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	<title>Malyana Sewage Treatment plant Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Malyana Sewage Treatment plant Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Feb 2016 06:11:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। </p>
<p>शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे मामले में एसआईटी के सामने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पीने के पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी सितंबर माह में एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। बोर्ड के इस जवाब से साफ हो गया है कि शहर में पीलिया फैलने से रुक सकता था और लगातार मौतें नहीं होतीं।</p>
<p>बोर्ड के इन दस्तावेजों के पेश करने पर एमसी और आईपीएच के कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई की संभावना अब और बढ़ गई है। 22 फरवरी के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। पीलिया मामले में गठित एसआईटी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सितंबर महीने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पीने के पानी में क्लोफॉम होने की लिखित सूचना नगर निगम और आईपीएच महकमे को दे दी गई थी।</p>
<p>इस रिपोर्ट से साफ था कि शहर में लोगों को पीने के लिए दूषित पानी की सप्लाई की गई। पानी के सैंपल कसुम्पटी स्थित आईपीएच के टैंक और संजौली से लिए गए थे। इस मामले में एसआईटी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। यह सनसनीखेज खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन और एसडीओ ने एसआईटी के समक्ष किया है। अपने दावे को मजबूत करने के लिए दस्तावेज भी पेश किए हैं।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एसआईटी के सामने तथ्य पेश करते हुए कहा कि जुलाई महीने में कसुम्पटी स्थित पानी के टैंक से सैंपल लिया गया। यह पानी अश्वनी खड्ड से ट्रीटमेंट के बाद टैंक में आता है। संजौली में भी पानी का सैंपल लिया गया, यहां पानी गिरी परियोजना से आता है। दोनों सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए वहां से उन्हें सितंबर में रिपोर्ट मिली।</p>
<p><strong>आईपीएच की हां, नगर निगम की ना</strong></p>
<p>आईपीएच ने माना कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उन्हें सूचना मिली थी और टेस्ट भी करवाए थे जो ठीक निकले। उधर, नगर निगम ने एसआईटी को लिखित में जवाब दिया कि उन्हें यह सूचना मिली ही नहीं है उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद अब एसआईटी हर पहलू पर जांच कर रही है।</p>
<p><strong>22 फरवरी को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई</strong></p>
<p>इस तरह के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय में साल 2007 और साल 2014 में भी जनहित याचिका दायर हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया है। इसके बाद साल 2015 में एक और जनहित याचिका दाखिल हुई है जिस पर सुनवाई चल रही है।</p>
<p>प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों की कितनी अनुपालना की गई और क्या उस दिशा में भी एसआईटी जांच कर रही है इस बारे में पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया गया है। 22 फरवरी को प्रदेश उच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़े केस की सुनवाई होगी और पुलिस प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।</p>
<p><strong>स्लज उठाने वाले ठेकेदार से पूछताछ </strong></p>
<p>सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई। इस ठेकेदार के पास कब से कब तक ठेका था इसकी जानकारी ली गई। ठेकेदार कैसे स्लज उठाता था और आईपीएच के साथ उसका क्या करार था, इन बिंदुओं पर पूछताछ हुई। ठेकेदार को एसआईटी ने फिर से पूछताछ के लिए बुलाया है। </p>
<p><strong>बोर्ड से अफसरों से हुई पूछताछ:नेगी</strong></p>
<p>एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ हुई है। सीवेज ट्रूीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम और आईपीएच से भी जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
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		<title>शिमला में पानी की सप्लाई बंद, लोग तंग, चार या पांच दिन के बाद हो रही पानी की सप्लाई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-water-shortage-2016/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 13:30:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  शिमला में पानी की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद शिमला के कई क्षेत्रों में चार या पांच दिन के बाद पानी की सप्लाई हो रही है। इस कारण लोगों को निजी टैंक मंगवाने पड़ रहे हैं लेकिन नगर निगम कोई [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला-  शिमला में पानी की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद शिमला के कई क्षेत्रों में चार या पांच दिन के बाद पानी की सप्लाई हो रही है। इस कारण लोगों को निजी टैंक मंगवाने पड़ रहे हैं लेकिन नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विकासनगर, मल्याणा, खलीनी, पंथाघाटी, मैहली व बीसीएस आदि क्षेत्रों में पेयजल की काफी दिक्कत हो गई है।</p>
