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	<title>HP Health Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Health Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>हिमाचल के इकलौते मातृ शिशु अस्पताल केएनएच में  स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, 188 बेड के लिए महज 58 नर्सें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/kamla-nehru-hospital-shimla-staff-shortage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2016 10:12:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केएनएच में आने वाली वार्ड सिस्टर दो से तीन महीने बाद ही डेपुटेशन का जुगाड़ कर लेती हैं। इसके कारण वहां स्थायी तौर पर काम कर रही वार्ड नर्सों पर काम का बोझ बढ़ जाता है शिमला- प्रदेश में स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही है। कहीं स्टाफ की कमी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/kamla-nehru-hospital-shimla-staff-shortage/">हिमाचल के इकलौते मातृ शिशु अस्पताल केएनएच में  स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, 188 बेड के लिए महज 58 नर्सें</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>केएनएच में आने वाली वार्ड सिस्टर दो से तीन महीने बाद ही डेपुटेशन का जुगाड़ कर लेती हैं। इसके कारण वहां स्थायी तौर पर काम कर रही वार्ड नर्सों पर काम का बोझ बढ़ जाता है<br />
</strong><br />
<strong>शिमला- </strong> प्रदेश में स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही है। कहीं स्टाफ की कमी है तो कहीं जरूरत से ज्यादा स्टाफ है। हालांकि पिछली विधानसभा में मुख्यमंत्री ने डेपुटेशन रद्द करने के आदेश दिए थे, लेकिन डेपुटेशन अभी भी बदस्तूर जारी है। इसके कारण कई चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ की कमी भारी पड़ रही है।<br />
<div id="attachment_8358" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img fetchpriority="high" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-8358" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward.jpg" alt="knh-general-ward" width="800" height="580" class="size-full wp-image-8358" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward-300x218.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward-768x557.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward-324x235.jpg 324w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward-696x505.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/knh-general-ward-579x420.jpg 579w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-8358" class="wp-caption-text">File Photo: Himachal Watcher</p></div>
<p>प्रदेश के इकलौते मातृ शिशु अस्पताल में भी स्थिति कुछ ऐसी है। यहां पर स्थिति इतनी खराब है कि अस्पताल में 188 बेड के लिए मात्र 58 नर्सें दिन-रात सेवाएं दे रही हैं।  स्टाफ की कर्मी का खामियाजा मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। यहीं नहीं, वार्ड सिस्टर तक पूरी नहीं है। दरअसल केएनएच में वार्ड सिस्टर के 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 10 की तैनाती है। मुश्किल तब हो जाती है, जब अधिकतर वार्ड सिस्टर डेपुटेशन का जुगाड़ कर अपनी मनमर्जी के स्टेशनों पर चली जाती हैं। ऐसा कई बार हो चुका है।<br />
<strong><br />
पढ़ें: </strong><a href="https://himachalwatcher.com/2012/08/29/24-hours-of-horror-at-the-kamla-nehru-hospital-lady-reading-shimla/" target="_blank">कमला नेहरू अस्पताल में दहशत के 24 घंटे (लेडी रीडिंग शिमला)</a></p>
<p>सूत्रों का कहना है कि एक वार्ड सिस्टर पिछले छह महीनों से डेपुटेशन पर मंडी में सेवाएं दे रही है। यही हाल नई ज्वाइन करने वाली वार्ड सिस्टरों का भी है, जो ज्वाइंनिंग के दौरान ही दो या तीन महीने बाद मनमर्जी के स्टेशनों के जुगाड़ में लगी हैं।  केएनएच में 16 डिपार्टमेंट हैं, लेकिन वार्ड सिस्टर मात्र 10 ही हैं, जिनकी संख्या सोमवार तक केवल दस थी, लेकिन तीन वार्ड सिस्टर ने हाल ही में ज्वाइन किया है। इनमें से भी दो से तीन वार्ड सिस्टर छुट्टी पर हों तो मरीजों की देखभाल करना अस्पताल प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो जाती है। </p>
<p>पढ़ें:<a href="https://himachalwatcher.com/2012/08/10/principal-igmc-visits-knh-lady-reading-after-the-annoyed-doctors-complained-about-the-poor-condition-of-the-canteen-but-the-patients-again-could-not-get-an-ear/" target="_blank">हिमाचल के प्रमुख अस्पतालों में से एक के लिए क्या ये सुविधाएं स्वीकार्य हैं?</a></p>
<p>अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पहुंच के चलते केएनएच में आने वाली वार्ड सिस्टर दो से तीन महीने बाद ही डेपुटेशन का जुगाड़ कर लेती हैं। इसके कारण वहां स्थायी तौर पर काम कर रही वार्ड नर्सों पर काम का बोझ बढ़ जाता है । हालात यह है कि हाउस किपिंग का जिम्मा तक वार्ड सिस्टर के हवाले है। इस एकमात्र महिला अस्पताल में मात्र तीन प्रशिक्षित मिडवाइफ  हैं तथा क्लास-4 स्टॉफ की भी भारी कमी है।</p>
<p>पढ़ें: <a href="https://himachalwatcher.com/2012/07/21/lady-readingknh-shimla-imparting-medical-training-to-security-guards/" target="_blank">लेडी रीडिंग शिमला में सुरक्षा गार्ड कर रहे डॉक्टरों का काम </a></p>
