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	<title>Water Contamination Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Water Contamination Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>आईपीएच विभाग का कारनामा: प्राकृतिक स्रोत में पाइप द्वारा डाल दिया नाले का पानी, स्रोत दूषित होने की कगार पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Nov 2016 11:14:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
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		<category><![CDATA[Kullu Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है कुल्लू- भले ही आईपीएच विभाग लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने का दावा करता है लेकिन जिला के कई इलाकों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है</strong></p>
<p><strong>कुल्लू-</strong> भले ही आईपीएच विभाग लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने का दावा करता है लेकिन जिला के कई इलाकों में आईपीएच विभाग की लापरवाही किसी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विभाग का एक ऐसा ही कारनामा जिला मुख्यालय से सटी खराहल घाटी के काईस से सटे शेयापानी स्थित प्राकृतिक जल स्रोत (जायरू) में देखने को मिल रहा है। </p>
<p>आईपीएच विभाग ने काफी समय पहले यहां पर पानी का टैंक तो बना दिया लेकिन अभी तक मुरम्मत करवाने की जहमत नहीं उठा रहा है। टैंक काफी पुराना होने से क्षतिग्रस्त हालत में है, जिस कारण प्राकृतिक जल स्रोत का पानी टैंक में स्टोर नहीं हो रहा है, ऐसे में लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है।</p>
<p>इस प्राकृतिक जल स्रोत के पानी की सप्लाई काईस तथा बिष्टबेहड़ इलाकों में होती है। नाले के पानी की सप्लाई से ग्रामीण मटमैला पानी पीने को मजबूर है। मटमैला पानी पीने से लोगों को जलजनित बीमारी फैलने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि आईपीएच विभाग की लापरवाही भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों ने विभाग को चेताया है कि अगर नाले का पानी प्राकृतिक जल स्रोत से जल्द नहीं हटाया गया तो वे कुल्लू स्थित आईपीएच विभाग के उच्चाधिकारी का घेराव करेंगे।</p>
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		<title>अज्ञात शरारती तत्वों ने सोलन स्कूल के पेयजल टैंक में मिला दिया कीटनाशक, बाल-2 बची 300 बच्चों की जान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/27/pesticide-in-solan-school-water-tank/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Sep 2016 08:00:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[KakkarHatti Middle School Solan]]></category>
		<category><![CDATA[Solan city]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
		<category><![CDATA[Water Tanks Poisoning]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन- हिमाचल के जिला सोलन के कक्कड़हट्टी मिडल स्कूल और गांव के पेयजल टैंक में सोमवार को अज्ञात शरारती तत्वों ने जहरीला पदार्थ मिला दिया। सुबह स्कूल पहुंचे बच्चे टंकी से पानी पीने लगे तो उन्हें दुर्गंध आई। पानी का रंग भी दूधिया था। वे पानी पी ही नहीं सके। उन्होंने इसकी जानकारी मुख्याध्यापक को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong> हिमाचल के जिला सोलन के कक्कड़हट्टी मिडल स्कूल और गांव के पेयजल टैंक में सोमवार को अज्ञात शरारती तत्वों ने जहरीला पदार्थ मिला दिया। सुबह स्कूल पहुंचे बच्चे टंकी से पानी पीने लगे तो उन्हें दुर्गंध आई। पानी का रंग भी दूधिया था।</p>
<p>वे पानी पी ही नहीं सके। उन्होंने इसकी जानकारी मुख्याध्यापक को दी। इसके बाद तुरंत आईपीएच के अधिकारियों को सूचित किया और टीम ने मौके का दौरा करके पानी के सैंपल लिए। जांच में निवान नामक कीटनाशक मिलने की पुष्टि हुई है।</p>
<p>विभाग ने तुरंत सभी को सूचित कर स्कूल और गांव की पेयजल सप्लाई पर रोक लगा दी और लोगों को पानी न पीने के लिए सचेत किया। दिनभर ग्रामीणों और अभिभावकों में हड़कंप मचा रहा, हालांकि किसी की सेहत बिगड़ने की सूचना नहीं है।</p>
<p><strong>जांच में हुआ खुलासा, पानी में मिलाया गया निवान कीटनाशक</strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan.jpeg" alt="nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan" width="852" height="395" class="aligncenter size-full wp-image-7515" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan.jpeg 852w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan-300x139.jpeg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan-768x356.jpeg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/nivan-poisen-mix-in-school-water-tank-solan-696x323.jpeg 696w" sizes="(max-width: 852px) 100vw, 852px" /></p>
