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	<title>CBI Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<item>
		<title>गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड: दोषी नीलू की याचिका पर हुई सुनवाई, सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ के लगाए आरोप</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2025/03/11/kotkhai-guidia-case-high-court-hearing-on-neelu-chiranis-appeal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 10:49:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला -11 मार्च- 2025- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मामले में दोषी चिरानी नीलू को जिला अदालत शिमला की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है। दोषी की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/03/11/kotkhai-guidia-case-high-court-hearing-on-neelu-chiranis-appeal/">गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड: दोषी नीलू की याचिका पर हुई सुनवाई, सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ के लगाए आरोप</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला </strong><em><strong>-11 मार्च- 2025-</strong></em> हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मामले में दोषी चिरानी नीलू को जिला अदालत शिमला की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है।</p>
<p>दोषी की ओर से मामले में जिरह के लिए समय मांगा गया था,जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला 2021 से हाईकोर्ट में लंबित है और दोषी की सजा निलंबित नहीं की गई है। यानी वह अब भी जेल में है। ऐसे में कोर्ट का दायित्व बनता है कि इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई अप्रैल माह तक स्थगित करने की अपील भी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी की ओर से फिर से सुनवाई टालने का अनुरोध किया जाता है, तो न्यायालय कानूनी सहायता से जुड़े किसी अधिवक्ता को नियुक्त करने में संकोच नहीं करेगा।</p>
<p><strong>दोषी चिरानी नीलू का आपराधिक रिकॉर्ड</strong></p>
<p>अदालत में दोषी की ओर से पेश अधिवक्ता ने सीबीआई की ओर से जुटाए साक्ष्यों पर सवाल उठाए। खंडपीठ ने पूछा कि क्या अपराधी ने इससे पहले भी कोई अपराध किया है। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि साल 2015 में नीलू के खिलाफ सिरमौर जिले के सराहां पुलिस स्टेशन में धारा 307, 354, 326, 323 और 324 के तहत मामला दर्ज हुआ था। 14 जुलाई 2016 को हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह फरार हो गया था। 5 और 6 जुलाई 2017 की रात को भी उस पर एक युवती से दुष्कर्म का प्रयास करने का आरोप था।</p>
<p>इसके बाद अदालत ने कहा कि ऐसा कौन सा कारण है, जिससे दोषी व्यक्ति अपने आप को बेकसूर साबित कर सके। इस पर अदालत को अवगत कराए। अधिवक्ता ने दलीलों में कहा कि सीबीआई ने याचिकाकर्ता को एक साल बाद गिरफ्तार किया, जबकि गुड़िया की हत्या इससे पहले हो चुकी थी। सीबीआई ने 5 जुलाई 2017 को घटना के बाद से 12 अप्रैल 2018 तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। जब आरोपी की मां का डीएनए मैच हुआ तो उसके एक साल बीत जाने के बाद 13 अप्रैल 2018 को याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p><strong>सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ के आरोप</strong></p>
<p>नीलू ने जिला अदालत शिमला के फैसले को चुनौती दी है। अधिवक्ता ने दलीलों में कहा कि इस मामले में सीबीआई की ओर से 250 लोगों के खून के नमूने जांच के लिए लिए गए। दलीलों में  आरोप लगाया गया है कि सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ की गई है। वर्ष 2017 में गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामला सामने आया। नीलू चिरानी को गुड़िया के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में सजा हुई है।</p>
<p><strong>अधिवक्ता मंगलवार को अदालत में अपनी दलीलें देंगे</strong></p>
<p>शिमला स्थित सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए नीलू चरानी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है। सीबीआई कोर्ट ने नीलू चरानी को गुड़िया रेप और हत्या के मामले में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब 10 मार्च से हाईकोर्ट में इस अपील पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। नीलू के मामले में अब अदालत दो दिन लगातार 3 बजे के बाद सुनवाई करेगी। इस पर अधिवक्ता मंगलवार को अदालत में अपनी दलीलें देंगे।</p>
<p><strong>पढ़ें क्या है पूरा मामला</strong></p>
