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	<title>Shimla Gaiety Theater Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Shimla Gaiety Theater Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>गेटी थियेटर मे सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक उदयन वाजपेयी  से साक्षात्कार का आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Sep 2016 12:57:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[DR. Tulsi Raman]]></category>
		<category><![CDATA[HP Department of Language and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[Udayan Vajpeyi]]></category>
		<category><![CDATA[Utsav Institute Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला की साहित्यिक संस्था &#8216;उत्स&#8217; की ओर से सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक उदयन वाजपेयी से साक्षात्कार का आयोजन निश्चित किया गया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से यह आयोजन स्थानीय गेटी थियेटर परिसर के रिहर्सल कक्ष में कल 6 सितंबर को दोपहर बाद 3 बजे होगा। उत्स के अध्यक्ष डा. तुलसी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला की साहित्यिक संस्था &#8216;उत्स&#8217; की ओर से सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक  उदयन वाजपेयी से साक्षात्कार का आयोजन निश्चित किया गया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से  यह आयोजन स्थानीय गेटी थियेटर परिसर के रिहर्सल कक्ष में कल 6 सितंबर  को दोपहर बाद 3 बजे होगा।</p>
<p>उत्स के अध्यक्ष डा. तुलसी रमण ने कहा कि इस अवसर पर उदयन वाजपेयी कविता, कहानी, निबंध, नाटक और फिल्म जैसी विधाओं पर लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों से अपने विचार सांझा करेंगे। इस तरह के सर्जनात्मक सम्वाद के साथ ही कवि उदयन वाजपेयी का &#8216;कविता पाठ&#8217; भी होगा। इस आयोजन में रचनात्मक सम्वाद के लिए लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया है।</p>
<p>उदयन वाजपेयी एक बहुसर्जक रचनाकार इस अर्थ में हैं कि उन्होंने कविता, कहानी,निबंध आदि विधाओं में लेखन किया है। इन विधाओं में उनके आठ महत्वपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुए हैं। उदयन वाजपेयी ने साहित्यिक रचनाओं पर निर्मित कई फिल्मों के सम्वाद लिखे हैं और जोज़ेफ ब्राडस्की [रूस], मिशियो माण्डो [जापान], आक्टावियो पाज़ [मैक्सिको], फ्रांक आंद्रेजेम [फ्रांस], तथा रामचंद्र गांधी [भारत] की कृतियों के हिंदी में अनुवाद भी किए हैं। अपने देश के अनेक नगरों के अतिरिक्त मास्को, पेरिस,कठमांडू आदि में भी कला, साहित्य, लोकतंत्र और कविता जैसे विषयों पर उदयन वाजपेयी के व्याख्यान हुए हैं। लेविनी [स्विटज़रलैंड] तथा पेरिस [फ्रांस] में वह राइटर इन रेसिडेंट रह चुके हैं। वह रज़ा फाउंडेशन तथा कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कारों से सम्मानित लेखक हैं।</p>
<p>उदयन वाजपेयी चिकित्सा स्नातक हैं और इन दिनों गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में अध्यापन कर रहे हैं। इसी के साथ वह साहित्य, कला और सभ्यता की चर्चित पत्रिका &#8216;समास&#8217; के सम्पादक भी हैं। डा. तुलसी रमण ने कहा कि उत्स की ओर से गुज़रे सालों में भी सृजनात्मक सम्वाद के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन किए जाते रहे हैं और शीघ्र ही &#8216;उत्स&#8217; पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ करने की भी योजना है।</p>
<p>Photo: Vatsanurag BlogSpot</p>
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		<title>तृतीय मनोहर सिंह स्मृति  समारोह की सातवीं संध्या पर ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/3rd-manohar-singh-samriti-at-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2016 11:51:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह की सातवीं संध्या पर एक्टर प्रिपेयर प्रोडक्शन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक राकेश बेदी और मुख्य भूमिका में प्रख्यात सिने अभिनेता अनुपम खेर, नीना गुप्ता और स्वयं राकेश बेदी थे। नाटक में प्रीतम कुमार चोपड़ा और हेमा राय जो दिल्ली [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  सात दिवसीय नाट्य समारोह की सातवीं संध्या पर एक्टर प्रिपेयर प्रोडक्शन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक राकेश बेदी और मुख्य भूमिका में प्रख्यात सिने अभिनेता अनुपम खेर, नीना गुप्ता और स्वयं राकेश बेदी थे। </p>
