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	<title>IGMC Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>IGMC Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>IGMC शिमला में नई MRI मशीन का शुभारंभ, मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक टेस्ट की सुविधा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 06:14:42 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Sukhvinder Singh Sukhu]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: शुक्रवार को राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारंभ किया। राज्य सरकार ने बताया कि आईजीएमसी में 20 साल पहले स्थापित पुरानी एमआरआई मशीन को अत्याधुनिक एमआरआई मशीन से बदला गया है। राज्य सरकार ने कहा कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong><strong>:</strong> शुक्रवार को राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारंभ किया। राज्य सरकार ने बताया कि आईजीएमसी में 20 साल पहले स्थापित पुरानी एमआरआई मशीन को अत्याधुनिक एमआरआई मशीन से बदला गया है। राज्य सरकार ने कहा कि 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के स्थापित होने से लोगों को अब उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>AIIMS दिल्ली में भी किया जा रहा मशीन का उपयोग</strong></p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार, इसी तरह की हाई-एंड एमआरआई मशीन का उपयोग अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान दिल्ली में भी किया जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, शिमला, हमीरपुर, नेरचौक और चमियाणा अस्पताल में एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर हाई एंड टैक्नोलॉजी चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जा रही है।</p>
<p><strong>ऑर्थोपैडिक विभाग होगा अपग्रेड </strong></p>
<p>साथ ही राज्य सरकार ने यह भी कहा कि आईजीएमसी में ऑर्थोपैडिक विभाग को विश्व स्तरीय मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा। यहां शीघ्र ही रोबोटिक ऑर्थोपैडिक व स्पाईन सर्जरी आरम्भ करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार ने कहा कि आईजीएमसी में मेडिसिन, पेडियाट्रिक व श्वसन से सम्बन्धित अत्याधुनिक आईसीयू भी स्थापित किए जाएंगे।राज्य सरकार ने सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए देश व विदेश के अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों में एक्सपोजर टुअर आयोजित करने के भी निर्देश दिए है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ को नहीं मिल रहा न्यूनतम व अतिरिक्त कार्य का वेतन, ईपीएफ में भी गड़बड़ी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/17/igmc-contractual-workers-union-alleges-exploitation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Apr 2019 14:03:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Contract Workers]]></category>
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		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Vijender Mehra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन ने आईजीएमसी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला है। यूनियन ने आज एक बैठक कर प्रबंधन और ठेकेदारों पर कर्मचारियों को शोषित करने के आरोप लगाए हैं। यूनियन के महासचिव नोख राम ने कहा कि आईजीएमसी में सफाई कर्मचारियों का भारी शोषण किया जा रहा है। इन्हें चेंजिंग रूम व छुट्टियों की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन ने आईजीएमसी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला है। यूनियन ने आज एक बैठक कर प्रबंधन और ठेकेदारों पर कर्मचारियों को शोषित करने के आरोप लगाए हैं। </p>
<p>यूनियन के महासचिव नोख राम ने कहा कि आईजीएमसी में सफाई कर्मचारियों का भारी शोषण किया जा रहा है। इन्हें चेंजिंग रूम व छुट्टियों की पूर्ण व्यवस्था नहीं की जा रही है। इनसे अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है परन्तु उसके बदले इन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। इनके ईपीएफ में भी गड़बड़ी है। इन्हें ईएसआई की सुविधा सही से लागू नहीं की जा रही है। डेंटल कॉलेज़ में इन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। इस तरह सफाई कर्मचारियों का शोषण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।</p>
