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	<title>संजय चौहान Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>संजय चौहान Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>नगर निगम के बजट से पता चल रहा है भाजपा का विफल कार्यकाल:सीपीएम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/25/shimla-mc-budget-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Feb 2022 14:45:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला बजट 2022-23]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला शहर]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- नगर निगम शिमला ने आज अपना वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पास किया गया। इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे विफल बताया है। कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कमेटी ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम ने अंतिम बजट वर्ष 2022-23 का जो पेश किया गया है वह भाजपा के ट्रिपल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> नगर निगम शिमला ने आज अपना वित्त वर्ष  2022-23 का बजट पास किया गया। इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे विफल बताया है। </p>
<p>कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कमेटी ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम ने अंतिम बजट वर्ष 2022-23 का जो पेश किया गया है वह भाजपा के ट्रिपल इंजन के पांच वर्ष के कार्यकाल की विफलता को उजागर करता है। </p>
<p>जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि इस बजट में स्पष्ट है कि न तो पांच वर्ष के कार्यकाल में भाजपा कोई नई परियोजना शिमला शहर के लिए ला पाई है और न ही पूर्व नगर निगम की स्वीकृत व चलाई जा रही परियोजनाओं को पूर्ण कर पाई है। </p>
<p>पांच वर्ष के कार्यकाल में भाजपा ने अपने संसाधनों के निजीकरण व जनता पर टैक्स बढ़ाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किया है। </p>
<p>इन पांच वर्षों में कूड़ा उठाने की फीस में 100 प्रतिशत से अधिक, पेयजल की दरों में 70 से 200 प्रतिशत से अधिक, इसके अतिरिक्त अन्य आवश्यक सेवाओं, प्रॉपर्टी टैक्स व दुकानों के किराए में वृद्धि की गई है। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता पर भारी भरकम टैक्स का बोझ डालने के बावजूद नगर निगम अपनी आय बढ़ाने में पूरी तरह से विफल रही है। अगर इस बजट में देखें तो गत वर्ष की तुलना में आय में स्पष्ट कमी आई है। </p>
<p>इस बजट में गत वर्ष की तुलना में 7158.13 लाख रुपए की कमी स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वर्तमान भाजपा की नगर निगम शहर के विकास में पूर्णतः विफल रही है। </p>
<p>जिला कमेटी ने कहा कि इस बजट में स्पष्ट रूप से शहर के विधायक व शहरी विकास मंत्री की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है। न तो कोई नई परियोजना शहर के लिए ला पाए और न ही अपनी विधायक निधि को शहर के विकास के लिए उचित रूप से इस्तेमाल किया है। नगर निगम को मात्र 16.50 लाख रुपए ही विधायक निधि से नगर निगम को विकास कार्यों हेतू दिए गए हैं।</p>
<p>कमेटी ने कहा कि नगर निगम के इस  बजट में केवल सीपीएम के नेतृत्व में पूर्व नगर निगम शिमला के द्वारा 2012 से 2017 तक अपने कार्यकाल में जो करोड़ों रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई थी केवल इन्हीं का व्याख्यान किया गया है। </p>
<p>इनमें मुख्य रूप से 2906 करोड़ रुपए की स्मार्ट सिटी, 125 मिलियन डॉलर(950 करोड़ रुपए) की विश्व बैंक की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था के जीर्णोद्धार, 243 करोड़ रुपए की अम्रुत, 200 करोड़ रुपए की टूटीकंडी से मालरोड की रोपेव, 66 करोड़ रुपए की शिमला शहर की सौंदर्यीकरण, 33 करोड़ रुपए की शहरी गरीब के लिए आवास, 29 करोड़ रुपए की लागत से टूटू व 10करोड़ रुपए की लागत से पंथाघाटी व मेहली के लिए सीवरेज प्लांट, 4.5 करोड़ रुपए तहबाजारी के लिये लिफ्ट के पास आजीविका भवन, 4 लेबर होस्टल का निर्माण, दाड़नी के बगीचा में सब्ज़ी मंडी का निर्माण, 5 करोड़ रुपए से कार्ट रोड को चौड़ा करने, आई जी एम सी में पार्किंग व लिफ्ट तथा इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करोड़ो रूपये की पार्किंग व पार्कों के निर्माण की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई गई व इसका निर्माण आंरभ किया गया था। </p>
<p>जिला सचिव ने बताया कि बजट दस्तावेज में केवल इन्हीं परियोजनाओं को दर्शाया गया है इससे स्पष्ट है कि गत पांच वर्ष के कार्यकाल में नगर निगम कोई भी कार्य विकास नहीं कर पाई है। बजट में किये गए स्मार्ट सिटी व अन्य परियोजनाओं के व्याख्यान से स्पष्ट है कि आपने 5 वर्ष के कार्यकाल में  नगर निगम इन परियोजनाओं को गति नहीं दे पाई है। </p>
<p>उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना का अभी तक केवल सात प्रतिशत (213 करोड़ रुपए) ही खर्च कर पाई है और स्मार्ट सिटी की मूल परियोजना में फेर बदल कर केवल चेहते ठेकेदारों को फायदा देने के लिए सड़कों में डंगे लगाने का ही कार्य किया जा रहा है। </p>
<p>इसमें मुख्य योजनाओं जिसमे स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट व ट्रासंपोर्ट, पुरानी सब्जी मंडी, अनाज मंडी व लक्कड़ मंडी को स्थानांतरित कर इनके स्थान पर आधुनिक बहुउद्देश्यीय परिसरों का निर्माण, रिपन अस्पताल का पुनर्निर्माण आदि जनसरोकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को बिल्कुल नजरअंदाज किया गया है। </p>
<p>विश्व बैंक की सहायता से पेयजल व सीवरेज के जीर्णोद्धार की परियोजना भी जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण टूटीकंडी से माल रोड तक रोपवे परियोजना स्वीकृति के बावजूद भी नगर निगम आरंभ ही नहीं कर पाई है जबकि इसके साथ ही स्वीकृत की गई धर्मशाला में रोपवे ने कार्य करना आरम्भ भी कर दिया है। नगर निगम की इस लचर कार्यशैली से इनका शहर के विकास के प्रति नकारात्मक रवय्या उजागर हुआ है।</p>
<p>जिला कमेटी ने कहा है कि सीपीएम आगामी नगर निगम चुनावों में भाजपा के पांच वर्ष के विफल कार्यकाल व इनकी आम जनविरोधी नीतियों व विकास के प्रति नकरात्मक रवैये को जनता के समक्ष उजागर करेगी और जनहित की वैकल्पिक नीतियों के साथ जनता के समक्ष आगामी नगर निगम चुनाव में एक सशक्त विकल्प पेश करेगी। </p>
<p>वहीं जनवादी महिला  समिति शिमला शहरी कमेटी ने नगर निगम की ओर से पेश किए गए बजट की निंदा की है। कमेटी ने कहा कि नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों से चल रहे बजट को ही दोहराया है जो कई सालों से जस से तस चल रहा है।</p>