<p>6 जुलाई 2017 को कोटखाई में एक स्कूली छात्रा के साथ <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/01/27/kotkhai-custodial-killing-update-2025/">दुष्कर्म और हत्या का मामला</a> सामने आया था। मामले में शिमला स्थित सीबीआई कोर्ट ने दोषी नीलू को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने खुद को दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/03/11/kotkhai-guidia-case-high-court-hearing-on-neelu-chiranis-appeal/">गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड: दोषी नीलू की याचिका पर हुई सुनवाई, सबूतों और नमूनों से छेड़छाड़ के लगाए आरोप</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड : सूरज हत्या मामले में आईजी जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारी दोषी करार, डीडब्लू नेगी बरी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2025/01/19/kotkhai-custodial-death-case-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhawna Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jan 2025 07:45:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
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		<category><![CDATA[Kotkhai]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Zahur Zaidi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: साल 2017 में कोटखाई में हुए गुड़िया दुष्कर्म व हत्या मामले से जुड़े सूरज हत्याकांड मामले में चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है। अपने फैसले में न्यायालय ने इस मामले में तत्कालीन आईजी जहूर जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने जहूर जैदी सहित DSP मनोज जोशी, [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/01/19/kotkhai-custodial-death-case-update/">गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड : सूरज हत्या मामले में आईजी जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारी दोषी करार, डीडब्लू नेगी बरी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> साल 2017 में कोटखाई में हुए <a href="https://himachalwatcher.com/2017/07/08/school-girl-raped-and-murdered-in-shimla-naked-dead-body-dumped-in-forest-report/">गुड़िया दुष्कर्म व हत्या मामले</a> से जुड़े <a href="https://himachalwatcher.com/2017/07/19/kotkhai-case-one-accused-murdered-in-police-custody-in-shimla/">सूरज हत्याकांड</a> मामले में चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है। अपने फैसले में न्यायालय ने इस मामले में तत्कालीन आईजी जहूर जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने जहूर जैदी सहित DSP मनोज जोशी, राजिंदर सिंह, दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, सूरत सिंह, रफीक मोहम्मद, रंजीत स्टेटा को दोषी करार दिया गया है। दोषियों को 27 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। वहीं इस मामले में शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्लू नेगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।</p>
<p>गुड़िया मामले की जांच करते हुए पुलिस ने सूरज नाम के आरोपी को हिरासत में लिया था। जिसकी पुलिस हिरासत में ही मौत हो गई थी। स्थानीय पुलिस ने सह-आरोपी राजू पर लॉकअप के अंदर सूरज की हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। मामले में सीबीआई ने उस वक्त के आईजी जहूर जैदी और अन्य पुलिस अधिकारियों को हिरासत में लिया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से सूरज की मौत हुई थी। उसी मामले में  सीबीआई अदालत ने ये फैसला सुनाया है।</p>
<p><strong>क्या था गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामला :</strong></p>
<p>6 जुलाई 2017 को कोटखाई में एक स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया था।  10वीं की छात्रा 4 जुलाई को अपने भाई के साथ स्कूल गई थी, लेकिन घर वापस नहीं लौटी। 5 जुलाई को लड़की का पता न चलने पर माता-पिता ने उसकी तलाश शुरू की। 6 जुलाई को किसी ने लिंक रोड से करीब 100 मीटर ऊपर दांडी जंगल में एक लड़की का शव नग्न अवस्था में पड़ा देखा और इस बारे में सभी को सूचित किया। घटनास्थल के पास से लड़की की वर्दी भी बरामद हुई। घटना की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण, उप-मंडल मजिस्ट्रेट और पुलिस उपाधीक्षक ठियोग मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। शुरुआती जांच में यह कहा गया कि छात्रा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।</p>