<p>यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र लाल ने कहा कि यूनियन ने लगभग छः महीने पहले आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदारों को मांग पत्र सौंपा था मगर उस पर अभी तक कोई भी अमल नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड अटेंडेंटों को अकुशल श्रेणी में रख कर उन  का भारी शोषण किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि वार्ड अटेंडेंटों की श्रेणी अकुशल मजदूर के बजाए अति कुशल की जाए क्योंकि वे एक्सरे,ड्रेसिंग,प्लास्टर,ऑक्सीजन लगाने,पेशेंट शिफ्टिंग,किचन,कुकिंग,टेलीफोन एक्सचेंज,इमरजेंसी,स्टिचिंग आदि बेहद कुशल कार्य करते हैं।</p>
<p>बैठक में निर्णय लिया गया कि आईजीएमसी प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज होगा।</p>
<p>बैठक सीटू कार्यालय शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष वीरेन्द्र लाल ने की। बैठक में सीटू जिला महासचिव विजेंद्र मेहरा,राज्य कोषाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा,यूनियन महासचिव नोख राम,जगत,लेखराज,सोहन लाल,मोहन,विद्या गाजटा,सुरेन्द्रा,शालू,मीरा,सीता,मीना,सुरेंद्र गाजटा,प्रवीण आदि मौजूद रहे।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Nov 2016 14:00:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी खुलने जा रही है। इसके लिए काम भी शुरू हो गया है। इस दौरान उपचार करवाने आए मरीजों को ग्रीन हाऊस से बाहर कर दिया गया। इस कारण मरीजों को अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। </p>
<p>लोगों की सुविधा के लिए ग्रीन हाउस बनाया गया था और लोग ओपीडी में सुबह जल्दी बारी आने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से एक दिन पहले ही पहुंच जाते थे और रात ग्रीन हाउस में गुजारते थे। इतना ही नहीं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए मरीज जिन्हें अस्पताल में बैड नहीं मिल पाता था, वह भी यहीं पर बैड मिलने तक इंतजार करते थे। इसके अलावा रात को मरीज के साथ आए तीमारदार भी दिन के समय ग्रीन हाउस में आराम करते हैं। आइजीएमसी में 100 से अधिक मरीजों के लिए सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब यह सारी सुविधाएं मरीजों व तीमारदारों से छिन गई हैं और मरीजों को अस्पताल में अब मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा।</p>
<p>ग्रीन हाउस में ओपीडी का काम शुरू होने के बाद अब लोग प्रशासन को कोस रहे हैं कि गरीब आदमी का आइजीएमसी में उपचार के लिए आना मुश्किल हो जाएगा। सर्दियों में बाहर रात काटना भी मुश्किल है और गरीब लोगों के लिए कमरा भी महंगा पड़ता है, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए आना संभव नहीं होगा। दूरदराज से मरीज इसी उम्मीद से आइजीएमसी एक दिन पहले पहुंच जाते थे कि ग्रीन हाउस में रात गुजारने के बाद सुबह जल्दी ओपीडी में नंबर लगाएंगे, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>स्टेचर भी किए बाहर</strong></p>
<p>ग्रीन हाउस के अंदर मरीजों की सुविधा के लिए रखे गए स्टेचर व व्हील चेयर भी बाहर कर दी गई हैं और जल्द ही इसमें ओपीडी का ताला लग जाएगा। आर्थो ओपीडी भी जल्द ही खुल जाएगी। ऐसे में मरीजों को अब दर-दर भटकना पड़ेगा और रात गुजारना मुश्किल हो जाएगा।<br />
<strong><br />
क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p>जिला कुल्लू से आए ओपी नेगी ने कहा कि आइजीएमसी में पहले ही बैड की कमी है। मरीज दूरदराज से उपचार करवाने आते हैं। दो-तीन दिन यहां पर लग जाते हैं, ऐसे में अधिकतर लोग ग्रीन हाउस में ही ठहरते थे। गरीब लोगों के लिए यह बहुत बड़ा आसरा था।</p>
<p>सरकाघाट से आई संतोष ने कहा कि आईजीएमसी प्रशासन को चाहिए कि या तो इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवाई जाए या ओपीडी ही कहीं और बनाई जाए। गरीब लोगों पर आईजीएमसी प्रशासन का निर्णय बहुत भारी पड़ेगा।</p>
