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	<title>कला और संस्कृति Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>कला और संस्कृति Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>पहाड़ी (हिमाचली) को राज्य की आधिकारिक भाषा बनाने की फिर उठी मांग, प्रदेश हाई कोर्ट नें जारी किया जनहित याचिका के सन्दर्भ में आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/12/pil-filed-in-hp-high-court-pahari-himachali-as-hill-states-official-language/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Nov 2021 08:39:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिमी पहाड़ी]]></category>
		<category><![CDATA[पहाड़ी भाषा]]></category>
		<category><![CDATA[भाषा और संस्कृति विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग, जबकि पहाड़ी बोलने वाले 40 लाख से अधिक लोग, फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया। शिमला-प्रदेश सरकार ने संस्कृत को तो दूसरी भाषा घोषित कर दिया लेकिन पहाड़ी को भाषा का दर्जा देने के लिए कोई कदम [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग, जबकि पहाड़ी बोलने वाले 40 लाख से अधिक लोग, फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>प्रदेश सरकार ने संस्कृत को तो दूसरी भाषा घोषित कर दिया लेकिन पहाड़ी को भाषा का दर्जा देने के लिए कोई कदम अभी तक क्यों नहीं उठाया। ये कहना  है अर्श धनोटिया का जिन्होंने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और मांग राखी थी कि पहाड़ी को हिमाचल प्रदेश की आधिकारिक भाषा घोषित किया जाए। याचिका कर्ता के वकील भवानी प्रताप कुठलेरिया नें इस बारे में उन्होंने कई तथ्य कोर्ट के सामने रखे। 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग हैं जबकि पहाड़ी 40 लाख से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। पर फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया।</p>
<p>याचिका में नई शिक्षा निति 2020 के तहत पहाड़ी (हिमाचली) और अन्य स्थानीय भाषाओँ को पाठशालाओं में प्राथमिक और माध्यमिक  स्तर पर शिक्षा का माध्यम बनाये जाने, 2021 की जनगणना में पहाड़ी (हिमाचली) को अलग श्रेणी में रखने और साथ ही साथ लोगों, खासकर के युवा वर्ग को जागरूकता शिविरों के द्वारा पहाड़ी को प्रोत्साहन देने और उसे राज्य की मातृ भाषा बनाने की मांग रखने के बारे में भी कहा गया। जिसके जवाब में हाई कोर्ट ने इस संधर्भ में सोमवार को आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>न्यामूर्ति मुहम्मद रफ़ीक और न्यायमूर्ति सबीना की पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा  “कोर्ट राज्य सरकार को तब तक कोई निर्देश नहीं दे सकते जब तक यह साबित न हो कि पहाड़ी (हिमाचली) की अपनी एक संयुक्त लिपि है और पूरे राज्य में एक ही पहाड़ी बोली प्रचलित है। हालांकि, याचिकाकर्ता को एक सामान्य पहाड़ी (हिमाचली),  सामान भाषा के ढांचे और सामान टांकरी लिपि को बढ़ावा देने की दृष्टि से एक शोध करने के लिए  हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा कला और संस्कृति विभाग से संपर्क करने की स्वतंत्रता है और यदि याचिकाकर्ता प्रतिवादी-राज्य के पास, भाषा एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त प्रमुख सचिव के माध्यम से पहुँचता है, तो यह कथित विभाग के ऊपर है कि वह उसका निवारण कानून के हिसाब से करें।”</p>
<h3><strong>क्या है पहाड़ी भाषा का मतलब </strong></h3>
<p>अर्श धनोटिया का कहना है कि पहाड़ी (हिमाचली), हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली पश्चिमी पहाड़ी बोली शृंखला के लिए इस्तेमाल होने वाला संयुक्त पारिभाषिक शब्द है तथा इसमें मुख्यतः कांगड़ी, मंडयाली, चम्बयाली, कुल्लवी, म्हासुवी पहाड़ी और सिरमौरी आती है। उसके अनुसार हिमाचल प्रदेश के गठन के समय से ही पहाड़ी (हिमाचली) को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग होती रही है। इसे आधिकारिक तौर पर 37 ऐसी अन्य भाषाओं के साथ सूचीबद्ध किया गया है जिन्हें अनुसूचित श्रेणी में रखने की पहले से ही माँग है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वर्ष 1970 और 2010 में इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>कविता: ज़िंदगी के समंदर में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/09/22/shimlas-poets/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Sep 2017 13:48:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[आकाशवाणी शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[कविता]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली कवी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#124;वंदना राणा- हे ईश्वर बनाना नहीं इन्सान धरती पर, इंसानियत का पाठ उसे अब पढ़ाया न जायेगा। खिलाना न फूल किसी गुलशन में&#8212; धूल का फूल चरणों में तेरे चढ़ाया न जायेगा। पैदा होते बच्चों में मत भरना किलकारियां&#8212; सिसकियां ले ले कर उसे हंसाया न जायेगा। जिंदगी के समंदर में आयी सुनामियां यहां किनारों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला|वंदना राणा-</strong> हे ईश्वर बनाना नहीं इन्सान धरती पर,<br />
इंसानियत का पाठ उसे अब पढ़ाया न जायेगा।</p>