<p>इसके बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 376 और पोस्को (यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और अपराध की जांच के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई। 10 जुलाई 2017  को तत्कालीन आईजी जहूर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी ( स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम ) गठित की गई जिसमें दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, सूरत सिंह, मनोज जोशी, राजिंद्री सिंह, रफी मोहम्मद व रंजीत सतेता शामिल थे।</p>
<p>11 जुलाई 2017 की रात को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आधिकारिक और सत्यापित फेसबुक पेज पर कथित तौर पर चार तस्वीरें पोस्ट की गईं थी, साथ में लिखा था कि ये चार लोग स्कूली छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के भयावह मामले के पीछे के संदिग्ध हैं। लेकिन तस्वीरें वायरल होने के तुरंत बाद अचानक से हटा दी गईं थी</p>
<p>13 जुलाई 2017 को एसआईटी ने रेप-मर्डर के आरोप में छह लोगों ( आशीष चौहान उर्फ ​​आशु (29),  सुभाष सिंह बिष्ट (42) और दीपक उर्फ ​​देपू (38), राजिंदर सिंह उर्फ ​​राजू (32), सूरज सिंह (29) और  ​​छोटू (19)  को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को उनके निवास स्थान कोटखाई से गिरफ्तार किया गया था।</p>
<p>एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए छह आरोपियों पर पत्रकारों और अधिकांश लोगों ने संदेह जताया और कईं सवाल भी उठाए। लोगों को असली दोषियों को बचाने की साजिश का आभास हुआ और  केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग उठने लगी। वहीं पुलिस ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र की आधिकारिक फेसबुक वॉल पर शेयर की गई कुछ लोगों की तस्वीरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लोगों का सवाल था कि वह तस्वीरें अखिर क्यों हटा दी गई।</p>
<p>वहीं 15 जुलाई 2017 को दो संदिगधों जिनकी फोटो मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई थी , उन्हें पूछताछ और सैंपल के लिए पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। जिनके बारे में कहा जा रहा था कि वे दोनों बहुत प्रभावशाली परिवारों से जुड़े हैं। संदिग्धों को भारी पुलिस बल की तैनाती के तहत शिमला के रिप्पन अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए लाया गया जिसमें उनके सीरम और डीएनए प्रोफाइलिंग नमूने लिए गए । कथित तौर पर मेडिकल जांच के बाद संदिग्धों को छोड़ दिया गया। हालांकि,बाकी दो लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा गया।</p>
<p><strong>पुलिस हिरासत में अचानक हुई सूरज की मौत:</strong></p>
<p>इसके बाद एक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। 17 और 18 जुलाई की रात के बीच पुलिस हिरासत में सूरज की अचानक हत्या हो गई। पुलिस ने हत्या की पुष्टि की और कहा कि आरोपी राजिंदर (32) ने  सूरज सिंह (29) को जमीन पर पटक कर उसकी हत्या कर दी। मारपीट और हत्या का समय आधी रात के आसपास का बताया गया। पुलिस ने सूरज की हत्या के लिए सह-आरोपी राजिंदर को दोषी ठहराया और तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने भी इसका समर्थन किया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और रवैये पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया ।</p>
<p>इस घटना से लोगों में और रोष भर गया। स्थानीय लोगों द्वारा एसआईटी पर असली दोषियों को बचाने का संदेह और भी पक्का हो गया। सीबीआई जांच की मांग उठी। लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर उग्र विरोध प्रदर्शन किया गया। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए और प्रदेश में कईं जगह <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/19/kotkhai-rape-murder-case-angry-locals-vandalize-kotkhai-police-station/">उग्र प्रदर्शन</a> हुए तो यह केस 19 जुलाई को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हवाले कर दिया। सीबीआई को दो दिनों के भीतर एक विशेष जांच दल गठित करने और कोटखाई बलात्कार और हत्या मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया गया।</p>
<p><strong>सूरज की हत्या के बाद उसकी पत्नी ने दिया चौंकाने वाला बयान :</strong></p>
