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	<title>Environment Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Environment Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>2 हफ्ते से  धधक रहे किन्नौर के जंगल , चिलगोजा और दियार समेत करोड़ों की वन सम्पदा जल कर राख</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/21/kinnaur-forest-fire/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Nov 2016 15:25:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Fire]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर- हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्र की 3 पंचायतों के जंगल 2 हफ्तों से धधक रहे हैं लेकिन सरकारी स्तर पर आग पर काबू पाने के कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नही हुए हैं। इस घटनाक्रम में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्षेत्र के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर-</strong>  हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्र की 3 पंचायतों के जंगल 2 हफ्तों से धधक रहे हैं  लेकिन सरकारी स्तर पर आग पर काबू पाने के कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नही हुए हैं। इस घटनाक्रम में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार विलुप्तप्राय: चिलगोजा और दियार के हजारों छोटे-बड़े पेड़ अब तक आग की भेंट चढ़ चुके हैं। करोड़ों की वन सम्पदा स्वाह हुई है। हालांकि आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ आईटीबीपी, होमगार्ड, वन और अग्निशमक विभाग ने भी प्रयास किए लेकिन आग अब भी बेकाबू है। </p>
<p>जैसा की आपको पता होगा की जंगलो में आग लगना कोई नई बात नही हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के जंगल भी बरसो से भयानक आग की चपेट में आ रहे है तथा  इन जगंलो में रह रहे स्थानीय लोग भी अपने  खेतो  में आग लगा देते है जो की भड़क कर जंगलो के भीतर  पहुँच जाती है।   आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश सरकार के पास जंगलो में लगने वाली आग पर काबू पाने  के लिए कोई पुख्ता इंतेज़ाम नहीं है! जंगलो में <a href="https://himachalwatcher.com/2016/06/04/himachal-wildfires-ruin-plantations-worth-rs-1-35-crore-affecting-11774-hectares-till-today/" target="_blank">आग लगने से वहां रह रहे पशु, पक्षियों, वन सम्पदा </a>को तो नुकसान पहुंचता  ही है बल्कि जान पर भी खतरा मंडराने लगता है। अगर पर्यावरण की दृष्टि से भी यह नुकसान दायक है।<br />
<a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/shimla-forest-fire-destroys-crores/" target="_blank">पढ़ें:शिमला के जंगल फिर भयानक आग की चपेट में, करोड़ों रुपये का नुकसान</a><br />
लोगों का कहना है कि 6 नवम्बर को पूर्वणी के जंगल में आग लगी जिसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी। लोगों ने वनरक्षक को मौके का मुआयना करने के लिए कहा लेकिन वनरक्षक ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया। 7 नवम्बर को तूफान के करण आग ने जंगल के बड़े हिस्से को घेर लिया और धीरे-धीरे आग बेकाबू होती गई। वन विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास न किए जाने का भी लोग आरोप लगा रहे हैं।<br />
 लोगों का यह भी कहना है कि हजारों पेड़-पौधे इस क्षेत्र में जल गए लेकिन वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में अब तक नहीं पहुंचे हैं। </p>
<p>बताया जा रहा है कि आग पूर्वणी, आशपा, किब्बर से होते हुए रिब्बा के जंगलों तक पहुंची। उसके बाद उसने जिला मुख्यालय के ठीक सामने पोवारी के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया। 2 दर्जन से अधिक आईटीबीपी के जवान व होमगार्ड के जवान भी आग बुझाने में लगे रहे  लेकिन वन विभाग अपने आधा दर्जन  कर्मी भी इस आगजनी को काबू पाने के लिए नही भेज पाया है।  रिब्बा, पूर्वणी और पोवारी के लोग भी यथासम्भव आग बुझाने जा रहे हैं। जंगल में पानी की उपलब्धता न होने और आधुनिक उपकरण न होने से सभी प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।  </p>
<p>र्वणी पंचायत के प्रधान शेर सिंह और उपप्रधान महेश ने बताया कि 6 नवम्बर से जंगल में आग लगी है। आग को बुझाने के लिए ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आईटीबीपी, होमगार्ड और वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मी भी इस प्रयास में जुटे हैं लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया है। वहीं इस बारे वन अरण्यपाल रामपुर अनिल ठाकुर ने बताया कि आग को बुझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन विकट क्षेत्र होने के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल है।</p>
