<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>HP Assembly Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-assembly/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-assembly/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Tue, 22 Nov 2016 10:39:13 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>HP Assembly Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-assembly/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क का आज जितना भी कार्य हुआ वह नरेंद्र बरागटा की देंन: भाजपा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/22/bjp-takes-credit-for-rohru-theog-hatkoti-road/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Nov 2016 10:34:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Hatkoti Road]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Apple Belt]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Congress]]></category>
		<category><![CDATA[himachal roads]]></category>
		<category><![CDATA[Himahcal BJP]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Narinder Bragta]]></category>
		<category><![CDATA[Rohru-theog-hatkoti road]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Roads]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=8993</guid>

					<description><![CDATA[<p>जुब्बल कोटखाई के कांग्रेसी विधायक ने 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सड़क को 100 दिन में पक्का करने का झूठा वादा जनता से किया था शिमला- प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक ज़िला महासू ने शिमला के ऊपरी सेब उत्पादक क्षेत्र की जीवन रेखा कही जाने वाली ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क पर पूर्व मंत्री एवम् भाजपा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/22/bjp-takes-credit-for-rohru-theog-hatkoti-road/">ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क का आज जितना भी कार्य हुआ वह नरेंद्र बरागटा की देंन: भाजपा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जुब्बल कोटखाई के कांग्रेसी विधायक ने 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सड़क को 100 दिन में पक्का करने का झूठा वादा जनता से किया था</strong> </p>
<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी  संगठनात्मक ज़िला महासू ने शिमला के ऊपरी सेब उत्पादक क्षेत्र की जीवन रेखा कही जाने वाली ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क पर पूर्व मंत्री एवम् भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र बरागटा द्वारा की सड़क संघर्ष यात्रा के दो वर्ष पुरे होने पर और सड़क निर्माण कार्य में प्रगति पर क्षेत्र वासियो और सेब बागवानों को बधाई दी। पार्टी ने जारी संयुक्त ब्यान में कहा की आज जितना भी कार्य इस सड़क पर हुआ है वो भाजपा  एवम्  भाजपा नेता नरेंद्र बरागटा के संघर्ष का परिणाम है। जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सेब उत्पादकों और क्षेत्र की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया था। </p>
<p><strong>पढ़ें:</strong> <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/19/rohru-theog-hatkoti-road-condition-pictures/" target="_blank">राेहडू-ठियाेग-हाटकाेटी सड़क नाेबल पुरस्कार जीतने लायक, मुख्यमंत्री विकास के मसीहा</a></p>
<p>भाजपा  ने कहा की वर्ष 2014 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने स्वयं रोहड़ू से नरेंद्र बरागटा की यात्रा को रवाना किया था और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल ने यात्रा का समापन शिमला संजौली में किया था हज़ारो की संख्या में सेब बागवान इस सड़क संघर्ष यात्रा में शामिल हुए थे और प्रदेश की कांग्रेस सरकार को हिला कर रख दिया था जिसके परिणास्वरूप इस सड़क का निर्माण कार्य कंपनी के द्वारा शुरू किया गया था।</p>
<p>उसके पश्चात् पूर्व मंत्री ने प्रदेश उच्च न्यायलय में याचिका दायर की जिसमे न्यायालय ने स्वत संज्ञान लेते हुए इस सड़क के कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के आदेश पारित किये और आज भी हर 15 दिन में न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक कमेटी के माध्यम से सड़क हो रहे निर्माण कार्य की स्थिति  का जायजा  लिया जा रहा है।<br />
<strong>विडियो:</strong> <iframe width="800" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/UR9cJUnh_0w" frameborder="0" allowfullscreen></iframe><br />
पार्टी का कहना है कि  पिछले आठ वर्षो में इस सड़क के कारण जनता को जो कठिनाईओ का सामना करना पड़ा है उसके लिए कांग्रेस सरकार जिम्मेवार है। पिछले कांग्रेस कार्यकाल में इस सड़क का कार्य पहले चीनी कंपनी को दिया गया था जबकि न तो सड़क के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया था और न ही वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी ली गयी थी!</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><a href="https://himachalwatcher.com/2015/04/09/why-himachal-apple-growers-are-really-pissed-off-in-pictures/" target="_blank">क्यों हिमाचल सेब उत्पादकों वास्तव में राेहडू हाटकाेटी मार्ग से परेशान हैं- देखिये तस्वीरों में</a></p>
<p>भाजपा ने यह भी कहा कि  तत्कालिन कांग्रेस की केंद्र सरकार ने चीनी कंपनी के कर्मचारियो का वीसा रद्द कर दिया था। भाजपा ने सरकार में आने के बाद सारी औपचारिकताए पूरी करने के पश्चात् इस सड़क के कार्य का विभाजन दो भागो में किया था जिसमे एक ठियोग से खड़ापत्थर और दूसरा खड़ापत्थर से रोहड़ू के बीच था किन्तु प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद दोबारा कांग्रेस ने इस सड़क का निर्माण कार्य एक ही कंपनी को दे दिया जो फाइनेंसियल बिड में अक्षम पाई गई थी इसी कारण केवल 80 किलोमीटर सड़क अभी तक बनकर तैयार नहीं हो पाई है।<br />
