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	<title>KNH Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>KNH Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>बच्चा बदलने के मामले में नर्स व दाई गिरफ्तार, लापरवाही का सारा ठीकरा निम्न स्टाफ के सर फोड़ पल्ला रहा झाड़ केएनएच प्रबंधन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/two-arrested-in-knh-child-swapping-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2016 10:22:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Heath Department]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Lady reading Shimla]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla Police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बदले हुए बच्चों की माताओं की प्रसूति के समय थी दाई रूप देवी की ड्यूटी,अस्पताल प्रशासन ने भी की कार्रवाई की तैयारी, निलंबित होंगी महिला कर्मी शिमला- राजधानी शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में बच्चा बदलने के मामले में पुलिस ने मंगलवार देर शाम दो महिला कर्मचारियों पुष्पा व रूप देवी को गिरफ्तार किया [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/two-arrested-in-knh-child-swapping-case/">बच्चा बदलने के मामले में नर्स व दाई गिरफ्तार, लापरवाही का सारा ठीकरा निम्न स्टाफ के सर फोड़ पल्ला रहा झाड़ केएनएच प्रबंधन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बदले हुए बच्चों की माताओं की प्रसूति के समय थी दाई रूप देवी की ड्यूटी,अस्पताल प्रशासन ने भी की कार्रवाई की तैयारी, निलंबित होंगी महिला कर्मी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में बच्चा बदलने के मामले में पुलिस ने मंगलवार देर शाम दो महिला कर्मचारियों पुष्पा व रूप देवी को गिरफ्तार किया है। पुष्पा नर्स है जो नर्सरी रूम में तैनात थी। रूप देवी केएनएच में दाई के तौर पर कई साल से सेवाएं दे रही है। बदले हुए बच्चों की माताएं अंजना व शीतल की प्रसूति के समय भी रूप देवी की ड्यूटी थी।</p>
<p><strong>पढ़ें:</strong> <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/22/shimla-child-swapping-case/" target="_blank">कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे</a></strong></p>
<p>पुलिस ने पूछताछ के बाद पुष्पा व रूप देवी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में यह अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई पुलिस की ओर से की गई है। अस्पताल प्रबंधन के बड़े अधिकारी इससे पहले इस मामले से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। उन्होंने लापरवाही का सारा ठीकरा निम्न स्टाफ पर फोड़ दिया है। दोनों महिला कर्मचारियों के गिरफ्तार होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने भी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इन महिला कर्मचारियों को अस्पताल प्रशासन निलंबित करेगा जिससे संबंधित फाइल बनाई जा रही है। जब भी किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होता है तो उसके बाद प्रशासन सबसे पहले निष्कासित करता है। दो दिन के भीतर दोनों कर्मचारियों के निलंबित होने के संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या इस तरह पहले भी बच्चे बदले गए होंगे?</strong></p>
<p>केएनएच में बच्चे बदलने के मामले में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस तरह पहले भी बच्चे बदले गए होंगे? अगर पहले भी ऐसा होता रहा होगा तो फिर कितने परिवारों में ऐसे बच्चे होंगे जो असली माता-पिता के हैं ही नहीं। क्या पुत्र मोह में बच्चे बदलने का खेल पहले से चल रहा होगा? अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि बच्चे अनजाने में बदले गए हैं या जानबूझ कर लेकिन आज भी केएनएच के रिकॉर्ड में कोई बच्चा बदला ही नहीं गया है। जिन कागजों पर बच्चों की प्रसूति दर्ज होती है, उन्हें सही ढंग से स्टाफ और प्रशासन काला करता है ताकि गलती कभी पकड़ी ही न जाए। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/25/knh-shimla-child-swapping-case/" target="_blank">केएनएच में अभिभावकों का धरना-प्रदर्शन, अस्पताल ने मानी गलती, लेबर रूम स्टाफ पर डाला सारा इलज़ाम</a></p>