<p>कुपवी से आए संजय ने कहा कि हर आदमी के लिए होटल में कमरा लेना मुश्किल है। अधिकतर लोग इसी के सहारे आईजीएमसी आते हैं। पहले प्रशासन को इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवानी चाहिए, फिर ओपीडी का काम शुरू करना चाहिए था। बहुत मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/">सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल में आउटडोर मरीजों के डायलीसिस की सुविधा ना होने के कारण जनता मोटी रकम खर्चने  को मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/no-dialysis-facility-at-igmc-shimla-for-outdoor-patients/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2016 10:38:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Dialysis Facility]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Minister]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[NRHM]]></category>
		<category><![CDATA[Poor Health Services]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भराड़ी में आउटडोर मरीजों से डायलिसिस के 2,500 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं, जबकि कुमारहट्टी में 1100 से 1500 रुपए लिए जा रहे हैं। शिमला- हिमाचल प्रदेश में मात्र 03 अस्पताल ऐसे हैं जहां आउटडोर मरीजों के डायलीसिस की सुविधा उपलब्ध है। इतना ही नहीं, प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में यह सुविधा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/no-dialysis-facility-at-igmc-shimla-for-outdoor-patients/">हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल में आउटडोर मरीजों के डायलीसिस की सुविधा ना होने के कारण जनता मोटी रकम खर्चने  को मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भराड़ी में आउटडोर मरीजों से डायलिसिस के 2,500 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं, जबकि कुमारहट्टी में 1100 से 1500 रुपए लिए जा रहे हैं।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश में मात्र 03 अस्पताल ऐसे हैं जहां आउटडोर मरीजों के डायलीसिस की सुविधा उपलब्ध है। इतना ही नहीं, प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में यह सुविधा नहीं है। अभी तक केवल सोलन, मंडी और धर्मशाला तीन ऐसे अस्पताल हैं जहाँ पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। अगर बात  प्रदेश के सबसे बड़े  अस्पताल  आईजीएमसी की करे तो  महज इनडोर मरीजों के लिए ही डायलिसिस की सुविधा है उपलब्ध है , जबकि आउटडोर मरीजों के लिए यहां डायलीसिस की व्यवस्था नहीं है। आउटडोर मरीजों को डायलिसिस के लिए भराड़ी, कुमारहट्टी या चंडीगढ़ जाना पड़ता है। यहां पर मरीजों से दुगने और तीगुने दाम वसूले जा रहे हैं। </p>
<p>शिमला के भराड़ी में आउटडोर मरीजों से डायलिसिस के 2,500 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं, जबकि कुमारहट्टी में 1100 से 1500 रुपए लिए जा रहे हैं। सोलन, मंडी और धर्मशाला में करीब एक साल पहले ही सेंटर शुरू किए गए हैं। यहां पर इनडोर के साथ -साथ आउटडोर मरीजों को भी डायलिसिस देने की सुविधा है। किडनी फेल होने की स्थिति मरीज को कई बार अस्पताल जाकर डायलिसिस करवाना होता है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में दाखिल नहीं किया जाता और उन्हें सप्ताह में एक या दो बार डायलीसिस करवाने की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें आउटडोर डायलिसिस दिया जाता है।</p>
<p><strong>पहले थी आईजीएमसी में  आउटडोर पेशेंट्स के लिए डायलिसिस सेंटर खोलने की योजना </strong></p>
<p>सूत्रों का कहना है कि पहले आईजीएमसी में ही आउटडोर पेशेंट्स के लिए डायलिसिस सेंटर खोलने की योजना थी। एनआएचएम ने इसके लिए प्रोपोजल भी तैयार कर दिया था, लेकिन आईजीएमसी में सेंटर खोलने के लिए जगह ही मुहैया नहीं करवाई गई। इसके बाद यह सेंटर धर्मशाला में खोला गया। प्रदेश में डायलीसिस सेंटर अभी तक आईजीएमसी में ही सुविधा मिल रही थी, जिससे दूरदराज के मरीजों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही थीं। सीटीवीएस विभाग में हार्ट संबंधी मरीजों को डायलिसिस करवाने के लिए लंबी-लंबी तारीखें दी जाती थीं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भरमौर का यह डॉक्टर पहले जरूरतमंद मरीजों को खून देता है फिर खुद ही करता है ऑपरेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/19/igmc-shimlas-dedicated-doctor-janak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Aug 2016 07:49:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashadeep