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	<title>HP IPH Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP IPH Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>शिमला में कहीं 4 तो कहीं 10 दिन बाद हो रही पानी की सप्लाई, सालो पुराणी सप्लाई पाइपों में लीकेज से ही बर्बाद हो रहा पानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/28/shimla-city-faces-water-shortage-due-to-leakage-in-supply-pipes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Nov 2016 13:19:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला में पीलिया फैलने के बाद भी शहर में पानी की आपूर्ति कम हुई थी जिससे आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब भी यही हाल प्रदेश की राजधानी में देखने को मिल रहा है। जिस राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही जा रही थी उस शहर की आम [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला में पीलिया फैलने के बाद भी शहर में पानी की आपूर्ति कम हुई थी जिससे आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब भी यही हाल प्रदेश की राजधानी में देखने को मिल रहा है। जिस राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही जा रही थी उस शहर  की आम जनता  बून्द बून्द पानी के लिए मोहताज है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश सरकार ने नगर निगम का क्षेत्र बढ़ा दिया। 25 से 35 वार्ड बनाकर शिमला नगर निगम को प्रदेश के सबसे बड़े निगम का दर्जा दे दिया। मगर आज भी लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। प्रदेश सरकार के साथ हर विभाग का अधिकारी शिमला में विराजमान है। फिर भी पेयजल की बेहतर और सब तक पहुंचाने वाली कोई भी योजना धरातल पर खरी नहीं उतर रही है। </p>
<p>मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण का कुछ हिस्सा भी नगर निगम में है। सरकार के करीबी नेता शिमला शहर से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन लोगों को पानी मुहैया करवाने के लिए कोई ठोस कार्य करता नजर नहीं आ रहा है। शहर में कहीं चार दिन तो कहीं दस दिन बाद पानी आ रहा है। पानी की आपूर्ति रात के अंधेरे में होती है। कभी एक बाल्टी भर जाती है तो कभी दो या तीन। रोजाना पानी की आपूर्ति शहर में नहीं होती है।</p>
<p>ग्रेटर शिमला बनाकर पानी की आपूर्ति का सारा जिम्मा नगर निगम के कंधों पर प्रदेश सरकार ने डाल दिया। ग्रेटर शिमला के लिए किसी भी प्रकार के फंड की व्यवस्था प्रदेश सरकार ने नहीं की। नगर निगम शिमला ने अमृत योजना के तहत मिलने वाली करोड़ों रुपये की राशि से पानी को घरों तक पहुंचाने का सपना देखा है। इसी आड़ में 24 घंटे पानी का वादा आम जनता से नगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर ने किया। शिमला की पौने तीन लाख से अधिक की आबादी के लिए हर दिन पंद्रह एमएलडी कम पानी की आपूर्ति हो रही है। इस पानी की कमी का हल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम शिमला ने तीसरे और चौथे दिन पानी की आपूर्ति कर निकाला था।</p>
<p><strong>एक व्यक्ति को 135 लीटर प्रतिदिन पानी की आवश्यकता</strong></p>
<p>पानी के लिए निर्धारित मैनुअल के आधार पर हर व्यक्ति को एक दिन में करीब 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। लेकिन राजधानी में एक व्यक्ति के लिए 80 लीटर से भी कम पानी की आपूर्ति हो रही है।</p>
<p><strong>42एमएलडी है शहर की जरूरत</strong></p>
<p>शिमला शहर को हर दिन 42 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। लीकेज के कारण शहर तक पहुंचता 30 एमएलडी से भी कम ही है। शहर में अधिकांश पाइप लाइनें कई साल पुरानी ही बिछी है, जिनमें लीकेज की दिक्कत आती है। लीकेज से पांच से सात एमएलडी पानी व्यर्थ हो जाता है। पानी की किल्लत का सबसे बड़ा कारण जगह-जगह पानी का रिसाव है। </p>
<p> Shimla Water Supply, Water Rationing, Shimla City, Shimla MC Wards, Shimla Water Crisis, HP IPH Dept, Shimla MC</p>
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		<item>