<p>उक्त मामले में भी पुलिस ने केएनएच के रिकॉर्ड के हिसाब से मामले की नहीं सुलझाया बल्कि डीएनए रिपोर्ट के दम पर खुलासा हुआ है। अगर आज से पहले बच्चे बदले भी गए होंगे तो किसी भी माता-पिता को इस संबंध में पता नहीं चल पाया होगा। एक दाई आसानी से किसी भी बच्चे को एक-दूसरे के हाथों में थमा सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि केएनएच में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सबसे अधिक आते हैं जो काफी भोले होते हैं। स्टाफ के साथ ग्रामीण कम उलझते हैं। वे केवल डॉक्टरों की हां में हां मिलाने में लगे होते हैं। प्रदेश के एकमात्र मातृ एवं शिशु अस्पताल केएनएच में लापरवाही के कारण इस तरह का मामला सामने आना कई सवाल खड़े करता है। जब से यह मामला सामने आया है, ऐसे सैकड़ों माता-पिता चिंता में पड़ गए हैं जिनके बच्चे केएनएच में पैदा हुए हैं।</p>
<p>दो महिला कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पहले इन महिला कर्मचारियों से पूछताछ की गई। उसी आधार पर इन्हें गिरफ्तार किया गया। बुधवार को आरोपी महिलाओं को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।</p>
<p> <strong>दाई नहीं बताती बेटा हुआ या बेटी</strong></p>
<p>पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि दाई यह बताती ही नहीं है कि बेटा हुआ है या बेटी। अगर लेबर रूम में प्रसूता का कोई तीमारदार न हो तो किसी को नहीं पता होता है कि बेटी या बेटा पैदा हुआ है। जिस दिन बच्चे बदले गए थे, उस दिन भी दोनों बच्चों के संबंध में दाई ने नहीं बताया था। दाई ने बच्चे पैदा होने के बाद नर्सरी रूम में तैनात नर्स को बच्चे थमा दिए थे। इसके अलावा यह नहीं बताया था कि किस महिला को क्या पैदा हुआ है। ऐसे में अब पुलिस भी चिंता में है। ऐसी लापरवाही पहले भी हुई होगी लेकिन लेबर रूम में तैनात किस कर्मचारी की गलती सबसे अधिक है, यह पुलिस तय नहीं कर पा रही है।</p>
<p><strong>जानिए कब क्या हुआ</strong></p>
<p>26 मई- केएनएच में शीतल की प्रसूती हुई। उसके साथ एक अन्य लड़की थी जिसे नर्स ने बताया कि शीतल के लड़का हुआ है। कुछ देर बाद बताया कि लड़की हुई है। उन्हें लड़की थमा दी गई।</p>
<p><strong>13 जून</strong>&#8211; शिकायतकर्ता शीतल ने बच्ची का डीएनए टेस्ट करवाया।</p>
<p><strong>28 जून</strong>-डीएनए रिपोर्ट आई जो परिजनों से मेल नहीं खा रही थी।</p>
<p><strong>30 जून</strong>&#8211; परिजनों ने केएनएच प्रबंधन से लिखित शिकायत की।</p>
<p><strong>13 जुलाई</strong>&#8211; परिजनों ने पुलिस अधीक्षक शिमला से शिकायत की।</p>
<p><strong>14 जुलाई</strong>&#8211; छोटा शिमला थाना के एसएचओ ने मामले की जांच के लिए परिजनों को थाने में बुलाया।</p>
<p><strong>15 जुलाई</strong>&#8211; पुलिस की निगरानी में डीएनए टेस्ट करवाया गया।</p>
<p><strong>28 जुलाई</strong>&#8211; रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई।</p>
<p><strong>4 अगस्त</strong>&#8211; पुलिस से दोबारा शिकायत की गई।</p>
<p><strong>27 अगस्त</strong>&#8211; बच्ची का डीएनए सैंपल लिया गया।</p>
<p><strong>9 सितंबर</strong>&#8211; फोरेंसिक लैब जुन्गा से रिपोर्ट मिली। बच्चे का डीएनए माता-पिता से नहीं मिला।</p>
<p><strong>जच्चा-बच्चा के फुट-फिंगर प्रिंट लेना जरूरी</strong></p>
<p>स्वास्थ्य विभाग की ओर मंगलवार को त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से सभी सीएमओ ने भाग लिया। इस दौरान केएनएच में बच्चा बदलने के मामले को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान सभी सीएमओ को सख्त निर्देश दिए गए कि अस्पतालों में होने वाले प्रसव के दौरान लापरवाही न बरती जाए और प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिला के अंगूठे के निशान और नवजात के पैरों के निशान फार्म पर लिए जाएं। </p>
<p>इसके साथ ही मामले के दौरान तैनात स्टाफ की जिम्मेदारी भी तय करने को कहा गया। इसके अलावा सारे रिकार्ड को अप टू डेट करने के निर्देश जारी किए गए। इसके साथ ही सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए कि वह जेनेरिक दवाएं लिखनी सुनिश्चित करें। इतना ही नहीं बैठक में यह भी कहा गया कि जो डाक्टर जेनेरिक दवाएं लिखे वह यह भी सुनिश्चित करें कि स्टोर पर वे दवाइयां मरीज को उपलब्ध भी हों। ऐसा न करने की स्थिति में सीएमओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। </p>
<p>पीएनडीटी एक्ट के तहत सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें अपने अधीन आने वाले क्षेत्र विशेष में अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों का हर तीन माह में निरीक्षण करना होगा। बैठक के दौरान सामने आया कि अधिकतर मामलों में निरीक्षण नहीं किया जाता है। इसके साथ-साथ फूड सैंपल लेने वाले अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं वह अधिक मात्रा में खाद्य वस्तुओं के सैंपल ले और तय समय में उनकी जांच सुनिश्चित करें, ताकि घटियां सामान पर नजर रखी जा सके।</p>