<img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road.jpg" alt="rohru hatkoti road" width="800" height="500" class="alignnone size-full wp-image-6753" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road-300x188.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road-768x480.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road-696x435.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/08/rohru-hatkoti-road-672x420.jpg 672w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><br />
भाजपा  का यह भी मनना है कि वर्ष 2012 से 2014 के दो वर्षो के कांग्रेस कार्यकाल के मध्य में एक इंच भी सड़क का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था इसी कारण भाजपा नेतृत्व को सड़क पर आकर आंदोलन  करना पड़ा और इसी के परिणामस्वरूप दो वर्षो में सड़क निर्माण में प्रगति हुई है। जबकि जुब्बल कोटखाई के कांग्रेसी विधायक ने 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सड़क को 100 दिन में पक्का करने का झूठा वादा जनता से किया था। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/22/bjp-takes-credit-for-rohru-theog-hatkoti-road/">ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क का आज जितना भी कार्य हुआ वह नरेंद्र बरागटा की देंन: भाजपा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल में दवाओं का दुरूपयोग रोकने के लिये औषधी एवं प्रसाधन विधेयक 2006 में किये प्रावधान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/drugs-and-cosmetics-himachal-pradesh-amendment-bill-2016/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Nov 2016 11:26:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[1940]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Secretary VC Pharka]]></category>
		<category><![CDATA[Drugs and Cosmetics Act]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Drugs and Cosmetics Amendment Bill 2016 sent to President of india]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=8918</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि राज्य में दवाओं का मादक द्रव्यों के रूप में दुरूपयोग के खतरे को रोकने के लिये ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पिछले सत्र के दौरान औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 1940 में संशोधन कर औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 2016 पास कर इसे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/drugs-and-cosmetics-himachal-pradesh-amendment-bill-2016/">हिमाचल में दवाओं का दुरूपयोग रोकने के लिये औषधी एवं प्रसाधन विधेयक 2006 में किये प्रावधान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि राज्य में दवाओं का मादक द्रव्यों के रूप में दुरूपयोग के खतरे को रोकने के लिये ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पिछले सत्र के दौरान औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 1940 में संशोधन कर औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 2016 पास कर इसे और अधिक सख्त बनाया गया है। इस विधेयक को सहमति के लिये भारत के राष्ट्रपति को भेजा गया है। </p>
<p>यह जानकारी हिमाचल प्रदेश सचिवालय के मुख्य सचिव वीसी फारका ने दी। राज्य विधान सभा द्वारा इस विधेयक के पास किये जाने से धारा 18 की उपधारा (सी) तथा धारा 27 की उपधारा (बी) के उपनियम (दो) के अंतर्गत इससे जुड़े सभी प्रकार के अपराध संज्ञेय यानि कॉग्निजेबल व गैर जमानती होंगे। संशोधन में किसी भी परिसर जहां अधिनियम की धारा 18 के प्रावधानों का उलंघन करते हुए किसी भी प्रकार की औषधी व कॉसमेटिक का निर्माण अथवा बिक्री अथवा भण्डारण अथवा प्रदर्शन अथवा बिक्री व वितरण की पेशकश की जा रही हो, को सील करने का प्रावधान है। </p>
<p>हाल ही में मंत्रिमण्डल ने सहायक दवा निरीक्षकों के तीन पद तथा दवा निरीक्षकों के 22 पदों को भरने की स्वीकृति प्रदान की है और इस प्रकार दवा नियंत्रक निदेशालय के प्रवर्तन एवं नियामक प्रक्रिया को दो गुणा बढ़ाया गया है। </p>
<p>राज्य में पिछले एक वर्ष से नशीली दवाओं के खतरों के विरूद्ध एक विशेष अभियान चलाया गया है। दवा निरीक्षकों को इन दवाओं की बिक्री तथा निर्माण करने वाले समस्त परिसरों, विशेषकर राज्य के सीमांत क्षेत्रों जहां इन दवाओं का निर्माण अथवा बिक्री नशे के रूप में की जाती हो, पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।  निरीक्षकों (बिक्री) की श्रृंखला में महज सात महीनों में 385 निरीक्षण किए गए जबकि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान बिक्री परिसरों के 232 निरीक्षण किए गए थे। उन्होंने कहा कि गत सात महीनों के दौरान 91 मामलों में नशीली दवाओं को जब्त किया गया और गत वित्त वर्ष के दौरान नशीली दवाएं केवल 33 मामलों में जब्त की गई थी। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/drugs-and-cosmetics-himachal-pradesh-amendment-bill-2016/">हिमाचल में दवाओं का दुरूपयोग रोकने के लिये औषधी एवं प्रसाधन विधेयक 2006 में किये प्रावधान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल में खुली सिगरेट बेचने पर 10 हजार और बिना पंजीकरण तंबाकू उत्पाद बेचने पर 1 लाख जुर्माना और जेल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/08/loose-cigarette-sale-ban-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Oct 2016 12:54:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[himachal]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP Police]]></category>
		<category><![CDATA[Loose Cigarette Sale]]></category>
		<category><![CDATA[Smoking]]></category>