Organization Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[BHARMOUR]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Janak Raj]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[shimla hospitals]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कई गरीब वर्ग से संबद्ध लोग बीमारी के दौरान उचित उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ देते थे। ये सब देखकर मन में हमेशा यह विचार आता था कि बड़ा होकर एक अच्छा डॉक्टर बनूं तथा लोगों की मदद कर सकूं शिमला- परंपरागत दृश्य यह होता है कि खून के अभाव में अव्वल तो [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कई गरीब वर्ग से संबद्ध लोग बीमारी के दौरान उचित उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ देते थे। ये सब देखकर मन में हमेशा यह विचार आता था कि बड़ा होकर एक अच्छा डॉक्टर बनूं तथा लोगों की मदद कर सकूं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> परंपरागत दृश्य यह होता है कि खून के अभाव में अव्वल तो मरीज के ऑपरेशन की बारी ही नहीं आती। कई बार डॉक्टर भी अल्टीमेटम दे देते हैं कि खून का इंतजाम करो तो ही ऑपरेशन होगा लेकिन एक डॉक्टर ऐसा है जिसके साथ ऐसा नहीं है। वह पहले मरीज को खून देता है फिर खुद ही ऑपरेशन भी करता है। बात हो रही है डॉ. जनकराज की। जिन्होंने अब तक 15 बार रक्तदान कर मरीजों का ऑपरेशन किया है।</p>
<p>भरमौर के सचूई गांव निवासी डॉ जनक कुछ इस तरह से ही जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहते हैं। आइजीएमसी शिमला में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात डॉ जनक कहते हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, समाज के हर वर्ग से जुड़े हर व्यक्ति की बदौलत हैं। जब समाज की उन्हें जरूरत थी, तो समाज ने उनका हर कदम पर साथ दिया। इसी कारण आज इस सम्मानजनक मुकाम तक पहुंचने पर मेरा दायित्व बनता है कि मैं कुछ लौटा पाने की कोशिश करूं।</p>
<p>डॉ जनक के पिता मजदूरी करते थे। बचपन में वे अकसर देखा करते थे कि कई गरीब वर्ग से संबद्ध लोग बीमारी के दौरान उचित उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ देते थे। ये सब देखकर मन में हमेशा यह विचार आता था कि बड़ा होकर एक अच्छा डॉक्टर बनूं तथा लोगों की मदद कर सकूं।</p>
<p>डॉ जनक राज ने गरीब लोगों की मदद को ही जीवन का लक्ष्य बनाया और आशादीप नामक संस्था से भी जुड़े हैं, जिसके माध्यम से वह अब तक हजारों मरीजों का निशुल्क इलाज कर चुके हैं। उनका मानना है कि सरकार ने गरीबों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर तरह-तरह के कार्यक्रम चला रखे हैं, लेकिन आज भी ये कार्यक्रम गरीबों की पहुंच से दूर हैं।</p>
<p>मेरा ध्येय है कि मैं एक ऐसी संस्था को अस्तित्व में लाऊं, जो महज गरीब व असहाय लोगों के लिए समर्पित होगी। यह संस्था गरीब परिवार से संबंध रखने वाले मरीजों का निशुल्क इलाज करवाएगी।</p>
<p>डॉ. जनक, सर्जन, आइजीएमसी शिमला</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/19/igmc-shimlas-dedicated-doctor-janak/">भरमौर का यह डॉक्टर पहले जरूरतमंद मरीजों को खून देता है फिर खुद ही करता है ऑपरेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jun 2016 11:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donors]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Watcher Blood Donors]]></category>
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		<category><![CDATA[HP Health Secretary]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Blood Banks]]></category>
		<category><![CDATA[Umag Foundation Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता। </p>
<p>फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को <em>&#8220;रूटीन का मामला&#8221;</em> बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/wvMb4H9U5KE" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।</p>
<p>आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण <em>&#8220;रक्त की कम मात्रा&#8221;</em> बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।</p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।</p>