<p>कक्कड़हट्टी मिडल स्कूल में 300 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गांव की आबादी भी करीब 300 है। ऐन मौके पर सभी की जान बच गई। स्कूल के मुख्याध्यापक कमल देव परिहार ने इसकी पुष्टि की है।</p>
<p>आईपीएच विभाग की शिकायत पर पुलिस चौकी सुबाथू में अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पंचायत के पूर्व प्रधान दिनेश चंद ठाकुर ने बताया कि किसी ने स्कूल और गांव के पेयजल टैंक में कीटनाशक मिलाया है।</p>
<p>आईपीएच के कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि स्कूल प्रधानाचार्य के माध्यम से उन्हें पानी के दूधिया और उसमें दुर्गंध होने की शिकायत मिली। त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल की पानी की टंकी और साथ लगते सार्वजनिक स्टोरेज टैंक से पानी के सैंपल लिए गए। जांच में निवान नामक कीटनाशक पाया गया।</p>
<p><strong>खुले टैंकों में बढ़ा खतरा, दहशत में लोग</strong></p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla.jpeg" alt="uncovered-water-tank-solan-shimla" width="956" height="444" class="aligncenter size-full wp-image-7517" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla.jpeg 956w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla-300x139.jpeg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla-768x357.jpeg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla-696x323.jpeg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/uncovered-water-tank-solan-shimla-904x420.jpeg 904w" sizes="(max-width: 956px) 100vw, 956px" /></p>
<p>ग्रामीण सुनील कुमार, बिशन दत्त, बेली राम और संजय का कहना है कि स्टोरेज टैंक के ढक्कन कहीं खुले हैं तो कहीं टूटे हुए हैं। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक चंद्रेश्वर शर्मा ने कहा मामले की जानकारी नहीं है।  </p>
<p>मामले की सूचना मिली है। जानी नुकसान या किसी की तबीयत बिगड़ने की सूचना नहीं है। जांच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस और विभाग की टीम मौके पर पहुंची है। इसमें किसी की कोताही निकली तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।-राकेश कंवर, उपायुक्त सोलन</p>
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		<title>घुमारवीं पंचायत  के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर, सरकार ने हैंडपंप लगाने में भी की गड़बड़ी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/26/ghumarwin-water-contamination/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Aug 2016 10:11:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[बिलासपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Ghumarwin]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Dept]]></category>
		<category><![CDATA[Ravi Sood]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं शिमला- हिमाचल प्रदेश में घुमारवीं उपमंडल की बकरोआ पंचायत के वार्ड नंबर-2 हरिजन बस्ती के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के स्थानीय लोगो व वार्ड मैंबर का कहना है कि इस वार्ड में वैसे तो सरकार 4 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश में घुमारवीं उपमंडल की बकरोआ पंचायत के वार्ड नंबर-2 हरिजन बस्ती के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के स्थानीय लोगो व वार्ड मैंबर का कहना है कि इस वार्ड में वैसे तो सरकार 4 हैंडपंप लगाने का दावा करती है लेकिन हकीकत में 3 ही हैंडपंप लगे हैं। लोगों ने विभाग से पूछा है कि चौथा हैंडपंप कहां लगा है।</p>
<p>इस वार्ड में 83 परिवार रहते हैं। अगर पेयजल योजना की बात करें तो विभाग के अनुसार इस वार्ड में सारटी-फटोह स्कीम से पानी दिया जाता है लेकिन हकीकत में लोगों को पानी अमरपुर पेयजल योजना हड़सर से दिया जाता है। लोगों का यह भी आरोप है कि पानी को बिना फिल्ट्रेशन के दिया जाता है, जिसमें दूसरे दिन कीड़े पड़ जाते हैं।</p>
<p>लोगों ने विभाग व प्रशासन से मांग की है कि उन्हें पेयजल सप्लाई सही ढंग से की जाए और स्वीकृत हैंडपंप को भी लगाया जाए। इस बारे में आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता घुमारवीं रवि सूद का कहना है कि हैंडपंप लगाने के कोई भी आदेश उन्हें नहीं मिले हैं। अगर लोगों को पेयजल की समस्या आ रही है तो शीघ्र ही समस्या को हल कर दिया जाएगा।</p>
<p>Photo: SlidePlayer/Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/26/ghumarwin-water-contamination/">घुमारवीं पंचायत  के लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर, सरकार ने हैंडपंप लगाने में भी की गड़बड़ी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/cadets-falls-ill-at-ncc-camp-in-rewalser-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:49:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[Colonel Piyush Agarwal]]></category>