		<title>शिमला में पीलिया फैलने के मामले में निगम के 2, आईपीएच के 13 अधिकारियों सहित  22 नामजद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/charge-sheet-in-shimla-jaundice-outbreak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Nov 2016 12:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; पुलिस के विशेष जांच दल ने शिमला शहर में फैले पीलिया की जांच को पूरा कर लिया है। जांच को पूरा करने के बाद जांच दल ने चार्जशीट को अंतिम रूप दे दिया है। पढ़ें: एफ आई आर के बावजूद ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार पर कार्यवाही नही, ठेकेदार को बचा रही सरकार अब इस [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; पुलिस के विशेष जांच दल ने शिमला शहर में फैले पीलिया की जांच को पूरा कर लिया है। जांच को पूरा करने के बाद जांच दल ने चार्जशीट को अंतिम रूप दे दिया है। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/16/shimla-jaundice-breakout-no-action-against-malyana-sewerage-treatment-plant-contractor/" target="_blank">एफ आई आर के बावजूद ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार पर कार्यवाही नही, ठेकेदार को बचा रही सरकार</a></p>
<p>अब इस बारे सरकार से अभियोजन की मंजूरी मांगी जाएगी। सूत्रों के अनुसार चार्जशीट में 22 अधिकारियों के अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट के ठेकेदार और सुपरवाइजर को नामजद किया गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच के लिए 17 जनवरी को विशेष जांच दल का गठन किया गया था। करीब 10 माह की जांच के बाद अब इसकी चार्जशीट को अंतिम रूप दिया गया है। इसके अनुसार आईपीएच और नगर निगम के 22 अधिकारियों के अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट चलाने वाले एक ठेकेदार और सुपरवाइजर को भी नामजद किया गया है। </p>
<p>पढ़ें:<a href="https://himachalwatcher.com/2016/02/20/shimla-jaundice-outbreak-3-deaths-alone-in-last-60-hours-total-count-reaches-10/" target="_blank"> शिमला में पीलिया का  प्रकोप: पिछले 60 घंटे में अकेले 3 मौतें, कुल गिनती 10 तक </a><br />
इस मामले में 9 को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसमें 7 आईपीएच विभाग के अधिकारी हैं। इसी तरह सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट का ठेकेदार और सुपरवाइजर के नाम भी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं।</p>
<p><strong>15 अधिकारियों को बनाया सह आरोपी</strong></p>
<p>सूत्रों के अनुसार जार्चशीट में 15 अधिकारियों को सह-आरोपी बनाया गया है। इनमें नगर निगम के 2 अधिकारी और आईपीएच के 13 अधिकारी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार आईपीएच के जो 13 अधिकारी सह आरोपी बनाए गए हैं, वे वर्ष, 2007 से पीलिया फैलने से पहले तक विभाग में कार्यरत रहे हैं। उधर, आईजी कानून व्यवस्था जहूर जैदी ने चार्जशीट को अंतिम रूप दिए जाने की पुष्टि की है।</p>
<p>पढ़ें:<a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/24/shimla-bar-association-protest-against-jaundice-outbreak/" target="_blank">शिमला बार एसोसिएशन शहर में फैले पीलिया के विरोध में सड़क पर उतरी, रैली निकाल किया प्रदर्शन</a></p>
<p>राजधानी में पीलिया फैलने के मामले में पुलिस ने सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट के ठेकेदार और सुपरवाइजर के अतिरिक्त आईपीएच के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले का प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया था।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/charge-sheet-in-shimla-jaundice-outbreak/">शिमला में पीलिया फैलने के मामले में निगम के 2, आईपीएच के 13 अधिकारियों सहित  22 नामजद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>खुलासा:गिरी परियोजना से शिमला शहर  तक 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/leakage-in-giri-water-scheme-for-shimla-city/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Oct 2016 14:32:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[GIRI Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Dept]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला शहर में गिरी परियोजना से आधे से भी कम पानी पहुंच रहा है। गिरी से रोजाना दो करोड़ लीटर पानी उठाया जा रहा है लेकिन शहर तक केवल 80 लाख लीटर पानी ही आ रहा है। 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद हो रहा है। इस बात का [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/leakage-in-giri-water-scheme-for-shimla-city/">खुलासा:गिरी परियोजना से शिमला शहर  तक 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला शहर में गिरी परियोजना से आधे से भी कम पानी पहुंच रहा है। गिरी से रोजाना दो करोड़ लीटर पानी उठाया जा रहा है लेकिन शहर तक केवल 80 लाख लीटर पानी ही आ रहा है। 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद हो रहा है। इस बात का खुलासा आईपीएच और नगर निगम की वीरवार को हुई बैठक में हुआ। आईपीएच ने नगर निगम को आश्वस्त किया कि लीकेज बंद करने का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/13/shimla-water-shortage-giri-water-supply-scheme-leakage-being-fixed/" target="_blank">गिरी पेयजल योजना से रोजाना 4-6 एम एल डी पानी एक किलोमीटर के भीतर लीकेज मे हो रहा बर्बाद, पाइप बदलने का कार्य जारी: शिमला महापौर</a></p>