<h3>तेरह मई को फेंका गया रक्त</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25646</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25764</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25700</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25775</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25789</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>यह है सोलह मई का आंकड़ा</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25664</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25649</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25679</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25677</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25682</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25683</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25687</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25696</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25731</td>
<td>एबी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25737</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25724</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25728</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25722</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25735</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25716</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25707</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25699</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25734</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
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			</item>
		<item>
		<title>नहीं खुला शिमला के युवक की हत्या का राज, पूछताछ जारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/30/totu-youth-murder-case-mystery-continues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 May 2016 06:50:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ankush]]></category>
		<category><![CDATA[Boileauganj Police Station]]></category>
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		<category><![CDATA[T otu]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>परिजन भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि अंकुश की हत्या के पीछे किसका हाथ हो सकता है, जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि यह गिरने का मामला नहीं है,एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है शिमला- शिमला के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>परिजन भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि अंकुश की हत्या के पीछे किसका हाथ हो सकता है, जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि यह गिरने का मामला नहीं है,एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला के टुटू में युवक की हत्या के मामले में वीरवार को फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने कुछ संदिग्धों से भी पूछताछ की है। अभी तक हत्या के मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। परिजन भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि अंकुश (22)की हत्या के पीछे किसका हाथ हो सकता है।</p>
<p>हालांकि, अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं आई है लेकिन पुलिस इस पूरे मामले को हत्या की नजर से देख रही है। बताया जा रहा है कि घटना से एक दिन पहले अंकुश के साथ कुछ लोगों ने झगड़ा किया था। इस दौरान उसकी पिटाई भी की गई।</p>
<p>पोस्टमार्टम के दौरान भी अंकुश के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए। इसके बाद डॉक्टरों ने साफ किया था कि यह गिरकर मौत का मामला नहीं लग रहा। इस तरह के संकेत मिलने के बाद ही पुलिस ने थाना बालूगंज में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।  </p>
<p>बुधवार को अंकुश टूटू स्थित अपने घर पर था। सुबह करीब ग्यारह बजे उसकी तबीयत खराब हुई और वह उल्टी करने के लिए बाथरूम में गया। उल्टी करते ही वह बाथरूम में गिर गया। घर पर अंकुश की मां थी उन्हें लगा उनके बेटे का पैर फिसल गया और वह गिर गया।</p>