<p>खिलाना न फूल किसी गुलशन में&#8212;<br />
धूल का फूल चरणों में तेरे चढ़ाया न जायेगा।</p>
<p>पैदा होते  बच्चों में मत भरना किलकारियां&#8212;<br />
सिसकियां ले ले कर उसे हंसाया न जायेगा। </p>
<p>जिंदगी के समंदर में आयी सुनामियां<br />
यहां किनारों में किसी को लाया न जायेगा।</p>
<p>सात सुरों के रंग मत भरना वाणी में &#8212;<br />
बंदूक की नोक में उसे सुनाया न जायेगा।    </p>
<p>खेत खलिहान धुंधले उजड़े हुए चाँद-सितारे&#8211;<br />
गए मौसम बहारो के फिर से उन्हें बुलाया न जायेगा। </p>
<p>उजड़ी है बस्तियां गांव ओ शहरों में , बस भी जायेगी&#8212;<br />
उजड़े दिल के आशियानों को बसाया न जायेगा।</p>
<p>वादिये जन्नत में दशहत गर्दों का आलम है&#8211;<br />
पत्थरवाजों से सर अपना कहीं बचाया न जायेगा। </p>
<p>ज़मीं आसमां नदियां सागर पंछी पंख पसारे कहते<br />
चलो उड़ चलें इस जहां में अब रहा न जाएगा।</p>
<p>हे ईश्वर! धर्म खातिर हो जाओ उजागर,<br />
इंसा का बहता लहू हमसे देखा न जायेगा&#8212;।   </p>
<p><strong>जानिए लेखिका वंदना राणा के बारे में </strong></p>
<p>वंदना राणा का जनम हिमाचल प्रदेश के जिला हमीपुर में हुआ और इनकी प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं हुई। हमीरपुर कॉलेज से ही इन्होंने एमए हिंदी की है।वंदना ने शिमला से बीएड की डिग्री ली है। वंदना को कुदरत ने बचपन से ही आकर्षित किया है। </p>
<p>वंदना का कहना है कि उनका घर कुदरत की गोद में ही बना था। आसपास घने दरख्त,आम, केले, खट्टे किन्नु और कई फलदार वृक्ष थे। उन पेडों पर पंछियों को देख कर मन बहुत खुश हो जाता था। मैं कुदरत की गोद में बड़ी हुई हूँ। कविता लिखना मैंने कॉलेज के समय में शुरू किया था जो मेरा शौक ही बना गया। मेरे इस शौक को मेरे पति ने और भी निखार दिया और मुझे प्रोत्साहित किया।  </p>
<p>रेडियो सुनने का बचपन से ही शौक था,फिर आकाशवाणी शिमला में रचनाये भेजी जो मेरी ही आवाज़ में प्रसारित हुई। जिससे मुझे बहुत खुशी हुई। बाद  में हिमाचली बोलियों के कांगड़ी बोली के प्रसारण हेतु मेरा चयन हुआ तो यह लिखने का शौक और परवान चढ़ता गया।अब लिखना मेरा जीवन बन चूका है। </p>
<p>इसी शौक की वजह से मैंने रेडियो राईटिंग और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। जिस तरह बहती नदियां कई उबड़ खाबड़ रास्तों से हो कर गुजरती है उसी तरह मेरी लेखन यात्रा भी निरंतर बहती जा रही है।  </p>
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		<title>अकादमी के शिखर पुरस्कारों के वितरण में हेरा-फेरी, साल पूरा होने से पहले ही बाटें जा रहे साहित्य पुरस्कार:गुरुदत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/08/17/irregularity-in-hp-academy-of-language-art-and-culture-award-distribution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Aug 2017 10:44:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य पुरुस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्यकार गुरुदत शर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल कला संस्कृति भाषा विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सर्वहितकारी संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल कला, संस्कृति-भाषा अकादमी के सचिव की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2017 के तीन शिखर सम्मानों के लिए आगामी 26 अगस्त तक उपलब्धियों के विवरण सहित प्रविष्टियां मांगी गई हैं। उल्लेखनीय है कि 2016 के शिखर पुरस्कार गत् मार्च 2017 में दिए गए थे और अब पांच महीने बाद 2017 के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल कला, संस्कृति-भाषा अकादमी के सचिव की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2017 के तीन शिखर सम्मानों के लिए आगामी 26 अगस्त तक उपलब्धियों के विवरण सहित प्रविष्टियां मांगी गई हैं। उल्लेखनीय है कि 2016 के शिखर पुरस्कार गत् मार्च 2017 में दिए गए थे और अब पांच महीने बाद 2017 के पुरस्कार देने की भी तैयारी है, जबकि वर्ष 2017 के अभी चार महीने शेष हैं। </p>
<p>किसी भी वर्ष के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां वर्ष पूरा होने के बाद ही आमंत्रित की जाती है, क्योंकि साहित्यकार और कलाकार वर्ष के अंत तक नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।</p>
<p>हिमाचल सर्वहितकारी संघ के अध्यक्ष एवं साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी वर्ष के पुरस्कार अग्रिम रूप से देना किसी भी सूरत में नियमानुकूल नहीं कहे जा सकते। इस तरह तो अकादमी आगामी वर्षों के पुरस्कार भी अग्रिम रूप से दे देगी। पुरस्कार देना लाखों की राशि बांटना ही नहीं होता, बल्कि साहित्यकारों-कलाकारों की नियत अवधि के भीतर की रचनात्मक उपलब्धियों का सही मूल्यांकन होना चाहिए।</p>
<p>गुरुदत शर्मा ने कहा कि साहित्य के पिछले शिखर सम्मान को लेकर भी विवाद हुआ था, तब बिना सूचना दिए चुपचाप अकादमी के चंद सदस्यों को बैठाकर ही लाख रुपये के पुरस्कार बांट दिए गए थे। </p>
<p>इस बार अग्रिम रूप से पुरस्कृत करने का सीधा मतलब है कि वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों से पहले ही वे पुरस्कार भी बांट देने हैं जो कायदे से वर्ष 2017 की उपलब्धियों का मूल्यांकन करके वर्ष 2018 में दिए जाने चाहिए। अकादमी के अधिकारी शायद ये मानकर चल रहे हैं कि आगे ये सरकार नहीं आएगी, इसलिए अभी अग्रिम मनमानी कर लें।</p>