<p>नाटक में प्रीतम कुमार चोपड़ा और हेमा राय जो दिल्ली के चांदनी चौक में पले और बड़े हुए। साथ पढ़ते समय से ही वे एक-दूसरे को चाहने लगे। परिस्थितियों के अनुसार वे एक दूसरे से अलग हो गये। और उन्हें लगा कि दूसरों द्वारा उन्हें नीचा दिखाया जा रहा हैं। अन्तराल के बाद वे दिल्ली के लोधी गार्डन में पुनः मिलते है और अन्तरमन की बाते करते हैं और उन्हें मालूम होता है कि वे एक दूसरे के बारे में गल्तफहमियों का शिकार होते हैं। इसी विषय पर नाटक की कहानी घूमती है। </p>
<p>नाट्य समारोह की सातवीं व अंतिम संध्या पर मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत परिवार सहित विराजमान हुए और साथ ही उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल राम नाईक  भी परिवार सहित विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे। श्रीमती अनुराधा ठाकुर सचिव भाषा एवं संस्कृति ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों का पारम्परिक ढ़ग से स्वागत एवं सम्मान किया। तथा सभागार में उपस्थित शिमला शहर के गणमान्य व्यक्तियों और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शकों का स्वागत किया। </p>
<p>नाटक की समाप्ति पर सभी कलाकारों का परिचय करवाया गया और मुख्य अतिथि द्वारा  हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों तथा दर्शकों का कार्यक्रम में पधारने पर धन्यवाद किया तथा विभाग द्वारा आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। </p>
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		<title>दि बिगनर थियेटर ग्रुप शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/death-of-a-salesman-by-the-begginer-theater-group-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 May 2016 11:39:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Death of a salesman]]></category>
		<category><![CDATA[Himachali Artist]]></category>
		<category><![CDATA[Himachali Talent]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Theater Group]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 16 मई, 2016 को शाम 6:00 बजे सुरनई थियेटर एण्ड फोक आर्टस फाऊण्डेशन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘नमस्ते’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन के0के0 रैना और मुख्य अभिनय में इला अरूण होंगी। शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह के पांचवे दिन दि बिगनर थियेटर ग्रुप, शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन किया [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिनांक 16 मई, 2016 को शाम 6:00 बजे सुरनई थियेटर एण्ड फोक आर्टस फाऊण्डेशन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘नमस्ते’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन के0के0 रैना और मुख्य अभिनय में इला अरूण होंगी।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  सात दिवसीय नाट्य समारोह के पांचवे दिन दि बिगनर थियेटर ग्रुप, शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य भूमिका में अभिनेता उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया थे।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/12/department-of-language-art-culture-himachal-pradesh-2/" target="_blank">7 दिवसीय नाटय समारोह के पहले दिन सात लघु कथाओं पर आधारित नाटक का मंचन</a></p>
<p>आर्थर मिलर द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध नाटक ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्समैन’’ पर आधारित हिन्दी में रूपान्तरण किया गया है। यह नाटक 20वीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ अमेरीकी नाटकों की श्रेणी में माना जाता है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/manohar-singh-smriti-function-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">मनोहर सिंह स्मृति समारोह के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में ‘पियानों’ नाटक का मंचन</a></p>