<p>अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने कहा कि  सरकारें एवं स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों के बावजूद यह अस्पताल बुनियादी सुविधाओं से महरूम है।  विशेषकर स्टाफ  नर्सें व निचली श्रेणी के स्टॉफ  की जितनी संख्या होनी चाहिए उससे कई गुना कम है ।</p>
<p>प्रत्येक वार्ड में तीन शिफ्टों में केवल एक नर्स पूरा वार्ड देखती है। समिति की शिमला इकाई की अध्यक्ष आशु भारती का कहना है कि डाक्टरों के ड्यूटी के घंटे अधिक होने के साथ-साथ नर्सिंग स्टॉफ  कम होने के कारण 10-12 दिनों में नाइट ड्यूटी लगती है। लेबर वार्ड में तो आठ दिन के बाद नाइट ड्यूटी लगती है। कई नर्सिज को तो लगातार एक-एक महीने तक सेवाएं देनी पड़ती हैं।  जब तक सरकार एवं स्वास्थ्य प्रशासन अस्पताल की बेहतरी के लिए प्राथमिकता के तौर पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक  गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की अपेक्षा करना बेमानी होगा।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/kamla-nehru-hospital-shimla-staff-shortage/">हिमाचल के इकलौते मातृ शिशु अस्पताल केएनएच में  स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, 188 बेड के लिए महज 58 नर्सें</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>जोगेंद्रनगर अस्पताल में 1.5 लाख आबादी के स्वस्थ्य का जिम्मा केवल  5 चिकित्सकों पर, 13 पद खाली, रोजाना सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ता है बिना इलाज़</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/15/jogindernagar-civil-hospital-staff-shortage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Oct 2016 10:50:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Civil Hospital jogindernagar]]></category>
		<category><![CDATA[Health Staff Shortage]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जोगेंद्रनगर- नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में शुक्रवार को उपचार करवाने आए करीब सौ से अधिक मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। अस्पताल में तैनात कुल पांच चिकित्सकों में से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन सेवा में तैनात दो चिकित्सक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/15/jogindernagar-civil-hospital-staff-shortage/">जोगेंद्रनगर अस्पताल में 1.5 लाख आबादी के स्वस्थ्य का जिम्मा केवल  5 चिकित्सकों पर, 13 पद खाली, रोजाना सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ता है बिना इलाज़</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जोगेंद्रनगर-</strong>  नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में शुक्रवार को उपचार करवाने आए करीब सौ से अधिक मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। अस्पताल में तैनात कुल पांच चिकित्सकों में से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन सेवा में तैनात दो चिकित्सक ही देर शाम तक मरीजों की जांच करते दिखे। इसके बावजूद कुछ मरीजों का इलाज नहीं हो पाया। अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों को परीक्षा के लिए भेजा गया था, जबकि एक चिकित्सक रात्रि कालीन सेवा के बाद अवकाश पर था।</p>
<p>अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन ओपीडी को छोड़कर अन्य सभी ओपीडी को चिकित्सकों के न होने के कारण बंद रखना पड़ा। अस्पताल में चल रही चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को लगातार निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दोपहर 12 बजे तक करीब दो सौ ओपीडी अस्पताल में दर्ज हो चुकी थी। इनमें कुछ ही मरीजों का उपचार हो पाया तथा अन्य को बिना उपचार ही लौटना पड़ा।</p>
<p>अस्पताल में स्वीकृत 19 पदों में से 13 पद खाली हो चुके हैं। अस्पताल में शिशु विशेषज्ञ का तबादला करीब एक सप्ताह पहले कर दिया गया है। अस्थायी तौर पर सेवा दे रही महिला चिकित्सक को भी नागरिक अस्पताल से हटा दिया गया है। मौजूदा समय में कुल पांच चिकित्सकों पर ही क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख आबादी के स्वास्थ्य जांचने का जिम्मा है। रोजाना की तरह शुक्रवार को भी अस्पताल में मरीजों का आना सुबह नौ बजे से ही शुरू हो गया था। ओपीडी के बाहर देर शाम तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ा। अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक ओपीडी दर्ज की जा रही है, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। </p>
<p>अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के बारे में लगातार स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी को पूरा नहीं किया जा सका है। अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों को मरीजों का उपचार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। शुक्रवार को भी मरीजों का उपचार अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों को ही करना पड़ा। </p>
<p>जितेंद्र चौहान, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर</p>
<p>Photo: NBC News/Representational </p>
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			</item>
		<item>