		<category><![CDATA[Tobacco Product Sale]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=7903</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- जहाँ एक ओर प्रदेश में खुली सिगरेट की बिक्री करने पर जुर्माने और जेल जाने जैसे दण्ड का प्रावधान तो प्रदेश सरकार ने रखा है पर असल में देखा जाये तो बहुत ही कम ऐसी दुकाने हैं जहाँ पर 18 को लागु किया गया था जिसका असर शुरू के दिनों में ही देखने को [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/08/loose-cigarette-sale-ban-in-himachal-pradesh/">हिमाचल में खुली सिगरेट बेचने पर 10 हजार और बिना पंजीकरण तंबाकू उत्पाद बेचने पर 1 लाख जुर्माना और जेल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  जहाँ एक ओर प्रदेश में खुली सिगरेट की बिक्री करने पर जुर्माने  और जेल जाने जैसे  दण्ड  का प्रावधान तो प्रदेश सरकार  ने रखा है पर असल में देखा जाये तो बहुत ही कम ऐसी दुकाने हैं जहाँ पर 18 को लागु किया गया था जिसका असर शुरू के दिनों में ही देखने को मिला बाद में हर दुकान से खुली सिगरेट खरीदना आम सी बात है! बात आम आदमी की करें तो बहुत कम ऐसे लोग है जो पूरा  सिगरेट  का पैक्ट खरीदते हैं! </p>
<p>हलाकि प्रदेश की राजधानी में खुली सिगरेट का मिलना एक आम बात है बस फ़र्क़ इतना ही है कि खुली मिलने वाली सिगरेट का रेट थोड़ा जायद होता है! इसी वर्ष  विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यह विधेयक सदन द्वारा पारित किया गया था जिसमे खुली सिगरेट की बिक्री करने पर 10 से 15 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान की बात कही गयी यही नहीं, बिना पंजीकरण के यदि तंबाकू उत्पादों का खुदरा व्यापार किया तो एक लाख रुपए के जुर्माने से लेकर एक वर्ष तक का कारावास हो सकता है इस तरह के नियम बनाये गए हैं! राज्य सरकार ने शुक्रवार को इस आश्य की अधिसूचना जारी कर दी है। जिसे अब अधिसूचित किया गया है।</p>
<p>प्रदेश के युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की रोकथाम के लिए यह कारगर कदम राज्य सरकार द्वारा उठाया गया है। प्रदेश के युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की रोकथाम के लिए यह कदम राज्य सरकार द्वारा उठाया गया है तथा इसका इसका मकसद है की  शिक्षण संस्थानों के आसपास खुली सिगरेट की बिक्री बंद करना साथ ही साथ  गुटखा, खैनी व अन्य कैंसर कारक तंबाकूयुक्त पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से न हो सके इसकी रोकथाम करना, इसके लिए पुलिस के एएसआई स्तर के अधिकारियों को अधिकृत किया गया है कि वे शक की बिनाह पर किसी भी ऐसे कारोबार से संबंधित परिसर जहां ऐसे उत्पादों को स्टोर किया गया हो, किसी भी समय प्रवेश कर तलाशी ले सकेंगे। </p>
<p>अगर जमीनी हकीकत को देखें तो प्रदेश विश्वविद्यालय के  तम्बाकू प्रदार्थ  आसानी से  बिकते है तथा कई स्कूलो के बाहर दुकानों में  सिगेरट आसानी से उपलब्ध होती है! सबसे खास बात ततो है  कि पहली बार यदि कोई कारोबारी बिना पंजीकरण के खुली सिगरेट बेचने का दोषी पाया जाता है तो उसे 10 हजार रुपए और दूसरा अपराध करने पर 15 हजार रुपए का जुर्माना किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति यदि सिगरेट का रिटेल कारोबार करना चाहता है या कर रहा हो तो उसे अब अधिकृत अधिकारी के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। </p>
<p>पंजीकरण की अवधि तीन वर्ष की होगी, जिसके बाद उसका नवीनीकरण होगा। कोई भी व्यक्ति यदि बिना पंजीकरण के तंबाकू उत्पादों का व्यापार करता है तो आरोप साबित होने पर 50 हजार रुपए जुर्माना और तीन माह के कारावास का प्रावधान होगा। यदि पहले अपराध के बाद वह फिर से अवैध कारोबार करता है, तो उसे एक वर्ष के कारावास के साथ एक लाख रुपए के जुर्माने तक का प्रावधान होगा।</p>
<p><strong>पुलिस की सख्ती पर रहेगी नजर</strong></p>
<p>सार्वजनिक स्थलों पर भी छोटे खोखों व चाय के टी-स्टॉल पर नशे का मंजर देखने को मिल रहा है। अब इस नए एक्ट के लागू होने से प्रदेश में अवैध कारोबार पर कितना अंकुश लगेगा, यह इस बात पर निर्भर होगा कि पुलिस कितनी सख्ती बरतती है।</p>
<p>Photo: AFP Photo/Prakash Singh</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/08/loose-cigarette-sale-ban-in-himachal-pradesh/">हिमाचल में खुली सिगरेट बेचने पर 10 हजार और बिना पंजीकरण तंबाकू उत्पाद बेचने पर 1 लाख जुर्माना और जेल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल में बिना लाइसैंस और शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक तम्बाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध की तैयारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/04/himachal-to-ban-sale-of-tobacco-products-without-license-and-near-educational-institutes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Aug 2016 10:36:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[Cigarette Sale Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Health minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[Kaul singh Thakur]]></category>
		<category><![CDATA[Tobacco Products]]></category>
		<category><![CDATA[Tobacco Sale]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=6718</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- राज्य में अब तम्बाकू उत्पाद की बिक्री बिना लाइसैंस के नहीं हो पाएगी। इसके लिए राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, साथ ही इस विधेयक के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक भी तम्बाकू उत्पादों को बेचे जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, ऐसे में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/04/himachal-to-ban-sale-of-tobacco-products-without-license-and-near-educational-institutes/">हिमाचल में बिना लाइसैंस और शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक तम्बाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध की तैयारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> राज्य में अब तम्बाकू उत्पाद की बिक्री बिना लाइसैंस के नहीं हो पाएगी। इसके लिए राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, साथ ही इस विधेयक के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक भी तम्बाकू उत्पादों को बेचे जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, ऐसे में यदि कोई नियमों को तोड़ता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।</p>
