<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Ashwani khud Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/ashwani-khud/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/ashwani-khud/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Wed, 16 Mar 2016 04:05:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>Ashwani khud Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/ashwani-khud/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>शिमला शहर में जल  संकट गहराया, फिर भी नगर निगम  कर रहा पर्याप्त मात्रा में पानी होने का दावा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/water-crisis-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:35:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Annandale Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Deputy Mayor Tikender]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Vidhan Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly Session 2016]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Water Shortage]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4028</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र वीरवार को शुरू हो गया, लेकिन वहीं शहर की जनता पानी के लिए तरसना शुरू हो गई है। नगर निगम ने विधानसभा में पानी आपूर्ति करने की आड़ में लोगों को पानी की आपूर्ति नहीं की। अन्नाडेल क्षेत्र में आपूर्ति नहीं हो पाई। जब निगम प्रशासन से संपर्क किया तो [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/water-crisis-in-shimla/">शिमला शहर में जल  संकट गहराया, फिर भी नगर निगम  कर रहा पर्याप्त मात्रा में पानी होने का दावा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र वीरवार को शुरू हो गया, लेकिन वहीं शहर की जनता पानी के लिए तरसना शुरू हो गई है। नगर निगम ने विधानसभा में पानी आपूर्ति करने की आड़ में लोगों को पानी की आपूर्ति नहीं की। अन्नाडेल क्षेत्र में आपूर्ति नहीं हो पाई। जब निगम प्रशासन से संपर्क किया तो बार-बार आश्वासन दिया जाता रहा, मगर शाम तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई।</p>
<p>शहर में पहले ही जल संकट गहराया हुआ है। अब विधानसभा के चलने के कारण लोगों को प्यासा रहना पड़ रहा है। एक माह तक विधानसभा शिमला में चलेगी। ऐसे में लोगों को सुचारू पानी की आपूर्ति कम हो पाएगी। अश्वनी खड्ड से आपूर्ति बंद होने के कारण शहर भर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है। नगर निगम का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में पानी है जबकि हकीकत में इसके विपरीत है।</p>
<p><strong>पेयजल के लिए तरस रहे लोग</strong></p>
<p>राजधानी शिमला के उपनगरों में आजकल लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। लोगों को चौथे दिन भी पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। उपनगर संजौली, ढली, भट्टा कुफर व कई क्षेत्रों के लोगों को पानी के लिए बावड़ियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, या फिर वाहनों के माध्यम से टैंकों से पानी लाना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि यदि पीने के पानी की अभी यह समस्या आ रही है तो सर्दियों में और दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।</p>
<blockquote><p>मुझे इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। नगर निगम के पास पर्याप्त मात्रा में पानी का भंडारण है।</p></blockquote>
<p>टिकेंद्र पंवर, उपमहापौर, नगर निगम</p>
<p><strong>रात तक नहीं हुई पानी की आपूर्ति</strong></p>
<blockquote><p>पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई, जब नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क किया तो बार-बार आश्वासन दे रहे थे कि कुछ ही मिनटों में पानी आ जाएगा। लेकिन रात तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई।</p></blockquote>
<p>`प्रदीप कश्यप, मंडलाध्यक्ष, भाजपा।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/water-crisis-in-shimla/">शिमला शहर में जल  संकट गहराया, फिर भी नगर निगम  कर रहा पर्याप्त मात्रा में पानी होने का दावा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:05:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[HP Pollution control board]]></category>
		<category><![CDATA[Justice Trilok Singh Chauhan]]></category>
		<category><![CDATA[Mansoor Ahmad Mir]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Police SIT]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4039</guid>

					<description><![CDATA[<p>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/">गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पीलिया मामले में अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसमें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला है। उनके खिलाफ केस चलना चाहिए। राज्य सरकार को पीलिया के कारण मौत के मुंह में समाए लोगों के परिजनों को अंतरिम राहत के तौर पर दो-दो लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पीलिया मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए कोर्ट को गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को दंडित करने के उद्देश्य से अलग-अलग मामले चलाने के भी आदेश पारित किए।</p>