<p>उन्होंने अपने दूसरे बेटे की मदद से तुरंत एंबुलेंस को बुलाया और अंकुश को अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। पहले यह मामला गिरने का ही बताया जा रहा था लेकिन जब पोस्टमार्टम हुआ तो उसके शरीर पर चोटों के निशान पाए गए ।</p>
<p>परिजनों के बयान लिए गए उन्होंने भी इस पूरे मामले में हत्या का अंदेशा जताया। एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि हर पहलू पर तफ्तीश की जा रही है।</p>
<p><strong>जानिए क्या है मामला </strong></p>
<p><strong>शिमला के टुटू में 22 साल के युवक की हत्या</strong></p>
<p>शिमला के टुटू में युवक की हत्या का मामला प्रकाश में आया है। युवक अंकुश (22) पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। इसके शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं। बुधवार सुबह 11 बजे घर पर उसकी तबीयत खराब हुई।</p>
<p>वह बाथरूम गया और उल्टियां की। इसके बाद वह बाथरूम में गिर गया। इलाज के लिए आईजीएमसी ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले मामला यह लग रहा था कि बाथरूम में फिसलने से उसकी मौत हुई है।</p>
<p>लेकिन जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि यह गिरने का मामला नहीं है। अंकुश की बाजू, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटों के निशान पाए गए हैं। इसके बाद परिजनों ने भी अंकुश की हत्या होने का अंदेशा जताया।</p>
<p>परिजनों के बयान लेने के बाद इस संदर्भ में थाना बालूगंज में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक अंकुश अपनी मां के साथ टुटू में अजय बिल्डिंग में रहता था। अंकुश ने चक्कर में एक होटल लीज पर ले रखा था।</p>
<p>उसका भाई करन भी इसी भवन में अलग फ्लोर में रहता है। बुधवार सुबह करीब 11 बजे अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और वह बाथरूम में गया। वहां वह उल्टी करने लगा और उसके बाद गिर गया। उसकी हालत देखकर तुरंत अंकुश की मां ने अपने बेटे करन को बुलाया।</p>
<p><strong>शरीर पर निकले चोटों के निशान</strong></p>
<p>यहां से 108 एंबुलेंस में उपचार के लिए आईजीएमसी ले गए। जहां अंकुश ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सपुर्द कर दिया गया है। इसके बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि अंकुश की हत्या की गई है। इसके शरीर पर मिले चोटों के निशान इस ओर इशारा कर रहे हैं।</p>
<p>परिजनों का कहना है कि मंगलवार को कुछ लोगों ने अंकुश के साथ मारपीट की है। इस बात का भी आरोप लगा है कि संभव है किसी ने अंकुश की हत्या करने की नीयत से उसे धोखे से जहर पिला दिया हो। हालांकि परिजनों की ओर से अभी तक इस मामले में किसी भी आरोपी को नामजद नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>हत्या का मामला दर्ज एसपी</strong></p>
<p>एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मामले के गहनता से जांच करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।</p>
<p><strong>खोजे जा रहे हैं साक्ष्य एएसपी</strong></p>
<p>मामले की जांच कर रहे एएसपी सिटी भजन देव नेगी कि घर की तलाशी ली जाएगी। संभव है वहां से इस मामले से जुड़े कोई साक्ष्य मिल पाए। कुछ संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे मामले की स्थिति साफ हो पाए। फिलहाल परिजनों की ओर से अब तक इस मामले में किसी को नामजद नहीं किया गया है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/30/totu-youth-murder-case-mystery-continues/">नहीं खुला शिमला के युवक की हत्या का राज, पूछताछ जारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Food and Civil Supplies Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC  Administration]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Used Syringes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक सिरिंज की सूई मुड़ी हुई थी, जबकि एक अन्य सिरिंज में कुछ बाल मिले हैं। खराब सप्लाई मिलने के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने तुरंत सिरिंज की सप्लाई को रोक दी। स्टॉक को भी वापस कर दिया।</p>
<p><strong>जान से क्यों किया जा रहा खिलवाड़</strong></p>
<p>आईजीएमसी में खराब सिरिंज आने का मतलब सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इसमें एक सिरिंज में कुछ खून के धब्बे भी थे, मगर अधिकारियों का दावा है कि सिरिंज में वैक्यूम नहीं बन रहा था। ऐसे में सप्लाई को बंद किया गया है। मामले में अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी को एक मोहलत देकर छोड़ दिया गया है।</p>