<p>हालाँकि गुटका, खैनी और खुली सिगरेट पर पहले से लगे प्रतिभंध का दुकानदारों  पर कोई असर नहीं हुआ है, पर सरकार एक और प्रतिबन्ध की घोषणा के लिए तैयार है!</p>
<div id="gt-src-c" class="g-unit">
<div id="gt-src-p">
<div id="src-translit" class="translit" dir="ltr">
<div id="gt-src-c" class="g-unit">
<div id="gt-src-p">
<div id="src-translit" class="translit" dir="ltr"><strong>यह भी पढ़ें :<a href="https://himachalwatcher.com/2015/11/30/students-from-a-shimla-school-proved-loose-cigarette-ban-isnt-working/"> प्रतिबंध के बावजूद शिमला में स्कूल के छात्र खुली सिगरेट खरीदते हुए</a></strong></div>
<div class="translit" dir="ltr"></div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div id="gt-res-c" class="g-unit"> जानकारी के अनुसार तम्बाकू उत्पाद की बिक्री के लिए सरकार लाइसैंस फीस तय करेगी। इस विधेयक के प्रारूप का खाका विधानसभा सत्र से पहले होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में तय किया जा सकता है। मंत्रिमंडल बैठक में मैडीकल कालेजों की फीस को भी तय किया जाएगा। राज्य सरकार ने तम्बाकू उत्पादों की बिक्री के अलावा डाक्टरों पर भी शिकंजा कसने का निर्णय लिया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने डाक्टरों को दवा प्रिसक्रिप्शन के लिए साल्ट ही लिखने के आदेश दिए हैं। विभागीय आदेश के बाद भी यदि कोई डाक्टर इस तरह की दवा को लिखता है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।</div>
<div class="g-unit"></div>
<div class="g-unit">
<div id="gt-src-c" class="g-unit">
<div id="gt-src-p">
<div id="src-translit" class="translit" dir="ltr"><strong>यह भी पढ़ें :<a href="https://himachalwatcher.com/2012/11/28/despite-a-ban-gutkha-khaini-are-being-sold-for-thrice-the-printed-price/"> हिमाचल में प्रतिबन्ध के बावजूद तीन गुणा दामों में खुलेआम बिक रहे हैं गुटका, खैनी</a></strong></div>
</div>
</div>
<div id="gt-res-c" class="g-unit"><strong> </strong></div>
</div>
<p><strong>भाजपा को कौल सिंह की नसीहत</strong></p>
<p>स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने तम्बाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर विधेयक लाने की बात कही, साथ ही उन्होंने विपक्षी भाजपा को नसीहत दी कि वह अच्छी तरह से विपक्ष की भूमिका निभाए, साथ ही यदि भाजपा चार्जशीट बनाती है तो उसमें गलत आरोप न लगाए।</p>
<p><strong>प्राइवेट अस्पतालों पर भी कसेगा शिकंजा</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों पर भी शिकंजा कसने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्राइवेट अस्पतालों को बेची जाने वाली दवा के सैंपल लिए जाएंगे और सैंपल फेल होने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार को अब तक केंद्र सरकार की तरफ से आपदा से निपटने के लिए पूरी राशि नहीं मिली है। जानकारी के अनुसार जितनी राशि की मांग प्रदेश सरकार की तरफ से की जा रही है, उसका 10 या 20 फीसदी हिस्सा ही दिया जा रहा है।</p>
<p>Photo: Himachal Tribune/Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/04/himachal-to-ban-sale-of-tobacco-products-without-license-and-near-educational-institutes/">हिमाचल में बिना लाइसैंस और शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक तम्बाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध की तैयारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अपात्र परिवारों को सूची से बाहर  करने के लिए बीपीएल परिवारों के घर के सामने साइन बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/himachals-bpl-families-gets-sign-boards/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Apr 2016 14:47:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[काँगड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[Anil Sharma]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal BPL Families]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Chief Minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[Knagra]]></category>
		<category><![CDATA[Rural Development and Panchayati Raj Department HP]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=5137</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- राज्य में बीपीएल परिवारों को अलग से चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत चयनित बीपीएल परिवारों के घरों के सामने साइन बोर्ड लगाया जा रहा है। साइन बोर्ड लगाने की यह प्रक्रिया कांगड़ा जिला से शुरू हो गई है। बीपीएल परिवारों के घर के सामने साइन बोर्ड लगाने के पीछे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/himachals-bpl-families-gets-sign-boards/">अपात्र परिवारों को सूची से बाहर  करने के लिए बीपीएल परिवारों के घर के सामने साइन बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राज्य में बीपीएल परिवारों को अलग से चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत चयनित बीपीएल परिवारों के घरों के सामने साइन बोर्ड लगाया जा रहा है। साइन बोर्ड लगाने की यह प्रक्रिया कांगड़ा जिला से शुरू हो गई है। बीपीएल परिवारों के घर के सामने साइन बोर्ड लगाने के पीछे सरकार का तर्क यह है कि इससे अपात्र लोगों को सूची से बाहर किया जा सकेगा।</p>
