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	<title>Shimla Jaundice Outbreak Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Shimla Jaundice Outbreak Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>शिमला में पीलिया फैलने के मामले में निगम के 2, आईपीएच के 13 अधिकारियों सहित  22 नामजद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/charge-sheet-in-shimla-jaundice-outbreak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Nov 2016 12:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; पुलिस के विशेष जांच दल ने शिमला शहर में फैले पीलिया की जांच को पूरा कर लिया है। जांच को पूरा करने के बाद जांच दल ने चार्जशीट को अंतिम रूप दे दिया है। पढ़ें: एफ आई आर के बावजूद ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार पर कार्यवाही नही, ठेकेदार को बचा रही सरकार अब इस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/charge-sheet-in-shimla-jaundice-outbreak/">शिमला में पीलिया फैलने के मामले में निगम के 2, आईपीएच के 13 अधिकारियों सहित  22 नामजद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; पुलिस के विशेष जांच दल ने शिमला शहर में फैले पीलिया की जांच को पूरा कर लिया है। जांच को पूरा करने के बाद जांच दल ने चार्जशीट को अंतिम रूप दे दिया है। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/16/shimla-jaundice-breakout-no-action-against-malyana-sewerage-treatment-plant-contractor/" target="_blank">एफ आई आर के बावजूद ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार पर कार्यवाही नही, ठेकेदार को बचा रही सरकार</a></p>
<p>अब इस बारे सरकार से अभियोजन की मंजूरी मांगी जाएगी। सूत्रों के अनुसार चार्जशीट में 22 अधिकारियों के अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट के ठेकेदार और सुपरवाइजर को नामजद किया गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच के लिए 17 जनवरी को विशेष जांच दल का गठन किया गया था। करीब 10 माह की जांच के बाद अब इसकी चार्जशीट को अंतिम रूप दिया गया है। इसके अनुसार आईपीएच और नगर निगम के 22 अधिकारियों के अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट चलाने वाले एक ठेकेदार और सुपरवाइजर को भी नामजद किया गया है। </p>
<p>पढ़ें:<a href="https://himachalwatcher.com/2016/02/20/shimla-jaundice-outbreak-3-deaths-alone-in-last-60-hours-total-count-reaches-10/" target="_blank"> शिमला में पीलिया का  प्रकोप: पिछले 60 घंटे में अकेले 3 मौतें, कुल गिनती 10 तक </a><br />
इस मामले में 9 को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसमें 7 आईपीएच विभाग के अधिकारी हैं। इसी तरह सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट का ठेकेदार और सुपरवाइजर के नाम भी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं।</p>
<p><strong>15 अधिकारियों को बनाया सह आरोपी</strong></p>
<p>सूत्रों के अनुसार जार्चशीट में 15 अधिकारियों को सह-आरोपी बनाया गया है। इनमें नगर निगम के 2 अधिकारी और आईपीएच के 13 अधिकारी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार आईपीएच के जो 13 अधिकारी सह आरोपी बनाए गए हैं, वे वर्ष, 2007 से पीलिया फैलने से पहले तक विभाग में कार्यरत रहे हैं। उधर, आईजी कानून व्यवस्था जहूर जैदी ने चार्जशीट को अंतिम रूप दिए जाने की पुष्टि की है।</p>
<p>पढ़ें:<a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/24/shimla-bar-association-protest-against-jaundice-outbreak/" target="_blank">शिमला बार एसोसिएशन शहर में फैले पीलिया के विरोध में सड़क पर उतरी, रैली निकाल किया प्रदर्शन</a></p>
<p>राजधानी में पीलिया फैलने के मामले में पुलिस ने सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट के ठेकेदार और सुपरवाइजर के अतिरिक्त आईपीएच के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले का प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया था।</p>
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		<title>टैंक में शव मिलने के बाद अभी भी खुले पड़े है आई.पी.एच. विभाग के 70% वाटर सप्लाई टैंक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/01/hp-iph-water-tanks-still-not-safe/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Oct 2016 12:36:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Rajiv Bindal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आईपीएच विभाग की योजनाओं में से 60 प्रतिशत योजनाओं के फिलट्रेशन टैंक कार्य नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण सीधा-सीधा नदियों का, नालों का खड्डों का पानी लोगों के घरों में पहुॅच रहा है शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार के आईपीएच महकमे के कराण पहले प्रदेश में पीलिया फैला, अनेक लोगों को जीवन गवानां पड़ा हजारों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p></a><strong><br />