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		<title>केएनएच में अभिभावकों का धरना-प्रदर्शन, अस्पताल ने मानी गलती, लेबर रूम स्टाफ पर डाला सारा इलज़ाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Oct 2016 14:09:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[DR LS Chaudhary]]></category>
		<category><![CDATA[Khalini Councillor Praveen Kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: केएनएच में बदले गए बच्चों के मामले पर सोमवार को बच्चों के अभिभावक सहित खलिणी के दर्जनों लोगों ने सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोला। गुस्साए लोगों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के कमरे के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और ऐसी लापरवाही पर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पढ़ें: [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला: केएनएच में बदले गए बच्चों के मामले पर सोमवार को बच्चों के अभिभावक सहित खलिणी के दर्जनों लोगों ने सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोला। गुस्साए लोगों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के कमरे के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और ऐसी लापरवाही पर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/22/shimla-child-swapping-case/" target="_blank">कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे</a></p>
<p>इस दौरान लोगों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ 2 दिन में सख्त कार्रवाई करने को कहा है। यदि इस तय अवधि में दोषियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों ने शहर में चक्का जाम करने की चेतावनी प्रशासन को दी है। इस दौरान लोगों ने कहा है कि अस्पताल की इतनी बड़ी लापरवाही का खमियाजा 2 माताओं व 2 नवजातों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने डिलिवरी के समय तैनात डाक्टरों व पैरामैडीकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और आरोपियों को सलाखों के पीछे डालने की मांग की है। इस मौके पर बच्ची के पिता जितेंद्र व निशांत के पिता अनिल ने एमएस(MS) को 26 अक्तूबर तक दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है।</p>
<p><strong>अस्पताल में सिस्टम को भी किया जाए दुरुस्त</strong></p>
<p>इस मौके पर स्थानीय लोगों ने चिकित्सा अधीक्षक को लेबर रूम में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा है। उन्होंने कहा कि नवजात के पैदा होने के बाद उन्हें अलग-अलग रखने की व्यवस्था की जाए, टोपियों व नवजातों केे कपड़ों में टैग लगाते समय सावधानियां बरती जाएं ताकि गलती से भी अदला-बदली का मामला पेश न आए। इसके अलावा जहां नवजात को रखा जाता है, उस कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। </p>
<p><strong>डीसी -एसपी से मिला प्रतिनिधिमंडल </strong></p>
<p>केएनएच में धरना देने के बाद लोगों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक व जिलाधीश से भी मिला और उनसे प्रतिनिधिमंडल ने मामले पर जल्द जांच पूरी कर दोषियों को सख्त सजा दिलवाने का आग्रह किया। खलिणी के पार्षद परवीण कुमार ने बताया कि यदि प्रशासन ने मामले पर इस बीच कोई कार्रवाई नहीं की तो इसके बाद खलीणी के लोग जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक कार्यालय का भी घेराव कर सकते हैं।</p>
<p><strong>केएनएच ने मानी गलती, लेबर रूम के स्टाफ पर फोड़ा सारा ठीकरा </strong></p>
<p>केएनएच प्रबंधन ने बच्चा बदलने को लेकर आखिरकार अपनी गलती मान ली है। प्रबंधन ने माना है कि डिलीवरी रूम में मौजूद स्टाफ के लोगों से भारी चूक हुई है। प्रबंधन ने अपने सिर पर आई बला को लेबर रूम में डिलीवरी के दौरान मौजूद डॉक्टरों तथा सहयोगी स्टाफ पर इसका ठीकरा फोड़ दिया है।</p>
<p>इससे एक बात और जाहिर हो गई कि अस्पताल में प्रबंधन तथा गायनी विभाग दो धड़ों में बंट चुका है। सोमवार को इसका ताजा उदाहरण देखने को भी मिला जब बच्चे बदलने वाले दंपतियों से प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और प्रबंधन ने दोनों दंपतियों से बातचीत की तो कमेटी रूम में गायनी विभाग की ओर से कोई जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद नहीं थे।</p>
<p>अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एलएस चौधरी से दोनों दंपतियों ने मांग की है कि जो भी दोषी है उन्हें सामने लाकर 24 घंटों के भीतर सलाखों के पीछे डाला जाए। मंडी के दंपति ने बताया कि जब उन्होंने प्राइवेट लैब की डीएनए रिपोर्ट उन्हें दिखानी चाही तो जांच कमेटी ने उन्हें ऐफिडेविट बनाने की बात कही।</p>