		<title>कमला नेहरू अस्पताल दयनीय हालत में : 1 बैड पर 3 मरीज, गर्भवती महिलाये जमीन पर सोने को मजबूर , छत से टपकता है पानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/31/facilities-at-kamala-nehru-hospital-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 Jul 2016 05:38:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Minister]]></category>
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		<category><![CDATA[Maternity Health]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वर्ष 1924 से इस अस्पताल में 174 बैड से ही काम चलाया जा रहा है शिमला- राज्य मातृ एवं शिशु रोग अस्पताल कमला नेहरू में दिनोंदिन अव्यवस्था फैलती जा रही है। न तो सफाई व्यवस्था है और न ही अस्पताल में दाखिल होने वालों के लिए पर्याप्त बैड हैं, जिसके कारण आए दिन लोगों को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वर्ष 1924 से इस अस्पताल में 174 बैड से ही काम चलाया जा रहा है </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> राज्य मातृ एवं शिशु रोग अस्पताल कमला नेहरू में दिनोंदिन अव्यवस्था फैलती जा रही है। न तो सफाई व्यवस्था है और न ही अस्पताल में दाखिल होने वालों के लिए पर्याप्त बैड हैं, जिसके कारण आए दिन लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। वर्ष 1924 से इस अस्पताल में 174 बैड से ही काम चलाया जा रहा है। इन 92 वर्षो में अस्पताल में जहां ओपीडी व महिलाओं की संख्या बढ़ी है।</p>
<div id="attachment_6666" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-6666" class="wp-image-6666 size-full" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla.jpg" alt="lady-reading-shimla" width="800" height="533" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla-300x200.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla-768x512.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla-696x464.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/lady-reading-shimla-630x420.jpg 630w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-6666" class="wp-caption-text">Photo: FIle Image Taken by HW, 2012</p></div>
<p>वहीं, दूसरी ओर तकनीक भी बदली, मगर बावजूद इसके बैड की संख्या 174 से आगे नहीं बढ़ सकी। आलम यह है कि कमला नेहरू अस्पताल को राज्य स्तरीय अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद एक बैड पर दो से तीन महिलाओं को उनके नवजात शिशुओं को लेकर दिन गुजारने पड़ रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य को खतरा रहता है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="https://himachalwatcher.com/2012/08/29/24-hours-of-horror-at-the-kamla-nehru-hospital-lady-reading-shimla/" target="_blank">कमला नेहरू अस्पताल में दहशत के 24 घंटे (लेडी रीडिंग शिमला)</a></p>
<p>सामान्य डिलीवरी के बाद जहां महिला को कुछ समय बाद घर भेज दिया जाता है, लेकिन कमला नेहरू अस्पताल में संक्रमण की वजह से महिलाओं को उसी बैड पर और दिन गुजारने पड़ रहे हैं। हालांकि अस्पताल का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो हर वर्ष आने वाली महिलाओं की प्रतिशतता में वृद्धि हो रही है, जिसके चलते एक ओर जहां ओपीडी में चालीस से पचास प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं, दाखिल महिलाओं की संख्या भी पांच वर्षो में ही हजारों में है।</p>
<p>ये भी पढ़ें:<a href="https://himachalwatcher.com/2012/08/10/principal-igmc-visits-knh-lady-reading-after-the-annoyed-doctors-complained-about-the-poor-condition-of-the-canteen-but-the-patients-again-could-not-get-an-ear/" target="_blank">हिमाचल के प्रमुख अस्पतालों में से एक के लिए क्या ये सुविधाएं स्वीकार्य हैं?</a></p>
<p><strong>सफाई व्यवस्था खस्ताहालत</strong></p>
<p>कमला नेहरू अस्पताल में सफाई व्यवस्था खस्ताहालत है। अस्पताल के स्नानागार का पानी बाहर फर्श पर बह रहा होता है। इससे सारी गंदगी वार्ड तक चली जाती है। इतना ही नहीं शौचालय की नालियां बंद होने के कारण आसपास दुर्गध फैली रहती है, इससे लोगों का यहां पर खड़ा रहना भी मुश्किल होता है। गंदगी बीमारियों को न्योता दे रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="https://himachalwatcher.com/2012/07/21/lady-readingknh-shimla-imparting-medical-training-to-security-guards/" target="_blank">लेडी रीडिंग शिमला में सुरक्षा गार्ड कर रहे डॉक्टरों का काम </a></p>
<p><strong>छत से टपकता है पानी</strong></p>
<p>कमला नेहरू अस्पताल के एंटीनेटल वार्ड में छत से पानी टपकता है। वार्ड में पहले ही एक बैड में तीन-तीन मरीज दाखिल किए गए हैं। ऊपर से छत से पानी टपकने के कारण मरीजों को और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।</p>
<div id="attachment_6665" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-6665" class="wp-image-6665 size-full" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh.jpg" alt="special-ward-knh" width="800" height="600" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-768x576.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-265x198.jpg 265w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-696x522.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/special-ward-knh-560x420.jpg 560w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-6665" class="wp-caption-text">Photo: FIle Images Take by HW, 2012</p></div>
