दो पूर्व में पुरस्कृत फिल्मे ‘लॉस्ट सिनेमा’ और ‘लंगूर मेला’ दिखाई गयी। इस प्रतियोगिता में कुल 10 श्रेणियों में 23 फिल्मे दिखाई जायेंगी. सबसे पहले ‘विलिमय राक्सवर्ग द फादर ऑफ़ इंडियन बॉटनी’ दिखाई गयी।

शिमला- विश्चविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी की संस्था शिक्षा संचार संकाय(सीईसी)(Consortium for educational communication) द्वारा आयोजित शैक्षणिक विडियो प्रतियोगिता का आयोजन आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया।

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कार्यक्रम का शुभारम्भ सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती को पुष्पांजलि कर दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुआ।

Himachal university Video Competition 2107

हिमाचल विश्चविद्यालय के जनसंचार और पत्रकारिता विभाग के सहयोग से आयोजित इस फिल्म प्रतियोगिता में 10 श्रेणियों में कुल 23 फिल्मे दिखाई जायेंगी। पत्रकारिता और जन संचार विभागाध्यक्ष डॉ विकास डोगरा ने बताया कि दो दिन चलने वाले इस कार्यक्रम का समापन राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा होगा। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिता में पुरस्कृत फिल्म निर्माताओं को राज्यपाल द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।

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पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर शशिकांत शर्मा ने डिजिटल लर्निग के खासियतों के बारे में सभी को बताया। प्रोफेसर शर्मा ने हिमाचल की उत्कृष्ट संस्कृति और डिजिटल लर्निंग प्रोगाम के लिए मौजूद सम्भावाओं का जिक्र किया और सीईसी के निदेशक को इससे अवगत करवाया।

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उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किस तरह से हिमाचल प्रदेश का स्थानीय प्रशासन डिजिटल लर्निग कार्यक्रम को लेकर उत्साहित है और अगली बार इस तरह के समस्त आयोजन को हर संभव प्रयास मदद देने का भी आश्वासन दिया है।

सीईसी के निदेशक प्रोफेसर राजवीर सिंह ने हिमाचल प्रदेश में इस तरह के अन्य कार्यक्रम चलाये जाने के प्रति अपनी रूचि भी जाहिर की। अपने संबोधन में सीईसी के निदेशक प्रोफेसर राजवीर सिंह ने डिजिटल लर्निंग के बारे में सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों के बारे में बताया।

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चित्र साभार: CEC UGC

प्रोफेसर सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे समय बदल रहा है वैसे वैसे तकनिकी का संसार भी बदल रहा है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का स्वरुप बड़ी-बड़ी इमारते और इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। आज की शिक्षा ब्रिक्स एंड मोर्टर(ईंट गारे) नही चिप्स एंड फाइबर( हार्डडिस्क और इन्टरनेट) से चलने वाली हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि आज सीईसी ने देश के विद्वान् प्रोफेसर्स की मदद से देश में डिजिटल लर्निंग का संजाल स्थापित किया है। हिन्दुस्तान में पढ़ाया जाने वाला कोई भी ऐसा विषय नहीं है, जिसका विडियो अध्ययन सामग्री सीईसी ने नहीं बनाई हो।

प्रो सिंह ने हिमाचल प्रदेश विवि की डिजिटल लर्निग को बढाने के लिए भी डिजिटल लाइब्रेरी बनाने में सहयोग प्रदान करने की बात कही है। उन्होंने कहा यह ओपन टू आल यानी की सबके लिए उपलब्ध रहने वाला होगा। जहाँ से छात्र एक पेनड्राइव या हार्डडिस्क में सारा कंटेंट कॉपी कर उसका अध्ययन कर सकेंगे।

प्रदेश विवि के कुलपति प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में सीईसी को इस प्रतियोगिता के लिए विवि को चयन करने पर आभार जताया और सीईसी द्वारा विवि को डिजिटल लर्निंग के प्रक्रम स्थापित करने में हर तरह के सहयोग देने का आश्वाशन दिया।

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कुलपति ने अपने सम्भोदन में यह भी कहा कि इस समय हिमाचल में साक्षरता दर 87% है। 70 लाख की आबादी में प्रदेश में 16 हज़ार संस्थान है। 16 विश्वविद्यालय है, मेडिकल कॉलेज बीएड कॉलेज, 140 सरकारी कॉलेज है। कुलपति ने कहा कि प्रदेश शिक्षा में विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि हायर एजुकेशन में पुरे देश में हिमाचल एक ऐसा प्रदेश है जहाँ छात्राओं की एनरोलमेंट सबसे अधिक है।

इसके साथ ही उन्होंने समस्त पत्रकारिता विभाग को सीईसी के साथ इस कार्यक्रम को आयोजित करवाने के लिए साधुवाद दिया।

जनसंचार और पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विकास डोगरा ने अंत में सभी अतिथियों और कार्यक्रम में अपना सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार जताया।

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इसके साथ ही उन्होंने सीईसी के साथ आगे भी किसी कार्यक्रम को आयोजित करने का आश्वासन दिलाया।

इस दौरान हिमाचल प्रदेश विवि के कुलपति प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह चौहान, कुलसचिव प्रोफेसर एसएस नारटा,सीईसी के निदेशक प्रोफेसर राजवीर सिंह, जनसंचार और पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ विकास डोगरा, प्रोफेसर शशिकांत शर्मा और विवि के अन्य प्राध्यापक व छात्र उपस्थित रहे।

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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