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		<item>
		<title>कुल्लू घाटी की  हवा निरंतर होती जा रही जहरीली, 239 % तक बढ़ा वायु प्रदूषण</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/12/air-pollution-in-kullu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2016 12:47:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Air Pollution]]></category>
		<category><![CDATA[DR J C Kuniyal]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[kullu]]></category>
		<category><![CDATA[National Institute of Himalayan Environment and Sustainable Development Mohal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्‍लू- दिवाली पर अंधाधुंध पटाखे व आतिशबाजी के बाद वहां वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या है जिसका असर अब कुल्लू घाटी में भी होने लगा है ! कुल्लू घाटी की हवा निरंतर जहरीली होती जा रही है! अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा व दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में वायु प्रदूषण 239.45 प्रतिशत तक बढ़ गया। मौहल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्‍लू-</strong> दिवाली पर अंधाधुंध पटाखे व आतिशबाजी के बाद वहां वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या है  जिसका असर अब  कुल्लू घाटी में भी होने लगा है ! कुल्लू घाटी की हवा निरंतर जहरीली होती जा रही है! अंतरराष्ट्रीय कुल्लू  दशहरा व  दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में  वायु प्रदूषण 239.45 प्रतिशत तक बढ़ गया। मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान की ओर से दशहरा एवं दिवाली से पहले और उसके बाद एकत्रित किए गए आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं।</p>
<p>आंकड़े के अनुसार वायु प्रदूषण के दो महत्वपूर्ण मानकों एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ एओडी और पारटीकुलेट मैटर पीएम यानि वायुमंडलीय कणों की मात्रा के ये आंकड़े कुल्लू घाटी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए घातक हैं। दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में एओडी के स्तर में 35 प्रतिशत और पीएम के स्तर में 337 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 23 सितंबर को घाटी की आबोहवा में एओडी लगभग 0.34 था, लेकिन दशहरा से लेकर दिवाली 31 अक्तूबर को यह 0.46 तक पहुंच गया।</p>
<p>इसी प्रकार 23 सितंबर को पीएम का स्तर 31.7 था जोकि दशहरा से दिवाली की रात 30 अक्तूबर को 138.7 तक पहुंच गया। इसके अलावा वायु मंडल में सभी तत्वों के मिश्रण (टीएसपी) की मात्रा भी 239.56 प्रतिशत तक बढ़ी है। 23 सितंबर तक कुल्लू घाटी की टीएसपी का स्तर 45.6 था। जो 31 अक्तूबर में 154.8 तक पहुंचा।</p>
<p>किसी भी स्थल या शहर में प्रदूषण के स्तर को मापने के मुख्यत दो मानक होते हैं। पीएम तथा एओडी या एओटी। हवा में मौजूद प्रदूषित पदार्थों को पारटीकुलेट मैटर यानि पीएम कहा जाता है। यह प्रदूषण को मापने का उचित पैमाना है। इसके अलावा एओडी (एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ) या एओटी (एयरोसोल ऑप्टिकल थिकनेस) के आधार पर भी हवा की शुद्धता का पता लगाया जा सकता है।</p>
<p>मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.जेसी कुनियाल द्वारा किए गए शोध में चौंकाने वाले प्रदूषण की मात्रा को रोकने या इसके स्तर को कम करने के लिए ग्रीन बेल्ट का होना जरूरी है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जंगलों का संरक्षण, जंगलों में आगजनी को रोकना, वन कटान पर अंकुश के साथ वाहनों पर कंट्रोल आदि उपाय हो सकते हैं। उनके मुताबिक कुल्लू घाटी में बढ़ता प्रदूषण मुनष्य के जीवन के लिए खतरनाक है और इसे कैंसर जैसी बीमारी के साथ खांसी, गले की बीमारी हो सकती है।</p>
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		<item>
		<title>सरकार की नाक तले शिमला में कटते रहे देवदार व कायल के पेड़</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/29/illegal-tree-felling-hiranagar-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Oct 2016 11:37:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DFO Shimla Rural]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Hiranagar]]></category>
		<category><![CDATA[Illegal Tree felling]]></category>