<p>इस संदर्भ में गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी भी पुरस्कार की प्रविष्टियां मांगने के लिए कोई भी संस्था बाकायदा विज्ञापन जारी करती है, जिसमें नियमों आदि का उल्लेख भी किया जाता है। इस तरह प्रेसनोट जारी करके बेगार टालने का मतलब है कि इस योजना में बहुत जल्दी में पिछली बार की तरह मनमानी की जानी है।</p>
<p>साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि संसथा की ओर से अकादमी के अध्यक्ष तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है कि इस सबसे बड़े पुरस्कार के नियम पहले प्रकाशित करके जाहिर किए जाएं और वर्ष 2017 के पुरस्कार साल पूरा होने पर देने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि इस अकादमी की कार्यप्रणाली मजाक न बने। </p>
<p>उन्होंने कहा कि किसी पुरस्कार के लिए प्रकाशित साहित्य का मूल्यांकन जरूरी है। शिखर पुरस्कार के लिए कोई पुस्तकें नहीं मांगी जा रही। इसलिए इसमें मनमानी होने की पूरी संभावना है।</p>
<p>शर्मा ने कहा कि अकादमी के संविधान के अनुसार कार्यकारिणी के अध्यक्ष हिमाचल सरकार के भाषा-संस्कृति सचिव होते हैं लेकिन इस पद को किनारे करके संस्था के सचिव का पद भी नियमानुसार नहीं भरा गया। इसलिए अकादमी में चंद लोगों की मनमानी चल रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कम से कम साहित्य एवं कला-संस्कृति के क्षेत्र में तो उचित नियमानुसार काम होना चाहिए। गुरुदत शर्मा ने प्रदेश के साहित्यकारों व कलाकारों से भी अनुरोध किया कि अकादमी में चल रही मनमानी का विरोध करके इसके अनियमित कार्यक्रमों का बहिष्कार करें।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/08/17/irregularity-in-hp-academy-of-language-art-and-culture-award-distribution/">अकादमी के शिखर पुरस्कारों के वितरण में हेरा-फेरी, साल पूरा होने से पहले ही बाटें जा रहे साहित्य पुरस्कार:गुरुदत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>हिमाचली फिल्म ने अमेरिकन फिल्म फेस्टिवल में जीता सर्वश्रेष्ठ  फीचर फिल्म का अवॉर्ड, जानिए इस फिल्म की कहानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/23/himachali-film-sanjh-at-borrego-springs-film-festival-2017/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Jan 2017 13:23:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[अकोलेड ग्लोबल फिल्म कम्पटीशन]]></category>
		<category><![CDATA[बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल]]></category>
		<category><![CDATA[साइलेंट हिल्स स्टूडियो]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रतिभा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली फिल्म]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली भाषा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली सिनेमा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सांझ फिल्म अभी तक 2 अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुकी है। दुनिया भर से आई 750 फिल्मों से सांझ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। हिमाचली भाषा में बनी सांझ फिल्म शिमला- अमेरिका में भारतीय फिल्‍म का डंका बजा है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए &#8216;बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल&#8217; में &#8216;सांझ&#8217; फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/23/himachali-film-sanjh-at-borrego-springs-film-festival-2017/">हिमाचली फिल्म ने अमेरिकन फिल्म फेस्टिवल में जीता सर्वश्रेष्ठ  फीचर फिल्म का अवॉर्ड, जानिए इस फिल्म की कहानी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सांझ फिल्म अभी तक 2 अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुकी है। दुनिया भर से आई 750 फिल्मों से सांझ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। हिमाचली भाषा में बनी सांझ फिल्म</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>  अमेरिका में भारतीय फिल्‍म का डंका बजा है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए <em>&#8216;बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल&#8217;</em> में <em>&#8216;सांझ&#8217;</em> फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड दिया गया।</p>
<p>सिनेमा को शुरू हुए 100 वर्ष से ज्यादा का समय हो जाने के बाद भी हिमाचली सिनेमा अभी तक अपनी पहचान नहीं बना पाया है। आज तक एक भी हिमाचली फिल्म बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाई है लेकिन अपनी भाषा व बोली में फिल्म देखने का इंतजार कर रहे हिमाचल के लोगों का यह सपना जल्दी ही पूरा होने जा रहा है। हिमाचली भाषा में बनी सांझ फिल्म बड़े परदे पर नजर आने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब चर्चा बटोर रही है। </p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Film-Sanjh.jpg" alt="himachali-film-sanjh" width="747" height="500" class="alignnone size-full wp-image-9942" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Film-Sanjh.jpg 747w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Film-Sanjh-300x201.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Film-Sanjh-696x466.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Film-Sanjh-627x420.jpg 627w" sizes="(max-width: 747px) 100vw, 747px" /></p>