<p><strong>जमीन पर लेटते हैं मरीज</strong></p>
<p>कमला नेहरू अस्पताल में एक बैड पर तीन-तीन महिलाएं होने के कारण महिलाओं को रात के समय जमीन पर लेटने को मजबूर होना पड़ रहा है। रात होते ही अपनी तलाई और कंबल लाकर महिलाएं जमीन पर ही बिस्तर बना देती है।</p>
<div id="attachment_6663" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1.jpg" rel="attachment wp-att-6663"><img loading="lazy" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-6663" class="wp-image-6663 size-full" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1.jpg" alt="knh-shimla1" width="800" height="533" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1-300x200.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1-768x512.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1-696x464.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/knh-shimla1-630x420.jpg 630w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></a><p id="caption-attachment-6663" class="wp-caption-text">Photo: FIle Image Take by HW</p></div>
<p><strong>जांच केंद्र की खस्ता हालत</strong></p>
<div id="attachment_6667" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-6667" class="wp-image-6667 size-full" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh.jpg" alt="newborn-baby-knh" width="800" height="439" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh-300x165.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh-768x421.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh-696x382.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/newborn-baby-knh-765x420.jpg 765w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-6667" class="wp-caption-text">Photo: FIle Images</p></div>
<p>कमला नेहरू अस्पताल में एंटीनेटल वार्ड में बने एग्जामिनेशन रूम की हालत खस्ता है। बैड पर भी गंदगी फैली हुई है। कूड़ेदान गंदगी से भरे हुए हैं। दीवारे सीलन के कारण खराब हो गई हैं। इस सबके बावजूद प्रशासन का कभी इस ओर ध्यान नहीं गया।</p>
<p><strong>बयान</strong></p>
<p>कमला नेहरू अस्पताल में प्रतिवर्ष ओपीडी, डिलीवरी व अन्य स्वास्थ्य संबंधी क्रियाओं की प्रतिशतता में वृद्धि होती रही है, क्योंकि यहां महिलाओं को बेहतर इलाज मिलता है। बैड की संख्या 174 है, इससे अधिक बैड रखने के लिए यहां जगह भी नहीं है। सीजेरियन में महिलाओं को कुछ दिनों के लिए दाखिल किया जाता है। नॉर्मल डिलीवरी में सिर्फ महिला को रेस्ट के लिए बैड पर लाया जाता है, जिसमें संक्रमण का खतरा नहीं रहता।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एलएस चौधरी, एमएस, कमला नेहरू अस्पताल</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/31/facilities-at-kamala-nehru-hospital-shimla/">कमला नेहरू अस्पताल दयनीय हालत में : 1 बैड पर 3 मरीज, गर्भवती महिलाये जमीन पर सोने को मजबूर , छत से टपकता है पानी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/cadets-falls-ill-at-ncc-camp-in-rewalser-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:49:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और  स्कूल के पानी का सैंपल फेल  हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>  रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg" alt="NCC Battalion Mandi" width="800" height="535" class="alignnone size-full wp-image-6583" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-300x201.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-768x514.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-696x465.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-628x420.jpg 628w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।</p>
<p>फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया।  तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।</p>
<p><strong>26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट</strong></p>
<p>newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर</strong></p>
<p>एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई। </p>
<p><strong>रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल</strong></p>
<p>एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।</p>
<p>सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p>सवाल यह भी</p>
<p>रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।</p>
<p>मुहिम को झटका</p>
<p>रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।</p>
<p>Photo: TNS/Divya Himachal </p>
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		<item>