<p>224.14 करोड़ का बजट पास करने पर भी महिलाओं के लिए बजट में शून्य दिया गया है। इस मंहगाई में महिलाओं के लिए रसोई घर में भी कुछ नहीं दिया गया।</p>
<p>कमेटी ने बताया कि गैस सिलेंडर का दाम 1000 पार कर रहा है।कूड़े,पानी और बिजली के  भारी भरकम बिल लोगों को दिए जा रहे है। स्वास्थ्य और शिक्षा में भी गरीब जनता के लिए कुछ नहीं है और बिजली के मीटर भी रिचार्ज वाले लगाने पर कमेटी ने कहा कि इससे महिलाओं पर ओर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। जनवादी महिला समिति की सचिव सोनिया शुबरवाल ने कहा कि महापौर स्वयं एक महिला है पर बजट में महिलाओं को कुछ भी नहीं दिया है जिसकी महिला समिति घोर निंदा करती है।</p>
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		<item>
		<title>भाजपा सरकार और नगर निगम शिमला के पिछले साढ़े चार वर्षों का कार्यकाल शिमला शहर के  विकास के लिए ग्रहण हुआ साबित:सीपीआईएम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/23/cpim-district-secretary-sanjay-chauhan-statemnt-on-mc-simla-and-bjp-govt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Feb 2022 12:07:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[सीपीआईएम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- भाजपा सरकार और नगर निगम शिमला के पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में शिमला शहर के विकास को लगभग ग्रहण लगा है। यह बात सीपीआईएम के जिला सचिव संजय चौहान ने कही। उनका कहना है इस दौरान भाजपा सरकार व नगर निगम शिमला शहर के लिए कोई भी नई परियोजना लाने में पूर्णतः [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> भाजपा सरकार और  नगर निगम शिमला के पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में शिमला शहर के विकास को लगभग ग्रहण लगा है। यह बात सीपीआईएम के जिला सचिव संजय चौहान ने कही। </p>
<p>उनका कहना है इस दौरान भाजपा सरकार व नगर निगम शिमला शहर के लिए कोई भी नई परियोजना लाने में पूर्णतः विफल रहे हैं और पूर्व नगर निगम की ओर से स्वीकृत व चलाई जा रही हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं को भी पूर्ण नहीं कर पाई है। </p>
<p>पार्टी ने कहा कि पूर्व नगर निगम के समय में स्वीकृत कई परियोजनाएं तो अभी तक शुरू भी नहीं की गई है। विकासात्मक कार्यों के सुचारू रूप से न करने पर सांसद सुरेश कश्यप ने शिमला में कार्यों की समीक्षा बैठक में भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। यह शिमला शहर के विकास के प्रति भाजपा सरकार व नगर निगम शिमला की उदासीन व लचर कार्यशैली को दर्शाता है। </p>
<p>चौहान ने कहा कि सीपीएम भाजपा सरकार की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन चलाएगी और आगामी नगर निगम व विधानसभा चुनाव में जनसरोकार की वैकल्पिक नीतियों को लेकर विकल्प पेश करेगी ताकि शिमला का सर्वांगीण विकास हो और शिमला शहर जनता के हर वर्ग के लिए रहने लायक बनाया जाए।</p>
<p>जिला सचिव ने बताया कि  सीपीएम के नेतृत्व में पूर्व नगर निगम शिमला के  2012 से 2017 तक अपने कार्यकाल में लंबे संघर्ष के बाद करोड़ों रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई थी। इनमे मुख्यतः 2906 करोड़ रुपए की स्मार्ट सिटी, 125 मिलियन डॉलर(950 करोड़ रुपए) की विश्व बैंक की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था के जीर्णोद्धार,243 करोड़ रुपए की अम्रुत, 200 करोड़ रुपए की टूटीकंडी से मालरोड की रोपेव,66 करोड़ रुपए की शिमला शहर की सौंदर्यीकरण,33 करोड़ रुपए की शहरी गरीब के लिए आवास, 29करोड़ रुपए की लागत से टूटू व 10करोड़ रुपए की लागत से पंथाघाटी व मेहली के लिए सीवरेज प्लांट,4.5 करोड़ रुपए तहबाजारी के लिये लिफ्ट के पास आजीविका भवन, 4 लेबर होस्टल का निर्माण, दाड़नी के बगीचा में सब्ज़ी मण्डी का निर्माण, 5 करोड़ रुपए से कार्ट रोड को चौड़ा करने, आईजीएमसी में पार्किंग व लिफ्ट तथा इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करोड़ो रूपये की पार्किंग व पार्कों के निर्माण की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई गई व इसका निर्माण शुरू किया गया था।</p>
<p>पार्टी ने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में सरकार व नगर निगम इन परियोजनाओं को गति नहीं दे पाई है। </p>
<p>स्मार्ट सिटी परियोजना का अभी तक केवल 7 प्रतिशत (213 करोड़ रुपए) ही खर्च कर पाई है और स्मार्ट सिटी की मूल परियोजना में फेर बदल कर केवल चेहते ठेकेदारों को फायदा देने के लिए सड़कों में डंगे लगाने का ही कार्य किया जा रहा है। </p>
<p>सचिव ने बताया कि इसमें मुख्य योजनाओं जिसमे स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट व ट्रासंपोर्ट, पुरानी सब्जी मंडी, अनाज मण्डी व लक्कड़ मण्डी को स्थान्तरित कर इनके स्थान पर आधुनिक बहुउद्देश्यीय परिसरों का निर्माण, रिपन अस्पताल का पुनर्निर्माण आदि जनसरोकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को बिल्कुल नजरअंदाज किया गया है। </p>
<p>विश्व बैंक की सहायता से पेयजल व सीवरेज के जीर्णोद्धार की परियोजना भी जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण टूटीकंडी से माल रोड तक रोपवे परियोजना स्वीकृति के बावजूद भी सरकार आरम्भ ही नहीं कर पाई है जबकि इसके साथ ही स्वीकृत की गई धर्मशाला में रोपवे ने कार्य करना आरम्भ भी कर दिया है। </p>
<p>उन्होंने सरकार व नगर निगम की इस लचर कार्यशैली से इनका शहर के विकास के प्रति नकारात्मक रवैया उजागर हुआ है।</p>