<p>सांझ फिल्म अभी तक 2 अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुकी है। 16 जनवरी को अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए <em>&#8216;बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल&#8217;</em> में &#8216;सांझ&#8217; फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म के अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस फेस्टिवल में दुनिया भर से आई 750 फिल्मों से सांझ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। यह सम्मान ग्रहण करने के लिए फिल्म के सह-निर्माता अनिल चंदेल समारोह में उपस्थित थे। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Borrego-Springs-Film-Festival.jpg" alt="borrego-springs-film-festival" width="800" height="283" class="alignnone size-full wp-image-9943" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Borrego-Springs-Film-Festival.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Borrego-Springs-Film-Festival-300x106.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Borrego-Springs-Film-Festival-768x272.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Borrego-Springs-Film-Festival-696x246.jpg 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>इस से पहले सांझ फिल्म को कैलिफोर्निया में ही अकोलेड ग्लोबल फिल्म कम्पटीशन में अवार्ड ऑफ मेरिट से भी सम्मानित किया जा चुका है। 26 जनवरी को सांझ फिल्म अमेरिका के लुसियाना स्टेट में ‘सिनेमा ऑन द बायू फिल्म फेस्टिवल’ में दर्शकों को दिखाई जाएगी।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Silent-Hills-Studio-Hamirpur.jpg" alt="silent-hills-studio-hamirpur" width="800" height="359" class="alignnone size-full wp-image-9946" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Silent-Hills-Studio-Hamirpur.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Silent-Hills-Studio-Hamirpur-300x135.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Silent-Hills-Studio-Hamirpur-768x345.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Silent-Hills-Studio-Hamirpur-696x312.jpg 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>सांझ फिल्म दादी और पोती की कहानी पर आधारित है। दादी कुल्लू के दूर-दराज के गांव में अकेली रहती है जबकि उसका बेटा, बहू और पोती चंडीगढ़ में रहते हैं। बेटा वहां एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर है। एक दिन उनकी खुशनुमा जिंदगी में एक घटना घटने के कारण वो बेटी को गांव में उसकी दादी के पास छोड़ जाते हैं। दादी काफी वक्त से अकेले रहने के कारण थोड़े चिड़चिड़े स्वभाव की हो गई है। जबकि पोती संजू जो पहले कभी गांव में नहीं रही वो अपने आप को अकेला महसूस करती है। </p>
<p>विडियो:<iframe loading="lazy" width="640" height="360" src="https://www.youtube.com/embed/USN4rD0qXus" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>दादी और संजू के बीच गांव का एक अनाथ लड़का है जिसकी नादानियां और शैतानियां इन दोनों के रिश्तों को मजबूत करने का काम करती हैं। फिल्म का निर्माण हमीरपुर स्थित साइलेंट हिल्स स्टूडियो के बैनर तले हुआ है और इसके निर्माता और निर्देशक अजय सकलानी है। </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Films.jpg" alt="himachali-films" width="800" height="353" class="alignnone size-full wp-image-9948" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Films.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Films-300x132.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Films-768x339.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Films-696x307.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>अजय मंडी जिला के धर्मपुर के रहने वाले हैं। फिल्म की नायिका यानी संजू का किरदार चम्बा की अदिति चाड़क निभा रही हैं तथा मुख्य नायक जोंगा का किरदार मंडी के विशाल परपग्गा ने बखूबी निभाया है। फिल्म में पिता की भूमिका में बॉलीवुड के मशहूर एक्टर आसिफ बसरा नजर आएंगे जबकि मां का किरदार आंखों देखी फिल्म में चाची का किरदार निभा चुकी तरणजीत कौर निभा रही हैं। </p>
<p>वहीं दादी के किरदार में मंडी से रूपेश्वरी शर्मा नजर आएंगी। फिल्म का संगीत निर्देशन धर्मशाला के रहने वाले गौरव गुलेरिया ने किया है। फिल्म में दो गाने मशहूर गायक मोहित चौहान ने गाये हैं। फिल्म जल्द ही देशभर के सिनेमा घरों में रिलीज की जाएगी। </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture.jpg" alt="himachali-culture" width="800" height="456" class="alignnone size-full wp-image-9950" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture-300x171.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture-768x438.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture-696x397.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/01/Himachali-Culture-737x420.jpg 737w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