<p>नाटक में यथार्थ और कल्पना (स्वप्न) के बीच झूलता मुख्य पात्र विल्ली लोमैन भारतीय परिवेश में शिमला में रहने वाला कृष्ण लाल वर्मा बन जाता है। उसी तरह नाटक के बाकी पात्रों के नाम और व्यावहारिक तौर तरीके भी बदल जाते हैं।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/jagmira-creative-arts-mumbai-performed-at-gaiety-theater-shimla/" target="_blank">जगमीरा क्रियेटिव आर्ट्स, मुम्बई द्वारा रविन्द्रनाथ टेगोर की कहानी पर आधारित ‘‘स्त्रीर पत्र’’ नाटक का मंचन</a> </p>
<p>हिन्दी रूपान्तरण करते वक्त नाटक के मूल भाव और सन्देश को यथावत रखा गया है। यह नाटक एक परिवार के मार्मिक द्वन्द्व को दर्शाता है। नाटक में राष्ट्र के आधारभूत मूल्यों और महत्वपूर्ण विषयों को भी उजागर किया गया है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/" target="_blank">एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी में मशहूर उपन्यास ‘दि प्रोफिट’ पर आधारित ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</a></p>
<p>शिमला के ऐतिहासिक गेयटी प्रेक्षागृह में नाट्य समारोह की पांचवीं संध्या पर शिमला शहर के गणमान्य व्यक्ति और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शक उपस्थित हुए। शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने नाटक के अंत में सभी कलाकारों को हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानित किया।</p>
<p>Photo: Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/death-of-a-salesman-by-the-begginer-theater-group-shimla/">दि बिगनर थियेटर ग्रुप शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी  में मशहूर उपन्यास &#8216;दि प्रोफिट&#8217; पर आधारित  ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2016 06:32:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Theater Group LA]]></category>
		<category><![CDATA[Paigambur]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[The Prophet]]></category>
		<category><![CDATA[Theater Artist]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 15 मई, 2016 को शाम:6:00 बजे दि बिगनर थियेटर ग्रुप की प्रस्तुति ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्जमैन’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य अभिनय में उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया होंगे। शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह के चौथे दिन एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन किया गया। [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/">एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी  में मशहूर उपन्यास &#8216;दि प्रोफिट&#8217; पर आधारित  ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिनांक 15 मई, 2016 को शाम:6:00 बजे दि बिगनर थियेटर ग्रुप की प्रस्तुति ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्जमैन’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य अभिनय में उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया होंगे।</p>
<p><strong>शिमला-</strong> सात दिवसीय नाट्य समारोह के चौथे दिन एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक विकास द्विवेदी और मुख्य भूमिका में मशहूर सिने अभिनेता टॉम एल्टर थे।</p>
<p>पैगम्बर नाटक की रचना खलील जिब्रान के मशहूर उपन्यास दि प्रोफिट पर आधारित है। नाटक में मानव जीवन के अन्तर्चैतन्य की अवस्थाओं और पंच महाभूतों- पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश की महत्ता भी दर्शायी गई है कि किसी व्यक्ति के जीवन में खलल डालना कितना आसान है।  </p>
<p>नाटक की शुरूआत पंचमहाभूतों से रहित अनन्त के जन्म से होती है। जो प्यार, भावना, ज्ञान, धर्म, ईर्ष्या, घृणा, सुख दुख, मैत्री और सुन्दरता आदि भावों से परे है। नाटक में इसके जीवन के अनेक क्षणों को अभिव्यक्त किया गया है कि वह पैगम्बर से प्रत्येक बार कैसे मिलता है और वह बच्चा कैसे पैगम्बर से मार्गदर्शन प्राप्त कर अच्छा है। सहसा पता चलता है कि यह तीव्रबुद्धि और विलक्षण बच्चा कोई और नही स्वयं खलील जिब्रान है। जीवन के विभिन्न पड़ावों पर मिलने वाला पैगम्बर कोई और नही बल्कि उसका अपना अवचेतन मन है। नाटक में छत्तीसगढ़ और हरियाणा का समृद्ध लोक संगीत शामिल किया गया है छत्तीसगढ़ का सुप्रसिद्ध लोक नृत्य कर्मा नाटक का मुख्य आकर्षण है। </p>