<p><strong>एसआईटी रिपोर्ट में खामियां</strong></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले की जांच में जुटी एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूषित पानी पिलाने के गुनहगार अधिकारी कौन हैं। कोर्ट ने खेद जताया कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है या नहीं।</p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पानी चेक करते थे और उच्चाधिकारियों की पानी जांचने में कोई रुचि ही नहीं थी। नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने भी पानी जांचने की जहमत नहीं उठाई।</p>
<p><strong>ठेकेदार की पेमेंट रोकी</strong></p>
<p>कोर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की देखरेख के लिए रखे गए ठेकेदार अक्षय डोगर को 31 जनवरी तक जारी की जाने वाली बकाया राशि 99 लाख 45 हजार के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>कोर्ट ने नई स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में बताएं। पीलिया से मरने वाले और अन्य पीड़ितों का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है या नहीं। प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वे जनसाधारण को पीलिया के बारे में जागरूक करें व इससे बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्राथमिक शिक्षा से विश्वविद्यालय के छात्रों को स्वच्छ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करंे। प्रदेश में पर्याप्त स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्थान गठित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।</p>
<p><strong>सचिव साथियों को बचाने के लिए कोर्ट को कर रही गुमराह</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर को झूठा वक्तव्य देने का दोषी पाते हुए पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ गलत और विरोधाभासी वक्तव्य सामने रखने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाए। कोर्ट ने आशंका जाहिर की कि सचिव या तो अपने पुराने सहयोगियों, अधीनस्थ अधिकारियों को बचाने एवं उनके हक में मामला तैयार करने की कोशिश कर रहीं हैं या फिर कोर्ट को पूरी तरह गुमराह करने का प्रयत्न कर रही हैं। कोर्ट ने अधिकारी के वक्तव्य में पाया कि एक तरफ वह कह रही हैं कि अश्वनी खड्ड के बारे में कोर्ट की ओर से पारित पिछले आदेशों की अनुपालना की जाती रही और दूसरी तरफ कहती हैं कि अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट करने के बाद प्लांट का उचित ढंग से रखरखाव नहीं किया जा रहा था इसलिए सप्लाई गंदी होने के कारण प्लांट को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>सचिव प्रदूषण बोर्ड ने समय पर नहीं दी अश्वनी खड्ड की रिपोर्ट</strong></strong></p>
<p>कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार पर भी ऐसे ही मामले चलाने के आदेश दिए। बोर्ड के सदस्य सचिव ने कोर्ट के आदेशानुसार अश्वनी खड्ड संबंधित रिपोर्ट हर तीन माह में कोर्ट में पेश नहीं की।</p>
<p>उन्होंने 18 सितंबर 2014 के बाद केवल एक बार रिपोर्ट पेश की, वो भी झूठी और गुमराह करने वाली पाई गई। कोर्ट ने अन्य अधिकारियों को भी अवमानना का दोषी पाया है, जिन्हें शिमला शहर में शुद्ध व पर्याप्त पानी वितरण करने के लिए समय-समय पर कोर्ट ने आवश्यक आदेश दिए थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>कोर्ट ने महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह तीन दिन के भीतर ऐसे अधिकारियों के नाम अदालत को बताएं ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जा सके।</p>
<p> <strong>दर्जनों अधिकारी बनाए प्रतिवादी</strong></p>
<p>कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें मुख्य सचिव सहित शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को भी प्रतिवादी बनाया। वहीं जन संपर्क विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सभी जिला दंडाधिकारी, सभी पुलिस अधीक्षक और सभी सीएमओ को भी प्रतिवादी बनाया है।</p>
<p><strong>आईपीएच में इन्हें नोटिस</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर सुमन विक्रांत, सुनील जस्टा को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाए और क्यों न उनके खिलाफ झूठे हल्फनामे दायर करने के आरोप के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p> strong>सीएस आैर सचिव आईपीएच से 2007 से अब तक की रिपोर्ट तलब</strong></p>
<p>मुख्य सचिव व सचिव आईपीएच से कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि कौन से अधिकारी वर्ष 2007 से आईपीएच विभाग में स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। मुख्य अभियंता से चपरासी तक का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>ठेकेदार को हस्तांतरित धन, प्रक्रिया तथा उसके बिल पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/">गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से सिर्फ 5 मौतें और 680 हेपेटाईटिस ई मामले : कौल सिंह</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/jaundice-deaths-in-shimla-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Feb 2016 12:15:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh secretariat]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Vidhan Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Minister]]></category>