<p>आईपीएच का लक्ष्य 20 अक्तूबर तक सौ फीसदी काम पूरा करने का है। गिरी से पूरा पानी मिलने पर शहर में जल संकट नहीं रहेगा। नगर निगम के तहत आने वाले ऐसे इलाके जो अब तक सीवरेज कनेक्टिविटी से नहीं जुड़े हैं उन्हें जल्द कनेक्ट करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। इनमें टूटू और पंथाघाटी के तहत आने वाले मकान सबसे अधिक हैं। </p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-6" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7288" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>इन इलाकों में पीलिया फैलने का खतरा भी सबसे अधिक रहता है। शहर में व्यक्ति जितना पानी इस्तेमाल कर रहा है उतना ही वह बिल चुकाए इसके लिए पानी के मीटरों को जल्द लगाने का फैसला लिया गया है। मीटरों के लग जाने के बाद आम जनता को औसत बिल देने से छुटकारा मिल जाएगा। नगर निगम की यह बैठक आईपीएच के अधीक्षण अभियंता और अन्य अधिकारियों के साथ हुई। </p>
<p><strong>आठ साल बाद भी नहीं मुआवजा</strong></p>
<p>गिरी परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। केवल एक व्यक्ति को मुआवजा मिला है। पानी की लाइन से कुछ परिवार प्रभावित हो रहे हैं पानी की लीकेज से उनकी घासनियां बर्बाद हो रही है। कई बार प्रभावितों ने आईपीएच को इस बारे में अवगत करवाया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-7" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7289" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>ऐसे करीब बारह तेरह परिवार है इन्हें भी बैठक में बुलाया गया था। इनकी समस्या को सुना और संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस परियोजना से इनकी कितनी जमीन प्रभावित हो रही है इसका पूरा रिकार्ड जल्द दें ताकि प्रभावितों शीघ्र मुआवजा राशि दी जाए। </p>
<p>नगर निगम के उप महापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि प्रभावित परिवारों को साल 2008 से अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया यह हैरत की बात है केवल एक व्यक्ति को मुआवजा मिला है।<br />
<img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-11" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7292" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>यह मामला जब उनके ध्यान में आया तो प्रभावित परिवारों को भी बैठक में बुलाया गया था। इन्हें इनका हक शीघ्र देने का अब प्रयास किया गया है। गिरी परियोजना की लीकेज करीब 70 फीसदी ठीक हो गई है। 20 अक्तूबर तक सौ फीसदी ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/leakage-in-giri-water-scheme-for-shimla-city/">खुलासा:गिरी परियोजना से शिमला शहर  तक 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>युग हत्या कांड से भी आईपीएच विभाग अर्की ने नहीं लिया कोई सबक, अधिकांश  स्टोरेज टैंक  में  अभी तक ताले नहीं</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/12/hp-iph-arki-water-storage-tanks-without-locks/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Sep 2016 09:42:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Arki Water Storage Tanks]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Dept]]></category>
		<category><![CDATA[IPH Water Tanks]]></category>
		<category><![CDATA[Yug Murder Case]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश का आईपीएच विभाग पिछले कई समय से अपनी मनमानी व जनता को सुविधा मुहैया करवाने में नाकाम रहा है!शिमला में फैले पीलिये के लिए भी आईपी विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही का नुकसान प्रदेश की आम जनता को चुकाना पड़ा था! गौरतलब रहे की शिमला में हुए युग हत्या कांड में युग का [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/12/hp-iph-arki-water-storage-tanks-without-locks/">युग हत्या कांड से भी आईपीएच विभाग अर्की ने नहीं लिया कोई सबक, अधिकांश  स्टोरेज टैंक  में  अभी तक ताले नहीं</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश का आईपीएच विभाग पिछले कई समय से अपनी मनमानी व जनता को सुविधा मुहैया करवाने में नाकाम रहा है!शिमला में फैले पीलिये के लिए भी आईपी  विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही का नुकसान प्रदेश की आम जनता को  चुकाना पड़ा था! गौरतलब रहे की शिमला में हुए युग हत्या कांड में युग का कंकाल लोगो को घरो में सप्लाई होने वाले  पानी के टैंक से भीतर से  मिला था! जिससे बाद विभाग ने आनन फानन में पानी के टैंक सील तो करवा दिया पर यह बात पुरे प्रदेश में लागु नहीं की युग के कंकाल के पानी के टैंक में मिलने से सब जगह हड़कंप मचा हुआ है पर इससे आईपीएच विभाग अर्की में अभी तक सबक नहीं लिया है। </p>