आईपीएच विभाग की योजनाओं में से 60 प्रतिशत योजनाओं के फिलट्रेशन टैंक कार्य नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण सीधा-सीधा नदियों का, नालों का खड्डों का पानी लोगों के घरों में पहुॅच रहा है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश सरकार के आईपीएच महकमे के कराण पहले प्रदेश में पीलिया फैला, अनेक लोगों को जीवन गवानां पड़ा हजारों लोगों का स्वास्थ्य खराब हुआ परन्तु अभी तक विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। </p>
<p>जिला सोलन के अनेक पेयजल टैंकों में लगातार जहरीला प्रदार्थ मिलने की घटना ने आई.पी.एच. विभाग की कार्यशैली की पोल खोल कर रखदी है । </p>
<p>हिमाचल प्रदेश आई.पी.एच. विभाग की वाटर सप्लाई के 70 प्रतिशत टैंक खुले पड़े है उन्हें ढ़कने की दृष्टी से कोई भी वृहद् योजना सरकार ने नहीं बनाई है । हिमाचल प्रदेश  सरकार पर ये आरोप लगाया है भाजपा के प्रमुख प्रवक्ता डा0 राजीव बिन्दल ने!</p>
<p>शिमला में ही बालक का शव टैंक में मिलने की घटना के बाद भी सरकार ने अपने तौर पर प्रदेश की सभी योजनाओं को दरूस्त करने की कोई योजना नहीं बनाई है । </p>
<p>डा0 बिन्दल ने कहा कि आईपीएच विभाग की योजनाओं में से 60 प्रतिशत योजनाओं के फिलट्रेशन टैंक कार्य नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण सीधा-सीधा नदियों का, नालों का खड्डों का पानी लोगों के घरों में पहुॅच रहा है और लगातार हिमाचल वासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड् हो रहा है । </p>
<p>डा0 बिन्दल ने कहा कि बिना ट्रीट किया हुआ पानी दिया जा रहा है जो बड़ी दुर्घटना को न्योता है । पानी के टैंकों में जहरीले पदार्थ का लगातार मिलना सरकार की विफलता का बड़ा नमूना है । </p>
<p>डा0 बिन्दल ने कहा कि जब कोई बड़ी घटना हो जाती है उसके बाद हाई लेवल मिटिंग करके सरकार अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ती हुई दिखाई दे रही है । </p>
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		<title>शिमला ही नहीं हिमाचल की कई और महत्वपूर्ण पानी परियोजनओं और सेवेरगे ट्रीटमेंट प्लांट्स की हालत खस्ता: निरीक्षण रिपोर्ट में खुलासा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/09/water-supply-schemes-of-himachal-in-poor-condition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Mar 2016 10:16:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है। यह खुलासा आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने निरीक्षण रिपोर्ट में किया है। उन्होंने प्रदेश की कई पेयजल योजनाओं, प्रयोगशालाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का मुआयना किया। इसके [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है। यह खुलासा आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने निरीक्षण रिपोर्ट में किया है। उन्होंने प्रदेश की कई पेयजल योजनाओं, प्रयोगशालाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का मुआयना किया।</p>
<p>इसके बाद सभी मुख्य अभियंताओं और अन्य अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख अभियंता ने निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार 26 जनवरी को निरीक्षण के समय हमीरपुर, नूरपुर और बिलासपुर में वाटर टेस्टिंग प्रोसीजर में कई कमियां देखी गईं। 26 जनवरी को ही एसटीपी ज्वालाजी के निरीक्षण में भी कमियां पाईं।</p>
<p>ऊना प्रयोगशाला में कमियां ठीक करने को अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए। 13 फरवरी को कांगड़ा, पालमपुर और धर्मशाला में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया। यहां भी कई खामियां देखी गईं। धर्मशाला में वाटर टेस्टिंग प्रयोगशाला को दुरुस्त करने के लिए जरूरी निर्देश दिए। 14 फरवरी को जोगिंद्रनगर, सुंदरनगर और मंडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया।</p>
<p>पाया कि इसमें भी सुधार जरूरी हैं। प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने कहा कि इंस्पेक्शन के समय उन्होंने पाया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर कुशल और अकुशल श्रमिकों को उन्हें नहीं दिया जा रहा है। उन्हें ये भरोसा दिलाया गया है कि श्रमिकों की व्यवस्था जल्दी होगी।</p>
<p><strong>जहां महामारी का खतरा, वहां सुपरक्लोरिनेशन करें</strong></p>