		<title>हिमाचल  में 20 % बच्चे  कुपोषण के शिकार, 5 साल की आयु भी नहीं कर पाते पूरी: सर्वे</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/02/malnutrition-children-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Jul 2016 12:39:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[Hansraj Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में सही देखभाल की कमी से बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। हर साल 1000 में से 42 बच्चे 5 साल की आयु भी पूरी नहीं कर पाते। यह बात हाल ही में हुए कई सर्वे में सामने आई है। एनएचएम ने लोगों से बच्चों की सही देखभाल और खुराक पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश में सही देखभाल की कमी से बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। हर साल 1000 में से 42 बच्चे 5 साल की आयु भी पूरी नहीं कर पाते। यह बात हाल ही में हुए कई सर्वे में सामने आई है। एनएचएम ने लोगों से बच्चों की सही देखभाल और खुराक पर ध्यान देने की अपील की है।</p>
<p>मिशन निदेशक हंसराज शर्मा ने बताया कि 2005-06 में हुए सर्वे से खुलासा हुआ था कि प्रदेश में 20 प्रतिशत बच्चे जिनकी आयु 5 वर्ष से कम है, वे गंभीर कुपोषण से ग्रस्त हैं। 43 प्रतिशत बच्चे अपनी उम्र की स्वस्थ बच्चों की तुलना में कम वजन के हैं। 2013 में हुए सर्वे के अनुसार 1000 में से 42 बच्चे 5 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर पाते।</p>
<p>इसकी वजह कुपोषण से ग्रस्त बच्चों में दस्त, खसरा, न्यूमोनिया और अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता का घटना माना गया है। बताया कि जन्म के समय ढाई किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों को कमजोर माना जाता है। जन्म से दो वर्ष तक शरीर और मानसिक विकास के लिये सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।</p>
<p>सही ध्यान देने पर सारी उम्र उसकी ज्ञान क्षमता, काम करने की ताकत और सेहत पर अच्छा असर होता है। अगर दो वर्ष तक बच्चे की सेहत की उपेक्षा करें तो कुपोषण बच्चे की सेहत और मानसिक विकास पर अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है। ऐसे में बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए जन्म के तुरंत बाद गर्म रखना, साफ  रखना और केवल माँ का दूध समय समय पर पिलाना बेहद जरूरी होता है।</p>
<p><strong>गर्भवती महिला का भी रखें ख्याल</strong></p>
<p>शर्मा ने बताया कि बच्चों में कुपोषण की मुख्य वजह आहार की कमी होती है। ऐसे में गर्भवती स्त्री का स्वस्थ रहना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला का कम से कम तीन बार वजन बढ़ने की जांच, खून की कमी की जांच, टेटनेस के टीके जरूरी हैं। इसके अलावा अनाज, दालें, हरी सब्जियां, और दूध, दही का सेवन भी जरूरी है। इसके अलावा जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर बच्चे को माँ का दूध पिलाएं।</p>
<p><strong>छह महीने का होते ही दें अनाज</strong></p>
<p>बच्चे के छह माह की आयु पूरी होने पर बच्चे को ताकत के लिए ऊपरी आहार देना चाहिए। शर्मा ने कहा कि बच्चे को उचित मात्रा में केला, आलू, अनाज, चीनी, शकरकंदी, चावल, कनक और फल देना चाहिए। साथ ही नौ महीने का होने पर भोजन को मसलकर खिलाना चाहिए।</p>
<p>Photo: Youth ki Awaaz/Representational Image</p>
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		<item>
		<title>डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jun 2016 11:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
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		<category><![CDATA[Umag Foundation Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/">डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता। </p>
<p>फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को <em>&#8220;रूटीन का मामला&#8221;</em> बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><iframe loading="lazy" width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/wvMb4H9U5KE" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।</p>
<p>आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण <em>&#8220;रक्त की कम मात्रा&#8221;</em> बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।</p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।</p>
<h3>तेरह मई को फेंका गया रक्त</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25646</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25764</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25700</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25775</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25789</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>यह है सोलह मई का आंकड़ा</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25664</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25649</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25679</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25677</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25682</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25683</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25687</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25696</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25731</td>