<p>यही कारण है कि अर्की तहसील में अधिकांश पानी के टैंकों में अभी तक ताले नहीं लगे हैं। इस कारण इनकी सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। कई टैंकों के तो ढक्कन टूटे हुए हैं और विभाग के स्वच्छ पानी के दावे की पोल खोलने के लिए काफी हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण विभाग के अधिकांश पानी के स्टोरेज टैंक आबादी से दूर जंगलों व घासणियों में हैं। इसके कारण उन टैंकों की सुरक्षा राम भरोसे ही है जिनमें ताले नहीं हैं। शरारती तत्व इन टैंकों के आसानी से ढक्कन खोलकर पानी को गंदा कर सकते हैं।</p>
<p>टैंकों पर रखे गए टूटे हुए ढक्कन सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। ग्राम पंचायत डुमैहर के कोट गांव को जिस टैंक से पानी की आपूर्ति होती है उसका ढक्कन काफी समय से टूटा हुआ है। इस टैंक से करीब 40 परिवारों को पानी की आपूर्ति होती है। विभाग ने नया ढक्कन लगाने के स्थान पर 2 सीमैंट के टुकड़े इसके ऊपर छोड़े हुए हैं। इन दोनों के बीच में काफी गैप है। सांप-बिच्छू व गंदगी  इसके अंदर आसानी से जा सकती है। इसी तरह भुमती पंचायत के डाडल गांव को पानी की आपूर्ति करने वाले स्टोरेज टैंक पर ढक्कन तो लगा हुआ है लेकिन ताला नहीं है। इसके कारण इसकी सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लग गए हैं। बच्यूण गांव के टैंक का भी यही हाल है। विभाग ने इस टैंक को ढकने के लिए ढक्कन तो लगाया है लेकिन ताला नहीं है। </p>
<p><strong>ढक्कन है ताला नहीं</strong></p>
<p>सरयांज पंचायत में विभाग के पानी की स्टोरेज के 2 टैंक हैं। एक टैंक पर तो ढक्कन लगा हुआ है लेकिन ताला नहीं है। इस टैंक की ऊंचाई इतनी कम है कि कोई भी आसानी से इस पर चढ़ सकता है। दूसरे टैंक पर विभाग ने ढक्कन तो लगाया है लेकिन यह जालीदार है।  </p>
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		<title>युग हत्या प्रकरण से शिमला निगम  की दिक्कतें बढ़ी, 5 सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद हो सकता है बड़ा फैसला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/02/shimla-mc-in-trouble-in-wake-of-yug-murder-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2016 09:43:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[HP TCP Dept]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla MC]]></category>
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		<category><![CDATA[Yug Murder Case]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- युग हत्या प्रकरण में हिमाचल की सबसे पहली नगर निगम शिमला की दिक्कतें बढ़ती हुई दिख रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पांच सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस मामले में बड़ा फैसला हो सकता है। पूरे घटनाक्रम से जुड़ी फाइल संबंधित महकमें के मंत्री सुधीर शर्मा को कमेंट के लिए [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>   युग हत्या प्रकरण में हिमाचल की सबसे पहली नगर निगम शिमला की दिक्कतें बढ़ती हुई दिख रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पांच सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस मामले में बड़ा फैसला हो सकता है। पूरे घटनाक्रम से जुड़ी फाइल संबंधित महकमें के मंत्री सुधीर शर्मा को कमेंट के लिए भेज दी गई है। इसके बाद सरकार से उच्च स्तर पर बैठक के बाद नगर निगम के भाग्य पर फैसला हो सकता है। </p>
<p>अभी तक निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा ही नहीं, सरकार भी सवालों के घेरे में लाती रही है। पहले पीलिया प्रकरण के कारण आईपीएच के साथ नगर निगम की किरकिरी हुई। अब युग प्रकरण में जिस तरह से कोताही बरतने के आरोप टैंकों की सफाई के संदर्भ में लग रहे हैं, उससे परेशानियां और बढ़ सकती है। शहरी विकास एक्ट में इस बात का प्रावधान है कि महकमा बिना मंत्रिमंडल की संस्तुति के किसी भी स्थानीय निकाय को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बर्खास्त कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में शहरी विकास विभाग द्वारा कानून विभाग से सलाह-मशविरा किया गया है। निगम में शुरू से ही कांग्रेस का वर्चस्व रहा है।</p>