<p>आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर के मुताबिक निर्देश दिए हैं कि पीने योग्य पानी में प्रतिशत लीटर 0.25 मिलीग्राम क्लोरीन अवशेष ही रहें। जहां महामारी का खतरा है, वहां सुपरक्लोरिनेशन की जा सकती है। ब्लीचिंग पाउडर को इस तरह से डाला जाए कि इसे बनाने के तीन महीने के बाद ही इसका इस्तेमाल कर लिया जाए। इससे इसकी मजबूती कम नहीं होगी। ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि हर रसासन पर अनिवार्य रूप से एक्सपायरी डेट हो।</p>
<p><strong>सोलन और लालपानी के प्लांटों में भी कई कमियां</strong></p>
<p>मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को निर्देश दिए कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की विस्तृत नमूना रिपोर्ट दी जाए। मेन कलेक्शन टैंक में लीकेज को रेक्टिफाई किया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए। दो जनवरी 2016 से अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति बंद कर दी है। व्हाइट वाशिंग समेत सभी तरह के रिपेयर के काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किए जाएं। सोलन और लालपानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कई कमियां पाई गई हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पीलिया की समस्या को लेकर विधानसभा का घेराव, मुख्यमन्त्री ने दिया सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड बनाने का आश्वासन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/04/cpi-m-protest-against-jaundice-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Mar 2016 15:13:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[CPIM]]></category>
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		<category><![CDATA[Jaundice Protest]]></category>
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		<category><![CDATA[Sewage Treatment Board Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Sewage Treatment Plant Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/04/cpi-m-protest-against-jaundice-in-shimla/">पीलिया की समस्या को लेकर विधानसभा का घेराव, मुख्यमन्त्री ने दिया सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड बनाने का आश्वासन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में पीलिया रोग के फैलाव के रूप में हुआ।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) ने पीलिया की समस्या को लेकर पंचायत भवन से लेकर विधानसभा चैक तक रैली का आयोजन किया व विधानसभा का घेराव किया। इस रैली में सैंकड़ों लोगों ने भाग लिया! </p>
<p>प्रदर्शन के बाद पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह से मिला व और उन्हें ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने ये भी कहा कि दरअसल पीलिया का मुख्य कारण पीने के पानी में सीवरेज के पानी का मिलना है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स एसटीपी में गन्दे पानी को साफ करने के लिए सही तरीका नहीं अपनाया जा रहा है और बिना साफ किया पानी छोड़ने की वजह से बार-बार पेयजल के स्रोत दूषित हो रहे हैं। खासतौर पर इस बार अश्वनी खड्ड से सप्लाई होने वाले पानी में यह समस्या ज्यादा आई है।</p>
<p>पार्टी का कहना है कि उन्होंने मुख्यमन्त्री से मांग की है कि शिमला में पीलिया की समस्या के पूर्ण समाधान के लिए तुरन्त ठोस कदम उठाए जाएं। पार्टी सचिव विजेन्द्र मेहरा ने कहा कि मुख्यमन्त्री ने पार्टी के सुझाव पर हिमाचल में सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड गठित करने का आश्वासन दिया है।</p>
<p>पार्टी ने कांग्रेस व भाजपा सरकारों पीलिया की समस्या के लिए बराबर जिम्मेवार ठहराया है जिन्होंने 2008 में माननीय उच्च न्यायालय  के दिशा निर्देशों को लागू न कर हज़ारों लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया। इन दोनों सरकारों की ठेका परस्त नीतियों के कारण लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>पार्टी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शिमला शहर में हज़ारों लोग पीलिया रोग से ग्रस्त हैं व कुछ की मौत भी हो चुकी है। यह बीमारी शिमला से होते हुए सोलन व अन्य जगह भी पहुंच चुकी है। इस बीमारी के फैलने के पीछे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की अव्यवस्था तथा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली प्रमुख कारणों में से एक है।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में पीलिया रोग के फैलाव के रूप में हुआ। इस वर्ष तो इस रोग की चपेट में हज़ारों लोग आ गए हैं जो कल्याणकारी राज्य की भूमिका तथा लोगों के जीने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है।</p>
<p>शिमला शहर और इसके आसपास की पंचायतों में फैले पीलिया से ग्रस्त लोगों का आंकड़ा कई हज़ारों में पहुंच चुका है। 22 लोग अपनी जान तक गवां चुके हैं। हालांकि यह कोई नई पैदा हुई स्थिति नहीं है। यह हर साल की समस्या है तथा सर्दी और बरसात दोनों मौसमों में इसके फैलने की संभावनाएं रहती हैं।</p>