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		<item>
		<title>रिकांगपिओ में नेगी लामा तेनज़िन ग्यलछन के जीवन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 17 से 20 नवम्बर तक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/12/reckong-peo-conference-on-negi-lama-tenzin-gyalchan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2016 12:45:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[काँगड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[Buddha Study Protection Council Jispa]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Buddhist Monastery]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Tribal Development Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly Deputy Speaker]]></category>
		<category><![CDATA[kalachakra Temple Dharamshala]]></category>
		<category><![CDATA[Negi Lama Tenzin Gyaltsen]]></category>
		<category><![CDATA[ReckongPeo]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- बौद्ध विद्या संरक्षण सभा ने बताया कि जिस्पा लाहुल की ओर से ज़िला मुख्यालय रिकांगपिओ में नेगी लामा तेनज़िन ग्यलछन के जीवन और कृतित्व पर केंद्रित चार दिनों की राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से आयोजित यह संगोष्ठी 17 से 20 नवम्बर को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  बौद्ध विद्या संरक्षण सभा ने बताया कि जिस्पा लाहुल की ओर से ज़िला मुख्यालय रिकांगपिओ में नेगी लामा तेनज़िन ग्यलछन के जीवन और कृतित्व पर केंद्रित चार दिनों की राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से आयोजित यह संगोष्ठी 17 से 20 नवम्बर को रिकांगपिओ के कालचक्र मंदिर परिसर में होगी। इस संगोष्ठी का उद्घाटन 17 नवम्बर की प्रातरू हिमाचल विधानसभा के उपाध्यक्षजगत सिंह नेगी करेंगे। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ लामा करेंगे। </p>
<p>बौद्ध सभा ने यह भी कहा कि  इस संगोष्ठी में बोधिचित विषयक व्याख्या भी होगी। नेगी लामा के जीवन और कृतित्व पर इस संगोष्ठी का बीज भाषण साहित्यकार.सम्पादक डाण् तुलसी रमण का होगा। सभा ने बताया कि  बीसवीं सदी में नेगी लामा के नाम से चर्चितए बौद्ध विश्व के प्रख्यात विद्वान तेनज़िन ग्यलछन की जन्म भूमि किन्नौर है। यहां के सुन्नम गांव में जन्मे तेनज़िन ने तिब्बत जाकर 22 वर्षों तक वहां के मठों में बौद्ध विद्या का गहन अध्ययन किया। उसके बाद भारत लौटकर उन्होंने बनारसए नालंदाए श्रावस्तीए कुशीनगर और बोध गया आदि ज्ञान केंद्रों में भारतीय बौद्ध ग्रंथों का विस्तृत अध्ययन कियाए साथ ही असंख्य शिष्यों में इस ज्ञान का प्रसार भी किया। नेगी लामा परम पावन दलाई लामा के भी गुरु रहे हैं।</p>
<p>बौद्ध विद्या संरक्षण सभा जिस्पा के अध्यक्ष डाण् टशि पलज़ोर ने कहा कि इस संगोष्ठी में लगभग 40 विद्वान भाग लेंगे जिनमें हिमाचल के की किब्बर, किन्नौर, लाहुल, कुल्लू ,बैजनाथ, धर्मशाला तथा शिमला के बौद्ध विहारों के विद्वान लामा भी होंगे। इनके अतिरिक्त कर्नाटक के भिक्षु योनतन ज़ुंगनेए कुल्लू से छेरिंग दोरजेए तोबदन लाल चंद ढिस्साए नवांग तोबदनए लाहुल से ठिनले नमग्याल एरिगज़िन हायरप्पा अमची करमाए स्पीति से छेरिंग दारगेए फुंचोग राय शिमला से विद्या सागर नेगीए प्रभु लाल नेगीए दिल्ली से प्रोण् हीरागंग नेगी प्रोण् सेम्पा दोरजेए प्रोण्गदन सिंगे आदि की स्वीकृति मिली है। </p>
<p>सभा ने भी बताया कि बनारस तथा सारनाथ से भी पांच विद्वान आमंत्रित हैं। इनके अतिरिक्त किन्नौर के  लामा तोबग्ये रोशनलाल नेगीण् काचन हुकम सिंह नेगी रत्न मंजरीए फुंचोग शास्त्रीए भिक्षु देवराज नेगी आदि अनेक स्थानीय बुद्धिजीवी संगोष्ठी में भाग लेंगे। नेगी लामा पर केंद्रित यह ऐतिहासिक महत्व की संगोष्ठी होगी।</p>
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		<item>
		<title>चम्बियाली रैप म्यूजिक विडियो ’हरबेले प्यारुआ’ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लांच</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/03/harbele-pyarua-rap-chambyali-folk-rap-music-video-by-hpu-students-launched/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Oct 2016 10:42:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[2nd International Film Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Chamba Folk]]></category>
		<category><![CDATA[Gaiety theater Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Harbele Pyarua]]></category>
		<category><![CDATA[Himachali Music]]></category>
		<category><![CDATA[HP University Journalism and Mass Communication]]></category>
		<category><![CDATA[Nuisance production]]></category>