		<category><![CDATA[Kaul singh Thakur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह का हीरानगर आवासीय कॉलोनी के एक कोने में अपना भवन है। इसी तरह से इस कॉलोनी में प्रदेश सरकार के निगमों व बोर्डो में कई नेता अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे हैं। पूर्व विधायक शिवलाल यहां रहते हैं। इसी तरह कई और पूर्व विधायक भी यहां रहते [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह का हीरानगर आवासीय कॉलोनी के एक कोने में अपना भवन है। इसी तरह से इस कॉलोनी में प्रदेश सरकार के निगमों व बोर्डो में कई नेता अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे हैं। पूर्व विधायक शिवलाल यहां रहते हैं। इसी तरह कई और पूर्व विधायक भी यहां रहते हैं। दूसरे नेताओं का यहां पर स्थायी निवास है। हैरानी की बात यह है कि यहां कई दिनों से जेसीबी के साथ जमीन खोदी जा रही है लेकिन नेताओं को इसकी भनक तक नहीं लगी।</p>
<p>निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्र में एक परिवार ने देवदार व कायल के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई है। एक सप्ताह से बिना किसी इजाजत के जमीन खोदने का काम चल रहा है। जमीन की खोदाई वाले स्थान के एक कोने से एक व्यक्ति ने एतराज जताया। उनका कहना था कि यह हमारी मल्कीयत जमीन है। सरकार ने इस क्षेत्र को टीसीपी योजना दायरे में लिया है। ऐसे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नगर नियोजन विभाग की स्वीकृति के बिना नहीं हो सकता है।</p>
<p><strong>पेड़ काटने वालों पर होगी कार्रवाई</strong></p>
<p>मैंने अधिकारियों की टीम मौके पर भेज दी है। चाहे सरकारी जमीन से पेड़ काटे गए होंगे या फिर निजी जमीन से, पेड़ किसी भी सूरत में नहीं काटे जा सकते हैं। पेड़ काटने वाले लोगों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>अमित शर्मा, डीएफओ, शिमला ग्रामीणDFO Shimla Rural </p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल की 8 नदियों का पानी प्रदूषित, सबसे अधिक प्रदूषित हिस्सा ब्यास नदी का</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/himachal-pradesh-rivers-pollution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Oct 2016 09:26:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Central Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[himachal rivers]]></category>
		<category><![CDATA[HPPCB]]></category>
		<category><![CDATA[Industrial Waste]]></category>
		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती खड्ड, बिनवा और मारकंडा नदियों के पानी में बॉयोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड तय मानकों से कम पाया गया।</p>
<p>सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार इस दूषित पानी में किसी भी तरह के जीव-जंतुओं के अलावा मनुष्यों के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। मनुष्य अगर लगातार इस पानी का सेवन करें तो वह कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाएगा। </p>
<p>ब्यास नदी सबसे ज्यादा 80 किलोमीटर एरिया में प्रदूषित होकर बह रही है। हिमाचल की आठ नदियों के 12 स्ट्रैच को प्रदूषित आंका गया है। इन 12 स्थानों में नदी के जल में सुधार लाने के लिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। हिमाचल की आठ नदियों का 136 किलाेमीटर का स्ट्रैच प्रदूषित पाया गया है।<br />
<strong>कहां पर कितना हिस्सा प्रदूषित</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>नदी</th>
<th>प्रदूषित स्ट्रैच</th>
<th>कस्बा</th>
<th>किलोमीटर</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>ब्यास</td>
<td>कुल्लू से गोपीपूर </td>
<td>स्नोट, कुल्लू</td>
<td>80</td>
</tr>
<tr>
<td>टौंस</td>
<td>किलाड़ से तिलवारी</td>
<td>डांडा, हरिपूर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरसा</td>
<td>नालगढ़ से सोलन</td>
<td>सोरी, रडयाली</td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>स्वां</td>
<td>ऊना से संतोषगढ</td>
<td>अरनैला, प्रेमनगर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सुखना</td>
<td>सुखना से परमाणू</td>
<td>भगवानपूरा, किशनगढ </td>
<td>15</td>
</tr>
<tr>
<td>सुकेती</td>
<td>मंडी से बैहना</td>
<td>समखेतर,करतापूर </td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>बिनवा</td>
<td>पपरोला से बैजनाथ</td>
<td>खतरेहड</td>
<td>5</td>
</tr>
<tr>
<td>मारकंडा</td>
<td>कालाअंब से नारायणपूर </td>
<td>कालाअंब, आगली</td>