<p>सरकार का मानना है कि यदि बीपीएल  सूची में अपात्र परिवार को शामिल किया गया है, तो उसका पता आसानी से चल सकेगा। बीपीएल  परिवारों को चिन्हित करने संबंधी यह मामला विधानसभा के बजट सत्र में भी उठा था, जिस पर पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसा किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे अपात्र परिवारों को सूची से बाहर करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>हिमाचल में 2,82,278 बीपीएल  परिवार</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश में इस समय बीपीएल  परिवारों की संख्या 2,82,278 है जबकि राज्य में यह संख्या 2,82,370 तय की गई है। यह निर्धारित लक्ष्य से 92 कम है। बीपीएल  चयन की नई प्रक्रिया के अनुसार अब 1 पंचायत से 10 परिवारों को बीपीएल  की सूची में शामिल किया जा सकेगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य में 3 बार बीपीएल  परिवारों की समीक्षा हुई है।</p>
<p>पहले यह समीक्षा 6 अप्रैल, 2008, दूसरी बार 3 मार्च, 2011 और तीसरी मर्तबा 7 अप्रैल, 2013 को की गई। चयन प्रक्रिया के बाद यह सूची केंद्र सरकार को फाइनल करनी है। बीपीएल  चयन का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है और गलत चयन करने पर पहले एसडीए कार्यालय और बाद में डीसी के पास इसकी शिकायत की जा सकती है।</p>
<p><strong>कांगड़ा से शुरू हुई प्रक्रिया: ओंकार शर्मा</strong></p>
<p>सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज ओंकार शर्मा का कहना है कि सरकार की घोषणा के अनुसार कांगड़ा जिला से बीपीएल  सूची में शामिल किए गए परिवारों के घर के बाहर साइन बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसका उद्देश्य अपात्र परिवारों को सूची से बाहर करना है।  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/himachals-bpl-families-gets-sign-boards/">अपात्र परिवारों को सूची से बाहर  करने के लिए बीपीएल परिवारों के घर के सामने साइन बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विधायकों, मंत्रियों के वेतन  में 40-70% बढ़ोतरी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/hp-mla-and-minister-salary-hike-row/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:34:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Panchayats]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAs]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAs Salary Hike]]></category>
		<category><![CDATA[HP Panchayat Samiti]]></category>
		<category><![CDATA[HP Panchayati Raj Vibhag]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4977</guid>

					<description><![CDATA[<p>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है, अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है,जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है शिमला- प्रदेश सरकार ने एक्ट में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/hp-mla-and-minister-salary-hike-row/">विधायकों, मंत्रियों के वेतन  में 40-70% बढ़ोतरी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है, अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है,जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश सरकार ने एक्ट में संशोधन कर मंत्री, सीपीएस और विधायकों के वेतन और भत्तों में 40 से 70 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन सदस्यों को यह भत्ता भी तभी मुहैया होगा जब यह बैठक में भाग लेंगे।</p>
<p>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है। इसी तरह मेयर, डिप्टी मेयर, जिला परिषद अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्षों के मानदेय में नाममात्र बढ़ोतरी की है। पांच साल से लेकर अब तक इनके मानदेय में 1500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है।</p>
<p>इन नुमाइंदों की ओर से यह मामला सरकार के समक्ष भी उठाया गया लेकिन सरकार ने सिर से बला टालकर उनके मानदेय में आंशिक बढ़ोतरी की। जबकि यह नुमाइंदे भी विधायकों की तर्ज पर अपने अपने क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं।</p>
<p>हिमाचल में जनता के नुमाइंदों के मानदेय और वेतन में अलग-अलग मापदंड है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 में जिला परिषद अध्यक्ष के मानदेय में मात्र 15 सौ रुपये की बढ़ोतरी की। इसकी तरह से उपाध्यक्ष का मानदेय 4500 से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया।</p>
<p><strong>जानिए किसका कितना मानदेय बढ़ा</strong></p>
<p>पंचायत समिति अध्यक्ष का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का 2400 से बढ़ाकर 3500 रुपये किया गया। प्रधान के मानदेय में महज 900 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन्हें अब 3000 रुपये मानदेय किया गया।</p>
<p>इसी तरह उपप्रधान का मानदेय 1800 रुपये से बढ़ाकर 2200 रुपये किया गया है। शहरी निकाय की बात करें तो मेयर को पहले 6500 रुपये मानदेय मिलता था, इसे अब 8000 रुपये जबकि डिप्टी मेयर के लिए 4500 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये मानदेय किया गया है।</p>
<p>नगर पंचायत अध्यक्ष का मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 2800 रुपये किया गया। कई सालों से वेतन-भत्तों में कम बढ़ोतरी को लेकर पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि सरकार के समक्ष विरोध भी जता चुके हैं। अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है।</p>
<p> <strong>न के बराबर है मानदेय, प्रतिनिधियों ने जताया विरोध</strong></p>