<p><strong>सरकार हो बर्खास्त</strong></p>
<p>नगर निगम के मेयर संजय चौहान का कहना है कि  नगर निगम को नहीं, सरकार को बर्खास्त करना चाहिए। यह कानून व्यवस्था का मसला है। यदि सात दिनों में पुलिस गंभीरता दिखाती, जब बच्चे को जाखू में रखा था तो उसकी जान बच सकती थी। निगम का इसमें कोई दोष नहीं है। रिपोर्ट में यदि कोई कोताही सामने आएगी तो निगम अफसरों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>प्रशासक बिठाने की तैयारी</strong></p>
<p>नगर निगम को यदि बर्खास्त किया जाता है तो यहां प्रशासक की व्यवस्था होगी। मंत्रिमंडल की बैठक के बिना ही शहरी विकास विभाग निगम को बर्खास्त करने के लिए एक्ट के तहत अधिकृत है। बावजूद इसके मंत्रिमंडल के सहयोगियों से इस मामले पर चर्चा हो सकती है।</p>
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		<title>घुमारवीं पंचायत  के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर, सरकार ने हैंडपंप लगाने में भी की गड़बड़ी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/26/ghumarwin-water-contamination/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Aug 2016 10:11:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[बिलासपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Ghumarwin]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Dept]]></category>
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		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं शिमला- हिमाचल प्रदेश में घुमारवीं उपमंडल की बकरोआ पंचायत के वार्ड नंबर-2 हरिजन बस्ती के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के स्थानीय लोगो व वार्ड मैंबर का कहना है कि इस वार्ड में वैसे तो सरकार 4 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश में घुमारवीं उपमंडल की बकरोआ पंचायत के वार्ड नंबर-2 हरिजन बस्ती के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के स्थानीय लोगो व वार्ड मैंबर का कहना है कि इस वार्ड में वैसे तो सरकार 4 हैंडपंप लगाने का दावा करती है लेकिन हकीकत में 3 ही हैंडपंप लगे हैं। लोगों ने विभाग से पूछा है कि चौथा हैंडपंप कहां लगा है।</p>
<p>इस वार्ड में 83 परिवार रहते हैं। अगर पेयजल योजना की बात करें तो विभाग के अनुसार इस वार्ड में सारटी-फटोह स्कीम से पानी दिया जाता है लेकिन हकीकत में लोगों को पानी अमरपुर पेयजल योजना हड़सर से दिया जाता है। लोगों का यह भी आरोप है कि पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं।</p>
<p>लोगों ने विभाग व प्रशासन से मांग की है कि उन्हें पेयजल सप्लाई सही ढंग से की जाए और स्वीकृत हैंडपंप को भी लगाया जाए। इस बारे में आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता घुमारवीं रवि सूद का कहना है कि हैंडपंप लगाने के कोई भी आदेश उन्हें नहीं मिले हैं। अगर लोगों को पेयजल की समस्या आ रही है तो शीघ्र ही समस्या को हल कर दिया जाएगा।</p>
<p>Photo: SlidePlayer/Representational Image</p>
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		<title>रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/cadets-falls-ill-at-ncc-camp-in-rewalser-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:49:47 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Colonel Piyush Agarwal]]></category>
		<category><![CDATA[Gsss Rewalsar]]></category>
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		<category><![CDATA[Sandeep kadam]]></category>
		<category><![CDATA[SHO Sanjeev Sood]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और  स्कूल के पानी का सैंपल फेल  हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>  रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg" alt="NCC Battalion Mandi" width="800" height="535" class="alignnone size-full wp-image-6583" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-300x201.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-768x514.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-696x465.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-628x420.jpg 628w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।</p>
<p>फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया।  तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।</p>
<p><strong>26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट</strong></p>
<p>newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर</strong></p>
<p>एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई। </p>