		<category><![CDATA[ICMR]]></category>
		<category><![CDATA[Kaul Singh]]></category>
		<category><![CDATA[NIV Pune]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3993</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया के प्रकोप से हर कोई सन है मगर सरकारी रिकॉर्ड में अभी तक पीलिया से पांच मौतों का ही रिकॉर्ड दुरुस्त है, बाकि आठ मौतें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग के पास आई हैं, उन पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि वे किसी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/jaundice-deaths-in-shimla-2/">सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से सिर्फ 5 मौतें और 680 हेपेटाईटिस ई मामले : कौल सिंह</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में पीलिया के प्रकोप से हर कोई सन है मगर सरकारी रिकॉर्ड में अभी तक पीलिया से पांच मौतों का ही रिकॉर्ड दुरुस्त है, बाकि आठ मौतें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग के पास आई हैं, उन पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि वे किसी अन्य कारण से मरे हैं। एक्यूट क्रोनिक लिवर व हार्ट फेलियर इनकी मौत का कारण माना है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने अपने अधिकारियों की टीम के साथ बुधवार को हाई पावर कमेटी की समीक्षा बैठक में हवाला देते हुए पुष्टि की है कि पीलिया यानि हेपेटाइटिस ई से पांच मौतें हुई हैं, बाकि तो ऐसे मामलों की मौतें हुई हैं, जो दस या इससे अधिक सालों से बीमार रहे हैं। इनमें से कई अस्थमेटिक भी रहे हैं। यहीं नहीं अभी तक पीलिया के 1500 मामले नहीं, अपितु 680 मामले ही हेपेटाईटिस ई से ग्रस्त पाए गए हैं। 1500 तो पीलिया के लिए पॉजीटिव आए हैं।</p>
<p>बीते एक दिन पहले आयोजित पीलिया की निगरानी और इंतजामों को लेकर सचिवालय में हुई बैठक की जानकारी देते हुए कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2007 के बाद वर्ष 2010 में पीलिया का प्रकोप शिमला में रहा है। विधानसभा में ये मामले गूंजे थे। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तक सदन में पेश किए थे। अश्वनी खड्ड के गंदे पानी से फैले पीलिया पर सरकार ने नियंत्रण कर लिया हैं।</p>
<p>शिमला में हाइली कंटेमिनेटिड पानी से पीलिया फैला है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से 70 लाख रुपये स्टडी के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला में विशेष अत्याधुनिक लैब खोली जाएगी। आगामी छह माह के भीतर लैब तैयार होगी और पीलिया पर इससे स्टडी होगी। पूणे एनआईवी ने भी रिपोर्ट भेजी है, उसके मुताबिक निगरानी की जा रही है।</p>
<p>प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से ये हुई हैं मौतें बाकि अन्य मौतों के कारण भी बता रहा है विभाग।</p>
<p><strong>पता उम्र कौन डायग्नोसिस कब मौत</strong></p>
<p><strong><strong>विकासनगर 43 महिला अनियंत्रित मधुमेह 26 दिसंबर</strong></p>
<p><strong>शिमला 1 महिला एआरडीएस 14 जनवरी</strong></p>
<p> <strong>शिमला 62 पुरुष एल्कोहलिक सिरोसिस 16 जनवरी</strong></p>
<p><strong>छोटा शिमला 29 महिला हेपेटाईटिस ई 12 जनवरी</strong></p>
<p><strong>मंडी मानवा 23 महिला हेपेटाईटिस ई 19 जनवरी</strong></p>
<p><strong>संजौली 25 महिला हेपेटाईटिस ई 18 फरवरी</strong></p>
<p><strong>खलिनी 74 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 19 फरवरी</strong></p>
<p><strong>शिमला 61 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 8 फरवरी</strong></p>
<p><strong> शिमला 58 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 20 फरवरी</strong></p>
<p><strong> कांगड़ा 36 महिला क्रोनिक लिवर फेलियर 7 फरवरी</strong></p>
<p><strong>कांगड़ा 52 पुरुष हेपेटाईटिस ई 15 जनवरी</strong></p>
<p><strong> बलोह 55 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 20 फरवरी</strong></p>
<p><strong>बिलासपुर 43 पुरुष हेपेटाईटिस ई 19 फरवरी</strong></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/jaundice-deaths-in-shimla-2/">सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से सिर्फ 5 मौतें और 680 हेपेटाईटिस ई मामले : कौल सिंह</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Feb 2016 11:11:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[Sangti Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla MC]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Hill]]></category>