<p>वहीं मामले में एक और नया मोड़ आया ,सूरज की पत्नी ने हिंदी दैनिक भास्कर को दिए गए बयान में बताया कि उसके पति ने उसे 9 जुलाई को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पहले उसके साथ हुई बातचीत का खुलासा न करने को कहा था। उसकी पत्नी के अनुसार सूरज ने उसे भरोसा दिलाया था कि वह छह महीने में जेल से वापस आ जाएगा और फिर वे गरीब नहीं रहेंगे। उसने उससे कहा था कि उसके लौटने के बाद वे नेपाल में रहेंगे। उसकी पत्नी ने आरोप लगाया कि उनके पति को इस जाल में फंसाने के लिए पैसे का लालच दिया गया था और इसमें उच्च अधिकारी शामिल हैं। पत्नी को डर था कि इस खुलासे  के बाद उनके पति की तरह उनकी भी हत्या कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अपने बच्चों की जान के डर से वह अब तक चुप थी।</p>
<p><strong>सूरज हत्या मामले में अधिकारी गिरफ्तार :</strong></p>
<p>22 जुलाई को <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/22/cbi-starts-probe-in-kotkhai-murder-and-rape-case/">सीबीआई ने</a> दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। एक नाबालिग लड़की के बलात्कार और हत्या की जांच से संबंधित और दूसरा नेपाली आरोपी सूरज सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में पुलिस हिरासत में मौत की जांच से संबंधित।</p>
<p>29 अगस्त 2017 को सीबीआई ने सूरज की हिरासत में हत्या के लिए एसआईटी के प्रमुख जहूर एच जैदी, आईजी, दक्षिणी रेंज, डीएसपी, ठियोग, मनोज जोशी और छह अन्य सहित नौ पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में, सीबीआई ने शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को भी नवंबर 2017 में गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>उस वक्त हिमाचल की जनता के अनुसार सीबीआई देवदूत बनकर आई थी। लोगों को उम्मीद थी की सीबीआई की जांच से गुड़िया को इंसाफ जरुर मिलेगा।</p>
<p><strong>लकड़हारा नीलू दोषी करार :</strong></p>
<p>सीबीआई ने अदालत को बताया कि एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए शेष पांच आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया और प्रताड़ित किया गया। सीबीआई की टीम ने अगले ग्यारह महीनों तक जांच की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। 28 मार्च 2018 को हाईकोर्ट ने सुस्त जांच प्रक्रिया को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई। अंततः सीबीआई से निराश होकर अदालत ने सीबीआई की क्षमता पर सवाल उठाया और इसके निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होने को कहा।</p>
<p>इस समन के तुरंत बाद ही सीबीआई ने दावा किया कि इस मामले को सुलझा लिया गया है, जिसमें एक <a href="https://himachalwatcher.com/2021/06/19/kotkhai-gudiya-case-verdict-life-imprisonment-to-convict-but-parents-say-real-culprits-still-roaming-free/">लकड़हारे नीलू को गिरफ्तार</a> किया गया। अदालत ने सीबीआई द्वारा आरोपी के खिलाफ दिए गए 14 में से कम से कम 12 सबूतों को सही पाया। घटनास्थल से लिए गए नमूने के साथ उसके डीएनए का मिलान सबसे महत्वपूर्ण सबूतों में से एक माना।</p>
<p>28 अप्रैल 2021 को सीबीआई जज राजीव भारद्वाज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपी नीलू को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (आई), 376 9 (ए) और 302 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत सभी चार आरोपों में दोषी ठहराया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई और इसके बाद मामले को बंद माना गया।</p>
<p><strong>लकड़हारे नीलू का बयान :</strong></p>
<p>हालांकि नीलू ने मीडिया से कहा कि वह निर्दोष है और उसे सीबीआई ने फंसाया है। उसने सीबीआई पर जान से मारने की धमकी समेत कई गंभीर आरोप लगाए। उसने न्यूज 18 को बताया कि उसे धमकी दी गई कि उसे भी 18 जुलाई 2017 को  पुलिस हिरासत में मारे गए आरोपी सूरज की तरह ही मार दिया जाएगा। न्यूज 18  की खबर के अनुसार उसने यहां तक ​​कहा कि उसे फंसाने के लिए उसकी मां को बंधक बना लिया गया था। उसने कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।</p>
<p><strong>सीबीआई जांच से परिवार और स्थानीय लोग असंतुष्ट :</strong></p>
<p>2018 में ग्यारह महीने की जांच के बाद सीबीआई ने दावा किया था कि उसने मामले को सुलझा लिया है और गुड़िया के साथ बलात्कार और हत्या के लिए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसने इस रिपोर्ट से इनकार किया कि यह सामूहिक बलात्कार था। गिरफ्तार आरोपी एक लकड़हारा था। परिवार और जनता सीबीआई के निष्कर्षों से संतुष्ट नहीं थे और उनका मानना ​​था कि असली अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।</p>
<p>इससे सीबीआई की जांच संदेह के घेरे में आ गई थी, जब दो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने अदालत में गवाही दी थी कि <a href="https://himachalwatcher.com/2019/11/25/cbi-probe-in-kotkhai-gudia-case-under-scanner-forensic-report-suggests-involvement-of-more-than-one-person/">फोरेंसिक परीक्षण की विश्लेषण रिपोर्ट से</a> पता चला है कि गुड़िया के बलात्कार और हत्या में एक से अधिक लोग शामिल थे।</p>