<p><strong>रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल</strong></p>
<p>एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।</p>
<p>सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p>सवाल यह भी</p>
<p>रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।</p>
<p>मुहिम को झटका</p>
<p>रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।</p>
<p>Photo: TNS/Divya Himachal </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/cadets-falls-ill-at-ncc-camp-in-rewalser-himachal/">रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>दोनों पैरों से विकलांग चम्बा के युवक को 2 साल ठोकरें खिलाने के बाद भी जिला प्रशाशन को नहीं आया रहम, मात्र 600 मीटर सड़क के लिए लड़ रहा अमित</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/17/disable-youth-of-chamba-fighting-for-patch-of-road-for-years/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jun 2016 15:31:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
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		<category><![CDATA[‪Dalhousie]]></category>
		<category><![CDATA[Disabilities Act 1995]]></category>
		<category><![CDATA[Disability]]></category>
		<category><![CDATA[HP Chief Minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP Governor]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
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		<category><![CDATA[Salooni Chamba]]></category>
		<category><![CDATA[shanta kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चम्बा- विकलांगो के लिए भले ही सरकारे बेहतर सुविधाए देने का दावा करे, पर धरताल पर स्तिथि कुछ और ही है। विकास के तमाम बड़े बड़े दावों के विपरीत कड़वा सच यह भी है कि दोनों पैरों से दिव्यांग युवक अमित घर आने जाने को मात्र 600 मीटर सड़क निर्माण के लिए दो साल से [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चम्बा-</strong> विकलांगो के लिए भले ही सरकारे बेहतर सुविधाए देने का दावा करे, पर धरताल पर स्तिथि कुछ और ही है। विकास के तमाम बड़े बड़े दावों के विपरीत कड़वा सच यह भी है कि दोनों पैरों से दिव्यांग युवक अमित घर आने जाने को मात्र 600 मीटर सड़क निर्माण के लिए दो साल से दर -दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। इतने दिन में तो पत्थर भी पिघल जाये लेकिन जिला प्रशासन है की उसे रहम ही नहीं आ रही है।</p>
<p>जिला चम्बा उपमंडल सलूणी के तहत पड़ने वाली ग्राम पंचायत ठाकरी मट्टी के गांव मकडोगा के दिव्यांग (विकलांग) युवक का अब धैर्य जवाब देने लगा है। दिव्यांग अमित ठाकुर ने कहा कि वो जन्म से ही 60 प्रतिशत दोनों पैरों से दिव्यांग है और चलने में पूर्ण तय असमर्थ है तथा व्हीलचेयर पर है घर गांव सड़क से काफी ऊपर चढाई पर है जिसकी वजह से उन्हें दैनिक जीवन के व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने को कही भी आने-जाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तथा अपने चिकित्सा उपचार के लिए महीने में दो से तीन बार अस्पताल जाना पड़ता है ऐसे में दोनों पैर से दिव्यांग व्यक्ति के लिए सड़क तक और फिर सड़क से घर तक पहुचना लोहे के चने चबाने जैसा है। </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995.jpg" alt="disability act 1995" width="800" height="431" class="alignnone size-full wp-image-6115" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995-300x162.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995-768x414.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995-696x375.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/disability-act-1995-780x420.jpg 780w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>सड़क नहीं होने के कारण उन्हें कई बार महीनो तक रिस्तेदारो के घर भी रुकना पड़ता है व अधिकतम समय घर से बाहर अपने पिताजी के साथ डलहौज़ी में रहना पड़ रहा है सड़क नहीं होने के कारण जीवन नारकीय हो गया है।  पिछले अनेक वर्षों से वो सड़क निर्माण करने की मांग विभिन्न पत्रों के माध्यम से कर रहे हैं। उन्होंने बताया की लगभग ढ़ाई साल पहले पत्र लिख के आयुक्त विकलांगजन हिमाचल प्रदेश को समस्या से अवगत कराया था ओर आयुक्त विकलांगजन ने जिला उपायुक्त और जिला कल्याण अधिकारी को इस और विशेष ध्यान देने और अतिशीघ्र कार्यवाही करने के विशेष लिखित निर्देश थे उसके बाद लोक निर्माण विभाग ने गांव से निचे दरोल नाला से सर्वेक्षण किया और मात्र 600 मीटर सड़क का निर्माण किया जाना है।</p>