<p>सीपीएम आगामी नगर निगम व विधानसभा के चुनावों में भाजपा की आम जनविरोधी नीतियों व विकास के प्रति नकरात्मक रवैये व विफल कार्यप्रणाली को जनता के समक्ष उजागर करेगी और जनहित की वैकल्पिक नीतियों के साथ जनता के समक्ष एक सशक्त विकल्प पेश करेगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/23/cpim-district-secretary-sanjay-chauhan-statemnt-on-mc-simla-and-bjp-govt/">भाजपा सरकार और नगर निगम शिमला के पिछले साढ़े चार वर्षों का कार्यकाल शिमला शहर के  विकास के लिए ग्रहण हुआ साबित:सीपीआईएम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>प्रदेश सरकार की विरोधी नीतियों के चलते महंगी व हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने के लिए विवश किसान व बागवान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/15/himachal-kisan-sangharsh-samiti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Feb 2022 16:00:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[किसान संघर्ष समिति]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[हिम्फेड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में खाद की कमी के चलते किसानों को बाज़ार से महंगी ओर हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी बात की कड़ी निंदा किसान संघर्ष समिति के संयोजक संजय चौहान ने की है। उन्होंने प्रदेश सरकार के किसानों के प्रति उदासीन रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/15/himachal-kisan-sangharsh-samiti/">प्रदेश सरकार की विरोधी नीतियों के चलते महंगी व हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने के लिए विवश किसान व बागवान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश में खाद की कमी के चलते किसानों को बाज़ार से महंगी ओर हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी बात की कड़ी निंदा किसान संघर्ष समिति के संयोजक संजय चौहान ने की है। उन्होंने प्रदेश सरकार के किसानों के प्रति उदासीन रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद की कमी गंभीर चिंता का विषय है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसानों को विशेष रुप से सेब बागवानों को खाद की अत्यंत आवश्यकता है लेकिन सरकार आवश्यकता के अनुसार कोई भी खाद उपलब्ध नहीं करवा रही है और मजबूरन बागवानों को खुले बाजार से महंगी व हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है।</p>
<p>चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से किसान व बागवान विरोधी नीतियों के चलते कृषि व बागवानी के क्षेत्र में सहायता व सब्सिडी में कटौती कर रही है जिससे प्रदेश में कृषि का संकट पैदा हो गया है। सरकार यदि तुरन्त किसानों को उचित कीमत पर मांग अनुसार खाद उपलब्ध नहीं करवाती है तो किसान संघर्ष समिति किसानों को लामबंद कर सरकार की इन किसान व बागवान विरोधी नीतियों व रवय्ये के विरुद्ध संघर्ष करेगी।</p>
<p>समिति ने कहा कि जनवरी व फरवरी माह में हुई बेहतर बर्फबारी के बाद बागवानों को अपने बगीचों में प्राथमिकता से खाद डालने का कार्य करना है। लेकिन आज जिन खादों की आवश्यकता बागवानों को  है सरकार इन्हें उपलब्ध ही नहीं करवा रही है जबकि  खुले बाजार में खादों की कीमतों में गत वर्ष की तुलना में भारी वृद्धि की गई है। </p>
<p>किसान समिति ने बताया कि आज बगीचों में पोटाश, NPK 12:32:16, NPK 15:15:15 डालने का समय आ गया है परन्तु  यह खादें कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है और अब बागवानों को  मजबूर हो कर खुले बाजार से हलकी गुणवत्ता वाली खादें जोकि कृषि व बागवानी विश्विद्यालय या बागवानी विभाग की ओर से अनुमोदित नहीं है उन्हें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।</p>
<p>समीति ने कहा कि  इससे भविष्य में सेब के उत्पादन व उत्पादकता में कमी आएगी जिससे बागवानी का संकट और अधिक गहरा होगा और सेब की आर्थिकी की बर्बादी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी।</p>
<p>संयोजक चौहान ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से आजतक हिम्फेड से  खाद उपलब्ध करवाई जाती रही है,लेकिन सरकार की लचर व्यवस्था के चलते आज हिम्फेड ने समय रहते आवश्यक खादों के आर्डर नहीं दिये गए जिससे आज खाद का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा खाद पर दी जा रही सब्सिडी बन्द करने से खाद की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले साल जो कैल्शियम नाइट्रेट का 25 किलो का एक बैग 1100 ₹ से 1250 रुपये का मिल रहा था वह अब 1300 रुपये से लेकर 1750 रुपए का मिल रहा है।  पोटाश का 50 किलो का एक बैग जो गत वर्ष 1150 रुपए में मिल रहा था उसकी कीमत भी अब 1750 रुपए की जा रही है। NPK 12:32:16 जिसकी कीमत गत वर्ष 1200 रुपए थी उसकी कीमत भी 1750 कर दी गई है बावजूद इसके न तो पोटाश खाद उपलब्ध है और न ही NPK 12:32:16 उपलब्ध है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि एचपीएमसी ने जो बागवानों के बकाया पैसों देना है उसके एवज में वह जबरन जो खाद व अन्य वस्तुएं उपलब्ध करवा रही है वह बाज़ार से भी अधिक कीमतों पर बेचकर बागवानों की लूट कर रही है। सरकार इस पर तुरंत रोक लगाकर बागवानों के बकाया का तुरन्त नकद भुगतान करे।</p>
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		<item>
		<title>भाजपा सरकार और नगर निगम ने शिमला शहर के विकास पर लगाया ग्रहण,ठप पड़े हैं कई विकास के कार्य: संजय चौहान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/21/bjp-and-shimla-mc-put-developmental-works-on-hold/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jan 2022 15:30:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[शहरी विकास मंत्री हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला शहर]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल भाजपा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार और नगर निगम शिमला में सत्ता में आई है तबसे ही शिमला शहर के विकास पर लगभग ग्रहण लग गया है और विकास का पहिया बिल्कुल थम सा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/21/bjp-and-shimla-mc-put-developmental-works-on-hold/">भाजपा सरकार और नगर निगम ने शिमला शहर के विकास पर लगाया ग्रहण,ठप पड़े हैं कई विकास के कार्य: संजय चौहान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार और नगर निगम शिमला में सत्ता में आई है तबसे ही शिमला शहर के विकास पर लगभग ग्रहण लग गया है और विकास का पहिया बिल्कुल थम सा गया है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि यहां तक कि पूर्व नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं को भी पूरा करने में सरकार विफल रही है।</p>
<p>जिला सचिव ने कहा कि पार्टी सरकार व नगर निगम की इस भेदभावपूर्ण व लचर कार्यप्रणाली की कढ़ी निंदा करती है और शिमला शहर में ठप पड़े विकासात्मक कार्यों को तुरंत गति प्रदान करने की भी मांग करती है अन्यथा पार्टी सरकार व नगर निगम के इस भेदभावपूर्ण रवय्ये के प्रति जनता को लामबंद कर आंदोलन करेगी।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि सरकार व नगर निगम के भेदभावपूर्ण रवैये का एक जीता जागता उदाहरण शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले शिमला रोपवे परियोजना के निर्माण कार्य को शुरूं न करना और पूरी तरह से नजरअंदाज करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह रोपवे टूटीकंडी से मालरोड तक बनना था तथा इसकी आधारशिला 23 जून, 2015 को रखी गई थी। इसकी लम्बाई 3600 मीटर है तथा इसमें एक घण्टे में करीब 1000 व्यक्ति एक ओर सफर कर सकते है। इससे शिमला शहर में न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता बल्कि शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से भी निजात मिलना था।</p>