<td>4</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>इसमें से ब्यास नदी का सबसे अधिक 80 किलोमीटर का स्ट्रेच प्रदूषित पाया गया है। पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने का मतलब यह है कि पानी में किसी ऑक्सीजन की कमी है और किसी प्रकार का जीव इसमें जीवित नहीं रह सकता। देश भर में सीपीसीबी की ओर से मॉनिटर की गई नदियों में से 275 नदियों में प्रदूषण पाया गया है। सीपीसीबी ने 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित राज्यों की 445 नदियों को मॉनिटर किया था। इनमें से 302 स्ट्रैच में बीओडी के स्तर को सही नहीं आंका गया है।</p>
<p><strong>प्रदूषण के कारण</strong></p>
<p>नदियों में जल प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट और सीवरेज है। नदियों में प्लास्टिक और कूड़ा कचरा फेंके जाने से प्रदूषण बढ़ गया है। नदियों में मरे हुए पशु, नदियों के किनारे मल जल का त्याग करने और पशुओं को नहलाना से भी पानी की गुणवत्ता में असर पड़ता है।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बरोटीवाला उद्योग से निकले प्रदूषित पानी  के तालाब में गिराने से हजारों मछ‌ल‌ियों की मौत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/barotiwala-industrial-pollution-kills-thousands-of-fish-in-pool/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Oct 2016 06:23:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Baddi Barotiwala Nalagarh Industrial Area]]></category>
		<category><![CDATA[BBN Industrial Pollution]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Fisheries Dept]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[SDO Atul Parmar]]></category>
		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं सोलन- औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं। ग्रामीणों ने [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/barotiwala-industrial-pollution-kills-thousands-of-fish-in-pool/">बरोटीवाला उद्योग से निकले प्रदूषित पानी  के तालाब में गिराने से हजारों मछ‌ल‌ियों की मौत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं</strong></p>
<p><strong>सोलन-</strong> औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं। ग्रामीणों ने मजदूर लगाकर करीब दो क्विंटल मरी हुई मछलियों को तालाब से बाहर निकालकर इसकी सफाई की। उद्योग की इस लापरवाही पर ग्रामीणों के विरोध के बाद आनन फानन में प्रदूषण बोर्ड की ओर से प्रारंभिक जांच कर बिजली कनेक्शन के टैंपरेरी डिस्कनेक्ट करने की सिफारिश बोर्ड चेयरमैन से की गई है।</p>
<p>प्रदूषण बोर्ड की ओर से मत्स्य विभाग द्वारा सैंपल उठाए जाने के बाद दूसरे दिन कार्रवाई को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों ने इस दौरान प्रदूषण बोर्ड पर समय रहते उद्योग के खिलाफ कार्रवाई न करने के आरोप भी लगाए। उद्योग तालाब से मात्र एक सौ मीटर की दूरी पर है। इसका केमिकल युक्त रंगीन पानी नाले में गिरकर सीधा तालाब की ओर आता है।</p>
<p>ग्रामीणों ने कहा कि उद्योग खुलेआम हाई कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है। प्रदूषण बोर्ड की ओर से भी मामले में समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। तालाब में 35000 मछलियों का बीज डाला था। इनमें से अधिकतर उद्योग के केमिकल युक्त पानी के कारण मर गयी।</p>
<p><strong>आक्सीजन की कमी से हुई मौत: सोमनाथ</strong></p>
<p>मत्सय विभाग के अधिकारी डॉ. सोमनाथ ने कहा कि तालाब में आक्सीजन की कमी से मछलियों की मौत हुई है। तालाब में बहुत अधिक मात्रा में गंदगी मौजूद है। पानी की टेस्टिंग के बाद ही सही तथ्य सामने आ पाएंगे। एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अतुल परमार ने कहा कि उद्योग का गंदा पानी तालाब की ओर जा रहा है। उद्योग की प्रारंभिक लापरवाही को देखते हुए बोर्ड चेयरमैन के पास टेंपरेरी डिस्कनेक्शन को रिपोर्ट भेज दी है।</p>