<td>एबी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25737</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25724</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25728</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25722</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25735</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25716</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25707</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25699</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25734</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/">डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चम्बा की कौशल्या ने की मिसाल कायम, 31साल से गांव-गांव घूमकर चला रही मातृत्व सुरक्षा मिशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/29/kaushalya-meet-himachals-award-winning-maternal-health-worker-with-31-years-of-service-in-remote-villages/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Apr 2016 11:08:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[BHARMOUR]]></category>
		<category><![CDATA[chamba]]></category>
		<category><![CDATA[FEMALE FOETICIDE]]></category>
		<category><![CDATA[HEALTH WORKER KAUSHALYA]]></category>
		<category><![CDATA[HLFPPT]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[KALSUIN HEALTH SUB CENTRE CHAMBA]]></category>
		<category><![CDATA[MATERNAL HEALTHCARE]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चम्बा- कौशल्या की उम्र गांव-गांव घूमकर मातृत्व की सुरक्षा के लिए उपाय करने की नहीं रही लेकिन इसके बावजूद वह तमाम परेशानियों के बावजूद बीते 31 साल से चम्बा जिले के गांवों की महिलाओं को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया कराने के मिशन में जुटी हैं। कौशल्या मुख्य रूप से प्रसव, बाल स्वास्थ्य सेवा, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चम्बा- </strong>  कौशल्या की उम्र गांव-गांव घूमकर मातृत्व की सुरक्षा के लिए उपाय करने की नहीं रही लेकिन इसके बावजूद वह तमाम परेशानियों के बावजूद बीते 31 साल से चम्बा जिले के गांवों की महिलाओं को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया कराने के मिशन में जुटी हैं। कौशल्या मुख्य रूप से प्रसव, बाल स्वास्थ्य सेवा, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन और गर्भनिरोध से जुड़े अन्य साधनों को महिलाओं तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।</p>
<p>58 साल की कौशल्या कालसुइन उप स्वास्थय केंद्र में कार्यरत हैं। यह चम्बा से 17 किलोमीटर दूर है। वह इस दुरुह स्थान पर बीते 28 साल से कार्यरत हैं। कौशल्या ने कहा कि, &#8220;यह अंत: प्रेरणा और अंतर्रात्मा की आवाज है, जो मुझे प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को मदद पहुंचाने के लिए मुझे बाध्य करती है। मुझे दफ्तर का काम खत्म होने के बाद भी काम करने में कोई परहेज नहीं। खराब मौसम भी कभी मेरी राह में आड़े नहीं आता। मैं 24 घंटे मातृत्व सम्बंधी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए तैयार रहती हूं। &#8221;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1.jpg" alt="kaushalya-himachal-health-worker-2 (1)" width="800" height="312" class="alignnone size-full wp-image-5174" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-300x117.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-768x300.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-696x271.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>अपनी नौकरी के दौरान कौशल्या ने 3000 से अधिक प्रसव कराए हैं। साथ ही वह इससे कहीं अधिक प्रसव सम्बंधी कार्य कर चुकी हैं। खास बात यह है कि कौशल्या ने जितने भी मामलों में हाथ लगाया है, वहां उन्हें 100 फीसदी सफलता मिली है और एक भी मामले में जच्चा या बच्चा की मौत नहीं हुई है और न ही कोई गर्भपात हुआ है।</p>
<p>कई मौकों पर कौशल्या ने ऐसे हालात का भी सामना किया है, जहां कन्या भ्रूण हत्या के लएि जोर दिया गया लेकिन कौशल्या ने साहस के साथ ऐसे लोगों को समझाया है। कौशल्या के अथक प्रयासों का नतीजा है कि छोटे और मझौले किसानों से युक्त इस इलाके में राज्य सरकार ने चुरी प्रखंड में स्थित कालसुइन उप स्वास्थ्य केंद्र को राज्य के एकमात्र &#8216;प्रसव केंद्र&#8217; का दर्जा दिया है। राज्य सरकार ने महिला प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba.jpg" alt=" Kalsuin health sub-centre" width="650" height="303" class="alignnone size-full wp-image-5176" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba.jpg 650w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba-300x140.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>इस केंद्र में पांच बिस्तर हैं। यहां एक प्रसव कक्ष भी है और एक बेबी केयर रूम भी है। यहां एक महिला एवं एक पुरुष स्वास्थय कर्मी कार्यरत हैं। कौशल्या के मुताबिक बीते एक दशक में उन्होंने 2500 से अधिक प्रसव किए हैं तथा जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं के अंदर 257 अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन स्थापित किए हैं। कौशल्या का उप स्वास्थय केंद्र 18 गावों के 2000 लोगों को सेवाएं उपलब्ध कराता है।</p>