<p>विकासनगर के लोगों ने कहा कि जब से अश्वनी खड्ड के अशुद्ध पानी का मामला सामने आया है तब तक समस्याएं कम होने की बजाय बढ़ गई हैं। सुमन ठाकुर ने बताया कि नगर निगम ने पहले लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब लोगों को पानी के लिए तरसा रहा है। फरवरी से ही पानी की समस्याएं शुरू हो गई हैं और मिनरल वाटर से गुजारा करना पड़ रहा है।</p>
<p>इसके अलावा कई क्षेत्रों में तो खरीदकर भी पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अंजू शर्मा, रोशन लाल, रीता देवी ने नगर निगम से मांग की है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला तो सड़क पर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
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		<item>
		<title>शिमला शहर में सभी 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब, नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए थे प्लांट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/sewage-treatment-plansts-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Feb 2016 08:02:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  प्रदेश सरकार ने माना है कि शिमला शहर में सभी छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम के नहीं रहे हैं। सरकार ने सभी प्लांटों को नकारा घोषित कर दिया है। इन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से शहर की जरूरत पूरी नहीं हो सकती है। पीलिया के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने नगर निगम शिमला को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश सरकार ने माना है कि शिमला शहर में सभी छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम के नहीं रहे हैं। सरकार ने सभी प्लांटों को नकारा घोषित कर दिया है। इन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से शहर की जरूरत पूरी नहीं हो सकती है।</p>
<p>पीलिया के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने नगर निगम शिमला को सुझाव दिया है कि शीघ्र नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजे। सरकार नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए राशि देने को तैयार है।</p>
<p>शहरी विकास विभाग की ओर से नगर निगम प्रशासन को आधुनिक तकनीक के दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए लिखा गया है। नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की सुविधा प्रदेश के सभी जिलों को भी मिलेगी। इस संबंध में जिला उपायुक्तों को पत्र लिखा गया है।</p>
<p>सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक कोई विशेष नीति नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार इन प्लांटों से अभी तक 13.8 प्रतिशत सीवरेज ही ट्रीट होता रहा है। अब महज एक तिहाई सीवरेज ट्रीट हो रहा है। मल्याणा का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नियमों के विपरीत बनाया गया था।</p>
<p>किसी भी पेयजल योजना के ठीक ऊपर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सकता है। शिमला शहर में सभी नियमों को ताक पर रखकर प्लांट लगाए गए थे। नगर निगम ने शहर की सीवरेज व पेयजल समस्या को दूर करने के लिए अमृत योजना के तहत प्रस्ताव तैयार नहीं किया।</p>
<p>शहर के नए क्षेत्रों को ही इसमें शामिल किया गया है। अमृत योजना सीवरेज व पेयजल के लिए विशेष तौर पर बनाई गई है जिसके तहत नगर निगम जितना चाहे बजट प्राप्त कर सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना जरूरी है।</p>
<p>जहां तक शिमला शहर की पेयजल समस्या दूर करने का सवाल है तो केंद्र सरकार ने कोल डैम से शिमला पेयजल लाने का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया है।</p>
<p><strong>शिमला में सीवरेज प्लांट</strong></p>
<p><strong>एसटीपी क्षमता</strong></p>
<p><strong>लालपानी-बड़ागांव 19.35 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>संजौली मल्याणा 4.4 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>ढ़ली बढ़ैया 0.76एमएलडी</strong></p>
<p><strong>नोर्थ डिस्पोजल गोल्छा अनोडेल 5.80 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>समर हिल्ल गड़ोग 3.93 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>निगम को लिखा है पत्र</strong></p>
<p>नगर निगम शिमला को अवगत करवाया है कि आधुनिक तकनीक के नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेंजें। इस संबंध में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने निगम को पत्र लिख दिया है। मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की हालत को देखते हुए अधिक काम लेना संभव नहीं है।</p>
<p>सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री।</p>
<p>Photo/Representational image</p>
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		<title>मलयाणा वाटर  सैंपल फिर से टेस्टिंग में फेल, आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/29/ashwani-khud-water-sample-testing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2016 09:58:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला— पीलिया के कहर से त्रस्त शिमला के लिए फिर से यह बुरी खबर है कि मलयाणा का जो फिल्टरेट अश्बनी खड्ड में मिल रहा है, उसके सैंपल फिर से फेल हुए हैं। लिहाजा आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से नोटिस थमा दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला— पीलिया के कहर से त्रस्त शिमला के लिए फिर से यह बुरी खबर है कि मलयाणा का जो फिल्टरेट अश्बनी खड्ड में मिल रहा है, उसके सैंपल फिर से फेल हुए हैं। लिहाजा आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से नोटिस थमा दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी महीने तक हर दिन फिल्टरेट के सैंपल लिए जाते रहेंगे। </p>