<p>शिमला के ऐतिहासिक गेयटी प्रेक्षागृह में नाट्य समारोह की चौथी संध्या पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री एसएस परमार पूर्व मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार का शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस मौके पर गेयटी थियेटर में शिमला शहर के गणमान्य व्यक्ति और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शक उपस्थित हुए। श्री एसएस परमार ने नाटक के अंत में सभी कलाकारों का हिमाचली टोपी पहनाकर स्वागत किया।  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/">एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी  में मशहूर उपन्यास &#8216;दि प्रोफिट&#8217; पर आधारित  ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>मनोहर सिंह स्मृति समारोह  के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में &#8216;पियानों&#8217; नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/manohar-singh-smriti-function-at-shimla-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 May 2016 13:41:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Department of Language Art & Culture Himachal Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[Theater Artist]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इसी क्रम में दिनांक 13 मार्च, 2016 को शाम 6:00 बजे जगमीरा क्रियेटिव आर्ट्स मुम्बई की प्रस्तुति स्त्रीर पत्र का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन और मुख्य अभिनय सुश्री सीमा विश्वास का है। शिमला- सात दिवसीय इस नाट्य समारोह के दूसरे दिन रायर रेपरटॉयर, मुम्बई द्वारा पियानों नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक रघुवीर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/manohar-singh-smriti-function-at-shimla-gaiety-theater/">मनोहर सिंह स्मृति समारोह  के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में &#8216;पियानों&#8217; नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इसी क्रम में दिनांक 13 मार्च, 2016 को शाम 6:00 बजे जगमीरा क्रियेटिव आर्ट्स मुम्बई की प्रस्तुति स्त्रीर पत्र का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन और मुख्य अभिनय सुश्री सीमा विश्वास का है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> सात दिवसीय इस नाट्य समारोह के दूसरे दिन रायर रेपरटॉयर, मुम्बई द्वारा पियानों नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक रघुवीर यादव है। नाटक में रघुवीर यादव, अबीर यादव तथा रोशनी अचरेजा का अभिनय था। नाटक की कथावस्तु फेरेंक कैरेन्थी के फ्रैंच नाटक पर आधारित है। जो सत्तर के दशक के दौर की कहानी है उस समय वर्तमान समय की तरह सूचनाओं के लिए डायल करने वाले टेलिफोन का प्रचलन था।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla.jpg" alt="HP Dept art culture and language" width="1000" height="665" class="alignnone size-full wp-image-5419" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla-300x200.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla-768x511.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla-696x463.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/shimla-632x420.jpg 632w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>आज जैसे मोबाईल, इंटरनेट आदि सूचनाआें के साधन उपलब्ध नही थे। नाटक मुम्बई में फ्लैट्स में रहने वाले दो व्यक्तियों की कहानी है। एक व्यक्ति अखबार में ‘पियानों फॉर सेल’ विज्ञापन पढ़ता है। वह पियानों बेचने वाली महिला से टेलिफोन पर कभी लखनऊ की नानी/एक बच्चे/सुलझे हुए पियानों डीलर की तरह विभिन्न आवाजों में बात करता है। पियानों बेचने वाली औरत को इस बात का ज़रा भी आभास नहीं होता। नाटक में दो एकाकी ज़िन्दगियों की झलक दिखाना ही ध्येय है।	 </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla.jpg" alt="Artist Perfomance Shimla Gaiety Theater Shimla" width="1000" height="762" class="alignnone size-full wp-image-5415" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla-300x229.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla-768x585.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla-696x530.