		<category><![CDATA[Nuisance production HP University]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- चम्बाली फोक और रैप का एक नया संगम म्यूजिक विडियो ‘हरबेले प्यारुआ’ की लांचिंग रविवार को गेयटी थियेटर में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुई पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की मनोरमा राठौर और नवोदित रैपर उमेश सिंह माकटा ने बेहद निराले अंदाज वाले इस म्यूजिक विडियो का प्रोडक्शन ‘न्यूसेन्स प्रोडक्शन’ द्वारा किया गया है! ‘न्यूसेन्स [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  चम्बाली फोक और रैप का एक नया संगम म्यूजिक विडियो ‘हरबेले प्यारुआ’ की लांचिंग रविवार को गेयटी थियेटर में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुई</p>
<p>पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की मनोरमा राठौर और नवोदित रैपर उमेश सिंह माकटा ने बेहद निराले अंदाज वाले इस म्यूजिक विडियो का प्रोडक्शन ‘न्यूसेन्स प्रोडक्शन’ द्वारा किया गया है! <em>‘न्यूसेन्स प्रोडक्शन’</em> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग द्वारा स्थापित एक प्रोडक्शन हाउस है जो कि नवोदित छात्रों को फिल्म निर्माण की बारीकियां सिखाती है! </p>
<p>विडियो</p>
<p><iframe loading="lazy" width="800" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/CsQJy9OsYKY" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>मनोरमा ने बताया कि जिस तरह से आज रैप पॉपुलर हो रहा है! उसे देखते हुए ऐसा गीत लिखा. बकौल मनोरमा यह गीत एक शहरी लड़की की कहानी है, जो शहरी जीवन के सपने संजोती है लेकिन उसकी शादी के गरीब किसान से हो जाती हैं! </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/03/harbele-pyarua-rap-chambyali-folk-rap-music-video-by-hpu-students-launched/">चम्बियाली रैप म्यूजिक विडियो ’हरबेले प्यारुआ’ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लांच</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>गेटी थियेटर मे सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक उदयन वाजपेयी  से साक्षात्कार का आयोजन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/05/poet-udayan-vajpeyi-at-gaiety-theater-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Sep 2016 12:57:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[DR. Tulsi Raman]]></category>
		<category><![CDATA[HP Department of Language and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[Udayan Vajpeyi]]></category>
		<category><![CDATA[Utsav Institute Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला की साहित्यिक संस्था &#8216;उत्स&#8217; की ओर से सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक उदयन वाजपेयी से साक्षात्कार का आयोजन निश्चित किया गया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से यह आयोजन स्थानीय गेटी थियेटर परिसर के रिहर्सल कक्ष में कल 6 सितंबर को दोपहर बाद 3 बजे होगा। उत्स के अध्यक्ष डा. तुलसी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला की साहित्यिक संस्था &#8216;उत्स&#8217; की ओर से सुपरिचित कवि, कथाकार और चिंतक  उदयन वाजपेयी से साक्षात्कार का आयोजन निश्चित किया गया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से  यह आयोजन स्थानीय गेटी थियेटर परिसर के रिहर्सल कक्ष में कल 6 सितंबर  को दोपहर बाद 3 बजे होगा।</p>
<p>उत्स के अध्यक्ष डा. तुलसी रमण ने कहा कि इस अवसर पर उदयन वाजपेयी कविता, कहानी, निबंध, नाटक और फिल्म जैसी विधाओं पर लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों से अपने विचार सांझा करेंगे। इस तरह के सर्जनात्मक सम्वाद के साथ ही कवि उदयन वाजपेयी का &#8216;कविता पाठ&#8217; भी होगा। इस आयोजन में रचनात्मक सम्वाद के लिए लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया है।</p>
<p>उदयन वाजपेयी एक बहुसर्जक रचनाकार इस अर्थ में हैं कि उन्होंने कविता, कहानी,निबंध आदि विधाओं में लेखन किया है। इन विधाओं में उनके आठ महत्वपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुए हैं। उदयन वाजपेयी ने साहित्यिक रचनाओं पर निर्मित कई फिल्मों के सम्वाद लिखे हैं और जोज़ेफ ब्राडस्की [रूस], मिशियो माण्डो [जापान], आक्टावियो पाज़ [मैक्सिको], फ्रांक आंद्रेजेम [फ्रांस], तथा रामचंद्र गांधी [भारत] की कृतियों के हिंदी में अनुवाद भी किए हैं। अपने देश के अनेक नगरों के अतिरिक्त मास्को, पेरिस,कठमांडू आदि में भी कला, साहित्य, लोकतंत्र और कविता जैसे विषयों पर उदयन वाजपेयी के व्याख्यान हुए हैं। लेविनी [स्विटज़रलैंड] तथा पेरिस [फ्रांस] में वह राइटर इन रेसिडेंट रह चुके हैं। वह रज़ा फाउंडेशन तथा कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कारों से सम्मानित लेखक हैं।</p>
<p>उदयन वाजपेयी चिकित्सा स्नातक हैं और इन दिनों गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में अध्यापन कर रहे हैं। इसी के साथ वह साहित्य, कला और सभ्यता की चर्चित पत्रिका &#8216;समास&#8217; के सम्पादक भी हैं। डा. तुलसी रमण ने कहा कि उत्स की ओर से गुज़रे सालों में भी सृजनात्मक सम्वाद के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन किए जाते रहे हैं और शीघ्र ही &#8216;उत्स&#8217; पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ करने की भी योजना है।</p>
<p>Photo: Vatsanurag BlogSpot</p>
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		<item>