<p>हालांकि प्रावधान यही है कि हर तीन महीने बाद टेस्टिंग होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा परवाणु प्रयोगशाला में जो सैंपल 20 जनवरी को भेजे गए थे, वे फेल पाए गए हैं। इस सैंपल की रिपोर्ट बुधवार को ही पहुंची है। यानी दावों के विपरीत अब भी अश्बनी खड्ड का पानी पीने योग्य नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p>वाटर टेस्टिंग के लिए क्योंकि ज्यादा समय लग रहा है, इसलिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब फैसला लिया है कि शिमला में ही एक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जाए, ताकि हर तीसरे या दूसरे दिन राजधानी में स्थापित किए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के फिल्टरेट की बाकायदा तय समय अवधि में टेस्टिंग हो सके और लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता न करना पड़े। अभी तक यह सुविधा बड़ी लैब के तौर पर परवाणु में ही मुहैया करवाई गई है।</p>
<p>शिमला में पीलिया से प्रभावित लोग इतने सहमे हुए हैं कि राजधानी में गन्ने बेचने वालों की भी चांदी हो रही है। शिमला के बाजारों में गन्ने के रस का एक गिलास 20 रुपए में बिक रहा है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग बोतलों में भरकर गन्ने का रस ले जा रहे हैं। यही आलम पीलिया झाड़ने वालों के घरों का भी है, जहां लोग कतारों में दिनभर खड़े रहते हैं।</p>
<p><strong>विभागों की सुस्ती</strong></p>
<p>मोदी सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट में एक वर्ष पहले हिमाचल को भी शामिल किया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए आईपीएच व शहरी विकास विभाग को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए लिखा था, ताकि संवदेनशील इलाकों में सीवरेज ट्र्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा सकें। हैरानी की बात है कि प्रोजेक्ट तैयार करना तो दूर, संबंधित सरकारी महकमों ने प्रतिक्रिया तक नहीं दी।</p>
<p>Photo: Hindustan Times/Representational image </p>
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		<item>
		<title>सामने आया ट्रीटमेंट प्लांट ठेकेदार का दूसरा गैर जिम्मेदाराना कृत्य, गोल्छा प्लांट पांच साल से बंद, 60 गांवों  को पिला रहे गंदा पानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/29/shimla-juandice-outbreak-golcha-sewerage-plant/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2016 09:49:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[golcha Sewage Treatment Plant]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Lakkar bazar shimla]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा से पेयजल में गंदगी मिलाने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार अक्षय डोगर का दूसरा गैर जिम्मेदाराना कृत्य सामने आया है। शिमला नार्थ डिवीजन लक्कड़ बाजार की ओर से सीवरेज की गंदगी खुले में बह रही है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट गोल्छा पिछले पांच साल से बंद पड़ा है। ऐसे में शहर के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा से पेयजल में गंदगी मिलाने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार अक्षय डोगर का दूसरा गैर जिम्मेदाराना कृत्य सामने आया है। शिमला नार्थ डिवीजन लक्कड़ बाजार की ओर से सीवरेज की गंदगी खुले में बह रही है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट गोल्छा पिछले पांच साल से बंद पड़ा है। ऐसे में शहर के साथ लगने वाले 60 गांवों के लोग गंदा पानी पी रहे हैं।</p>
<p>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़ा है और मशीनें खराब हैं। इस ट्रीटमेंट प्लांट के कारण गोल्छा, नेरी, चवाग, करयाली, नावंग, कडयाची सहित कई गांवों के लोग सीवरेजयुक्त पानी जो जहर के समान है, पीने को मजबूर हैं। प्रदूषण फैलने के कारण आसपास के क्षेत्रों में लोगों का रहना मुश्किल हो चुका है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य (आईपीएच) विभाग के अधिकारी हर महीने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की पड़ताल के लिए जाते हैं।</p>
<p>हैरानी यह है कि मल्याणा क्षेत्र में पीलिया फैलने के बाद विभाग के अधिकारियों ने जांच करने के लिए रजिस्टर लगाया। उससे पहले कोई जांच नहीं होती थी। अक्षय डोगर के पास मल्याणा व गोल्छा सीवरेज प्लांट का ठेका है। पांच साल से सारी मशीनरी खराब होने पर भी ठेका अक्षय डोगर को दिया गया है। हालत यह है कि शिमला की सारी गंदगी व सीवरेज सीधी नाले में जा रही है।</p>
<p><strong>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट गोल्छा का हाल</strong></p>
<p><strong>1 अलग नहीं हो रही सीवरेज की गंदगी व पानी </strong></p>