<p>उन्होंने बताया कि नगर निगम शिमला को ​इससे प्रतिवर्ष करीब 11 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होनी थी, जिससे शहर के विकास को गति प्रदान की जा सकती थी।</p>
<p>पार्टी जिला सचिव ने बताया कि वर्ष 2015 में प्रदेश में तीन रोपवे परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इनमे शिमला में टूटीकंडी से मालरोड, कांगड़ा में धर्मशाला से मकलोडगंज तथा हिमानी चामुंडा रोपवे थे तथा इनके शिलान्यास भी किये गए थे। लेकिन आज धर्मशाला से मकलोडगंज के लिए रोपवे आरम्भ हो गया है और शिमला में टूटीकंडी से मालरोड का कार्य भी सरकार द्वारा अभी तक आरम्भ नही किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार इस बहुयामी परियोजना के कार्य कराने में कोई भी रुचि नहीं दिखा रही है। जिससे सरकार का शिमला शहर के विकास करवाने में भेदभावपूर्ण रवैय्या स्पष्ट होता है और शहर के विधायक जो सरकार में शहरी विकास मंत्री भी है उनकी कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लगता है।</p>
<p>संजय ने कहा कि जहां शिमला शहर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसकी सुंदरता बनाए रखने के लिए विकास की योजनाये बनाकर इसपर अमल कर दिशा तय की जानी चाहिए थी, वहीं आज शहर में जो भी थोड़े बहुत कार्य किये जा रहें हैं वह केवल मात्र सरकार के चेहतों व कुछ ठेकेदारों को फायदा देने के लिए और उनकी इच्छा अनुसार किये जा रहे हैं।</p>
<p>चौहान ने आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में ठेकेदारों को फायदा देने के लिए केवल मात्र कंक्रीट के डंगे लगाने का कार्य किया जा रहा है जिससे शिमला शहर की हरियाली व सुंदरता को विकृत किया जा रहा है।</p>
<p>सचिव ने कहा कि इससे प्रदेश सरकार,नगर निगम शिमला व शहरी विकास मंत्री की शहर के प्रति भेदभावपूर्ण व लचर कार्यप्रणाली उजागर होती है और स्पष्टरूप में शिमला शहर के विकास पर ग्रहण लग गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज शहर की छवि धूमिल हो रही है और शिमला शहर जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहाड़ो की रानी के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुका था उसे खोने की कगार पर है।</p>
<p>जिला सचिव ने कहा कि उनकी पार्टी सीपीएम शहर की जनता से आग्रह करती है कि सरकार व नगर निगम की शिमला के शहर के विकास के प्रति इस भेदभावपूर्ण व लचर रवय्ये के विरुद्ध एकजुट होकर इनकी भेदभावपूर्ण नीतियों को बदलने के लिए सब मिलकर संघर्ष करे और इस शिमला शहर के गौरव को बचाए।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/21/bjp-and-shimla-mc-put-developmental-works-on-hold/">भाजपा सरकार और नगर निगम ने शिमला शहर के विकास पर लगाया ग्रहण,ठप पड़े हैं कई विकास के कार्य: संजय चौहान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>24 घंटे में प्रदेश में कोविड के 1773 नए मामले दर्ज, कोरोना से 6 महीने की बच्चे की मौत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/13/hp-nhm-daily-covid-19-report-for-january-13-2022/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Jan 2022 16:45:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एनएचएम]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना मृत्यु]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड टेस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[सिरमौर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्वास्थ विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल में कोरोना के नए मामलों की दर में तीव्र वृद्धि जारी है। एनएचएम की 13 जनवरी की शाम 7 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक पुरे प्रदेश में 12,320 कोविड टेस्ट हुए थे जिसमे से 1773 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। वहीं सिरमौर में आज एक 6 महीने की बच्चे की भी जान गई [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल में कोरोना के नए मामलों की दर में तीव्र वृद्धि जारी है। एनएचएम की 13 जनवरी की शाम 7 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक पुरे प्रदेश में 12,320 कोविड टेस्ट हुए थे जिसमे से 1773 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। वहीं सिरमौर में आज एक 6 महीने की बच्चे की भी जान गई है।</p>
<p>ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस समय पूरे हिमाचल में 8115 सक्रीय मामलें हैं और अब तक प्रदेश में कुल 3871 लोग जान गंवा चुके हैं ।</p>
<p>वहीं राजधानी शिमला के पूर्व महापौर संजय चौहान ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट डाली है जिसमे उन्होंने सरकार की कोविड रिपोर्ट के आंकड़ों पर हैरानी जताते हुए कहा है कि 12 जनवरी 2022 प्रदेश में कोरोना के कुल 14726 कोरोना टेस्ट किये गए थे, जिसमे से 1804 संक्रमित पाए गए थे तो वहीं शिमला में कुल 225 संक्रमित पाए गए थे।</p>
<p>आज यानी 13 जनवरी को कल से कम 12320 कोरोना टेस्ट किए गए और कुल संक्रमितों की 1773 है। चौहान ने कहा कि  इस रिपोर्ट में शिमला में 123 संक्रमित बताए गए हैं जबकि दूसरी रिपोर्ट में 254 बताए गए हैं जो की समझ से परे है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>4 वर्षों मे पानी, बिजली, बस किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन की कीमतों में भारी वृद्धि से बढ़ा जनता पर आर्थिक बोझ: चौहान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/28/cpim-shimla-statement-on-hp-govts-four-years-tenure/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Dec 2021 08:47:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)]]></category>