<p>कम्युनिस्ट पार्टी ने पीलिया पर गंभीर होकर कहा कि पीलिया होने के कई कारण है शहर और इसके इर्द-गिर्द क्षेत्रों में जिस तेजी से निर्माण हुआ है और आबादी का विस्तार हुआ है उस अनुपात में बहुत से घर अभी सीवरेज की मुख्य लाइनों से नहीं जुड़े हैं। उनके सेप्टिक टैंकों की गन्दगी कभी खुद रिस कर और कभी जानबूझ कर बरसात के दिनों में नालों में बहकर इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। निर्माण कार्य के लिए बाहर से आए हज़ारों मज़दूर और रोज़ी-रोज़गार के लिए अन्य छोटे-छोटे काम धन्धे करने वालों के लिए न तो उस अनुपात में मकान मालिकों द्वारा शौचालयों की व्यवस्था की गई है और न ही सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था है। ऐसे में खुले में शौच जाना उनकी मजबूरी भी है और जो जलस्रोतों के दूषित होने का एक और कारण आने वाली गर्मियों के महीनों में शहर में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से यह समस्या और बढ़ेगी तथा पानी की कमी होगी। इसलिए समस्या के समाधान के लिए ठोस योजना बनाने वैकल्पिक व्यवस्था की ज़रूरत है।</p>
<p>पार्टी ने निम्नलिखित सुझाावों के साथ प्रदेष सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की हैः-</p>
<p><strong>पेयजल से सम्बन्धित सुझाव</strong></p>
<div style="border: 1px solid #ccc; margin: 10px 10px; padding: 0 10px;">1.)<strong>पीलिया से मरने वाले के परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये का मुवावज़ा तथा प्रभावितों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करवाया जाए।</strong></p>
<p><strong>पीलिया के इस पूरे प्रकरण को ‘आपदा’ समझकर भरांडी व बीण खड्ड से पानी उठाने के लिए पाइपों से पानी अश्वनी खड्ड पम्पिंग स्टेशन में लाकर एक माह के भीतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।</strong></p>
<p><strong>गुम्मा एवं सैंज खडड से पानी की अतिरिक्त आपूर्ति को सुनिश्चित करना तथा बिजली की सुदृढ़ व्यवस्था करना ताकि बरसात में ट्रिपिंग के कारण फिल्टर में गाद की समस्या पैदा न हो।</strong></p>
<p><strong>शिमला शहर की जनसंख्या, पर्यटकों एवं दैनिक कार्यों के लिए शहर पर निर्भरता की दृष्टि से स्थायी समाधान हेतु पेयजल प्रवाह स्कीम के तहत चंाशल परियोजना को शुरू किया जाए।</strong></p>
<p><strong>सुरक्षित पानी की पर्याप्त आपूर्ति तथा समुचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाए जो<br />
यथासमय प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लेने के लिए अधिकृत हो।</strong></p>
<p><strong>सीवरेज से सम्बन्धित सुझाव </strong></p>
<p><strong>सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का ठेकाकरण बंद किया जाए तथा इनका प्रबंधन सरकार के अधीन लाकर विभाग के माध्यम से किया जाए।</strong></p>
<p><strong>सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के व्यवस्थित संचालन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए तथा आवश्यक परीक्षणों/टैस्टों के लिए प्रयोगशालाओं को स्थापित किया जाए।</strong></p>
<p><strong>लम्बित पड़े कार्यों जैसे ट्रीटमेंट प्लांट्स तक सड़क बनाने,स्लज बैड बनाने, स्लज प्रैस को क्रियशील करने आदि की व्यवस्था<br />
को अतिशीघ्र पूरा किया जाए तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से निकली स्लज का उपयुक्त प्रबंधन किया जाए।<br />
</strong></p>
<p><strong>प्रत्येक घर को सीवरेज कनेक्टिविटी से जोड़ना।</strong></p>
<p><strong> प्रदेष स्तर पर विषेषज्ञों को शामिल करते हुए अलग से ‘सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड’ का गठन किया जाए, जो पूरे प्रदेष में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स एसटीपी का प्रबंधन तथा निगरानी (डवदपजवतपदह) करे।<br />
</strong></div>
<p><em>Photo: File Photo/Himachal Watcher</em></p>
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		<item>
		<title>खलीनी वार्ड के लोग दूषित बावड़ी का पानी पीने को मजबूर, प्रतिदिन 10 मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/03/water-contamination-in-shimla-water-resources-increasing-health-issues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 14:55:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यहां पर करीब आठ हजार लोग रहते हैं। नगर निगम ने झंझीड़ी स्थित बावड़ी के पास पानी पीने योग्य नहीं है सूचना पट्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नगर निगम नाकाम रहा है। </p>