<p>जिससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। उन्होंने इस दौरान सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज तक चैक करने की बात की। इधर बात ज्यादा बिगड़ती देख अस्पताल के एमएस दंपतियों को शांत करवाते नजर आए।  इधर शिमला दंपति ने जब डिलीवरी के लिए जिम्मेवार व्यक्ति के बारे में पूछना चाहा तो एमएस ने दो टूक कहते हुए कहा कि इसके लिए तो डिलीवरी वाले ही पूर्ण रुप से जिम्मेवार है।  </p>
<p>जिससे कि पता चलता है कि अस्पताल अब दो गुटों में बंट चुका है। हालांकि इस पूरे प्रकरण में एमएस पर ही सभी लोगों का गुस्सा फूटा। प्रबंधन के साथ मीटिंग में न होने पर विभागाध्यक्ष का कहना था कि वह इस दौरान ओपीडी में थीं। इसके अलावा अस्पताल में प्रदर्शन की उन्हें कोई सूचना नहीं है।</p>
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		<title>कमला नेहरूअस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Oct 2016 05:34:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में शुक्रवार को दोनों दंपति हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा-यह अपने आप में बड़ा विचित्र और तकलीफदेह केस है। आप दोनों खुद अलग कमरे में बैठ कर बच्चों की अदला-बदली की तारीख तय कर कोर्ट को बता दें। दोनों दंपति पहली बार एक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/22/shimla-child-swapping-case/">कमला नेहरूअस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में शुक्रवार को दोनों दंपति हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा-यह अपने आप में बड़ा विचित्र और तकलीफदेह केस है। आप दोनों खुद अलग कमरे में बैठ कर बच्चों की अदला-बदली की तारीख तय कर कोर्ट को बता दें।</p>
<p>दोनों दंपति पहली बार एक साथ बैठे। माहौल में खुशी और गम का अजीब मंजर था। तय हुआ कि 26 अक्तूबर को जितेंद्र के खलीनी स्थित घर में दोनों बच्चों की भाई बहन की तरह अन्न ग्रहण की रस्म होगी। दोनों पांच महीने पहले 26 तारीख को ही पैदा हुए थे।</p>
<p>और इसी दिन दोनों बच्चे अपने असली मां बाप को सौंप दिए जाएंगे। बाद में कोर्ट को इसकी सूचना दे दी जाएगी। हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने डीएनए जांच रिपोर्ट पेश करने के बाद शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे इस मामले में सुनवाई शुरू की।</p>
<p><strong>मुख्य न्यायाधीश भी हुए दुखी, कहा दोनों के साथ हुई है ज्यादती</strong></p>
<p>इस दौरान दोनों दंपति बच्चों के साथ कोर्ट में उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों बच्चों के अभिभावकों को डीएनए रिपोर्ट से अवगत करवाया। सीजे मंसूर अहमद मीर ने बच्चा बदलने की घटना को दु:खद बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से दोनों परिवारों के साथ ज्यादती हुई है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने दोनों बच्चों के अभिभावकों से कहा कि हालांकि बच्चों को अलग करना दुखदायी और असहनीय पीड़ा दायक होगा, लेकिन यदि दोनों परिवार बच्चों को भाई-बहन मान कर आगे बढ़ें तो वह पीड़ा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चा बदलने के दोषियों को किसी भी सूरत में बक्शा नहीं जाएगा। इस मामले पर आगामी सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।</p>
<p><strong>दोनों परिवारों ने मिल बैठकर लिया बड़ा फैसला</strong></p>
<p>इससे पहले खंडपीठ ने दोनों दंपति को आपसी सुलह से मामला कोर्ट से बाहर सुलझाने को कहा। कोर्ट ने पुलिस और अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिए कि वह इस मामले को अपने लॉजिकल तरीके से सुलझाएं।</p>
<p>कोर्ट की सलाह पर दोनों बच्चों के माता-पिता रजिस्ट्रार जनरल के कक्ष में आपसी समझौते के लिए बैठे। दो दौर में चली इस चरचा और बातचीत के बाद सहमति से निर्णय लिया कि  दोनों दंपति शिमला के खलीनी स्थित अमानत के पिता के घर पर दोनों बच्चों का अन्न ग्रहण अनुष्ठान करेंगे।</p>
<p>इसमें दोनों बच्चों अमानत और नितांश को दोनों दंपति अपने-अपने परिवार की मौजूदगी में अपनाएंगे। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को बच्चे सौंप देंगे। ये बातचीत बड़े सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। सभी मान रहे थे कि गलती उनकी नहीं, केएनएच की है। 27 अक्तूबर को दंपति पुन: कोर्ट में पेश होंगे और कानूनी रूप से दोनों के बीच बनी सहमति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।</p>
<p><strong>कोर्ट के बाहर रोती रहीं माएं</strong></p>
<p>कोर्ट के बाहर दोनों माएं रोती रहीं। अंजना के आंसू तो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दोनों मीडिया से बात करते हुए रो रहे थे। अंजना को बेटे के छिन जाने का दुख था जिसकी वह बायोलॉजिकल मां नहीं।</p>