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/05/Artist-Perfomance-Shimla-Gaiety-Theater-Shimla-551x420.jpg 551w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>नाट्य समारोह की दूसरी संध्या पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारीं  अनुराधा ठाकुर सचिव, भाषा एवं संस्कृति विभाग का स्वागत विभाग की निदेशक  शशि ठाकुर ने पुष्पगुच्छ देकर किया। शशि ठाकुर ने विभाग द्वारा सम्पन्न की जाने वाली सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विभाग संस्कृति और साहित्य की सेवा में समर्पित कलाकारों एवं विद्वानों को समय-समय पर मंच उपलब्ध करवाता है और उनके अन्दर छुपी प्रतिभा को दर्शकों और श्रोताओं तक पहुंचाता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/manohar-singh-smriti-function-at-shimla-gaiety-theater/">मनोहर सिंह स्मृति समारोह  के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में &#8216;पियानों&#8217; नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Mar 2016 13:27:30 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>26 मार्च को इसी क्रम में बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; एम्फी थियेटर मे अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का आठवां नाटक &#8220;बरसी&#8221; प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। शिमला- आज की प्रस्तुुति में एक्टिव [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/">हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>26 मार्च को इसी क्रम में बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; एम्फी थियेटर मे अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का आठवां नाटक &#8220;बरसी&#8221; प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  आज की प्रस्तुुति में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन, कुल्लू द्वारा नाटक &#8220;सुन्नी भुंकू&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक तथा निर्देशक  केहर सिंह ठाकुर है। इस नाटक की कहानी सुन्नी भुंकू के पे्रम की है जो हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में आज भी गाथागीतों में प्रचलित है और इन्हें लैला-मजनू, हीर-रांझा तथा सोहनी-महिवाल जैसे प्रेमी समझा जाता है। तेजि़ंन,सुन्नी को पाने के लिए भुंकू के साथी गेशू से जान की धमकी देकर झूठ बुलवाता है कि भुंकू मर गया है। यह खबर सुनते ही सुन्नी चन्द्रभागा नदी में जो प्रेम की नदी मानी जाती है छलांग लगा लेती है और उसी के साथ उम्मीदें धूमिल हो जातीं हैं। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां-राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>अपने मायके के देस जाने की सुन्नी की मुहूंबोली भाभी की जो यह कहानी सुनाती है जिसे अब लड़कियां चाची कहतीं हैं, जो प्रेम में पड़कर यहां आई थी लेकिन अब उसका पति मर चुका है और लौटना चाहती है सुन्नी और भुंकू के साथ अपने मायके के देस क्योंकि भुंकू अपनी भेड़ें चराने उसके मायके के देस भी जाता है। </p>
<p>यह नाटक सुन्नी भुंकू के अमर प्रेम को दर्शाता है। जिस पर आज भी पहाड़ के लोगों की प्रबल आस्था है कि प्रेम कभी नहीं मिटता। प्रेम तो दो आत्माओं का मिलन है जो आपस में मिलकर परमात्मा में लीन हो जातीं हैं। पहाड़ों पर से बादलों के बीच से मृत सुन्नी की आवाज़ भुंकू के लिए आना और भुंकू का पहाड़ों की धुंद में सुन्नी-सुन्नी पुकारते हुए गुम हो जाना उन्हें अमरत्व प्रदान करता है। नाटक में गेशू का पागल हो जाना स्थिति का बस से बाहर हो जाना दिखाता है। अन्ततः तेंजि़न का लामा के परिवेश में दिखना इन्सान का भगवान बुद्व की शरण में जाकर किए पापों का प्रायश्चित दिखाता है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>नाटक में एक और महत्वपूर्ण पहलू है जिसमें भुंकू का मित्र काली माता का सोने का छत्र चोरी करता है और बाद में सामने आता है यह कहते हुए कि मैंने चोरी नहीं की है बल्कि माता से छत्र मांगा है क्योंकि मेरी जन्म देने वाली मां बीमार है उसका इलाज करने के लिए मैंने मंदिर वाली माता से छत्र मांगा है और इसे गिरवी रख कर मैं मेरी जन्म देने वाली मां का इलाज़ करूंगा और जब ठीक हो जाएगी तो धीरे धीरे कमाकर छत्र मंदिर वाली माता को लौटा दूंगा। मैंने कोई चोरी नहीं की बल्कि एक माता से मांग कर दूसरी माता की ज़रूरत पूरी करने की कोशिश कर रहा हूं। </p>
<p>नाटक की यह घटना वर्तमान में भी लागू होती है कि हम मंदिरों में तो सोना आस्था के नाम पर चढ़ा देते हैं जहां उसकी कोई ज़रूरत नहीं होती। लेकिन गरीब ज़रूरतमंद को ईलाज के लिए कोई मदद नहीं देता।	</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर 1 बजकर 30 मिनट में धाजा मण्डली, ऊना द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;दाहाजा&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। यह नाट्य द्वापर युग में कृष्ण और सिद्ध चानों बली का युद्ध हुआ था। </p>