		<category><![CDATA[Water Shortage]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=4001</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के उपनगरों में लोगों को पेयजल की समस्या के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन बाद पेयजल सप्लाई हो रहा है। गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन लोगों को पेयजल की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। उपनगर टुटू, समरहिल, बालूगंज और विकासनगर के लोग पानी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/">शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> राजधानी शिमला के उपनगरों में लोगों को पेयजल की समस्या के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन बाद पेयजल सप्लाई हो रहा है। गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन लोगों को पेयजल की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। उपनगर टुटू, समरहिल, बालूगंज और विकासनगर के लोग पानी के लिए या तो बावड़ियों पर निर्भर हैं या फिर निजी वाहनों से पानी मंगवा रहे हैं। </p>
<p>लोगों ने कहा कि सर्दी में ही पानी की समस्या है तो गर्मियों में उन्हें पानी की समस्या से खासी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अश्वनी खड्ड से पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों में शिमला शहर के लिए जल आपूर्ति करने वाली योजनाओं में पानी कम हो जाता है। पर्याप्त बर्फबारी और बारिश न होने के कारण प्राकृतिक जल स्द्दोतों में भी पानी जमा नहीं सका है। इस कारण गर्मियों में और भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>शिकायत करने पर भी नहीं हो रही कार्रवाई</strong></p>
<p>समरहिल के साथ लगते सांगटी क्षेत्र में भी पेयजल की बहुत कम मात्रा में सप्लाई हो रही है। लोगों ने कहा कि वह बावड़ी से पानी लाने के मजबूर हैं। बावड़ी का पानी पीने से पीलिया जैसी बीमारी के लिए खतरा बना हुआ है। रामपाल ने बताया कि उन्हें तीन दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है लेकिन सिर्फ दो बाल्टियां ही पीने का पानी उन्हें उपलब्ध होता है। उन्होंने आईपीएच विभाग में शिकायत भी की है, लेकिन समस्या वैसी ही बनी हुई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/">शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Feb 2016 06:11:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[DW Negi]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[HP Pollution control board]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Police]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Police SIT]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[SP Shimla]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3923</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/">सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। </p>
<p>शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे मामले में एसआईटी के सामने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पीने के पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी सितंबर माह में एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। बोर्ड के इस जवाब से साफ हो गया है कि शहर में पीलिया फैलने से रुक सकता था और लगातार मौतें नहीं होतीं।</p>
<p>बोर्ड के इन दस्तावेजों के पेश करने पर एमसी और आईपीएच के कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई की संभावना अब और बढ़ गई है। 22 फरवरी के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। पीलिया मामले में गठित एसआईटी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सितंबर महीने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पीने के पानी में क्लोफॉम होने की लिखित सूचना नगर निगम और आईपीएच महकमे को दे दी गई थी।</p>
<p>इस रिपोर्ट से साफ था कि शहर में लोगों को पीने के लिए दूषित पानी की सप्लाई की गई। पानी के सैंपल कसुम्पटी स्थित आईपीएच के टैंक और संजौली से लिए गए थे। इस मामले में एसआईटी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। यह सनसनीखेज खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन और एसडीओ ने एसआईटी के समक्ष किया है। अपने दावे को मजबूत करने के लिए दस्तावेज भी पेश किए हैं।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एसआईटी के सामने तथ्य पेश करते हुए कहा कि जुलाई महीने में कसुम्पटी स्थित पानी के टैंक से सैंपल लिया गया। यह पानी अश्वनी खड्ड से ट्रीटमेंट के बाद टैंक में आता है। संजौली में भी पानी का सैंपल लिया गया, यहां पानी गिरी परियोजना से आता है। दोनों सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए वहां से उन्हें सितंबर में रिपोर्ट मिली।</p>
<p><strong>आईपीएच की हां, नगर निगम की ना</strong></p>
<p>आईपीएच ने माना कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उन्हें सूचना मिली थी और टेस्ट भी करवाए थे जो ठीक निकले। उधर, नगर निगम ने एसआईटी को लिखित में जवाब दिया कि उन्हें यह सूचना मिली ही नहीं है उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद अब एसआईटी हर पहलू पर जांच कर रही है।</p>
<p><strong>22 फरवरी को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई</strong></p>
<p>इस तरह के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय में साल 2007 और साल 2014 में भी जनहित याचिका दायर हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया है। इसके बाद साल 2015 में एक और जनहित याचिका दाखिल हुई है जिस पर सुनवाई चल रही है।</p>