<p>शीतल को भी अपनी बेटी के चले जाने का दुख सता रहा था जो उसकी नहीं है। दोनों परिवारों के बीच एक अजीबो-गरीब रिश्ता बन गया था। दंपतियों में बच्चा बदलने की घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा था। वे कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/22/shimla-child-swapping-case/">कमला नेहरूअस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>पीलिया के बाद शिमला वायरल फीवर की चपेट में, रोजाना सैंकड़ों मरीज हो भर्ती</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/20/viral-fever-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jun 2016 12:33:53 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Viral Fever]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश की राजधानी में वायरल फीवर इन दिनों सक्रिय हो गया है। अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों मरीज इस बीमारी के भर्ती हो रहे हैं। शिमला के तीनों अस्पताल आईजीएमसी, केएनएच व दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में बच्चों सहित बड़े लोग वायरल फीवर की चपेट में आने से अपना उपचार करवा रहे हैं। यह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश की राजधानी में वायरल फीवर इन दिनों सक्रिय हो गया है। अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों मरीज इस बीमारी के भर्ती हो रहे हैं। शिमला के तीनों अस्पताल आईजीएमसी, केएनएच व दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में बच्चों सहित बड़े लोग वायरल फीवर की चपेट में आने से अपना उपचार करवा रहे हैं। यह वायरल मौसम में फेरबदल के कारण होता है।</p>
<p>इन दिनों राजधानी में कभी गर्मी तो कभी ठंड हो रही है, ऐसे में लोग अपने स्वास्थ्य का सही रूप से ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। इस वायरल की चपेट में छोटे बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े लोग भी आ रहे हैं। चिकित्सों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि वायरल से बचने के लिए जल्द ही चिकित्सकों को दिखाएं। वहीं शुक्रवार को आईजीएमसी में 100, के.एन.एच. 40 व डीडीयू में 60 के करीब वायरल के मरीज अपनी जांच करवाने पहुंचे। सभी अस्पतालों में रोगियों की संख्या में 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। रिपन अस्पताल में आम दिनों में रोजाना वायरल के करीब 300 केस पहुंचते थे, जबकि पिछले एक सप्ताह से विभिन्न ओपीडी में इनकी संख्या 400 तक पहुंच रही है। इसी तरह आईजीएमसी में भी वायरल के रोगी सामान्य से अधिक मात्रा में आ रहे हैं। हालांकि डाक्टरों के अनुसार वायरल से डरने की जरूरत नहीं है। हल्की सी सावधानी ही इससे बचा सकती है।</p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>वायरल बुखार के लक्षण</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>आखें लाल होना</td>
</tr>
<tr>
<td>बुखार में शरीर का ताप 101 से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है!</td>
</tr>
<tr>
<td>खांसी और जुकाम होना</td>
</tr>
<tr>
<td>जोड़ों में दर्द और सूजन होना</td>
</tr>
<tr>
<td>थकान और गले में दर्द होना</td>
</tr>
<tr>
<td>नाक बहना होना</td>
</tr>
<tr>
<td>बदन दर्द होना</td>
</tr>
<tr>
<td>भूख न लगना</td>
</tr>
<tr>
<td>लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना व सिरदर्द होना आदि</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>ऐसे करें बचाव </strong></p>
<p>डाक्टरों के अनुसार हल्का वायरल होने पर घबराने की जरूरत नहीं होती। इसमें दवाइयां लेने की भी आवश्यकता नहीं होगी। वायरल होने पर नमक व पानी के गरारे करें, इसके अलावा स्टीम लेने से भी यह आसानी से ठीक हो जाता है। वहीं इस मौसम में किनू, संतरा या आंवला आदि खाने चाहिए। इसके अलावा खाने-पीने का खास ध्यान रखें, ताजा खाना ही खाएं। यदि वायरल अधिक हो जाए तो डॉक्टरों की सलाह लें, क्योंकि इससे चेस्ट इंफेक्शन होने का डर बना रहता है।</p>
<p>बता दें कि मौसम बदलाव के कारण अस्पतालों में वायरल के रोगियों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। रिपन अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से 20 से 30 फीसदी तक रोगी बढ़े हैं। वायरल होने पर रोगियों को घबराना नहीं चाहिए। डाक्टरों की सलाह से आसानी से वायरल ठीक हो जाता है।</p>
<p>With Inputs from Eenaduindia</p>