		<title>तृतीय मनोहर सिंह स्मृति  समारोह की सातवीं संध्या पर ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/3rd-manohar-singh-samriti-at-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2016 11:51:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[Theater Artist]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह की सातवीं संध्या पर एक्टर प्रिपेयर प्रोडक्शन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक राकेश बेदी और मुख्य भूमिका में प्रख्यात सिने अभिनेता अनुपम खेर, नीना गुप्ता और स्वयं राकेश बेदी थे। नाटक में प्रीतम कुमार चोपड़ा और हेमा राय जो दिल्ली [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/3rd-manohar-singh-samriti-at-gaiety-theater/">तृतीय मनोहर सिंह स्मृति  समारोह की सातवीं संध्या पर ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  सात दिवसीय नाट्य समारोह की सातवीं संध्या पर एक्टर प्रिपेयर प्रोडक्शन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक राकेश बेदी और मुख्य भूमिका में प्रख्यात सिने अभिनेता अनुपम खेर, नीना गुप्ता और स्वयं राकेश बेदी थे। </p>
<p>नाटक में प्रीतम कुमार चोपड़ा और हेमा राय जो दिल्ली के चांदनी चौक में पले और बड़े हुए। साथ पढ़ते समय से ही वे एक-दूसरे को चाहने लगे। परिस्थितियों के अनुसार वे एक दूसरे से अलग हो गये। और उन्हें लगा कि दूसरों द्वारा उन्हें नीचा दिखाया जा रहा हैं। अन्तराल के बाद वे दिल्ली के लोधी गार्डन में पुनः मिलते है और अन्तरमन की बाते करते हैं और उन्हें मालूम होता है कि वे एक दूसरे के बारे में गल्तफहमियों का शिकार होते हैं। इसी विषय पर नाटक की कहानी घूमती है। </p>
<p>नाट्य समारोह की सातवीं व अंतिम संध्या पर मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत परिवार सहित विराजमान हुए और साथ ही उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल राम नाईक  भी परिवार सहित विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे। श्रीमती अनुराधा ठाकुर सचिव भाषा एवं संस्कृति ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों का पारम्परिक ढ़ग से स्वागत एवं सम्मान किया। तथा सभागार में उपस्थित शिमला शहर के गणमान्य व्यक्तियों और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शकों का स्वागत किया। </p>
<p>नाटक की समाप्ति पर सभी कलाकारों का परिचय करवाया गया और मुख्य अतिथि द्वारा  हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों तथा दर्शकों का कार्यक्रम में पधारने पर धन्यवाद किया तथा विभाग द्वारा आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/3rd-manohar-singh-samriti-at-gaiety-theater/">तृतीय मनोहर सिंह स्मृति  समारोह की सातवीं संध्या पर ‘‘मेरा वो मतलब नहीं था’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>दि बिगनर थियेटर ग्रुप शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/death-of-a-salesman-by-the-begginer-theater-group-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 May 2016 11:39:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Death of a salesman]]></category>
		<category><![CDATA[Himachali Artist]]></category>
		<category><![CDATA[Himachali Talent]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Manohar singh smriti]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Theater Group]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[the begginer theater group shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 16 मई, 2016 को शाम 6:00 बजे सुरनई थियेटर एण्ड फोक आर्टस फाऊण्डेशन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘नमस्ते’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन के0के0 रैना और मुख्य अभिनय में इला अरूण होंगी। शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह के पांचवे दिन दि बिगनर थियेटर ग्रुप, शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन किया [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/death-of-a-salesman-by-the-begginer-theater-group-shimla/">दि बिगनर थियेटर ग्रुप शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिनांक 16 मई, 2016 को शाम 6:00 बजे सुरनई थियेटर एण्ड फोक आर्टस फाऊण्डेशन, मुम्बई की प्रस्तुति ‘‘नमस्ते’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन के0के0 रैना और मुख्य अभिनय में इला अरूण होंगी।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  सात दिवसीय नाट्य समारोह के पांचवे दिन दि बिगनर थियेटर ग्रुप, शिमला द्वारा ‘‘डेथ ऑफ ए सेल्ज़मैन’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य भूमिका में अभिनेता उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया थे।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/12/department-of-language-art-culture-himachal-pradesh-2/" target="_blank">7 दिवसीय नाटय समारोह के पहले दिन सात लघु कथाओं पर आधारित नाटक का मंचन</a></p>
<p>आर्थर मिलर द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध नाटक ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्समैन’’ पर आधारित हिन्दी में रूपान्तरण किया गया है। यह नाटक 20वीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ अमेरीकी नाटकों की श्रेणी में माना जाता है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/manohar-singh-smriti-function-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">मनोहर सिंह स्मृति समारोह के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में ‘पियानों’ नाटक का मंचन</a></p>