<p>जिसमें कृष्ण भगवान के हाथों सिद्ध चानों मारा गया था। यह नाट्य श्री कृष्ण भगवान की आरती से शुरू होता है। जिसमें चद्रावलियां (सखिया) श्री कृष्ण भगवान जी की आरती उतारती है। और नृत्य करती है। श्री कृष्ण भगवान जी के आगे प्रार्थना करती है कि हमें सिद्ध चानों बनी जी के दर्शन चाहिए। श्री कृष्ण भगवान सिदचिनों बली जी के बोरासाई को बुलाते है और बौरा साई सिद्ध चानों बली हस वाली की सवारी करके स्मेला थान से चलते है। और अखाडे में पहुचकर लोगो को दर्शन देते है। यह नाट्य दाहाजा चद्रावली नाम से प्रसिद्ध है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां- हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की दूसरी कड़ी में दोपहर बहस नाट्य एवं कला मंच, कुल्लू द्वारा सुप्रसिद्ध लोक शैली पर आघारित लोकनाट्य ‘‘जिजीविषा’’ गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश का कबायली क्षेत्र लाहौल तक पहुंचने के लिए बर्फीले रोहतांग दर्रे का सामना, नेपाली मजदूरो का काम की तलाश में लाहौल पहुंचना एक कभी न खत्म होने वाला सिलसिला है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 23 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a></p>
<p>दर्रे का केवल छै महीने के लिए खुलना,मौसम बदलते ही यातायात के साधनों का चलना बन्द होना एक बड़ी भौगोलिक विवशता है। गर्मियों में भी जो दर्रा अपनी ठण्डक से हड्डियों तक को कंपा देता है उसी दर्रे को जिजीविषा की विवशता में लाहौल निवासी और गोरखे मज़दूरो को पार करना पड़ता है बिना किसी साधन के अक्सर पैदल।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 24 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन</a></p>
<p>कंपकंपाती ठण्ड़ बर्फीली हवाओं,धुंध और किसी भी क्षण तेजी से बदलते मौसम के बीच जान हथेली पर रखे आदमी की दर्रा पार करने की कोशिश में कई बार जिन्दगी हार जाती है। इसी तरह जीने की इच्छा व मौत के बीच जूझते एक मजदूर गोरखा दम्पति (गर्भवती नेपाली महिला) की जिन्दगी व मौत के संघर्ष की सत्य घटना पर आधारित नाटक है-‘जिजीविषा’</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/">हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन  नाटक &#8220;मेरा संघर्ष अधूरा रह गया&#8221; और लोकनाट्य &#8220;बुछेन&#8221; का मंचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Mar 2016 11:07:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>25 मार्च को इसी क्रम में धाजा मण्डली, ऊना द्वारा लोकनाट्य ‘‘धाजा’’ एम्फी थियेटर में दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर प्रस्तुत किया जायेगा व उसके बाद अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट पर गेयटी के बहुउदेशीय हाॅल में लोक शैली पर आघारित लोकनाट्य &#8220;जिजीविषा&#8221; बहस नाट्य एवं कला मंच, कुल्लू मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/">हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन  नाटक &#8220;मेरा संघर्ष अधूरा रह गया&#8221; और लोकनाट्य &#8220;बुछेन&#8221; का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>25 मार्च को इसी क्रम में धाजा मण्डली, ऊना द्वारा लोकनाट्य ‘‘धाजा’’ एम्फी थियेटर में दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर प्रस्तुत किया जायेगा व उसके बाद अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट पर गेयटी के बहुउदेशीय हाॅल में लोक शैली पर आघारित लोकनाट्य &#8220;जिजीविषा&#8221; बहस नाट्य एवं कला मंच, कुल्लू मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का सातवां नाटक ‘‘सुन्नी भुंकू’’एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन, कुल्लू द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> आज की प्रस्तुुति में त्रिवेणी कला संगम, हमीरपुर द्वारा नाटक &#8220;मेरा संघर्ष अधूरा रह गया&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक तथा निर्देशक सुश्री कुमारी हेमलता रावत है। मेरा संघर्ष अधूरा रह गया का सार यही है कि सृष्टि के निर्माण में नारी का महत्वपूर्ण योग है। अगर नारी न होती तो सृष्टि का निर्माण कैसे होता। लेकिन आज सदियों से चला आ रहा नारियों पर जुल्म आज भी उतना ही है लोगों की मानसिकता काफी हद तक बदल चुकी है पर फिर भी आज भी शिकार हो रही हैं। (हिंसा) कितनी ही नारियां ऐसी है जो शोषण करते है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4585" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2.jpg" alt="Shimla Gaiety Theater" width="1000" height="710" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2-300x213.