<p>लोगों को आज भी इस जांच पर संदेह है। लोग आज भी सीबीआई द्वारा की गई इस जांच से असंतुष्ट है। आज भी सवाल उठते है कि मामले में अचानक से सिर्फ एक व्यक्ति लकड़हारे नीलू को आरोपी कैसे ठहराया गया। जहां तक इस मामले को सामूहिक दुष्कर्म माना जा रहा था वहां सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ एक आरोपी को कैसे गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>उन फोटो का क्या जो तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए थे और कुछ देर बाद ही हटा दिए गए थे ? एसआईटी की टीम ने क्यूं छह लोगों को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया था ? आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही थी ? यह सवाल ऐसे है जिनका जवाब आज भी नहीं मिल पाया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/01/19/kotkhai-custodial-death-case-update/">गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड : सूरज हत्या मामले में आईजी जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारी दोषी करार, डीडब्लू नेगी बरी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>शिमला दूरदर्शन केंद्र में सीबीआई रेड में अधिकारियों पर गिर सकती है गाज, जांच टीम के हाथ लगे हम दस्तावेज</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/14/cbi-raid-at-dd-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jun 2016 15:14:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
		<category><![CDATA[DD Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Doordarshan kendra Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हाल ही में शिमला दूरदर्शन केंद्र में सीबीआई द्वारा की गई रेड मामले में केंद्र के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। सीबीआई की जांच दूरदर्शन के कुछ एक अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के कुछ एक अधिकारी रिकॉर्ड साथ ले गए हैं, जिसकी वे गहनता से छानबीन [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/14/cbi-raid-at-dd-shimla/">शिमला दूरदर्शन केंद्र में सीबीआई रेड में अधिकारियों पर गिर सकती है गाज, जांच टीम के हाथ लगे हम दस्तावेज</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  हाल ही में शिमला दूरदर्शन केंद्र में सीबीआई द्वारा की गई रेड मामले में केंद्र के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।</p>
<p>सीबीआई की जांच दूरदर्शन के कुछ एक अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के कुछ एक अधिकारी रिकॉर्ड  साथ ले गए हैं, जिसकी वे गहनता से छानबीन कर रहे हैं, वहीं कुछ एक सीबीआई अधिकारी अभी भी शिमला में डेरा डाले हुए हैं और छानबीन कर रहे हैं। जल्द ही सीबीआई इस मामले में अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को दूरदर्शन केंद्र में गड़बड़झाले की शिकायतें मिली थीं, जिनको लेकर उन्होंने यह कार्रवाई अमल में लाई है।</p>
<p>इस मामले को लेकर जल्द ही सीबीआई थाना शिमला में एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। केंद्रीय जांच एजैंसी (सीबीआई) एफआईआर दर्ज करने से पहले पुख्ता सबूत हासिल करना चाहती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि शिमला दूरदर्शन गड़बड़झाले में सीबीआई जांच टीम के हाथ कुछ एेसे दस्तावेज लगे हैं, जिनके आधार पर कभी भी दूरदर्शन के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है। हालांकि सीबीआई दूरदर्शन कार्यालय से जब्त किए गए रिकॉर्ड की छानबीन कर रही है।</p>
<p>सीबीआई दस्तावेजों को खंगालने के बाद इस मामले में आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी। उल्लेखनीय है कि बीते 10 जून को केंद्रीय जांच एजैंसी (सीबीआई) ने शिमला स्थित दूरदर्शन कार्यालय में दबिश दी थी। केंद्र में चल रही कुछ अनियमितताओं को लेकर सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने कार्यालय से रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ वित्तीय आकलन की फाइलें व कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क को भी कब्जे में लिया है। सीबीआई की उक्त दबिश से कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।</p>
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		<item>