<p>Photo: Health Zone5/Representational Image</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jun 2016 11:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donors]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Donated Blood Wasted]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Watcher Blood Donors]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Secretary]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Blood Banks]]></category>
		<category><![CDATA[Umag Foundation Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता। </p>
<p>फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को <em>&#8220;रूटीन का मामला&#8221;</em> बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/wvMb4H9U5KE" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।</p>
<p>आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण <em>&#8220;रक्त की कम मात्रा&#8221;</em> बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।</p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।</p>
<h3>तेरह मई को फेंका गया रक्त</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25646</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25764</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25700</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25775</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25789</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>यह है सोलह मई का आंकड़ा</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25664</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25649</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25679</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25677</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25682</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25683</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25687</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25696</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25731</td>
<td>एबी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25737</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25724</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25728</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25722</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25735</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25716</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25707</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25699</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25734</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
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			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला के ब्लड बैंक ने कूड़ेदान में फ़ेंक दिया 21 यूनिट रक्त, रक्तदाताओं की भावनाएं आहत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/shimla-ddu-hospital-blood-bank-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 May 2016 05:23:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। </p>
<p>प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि डीडीयू अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त फेंके जाने से रक्तदाताओं की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं। उन्होंने डीडीयू और कमलानेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद करके वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोलने और स्टाफ को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक को मज़बूत बनाने में लगाने की मांग की।</p>
<p>फाउंडेशन ने बताया कि गत 25 मार्च से 3 मई के बीच डीडीयू ब्लड बैंक ने 21 यूनिट रक्त इसलिए फ़ेंक दिया क्योकि वह 35 दिन की मियाद पूरी कर चुका था। फेंका गया रक्त संक्रमित नहीं था और उसे समय रहते आईजीएमसी या किसी अन्य ब्लड बैंक को दिया जा सकता था। रक्त फेंकना एक घृणित अपराध है क्योंकि रक्तदाता निस्वार्थ भाव से दूसरों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद 87 बार खून दान कर चुके हैं।</p>