<p><strong>सिविल सप्लाई को दिया है काम</strong></p>
<p>आईजीएमसी में सिरिंज की सप्लाई का कार्य सिविल सप्लाई काे दिया गया है। सिविल सप्लाई ही कंपनी को सिरिंज सप्लाई के लिए टेंडर करती है। रोजाना आईजीएमसी में आपातकाल समेत अन्य वार्डों में आने वाले सैकंडों मरीजों का ब्लड इन्हीं सिरिंज से लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सप्लाई आईजीएमसी में खराब सिरिंज की सप्लाई कर रहा है। यह सिरिंज आईजीएमसी के अपातकाल के अलावा आॅपरेशन थियेटर, वार्डों में में भी सप्लाई की जाती हैं।</p>
<p><strong>प्रशासन की लापरवाही</strong></p>
<p>खराब सिरिंज मामले की आईजीएमसी के विभिन्न वार्डों में दिनभर चर्चा रही। हर वार्ड में नर्सें व डाॅक्टरों के बीच खराब सिरिंज का मामला गर्माया रहा। हालांकि खुलकर इस मामले में कोई सामने नहीं आया। सूत्रों की माने तो इस तरह की सिरिंज पहले भी कई बार आईजीएमसी में आ चुकी है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। मामले में अधिकारियों का तर्क यह भी है कि आईजीएमसी में कई नर्सिंग काॅलेज से प्रशिक्षु नर्सें आती हैं। उन्हें ठीक ढंग से इंजेक्शन लगाना नहीं आता। ऐसे में सप्लाई के खराब होने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><strong>पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</strong></p>
<p>आईजीएमसी में इससे पहले भी यूज्ड सिरिंज का मामला आ चुका है। इससे पहले भी सितंबर, 2014 एक मरीज का तीमारदार ट्यूब काउंटर से सिरिंज खरीद कर लाया था, जैसे ही माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के लैब तकनीशियन ने सिरिंज का पैकेट खोला तो उसमें खून की कुछ बूंदें मौजूद थी। यह सिरिंज एक निजी काउंटर से लाई गई थी। उस समय भी प्रशासन ने काउंटर को सील कर दिया था। इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा था। अब दोबारा से खराब सिरिंज का मामला आने से सवालिया निशान उठने लगे हैं।</p>
<p>Photo: Trib Wpix/ Representational Image</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शिमला कैंसर अस्पातल लिंक मार्ग की खस्ता हालत हादसों को खुला न्योता, लोक निर्माण विभाग  गहरी नींद में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/19/cancer-hospital-shimla-link-road-in-poor-condition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Apr 2016 08:23:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Cancer Hospital IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[HP PWD]]></category>
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		<category><![CDATA[IGMC Shimla Road]]></category>
		<category><![CDATA[Poor Road Conditions]]></category>
		<category><![CDATA[Poor Roads]]></category>
		<category><![CDATA[Road Side Railings]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Cancer Hospital]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4952</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला के कैंसर अस्पताल को जाने वाली सड़क बड़े हादसे को न्योता दे रही है। सर्कुलर रोड से कैंसर अस्पातल को लिंक करने वाले इस मार्ग की हालत इतना खस्ता है कि अगर वाहन चालक का जरा सा भी ध्यान भटक गया तो यहां पर कोई भी बड़े हादसे को होने से नहीं रोक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/19/cancer-hospital-shimla-link-road-in-poor-condition/">शिमला कैंसर अस्पातल लिंक मार्ग की खस्ता हालत हादसों को खुला न्योता, लोक निर्माण विभाग  गहरी नींद में</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला के कैंसर अस्पताल को जाने वाली सड़क बड़े हादसे को न्योता दे रही है। सर्कुलर रोड से कैंसर अस्पातल को लिंक करने वाले इस मार्ग की हालत इतना खस्ता है कि अगर वाहन चालक का जरा सा भी ध्यान भटक गया तो यहां पर कोई भी बड़े हादसे को होने से नहीं रोक सकता। इस सड़क का एक हिस्सा बूरी तरह क्षतिग्रस्त है जिसकी लोक निर्माण विभाग कोई सुध नहीं ले रहा है।</p>
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<p><strong>क्या है हालात</strong></p>