<p>अधिकांश समय में कौशल्या इस केंद्र पर कार्यरत एकमात्र स्वास्थयकर्मी होती हैं। यहां एक पुरुष स्वास्थय कर्मी की भी नियुक्ति का प्रावधान है लेकिन यहां कोई महिला रोग विशेषज्ञ या फिर बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं होती। कौशल्या ने यहां कई आपातकालीन मामलों को सफलतापूर्वक निपटाया है क्योंकि इस केंद्र में नियुक्त विशेषज्ञों को समय-समय पर यहां से हटा लिया जाता है।</p>
<p>इस साल दिसम्बर में सेवानिवृत हो रहीं कौैशल्या ने कहा, &#8220;मैंने यहां प्रसव से पूर्व और प्रसव के बाद के सभी काम बखूबी किए हैं।&#8221; साल 1985 में कौशल्या ने महिला स्वास्थ्य कर्मी के तौर पर राज्य स्वास्थ्य विभाग में काम शुरू किया था। शुरुआत में वह चम्बा जिले के बारमोर प्रखंड के डाल्ली में कार्यरत थीं।</p>
<p>तीन साल बाद कौशल्या को कालसुइन स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय यहां का उप स्वास्थ्य केंद्र पंचायत की इमारत में था। इस केंद्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। कौशल्या ने तमाम कोशिशों के बाद इस स्वास्थ केंद्र को उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित किया। बाद में यह स्वास्थ्य केंद्र नई इमारत में स्थानांतरित किया।</p>
<p>हिंदुस्तान लेटेक्स फेमिली प्लानिंग प्रोमोशन ट्रस्ट ने कौशल्या को प्रसव और बाल स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रशिक्षित किया है। 1995 से कौशल्या ने घरों में जाकर प्रसव और बाल स्वास्थ्य सेवा का काम शुरू किया। 2005 से कौशल्या अपने उप केंद्र में प्रसव का काम देख रही हैं। राज्य सरकार ने कौशल्या के काम को पहचान देते हुए उन्हें 2010 में जिला स्तरीय पुरस्कार दिया और फिर 2011 में राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 2011 की जनगणना के मुताबिक 89.96 प्रतिशत लोग आज भी गावों में रहते हैं। कौशल्या के काम को समझने के लिए किसी को काम्पट्रोलर एंड आडिटर जनरल ऑफ इंडिया की ताजातरीन रिपोर्ट को पढ़ने की जरूरत है, जिसमें कहा गया है कि स्वास्थय सेवा मुहैया कराने की दिशा में हिमाचल की स्थिति इतनी खराब है कि राष्ट्रीय ग्राणी स्वास्थ्य मिशन के तहत इसके 84 फीसदी प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों में 24 घंटे प्रसव सुविधा नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 500 स्वास्थ्य केंद्रों में से 308 में प्रसव कक्ष नहीं है और 493 केंद्रों पर नवजात की देखभाल के लिए सुविधा नहीं है। 2010-2015 के दौरान राज्य में कुल 668,442 महिलाओं के गर्भवती होने का पंजीकरण कराया गया था। इनमें से 53 फीसदी (354,022) को ही सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपयुक्त प्रसव सेवा मिल सकी जबकि लक्ष्य 70 फीसदी (467.909) का रखा गया था।   </p>
<p>Photo: Himachal Watcher/The Hans India</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खाली पेट  ही खिला दी कीड़े मारने की दवाई,  47 बच्चों की  तबीयत बिगड़ी ,6 की हालत गम्भीर,सरकार के अभियान पर उठे सवाल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/school-deworming-program-in-himachal-goes-wrong-students-land-in-hospital/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Apr 2016 14:34:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Albendazole anti-worm medication]]></category>
		<category><![CDATA[DR DS Gurung Health Director]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Praveen Bhardwaj IGMC Shimla Himachal Health Services]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बच्चें को पेट दर्द, सिर चकराने और उल्टी की शिकायत होने लगी, 108 एंबुलेंस द्वारा बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंडी पहुंचाया गया, सिरमौर जिला के सराहां के कोटला बडोग उच्च पाठशाला में दवा खिलाने के बाद ऐसे मामले आए, बच्चों ने उल्टियां और पेट दर्द होने की शिकायत की शिमला- राष्ट्रीय कृमि दिवस पर [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बच्चें को पेट दर्द, सिर चकराने और उल्टी की शिकायत होने लगी, 108 एंबुलेंस द्वारा बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंडी पहुंचाया गया, सिरमौर जिला के सराहां के कोटला बडोग उच्च पाठशाला में दवा खिलाने के बाद ऐसे मामले आए, बच्चों ने उल्टियां और पेट दर्द होने की शिकायत की</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  राष्ट्रीय कृमि दिवस पर बुधवार को प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को पिलाई गई पेट के कीड़े मारने की एलबेंडाजोल दवा की खुराक से 47 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सोलन, सिरमौर और रामपुर के स्कूलों में दवा खाने के बाद रियेक्शन होने का मामला सामने आया।</p>
<p>बच्चों ने उल्टियां और पेट दर्द होने की शिकायत की। प्रदेश भर में स्कूलों में 19 वर्ष आयु तक के बच्चों को खुराक दी गई। जिला सोलन के बनलगी प्राथमिक स्कूल के 17 बच्चों को पेट के कीड़े मारने की एलबेंडाजोल दवा की खुराक रिएक्शन कर गई।</p>