<p>प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों की कितनी अनुपालना की गई और क्या उस दिशा में भी एसआईटी जांच कर रही है इस बारे में पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया गया है। 22 फरवरी को प्रदेश उच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़े केस की सुनवाई होगी और पुलिस प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।</p>
<p><strong>स्लज उठाने वाले ठेकेदार से पूछताछ </strong></p>
<p>सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई। इस ठेकेदार के पास कब से कब तक ठेका था इसकी जानकारी ली गई। ठेकेदार कैसे स्लज उठाता था और आईपीएच के साथ उसका क्या करार था, इन बिंदुओं पर पूछताछ हुई। ठेकेदार को एसआईटी ने फिर से पूछताछ के लिए बुलाया है। </p>
<p><strong>बोर्ड से अफसरों से हुई पूछताछ:नेगी</strong></p>
<p>एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ हुई है। सीवेज ट्रूीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम और आईपीएच से भी जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/">सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पीलिया से 16 लोगों की मौत, पर सरकार के लिए आंकड़ा सिर्फ 4 और शिमला पीलिया मुक्त</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/21/shimla-jaundice-kills-16-people-but-government-record-shows-only-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Feb 2016 08:27:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice deaths Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Epidemic]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3919</guid>

					<description><![CDATA[<p>बीते दिन भी शिमला में रह रहे एक अन्य वकील राकेश चंदेल की पीजीआई में पीलिया से मौत हो गई थी। महिला वकील सुप्रिया जमालटा की मौत भी पीलिया की वजह से आईजीएमसी में हो चुकी है। शुक्रवार रात करीब 11.25 बजे राजधानी के खलीनी के दुकानदार ओमकार की भी पीलिया की वजह से मौत [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/21/shimla-jaundice-kills-16-people-but-government-record-shows-only-4/">पीलिया से 16 लोगों की मौत, पर सरकार के लिए आंकड़ा सिर्फ 4 और शिमला पीलिया मुक्त</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीते दिन भी शिमला में रह रहे एक अन्य वकील राकेश चंदेल की पीजीआई में पीलिया से मौत हो गई थी। महिला वकील सुप्रिया जमालटा की मौत भी पीलिया की वजह से आईजीएमसी में हो चुकी है। शुक्रवार रात करीब 11.25 बजे राजधानी के खलीनी के दुकानदार ओमकार की भी पीलिया की वजह से मौत हो गई।</strong></p>
<p>शिमला -हिमाचल सरकार भले ही राजधानी शिमला के पीलिया मुक्त होने के दावे कर रही  हो, लेकिन शहर के ही एक और वरिष्ठ वकील और एक कारोबारी की पीलिया से मौत हो गई। सूबे में पीलिया से अब तक करीब 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि विभाग के पास 4 लोगों का ही आंकड़ा है।</p>
<p>राजधानी शिमला में पीलिया से 3 वकीलों की ही जान जा चुकी है। शनिवार को एक ही दिन दो लोगों की मौत हड़कंप मच गया है। इसके अलावा हजारों की तादाद में लोग पीलिया से पीडि़त हैं। शिमला और सोलन में अभी भी रोजाना पीलिया के दर्जनों मामले आ रहे हैं।</p>
<p>हिमाचल हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील जगदीश वत्स को पीलिया होने पर आईजीएमसी में उपचार के लिए ले जाया गया। गंभीर हालत में उन्हें 17 फरवरी को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।</p>
<p>बीते दिन भी शिमला में रह रहे एक अन्य वकील राकेश चंदेल की पीजीआई में पीलिया से मौत हो गई थी। महिला वकील सुप्रिया जमालटा की मौत भी पीलिया की वजह से आईजीएमसी में हो चुकी है। शुक्रवार रात करीब 11.25 बजे राजधानी के खलीनी के दुकानदार ओमकार की भी पीलिया की वजह से मौत हो गई।</p>
<p>इन्हें आईजीएमसी में भर्ती कराया गया था। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश का कहना है कि खलीनी के दुकानदार की मौत पीलिया से हुई है। वकील जगदीश वत्स को गंभीर हालत में आईजीएमसी से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया था, जहां उनकी मौत हो गई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/21/shimla-jaundice-kills-16-people-but-government-record-shows-only-4/">पीलिया से 16 लोगों की मौत, पर सरकार के लिए आंकड़ा सिर्फ 4 और शिमला पीलिया मुक्त</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी शिमला में बच्ची को जन्म देने के बाद पीलिया से महिला की मौत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/19/jaundice-death-in-shimla-igmc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Feb 2016 05:16:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Hepatitis B]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Outbreak Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Cases]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3832</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला -शिमला में पीलिया से वीरवार को एक और मौत हो