		<title>वीरभद्र केस: हाईकोर्ट में तीन दिसंबर को होगी बहस</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/11/05/virbhadra-singh-disproportionate-assets-case-transferred-to-delhi-hc-hearing-scheduled-for-dec-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Nov 2015 07:24:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग संबंधी आवेदन पर योग्यता पर दलीलें सुनने के लिए हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर की तारीख तय की है। जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग संबंधी आवेदन पर योग्यता पर दलीलें सुनने के लिए हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर की तारीख तय की है।</p>
<p>जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों के मद्देनजर आवदेन की योग्यता पर दोबारा विचार किया जाएगा।</p>
<p>यह आवेदन सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर न्याय मित्र अधिवक्ता एन हरीहरन अपनी दलीलें 3 दिसंबर को पेश करें। दूसरी ओर वीरभद्र सिंह की ओर से बहस करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच चल रही है।</p>
<p>यह मामला हिमाचल प्रदेश से संबंधित है। इन हालात में कोर्ट की निगरानी में जांच की जरूरत नहीं है और इसके मद्देनजर यह आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज- वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई में चल रहे आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच नवंबर को सुनवाई है।</p>
<p>सीबीआई ने हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर लगाई गई रोक के फैसले को चुनौती दी है।</p>
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		<title>26 अक्टूबर को वीरभद्र की किस्मत का फैसला, गिरफ़्तारी  हुई तो कौन संभालेगा सत्ता की कमान ?</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/24/who-will-succeed-virbhadra-singh-if-he-faces-cbi-arrest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Oct 2015 14:05:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सियासी आग में घी डालने का काम भाजपा के उन बयानों ने किया है, जिसमें पार्टी प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की बात कर रही [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सियासी आग में घी डालने का काम भाजपा के उन बयानों ने किया है, जिसमें पार्टी प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की बात कर रही है।</p>
<p>ऐसे में हिमाचल में सहज ही सवाल उठ रहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटाई और वीरभद्र सिंह को पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जाता है तो प्रदेश में कौन सत्ता की कमान संभालेगा? सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को मामले की सुनवाई है। इसी बीच, हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली तलब कर मामले की जानकारी ली है।</p>
<p>यही नहीं, हाल ही में शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह से परिवहन मंत्री जीएस बाली की मुलाकात भी हुई। अंदरखाने वीरभद्र सिंह समर्थक भी इस घटनाक्रम से डरे हुए हैं कि यदि आय से अधिक संपत्ति मामले में मुख्यमंत्री गिरफ्तार होते हैं तो कांग्रेस सरकार का भविष्य क्या होगा?</p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने 26 सितंबर को शिमला सहित सराहन, रामपुर व दिल्ली आवासों में छापेमारी की थी। छापेमारी से दो दिन पहले ही सीबीआई ने मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस कार्रवाई की भनक हिमाचल में मुख्यमंत्री को लग गई थी। यह भी अहसास हो गया था कि सीबीआई छापेमारी भी कर सकती है। यही कारण है कि छापेमारी से पहले हिमाचल सरकार के सभी मंत्रियों ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व पर भरोसा जताने संबंधी हस्ताक्षरित बयान भी जारी किया था।</p>
<p>हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी मुख्यमंत्री के निवास पर सीबीआई का छापा पड़ा हो। छापेमारी के बाद कांग्रेस हाईकमान वीरभद्र सिंह के पक्ष में उतर आया। हालांकि कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आजाद तथा दीपेंद्र हुड्डा ने उनके समर्थन में मीडिया में बयान जारी किए, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। यह सही है कि इस मामले में वीरभद्र सिंह की पैरवी मशहूर वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं, परंतु सीबीआई जिस तरह से इस केस में सक्रियता दिखा रही है, उससे वीरभद्र सिंह समर्थक आशंकित हैं।</p>