<p>गोल्छा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में सबसे पहले इनलैट टैंक बना है। यहां स्क्रीनिंग मशीन खराब होने के कारण सीवरेज की गंदगी व पानी अलग नहीं हो पा रहा है। चौड़ा मैदान, अनाडेल व कैथू से आने वाली सीवरेज लाइन संप वैल मशीन खराब होने के कारण एरिएशन टैंक तक भी न पहुंच कर सीधे नाले में जा रही है। संप वैल मशीन की मोटरें खराब होने के कारण टैंक गाद से भर गए हैं और यह सारी गंदगी नाले में बह रही है।</p>
<p><strong>2 टैंकों में नहीं हो रही सफाई</strong></p>
<p>प्लांट में तीन एरिएशन टैंक बनाए गए हैं। इनमें एक भी टैंक नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहा है। एक टैंक में प्लांट के शुरू होने से ही मशीनें खराब पड़ी हैं। दूसरे टैंक में मिक्सर के पंखे टूटे हुए हैं। एक टैंक में ही मिक्सर के पंखे काम कर रहे हैं जिसे बीच-बीच में बंद करना पड़ता है।</p>
<p><strong>3 अधिक लोड से रुकता है टैंक</strong></p>
<p>प्लांट में क्लेरिफाई सिस्टम के दो टैंक बनाए गए हैं। इनमें से एक टैंक काम कर रहा है जबकि एक बीते पांच साल से खराब पड़ा हुआ है। क्लेरिफाई सिस्टम का एक टैंक भी कभी कभार अधिक लोड के कारण रोकना पड़ता है।</p>
<p><strong>4 खराब है एक फ्लैश मिक्सर</strong></p>
<p> प्लांट में दो फ्लैश मिक्सर बनाए गए हैं। इनमें से एक मिक्सर काम कर रहा है और एक खराब पड़ा हुआ है। इस सिस्टम में सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर मिलाया जाता है। यह सिस्टम भी ब्लीचिंग पाउडर के अभाव में नकारा साबित हो रहा है। इतने बड़े प्लांट में नाममात्र ही ब्लीचिंग पाउडर मिलाया जा रहा है।</p>
<p><strong>5 नाले में बहाई जा रही स्लज</strong></p>
<p>प्लांट में स्लज के लिए अलग से प्लांट लगाया गया है। मशीनरी खराब होने के कारण यह भी कार्य नहीं कर रहा है। ऐसे में स्लज को सीधा नाले में बहाया जा रहा है। इससे नाले का पानी भी दूषित हो रहा है।</p>
<p><strong> 6 भूस्खलन से काम का नहीं रहा फ्लाक लीटर का टैंक</strong></p>
<p>फ्लाक लीटर का टैंक प्लांट में बनाया गया है जिसमें पानी को ट्रीट करने के बाद बाहर छोड़ा जाता है। वर्ष 2009 में भूस्खलन होने के कारण यह टैंक प्लांट में नकारा हो गया है। अब सारी गंदगी सीधे नाले में जा रही है। इसे नाले में छोड़ने के लिए बनाई गई नाली भी टूट चुकी है। इसके पाइप नाले में टूटे पड़े हैं जिस कारण प्लांट का गंदा पानी बहकर इधर-उधर पहाड़ियों से बहकर साथ लगते नाले में बह रहा है।</p>
<p><strong>प्लांट की क्षमता </strong></p>
<p>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट गोल्छा की क्षमता 5.80 एमएलडी है। यहां पर केवल 2.30 एमएलडी सीवरेज ही आ रही है। यह सीवरेज भी प्लांट में सही ढंग से ट्रीट नहीं हो रही है। </p>
<p><strong>जेनरेटर की भी सुविधा नहीं</strong></p>
<p>प्लांट में जेनरेटर की सुविधा न होने के कारण लाइट जाने की स्थिति में सीवरेज को ट्रीट नहीं किया जाता है। सारी सीवरेज को सीधा नाले में बहा दिया जाता है।</p>
<p><strong>पशुओं को भी सीवरेजयुक्त पानी</strong></p>
<p>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ लगते नाले में जहां सीवरेज का गंदा पानी मिलाया जाता है, वह आगे जाकर नेरी, चबावग, करयाली, क्यारी, नावग, कड़याहैची, नयासेर, सनयोग आदि गांवों से होकर जाता है। इसी नाले के पानी से लोग खेती, पशुओं को पिलाने के अलावा कई स्थानों पर पीने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। </p>
<p> strong>इन क्षेत्रों से प्लांट में जाती है गंदगी</strong><br />
शिमला के नार्थ डिवीजन गोल्छा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में लौंगवुड, दुधली, भराड़ी, कफ्टाधार, कलैस्टन, लक्कड़ बाजार, चौड़ा मैदान व कैथू से सीवरेज की गंदगी जा रही है।<br />
<strong>यह मशीनरी है खराब</strong></p>
<p>स्क्रीनिंग, एरिएशन टैंक, क्लेरिफाई सिस्टम, फ्लैश मिक्सर, पलाक लीटर, स्लज बनाने की मशीन</p>
<p><strong>ठीक करवाई जा रही मशीनरी</strong></p>
<p>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट गोल्छा में कुछ मशीनरी खराब पड़ी है जिसे ठीक करवाया जा रहा है। प्लांट में पहुंच रही सीवरेज की गंदगी को ट्रीट किया जाता है।</p>
<p> रूप लाल, कनिष्ठ अभियंता, आइपीएच विभाग </p>
<p>PHOTO Hindustan times/Representational image </p>
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		<title>गिरि पेयजल परियोजना में खुलेआम बहाया जा रहा बकरों का खून, सीवरेज और गंदा पानी, सरकार के लिए पानी की गुणवत्ता फिर भी ठीक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2016 08:29:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Gumma Shimla Water Suplly]]></category>
		<category><![CDATA[Gumma Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Police SIT]]></category>
		<category><![CDATA[Slaughter House]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल सरकार जिस पानी के सबसे साफ होने का दावा कर रही है, उसकी सच्चाई कुछ और है। शिमला जिले के ठियोग तहसील के छैला कस्बे के पास गिरि नदी के तट पर रोजाना कई बकरों को काटा जा रहा है और कटे बकरों का खून गिरी नदी के पानी में खुलेआम बहाया जा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल सरकार जिस पानी के सबसे साफ होने का दावा कर रही है, उसकी सच्चाई कुछ और है। शिमला जिले के ठियोग तहसील के छैला कस्बे के पास गिरि नदी के तट पर रोजाना कई बकरों को काटा जा रहा है और कटे बकरों का खून गिरी नदी के पानी में खुलेआम बहाया जा रहा है।</p>