<p>जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का मानदेय न के बराबर है। डेवलपमेंट ग्रांट बंद है। 14 वें वित्तायोग का पैसा सीधे पंचायतों को जाना है। जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पंचायतों में एमएलए की अपेक्षा परिषद के सदस्य ज्यादा जाते हैं। पंचायत समिति अध्यक्ष ठियोग मदनलाल वर्मा ने कहा कि विधायकों के मानदेय बढ़ाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष में सहमति बन जाती है, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। जनता के बीच जाना मुश्किल हो गया है।</p>
<p>Photo: Amar Ujala</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/hp-mla-and-minister-salary-hike-row/">विधायकों, मंत्रियों के वेतन  में 40-70% बढ़ोतरी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल की पब्लिक की  जेब से वसूला जाता है विधायकों का इनकम टैक्स, प्रति विधायक सरकार को चुकाना पड़ेगा करीब 3 लाख रुपये टैक्स</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/16/debt-ridden-hp-govt-will-have-to-pay-rs-3-lakh-income-tax-per-legislature/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Apr 2016 14:34:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Corruption]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh secretariat]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLA Income Tax]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAa]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4930</guid>

					<description><![CDATA[<p>कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार को अब हर साल प्रति विधायक करीब तीन लाख रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा, हाल में हुए वेतन संशोधन के बाद एक विधायक पर सरकार का खर्च करीब दो लाख दस हजार रुपये बनता है। शिमला- विधायक अपने वेतन पर बनने वाला इनकम टैक्स भी पब्लिक की जेब से भरते [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/16/debt-ridden-hp-govt-will-have-to-pay-rs-3-lakh-income-tax-per-legislature/">हिमाचल की पब्लिक की  जेब से वसूला जाता है विधायकों का इनकम टैक्स, प्रति विधायक सरकार को चुकाना पड़ेगा करीब 3 लाख रुपये टैक्स</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार को अब हर साल प्रति विधायक करीब तीन लाख रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा, हाल में हुए वेतन संशोधन के बाद एक विधायक पर सरकार का खर्च करीब दो लाख दस हजार रुपये बनता है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  विधायक अपने वेतन पर बनने वाला इनकम टैक्स भी पब्लिक की जेब से भरते हैं। कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार को अब हर साल प्रति विधायक करीब तीन लाख रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा। वेतन बढ़ोतरी के बाद अब प्रदेश के 68 विधायकों के नए वेतन पर आयकर का बोझ बढ़कर करीब ढाई करोड़ रुपये हो गया है।</p>
<p>विधानसभा गठन के बाद बेहतर संचालन के लिए विधानसभा सचिवालय ने दि हिमाचल प्रदेश विधानसभा (अलाउंसेज एंड पेंशन आफ मेंबर्स) एक्ट 1971 (सिंतबर 2003) से समय समय पर संशोधन किए हैं। इस नियमावली में विधायकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे तमाम नियम जोड़ दिए गए, जिनसे विधायकों को किसी भी तरह की सुविधा से महरूम न होना पडे़।</p>
<p>चाहे वेतन-पेंशन की बात हो या वाहन के इस्तेमाल, दैनिक भत्ते की। विधायकों की जरूरतों से जुड़े तकरीबन हर बिंदु को इस नियमावली में शामिल किया गया है। इसी एक्ट के अंतर्गत इनकम टैक्स अदायगी भी शामिल है। नियमों के मुताबिक विधायकों का वेतन पर जितना इनकम टैक्स बनता है उसे हिमाचल प्रदेश सचिवालय अदा करता है।</p>
<p><strong>जानिए विधायकों के इनकम टैक्स का गणित</strong></p>
<p>हाल में हुए वेतन संशोधन के बाद एक विधायक पर सरकार का खर्च करीब दो लाख दस हजार रुपये बनता है। इसमें विधायकों का मूल वेतन ही साठ हजार रुपये हो गया है। आयकर के अंतर्गत आने वाली राशि करीब डेढ़ लाख रुपये महीने बनती है। इसके हिसाब से सालाना करीब 18 लाख रुपये की रकम आयकर में आती है। टैक्स जानकारों के अनुसार इस राशि पर करीब तीन लाख रुपये का आयकर बनेगा।</p>
<p><strong>पहले यह थी व्यवस्था</strong></p>
<p>जिस समय यह व्यवस्था की गई थी उस वक्त विधायकों का मूल वेतन सिर्फ 8 हजार रुपये होता था। उन्हें 5 हजार का प्रतिपूरक भत्ता, विधानसभा क्षेत्र, लिपिकीय व पत्राचार सुविधा के लिए 8 हजार, टेलीफोन भत्ते के रूप में 7 हजार व ऑफिस अलाउंस 5 हजार होता था। बिजली-पानी के बिल का भी भुगतान शामिल था। सब कुछ मिलाकर विधायकों पर सरकार का खर्च करीब 40 हजार रुपये बनता था।</p>
<p><strong>पहले यह थी व्यवस्था</strong></p>
<p>जिस समय यह व्यवस्था की गई थी उस वक्त विधायकों का मूल वेतन सिर्फ 8 हजार रुपये होता था। उन्हें 5 हजार का प्रतिपूरक भत्ता, विधानसभा क्षेत्र, लिपिकीय व पत्राचार सुविधा के लिए 8 हजार, टेलीफोन भत्ते के रूप में 7 हजार व ऑफिस अलाउंस 5 हजार होता था। बिजली-पानी के बिल का भी भुगतान शामिल था। सब कुछ मिलाकर विधायकों पर सरकार का खर्च करीब 40 हजार रुपये बनता था।</p>
<p><strong>पहले आयकर में नहीं आती थी सैलरी</strong></p>
<p>पहले इस राशि के कुछ हिस्से ही आयकर में आते थे लेकिन कुछ साल पहले एक न्यायिक संस्था ने विधायकों को मिलने वाली राशि को वेतन तो नहीं माना, लेकिन आय के अन्य साधनों की श्रेणी में रखते हुए आयकर के दायरे में ला दिया।</p>
<p>Photo:<a href="http://www.diffusedonline.com/wp-content/uploads/2012/09/Cartoons-Against-Corruption-In-India-7-e1347297174583.jpeg" target="_blank"> Diffused Online</a>  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/16/debt-ridden-hp-govt-will-have-to-pay-rs-3-lakh-income-tax-per-legislature/">हिमाचल की पब्लिक की  जेब से वसूला जाता है विधायकों का इनकम टैक्स, प्रति विधायक सरकार को चुकाना पड़ेगा करीब 3 लाख रुपये टैक्स</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के विधायक,मंत्री जनता के पैसे से उड़ा रहे ऐश, 4% ब्याज दर पर 50 लाख तक लोन लेने के पात्र, ऋण माफी की भी सुविधा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-legislator-eligible-for-loan-upto-50-lack-at-just-4-interest-rate/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Apr 2016 14:48:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Legislators]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Governor]]></category>