<p>मजबूरन लोगों को इसी बावड़ी से पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र पूरी तरह पीलिया की चपेट में आया हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक लोगों को क्लोरिन की गोलियां नहीं दी गई हैं। हालांकि सीएमओ शिमला ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में चार स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे और क्लोरिन की गोलियां बांटेंगे लेकिन सीएमओ के आदेश भी कागजों में ही सिमटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेट दर्द के मामलों में हो रही वृद्धि</strong></p>
<p>दूषित पेयजल से लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में उल्ट, दस्त व बुखार के साथ पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र खलीनी में प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तीन से चार मरीज बुखार व उल्टी, दस्त से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों को रिपन अस्पताल टेस्ट के लिए भेजा जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p><strong>तीन माह से पेयजल किल्लत</strong></p>
<p>खलीनी में तीन माह से पेयजल किल्लत चल रही है। चार दिन बाद भी सिर्फ आधे घंटे के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस कारण मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
उमा दत्त</p>
<p><strong>पानी की आपूर्ति करने में निगम विफल</strong></p>
<p>जल जीवन है जल के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। नगर निगम पानी की आपूर्ति करने में विफल हो रहा है। मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
पूजा</p>
<p><strong>उबाल कर पीना पड़ रहा पानी</strong></p>
<p>प्रतिदिन पानी उबाल कर पी रहे हैं। नगर निगम पानी उपलब्ध करवा नहीं पा रहा है, तो मजबूरन दूषित पानी को उबाल कर पीना पड़ रहा है। ऐसे में सिलेंडर की खपत भी दुगनी हो गई है।<br />
निशा</p>
<p><strong>आम आदमी नहीं खरीद सकता पानी</strong></p>
<p>आम आदमी खरीद कर पानी ला नहीं सकता, नलकों में पानी आ नहीं रहा है। ऐसे में बावड़ी ही विकल्प है। मजबूरन यही से पानी भरना पड़ता है।<br />
पल्लवी</p>
<p><strong>टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी</strong></p>
<p>पहले नगर निगम ने लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब पानी दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बावड़ी ही एक विकल्प था, यहां पर भी पानी पीने योग्य नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी लोगों को नहीं मिल रहा है।<br />
विरेंद्र कुमार</p>
<p>Photo/Representational </p>
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		<title>शिमला निगम ने बिना निरिक्षण थमा दिए सेप्टिक टैंक/सोक पिट न होने पर बिजली, पानी कनेक्शन काटने के नोटिस: विकास समिति टूटू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/02/mc-shimla-notice-to-homeowners-over-sceptik-tanksoak-pit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Mar 2016 12:40:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- विकास समिति टूटू के पदाधिकारियों का कहना है की इन दिनों शिमला शहर में पीलिया के बढ़ते प्रकोप से पीछा छुड़ाने के मकसद से नगर निगम शिमला ने टुटू निगम वार्ड के भवन मालिको को सीवरेज टैंकों की उचित व्यवस्था न होने के नोटिस भेजकर अपनी गेंद भवन मालिकों के पाले में डालने की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला-  विकास समिति टूटू के पदाधिकारियों का कहना है की इन दिनों शिमला शहर में पीलिया के बढ़ते प्रकोप से पीछा छुड़ाने के मकसद से नगर निगम शिमला ने टुटू निगम वार्ड के भवन मालिको को सीवरेज टैंकों की उचित व्यवस्था न होने के नोटिस भेजकर अपनी गेंद भवन मालिकों के पाले में डालने की कोशिश की है!</p>
<p>समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता व् महासचिव ठाकुर सिंह वर्मा ने एक सांझे ब्यान में कहा है कि स्थानीय भवन मालिकों ने उनके ध्यान में लाया है कि भवन मालिकों को आयुक्त नगर निगम की ओर से जारी नोटिस प्राप्त हुए हैं जिसमे उचित सेप्टिक टैंक व् सोक पिट न होने पर बिजली पानी के कनेक्शन काटने की धमकी दी गई है! </p>
<p>समिति अध्यक्ष ने कहा की जारी नोटिस में निगम स्टाफ द्वारा मौके का दौरा कर सैप्टिक टैंक सही न पाने की बात की गई है जो कि आधारहीन है! उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में टुटू निगम क्षेत्र के अधिकतर भवन मालिकों ने लाया है कि उनके घरों में नगर निगम का एक भी कर्मचारी और अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं आया है और नोटिस में जारी किया गया ब्यान आधारहीन है!</p>
<p>समिति अध्यक्ष का कहना है कि नोटिस में यह पूछा गया है कि क्या सैप्टिक टैंक ठीक से बना हुआ है,क्या सोकपिट बनाया गया है या सेप्टिक टैंक को कितनी मर्तवा खाली करवाया गया इसकी भी जानकारी भवन मालिक नोटिस के जवाब में दे! वहीँ  विकास समिति टुटू के पदाधिकारियों ने कहा है कि इस प्रकार की जानकारी निगम के संबंधित विभाग को अपने तकनीकी कर्मचारियों व अधिकारियों को तैनात कर भवन मालिको से लेनी चाहिए और मौके की टेकनीकल रिपोर्ट निरीक्षण के बाद देनी चाहिए ताकि पीलिया की रोकथाम सही प्रकार से हो सके!</p>