<p>प्रगतिनगर-गुम्मा, हुली, छैला, सैंज, लेलुपुल जैसे सभी कस्बों की सीवरेज और गंदा पानी गिरि में ही बहाया जा रहा हैं। सार्वजनिक शौचालयों के अभाव में लोग इसी के तट पर खुले में शौच कर रहे हैं। कपड़े धोने से लेकर पानी को दूषित करने वाले तमाम कार्य यहां हो रहे हैं और इन पर कोई रोक नहीं है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/shima-river.jpg" alt="Slaughter House" width="600" height="449" class="alignnone size-full wp-image-3513" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/shima-river.jpg 600w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/shima-river-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/shima-river-72x54.jpg 72w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/shima-river-335x251.jpg 335w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग का कोई अफसर यहां झांकने तक नहीं जाता। इन कस्बों से आगे माईपुल नाम की जगह से राजधानी शिमला के लिए पानी उठाया जाता है। पीने के पानी में गंदगी के कारण शिमला शहर में पीलिया के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। इससे कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।</p>
<p><strong>निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली बातें</strong></p>
<p>अश्वनी खड्ड में सीवरेज से युक्त और गंदा पानी पाए जाने के बाद अब गिरि परियोजना के पानी की गुणवत्ता को सही ठहराते हुए सरकार शहरवासियों को इसी का पानी पिला रही है। </p>
<p>माईपुल प्लांट से दी जाने वाली पीने के पानी की सप्लाई में प्रगतिनगर-गुम्मा, हुली और छैला कस्बे से ही गंदगी मिलनी शुरू हो जाती है। आगे सैंज और लेलुपुल कस्बों के भी यही हाल हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/river-shimla.jpg" alt="giri water" width="600" height="449" class="alignnone size-full wp-image-3512" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/river-shimla.jpg 600w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/river-shimla-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/river-shimla-72x54.jpg 72w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/river-shimla-335x251.jpg 335w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>यहां अधिकांश भवनों की गंदगी और गंदा पानी इसी में मिल रहा है। माईपुल में इस नदी के पानी को लिफ्ट करके शिमला पहुंचाया जा रहा है। शिमला के अलावा यहीं से ठियोग बाजार के लिए भी पानी सप्लाई होती है।</p>
<p><strong>प्लांट पर बंद पड़ा है पानी साफ करने वाला ट्यूब सेटलर</strong></p>
<p>माईपुल वाटर प्लांट पर पहुंचने पर पता चला कि पानी को साफ करने वाला ट्यूब सेटलर पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। इसमें इकट्ठी हुई गाद साफ नजर आती है। विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बरसात के समय में मटमैले पानी को साफ करने के लिए ही इसे चलाया जाता है। </p>
<p>सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग शिमला जोन के मुख्य अभियंता आरएम मुकुल का कहना है कि गिरि परियोजना के पानी के दूषित होने का अगर कोई ऐसा मामला है तो इसकी जांच की जाएगी। छानबीन के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/jaundice-cases.jpg" alt="Shimla Jaundice Case" width="600" height="449" class="alignnone size-full wp-image-3511" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/jaundice-cases.jpg 600w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/jaundice-cases-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/jaundice-cases-72x54.jpg 72w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/jaundice-cases-335x251.jpg 335w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p><strong>सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को आईपीएच की क्लीन चिट</strong></p>
<p>वहीं, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार को बचाने की कोशिश कर रहा है। महकमे का दावा है कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से अश्वनी खड्ड का पानी दूषित नहीं हुआ है। सेप्टिक टैंकों से नालों में बहाई जा रही सीवर अश्वनी खड्ड के दूषित होने का कारण है।</p>
<p>विभाग मान रहा है कि मल्याणा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनें खराब हैं लेकिन साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि प्लांट में सीवर ट्रीटमेंट का काम सही चल रहा है। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए आईपीएच राजधानी में पीलिया फैलने के लिए शहर के लोगों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण में आईपीएच की घोर लापरवाही उजागर होने के बावजूद महकमा अपनी गलती स्वीकारने को तैयार नहीं है।</p>
<p>आईपीएच के अफसरों का कहना है कि शहर में लोगों ने अपने घरों में सेप्टिक टैंक बना रखे हैं। टैंक भरने पर लोग सीवर खुले नालों में बहा देते हैं। नालों से बह कर गंदगी अश्वनी खड्ड तक पहुंच रही है, जिससे पानी दूषित हो रहा है। प्रवासी मजदूरों द्वारा खुले में शौच करने से भी अश्वनी खड्ड का पानी दूषित हो रहा है।</p>
<p><strong>एसटीपी से दूषित नहीं हुआ अश्वनी का पानी</strong></p>