<p>गांव के लोग निजी भूमि देने को भी तैयार है और ग्रामीण लोक निर्माण विभाग को ब्यान हलफ़नामा (एफिडेविट) भी दे चुके हैं  परन्तु अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ और सिर्फ कागजी कार्रवाई चलती रही। अधौहस्ताक्षरी दोनों पैर की दिव्यांगता के वावजूद स्वयं दर्जनों बार एडीएम जिला उपायुक्त चम्बा, जिला कल्याण अधिकारी चम्बा, से मिल चूका है और अधिकारी उन्हें कभी लोक निर्माण विभाग तो कभी मनरेगा के अंतर्गत सड़क बनाने का आशवासन देकर टालते रहे। </p>
<p>इतना ही नहीं विकलांग व्यक्ति ने सांसद शांता कुमार को भी इस बारे पत्र लिख अवगत कराया पर उन्होंने भी राज्य सरकार का मसला बता कर निराश ही किया और एक पत्र मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को लिखा गया मुख्यमंत्री कार्यालय के सख्त आदेश आने के बाद फिर से दोबारा कार्यवाही हुई और अंत में इसे भी आगे टाल दिया गया। तदुपरांत त्रस्त होकर में इस संबंध में परिवार सहित डलहौज़ी की विधायक से भेट की और उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत ही सड़क निर्माण करवाने का आशवासन दिया और लोक निर्माण विभाग हर बार दो-तीन महीनों में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का आशवासन देता रहा। इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही होती नहीं दिखी।</p>
<p>अन्त इस संबंध एक पत्र राष्ट्रपति और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को लिखा, राष्ट्रपति भवन ने कार्यवाही करते हुए मामला अपर मुख्य सचिव अनुपम कश्यप लोक निर्माण विभाग को भेजा व उचित कार्यवाही करने को लिखा और प्रधान सचिव राज्यपाल हिमाचल प्रदेश राज भवन शिमला से भी अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने का लिखित निर्देश हुआ परन्तु वावजूद इसके आज तक भी सड़क निर्माण नहीं हुआ तथा आज भी दोनों पैर से दिव्यांग व्यक्ति को मात्र 600 मीटर सड़क के लिए जगह-जगह भटकाया जा रहा हैं |</p>
<p>उन्होने बताया की लोक निर्माण विभाग हर बार दो महीने में निर्माण कार्य शुरू करने का आशवासन देता रहा है परन्तु लगभग तीन साल हो चुके है और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ जबकि इस और विकलांग अधिकार अधिनियम-1995 के अनुसार विशेष ध्यान देने की जरूतर थी ये विकलांग अधिकार अधिनियम-1995 का खुला उल्लंघन हैं। इस सड़क लाभ मात्र एक विकलांग व्यक्ति को ही नहीं होगा बल्कि पुरे गांव को होगा।</p>
<p>बरहहाल उन्होंने थकहार कर जिला प्रशासन, हिमाचल सरकार, लोक निर्माण विभाग को अल्टीमेटम दिया और चेताया की यदि किसी भी सूरत में एक माह के भीतर लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत गांव मकडोगा के नीचे दरोल नाला से सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराकर न्याय करें अन्यथा उन्हें अपने परिवार के साथ जिला प्रसाशन कार्यालय के बाहर <em>&#8220;भूख हड़ताल&#8221;</em> पर बैठने और निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं होने तक भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होना पड़ेगा । इस दौरान अगर 60 प्रतिशत विकलांगता वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की घटना घटती हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और हिमाचल सरकार की होगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/17/disable-youth-of-chamba-fighting-for-patch-of-road-for-years/">दोनों पैरों से विकलांग चम्बा के युवक को 2 साल ठोकरें खिलाने के बाद भी जिला प्रशाशन को नहीं आया रहम, मात्र 600 मीटर सड़क के लिए लड़ रहा अमित</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>अपने वेतन-भत्ते 5 मिनट में बढ़ाने वाले लालची मंत्री, विधायक जानलेवा ब्लैक स्पॉट सुधारने के वक़्त रोते हैं आर्थिक तंगी का रोना</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/26/black-spots-on-himachals-roads-killing-people/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 May 2016 11:38:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[Accidents]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Road Accidents]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पुलिस ने 127 ब्लैक स्पॉट की सूची लोनिवि को भेजी है v शिमला- आर्थिक तंगी का रोना रोने वाली प्रदेश सरकार के पास विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने के लिए तो पैसे हैं, लेकिन लोगों की जानें बचाने के लिए सड़कें सुधारने को खजाना खाली है। हिमाचल में एक के बाद [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पुलिस ने 127 ब्लैक स्पॉट की सूची लोनिवि को भेजी है </strong> v</p>