<p>Photo: Birmingham Mail/ Representational Purpose</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/barotiwala-industrial-pollution-kills-thousands-of-fish-in-pool/">बरोटीवाला उद्योग से निकले प्रदूषित पानी  के तालाब में गिराने से हजारों मछ‌ल‌ियों की मौत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिमाचल में  पॉलीथीन पर प्रतिबंध के बावजूद शिमला में फिर से सरेआम शुरू हुआ पॉलीथीन का प्रयोग, अधिकारी बरत रहे  ढील</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/19/polythene-bags-being-use-in-shimla-despite-ban-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Oct 2016 12:04:12 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Environment]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णतया प्रतिबंध है परंतु प्रदेश की राजधानी शिमला में पॉलीथीन का प्रयोग फिर से शुरू होने से सरकार के आदेशों की सरेआम धज्जिया उड़ रही हैं। राजधानी शिमला की सब्जी मंडी सहित ढली सब्जी मंडी में अन्य राज्यों से सब्जिया आदि भी पॉलीथीन में पैक होकर बाजार में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णतया प्रतिबंध है परंतु प्रदेश की राजधानी शिमला में पॉलीथीन का प्रयोग फिर से शुरू होने से सरकार के आदेशों की सरेआम धज्जिया उड़ रही हैं। राजधानी शिमला की सब्जी मंडी सहित ढली सब्जी मंडी में अन्य राज्यों से सब्जिया आदि भी पॉलीथीन में पैक होकर बाजार में पहुंच रही हैं। </p>
<p>बाजार में सब्जी की दुकानों पर पॉलीथिन में पैक सब्जी को आम देखा जा सकता है, जिससे साफ जाहिर है कि व्यापारियों में पुलिस और प्रशासन का खौफ नहीं है। प्रतिदिन कई क्विंटल पॉलीथीन एकत्रित हो रहा है। सब्जी मंडी में फैली अव्यवस्था की वजह से हिमाचल सरकार का पॉलीथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ अभियान नारा बनकर रह गया है।</p>
<p>शिमला की ढली सब्जी मंडी में मंगलवार सुबह को खुले आम पॉलीथीन की लिफाफे में बंद भिंडी व घीया, हरी मिर्च, बैंगन की बोली लगाई जा रही है। सब्जिया न सिर्फ मंडी में ही बिक रही हैं बल्कि शहर के अन्य भागों में भी धड़ल्ले से बेची जा रही हैं लेकिन अधिकारी यह दावे करते नहीं थक रहे हैं कि प्रदेश में पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है जबकि जंक फूड तो 100 प्रतिशत पॉलीथीन में आ रहा है। </p>
<p>प्रदेश के हर हिस्से में पॉलीथीन में सामान बिक रहा है। सरकार ने पॉलीथीन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान किया है परंतु सब्जी मंडी के आढ़तियों को पूछने वाला कोई नहीं है। इनके हौसले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं और अन्य राज्यों से पॉलीथीन में पैक सब्जियां बिना खौफ के लाई जा रही हैं।</p>
<p> दिल्ली, हरियाणा व पंजाब से आने वाली सब्जियां अधिकतर पॉलीथीन के लिफाफों में ही पैक होकर आती हैं। न सिर्फ सब्जियों बल्कि अन्य खाद्य पदार्थो कोभी पॉलीथीन में पैक कर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। न तो बैरियरों पर ऐसी गाड़ियों की चेकिंग हो रही है और न ही ऐसे सामान को उतारने के समय पर इन्हें कोई पूछने वाला है।</p>
<p><strong>अधिकारी बरत रहे है ढील</strong></p>
<p>अन्य राज्यों से प्रदेश के भीतर पॉलीथीन में आने वाले उत्पादों पर रोक लगाने में अधिकारी ढील बरत रहे हैं। इसका फायदा व्यापारी वर्ग उठा रहा है। यदि विभाग इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें तो आढ़ती भी अन्य राज्यों से आने वाली सब्जियों के लिए अन्य विकल्प ढूंढें लेकिन प्रशासन की लापरवाही से सारा गोरखधंधा चल रहा है।</p>
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		<title>रोहड़ू के ग्रामीणों ने रात को खनन माफिया पर धावा बोल रंगे हाथों पकड़ा, पर पुलिस ने दिया भागने का मौका</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/himachal-mining-mafia-in-rohru-district-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Oct 2016 08:27:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लगभग 50-60 महिलाओं व पुरुषों ने रात 11 बजे खनन माफिया को रंगे हाथों पकड़ा लेकिन उक्त लोगों के अनुसार पुलिस द्वारा समय पर न पहुंचकर माफिया को भागने का मौका दिया गया। शिमला- पब्बर नदी में अवैध खनन रोकने के लिए मैहंदली के पास सोमवार रात ग्रामीणों ने खनन माफिया पर धावा बोला तथा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लगभग 50-60 महिलाओं व पुरुषों ने रात 11 बजे खनन माफिया को रंगे हाथों पकड़ा लेकिन उक्त लोगों के अनुसार पुलिस द्वारा समय पर न पहुंचकर माफिया को भागने का मौका दिया गया।<br />
</strong><br />
<strong>शिमला-</strong> पब्बर नदी में अवैध खनन रोकने के लिए मैहंदली के पास सोमवार रात ग्रामीणों ने खनन माफिया पर धावा बोला तथा माफिया के वाहनों को रोका। यह वाकया रात 11 बजे का है तथा ग्रामीणों ने रात 11 बजे जब इसकी सूचना रोहड़ू पुलिस को दी तो पुलिस इसमें कोई भी गंभीरता न दिखाते हुए 2 बजे घटनास्थल पर पहुंची तथा तब तक अवैध खनन करने वाले वाहन मौके से निकल चुके थे व एक ही एल.एंड टी. मौके पर थी।</p>