		<category><![CDATA[Gsss Rewalsar]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Dept]]></category>
		<category><![CDATA[NCC Battalion Mandi]]></category>
		<category><![CDATA[Rewalsar]]></category>
		<category><![CDATA[Sandeep kadam]]></category>
		<category><![CDATA[SHO Sanjeev Sood]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और  स्कूल के पानी का सैंपल फेल  हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>  रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg" alt="NCC Battalion Mandi" width="800" height="535" class="alignnone size-full wp-image-6583" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-300x201.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-768x514.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-696x465.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-628x420.jpg 628w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।</p>
<p>फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया।  तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।</p>
<p><strong>26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट</strong></p>
<p>newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर</strong></p>
<p>एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई। </p>
<p><strong>रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल</strong></p>
<p>एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।</p>
<p>सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p>सवाल यह भी</p>
<p>रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।</p>
<p>मुहिम को झटका</p>
<p>रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।</p>
<p>Photo: TNS/Divya Himachal </p>
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		<title>खलीनी वार्ड के लोग दूषित बावड़ी का पानी पीने को मजबूर, प्रतिदिन 10 मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/03/water-contamination-in-shimla-water-resources-increasing-health-issues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 14:55:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यहां पर करीब आठ हजार लोग रहते हैं। नगर निगम ने झंझीड़ी स्थित बावड़ी के पास पानी पीने योग्य नहीं है सूचना पट्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नगर निगम नाकाम रहा है। </p>
<p>मजबूरन लोगों को इसी बावड़ी से पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र पूरी तरह पीलिया की चपेट में आया हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक लोगों को क्लोरिन की गोलियां नहीं दी गई हैं। हालांकि सीएमओ शिमला ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में चार स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे और क्लोरिन की गोलियां बांटेंगे लेकिन सीएमओ के आदेश भी कागजों में ही सिमटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेट दर्द के मामलों में हो रही वृद्धि</strong></p>
<p>दूषित पेयजल से लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में उल्ट, दस्त व बुखार के साथ पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र खलीनी में प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तीन से चार मरीज बुखार व उल्टी, दस्त से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों को रिपन अस्पताल टेस्ट के लिए भेजा जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p><strong>तीन माह से पेयजल किल्लत</strong></p>
<p>खलीनी में तीन माह से पेयजल किल्लत चल रही है। चार दिन बाद भी सिर्फ आधे घंटे के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस कारण मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
उमा दत्त</p>
<p><strong>पानी की आपूर्ति करने में निगम विफल</strong></p>
<p>जल जीवन है जल के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। नगर निगम पानी की आपूर्ति करने में विफल हो रहा है। मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
पूजा</p>
<p><strong>उबाल कर पीना पड़ रहा पानी</strong></p>
<p>प्रतिदिन पानी उबाल कर पी रहे हैं। नगर निगम पानी उपलब्ध करवा नहीं पा रहा है, तो मजबूरन दूषित पानी को उबाल कर पीना पड़ रहा है। ऐसे में सिलेंडर की खपत भी दुगनी हो गई है।<br />
निशा</p>
<p><strong>आम आदमी नहीं खरीद सकता पानी</strong></p>
<p>आम आदमी खरीद कर पानी ला नहीं सकता, नलकों में पानी आ नहीं रहा है। ऐसे में बावड़ी ही विकल्प है। मजबूरन यही से पानी भरना पड़ता है।<br />