<p>समिति अध्यक्ष ने कहा कि नोटिस पढ़ने से तो ऐसा प्रतीत होता है कि सिर्फ कागजों की खानापूर्ती की जा रही है और सारी जिम्मेवारी भवन मालिकों के सिर पर डाल दी गयी है! उन्होंने कहा कि भवन मालिक यदि झूटी रिपोर्ट देकर अपना हित साधता है तो उससे पीलिया की रोकथाम नहीं होने वाली जिस उद्देश्य से निर्माणाधीन सेप्टिक टैंको की रिपोर्ट माँगी गई है! </p>
<p>गुप्ता ने कहा कि इलाके में भवन मालिकों ने सोकपिट बनाये है या नहीं या सीवरेज का गंदा पानी खुले में या सड़कों में बह रहा है इसकी रिपोर्ट नगर निगम खुद अनुभवी तकनीकी अधिकारियों व् कर्मचारियों को तैनात कर के तैयार करे! </p>
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		<item>
		<title>निगम शिमला शहर को दे रहा सिर्फ 15 दिन पानी, पर बिल फ्लैट रेट के अनुसार 30 दिन का: कांग्रेस</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/02/shimla-mc-water-supply-to-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Mar 2016 11:06:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>निगम पीलिया प्रभावित क्षेत्रों मे पानी के पूरे बिल माफ करे व जिन क्षेत्रों मे पीलिया का प्रभाव कम है व जहां 15 दिन ही पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है उन क्षेत्रों मे पानी के बिल आधा करने का प्रावधान करे। शिमला- शिमला नगर निगम द्वारा शिमला की जनता को नियमित रूप से रोजाना [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><br />
निगम पीलिया प्रभावित क्षेत्रों मे पानी के पूरे बिल माफ करे व जिन क्षेत्रों मे पीलिया का प्रभाव कम है व जहां 15 दिन ही पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है उन क्षेत्रों मे पानी के बिल आधा करने का प्रावधान करे।</strong><br />
<strong>शिमला-</strong>   शिमला नगर निगम द्वारा शिमला की जनता को नियमित रूप से रोजाना पानी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।पिछले काफी समय से जनता को एक दिन छोड़ कर पानी मिल रहा है। ये कहना है जिला कॉंग्रेस कमेटी शिमला शहरी के प्रवक्ता दीपक सुंदरियाल का उन्होंने कहा कि नगर निगम शहरवासियों को 15 दिन पानी मुहिया करवा रहा है लेकिन फ्लैट रेट के अनुसार 30 दिन का बिल जनता को देना होगा जो की अनुचित है।</p>
<p>सुंदरियाल ने कहा की एक ओर आम शहरी दूषित पानी की समस्या से जूझ रहा है उस पर कम पानी मिलना और उसका भी पूरा पैसा चुकाना ये तर्क संगत नहीं है। जिला कॉंग्रेस कमेटी ये मांग करती है कि शहर वासियों के पानी के बिलो को आधा किया जाए और यदि 15 दिन उन्हे पानी दिया जा रहा है तो पानी का बिल भी 15 दिनो के हिसाब से लिया जाये।</p>
<p>कॉंग्रेस कमेटी प्रवक्ता ने कहा कि पीलिया  की समस्या से सभी शहर वासियों को एक जुट होकर लड़ना होगा। इस पर सियासी रोटियाँ सेकने की बजाय बेहतर है की शहर वासियों की समस्यों को गंभीरता से निगम सुने व उसका निदान करने मे तेजी दिखाये।</p>
<p>कमेटी प्रवक्ता का कहना है कि विपक्ष जगह-जगह जनता को जागरूक करने के नाम पर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की फिराक मे लोगो को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। शिमला की जनता पढ़ी लिखी है और वो भी यह जानते है कि हवन करके पीलिया का निदान नहीं होता उसके लिए दूषित पानी की सफाई का इंतजाम करना होगा और जनता को दूषित हवा व पानी से फेलने वाले रोगो से बचने के उपाए भी समझने होंगे।</p>
<p>दीपक सुंदरियाल का ये भी कहना है कि विपक्षी दलो द्वारा बाटे गए पर्चो मे पीलिया से बचने के उपाए से ज्यादा विपक्ष अपनी सफाई देता नजर आ रहा है। ये पहली मर्तबा नहीं है की शहर मे दूषित पानी से कोई रोग फेला है।</p>
<p>जिला कमेटी शिमला के प्रवक्ता ने कहा कि नगर निगम टंकी की सफाई का भी अतिरिकित आर्थिक बोझ आम जनता पर ही डाल रहा है जो की अनुचित है और दूषित पानी की समस्या के लिए जनता ज़िम्मेवार नहीं है उस पर तर्कहीन फरमान जारी करना ठीक नहीं है। जनता पहले ही बीमारी से त्रस्त है और लोगो को बेवजह अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे है। लोगो को टंकी की सफाई भी  खुद ही करवानी पड़ रही है जो की अनुचित है।</p>