<p>हिमाचल की राजनीति में पांच दशक से प्रभावशाली वीरभद्र सिंह के लिए इससे पहले इतना मुश्किल समय कभी नहीं आया था। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि ऐसी परिस्थितियां आएंगी। मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करें तो कांग्रेस में दूसरी पंक्ति के नेताओं को उभरने ही नहीं दिया गया। हालांकि कांग्रेस में कौल सिंह, विद्या स्टोक्स के साथ-साथ जीएस बाली भी मुख्यमंत्री पद के लिए गोटियां फिट करते रहे हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह के समक्ष सफल नहीं हुए हैं।</p>
<p>अब देखना यह है कि सीबीआई को 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट क्या निर्देश देता है। यदि हिमाचल हाईकोर्ट के गिरफ्तारी के आदेश पर रोक हटती है तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन संभावित है। ऐसे में कांग्रेस की गुटबाजी भी फूट कर सामने आ सकती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा नेता बयान जारी कर रहे हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव समय से पूर्व हो सकते हैं।</p>
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		<title>जानिए इस घंटी की कहानी जिसकी तलाश कर रही सीबीआई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/08/heritage-bell-theft-case-handover-to-cbi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2015 14:17:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
		<category><![CDATA[Heritage bell theft case]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पांच साल खाक छानने के बाद खाली हाथ रही पुलिस के बाद अब सीबीआई इस ऐतिहासिक घंटी की तलाश करेगी। अंग्रेजी शानसनकाल का गवाह रही यह दुर्लभ बड़ी घंटी कई मायनों में अहम थी। आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी कहते हैं कि साल 1903 में नेपाल के राजा ने अपने भारत दौरे के दौरान [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/08/heritage-bell-theft-case-handover-to-cbi/">जानिए इस घंटी की कहानी जिसकी तलाश कर रही सीबीआई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>पांच साल खाक छानने के बाद खाली हाथ रही पुलिस के बाद अब सीबीआई इस ऐतिहासिक घंटी की तलाश करेगी। अंग्रेजी शानसनकाल का गवाह रही यह दुर्लभ बड़ी घंटी कई मायनों में अहम थी। आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी</p>
<p>कहते हैं कि साल 1903 में नेपाल के राजा ने अपने भारत दौरे के दौरान यहां के तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन को यह बहुमूल्य घंटी तोहफे के तौर पर दी थी। अष्टधातु से बनी यह घंटी करीब 30 किलो वजनी थी। इसमें राइस पुलिंग जैसे कई गुण विद्यमान थे।</p>
<p>लकड़ी के स्टैंड समेत इसका वजन करीब 70 किलो के आसपास था। वर्तमान समय में इसकी कीमत अरबों रुपए आंकी जाती है। वायसराय ने भी इस तोहफे को स्वीकार किया और इसे शिमला के इस सबसे खूबसूरत भवन में रख दिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2015/10/advance-study.jpg" alt="advance-study" width="468" height="350" class="aligncenter size-full wp-image-2113" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2015/10/advance-study.jpg 468w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2015/10/advance-study-300x224.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2015/10/advance-study-72x54.jpg 72w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2015/10/advance-study-335x251.jpg 335w" sizes="(max-width: 468px) 100vw, 468px" /></p>
<p>यह वहीं एडवांस स्टडी भवन है जहां भारत पाक समझौते के अलावा कई ऐतिहासिक बैठकें व फैसले लिए गए थे। यह घंटी भी इसी भवन के ठीक बाहर बालकनी में गेट पर रखी गई थी।</p>
<p>यहां आने वाले सैलानियों को भी संस्‍थान प्रशासन इस घंटी की कहानी बताता था। इसी दौरान शातिरों की भी इस पर नजर पड़ चुकी थी। मगर चोरी करना आसान नहीं था क्योंकि दिन रात पूरे परिसर में सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता था।</p>
<p>22 अप्रैल 2010 को शातिरों ने सुरक्षाकर्मियों के नाक तले घंटी चोरी कर दी। स्टैंड समेत चोर इसे करीब 100 मीटर तक घसीटते हुए ले गए और फिर घंटी निकालकर गाड़ी में उड़ा ले गए।</p>
<p>करीब पांच साल की जांच के दौरान पुलिस ने संस्‍थान के सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग गिरफ्तार किए मगर इसका कोई पता नहीं चला। आखिरकार अब जांच सीबीआई के हवाले है। देखना है सीबीआई कब तक इस ऐतिहासिक घंटी का पता लगा पाती है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/08/heritage-bell-theft-case-handover-to-cbi/">जानिए इस घंटी की कहानी जिसकी तलाश कर रही सीबीआई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>कोयले घोटाले को लेकर फिर घिरी केंद्र सरकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2013/04/13/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%98/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhawana Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Apr 2013 18:03:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