		<category><![CDATA[जयराम ठाकुर]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211;भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने आज हिमाचल प्रदेश सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर उसकी विफलताओं व जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध शिमला में  प्रदर्शन किया और  उपायक्त कार्यलय से लेकर नाज़ तक जलूस निकाला गया। जिला सचिव संजय चौहान ने सोमवार को जारी किये गए बयान में कहा कि भाजपा [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/28/cpim-shimla-statement-on-hp-govts-four-years-tenure/">4 वर्षों मे पानी, बिजली, बस किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन की कीमतों में भारी वृद्धि से बढ़ा जनता पर आर्थिक बोझ: चौहान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong>भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने आज हिमाचल प्रदेश सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर उसकी विफलताओं व जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध शिमला में  प्रदर्शन किया और  उपायक्त कार्यलय से लेकर नाज़ तक जलूस निकाला गया।</p>
<p>जिला सचिव संजय चौहान ने सोमवार को जारी किये गए बयान में कहा कि भाजपा ने 2017 में चुनाव के दौरान जो जनता से वायदे किये थे सरकार में आने के बाद उन्हें अमल में लाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए हैं।</p>
<p>चौहान ने कहा कि सरकार ने वायदा किया था कि महंगाई कम करेंगे और रोजगार के अवसर सृजित किये जायेंगे। किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलवाया जाएगा तथा मजदूरी में वृद्धि की जाएगी। कर्मचारियों से वायदा किया था कि पुरानी पेंशन योजना(OPS) बहाल की जाएगी तथा आउटसोर्स, ठेका, अंशकालीन व अन्य के लिए नीति बनाई जाएगी। भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 को लागू कर 4 गुणा मुआवजा दिया जाएगा। चौहान ने कहा कि परन्तु आज तक कोई भी वायदा पूरा नहीं कर पाई है।</p>
<p>चौहान ने यह भी कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्तासीन हुई है प्रदेश में व्यापक महंगाई, बेरोजगारी व कृषि का संकट निरन्तर बढ़ा है। एक ओर सरकार की इन नीतियों के कारण आज प्रदेश पर कर्ज बढ़कर 62000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है और दूसरी ओर सरकार द्वारा लागू की जा रही इन जनविरोधी नीतियों के चलते इन चार वर्षों मे पानी, बिजली, बस किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं के साथ ही साथ राशन की कीमतों में भारी वृद्धि की गई है जिससे जनता पर आर्थिक बोझ बड़ा है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि आज पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, खाद्य व अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। खाद्य वस्तुओं की महंगाई की दर पिछले 40 वर्षों में सबसे अधिक है। आज रसोई गैस का घरेलू सिलिंडर 1002₹ और व्यवसायिक सिलिंडर 2250₹ में मिल रहा है। बाज़ार में सरसों का तेल 220₹, दाल 100₹, सब्जियां 40से 100₹ तक बिक रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन में कटौती की जा रही है और इसको महंगा किया जा रहा है। इसके कारण आज आम आदमी का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने कपड़ा, जूता, खाने पर GST में वृद्धि कर जनता पर और अधिक महंगाई की मार डाल दी है। सरकार कोविड19 के कारण पैदा हुए संकट कॉल में कोई भी राहत जनता को नहीं दे रही है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि इन चार वर्षों में सरकार द्वारा रोजगार के अवसर बिल्कुल भी सृजित नहीं किये गए हैं और कोविड 19 के कारण सरकार द्वारा लगाये गए लॉकडाउन से प्रदेश में लाखों लोगों के रोजगार पर संकट आया है। इसमें विशेष रूप से दैनिक ध्याड़ी मजदूरी करने वाले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। पर्यटन, परिवहन, छोटा दुकानदार व अन्य कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर अप्रैल, 2017 में जो 0.5 प्रतिशत थी वह भाजपा सरकार में बढ़कर मई, 2020 में 28.2 प्रतिशत हो गई थी। आज भी प्रदेश में 8.5 लाख पढ़ा लिखा युवा रोजगार कार्यालय में पंजीकृत है और रोजगार के इंतजार में है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन चार वर्षों में प्रदेश में कृषि व बागवानी का संकट बढ़ा है। किसानों को मण्डियों में उनके उत्पाद का उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। मण्डियों में किसानों का शोषण बढ़ा है। किसान प्रदेश में सभी फसलों के लिएसरकार द्वारा कृषि व बागवानी विभाग के माध्यम से खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जाने वाली सब्सिडी लगभग समाप्त कर दी है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि चार वर्षों में खाद की कीमतों में 375 से 700 रुपए प्रति बैग तक वृद्धि की गई हैं। कीटनाशकों, फफूंदीनाशको व अन्य लागत वस्तुओं की कीमतों में 40 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। आज भी किसानों व बागवानो के करोड़ों रुपए का भुगतान सरकार ने कई वर्षों से करना है।</p>
<p>चौहान ने आरोप लगाया कि  भाजपा के शासन काल में प्रदेश में महिलाओं, दलित व अन्य सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों पर हमले बढ़े हैं। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों व दलितों पर हमले में निरन्तर वृद्धि हुई है और सरकार इन पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से विफल रही है। इन चार वर्षों में प्रदेश में नशे का कारोबार व्यापक रूप से फैल रहा है और सरकार इस पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है। आज प्रदेश का युवा वर्ग बेरोजगारी के चलते नशे की चपेट में आ गया है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/28/cpim-shimla-statement-on-hp-govts-four-years-tenure/">4 वर्षों मे पानी, बिजली, बस किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन की कीमतों में भारी वृद्धि से बढ़ा जनता पर आर्थिक बोझ: चौहान</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title> प्रदेश में हुई बारिश,ओलावृश्टि,और तूफान से कई फलदार फसलों, घरों को भारी नुकसान, पर किसानों, बागवानों को नहीं मिला कोई मुआवजा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/14/damage-to-crops-in-himachal-pradesh-due-to-heavy-rain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Jun 2021 13:25:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में हुई भरी बारिश,ओलावृश्टि,और तूफान से कई फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इससे फलदार फसलों जैसे सेब,पलम,आड़ू,खुमानी अदि की फसलें बर्बाद हो गयी हैं। सैंकड़ों पेड़ों से फल झड़ गए हैं और हजारों पेड़ तूफान की चपेट में आने से उखड़ गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा से सेंकडो लोगों के घरों को भी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>प्रदेश में हुई भरी बारिश,ओलावृश्टि,और तूफान से कई फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इससे फलदार फसलों जैसे सेब,पलम,आड़ू,खुमानी अदि की फसलें बर्बाद हो गयी हैं। सैंकड़ों पेड़ों से फल झड़ गए हैं और हजारों पेड़ तूफान की चपेट में आने से उखड़ गए हैं।</p>