<p>सड़क के किनारे न तो रेलिंग है और न ही सुरक्षा को लेकर विभाग ने कोई इंतजाम किए हुए हैं। इस मार्ग पर चलने वाले वाहन चालकों और राहगीरों की थोड़ी सी भी असावधानी उन्हें बड़ी मुसबित में डाल सकती है। विभाग के संबंधित क्षेत्र का काम देख रहे अधिकारी एक हफ्ते के भीतर इस मार्ग पर रेलिंग लगाने की बात कर रहे हैं। शायद अधिकारी यह भूल गए है कि हादसा कभी किसी का इंतजार नहीं करता।</p>
<p> यह भी पढ़ें: <a href="https://himachalwatcher.com/2016/04/09/emergency-case-stuck-in-traffic-caused-by-wrongly-parked-car-on-congested-igmc-road/" target="_blank">तंग आईजीएमसी सड़क पर गलत तरीके से खड़ी गाड़ी  की वजह से लगा ट्रैफिक जाम </a></p>
<p><strong>वाहन का क्यों बिगड़ता है बैलेंस</strong></p>
<p>इस सड़क पर सफर करना इतना जोखिम भरा हो गया है कि अगर कोई वाहन अपना नियंत्रण खो बैठता है तो वह सीधे सड़क से नीचे गड्‌डे मे जा गिरेगा। इस क्षतिग्रस्त प्वाइंट पर अगर कोई वाहन चालक गलती से भी दूसरे वाहन को पास देता है तो यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा, सड़क भी धंस सकती है। कैंसर अस्पताल को जाने वाला यह मार्ग पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है। यहां पर अगर कोई गाड़ी आ जाती है तो उसकी सुरक्षा के लिए यहां पर लोगों को रेलिंग का न होना उसके लिए बड़ी मुसबित बन चुका है। गाड़ी आने पर उसे या तो भाग कर आगे जाना पड़ता है या उसे पीछे ही इंतजार करना पड़ता है। रात के समय इस मार्ग पर चलने से खतरा और भी बढ़ गया है।</p>
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<p><strong>इसलिए बन गया विकल्प</strong></p>
<p>सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं आराम की दृष्टि से भी यह सड़क वाहन चलाने योग्य नहीं रह गई है। इस सड़क पर जगह जगह इतने गड्‌ढे हैं कि चालकों को बचाते-बचाते वाहन चलाने पड़ रहे हैं। आईजीएमसी और कैंसर अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों को लाने और ले जाने के लिए इस मार्ग को लोग अधिक इस्तेमाल में लाते हैं लेकिन सड़क की खस्ता हालत विभाग की पोल खोल रही है। सरकार ने जब से संजौली आईजीएमसी मार्ग को ओपन कर दिया है तब से लोग इस मार्ग को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल में ला रहे हैं।</p>
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		<title>पीलिया से 2 और लोगों ने आईजीएमसी शिमला में तोड़ा दम, सरकारी आंकड़ों मे अब तक 13 की मौत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/jaundice-deaths-in-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 07:48:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Jaundice Deaths]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Deaths Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला में पीलिया का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को आईजीएमसी शिमला में पीलिया से 2 लोगों की मौत हो गई है। इसमें बिलासपुर के अतय मोहम्मद (68) व दूसरी मौत शिमला के विरेंद्र (45) की हुई है। सूत्रों के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति हैपेटाइटिस ई यानी पीलिया से ग्रसित [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला में पीलिया का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को आईजीएमसी शिमला में पीलिया से 2 लोगों की मौत हो गई है। इसमें बिलासपुर के अतय मोहम्मद (68) व दूसरी मौत शिमला के विरेंद्र (45) की हुई है। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति हैपेटाइटिस ई यानी पीलिया से ग्रसित थे जिससे इनकी मौत हुई है।</p>
<p>बिलासपुर के अतय मोहम्मद 10 दिन पहले हैपेटाइटिस ई की शिकायत को लेकर आईजीएमसी में भर्ती हुए थे। इस दौरान यहां इलाज चलता रहा लेकिन बुधवार को इनकी हालत बिगड़ी गई और वीरवार को अतय मोहम्मद ने दम तोड़ दिया। इसी तरह शिमला के विरेंद्र को 5 दिन पहले आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था और आज अस्पताल में विरेंद्र की भी मौत हो गई। </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के हिसाब से पीलिया से शहर में अब तक 13 मौतें हो चुकी हैं। बीते बुधवार भी सिरमौर की बबली की भी पीलिया के कारण मौत हो गई थी।  </p>
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