पल्लवी</p>
<p><strong>टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी</strong></p>
<p>पहले नगर निगम ने लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब पानी दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बावड़ी ही एक विकल्प था, यहां पर भी पानी पीने योग्य नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी लोगों को नहीं मिल रहा है।<br />
विरेंद्र कुमार</p>
<p>Photo/Representational </p>
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		<title>शिमला में पीलिया बेकाबू, एक और प्रसूता महिला की मौत, सरकार की लापरवाही जनता पर पड़ रही भारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/21/shimla-jaundice-deaths-another-woman-dies-of-jaundice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Jan 2016 07:21:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2009 को आदेश जारी कर आईपीएच और नगर निगम को व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। लेकिन इनमें से कुछ बिंदुओं पर आज तक गौर नहीं किया गया। ऐसे में जन एवं स्वास्थ्य विभाग शिमला और नगर निगम शिमला कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। समय रहते दोनों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/21/shimla-jaundice-deaths-another-woman-dies-of-jaundice/">शिमला में पीलिया बेकाबू, एक और प्रसूता महिला की मौत, सरकार की लापरवाही जनता पर पड़ रही भारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2009 को आदेश जारी कर आईपीएच और नगर निगम को व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। लेकिन इनमें से कुछ बिंदुओं पर आज तक गौर नहीं किया गया। ऐसे में जन एवं स्वास्थ्य विभाग शिमला और नगर निगम शिमला कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। समय रहते दोनों विभाग हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते तो आज शहर में पीलिया के रोग से किसी मासूम की मौत न होती और न ही हजारों की संख्या में लोग पीलिया के रोग से बीमार होते। </strong></p>
<p>शिमला -राजधानी शिमला में पीलिया बेकाबू हो गया है। पीलिया से पीड़ित एक और प्रसूता महिला की मंगलवार शाम पीजीआई चंडीगढ़ में मौत हो गई। मरीजों की संख्या एक हजार से पार हो चुकी है। आईएएस अफसर से लेकर डॉक्टर तक इसकी चपेट में हैं।</p>
<p>आईएएस अफसर प्रियतु मंडल को गंभीर हालत में आईजीएमसी से पीजीआई रेफर करना पड़ा है। इससे प्रदेश सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। बुधवार को आनन-फानन में स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह को सचिवालय में हाई पावर कमेटी की बैठक तक बुलानी पड़ी।</p>
<p>बताया जा रहा है कि पांच दिन की प्रसूता कल्पना (23) खलीनी स्थित बिजली बोर्ड दफ्तर में कार्यरत थीं। खलीनी में अश्वनी खड्ड परियोजना से पानी की आपूर्ति होती है।<br />
माना जा रहा है कि इसी दूषित पानी से कल्पना पीलिया की चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौत हो गई। कल्पना के बच्चे को भी पीजीआई में भर्ती कर लिया गया है। </p>
<p><strong>पहले भी हो चुकी है प्रसूता की मौत</strong></p>
<p>इससे पहले 12 जनवरी को देर रात पांच दिन की प्रसूता सुनीता (32) की भी पीलिया से मौत हो गई थी। सुनीता नॉलज वुड निगम विहार की रहने वाली थी।</p>
<p>कल्पना ने 14 जनवरी को पीजीआई में बच्चे को जन्म दिया और 19 जनवरी को शाम साढ़े सात बजे उसकी मौत हो गई। शिमला में बैरियर के पास रहने वाली कल्पना के पिता बाबू राम ने बताया कि बेटी की शिमला के कमला नेहरू अस्पताल में जांच चल रही थी। तबीयत खराब होने के बाद बीते शुक्रवार को टेस्ट करवाया तो पता चला की कल्पना को पीलिया है।</p>
<p>शुक्रवार रात को ही बाबू राम बेटी को उसके ससुराल बिलासपुर ले गए। बिलासपुर अस्पताल में जांच कराने पर डॉक्टरों ने कल्पना को पीजीआई ले जाने को कहा। पीजीआई में मंगलवार को शाम साढे़ सात बजे उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>अभी तक नहीं पहुंची आईसीएमआर टीम</strong></p>
<p>राजधानी शिमला में पीलिया की रोकथाम को लेकर प्रदेश सरकार के हाथ पांव फूल गए हैं। प्रदेश सरकार से पीलिया काबू में नहीं लाया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल में पीलिया का काबू पाने के लिए आईसीएमआर से टीम भेजने की </p>
<p>बात कही थी लेकिन यह टीम अभी तक नहीं पहुंची है। अफसर से लेकर डाक्टर तक इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं। </p>
<p>प्रदेश सरकार ने विकास नगर में सीवरेज टैंक लीकेज भवन मालिकों के पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश जारी कर दिए हैं। राजधानी शिमला में बेकाबू हो रहे पीलिया को देखते हुए सरकार ने लोगों को जागरूक करने के लिए पंपलेट छापने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p>एक्वागार्ड के पानी में पीलिया का जीवाणु मरता नहीं है। ऐसे में इस पानी को भी उबाला जरूरी है। हाई पावर कमेटी की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य ग्रामीण मिशन के निदेशक हंस राज, नगर निगम के आयुक्त पंकज राय मौजूद थे।</p>