<p>इस प्राकृतिक आपदा से सेंकडो लोगों के घरों को भी काफी क्षति हुई है। इसके अलावा कई गोशालाएं भी ढह गयी हैं।</p>
<p>इसी के चलते सरकार से मांग की जा रही है कि इस नुकसान का प्रभवित हुए लोगों को तुरंत मुआवजा दिया जाये।</p>
<p>शिमला के पूर्व मेयर और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता, संजय चौहान ने सरकार से मांग की है कि जिन लोगों को भी इस प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुआ है उनको तुरंत मुआवजा दिया जाए और जिन लोगों ने फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा करवाया है उनके लिए सरकार द्वारा कंपनी को फसल की भरपाई करने के आदेश दिए जाये।</p>
<p>चौहान ने बताया कि इस आंधी तूफान, ओलावृष्टि व भारी वर्षा से शिमला, मण्डी, कुल्लू, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर जिलों में भारी नुकसान हुआ है। शिमला जिला की ठियोग, कुमारसैन, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, चिड़गांव, चौपाल, रामपुर, ननखड़ी व इसके साथ लगती अन्य तहसीलो में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। घरों की छतें उड़ने से कई परिवार बेघर हो गए हैं।</p>
<p>चौहान ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से सेब,खुमानी और अन्य गुठलीदार फलों की 70% फसल खराब हो गयी है। एक आकलन के अनुसार करीब 1500 करोड़ रूपय का नुकसान किसानो को हुआ है। सरकार ने भी इसका एक आकलन किया है जिसमे करीब डाई सौ करोड़ रुपय का नुकसान आंका गया है। चौहान ने कहा कि फिर भी सरकार ने किसी भी किसान और बागवान को कोई भी मुआवजा और सहायता नहीं दी है।  इस संकट के दौर में किसान और बागवान काफी प्रभावित हुआ है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि यदि सरकार आज संकटग्रस्त किसानों व बागवानों को सहायता प्रदान नहीं करती तो प्रदेश में कृषि का संकट और गहरा होगा और लाखों परिवार जो कृषि व बागवानी से अपना रोजगार अर्जित करते हैं उनको रोजगार का संकट बढ़ जाएगा और वह भी अन्य राज्यों के किसानों की तरह ही अतिवादी कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरन्त अपना संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर प्रभावितों को मुआवजा व सहायता प्रदान कर राहत प्रदान करे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/14/damage-to-crops-in-himachal-pradesh-due-to-heavy-rain/"> प्रदेश में हुई बारिश,ओलावृश्टि,और तूफान से कई फलदार फसलों, घरों को भारी नुकसान, पर किसानों, बागवानों को नहीं मिला कोई मुआवजा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>राज्य सरकार के पास वैक्सीन की कमी तो  निजी अस्पतालों के पास कहाँ से आ रही सप्लाई?</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/06/18-44-years-vaccination-policy-discriminatory/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jun 2021 11:28:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[covid-19]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[वैक्सीनेशन]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सरकार द्वारा 18 से 44 वर्ष के लिये लागू की गयी वैक्सीनेशन की नीति निंदा का विषय बन गयी है और इसे पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक करार दिया जा रहा हैI हाल ही में सरकार द्वारा युवा वर्ग के लिए जो ऑनलाइन बुकिंग के आधार पर थोड़ी बहुत वैक्सीनशन की जा रही थी वह [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/06/18-44-years-vaccination-policy-discriminatory/">राज्य सरकार के पास वैक्सीन की कमी तो  निजी अस्पतालों के पास कहाँ से आ रही सप्लाई?</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/06/discrimination-in-vaccination.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-12965 size-full" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/06/discrimination-in-vaccination.jpg" alt="discrimination in vaccination" width="1000" height="500" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/06/discrimination-in-vaccination.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/06/discrimination-in-vaccination-300x150.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/06/discrimination-in-vaccination-768x384.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p><strong>शिमला-</strong> सरकार द्वारा 18 से 44 वर्ष के लिये लागू की गयी वैक्सीनेशन की नीति निंदा का विषय बन गयी है और इसे पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक करार दिया जा रहा हैI हाल ही में सरकार द्वारा युवा वर्ग के लिए जो ऑनलाइन बुकिंग के आधार पर थोड़ी बहुत वैक्सीनशन की जा रही थी वह भी सरकार के अनुसार अब वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण बन्द कर दी गई है। वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करना ही अपने आप में एक बहुत बड़ी समस्या है, खासकर प्रदेश के दूर दराज़ इलाको में रहने वाले लोगों के लिए जो इंटरनेट की सेवा से वंचित हैंI</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने अभी सरकार कि इस निति से असंतुष्टि जताई है।</p>
<p>याद रहे कि अभी सरकार 50:25:25 के अनुपात में वैक्सीन कि सप्लाई कर रही हैI इसका मतलब है कि कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार के पास रहेगा जबकि 25 &#8211; 25 प्रतिशत राज्यों और निजी हॉस्पिटलों को मुहया करवाया जायेगा</p>
<p>शिमला के पूर्व मेयर एवं कम्युनिस्ट पार्टी के नेता, संजय चौहान, ने सरकार द्वारा देश व प्रदेश में लागू की जा रही वैक्सीनशन नीति को लचर व भेदभावपूर्ण बताते हुए कड़ी भर्त्सना की है और सरकार से मांग की है कि इस कोविड-19 महामारी में समय पर रोकथाम हेतु 18 वर्ष की आयु से ऊपर सभी का समयबद्ध तरीके से नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर मुफ़्त वैक्सीनशन कर अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे।</p>