		<category><![CDATA[HP Ministers]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAs]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4832</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं, विधायकों को चार प्रतिशत ब्याज पर 50 लाख लोन,मरने के बाद ऋण माफी की भी सुविधा,पूर्व विधायकों को भी इसी ब्याज दर मिलता है 15 लाख रुपये लोन शिमला- कर्ज लेने के मामले में विधायकों को किसानों की तरह [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-legislator-eligible-for-loan-upto-50-lack-at-just-4-interest-rate/">हिमाचल के विधायक,मंत्री जनता के पैसे से उड़ा रहे ऐश, 4% ब्याज दर पर 50 लाख तक लोन लेने के पात्र, ऋण माफी की भी सुविधा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं, विधायकों को चार प्रतिशत ब्याज पर 50 लाख लोन,मरने के बाद ऋण माफी की भी सुविधा,पूर्व विधायकों को भी इसी ब्याज दर मिलता है 15 लाख रुपये लोन</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> कर्ज लेने के मामले में विधायकों को किसानों की तरह ट्रीट किया जाता है। चार फीसदी ब्याज पर किसानों को क्रेडिट कार्ड लोन मिलता है। इतनी ही ब्याज दर पर विधायकों को 50 लाख का लोन दिया जाता है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि लोन न चुका पाने की हालत में किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि विधायकों का कर्ज माफ हो सकता है। एक चुनाव जीतने के बाद नेताओं की जिन्दगी कितनी आसान हो जाती है इसका ये उदाहरण है।</p>
<p>जनता के भरोसे पर चुनाव जीतने वाले नेता पचास लाख रुपए जैसी भारी भरकम रकम के लिए क्वालीफाइड हो जाते हैं। यह मान लिया जाता है कि राजनेता बनने के बाद व्यक्ति 50 लाख का कर्ज चुकाने का पात्र हो गया है। कार और घर के लिए हिमाचल के किसी भी विधायक को 50 लाख रुपये का लोन सस्ती ब्याज दर पर मिल सकता है। इसे प्रदेश विधानसभा सचिवालय ही देता है। प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं।</p>
<p> <strong>अचल संपत्ति गिरवी रखने का भी प्रावधान</strong></p>
<p>लोन के रूप में लिए गए इस एडवांस को विधायकों को 180 किश्तों में चुकाना होता है। इस पर चार फीसदी प्रति वर्ष की वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। इसी तरह से पूर्व विधायकों को भवन और मोटर एडवांस लोन 15 लाख रुपये तक देने की व्यवस्था है। हालांकि, शर्त ये है कि पूर्व विधायकों को पूर्व में लिए गए ऋण को ब्याज समेत पूरी तरह से चुकता करना होता है।</p>
<p>इसे पूर्व विधायकों को 60 बराबर किश्तों में देना होता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 के मुताबिक अगर किसी विधायक या पूर्व विधायक ने एडवांस यानी लोन लिया है और उसकी मौत हो जाती है तो ऐसी हालत में अगर राज्यपाल इस बात से संतुष्ट हों कि संबंधित परिवार की स्थिति लोन चुकाने की नहीं है तो इसे माफ किया जा सकता है।</p>
<p>नियमों के मुताबिक अगर परिवार के सदस्य लोन चुकाने की स्थिति में हों तो इसे विधायक या पूर्व विधायक की मौत पर उसके कानूनी वारिस से ब्याज सहित रिकवर किया जाएगा। हालांकि ये भी व्यवस्था है कि सरकार ऋण की वापसी नहीं कर पाने वाले विधायक या पूर्व विधायक की अचल संपत्ति गिरवी रख सकती है। इसे तब तक गिरवी रखा जाएगा, जब तक ये भुगतान पूरा नहीं कर दिया जाता है।</p>
<p>Photo: live Mint/Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-legislator-eligible-for-loan-upto-50-lack-at-just-4-interest-rate/">हिमाचल के विधायक,मंत्री जनता के पैसे से उड़ा रहे ऐश, 4% ब्याज दर पर 50 लाख तक लोन लेने के पात्र, ऋण माफी की भी सुविधा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विधायक साहबान ने अधिनियम में संशोधन कर अपनी  पेंशन  भी बढ़ाई, 5 साल विधायक रहें या नहीं, ताउम्र 78, 000 से ज्यादा पेंशन लेने के हकदार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-pradehs-legislature-hike-their-pension-to-78000/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Apr 2016 12:40:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAs]]></category>
		<category><![CDATA[Legislature Allowances]]></category>
		<category><![CDATA[Legislature Pensions Act 1971]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4852</guid>

					<description><![CDATA[<p>विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं, अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है शिमला- सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-pradehs-legislature-hike-their-pension-to-78000/">विधायक साहबान ने अधिनियम में संशोधन कर अपनी  पेंशन  भी बढ़ाई, 5 साल विधायक रहें या नहीं, ताउम्र 78, 000 से ज्यादा पेंशन लेने के हकदार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं, अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं। एक बार शपथ हो गई तो उसके बाद पांच साल तक विधायक रहें या नहीं, ताउम्र पेंशन के लिए पात्र हो जाएंगे।</p>
<p>मृत्यु भी हो जाए तो भी विधवा या उनके माइनर बच्चे को पेंशन मिलती है। दूसरी बार विधायक बनने पर हर साल 1000 रुपये की दर से पेंशन बढ़ती है। हाल में हुए संशोधन के बाद अब विधायकी जाने के बाद किसी भी एमएलए की करीब 78 हजार रुपये की पेंशन लग जाएगी।</p>
<p>साल 1971 में बने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए 5000 रुपये की मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया था। बाद में कई संशोधनों के बाद अभी तक ये 22000 रुपये थी। अब इसे बढ़ाकर 36000 रुपये कर दिया गया है।</p>