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2-768x545.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2-100x70.jpg 100w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2-696x494.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-2-592x420.jpg 592w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>देश को आज़ाद हुए कितने ही साल हो गये लेकिन नारी उंचे से उचे पद की दशा आज भी पिंजरे में बंद पंछी की तरह ही है आकाश छूने के बाद भी नारियां किसी न किसी के पैरों तले दबी पर इस नाटक के जरिये एक ऐसे संघर्ष की ओर इशारा किया गया। जिससे हम नारियों की स्थिति को सुधार सकें उसके लिए हमें जरूरत है तो बस चुप्पी तोड़ने की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4584" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti.jpg" alt="Lahaul and Spiti" width="1000" height="664" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti-300x199.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti-768x510.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti-696x462.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Lahaul-and-Spiti-633x420.jpg 633w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर बाद लाहौली लोक नाट्य दल, लाहौल स्पिति द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;बुछेन&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पिति,किन्नौर तथा जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख आदि जनजातीय क्षेत्रों में‘‘बुछेन’’लोकानुरंजन का महत्वपूर्ण साधन है।</p>
<p>बुछेन का वास्तविक नाम फोबर-रो-चोग है जिसका अर्थ है &#8220;आमाश्य (पेट) पर पत्थर तोडने का अनुष्ठान&#8221;। यद्यपि इसकी पृष्ठभूमि धार्मिक है व इसका उद्देश्य लोगों में बोद्ध धर्म के प्रति निष्ठा आस्था और रूचि जगाना है। यह भी मान्यता है कि इसके कलाकारों में दैविक शक्ति होती है। इसका उद्देश्य दैविय शक्ति के प्रदर्शन के साथ-साथ हास्य विनोद, आमोद-प्रमोद तथा मनोंरंजन भी है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4582" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists.jpg" alt="Himachal Artists" width="1000" height="644" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists-300x193.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists-768x495.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists-696x448.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Himachal-Artists-652x420.jpg 652w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>बुछेन के समारोह को लोग अपने-अपने घरों में विध्न निवारण तथा सामान्य रूप में घर की सुख-स्मृद्धि के लिए आयोजित करवाते हैं। नव वर्ष, विवाह के उपलक्ष्य तथा विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर भी बुछेन का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/">हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन  नाटक &#8220;मेरा संघर्ष अधूरा रह गया&#8221; और लोकनाट्य &#8220;बुछेन&#8221; का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन  नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Mar 2016 07:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsva 2016]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Talent]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Theater Groups]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[KBDS Theater Group Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Samvad Yuva Mandal Mandi]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 23 मार्च,2016 को प्रातः ग्यारह बजे गेयटी सेमीनार कक्ष में दिनांक 23 मार्च,2016 शाम पांच बजकर तीस मिनट में उत्सव शिमला- आज की प्रस्तुुति में केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक मोहन राकेश तथा निर्देशक सुश्री देवेन जोशी है। ‘‘आधे-अधूरे’’ नाटक समकालीन व यर्थाथपरक नाटक है। इस नाटक