<p>बच्चें को पेट दर्द, सिर चकराने और उल्टी की शिकायत होने लगी। 108 एंबुलेंस द्वारा बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंडी पहुंचाया गया। चिकित्सक डा. इंद्र ठाकुर ने बताया कि केंद्र में 17 बच्चों को उपचार के लिए लाया गया। इनमें छह की हालत को गंभीर देखते हुए आधा घंटा आब्जरवेशन में रखा गया। इसके बाद सेहत में सुधार देखते हुए उन्हें छुटटी दे दी गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा खाली पेट दवा खाने से शरीर पर यह प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। स्कूल में पेश आए इस हादसे के बाद सरकार के इस अभियान पर कई सवाल उठ रहे हैं। कृष्णगढ पंचायत के प्रधान रामनाथ वशिष्ठ व उप प्रधान पवन शर्मा ने बताया कि स्कूली बच्चों की सेहत के साथ इस प्रकार का लापरवाह पूर्ण रवैया विभागों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है</p>
<p><strong>इन स्कूलों में भी बिगड़ी बच्चों की तबीयत</strong></p>
<p>सिरमौर जिला के सराहां के कोटला बडोग उच्च पाठशाला में दवा खिलाने के बाद ऐसे मामले आए। स्कूल में सुबह सवा 10 बजे ऐलबेंडाजोल दवा खाने के बाद करीब 22 स्कूली बच्चों को खारिश, उल्टियां, आंखों में जलन व पेटदर्द शुरू हो गया। सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया गया।</p>
<p>19 बच्चों को उपचार के बाद आराम मिला। केवल तीन लड़कियों शालिनी, पूजा शर्मा व सुनाक्षी को राजगढ़ अस्पताल भेजा गया। राजगढ़ के डीएवी स्कूल की अध्यापिका उपासना ने बताया कि स्कूल की छात्रा विशाखा, कार्तिक व निश्चय राज की तबीयत बिगड़ी।</p>
<p>पांवटा ब्लॉक के तारुवाला प्राथमिक स्कूल में 2 बच्चों को दवा खाने के बाद रियेक्शन हुआ। उधर, रामपुर उपमंडल के तहत आने वाले प्राथमिक स्कूल दत्तनगर में भी दवा खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी। दवाई खाने के बाद तीन बच्चों को उल्टियां लग गई।</p>
<p><strong>कभी भी दे सकते हैं यह दवा</strong>ई</p>
<p>पेट के कीड़े मारने की दवा बच्चों को कभी भी दी जा सकती है। हालांकि किसी को गैस की समस्या हो सकती है। तब ही ऐसा होता है।<br />
डा. प्रवीण भारद्वाज, शिशु रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी</p>
<p><strong>स्वास्थ्य अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट</strong></p>
<p>बच्चों की तबीयत बिगड़ने को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनकी तबीयत बिगड़ सकती है। रिपोर्ट आने पर पूरी जानकारी दे सकेंगे।-डा. डीएस गुरुंग, स्वास्थ्य निदेशक</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Food and Civil Supplies Dept]]></category>
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		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Used Syringes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/">आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक सिरिंज की सूई मुड़ी हुई थी, जबकि एक अन्य सिरिंज में कुछ बाल मिले हैं। खराब सप्लाई मिलने के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने तुरंत सिरिंज की सप्लाई को रोक दी। स्टॉक को भी वापस कर दिया।</p>
<p><strong>जान से क्यों किया जा रहा खिलवाड़</strong></p>
<p>आईजीएमसी में खराब सिरिंज आने का मतलब सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इसमें एक सिरिंज में कुछ खून के धब्बे भी थे, मगर अधिकारियों का दावा है कि सिरिंज में वैक्यूम नहीं बन रहा था। ऐसे में सप्लाई को बंद किया गया है। मामले में अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी को एक मोहलत देकर छोड़ दिया गया है।</p>
<p><strong>सिविल सप्लाई को दिया है काम</strong></p>
<p>आईजीएमसी में सिरिंज की सप्लाई का कार्य सिविल सप्लाई काे दिया गया है। सिविल सप्लाई ही कंपनी को सिरिंज सप्लाई के लिए टेंडर करती है। रोजाना आईजीएमसी में आपातकाल समेत अन्य वार्डों में आने वाले सैकंडों मरीजों का ब्लड इन्हीं सिरिंज से लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सप्लाई आईजीएमसी में खराब सिरिंज की सप्लाई कर रहा है। यह सिरिंज आईजीएमसी के अपातकाल के अलावा आॅपरेशन थियेटर, वार्डों में में भी सप्लाई की जाती हैं।</p>
<p><strong>प्रशासन की लापरवाही</strong></p>
<p>खराब सिरिंज मामले की आईजीएमसी के विभिन्न वार्डों में दिनभर चर्चा रही। हर वार्ड में नर्सें व डाॅक्टरों के बीच खराब सिरिंज का मामला गर्माया रहा। हालांकि खुलकर इस मामले में कोई सामने नहीं आया। सूत्रों की माने तो इस तरह की सिरिंज पहले भी कई बार आईजीएमसी में आ चुकी है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। मामले में अधिकारियों का तर्क यह भी है कि आईजीएमसी में कई नर्सिंग काॅलेज से प्रशिक्षु नर्सें आती हैं। उन्हें ठीक ढंग से इंजेक्शन लगाना नहीं आता। ऐसे में सप्लाई के खराब होने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><strong>पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</strong></p>
<p>आईजीएमसी में इससे पहले भी यूज्ड सिरिंज का मामला आ चुका है। इससे पहले भी सितंबर, 2014 एक मरीज का तीमारदार ट्यूब काउंटर से सिरिंज खरीद कर लाया था, जैसे ही माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के लैब तकनीशियन ने सिरिंज का पैकेट खोला तो उसमें खून की कुछ बूंदें मौजूद थी। यह सिरिंज एक निजी काउंटर से लाई गई थी। उस समय भी प्रशासन ने काउंटर को सील कर दिया था। इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा था। अब दोबारा से खराब सिरिंज का मामला आने से सवालिया निशान उठने लगे हैं।</p>
<p>Photo: Trib Wpix/ Representational Image</p>
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