<p>चौहान ने कहा कि देश व प्रदेश में महंगी दरों पर निजी अस्पतालों व अन्य संस्थानों को युवा वर्ग की वैक्सीनशन की इजाज़त देकर आरम्भ किया गया है। यह बिल्कुल भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक है क्योंकि भारत के संविधान की धारा 21 सभी को जीवन व धारा 14 सभी को बराबरी का अधिकार प्रदान किया गया है। इसलिए देश मे सभी युवा, वृद्ध, बच्चों, गरीब, अमीर व हर वर्ग के लोगों के जीवन की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। चौहान ने कहा कि सरकार की वैक्सीनशन को लेकर लागू नीति व कार्यप्रणाली यहां भी संदेह में आती है क्योंकि प्रदेश सरकार के अनुसार उनको वैक्सीन नहीं मिल रही है इसलिए 18 से 44 आयु वर्ग की वैक्सीनशन नहीं की जा रही है</p>
<p>चौहान ने पुछा है कि इन निजी अस्पतालों व संस्थानों के पास वैक्सीन कहाँ से आ रही है। चौहान ने आरोप लगया है कि सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से इन निजी अस्पतालों व संस्थानों को लाभ पहुंचाने का है और इससे कोविड-19 से पैदा हुए संकट से जूझ रहे गरीब व दूरदराज के लोग वैक्सीन से वंचित रह रहे है।</p>
<p>केन्द्र सरकार का कहना है कि देश में वैक्सीन की कमी नहीं होने दी जाएगी जबकि दूसरी ओर आज अधिकांश राज्य सरकारें वैक्सीन की कमी बता रही है और कह रही है कि वो जितनी वैक्सीन की मांग कर रही है उन्हें केन्द्र सरकार उतनी वैक्सीन उपलब्ध नहीं करवा रही है। जिससे सरकार को आज 18 से 44 आयु वर्ग को वैक्सीन लगाना सम्भव नहीं हो रहा है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को समय और मांग अनुसार वैक्सीन उपलब्ध न करवाना भी हमारे देश के संवैधानिक संघीय ढांचे पर चोट है। इसलिए सरकार की वक्सीनेशन नीति मनमानी व तर्कहीन है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान अपने एक आदेश में केन्द्र सरकार को लताड़ लगाई है। चौहान ने मांग की है कि इसमे सरकार तुरन्त बदलाव करे और वक्सीनेशन को मुफ़्त सार्वभौमिक कर सभी को सरकार उपलब्ध करवाए।</p>
<p>चौहान ने कहा कि कोविड-19 महामारी से देश व प्रदेश में लाखों लोग प्रभावित है और कई मौते हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार मुख्यतः सरकार की कोविड-19 से निपटने के लिए की गई लचर नीति व आधी अधूरी तैयारी रही है।</p>
<p>उनका कहना है कि सरकार द्वारा उचित रूप में टेस्टिंग न करना व देश में ऑक्सिजन व अन्य मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की कमी तथा देश मे समय रहते वक्सीनेशन न करने के कारण अधिकांश मौते हुई है। आज दुनिया में इस कोविड-19 महामारी पर काबू पाने हेतु वैक्सीनशन ही एकमात्र चारा है।</p>
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		<item>
		<title>निजी स्कूलों की खुली लूट के सामने सरकार लाचार, अभिभावक कॉपी किताबें, ड्रेस, जूते भी स्कूलों की मर्ज़ी से खरीदने को  मजबूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Mar 2019 15:37:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि व अनुचित वसूली पर सरकार को घेरते हुए शिमला के पूर्व मेयर और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के नेता संजय चौहान ने प्रदेश सरकार से इस पर तुरंत रोक लगाने मांग की है। पिछले कुछ समय से निजी स्कूल बेरोकटोक फीस में वृद्धि किये जा रहे हैं और अभिभावकों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि व अनुचित वसूली पर सरकार को घेरते हुए शिमला के पूर्व मेयर और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के नेता संजय चौहान ने प्रदेश सरकार से इस पर तुरंत रोक लगाने मांग की है। </p>
<p>पिछले कुछ समय से निजी स्कूल बेरोकटोक फीस में वृद्धि किये जा रहे हैं और अभिभावकों को कॉपी किताबें, ड्रेस, जूते आदि भी स्कूलों की मर्ज़ी से खरीदारी करने के लिए विवश कर रहे हैं और प्रदेश सरकार इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दे रही हैं। </p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि अधिकांश निजी स्कूल विभिन्न मद्दों जैसे प्रत्येक वर्ष एनुअल चार्जिंज, डेवेलपमेंट व मेंटेनेन्स फण्ड आदि में अनुचित वसूली कर रहे। इन मद्दों में पिछले 5-6 वर्षों में कई निजी स्कूलों ने तो 10 से 15 गुणा तक कि भारी वृद्धि की है जिसके चलते आज के इस महंगाई के दौर में जनता के ऊपर इस अनुचित फीस बढ़ोतरी व वसूली का अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ा है। </p>
<p>संजय चौहान ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा की जा रही इस अनुचित फीस वृद्धि की इस मनमानी को विभिन्न मंचो व व्यक्तिगत रूप से सरकार के समक्ष रख रहे है परंतु सरकार के ढुलमुल व लचर रवय्ये से इन निजी स्कूलों की मनमानी पर कोई रोक नहीं लगी है।</p>
<p>सरकार इन निजी स्कूलों पर हर वर्ष कार्यवाही करने की बात तो करती हैं परन्तु अंत में न जाने किस कारण या दबाव में कार्यवाही नहीं करती हैं। सरकार की इस लचर कार्यप्रणाली का फायदा उठाकर निजी स्कूल इस मनमानी को कई वर्षो से जारी रखें हुए हैं।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि  सरकार की लचर शिक्षा नीति के चलते प्रदेश मे सरकारी स्कूलों के स्तर में निरंतर गिरावट के कारण लोग निजी स्कूलों में अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजने के लिए मजबूर हैं। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की संख्या तो बेहतर है परन्तु विशेष रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में इनमें अध्यापकों व अन्य मूलभूत आवश्कताओं की बेहद कमी है जिसके कारण लोगों को मज़बूरन बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला लेना पड़ रहा है। </p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में सीमित साधनों के बावजूद हर परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए तत्तपर रहा है जिसके चलते प्रदेश में देश के अन्य राज्यों से साक्षरता दर बेहतर है। सरकार यदि शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जिसके चलते स्कूलों में अध्यापकों की उचित व्यवस्था व मूलभूत आवश्यकतओं को बेहतर करें तो लोग सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाएंगे और इससे इन निजी स्कूलों की मनमानी को रोका जा सकता है। </p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि सी.पी.एम. मांग करती है कि प्रदेश सरकार इन निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि व अनुचित वसूली के विरुद्ध तुरन्त संजीदगी से कार्यवाही कर इस पर रोक लगाए और जो स्कूल सरकार के आदेश नहीं मानते उनके विरुद्ध कड़े कदम उठाए ताकि जनता को इस अनुचित आर्थिक बोझ से राहत प्रदान की जाए। </p>