<p><strong>कहां कितने मरीज</strong></p>
<p>विकासनगर- 110, न्यू शिमला- 58, कसुम्पटी- 76, खलीनी- 67, छोटा शिमला- 71, संजौली- 38, पंथाघाटी- 48, मैहली- 21, ढली- 5, बेम्लोई- 7 मशोबरा- 48 जबकि अन्य मामले टुट, ढंडा, खलीनी, भराड़ी, चम्याणा, मल्याणा से भी आए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार से शिमला के लिए आईसीएमआर की लैब स्थापित करने की मांग की जाएगी।</p>
<p>अश्वनी खड्ड के पानी से हुआ आईएएस को पीलिया- सरकार के असफरों के पीलिया की चपेट में आने का कारण अश्वनी खड्ड का दूषित पानी हो सकता है। ब्रॉकहास्ट स्थित आईएएस कालोनी में अश्वनी खड्ड के पानी की ही सप्लाई हो रही थी।</p>
<p>पीलिया से पीड़ित खाद्य एवं आपूर्ति और परिवहन विभाग के निदेशक आईएएस प्रियतु मंडल भी ब्रॉकहास्ट आईएएस कालोनी में ही रह रहे थे। इतना ही नहीं कुसुम्पटी बाईपास स्थित उनके कार्यालय में भी अश्वनी खड्ड के पानी की सप्लाई हो रही थी। गंभीर अवस्था में मंगलवार शाम उन्हें पीजीआई रेफर किया गया।</p>
<p><strong>हाईकोर्ट की आईपीएच और एमसी ने उड़ाई धज्जियां</strong></p>
<p>शिमला में पीलिया फैलने के खतरे को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय ने आईपीएच और नगर निगम को व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश सात साल पहले दिए थे। लेकिन आदेशों पर अमल नहीं किया गया। नतीजतन शहर में पीलिया अब जानलेवा हो गया है। समय रहते व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाती तो शायद आज पीलिया इस कदर न फैलता न ही किसी की जान जाती।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2009 को आदेश जारी कर आईपीएच और नगर निगम को व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। लेकिन इनमें से कुछ बिंदुओं पर आज तक गौर नहीं किया गया। ऐसे में जन एवं स्वास्थ्य विभाग शिमला और नगर निगम शिमला कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। समय रहते दोनों विभाग हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते तो आज शहर में पीलिया के रोग से किसी मासूम की मौत न होती और न ही हजारों की संख्या में लोग पीलिया के रोग से बीमार होते। </p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने विभागों को दिए थे यह निर्देश</strong></p>
<p>शिमला शहर में पिछले नौ सालों से फैल रहे पीलिया के रोग का मौजूदा समय तक आईपीएच विभाग और नगर निगम शिमला ने कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकाला है। आकंड़ों को देखा जाए तो 2007, 2011, 2013 और 2015 में शहर में पीलिया फैल चुका है। इसे देखते हुए आठ जुलाई 2009 को हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे किए ऐसी व्यवस्था करें कि लोगों को स्वच्छ पानी मिले।</p>
<p><strong>आईपीएच,एमसी ने इन बिंदुओं पर नहीं किया अमल </strong></p>
<div style="border: 1px solid #ccc; margin: 10px 10px; padding: 0 10px;">मल्याणा स्थित सीवरेज प्लांट की सल्ज ड्राइंग बैड को किसी ट्रांसपेयरेंट शीट से ढंकने की तुरंत व्यवस्था करें। </p>
<p> नई आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक मशीनरी से पूरे सल्ज को बाहर निकाला जाए। इसमें 30 प्रतिशत से ज्यादा नमी न हो</p>
<p> सीवरेज प्लांट में जल्द से जल्द जनरेटर की व्यवस्था करें।</p>
<p> जितना भी शहर का एरिया है उसे सीवरेज लाइन से जोड़ा जाए। </p></div>
<p>जल प्रबंधन बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हरभजन सिंह भज्जी ने कहा कि अगर हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं हुई होगी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p><strong>इनकी लापरवाही आम जनता पर पड़ रही भारी</strong></p>
<p>समय रहते आईपीएच सीवरेज प्लांट में नई मशीनरियां उपलब्ध करवा देता और साथ ही जेनरेटर की सुविधा उपलब्ध करवा देता तो किसी भी सूरत में मल्याणा सीवरेज प्लांट से सीवरेज बिना ट्रीट हुए अश्वनी नाले में न जाता।</p>
<p>साथ ही अगर नगर निगम शिमला भी समय से जो एरिया सीवरेज लाईन से जुड़ा हुआ नहीं है उसे जोड़ देता तो लोग खुले में अपने सेफ्टी टैंक से सीवरेज को न बहाते। सीवरेज अश्वनी खड्ड के पानी में न मिलता तो लोगों को साफ पानी मिलता।</p>
<p><em>Photo: Amar Ujala</em></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/21/shimla-jaundice-deaths-another-woman-dies-of-jaundice/">शिमला में पीलिया बेकाबू, एक और प्रसूता महिला की मौत, सरकार की लापरवाही जनता पर पड़ रही भारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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