<p>फाउंडेश का यह भी कहना है कि डीडीयू अस्पताल ब्लड बैंक से आईजीएमसी ब्लड बैंक मुश्किल से आधे घंटे की दूरी पर है जहाँ रक्त की अक्सर कमी रहती है और रोज़ाना औसत खपत 40 से 60 यूनिट की है। वहां रक्त आसानी से भेजा जा सकता था। लेकिन डीडीयू ब्लड बैंक ने इस ओर कोई प्रयास नहीं करता है और 35 दिन के बाद बड़ी आसानी से खून कूड़ेदान में फ़ेंक देता है। वहां 6 यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेश ने सुझाव देते हुए कहा कि डीडीयू और कमला नेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद कर के वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोले जाएं। इन दोनों ब्लड बैंकों के स्टाफ को आईजीएमसी में शिफ्ट कर के उसे और मज़बूत बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>फाउंडेश ने प्रदेश में ब्लड कंपोनेंट थेरेपी को बढ़ावा देने की मांग की ताकि एक यूनिट रक्त को कई मरीजों के काम में लाया जा सके। अभी ये सुविधा आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज और मंडी के अस्पताल में ही उपलब्ध हैं जहाँ इसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है।   </p>
<p>Photo: Mental Floss/Representational Image</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:45:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[Juandice]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है। सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है।</p>
<p>सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी में पीलिया से हुई मौतों पर शहर के अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले पर बोलने से मना कर दिया था। वहीं इन अधिकारियों ने भी ड्यूटी पर गाज न गिरे इसलिए उन्होंने भी मीडिया और प्रेस के फोन सुनने बंद कर दिए थे।<br />
मंगलवार शाम सवा छह बजे के करीब स्टेट सर्विलेंस अधिकारी डा. राकेश रोशन भारद्वाज से जब पीलिया के पॉजिटिव मामलों की जानकारी प्राप्त की तो उन्होंने बताया कि दिनभर में उनके पास अठारह पॉजिटिव मामलों की सूची आई है।</p>
<p>डीडीयू अस्पताल में पीलिया के कुल अठारह मामले पॉजिटिव आए जोकि स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर के हवाले से तो ठीक बैठते हैं लेकिन बाकी के अस्पतालों के आंकड़ों को लिया जाए तो पॉजिटिव मामलों में बढ़ोतरी हो गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ गया है?</p>
<p>विभाग और अस्पतालों के बीच सामंजसय की कमी है। केएनएच अस्पताल में भी पीलिया के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। हालांकि अगर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में पीलिया के पॉजिटिव मामलों के आंकड़े लिए जाए तो इनमें और बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/">पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>के.एन.एच. में 20 गर्भवती महिलाऐ पीलिया की चपेट में, पीलिया के डर  से हस्पताल छोड़ने पे मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/jaundice-cases-in-kamala-nehru-hospital-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:31:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[aundice Outbraek Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jundice Death Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[PGI Hospital Chandigarh]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3650</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला-  राजधानी में पीलिया का कहर अभी भी थमता नजर नहीं आ रहा है। अभी तक पीलिया से 6 मौतें हो चुकी हैं जबकि इनमें बीते दिन बिलासपुर की रहने वाली एक गर्भवती महिला की पी.जी.आई. चंडीगढ़ में मौत हो हुई है लेकिन ऐसी ही स्थिति इन दिनों मातृक एवं शिशु रोग कमला नेहरू अस्पताल (के.एन.एच.) [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/jaundice-cases-in-kamala-nehru-hospital-shimla/">के.एन.एच. में 20 गर्भवती महिलाऐ पीलिया की चपेट में, पीलिया के डर  से हस्पताल छोड़ने पे मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी में पीलिया का कहर अभी भी थमता नजर नहीं आ रहा है। अभी तक पीलिया से 6 मौतें हो चुकी हैं जबकि इनमें बीते दिन बिलासपुर की रहने वाली एक गर्भवती महिला की पी.जी.आई. चंडीगढ़ में मौत हो हुई है लेकिन ऐसी ही स्थिति इन दिनों मातृक एवं शिशु रोग कमला नेहरू अस्पताल (के.एन.एच.) में देखने को मिल रही है। यहां पर अब गर्भवती महिला भी पीलिया की चपेट में आ गई है।</p>
<p>के.एन.एच. में करीब 20 महिलाएं ऐसी हैं जोकि पीलिया की चपेट में आई हैं। आलम है कि कुछ महिलाएं पीलिया से बचने के चक्कर में अस्पताल से छुट्टी करवाकर वापस घर की ओर रवाना हो रही हैं। ऐसा उदाहरण मंगलवार को के.एन.एच. में देखने को मिला जब रोहड़ू की रहने वाली गर्भवती महिला कमला देवी अपने घर की ओर जा रही थी।जब उससे पूछा गया कि आप इस अवस्था में घर क्यों जा रही हो। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जोकि पीलिया की चपेट में आई है।</p>