<p><strong>शिमला-</strong> आर्थिक तंगी का रोना रोने वाली प्रदेश सरकार के पास विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने के लिए तो पैसे हैं, लेकिन लोगों की जानें बचाने के लिए सड़कें सुधारने को खजाना खाली है। हिमाचल में एक के बाद एक बड़े हादसे हो रहे हैं। लोगों के घरों के चिराग बुझ रहे हैं।</p>
<p>इसके बावजूद सरकार प्रदेश की सड़कों पर खतरनाक ब्लैक स्पॉट को ठीक नहीं कर पा रही है। ब्लैक स्पॉट की फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में घूम रही हैं। मौके पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी है। अधिकारी स्पॉट पर जाने को तैयार नहीं है। दफ्तर में बैठकर कागज काले किए जा रहे हैं।</p>
<p>हिमाचल में पिछले एक सप्ताह में चार बड़े हादसे हुए हैं। इसमें 45 लोगों की जान चली गई। दो बड़े हादसे सड़क के किनारे क्रैश बैरियर न होने के कारण हुए हैं। प्रदेश सरकार ने भले ही ब्लैक स्पॉट को ठीक करने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है, लेकिन यह पैसा विभाग को नहीं मिला है। हिमाचल में सड़कों की हालत खस्ता है। जिससे हादसे बढ़ रहे हैं।</p>
<p><strong>ब्लैक स्पॉट के चयन को बनी है कमेटी</strong></p>
<p>हिमाचल में ब्लैक स्पॉट चयनित करने के लिए लोक निर्माण विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग शामिल है। कमेटी के पदाधिकारी योजनाएं बना रहे हैं, लेकिन धरातल पर इनकी योजना उतर नहीं रही है।</p>
<p><strong>पुलिस ने भेजी 127 ब्लैक स्पॉट की सूची</strong></p>
<p>पुलिस ने 127 ब्लैक स्पॉट की सूची लोनिवि को भेजी है। यह ऐसे स्पॉट हैं जहां लगातार वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इन स्पॉटों में दर्जनों लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं।  </p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>नेशनल हाईवे के ब्लैक स्पॉट की सूची </th>
<th>ब्लैक स्पॉट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>हमीरपुर</td>
<td>4</td>
</tr>
<tr>
<td>कांगड़ा </td>
<td>24</td>
</tr>
<tr>
<td>किन्नौर</td>
<td>1</td>
</tr>
<tr>
<td>कुल्लू </td>
<td>16</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरमौर </td>
<td>21</td>
</tr>
<tr>
<td>सोलन </td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>ऊना </td>
<td>5</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>स्टेट हाईवे ब्लैक स्पॉट</th>
<th>ब्लैक स्पॉट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>चंबा</td>
<td>1</td>
</tr>
<tr>
<td>कांगड़ा </td>
<td>8</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरमौर </td>
<td>1</td>
</tr>
<tr>
<td>ऊना </td>
<td>11</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>मेजर जिला सड़क ब्लैक स्पॉट</th>
<th>ब्लैक स्पॉट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>चंबा</td>
<td>1</td>
</tr>
<tr>
<td>कांगड़ा </td>
<td>8</td>
</tr>
<tr>
<td>कुल्लू </td>
<td>8</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरमौर </td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>सोलन </td>
<td>1</td>
</tr>
<tr>
<td>ऊना </td>
<td>2</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>लोक निर्माण विभाग की ओर से चयनित ब्लैक स्पॉट (सर्कल)</th>
<th>ब्लैक स्पॉट</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>सोलन </td>
<td>259</td>
</tr>
<tr>
<td>शिमला </td>
<td>256</td>
</tr>
<tr>
<td>रामपुर </td>
<td>205</td>
</tr>
<tr>
<td>नाहन </td>
<td>135</td>
</tr>
<tr>
<td>रोहडू</td>
<td>102</td>
</tr>
<tr>
<td>मंडी</td>
<td>554</td>
</tr>
<tr>
<td>कुल्लू </td>
<td>110</td>
</tr>
<tr>
<td>जोगिंद्रनगर</td>
<td>94</td>
</tr>
<tr>
<td>हमीरपुर </td>
<td>202</td>
</tr>
<tr>
<td>बिलासपुर </td>
<td>213</td>
</tr>
<tr>
<td>ऊना </td>
<td>99</td>
</tr>
<tr>
<td>पालमपुर </td>
<td>230</td>
</tr>
<tr>
<td>डलहौजी </td>
<td>535</td>
</tr>
<tr>
<td>नूरपुर</td>
<td>82</td>
</tr>
<tr>
<td>एनएच सर्कल</td>
<td>124</td>
</tr>
<tr>
<td>एनएच शाहपुर </td>
<td>131</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>ब्लैक स्पॉट को ठीक किया जा रहा है। कुछेक स्पॉट ठीक किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने ब्लैक स्पॉट को ठीक करने के लिए बजट में 50 करोड़ का प्रावधान किया है। राकेश गुप्ता, इंजीनियरिंग इन चीफ, लोनिवि</p>
<p>Photo: DMG.Org/Represntational Image</p>
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