गई। आईजीएमसी में संजौली की प्रसूता ने दम तोड़ दिया। तीन दिन पहले ही महिला को यहां भर्ती किया गया था। इसकी उम्र 25 साल थी। रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला हेपेटाइटिस ए और ई से पीड़ित थी। महिला ने कमला नेहरू [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/19/jaundice-death-in-shimla-igmc/">आईजीएमसी शिमला में बच्ची को जन्म देने के बाद पीलिया से महिला की मौत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला -शिमला में पीलिया से वीरवार को एक और मौत हो गई। आईजीएमसी में संजौली की प्रसूता ने दम तोड़ दिया। तीन दिन पहले ही महिला को यहां भर्ती किया गया था। इसकी उम्र 25 साल थी। रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला हेपेटाइटिस ए और ई से पीड़ित थी।</p>
<p>महिला ने कमला नेहरू अस्पताल में 13 फरवरी को बच्ची को जन्म दिया। दो दिन बाद ही यह पीलिया की चपेट में आ गई। उसे केएनएच से आईजीएमसी उपचार के लिए भेज दिया गया। 15 फरवरी को संजौली की सुप्रिया को आईजीएमसी में भर्ती किया गया।</p>
<p>इसे स्पेशल वार्ड में रखा गया था, लेकिन इसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। इसके बाद इसे हाइडिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में शिफ्ट किया गया। यहां दो दिन महिला को वेंटीलेंटर पर रखा गया था। बुधवार रात को महिला की तबीयत और बिगड़ गई। चिकित्सकों ने इसे आईसीयू में शिफ्ट किया।</p>
<p>वीरवार को भी महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और इसने दम तोड़ दिया। प्रदेश में पीलिया से मौत का आंकड़ा काफी बताया जा रहा है। हालांकि, विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक पीलिया से तीन मौतें हुई हैं।</p>
<p>स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डॉ. राकेश रोशन भारद्वाज का कहना है कि पीलिया से यह तीसरी मौत है। इससे पहले पीलिया से दो मौतें हो चुकी हैं।</p>
<p><em>Image: File Photo KNH/Himachal Watcher</em></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/19/jaundice-death-in-shimla-igmc/">आईजीएमसी शिमला में बच्ची को जन्म देने के बाद पीलिया से महिला की मौत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिमला में पानी की सप्लाई बंद, लोग तंग, चार या पांच दिन के बाद हो रही पानी की सप्लाई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-water-shortage-2016/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 13:30:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla MC]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3676</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला-  शिमला में पानी की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद शिमला के कई क्षेत्रों में चार या पांच दिन के बाद पानी की सप्लाई हो रही है। इस कारण लोगों को निजी टैंक मंगवाने पड़ रहे हैं लेकिन नगर निगम कोई [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-water-shortage-2016/">शिमला में पानी की सप्लाई बंद, लोग तंग, चार या पांच दिन के बाद हो रही पानी की सप्लाई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला-  शिमला में पानी की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद शिमला के कई क्षेत्रों में चार या पांच दिन के बाद पानी की सप्लाई हो रही है। इस कारण लोगों को निजी टैंक मंगवाने पड़ रहे हैं लेकिन नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विकासनगर, मल्याणा, खलीनी, पंथाघाटी, मैहली व बीसीएस आदि क्षेत्रों में पेयजल की काफी दिक्कत हो गई है।</p>
<p>विकासनगर के लोगों ने कहा कि जब से अश्वनी खड्ड के अशुद्ध पानी का मामला सामने आया है तब तक समस्याएं कम होने की बजाय बढ़ गई हैं। सुमन ठाकुर ने बताया कि नगर निगम ने पहले लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब लोगों को पानी के लिए तरसा रहा है। फरवरी से ही पानी की समस्याएं शुरू हो गई हैं और मिनरल वाटर से गुजारा करना पड़ रहा है।</p>
<p>इसके अलावा कई क्षेत्रों में तो खरीदकर भी पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अंजू शर्मा, रोशन लाल, रीता देवी ने नगर निगम से मांग की है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला तो सड़क पर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-water-shortage-2016/">शिमला में पानी की सप्लाई बंद, लोग तंग, चार या पांच दिन के बाद हो रही पानी की सप्लाई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिमला में पीलिया का प्रकोप जारी प्रतिदिन आ रहे 25 मामले, सोलन व मंडी में भी गिरफ्त में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/jaundice-cases-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Feb 2016 10:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Beas River]]></category>
		<category><![CDATA[HP Heath Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Manali Chandigarh Highway]]></category>