<p>अस्पताल में एक ही वार्ड में करीब 30 से 40 महिलाएं भर्ती हैं।ऐसे में अब जिन महिलाओं को पीलिया भी नहीं हुआ है वे भी डर के कारण अपना सही रूप से इलाज नहीं करवा पा रही हैं। अब तक के मामले सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक पूरे शहर से 12 दिसम्बर से 5 जनवरी तक 254 मामले आए हैं। राजधानी में 21 जनवरी से 7 फरवरी तक शहर में 515 मरीज पीलिया के शिकार हुए हैं अभी तक कुल 1400 के करीब लोग पीलिया के शिकार हुए हैं</p>
<p><em>Image: File Photo/Himachal Watcher</em></p>
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		<title>शिमला मे पीलिया के 60 नए मामले,  एक महिला की मौत, अआईजीएमसी व केएनएच ने साधी चुप्पी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jan 2016 11:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है। शिमला के निगम विहार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है।</p>
<p>शिमला के निगम विहार की रहने वाली सुनीता (29) की मौत पीलिया से आईजीएमसी में हुई है। रिपोर्ट में हेपेटाईटिस ई होने का हवाला दिया गया है। आईजीएमसी में मंगलवार देर रात को सुनीता की मौत हुई है। सुनीता गर्भवती थी व उसका पति रॉबिन सिंह आठ जनवरी को उसे केएनएच में ले गया। वहां चिकित्सकों ने चेकअप करने पर बताया कि सुनीता को पीलिया है। ऐसे में प्रसव में काफी परेशानी हो सकती है। यहां तक कि मां या बच्चे में से एक की मौत भी हो सकती है। नौ जनवरी को सुबह छह बजे सुनीता ने बेटे को जन्म दिया व इसके बाद कोमा में चली गई। </p>
<p>10 जनवरी को केएनएच की चिकित्सकों ने सुनीता को आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। उसे आईसीयू में रखा गया। वह तीन दिन आईजीएमसी में रही। मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। वहीं बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बच्चे को पीलिया है या नहीं। इस मामले पर आईजीएमसी व केएनएच दोनों अस्तपाल प्रबंधनों ने चुप्पी साध ली है। हालांकि चिकित्सकों का तर्क है कि प्रसव के दौरान लीवर फेल होने से सुनीता की मौत हुई है मगर यह बात उसके परिजन मान नहीं रहे हैं।</p>
<p>पति रॉबिन सिंह ने कहा कि डॉक्टरों ने डिलीवरी के दौरान सुनीता को पीलिया की बीमारी बताई थी। उन्होंने बताया था कि नार्मल डिलीवरी के बाद सुनीता का लीवर खराब हो गया था। वहीं, वाल्मीकि महासभा के महासचिव ने कहा है कि रॉबिन सिंह गरीब परिवार से संबंध रखता है। उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। शहर में पीलिया काफी फैलता जा रहा है। इस पर रोकथाम जरूरी है।</p>
<p><em>अभी मैं बैठक में हूं। इस मामले में बाद में बात करता हूं।<br />
डॉ. एलएस चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक,केएनएच</em></p>
<p>राजधानी शिमला में बुधवार को पीलिया के 60 नए मामले सामने आए। अकेले डीडीयू अस्पताल में पीलिया के 26 मामले सामने आए  हैं। करीब 100 लोगों कें सैंपल लिए गए थे। इनमें से 60 सैंपल पॉजीटिव आए हैं।</p>
<p>पीलिया से शिमला शहर में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। प्रशासन अब तक पीलिया पर काबू पाने में नाकाम रहा है व अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। लैब्स के बाहर लोगों को टेस्ट करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लोग अब शिमला शहर का पानी पीने से भी डरने लगे हैं। </p>
<p>सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों से पानी पीने से शिमला के लोग परहेज कर रहे हैं। अस्पतालों में आए मरीज और तीमारदार अपने साथ पानी की बोतल साथ ला रहे हैं। शहर में पीलिया फैले को एक महीना होने को है। अश्वनि खड्ड से पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इसके बावजूद शहर में पीलिया के मामलों का आना चिंता का विषय है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजना राव ने बताया कि पीलिया के 60 नए मामले सामने आए हैं। लोगों को स्वच्छ और उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए। </p>
<p><strong>शहर में नहीं हुआ अलर्ट जारी</strong></p>
<p>हैरानी इस बात की है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया को लेकर कोई जागरूकता अभियान शहर में नहीं चलाया है। यहां तक कि शहर में कोई अलर्ट भी जारी नहीं किया है। लोगों को पीलिया से बचने के संबंध में उपाय भी नहीं बताए जा रहे हैं। वहीं अधिकारी कार्यालय में बैठ कर फाइलों को निपटाने में लगे हुए हैं। नगर निगम शहर के कुछ हिस्सों में जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है।</p>
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