<p>अश्वनी खड्ड का पानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से दूषित नहीं हुआ। सेप्टिक टैंकों से नालों में बहाई जा रही गंदगी पानी को दूषित कर रही है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुछ मशीनें खराब हैं लेकिन क्षमता के अनुसार प्लांट सही काम कर रहा है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पृष्ट हो पाएगी।- आरएम मुकुल, चीफ इंजीनियर, आईपीएच</p>
<p><strong>आखिर कौन सी लॉबी बचा रही ठेकेदार को?</strong></p>
<p>सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर एफआईआर दर्ज होने के 23 दिन बाद भी एसआईटी के हत्थे नहीं चढ़ा है। जनता सवाल उठ रही है कि आखिर कौन इस ठेकेदार को बचा रहा है। एक कारोबारी को पकड़ने में पुलिस को इतना समय क्यों लग रहा है? जबकि ठेकेदार के परिवार के सभी सदस्य शिमला में ही हैं। बावजूद इसके आज तक उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है।</p>
<p>हालांकि आरोपी ठेकेदार की अग्रिम जमानत याचिका पर प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को फैसला होगा। ऐसे में अगर आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाती है तो आरोपी ठेकेदार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है। इस मामले में अब तक पुलिस ने जेई प्रणीत कुमार और सुपरवाइजर मनोज वर्मा को गिरफ्तार किया है। इन्हें वीरवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।</p>
<p>उधर, ठेकेदार भी अग्रिम जमानत के लिए छटपटा रहा है। वीरवार को प्रदेश उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगा रखी थी। इसकी याचिका पर शुक्रवार को फैसला होगा? क्या शुक्रवार को आरोपी ठेकेदार अदालत में पहुंचेगा, इस पर भी संशय बना हुआ है।</p>
<p>आरोपी ठेकेदार की गिरफ्तारी न होने की वजह से पुलिस की जांच भी अधर में लटकी है। पुलिस का दावा है कि कई बार उसे पकड़ने के लिए संभावित जगहों पर दबिश दी गई, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।</p>
<p>पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी राज्य से बाहर है और ऐसा कोई साक्ष्य शातिर ठेकेदार ने नहीं छोड़ा है, जिससे पुलिस उस तक पहुंच पाए। हालांकि पुलिस का यह भी मानना है कि आखिर कब तक वह भागता रहेगा, उसे जल्द ही आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर देंगे।</p>
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		<item>
		<title>जंग लगी मशीनों से हो रही शिमला पेयजल की जांच, शहर में सभी प्रयोगशालाएं चौपट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/24/jaundice-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jan 2016 11:22:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[HP State Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[IPH Department]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[MC Shimla Commissioner]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शहर में पीलिया फैला है। पानी की तमाम जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने को राजधानी में स्थापित भी प्रयोगशालाएं खस्ताहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की प्रयोगशालाओं में जंग लगी मशीनों से पेयजल की जांच हो रही है। हालात इतने बदतर हैं कि रिपोर्ट टाइप करने तक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला- शहर में पीलिया फैला है। पानी की तमाम जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने को राजधानी में स्थापित भी प्रयोगशालाएं खस्ताहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की प्रयोगशालाओं में जंग लगी मशीनों से पेयजल की जांच हो रही है। हालात इतने बदतर हैं कि रिपोर्ट टाइप करने तक की व्यवस्था नहीं है।</p>
<p>पानी की जांच रिपोर्ट हाथ से लिख कर जारी की जा रही हैं। गलत रीडिंग दर्ज होने पर की गई कटिंग रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। </p>
<p>एक बार फिर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने अपनी नाकामियां छिपाने के लिए टीम को ढली स्थित प्रयोगशाला में एंट्री करने से रोका। गौरतलब है कि शहर में पीलिया के हर रोज पचास से साठ मामले आ रहे हैं।<br />
<strong><br />
डीडीयू लैब</strong></p>
<p>दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की लैब के बाहर टेस्ट करवाने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं। लैब के भीतर कर्मचारी मरीजों के सैंपल ले रहे हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब के दरवाजे के ठीक सामने आटोक्लेव मशीन लगाई गई थी। जिंदल कंपनी की सालों पुरानी इस मशीन में बुरी तरह जंग लगा हुआ है। पानी की जांच के लिए वाटर मीडिया तैयार करने में इस मशीन का इस्तेमाल होता है। लैब में पानी की जांच के बाद हाथ से रीडिंग नोट की जाती है।</p>
<p><strong>नगर निगम लैब</strong></p>
<p>रिज मैदान के पास नगर निगम की प्रयोगशाला में कर्मचारी ब्लड सैंपल की जांच कर रहे हैं। यह पूछने पर कि पानी के सैंपलों की जांच कैसे की जाती है। कर्मचारी ने लैब की अलमारी से क्लोरीन की जांच में इस्तेमाल होने वाला उपकरण क्लोरोस्कोप निकाल कर दिखाया।</p>
<p>क्लोरोफार्म की जांच के लिए आटोक्लेव मशीन भी लैब में मौजूद थी। डीडीयू की आटोक्लेव मशीन की तुलना में नगर निगम की मशीन की हालत बेहतर थी, हालांकि मशीन में तैयार किए गए वाटर मीडिया की ट्यूब, जंग लगी स्टैंड में रखी गई थी।</p>
