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हिमाचल में हाई बीम पर पुलिस ने बढ़ाई सख्ती, ₹5000 तक कटेगा चालान
शिमला : अब वाहन चलाते समय हाई बीम का गलत इस्तेमाल करना चालकों को भारी पड़ सकता है। हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने इस पर सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस विभाग ने बताया कि अब हाई बीम का गलत प्रयोग डेंजरस ड्राइविंग की श्रेणी में माना जाएगा और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर लागू की जा रही है।
नियम तोड़ने पर 5000 रुपये तक का जुर्माना
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि ट्रैफिक चेकिंग के दौरान हाई बीम के दुरुपयोग पर खास नजर रखी जाए। पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि पहाड़ी सड़कों पर लो बीम का इस्तेमाल करें। नियम तोड़ने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 1000 से 5000 रुपये तक जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और बार-बार उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि हाई बीम का गलत इस्तेमाल सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में अब हिमाचल में सख्त कार्रवाई की जाएगी है।
हाई बीम से बढ़ता है दुर्घटनाओं का खतरा
पहाड़ी और घुमावदार सड़कों पर हाई बीम का उपयोग सामने से आने वाले वाहन चालकों की दृश्यता को कुछ समय के लिए बाधित कर देता है, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। विशेष रूप से रात के समय हाई बीम का गलत इस्तेमाल बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में न केवल सामने से आ रहे वाहन चालक बल्कि पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक भी गंभीर जोखिम में आ जाते हैं।
हाई बीम के दुष्प्रभाव
- सामने वाले ड्राइवर पर प्रभाव : आँखों के सामने अचानक अंधेरा छा जाना, जिससे कुछ सेकंड के लिए ड्राइवर को सड़क साफ नजर नहीं आती। हाई बीम के कारण सड़क के किनारे खड़े पैदल यात्रियों, मवेशियों या साइकिल चालकों को देख पाना नामुमकिन हो जाता है।
- दुर्घटनाओं का खतरा : तेज रौशनी के कारण वाहन चालक सही दिशा का अंदाजा नहीं लगा पाता, जिससे टक्कर या सड़क से फिसलने की संभावना बढ़ जाती है।
- विजुअल डिसरप्शन (दृष्टि में बाधा): हाई बीम से आंखों के रेटिना पर जोर पड़ता है, जिससे लंबे समय तक चलने पर थकान और सिरदर्द हो सकता है।
अगर आप रात में ड्राइव करते हैं, तो हाई बीम की जगह लो बीम का प्रयोग करें। इससे आपकी यात्रा भी सुरक्षित रहेगी और सामने से आने वाले वाहन चालक को परेशानी नहीं होगी।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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