<p>पंचायत प्रधान, वार्ड सदस्य व महिला मंडल प्रधान सहित लगभग 50-60 महिलाओं व पुरुषों ने रात 11 बजे खनन माफिया को रंगे हाथों पकड़ा लेकिन उक्त लोगों के अनुसार पुलिस द्वारा समय पर न पहुंचकर माफिया को भागने का मौका दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि रोहड़ू सब्जी मंडी से लेकर सिदौर तक पब्बर नदी में हर रोज रात के अंधेरे में प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध खनन किया जाता है जिससे तटवर्तीय लोगों की नींद हराम हो गई है।</p>
<p>पंचायत प्रधान व महिला मंडल प्रधान सीमा चौहान ने बताया कि खनन माफिया को पुलिस प्रशासन, खनन विभाग व नेताओं का आशीर्वाद है जिनके बलबूते पब्बर नदी में बेखौफ बड़ी-बड़ी मशीनें रात के अंधेरे में अवैध खनन में लगी है। उन्होंने कहा कि पब्बर नदी से हर रात लगभग 20 गाडिय़ां अवैध रेत व बजरी लेकर निकल रही हैं जिससे लाखों रुपए माफिया कमा रहे हैं। पंचायत प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि पब्बर नदी में हो रहे अवैध खनन बारे वह कई बार मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन को अवगत करवा चुके हैं लेकिन माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>न स्टाफ और न कोई वाहन फिर भी संभाला है 4 तहसीलों का जिम्मा : कमलेश</strong></p>
<p>खनन विभाग के इंस्पैक्टर कमलेश कुमार ने कहा कि वह अकेले हैं न स्टाफ, न कोई वाहन तथा न ही कोई सुरक्षा उनके पास है फिर भी 4 तहसीलों का जिम्मा संभाले हुए हैं व चालान काटते हैं।</p>
<p><strong>अवैध मार्गों को किया जाएगा बंद:शैलजा</strong></p>
<p>जब इस बारे में जिला खनन अधिकारी शैलजा चौधरी ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, हम शिकायत मिलने पर तुरंत एक्शन लेते हैं व चालान काटते हैं। उन्होंने भी माना कि विभाग के पास वाहन की कमी के चलते उनके कर्मचारियों को परेशानी आ रही है लेकिन पब्बर नदी में अवैध खनन रोकने के लिए खनन माफिया द्वारा जिन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है उन अवैध मार्गों को तुरंत बंद किया जाएगा।</p>
<p><strong>टिप्पर व जेसीबी का चालान काटा: विकास</strong></p>
<p>इस मामले में पुलिस पर लगे आरोप बारे जब अतिरिक्त थाना प्रभारी रोहड़ू विकास से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा खनन माफिया की गाडिय़ां रोके जाने की उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं है लेकिन फोन आने के बाद पुलिस मौके पर गई थी तथा एक टिप्पर व एक जेसीबी का 45,000 रुपए का चालान काटा गया है।  </p>
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		<title>रोहतांग के लिए आज चलेगी इलेक्ट्रिक बस, हिमाचल बनेगा जीरो एमिशन बसें चलने वाला देश का पहला राज्य</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/04/rohtang-pass-electric-bus-service-to-begin-today/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Oct 2016 07:42:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>इलेक्ट्रिक बसें चलाकर हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है शिमला- 13050 फुट की ऊंचाई पर स्थित देश व दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे के लिए मंगलवार को इलेक्ट्रिक बस रवाना होगी। बस का ट्रायल सफल होने पर प्रदेश में 25 बसें चलाई जाएंगी। इलेक्ट्रिक बसें चलाकर हिमाचल प्रदेश देश [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इलेक्ट्रिक बसें चलाकर हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> 13050 फुट की ऊंचाई पर स्थित देश व दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे के लिए मंगलवार को इलेक्ट्रिक बस रवाना होगी। बस का ट्रायल सफल होने पर प्रदेश में 25 बसें चलाई जाएंगी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang.jpg" alt="zero emissions bus Rohtang" width="1000" height="750" class="alignnone size-full wp-image-7730" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-768x576.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-265x198.jpg 265w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-696x522.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/zero-emissions-bus-Rohtang-560x420.jpg 560w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>इलेक्ट्रिक बसें चलाकर हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। यह 24 सीटर बस 5 घंटे चार्ज करने के बाद 200 किमी का सफर तय करेगी। मनाली के बस स्टैंड में खड़ी यह बस लोगों की चर्चा का विषय बनी हुई है। बस के सफल ट्रायल को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। बस की धरातल से ऊंचाई कम होने के चलते रोहतांग जैसे मार्ग पर बस का सफल ट्रायल चुनौती से भरा है। वहीं, दूसरी ओर बस की लेफ्ट ड्राइव होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। रोहतांग दर्रे के लिए इन दिनों मनाली घाटी के लगभग 2500 पर्यटक वाहन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तहसीलदार मनाली हरीश शर्मा ने बताया कि परिवहन मंत्री सुबह इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाएंगे। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali.jpg" alt="Electric Buse Manali" width="1000" height="750" class="alignnone size-full wp-image-7728" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-768x576.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-265x198.jpg 265w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-696x522.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Electric-Buse-Manali-560x420.jpg 560w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>टैक्सी यूनियन मनाली के प्रधान राज कुमार डोगरा ने सरकार से आग्रह किया कि सरकार इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ गाड़ियों को सीएनजी भी उपलब्ध करवाए ताकि पर्यावरण भी प्रभावित न हो और 2500 लोगों की रोजी-रोटी भी चलती रहे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार टैक्सी ऑपरेटरों की रोजी-रोटी सुनिश्चित नहीं करती है तो टैक्सी ऑपरेटर सड़कों पर उतरने के लिए विवश होंगे</p>
<p>Photo: Auto Blog India</p>
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		<item>
		<title>रिपोर्ट में खुलासा, रोहड़ू में जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़, शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों का सफाया</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/deodar-felling-in-rohru-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:44:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/deodar-felling-in-rohru-shimla/">रिपोर्ट में खुलासा, रोहड़ू में जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़, शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों का सफाया</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव शालन में शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों को काट दिया गया।</p>
<p>शवदाह के लिए नियमानुसार कैल के पेड़ काटने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं किया गया। धर्मशाला में कई जगह पेड़ों को इसलिए काटा गया कि पेड़ गाड़ी पार्किं ग में दिक्कतें पैदा कर रहे थे। धर्मशाला में अपर धर्मकोट इलाके में सिडार हिमालयन पैराडाइस का निर्माण तो पूरी तरह नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। पेड़ों को कंक्रीट में दबाया जा रहा है। नगर निगम धर्मशाला एवं वन विभाग की ओर से न के बराबर कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने इसी मामले में मंडी के कटौला वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई दो अगस्त को निर्धारित की है।</p>
<p>सरकार के लिए आंखें खोलने वाली है रिपोर्ट एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने पर कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए आंखें खोल देने वाली है। कोर्ट ने प्रदेश में लगातार हो रहे अवैध वन कटान की शिकायतों के मद्देनजर प्रदेश सरकार से इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए चार</p>
<p>सप्ताह का समय दिया है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वन काटुओं के खिलाफ कोर्ट के आदेशानुसार आपराधिक मामले दर्ज कर संबंधित न्यायालयों में अभियोजन चलाएं। पुलिस अधीक्षकों को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है।</p>
<p><strong>जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़</strong> </p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहडू़ तहसील के तहत टिक्कर कॉलेज भवन निर्माण के लिए जबरन भूमि चयन करवाने के लिए वन भूमि से 51 पेड़ काट लिए गए थे। पुलिस चौकी टिक्कर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर काटे गए इन पेड़ों में 49 पेड़ कैल के और एक-एक देवदार और रई के थे।</p>