<p>संजय चौहान ने चेतावनी दी है कि अन्यथा पार्टी जनता को लामबंद कर इसके विरुद्ध एक निर्णायक आंदोलन चलाएगी।</p>
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		<title>नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट  केवल पिछले बजट की कॉपी पेस्ट, आय स्रोतों में 38% की गिरावट: कांग्रेस,पूर्व मेयर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/22/shimla-mc-budget-2019-20/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Feb 2019 11:06:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- नगर निगम शिमला ने वीरवार को वर्ष 2019-20 का 297 करोड़ का बजट पेश किया। बजट में शहर के लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा है। विपक्षी दलों ने महापौर के पेश किए गए बजट को घाटे का बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं है। तीन-चार नई [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/22/shimla-mc-budget-2019-20/">नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट  केवल पिछले बजट की कॉपी पेस्ट, आय स्रोतों में 38% की गिरावट: कांग्रेस,पूर्व मेयर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> नगर निगम शिमला ने वीरवार को  वर्ष 2019-20 का 297 करोड़ का बजट पेश किया।  बजट में शहर के लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा है।</p>
<p>विपक्षी दलों ने महापौर के पेश किए गए बजट को घाटे का बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं है। तीन-चार नई योजनाओं को छोड़ दें तो इस बजट में नया और कुछ नहीं। </p>
<p>कांग्रेस ने कहा कि शहर को मूलभूत सुविधाए मुहैया करवा पाने में असमर्थ रहा निगम जनता का ध्यान समस्याओं से हटाने हेतु अनोखे प्रयोग लेकर आया है, महिलाओ को आत्म निर्भर करने को मिली 50 लाख की धनराशि को लेप्स करवाने के बाद अब स्कूलो में लेप टाप बांटने की योजनाए गिनाई जा रही है जो की पहले ही राज्य सरकार कर रही है इसमे निगम का कोई रोल है ही नही , मरीजो को मुफ़त खाना व डेड बॉडी वेन शहर में अनेकों समाज सेवी संस्थाएं पहले से ही चला रहीं हैं ऐसे में शहर की मूलभूत सुविधाओं पर किसी प्रकार कि कोई स्कीम न बना पाना निगम कि अपरिपक्वता दर्शाता है ।</p>
<p>कांग्रेस ने कहा कि  भाजपा की सरकार प्रदेश में होने के बावजूद भाजपा शासित निगम किसी भी तरह की अतिरिक्त ग्रांट प्राप्त करने में पूर्णतः विफल रही है निगम को कोई भी अतिरिक्त सहायता सरकार की ओर से नहीं मिली हैं ये निगम और सरकार में रही तालमेल कि कमी को साफ दिखाता है ।</p>
<p>पुराने बजट में की गई घोषनाए,  शहर के हर वार्ड में पार्क व जिम्नेजियम , व्यस्ततम सड़कों पर ओवर हेड ब्रिज , तेहबाजरियों के लिए स्थायी नीति , वेस्ट से विधयुत उत्पादन , नई पार्किंग  सब धरे के धरे रह गए हैं अब इस बार फिर से केवल औपचारिताएं पूरी करने हेतु बजट पढ़ा गया है।</p>
<p>शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट  को  केवल पिछले नगर निगम द्वारा प्रस्तुत बजट की ही कॉपी पेस्ट किया गया दस्तावेज बताते हुए कहा कि पिछले नगर निगम द्वारा वर्ष 2016-17 व वर्ष 2017-18 के बजट में जिन योजनाओं की प्रस्तावना की गई थी उन्हीं का जिक्र पिछले बजट में भी किया गया था और इस वर्ष के बजट में भी अधिकांश वहीं प्रस्तावित की गई है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि ये बजट बिल्कुल ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बनाया गया आंकड़ों का केवल हेर फेर हैं।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम वित्तीय संकट में चला गया है। जबकि पूर्व नगर निगम के अंतिम बजट वर्ष 2017-18 को देखा जाये तो इस बजट में 4453.50 लाख रुपये का व्यय आय से कम प्रस्तावित था। जोकि सरप्लस बजट था। जबकि आज बजट में गत वर्ष की तुलना में 1607.23 लाख रुपये का घाटा दर्शाया गया है। कहा कि इससे नगर निगम का वित्तीय संकट और अधिक बढ़ेगा।</p>
<p>बजट में आज भी पिछले समय से चली आ रही योजनाओं का ही जिक्र किया गया है । निर्माणाधीन पार्किंग, पार्क, सामूदायिक भवन,एम्बुलेंस रोड,ओवरब्रिज आदि का ही हवाला दिया गया है परंतु कब पूर्ण होगी इसका कोई भी वचनबद्धता इसमे नहीं है। तहबाजारियों को बसाने की योजना पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। शहरी गरीब, महिलाओं, मजदूरों के लिए जो पूर्व नगर निगम के द्वारा जो योजनाएं निर्धारित की गई थी वह बन्द कर दी हैं क्योंकि इस बजट में लेबर होस्टल के निर्माण, शहरी गरीब व महिलाओं के लिए जो प्रावधान किए गए थे उन्हें इससे हटा दिया है। </p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि युवाओं व बुजुर्गों के लिए भी बजट में कुछ भी ठोस रूप से दर्शाया नहीं गया है।<br />
संजय चौहान ने कहा कि बीजेपी की पूर्व सरकार 2012 में भी शिमला शहर के पेयजल का निजीकरण कर रही थी जिसे पूर्व नगर निगम ने बदल दिया था और नगर निगम के अधीन ही पेयजल की व्यवस्था को रखा गया था। परन्तु वर्तमान नगर निगम ने इसे बदल कर पुनः कंपनी बनाकर निजीकरण की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। जिसके चलते शहरवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। जोकि इस वर्ष के बजट में विकासात्मक गतिविधियों के लिए बजट अनुमानों के विवरण(पेज 36) में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि इसमें पूर्व बजट में जो प्रावधान पानी और सीवरेज के लिए रखा गया था अब यह प्रावधान ही नहीं रखा गया है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि इसके साथ साथ ही पानी की दरों में वर्ष 2018 में लगभग 35% की वृद्धि कर बिल दिये जा रहे है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि इस बजट में बिना धन के प्रावधान से जो नए टाउन हॉल का प्रस्ताव जो रखा गया है वह भ्रमित करने वाला है। टाऊन हाल एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसका मालिक व कब्जा दशकों से नगर निगम का ही हैं और इसमें नगर निगम का कार्यालय ही रहा है।</p>
<p>संजय चौहान ने कहा कि पूर्व नगर निगम द्वारा चलाई गई योजनाओं को ही इस बजट में रेखांकित कर विकास दिखाने का प्रयास किया गया है। अपनी कोई भी नई योजना बजट में नहीं डाली गई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/22/shimla-mc-budget-2019-20/">नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट  केवल पिछले बजट की कॉपी पेस्ट, आय स्रोतों में 38% की गिरावट: कांग्रेस,पूर्व मेयर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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