की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिनांक 23 मार्च,2016 को प्रातः ग्यारह बजे गेयटी सेमीनार कक्ष में दिनांक 23 मार्च,2016 शाम पांच बजकर तीस मिनट में उत्सव</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  आज की प्रस्तुुति में केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक मोहन राकेश तथा निर्देशक सुश्री देवेन जोशी है। ‘‘आधे-अधूरे’’ नाटक समकालीन व यर्थाथपरक नाटक है। इस नाटक की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी भाषा है इसमें वह सामथ्र्य है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां- राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>आधे-अधूरे एक स्त्री-पूरूष के बीज के तनावों का दस्तावेज़ है। इस परिवार की मुख्य पात्रा सावित्री एक बेल की भांति है जो अपने जीवन में एक पुरूष की तलाश में है जो सम्पूर्ण पुरूष हो। इसलिए इस नाटक की लेखनी इस प्रकार है कि पुरूष पात्र का कोई नाम नहीं है बस पुरूष एक,दो व तीन है। इसमें पुरूष पात्र का स्वरूप,भाव व चेहरा बदल रहा है परन्तु स्त्री पात्र की परिस्थिीतियां,स्थान व समय नहीं। पुरूष सम्पूर्ण नाटक में एक अनिश्चित पात्र होते हुए भी एक निश्चित पात्र है। सावित्री का महेद्रं नाथ का अधिक नज़दीक से जानने से अब उससे वितृष्णा होने लगी है। क्योंकि जीवन से सावित्री की अपेक्षाएं बहुमुखी और अनन्त है पर यह अकांक्षा पूरी नहीं हो पाती, क्योंकि सम्पूर्णता की तलाश ही वाजि़ब नहीं।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>पुरूष एक सावित्री का पति महेद्रं नाथ का गुबार कुछ इस तरह से निकलता है। परिवार के सभी सदस्यों के द्वारा हर वक़्त की धुत्कार, हर वक़्त की कोचं बस यही कमाई है मेरी इतने सालों की। वह कहता है कि आज घर में उसकी हालत बस एक नौकर के समान है। अब वह केवल रबर स्टेम्प का टप्पा है जो सिर्फ घिसता चला जाता है। वह अपनी पत्नी के पुरूष मित्रों को जानता है और कभी-कभी उनका जि़क्र करके अपने दिल की भड़ास निकालता रहता है।</p>
<p>यह नाटक एक पारिवारिक विघटन की गाथा भी है। एक अभिशप्त कुटुम्ब जिसका हर पात्र अपने जीवन में आधा-अधूरा है व इस भव सागर में निर्जन सा जीवन जी रहे है। कहानी एक विशेष परिवार की है जिसकी परिस्थितियां विशेष है और सभी सदस्य उन्हीं उल्लझनों में उल्लझे रहते हैं अपने-अपने अस्तिव की तलाश में सभी के विचार हर घड़ी एक-दुसरे से टकराते रहते है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>एक अन्य स्तर पर यह नाटय-रचना मानवीय सन्तोष के अधूरेपन का रेखांकन है। जो जीवन में सम्पूर्णता को प्राप्त नही कर पाते। </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1.jpg" alt="Shimla Gaiety Theater" width="1000" height="685" class="alignnone size-full wp-image-4578" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-300x206.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-768x526.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-100x70.jpg 100w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-218x150.jpg 218w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-696x477.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-613x420.jpg 613w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ की पहली कड़ी में दोपहर बाद संवाद युवा मण्डल, मण्ड़ी द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य ‘‘बांठड़ा’’  गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश में जहां 25-30 किलोमीटर बाद भाषा के स्वरूप में अन्तर आ जाता है वहीं लोकनाट्यों के नाम उन्हें अभिनीत करने की शैली भी बदल जाती है। लोकधर्मी नाट्य परम्परा बांठड़ा मण्डी में बहुत प्रचलित है। </p>
<p><a href="http://ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>बांठड़ा में पौराणिक मिथकों की कथा,सामाजिक,धार्मिक,सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक घटनाओं के अंश लोकनाट्य बांठड़ा के माध्यम से दर्शाए गए हैं। भारतीय नाट्य विधाओं में एक बहुत महत्वपूर्ण विधा रही स्वाँग, जिसमें कलाकार सामाजिक कुरितीयों पर बहुत साधारण और सटीक तरीके से मजाक-मजाक में तीखे प्रहार करते हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसे प्रदर्शनों में कलाकारों ने राजाओं तक पर तीखे प्रहार किए हैं। यह विधा अलग-अलग प्रांतो में अलग नामों से जानी जाती है।</p>
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