<p><strong>आईपीएच लैब ढली</strong>  आईपीएच की लैब में तैनात कर्मचारियों ने यह कह कर टीम को भीतर आने से रोक दिया कि ‘बड़े साहब के आदेश हैं, मीडिया वालों को अंदर न आने दिया जाए’ कर्मचारियों ने आग्रह किया कि उनकी नौकरी का सवाल है कृपया भीतर न जाएं।</p>
<p>कर्मचारियों में अपने अफसरों का खौफ साफ दिख रहा था। अपनी नालायकी छिपाने के लिए आईपीएच के बड़े अधिकारियों ने लैब में तैनात कर्मचारियों को मीडिया से बात तक न करने के निर्देश दिए थे। इसलिए मीडिया कर्मियों से कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर बात तक नहीं की। न ही किसी तरह की कोई टिप्पणी की।</p>
<p><strong>राजधानी में पीलिया 30 नए मामले</strong></p>
<p>राजधानी शिमला में शनिवार को पीलिया के 30 नए मामले सामने आए। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि यह मामले शहर के तीनों अस्पतालों में उपचार के लिए आए पीलिया रोगियों के पॉजिटिव मामलों के आंकड़े हैं। अब तक एक हजार से अधिक लोग पीलिया की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>वहीं घोड़ा चौकी से डीडीयू अस्पताल में पीलिया का टेस्ट करवाने आए नरेश कुमार ने बताया कि कुछ दिनों से पीलिया रोग ने शहर में कोहराम मचा रखा है। उन्हें भी पीलिया हुआ है इसलिए टेस्ट करवाने आए हैं। समरहिल से डीडीयू लैब में पीलिया का टेस्ट करवाने आए अनिल और चांदनी ने बताया कि उनके क्षेत्रों से भी भारी संख्या में रोग पीलिया रोग की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>अस्पताल में रोजाना भारी संख्या में पीलिया के रोगी उनके क्षेत्रों से उपचार के लिए आ रहे हैं। लक्कड़ बाजार में रहने वाले मुश्ताक ने बताया कि उपचार के लिए अस्पताल आया हूं। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें भी पीलिया रोग न हो जाए इसलिए टेस्ट करवाने आया हूं।</p>
<p><strong>इलाज से संतुष्ट नहीं पीलिया के मरीज</strong></p>
<p>शहर में फैले पीलिया ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों को कटघरे में ला खड़ा किया है। डीडीयूएच की मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति रोष प्रकट करते हुए एक होटल में कार्यरत अर्की के पीलिया पीड़ित टेकचंद ने बताया कि वह एक सप्ताह से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p>लेकिन उन्हें उचित इलाज नहीं मिल रहा। उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं है। इस कारण उनकी सेहत दिनप्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। बेटे के इलाज के लिए आए पंथाघाटी निवासी पंकज शर्मा ने बताया कि उन्हें अस्पताल में लंबी कतारों में धक्के खाने पड़े। बाद में टेस्ट के लिए लिखा लेकिन तब तक समय हो चुका था।</p>
<p>बताया कि अस्पताल प्रशासन सिफारिशों के बल पर मरीजों का इलाज कर रहा है। इसकी शिकायत वह डीसी से कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई मांगेंगे। पनीश गांव की सत्या देवी ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज को लेकर कोताही बरतने और महंगी दवाइयों के नाम पर ठगने का आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>सीवरेज प्लांट के लिए नहीं बनी सड़क, कैसे हटे मैला</strong></p>
<p>विजय खाची, शिमला। मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर नीचे है। शोधन के बाद हर रोज सैकड़ों कुंतल सूखा मैला यहां जमा होता है। इसे हटाने के लिए प्लांट तक एक सड़क चाहिए ताकि ट्रक में भरकर इसे बाहर निकाला जाए। लेकिन जब से प्लांट लगा तब से यहां कोई सड़क नहीं बनी।</p>
<p>मैला वहीं पड़ा रहता है और बारिश में यह पानी के साथ बह कर अश्वनी खड्ड की तरफ चला जाता है। हिमाचल हाईकोर्ट ने जुलाई 2009 को आदेश दिए दिए थे यहां तुरंत सड़क बनाई जाए। लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही देखिए सड़क के लिए एक गैंती तक नहीं चली।</p>
<p>सड़क न बनाने की वजह जो भी रही हो लेकिन यह तय है कि सरकार में बैठे जिम्मेदार अफसरों को आम जनता के स्वास्थ्य की कितनी चिंता है। ट्रीटमेंट प्लांट को सड़क से जोड़ना इसलिए जरूरी था ताकि यहां से स्लज की ढुलाई गाड़ी से की जा सके। सड़क न होने से स्लज प्लांट के पास ही पड़ा है।</p>
<p>बारिश के दौरान यह रिसकर अश्वनी खड्ड की ओर जाने वाले नाले में मिल जाता है। शासन में बैठे हुक्मरानों और अफसरों के खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करती है इस पर जनता की नजरें टिकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि मल्याणा सीवरेज प्लांट तक जब सड़क की सुविधा ही नहीं है तो प्लांट से स्लज को कैसे किसी दूसरी जगह पर ले जाया जाता।</p>
<p>आईपीएच के सामने ऐसी क्या दिक्कतें थी कि वह आज तक सड़क नहीं निकाल पाया। जन एवं सिंचाई स्वास्थ्य विभाग शिमला के अफसरों ने कभी मल्याणा सीवरेज प्लांट तक सड़क का निर्माण करने की जरूरत नहीं समझी। क्या अफसरों को लगता है कि खुले में जमा स्लज को खड्ड में बहाना चाहिए।</p>
<p><strong>ठेकेदार पुलिस की पकड़ से दूर, अग्रिम जमानत की फिराक में</strong></p>
<p>गिरफ्तारी के डर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। जमानत पर 27 जनवरी को सुनवाई होगी। अदालत ने शनिवार को इस मामले में गिरफ्तार जेई प्रणीत कुमार और सुपरवाइजर मनोज वर्मा को भी पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस हिरासत में 48 घंटे रहने पर आरोपी डीम्ड सस्पेंड हो गए हैं।</p>