		<category><![CDATA[center government]]></category>
		<category><![CDATA[Coalgate scam]]></category>
		<category><![CDATA[feature]]></category>
		<category><![CDATA[indian express]]></category>
		<category><![CDATA[newspaper]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8220;कोयले की कालिख से पहले से ही परेशान केन्द्र की संप्रग सरकार एक और मुश्किल में घिर गई है दरअसल , सरकार पर आरोप है उसने सीबीआई द्वारा तैयार इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट बदलवा दी है&#8221; अंग्रेजी अखबार &#8216;इंडियन एक्सप्रेस&#8217; के मुताबिक़ इस मामले पर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देने से [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2013/04/13/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%98/">कोयले घोटाले को लेकर फिर घिरी केंद्र सरकार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2013/04/coal-scam.jpg"><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2013/04/coal-scam.jpg" alt="coal-scam" width="620" height="453" class="alignnone size-full wp-image-675" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2013/04/coal-scam.jpg 620w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2013/04/coal-scam-300x219.jpg 300w" sizes="(max-width: 620px) 100vw, 620px" /></a></p>
<h3>&#8220;कोयले की कालिख से पहले से ही परेशान केन्द्र की संप्रग सरकार एक और मुश्किल में घिर गई है दरअसल , सरकार पर आरोप है उसने सीबीआई द्वारा तैयार इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट बदलवा दी है&#8221;</h3>
<p>अंग्रेजी अखबार  &#8216;इंडियन एक्सप्रेस&#8217; के मुताबिक़ इस मामले पर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देने से पहले सीबीआई ने कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ बैठकें की थीं।</p>
<p>अखबार के मुताबिक कानून मंत्री के साथ सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस रिपोर्ट में कई संशोधन सुझाए गए थे और सीबीआई ने इन्हें मान लिया। अखबार के अनुसार इस बैठक में सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा भी मौजूद थे। बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।</p>
<p>अखबार के मुताबिक कोल ब्लॉक आवंटन पर सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट को कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री दफ्तर के अधिकारियों ने प्रभावित किया था। अखबार के मुताबिक कानून मंत्री ने रिपोर्ट बदलवाई। 2006 से 2009 के बीच हुए कोल ब्लॉक आवंटन में हुई गड़बड़ियों पर ये रिपोर्ट सीबीआई ने 8 मार्च को कोर्ट को सौंपी थी।</p>
<p>अखबार का दावा है कि रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने से पहले कानून मंत्री ने देखना चाहा कि इस मुद्दे पर शास्त्री भवन में सीबीआई अधिकारियों और कानून मंत्रालय के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में रिपोर्ट में बदलाव के सुझाव दिए गए, जिनमें से कुछ बदलाव को मंजूरी भी दी गई। अखबार के मुताबिक इस बैठक में शामिल सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपनी तरफ से बदलाव का विरोध किया था, लेकिन फिर सरकारी अधिकारियों की बात माननी पड़ी।</p>
<p>विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी इस मामले में सरकार से सफाई मांगी है और इस घोटाले की जांच विशेष जांच दल  ; एसआईटी से कराने की मांग की है। जेटली ने कहा, यूपीए एक  &#8216;दुष्ट&#8217; सरकार है, जो सीबीआई को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देगी।</p>
<p>वहीं सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर जोगिंदर सिंह का कहना है कि सीबीआई कॉन्सटिट्यूशनल बॉडी नहीं है। सीबीआई किसी स्टेट पुलिस की तरह ही हैए जो इंडिपेंडेंट नहीं है और न ही किसी ने इसे इंडिपेंडेंट करने की कोशिश ही की।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2013/04/13/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%98/">कोयले घोटाले को लेकर फिर घिरी केंद्र सरकार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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