		<category><![CDATA[National Health Mission]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla MC]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3618</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला-  प्रदेश में हुई बर्फबारी और बारिश से बागवानों व किसानों को भले राहत मिली है मगर पीलिया के वायरस पर तापमान में कमी के कारण कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस कम तापमान में अधिक फैलता है और उच्च तापमान का प्रभाव इस पर सीधा पड़ता है। लिहाजा बारिश और बर्फबारी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/jaundice-cases-in-shimla/">शिमला में पीलिया का प्रकोप जारी प्रतिदिन आ रहे 25 मामले, सोलन व मंडी में भी गिरफ्त में</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश में हुई बर्फबारी और बारिश से बागवानों व किसानों को भले राहत मिली है मगर पीलिया के वायरस पर तापमान में कमी के कारण कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस कम तापमान में अधिक फैलता है और उच्च तापमान का प्रभाव इस पर सीधा पड़ता है। लिहाजा बारिश और बर्फबारी के बीच लोगों को सेहत संभालने की अधिक आवश्यकता है। एहतियात के तौर पर जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे फिलहाल बनाए रखें।</p>
<p>आईजीएमसी अस्पताल शिमला के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कांगा ने कहा कि लोग पीलिया के प्रबंधों पर सुस्त न हों। प्रदेश में अब तक स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पीलिया पीड़ितों की संख्या 1300 के पार हो गई है। प्रतिदिन अब 25 के आसपास मामले अकेले शिमला से सामने आ रहे हैं। दूसरे जिले सोलन व मंडी में भी पीलिया का प्रकोप जारी है। श्वास से संबंधित बीमारियों पर ही मौसम को लेकर असर पड़ता है। गला खराब, बुखार व जुकाम बीमारियां ही मौसम के बरसने से खत्म होती हैं मगर पीलिया पर लगाम इसके परिणामस्वरूप नहीं लगेगी।</p>
<p><strong>संभल कर रहें लोग</strong></p>
<p>स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि इस मौसम की कोई गारंटी नहीं है कि पीलिया का वायरस नष्ट हो जाएगा। इस मौसम का पीलिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए लोग संभल कर रहें।</p>
<h3>ब्यास में घूल रही डंपिंग साइट की गंदगी</h3>
<p>मनाली चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंडी शहर से करीब चार किलोमीटर दूर क्वारी से एक संपर्क मार्ग मंडी नगर परिषद की <strong>डंपिंग</strong> साइट की ओर जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 50 मीटर ऊपर की ओर यह साइट स्थित है। साइट में तीन ओर पहाड़ हैं। जबकि चौथी दिशा ब्यास नदी की ओर खुलती है। पिछले करीब दो दशक से इस जगह पर नगर परिषद की ओर से एकत्र की जाने वाली गंदगी खुले क्षेत्र में फेंक दी जाती है। इस गंदगी को अकसर नगर परिषद की ओर से आग लगा दी जाती है।</p>
<p>इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को विषैले धुंए का कोप भाजन बनना पड़ता है। <strong>डंपिंग</strong> साइट में सभी तरह का कूड़ा कर्कट फेंका जाता है। इसमें एक्सपायर दवाइयां भी शामिल रहती हैं। कई बार मृत पशु भी यहीं फेंक दिए जाते हैं। अकसर यहां पर लावारिस पशु गंदगी में जुगाली करते देखे जा सकते हैं। गर्मियों में यहां से उठने वाली दुर्गंध राष्ट्रीय राजमार्ग व नजदीकी गांवों तक फैल जाती है। यहां से गुजरते समय जब दुर्गंध के झोंकों की मार सहनी पड़ती है तब इसका अहसास होता है कि नजदीक ही डं¨पग साइट है।</p>
<p>बारिश में साइट के तीन ओर स्थित पहाड़ों की ढलानों के पानी का प्रवाह नाला बनकर साइट में आता है और वहां पड़ी सभी तरह की गंदगी को एक नाली के रास्ते से ब्यास नदीं में धकेल देता है। <strong>डंपिंग </strong>साइट से कितनी ज्यादा गंदगी ब्यास नदी में पहुंचती है इसका अनुमान उस नाली को देखकर लगाया जा सकता है जो गंदगी के अरक से पीले रंग की हो गई है। यही गंदगी ब्यास नदी में मिल कर इसकी धारा को जहरीला बना देती है।</p>
<p>कुछ दूरी के बाद ब्यास का यही पानी मंडी शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए लिफ्ट किया जाता है। जिसे आईपीएच विभाग की ओर से मंडी के घर-घर में नलों के माध्यम से लोगों को मुहैया करवाया जाता है। कमोवेश यही स्थिति सुंदरनगर में हैं। यहां चांदपुर की डं¨पग साइट भी पूरी तरह से लबालब भर चुकी है। <strong>डंपिंग</strong> साइट की गंदगी सीधे सुकेती ख्खड्ड में जाकर मिल रही है।</p>
<h3>क्या कहना है नगर परिषद का</h3>
<p>नगर परिषद मंडी व सुंदरनगर की कार्यकारी अधिकारी उर्वशी वालिया का कहना है कि <strong>डंपिंग</strong> साइट से गारबेज का पानी ब्यास नदी में नहीं जाता बल्कि वहां स्थित एक पानी के सोर्स से नाली में पानी जाता है। <strong>डंपिंग</strong> साइट में लावारिस पशु न जाएं इसके लिए यहां पर फेंसिंग करवाई जा रही है और साइट को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यहां पर प्लेटफार्म और एंटी ली¨चग चेंबर बनाए गए हैं। <strong>डंपिंग </strong> साइट के चारों ओर नाली बनाई गई है। ब्यास नदी में जाने वाली गंदगी को रोकने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>डंपिंग साइट से गंदगी का हो रहा रिसाव</strong></p>