<p>सुंदरियालका का कहना है कि जिला कॉंग्रेस कमेटी शिमला शहरी ये मांग करती है कि निगम पीलिया प्रभावित क्षेत्रों मे पानी के पूरे बिल माफ करे व जिन क्षेत्रों मे पीलिया का प्रभाव कम है व जहां 15 दिन ही पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है उन क्षेत्रों मे पानी के बिल आधा करने का प्रावधान करे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/02/shimla-mc-water-supply-to-shimla/">निगम शिमला शहर को दे रहा सिर्फ 15 दिन पानी, पर बिल फ्लैट रेट के अनुसार 30 दिन का: कांग्रेस</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:05:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/">गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पीलिया मामले में अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसमें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला है। उनके खिलाफ केस चलना चाहिए। राज्य सरकार को पीलिया के कारण मौत के मुंह में समाए लोगों के परिजनों को अंतरिम राहत के तौर पर दो-दो लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पीलिया मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए कोर्ट को गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को दंडित करने के उद्देश्य से अलग-अलग मामले चलाने के भी आदेश पारित किए।</p>
<p><strong>एसआईटी रिपोर्ट में खामियां</strong></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले की जांच में जुटी एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूषित पानी पिलाने के गुनहगार अधिकारी कौन हैं। कोर्ट ने खेद जताया कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है या नहीं।</p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पानी चेक करते थे और उच्चाधिकारियों की पानी जांचने में कोई रुचि ही नहीं थी। नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने भी पानी जांचने की जहमत नहीं उठाई।</p>
<p><strong>ठेकेदार की पेमेंट रोकी</strong></p>
<p>कोर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की देखरेख के लिए रखे गए ठेकेदार अक्षय डोगर को 31 जनवरी तक जारी की जाने वाली बकाया राशि 99 लाख 45 हजार के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>कोर्ट ने नई स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में बताएं। पीलिया से मरने वाले और अन्य पीड़ितों का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है या नहीं। प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वे जनसाधारण को पीलिया के बारे में जागरूक करें व इससे बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्राथमिक शिक्षा से विश्वविद्यालय के छात्रों को स्वच्छ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करंे। प्रदेश में पर्याप्त स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्थान गठित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।</p>
<p><strong>सचिव साथियों को बचाने के लिए कोर्ट को कर रही गुमराह</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर को झूठा वक्तव्य देने का दोषी पाते हुए पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ गलत और विरोधाभासी वक्तव्य सामने रखने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाए। कोर्ट ने आशंका जाहिर की कि सचिव या तो अपने पुराने सहयोगियों, अधीनस्थ अधिकारियों को बचाने एवं उनके हक में मामला तैयार करने की कोशिश कर रहीं हैं या फिर कोर्ट को पूरी तरह गुमराह करने का प्रयत्न कर रही हैं। कोर्ट ने अधिकारी के वक्तव्य में पाया कि एक तरफ वह कह रही हैं कि अश्वनी खड्ड के बारे में कोर्ट की ओर से पारित पिछले आदेशों की अनुपालना की जाती रही और दूसरी तरफ कहती हैं कि अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट करने के बाद प्लांट का उचित ढंग से रखरखाव नहीं किया जा रहा था इसलिए सप्लाई गंदी होने के कारण प्लांट को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>सचिव प्रदूषण बोर्ड ने समय पर नहीं दी अश्वनी खड्ड की रिपोर्ट</strong></strong></p>
<p>कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार पर भी ऐसे ही मामले चलाने के आदेश दिए। बोर्ड के सदस्य सचिव ने कोर्ट के आदेशानुसार अश्वनी खड्ड संबंधित रिपोर्ट हर तीन माह में कोर्ट में पेश नहीं की।</p>
<p>उन्होंने 18 सितंबर 2014 के बाद केवल एक बार रिपोर्ट पेश की, वो भी झूठी और गुमराह करने वाली पाई गई। कोर्ट ने अन्य अधिकारियों को भी अवमानना का दोषी पाया है, जिन्हें शिमला शहर में शुद्ध व पर्याप्त पानी वितरण करने के लिए समय-समय पर कोर्ट ने आवश्यक आदेश दिए थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>कोर्ट ने महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह तीन दिन के भीतर ऐसे अधिकारियों के नाम अदालत को बताएं ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जा सके।</p>
<p> <strong>दर्जनों अधिकारी बनाए प्रतिवादी</strong></p>
<p>कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें मुख्य सचिव सहित शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को भी प्रतिवादी बनाया। वहीं जन संपर्क विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सभी जिला दंडाधिकारी, सभी पुलिस अधीक्षक और सभी सीएमओ को भी प्रतिवादी बनाया है।</p>