<p><strong>डीए के साथ 78 हजार से भी ज्यादा पैंशन</strong></p>
<p>प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इसे बढ़ाने के लिए इस अधिनियम में संशोधन किया गया है। विधायक सुविधा समिति की संस्तुति के बाद सरकार ने पहले इसे 22 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये करने का फैसला किया था। सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों के इस बीच अनुरोध के बाद इसे बढ़ाकर 36 हजार रुपये मासिक कर दिया गया।</p>
<p>अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है। यानी, अब पूर्व विधायक इतनी या इससे ज्यादा पेंशन के हकदार हो जाएंगे। जो दो टेन्योर में विधायक रहे हैं, उनके लिए ये पेंशन अब हर साल 1000 रुपये की दर से बढ़ती रहेगी।</p>
<p>यानी, नई बढ़ोतरी के बाद ही कई पूर्व विधायकों की पेंशन 80 हजार से भी पार हो जाएगी। अगर पेंशन ले रहे पूर्व विधायक की मौत हो जाती है तो उसका परिवार भी पेंशन लेने का हकदार हो जाता है। परिवार में विधवा पत्नी या पत्नी के न होने पर कानूनी तौर पर वारिस माइनर बच्चे को आधी पेंशन मिलती है।</p>
<p><strong>लगातार विधायक रहे हों या नहीं, पेंशन मिलेगी ही</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 की धारा 6 बी में ये व्यवस्था की गई है कि पेंशन का हकदार हर वह आदमी होगा, जो पांच साल के कार्यकाल तक विधानसभा का सदस्य रहा हो। वह चाहे लगातार पांच साल तक सदस्य रहा हो या नहीं।</p>
<p><em>Photo: Amar Ujala</em></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-pradehs-legislature-hike-their-pension-to-78000/">विधायक साहबान ने अधिनियम में संशोधन कर अपनी  पेंशन  भी बढ़ाई, 5 साल विधायक रहें या नहीं, ताउम्र 78, 000 से ज्यादा पेंशन लेने के हकदार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदेश  भारी क़र्ज़ में पर हिमाचल के  विधायक सिर्फ 50 रुपए में खा रहे 500 रुपए का शाही खाना, उसका भी नहीं चुकाते पूरा पैसा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/13/debt-burden-himachal-spending-on-lavish-food-for-legislatures/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Apr 2016 08:08:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Corruptoin]]></category>
		<category><![CDATA[Himacal Legislature salary hike]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly Canteen]]></category>
		<category><![CDATA[HP MLAs]]></category>
		<category><![CDATA[HPTDC]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4816</guid>

					<description><![CDATA[<p>हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया, पनीर, सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती, सलाद के महज 40 रुपये,आम आदमी को साढ़े चार से पांच सौ रुपये में मिलेगी खाने की ऐसी थाली,नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम देता है [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/13/debt-burden-himachal-spending-on-lavish-food-for-legislatures/">प्रदेश  भारी क़र्ज़ में पर हिमाचल के  विधायक सिर्फ 50 रुपए में खा रहे 500 रुपए का शाही खाना, उसका भी नहीं चुकाते पूरा पैसा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया, पनीर, सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती, सलाद के महज 40 रुपये,आम आदमी को साढ़े चार से पांच सौ रुपये में मिलेगी खाने की ऐसी थाली,नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम देता है खाना, कई रियायतों के बावजूद कम वेतन-भत्तों का हवाला देकर बढ़ा ली सैलरी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  अपने वेतन-भत्तों को मनमाने तरीके से बढ़ाकर पब्लिक के निशाने पर आए सूबे के विधायक 500 रुपये का खाना भी 40 से 50 रुपये में खाते हैं। विधानसभा के हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया।</p>
<p>एक विधायक को वेज थाली में पनीर की सब्जी, एक अन्य सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती और सलाद जबकि नॉनवेज थाली में वेज आइटम के साथ एक नॉनवेज आइटम परोसी गई। बदले में विधायकों से महज 40 से 50 रुपये लिए गए।</p>
<p>औसतन हर दूसरे साल अपना वेतन और भत्ते बढ़ाने वाले विधायकों को सरकार जो खाना परोसती है, वह आम आदमी से दस गुना तक ज्यादा सस्ता है।</p>
<p><strong>सत्र के दौरान खाने का पूरा पैसा भी विधायक नहीं चुकाते</strong></p>
<p>आम आदमी को भले ही थाली का खाना खाने के लिए साढ़े चार से पांच सौ रुपये तक चुकाने पड़ते हों लेकिन विधायकों को वही थाली 40 से 50 रुपये में मिल रही है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम नो प्रॉफिट नो लॉस को ध्यान में रखकर कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायकों को खाना मुहैया कराता है।</p>
<p>खाने के भी नहीं चुकाते पूरे पैसे- सत्र के दौरान खाने का पूरा पैसा भी विधायक नहीं चुकाते। साठ प्रतिशत पैसा वह खुद चुकाते हैं, जबकि बाकी पैसा विधानसभा चुकाती है। सूत्र बताते हैं कि कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायक को परोसे जाने वाले खाने का खर्च 75 रुपये प्रति वेज थाली और 90 रुपये प्रति नॉन वेज थाली होता है।</p>
<p>लेकिन इन दोनों ही तरह की थालियों के खाने के लिए विधायकों से सिर्फ 40 से 50 रुपये लिए जाते हैं। इसी थाली को सामान्य लोगों को साढ़े चार सौ से पांच सौ रुपये में परोसा जाता है।</p>
<p>Photo: Raj Govt.org/Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/13/debt-burden-himachal-spending-on-lavish-food-for-legislatures/">प्रदेश  भारी क़र्ज़ में पर हिमाचल के  विधायक सिर्फ 50 रुपए में खा रहे 500 रुपए का शाही खाना, उसका भी नहीं चुकाते पूरा पैसा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