<p>मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष  का कहना है कि डंपिंग साइट से गंदगी का रिसाव लगातार जारी रहता है, जो नाली से बहकर सारा साल ब्यास में मिलता है। इससे ब्यास दूषित हो रही है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/jaundice-cases-in-shimla/">शिमला में पीलिया का प्रकोप जारी प्रतिदिन आ रहे 25 मामले, सोलन व मंडी में भी गिरफ्त में</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिमला शहर में सभी 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब, नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए थे प्लांट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/sewage-treatment-plansts-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Feb 2016 08:02:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[himachal town country planing department]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH Deaprtment]]></category>
		<category><![CDATA[HP TCP Minister]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Sewage treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Police]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=3583</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला-  प्रदेश सरकार ने माना है कि शिमला शहर में सभी छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम के नहीं रहे हैं। सरकार ने सभी प्लांटों को नकारा घोषित कर दिया है। इन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से शहर की जरूरत पूरी नहीं हो सकती है। पीलिया के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने नगर निगम शिमला को [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/sewage-treatment-plansts-in-shimla/">शिमला शहर में सभी 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब, नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए थे प्लांट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश सरकार ने माना है कि शिमला शहर में सभी छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम के नहीं रहे हैं। सरकार ने सभी प्लांटों को नकारा घोषित कर दिया है। इन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से शहर की जरूरत पूरी नहीं हो सकती है।</p>
<p>पीलिया के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने नगर निगम शिमला को सुझाव दिया है कि शीघ्र नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजे। सरकार नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए राशि देने को तैयार है।</p>
<p>शहरी विकास विभाग की ओर से नगर निगम प्रशासन को आधुनिक तकनीक के दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए लिखा गया है। नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की सुविधा प्रदेश के सभी जिलों को भी मिलेगी। इस संबंध में जिला उपायुक्तों को पत्र लिखा गया है।</p>
<p>सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक कोई विशेष नीति नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार इन प्लांटों से अभी तक 13.8 प्रतिशत सीवरेज ही ट्रीट होता रहा है। अब महज एक तिहाई सीवरेज ट्रीट हो रहा है। मल्याणा का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नियमों के विपरीत बनाया गया था।</p>
<p>किसी भी पेयजल योजना के ठीक ऊपर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सकता है। शिमला शहर में सभी नियमों को ताक पर रखकर प्लांट लगाए गए थे। नगर निगम ने शहर की सीवरेज व पेयजल समस्या को दूर करने के लिए अमृत योजना के तहत प्रस्ताव तैयार नहीं किया।</p>
<p>शहर के नए क्षेत्रों को ही इसमें शामिल किया गया है। अमृत योजना सीवरेज व पेयजल के लिए विशेष तौर पर बनाई गई है जिसके तहत नगर निगम जितना चाहे बजट प्राप्त कर सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना जरूरी है।</p>
<p>जहां तक शिमला शहर की पेयजल समस्या दूर करने का सवाल है तो केंद्र सरकार ने कोल डैम से शिमला पेयजल लाने का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया है।</p>
<p><strong>शिमला में सीवरेज प्लांट</strong></p>
<p><strong>एसटीपी क्षमता</strong></p>
<p><strong>लालपानी-बड़ागांव 19.35 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>संजौली मल्याणा 4.4 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>ढ़ली बढ़ैया 0.76एमएलडी</strong></p>
<p><strong>नोर्थ डिस्पोजल गोल्छा अनोडेल 5.80 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>समर हिल्ल गड़ोग 3.93 एमएलडी</strong></p>
<p><strong>निगम को लिखा है पत्र</strong></p>
<p>नगर निगम शिमला को अवगत करवाया है कि आधुनिक तकनीक के नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेंजें। इस संबंध में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने निगम को पत्र लिख दिया है। मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की हालत को देखते हुए अधिक काम लेना संभव नहीं है।</p>
<p>सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री।</p>
<p>Photo/Representational image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/sewage-treatment-plansts-in-shimla/">शिमला शहर में सभी 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब, नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए थे प्लांट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