<p><strong>आईपीएच में इन्हें नोटिस</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर सुमन विक्रांत, सुनील जस्टा को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाए और क्यों न उनके खिलाफ झूठे हल्फनामे दायर करने के आरोप के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p> strong>सीएस आैर सचिव आईपीएच से 2007 से अब तक की रिपोर्ट तलब</strong></p>
<p>मुख्य सचिव व सचिव आईपीएच से कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि कौन से अधिकारी वर्ष 2007 से आईपीएच विभाग में स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। मुख्य अभियंता से चपरासी तक का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>ठेकेदार को हस्तांतरित धन, प्रक्रिया तथा उसके बिल पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/">गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिनरल वाटर मुहैया करवाये सरकार : हाईकोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 09:51:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education Secretary]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी शिमला- शिमला में पीलिया से मरने वाले लोगों के परिवारों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दो-दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिक्षा सचिव से कहा कि वह प्राथमिक स्कूलों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला में पीलिया से मरने वाले लोगों के परिवारों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दो-दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिक्षा सचिव से कहा कि वह प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को साफ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करे।</p>
<p>हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों का ब्योरा मांगा है जो 19 सितंबर, 2014 से आज तक सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य (आईपीएच) विभाग में पानी की सप्लाई को साफ व स्वच्छ मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। ताकि उनके खिलाफ पिछली याचिका में दिए निर्देशों की अवहेलना करने का मामला चलाया जाए। </p>
<p>इसके अलावा आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी किया गया है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वे जनसाधारण को पीलिया के खिलाफ जागरूक करें। लोगों को पीलिया से बचने के उपाय बताएं।</p>
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		<title>पीलिया से 2 और लोगों ने आईजीएमसी शिमला में तोड़ा दम, सरकारी आंकड़ों मे अब तक 13 की मौत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 07:48:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Jaundice Deaths]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Deaths Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला में पीलिया का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को आईजीएमसी शिमला में पीलिया से 2 लोगों की मौत हो गई है। इसमें बिलासपुर के अतय मोहम्मद (68) व दूसरी मौत शिमला के विरेंद्र (45) की हुई है। सूत्रों के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति हैपेटाइटिस ई यानी पीलिया से ग्रसित [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/jaundice-deaths-in-igmc-shimla/">पीलिया से 2 और लोगों ने आईजीएमसी शिमला में तोड़ा दम, सरकारी आंकड़ों मे अब तक 13 की मौत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला में पीलिया का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को आईजीएमसी शिमला में पीलिया से 2 लोगों की मौत हो गई है। इसमें बिलासपुर के अतय मोहम्मद (68) व दूसरी मौत शिमला के विरेंद्र (45) की हुई है। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति हैपेटाइटिस ई यानी पीलिया से ग्रसित थे जिससे इनकी मौत हुई है।</p>
<p>बिलासपुर के अतय मोहम्मद 10 दिन पहले हैपेटाइटिस ई की शिकायत को लेकर आईजीएमसी में भर्ती हुए थे। इस दौरान यहां इलाज चलता रहा लेकिन बुधवार को इनकी हालत बिगड़ी गई और वीरवार को अतय मोहम्मद ने दम तोड़ दिया। इसी तरह शिमला के विरेंद्र को 5 दिन पहले आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था और आज अस्पताल में विरेंद्र की भी मौत हो गई। </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के हिसाब से पीलिया से शहर में अब तक 13 मौतें हो चुकी हैं। बीते बुधवार भी सिरमौर की बबली की भी पीलिया के कारण मौत हो गई थी।  </p>
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