<p>पुलिस की अब पूरी कोशिश है कि वह ठेकेदार को गिरफ्तार कर लें ताकि इस मामले से जुड़े कई और सफेदपोशों के चेहरों से पर्दा उठ पाए। हालांकि शुरुआती पूछताछ में एसआईटी को पकड़े गए आरोपी से कई अहम जानकारियां मिली हैं जो इस केस में कई और अफसरों को जांच के दायरे में लाकर खड़ा कर रहे हैं।</p>
<p>एसआईटी अब तक ठेकेदार को पकड़ नहीं पाई है। ठेकेदार के परिजनों से पूछताछ की गई है। पुलिस को अंदेशा है कि परिजनों को ठेकेदार के बारे में पता है। आरोपी जेई और सुपरवाइजर ने पूछताछ में खुद को बेकसूर बताया है। ठेकेदार पर आरोपों का ठीकरा फोड़ा है। आईपीएच कर्मचारी संघ भी गिरफ्तारी के विरोध में आ गए हैं। उपायुक्त को ज्ञापन सौंप कर कहा गया है कि बेवजह निचले स्तर के कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में खराब मशीनों और दूसरी कमियों के बारे में आईपीएच के उच्च अफसरों को इत्तला कर दी गई थी इस स्थिति में पुलिस उन अफसरों को गिरफ्तार करें और कर्मचारियों को तंग न करें। उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन पुलिस अधीक्षक को आगामी कार्रवाई के लिए दे दिया है।</p>
<p>अगर ठेकेदार आने वाले दिनों में पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता तो आरोपी को जमानत के लिए 27 जनवरी को खुद पेश होना होगा। इस मामले में शिकायत कर्ता डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर के भी आने वाले दिनों में एसआईटी बयान लेगी। उधर, इस बारे में एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि दोनों आरोपी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर हैं और ठेकेदार की तलाश की जा रही है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य विभाग भी लेगा पानी के सैंपल</strong></p>
<p> शहर में बढ़ते पीलिया मामलों को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी पूरे जिले भर में पानी के सैंपल लेने जा रहा है। यह जिम्मेवारी विभाग ने बीएमओ को सौंप गई है और वह अपने रोजाना पानी के सैंपल लेकर पानी की गुणवत्ता जांच करेंगे। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि आईपीएच, नगर निगम के साथ स्वास्थ्य महकमा भी पानी के सैंपल एकत्र करेगा।</p>
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		<title>अश्वनी खड्ड सीवरेज प्लांट देख दंग रह गई केंद्रीय टीम, योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी हो रहा संचालन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Jan 2016 08:04:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[MC Shimla Commissioner]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला शहर में भारत मिशन के तहत निरीक्षण करने पहुंची केंद्र की तीन सदस्यीय टीम अश्वनी खड्ड में बने सीवरेज प्लांट को देखकर दंग रह गई। टीम के सदस्य हैरान थे कि सीवरेज का ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी संचालन हो रहा है। टीम ने रिपन अस्पताल और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला शहर में भारत मिशन के तहत निरीक्षण करने पहुंची केंद्र की तीन सदस्यीय टीम अश्वनी खड्ड में बने सीवरेज प्लांट को देखकर दंग रह गई। <em>टीम के सदस्य हैरान थे कि सीवरेज का ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी संचालन हो रहा है। </em>टीम ने रिपन अस्पताल और नगर निगम का भी दौरा किया। </p>
<p>मंगलवार को टीम के तीन सदस्य पहले मल्याणा स्थित अश्वनी खड्ड के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पानी के सैंपल भी लिए। फिर ढली के प्लांट का भी निरीक्षण किया। इसके साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछा कि आखिर पीलिया का शिकार शहर की जनता हो रही है। ऐसे में आप किस क्षेत्र और किस माध्यम का पेयजल स्त्रोत इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन भी लोगों से पूछताछ की है। उनका पूरा पता टीम ने अपने रिकॉर्ड में रखा है, साथ ही साथ खुले में बहने वाली सीवरेज को मुआयना किया। </p>
<p>हालांकि टीम स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी को अपने साथ नहीं ले जा रही है। अकेले ही हर मौके का निरीक्षण कर रही है। टीम ने रिपन अस्पताल की लैब का निरीक्षण भी किया है। जहां पर पीलिया के टेस्ट हो रहे थे। उन्होंने इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर चिंता जताई है। टीम अभी दो दिन तक शिमला में ही रहेगी। देर शाम को टीम ने नगर निगम आयुक्त पंकज राय के साथ बैठक की । बैठक में पिछले एक साल में शहर में स्वच्छता को लेकर क्या क्या प्रयास किए गए। इसमें कितना सुधार हुआ है। इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में स्वच्छता मिशन को लेकर क्या योजना बनाई गई है। </p>
<p><strong>पीलिया पर फोकस है टीम</strong></p>
<p>पिछले दो दिनों से शिमला में पहुंची टीम मुख्य तौर पर पीलिया को लेकर काफी चिंतित है। सोमवार शाम को आते ही सबसे रिपन में पीलिया के मामले का औचक निरीक्षण लिया था। मंगलवार सुबह भी टीम ने उन क्षेत्रों को दौरा किया जहां से अधिकतर पीलिया ग्रस्त मरीज है। यहां से पानी के सैंपल लिए है। इन्हें दिल्ली जांच के लिए ले जाया जाएगा। </p>
<p>टीम शिमला के विभिन्न हिस्सों को औचक निरीक्षण किया है। टीम के साथ बैठक हुई है। इसके स्वच्छता मिशन के तहत हुए कार्यो के बारे में समीक्षा की गई है।</p>
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