<p>ये पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र कशैनी में बिना अनुमति केवल इसलिए काट लिए गए, जिससे उस भूमि पर कम से कम पेड़ नजर आएं और कॉलेज के लिए भूमि का चयन आसानी से हो जाए। इस क्षेत्र में डीएफओ की ओर से टीडी अधिकारों को निलंबित करने के निर्णय को एमिकस क्यूरी ने सही और तर्कसंगत ठहराया है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/deodar-felling-in-rohru-shimla/">रिपोर्ट में खुलासा, रोहड़ू में जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़, शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों का सफाया</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>वैज्ञानिकों का खुलासा- हाइड्रो प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से चढ़ रहा हिमाचल के पहाड़ों  का तापमान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/16/himachals-hydro-power-projects-causing-rise-in-temperature/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Jul 2016 10:33:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Himalayas HP Horticulture Dept]]></category>
		<category><![CDATA[Pandoh Dam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हाइड्रो प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से भी पहाड़ तपने लगे हैं,अध्ययन के अनुसार लारजी और पंडोह डैम के निर्माण के बाद कुल्लू-मनाली के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। शिमला- हाइड्रो प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से भी पहाड़ तपने लगे हैं। हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों के वाटर रेजरवायरों से उत्सर्जित मिथेन गैस से ठंडे पहाड़ों का [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाइड्रो प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से भी पहाड़ तपने लगे हैं,अध्ययन के अनुसार लारजी और पंडोह डैम के निर्माण के बाद कुल्लू-मनाली के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong> हाइड्रो प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से भी पहाड़ तपने लगे हैं। हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों के वाटर रेजरवायरों से उत्सर्जित मिथेन गैस से ठंडे पहाड़ों का पारा चढ़ रहा है। डैमों से निकलने वाली सीएच-4 मिथेन गैस आबोहवा को गर्म कर ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा दे रही है।<br />
ठंड के चलते प्रदेश के जिन इलाकों में साल भर ऊन के कपड़े पहनने पड़ते थे, वहां अब गर्मियों में पंखे और कूलर चल रहे हैं। हिमाचल के कई इलाकों में पन बिजली परियोजनाओं के विशाल डैमों के निर्माण से मई- जून में तापमान 33 से 41 डिग्री तक चढ़ रहा है।</p>
<p>इनके बनने से पहले यहां तापमान 20 और 24 डिग्री के बीच रहता था। जीबी पंत नेशनल पर्यावरण अनुसंधान केंद्र मौहल के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिकों के अध्ययन में हुआ खुलासा</strong></p>
<p>संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक जेसी कुनियाल की अगुवाई में हुए इस अध्ययन के अनुसार लारजी और पंडोह डैम के निर्माण के बाद कुल्लू-मनाली के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।</p>
<p>इसरो की मदद से मनाली के कोठी में स्थापित ऑब्जर्वेटरी के आंकड़े बताते हैं कि इसका असर ग्लेशियरों पर भी दिखने लगा है। पहले जहां मनाली क्षेत्र के लोग साल भर ऊनी कोट पहने रखते थे।</p>
<p>अब इस क्षेत्र में लोगों को घरों में पंखे लगाने पड़ रहे हैं। इसी तरह गोबिंद सागर डैम के निर्माण से पहले बिलासपुर और पौंग डैम बनने से पहले कांगड़ा में भी इतनी गर्मी नहीं पड़ती थी।</p>
<p><strong>सेब की फसल पर भी असर</strong></p>
<p>बागवानी उपनिदेशक रोशन लाल का कहना है कि कुछ अरसा पहले तक कुल्लू के बजौरा में सेब की फसल होती थी, लेकिन तापमान में एकाएक बढ़ोतरी से अब सेब की बेल्ट बजौरा के बजाय रायसन तक खिसक गई है।</p>
<p>कुल्लू फल उत्पादक मंडल के अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय का कहना है कि पहले तापमान कम रहने से पूरा साल पहाड़ों पर बर्फ रहती थी। इससे फसल भी बेहतर रहती थी। सेब की सेल्फ लाइफ ज्यादा थी।</p>
<p>पंखे- कूलर यहां के लिए अनजानी चीजें थीं। लेकिन गर्मी बढ़ने से फसल को तुड़ान के एकदम बाद मार्केट में लाना पड़ता है ताकि यह खराब न हो जाए।</p>
<p><strong>लेह-लद्दाख की ओर मुड़ रहे सैलानी</strong></p>
<p>हिमालय के जानकार और इतिहासकार छेरिंग दोरजे का कहना है कि करीब डेढ़ सौ साल पहले कर्नल जॉनसन, रैनिक, मिनिकन एवं थॉमस जैसे अंग्रेज अफसरों ने कुल्लू व मनाली का मौसम इंग्लैंड की तरह होने के चलते यहां बसने का इरादा बनाया था।</p>
<p>लेकिन, अब अंग्रेज सैलानी भी गर्मियों के मौसम में यहां ठहरने की बजाए लेह-लद्दाख का रुख करने लगे हैं।</p>
<p>Photo: WikiMedia/Representational image</p>
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