<p>नाटक में यथार्थ और कल्पना (स्वप्न) के बीच झूलता मुख्य पात्र विल्ली लोमैन भारतीय परिवेश में शिमला में रहने वाला कृष्ण लाल वर्मा बन जाता है। उसी तरह नाटक के बाकी पात्रों के नाम और व्यावहारिक तौर तरीके भी बदल जाते हैं।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/13/jagmira-creative-arts-mumbai-performed-at-gaiety-theater-shimla/" target="_blank">जगमीरा क्रियेटिव आर्ट्स, मुम्बई द्वारा रविन्द्रनाथ टेगोर की कहानी पर आधारित ‘‘स्त्रीर पत्र’’ नाटक का मंचन</a> </p>
<p>हिन्दी रूपान्तरण करते वक्त नाटक के मूल भाव और सन्देश को यथावत रखा गया है। यह नाटक एक परिवार के मार्मिक द्वन्द्व को दर्शाता है। नाटक में राष्ट्र के आधारभूत मूल्यों और महत्वपूर्ण विषयों को भी उजागर किया गया है।</p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/" target="_blank">एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी में मशहूर उपन्यास ‘दि प्रोफिट’ पर आधारित ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</a></p>
<p>शिमला के ऐतिहासिक गेयटी प्रेक्षागृह में नाट्य समारोह की पांचवीं संध्या पर शिमला शहर के गणमान्य व्यक्ति और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शक उपस्थित हुए। शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने नाटक के अंत में सभी कलाकारों को हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानित किया।</p>
<p>Photo: Representational Image</p>
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		<title>एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी  में मशहूर उपन्यास &#8216;दि प्रोफिट&#8217; पर आधारित  ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2016 06:32:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
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		<category><![CDATA[HP Art and Culture]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 15 मई, 2016 को शाम:6:00 बजे दि बिगनर थियेटर ग्रुप की प्रस्तुति ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्जमैन’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य अभिनय में उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया होंगे। शिमला- सात दिवसीय नाट्य समारोह के चौथे दिन एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन किया गया। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिनांक 15 मई, 2016 को शाम:6:00 बजे दि बिगनर थियेटर ग्रुप की प्रस्तुति ‘‘डैथ ऑफ ए सेल्जमैन’’ का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन धीरेन्द्र सिंह रावत और मुख्य अभिनय में उमा उदय दत्त भारती और तनुप्रिया होंगे।</p>
<p><strong>शिमला-</strong> सात दिवसीय नाट्य समारोह के चौथे दिन एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक विकास द्विवेदी और मुख्य भूमिका में मशहूर सिने अभिनेता टॉम एल्टर थे।</p>
<p>पैगम्बर नाटक की रचना खलील जिब्रान के मशहूर उपन्यास दि प्रोफिट पर आधारित है। नाटक में मानव जीवन के अन्तर्चैतन्य की अवस्थाओं और पंच महाभूतों- पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश की महत्ता भी दर्शायी गई है कि किसी व्यक्ति के जीवन में खलल डालना कितना आसान है।  </p>
<p>नाटक की शुरूआत पंचमहाभूतों से रहित अनन्त के जन्म से होती है। जो प्यार, भावना, ज्ञान, धर्म, ईर्ष्या, घृणा, सुख दुख, मैत्री और सुन्दरता आदि भावों से परे है। नाटक में इसके जीवन के अनेक क्षणों को अभिव्यक्त किया गया है कि वह पैगम्बर से प्रत्येक बार कैसे मिलता है और वह बच्चा कैसे पैगम्बर से मार्गदर्शन प्राप्त कर अच्छा है। सहसा पता चलता है कि यह तीव्रबुद्धि और विलक्षण बच्चा कोई और नही स्वयं खलील जिब्रान है। जीवन के विभिन्न पड़ावों पर मिलने वाला पैगम्बर कोई और नही बल्कि उसका अपना अवचेतन मन है। नाटक में छत्तीसगढ़ और हरियाणा का समृद्ध लोक संगीत शामिल किया गया है छत्तीसगढ़ का सुप्रसिद्ध लोक नृत्य कर्मा नाटक का मुख्य आकर्षण है। </p>
<p>शिमला के ऐतिहासिक गेयटी प्रेक्षागृह में नाट्य समारोह की चौथी संध्या पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री एसएस परमार पूर्व मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार का शशि ठाकुर निदेशक भाषा विभाग ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस मौके पर गेयटी थियेटर में शिमला शहर के गणमान्य व्यक्ति और बहुत संख्या में नाटक प्रेमी दर्शक उपस्थित हुए। श्री एसएस परमार ने नाटक के अंत में सभी कलाकारों का हिमाचली टोपी पहनाकर स्वागत किया।  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/14/drama-based-on-the-prophet-staged-at-gaiety-theater/">एले हॉऊस, मुम्बई द्वारा गेयटी  में मशहूर उपन्यास &#8216;दि प्रोफिट&#8217; पर आधारित  ‘‘पैगम्बर’’ नाटक का मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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