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	<title>Water Pollution Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Water Pollution Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल की 8 नदियों का पानी प्रदूषित, सबसे अधिक प्रदूषित हिस्सा ब्यास नदी का</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/himachal-pradesh-rivers-pollution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Oct 2016 09:26:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Central Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[himachal rivers]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती खड्ड, बिनवा और मारकंडा नदियों के पानी में बॉयोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड तय मानकों से कम पाया गया।</p>
<p>सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार इस दूषित पानी में किसी भी तरह के जीव-जंतुओं के अलावा मनुष्यों के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। मनुष्य अगर लगातार इस पानी का सेवन करें तो वह कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाएगा। </p>
<p>ब्यास नदी सबसे ज्यादा 80 किलोमीटर एरिया में प्रदूषित होकर बह रही है। हिमाचल की आठ नदियों के 12 स्ट्रैच को प्रदूषित आंका गया है। इन 12 स्थानों में नदी के जल में सुधार लाने के लिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। हिमाचल की आठ नदियों का 136 किलाेमीटर का स्ट्रैच प्रदूषित पाया गया है।<br />
<strong>कहां पर कितना हिस्सा प्रदूषित</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>नदी</th>
<th>प्रदूषित स्ट्रैच</th>
<th>कस्बा</th>
<th>किलोमीटर</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>ब्यास</td>
<td>कुल्लू से गोपीपूर </td>
<td>स्नोट, कुल्लू</td>
<td>80</td>
</tr>
<tr>
<td>टौंस</td>
<td>किलाड़ से तिलवारी</td>
<td>डांडा, हरिपूर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरसा</td>
<td>नालगढ़ से सोलन</td>
<td>सोरी, रडयाली</td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>स्वां</td>
<td>ऊना से संतोषगढ</td>
<td>अरनैला, प्रेमनगर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सुखना</td>
<td>सुखना से परमाणू</td>
<td>भगवानपूरा, किशनगढ </td>
<td>15</td>
</tr>
<tr>
<td>सुकेती</td>
<td>मंडी से बैहना</td>
<td>समखेतर,करतापूर </td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>बिनवा</td>
<td>पपरोला से बैजनाथ</td>
<td>खतरेहड</td>
<td>5</td>
</tr>
<tr>
<td>मारकंडा</td>
<td>कालाअंब से नारायणपूर </td>
<td>कालाअंब, आगली</td>
<td>4</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>इसमें से ब्यास नदी का सबसे अधिक 80 किलोमीटर का स्ट्रेच प्रदूषित पाया गया है। पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने का मतलब यह है कि पानी में किसी ऑक्सीजन की कमी है और किसी प्रकार का जीव इसमें जीवित नहीं रह सकता। देश भर में सीपीसीबी की ओर से मॉनिटर की गई नदियों में से 275 नदियों में प्रदूषण पाया गया है। सीपीसीबी ने 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित राज्यों की 445 नदियों को मॉनिटर किया था। इनमें से 302 स्ट्रैच में बीओडी के स्तर को सही नहीं आंका गया है।</p>
<p><strong>प्रदूषण के कारण</strong></p>
<p>नदियों में जल प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट और सीवरेज है। नदियों में प्लास्टिक और कूड़ा कचरा फेंके जाने से प्रदूषण बढ़ गया है। नदियों में मरे हुए पशु, नदियों के किनारे मल जल का त्याग करने और पशुओं को नहलाना से भी पानी की गुणवत्ता में असर पड़ता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बरोटीवाला उद्योग से निकले प्रदूषित पानी  के तालाब में गिराने से हजारों मछ‌ल‌ियों की मौत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/barotiwala-industrial-pollution-kills-thousands-of-fish-in-pool/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Oct 2016 06:23:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Baddi Barotiwala Nalagarh Industrial Area]]></category>
		<category><![CDATA[BBN Industrial Pollution]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Fisheries Dept]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[SDO Atul Parmar]]></category>
		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं सोलन- औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं। ग्रामीणों ने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं</strong></p>
<p><strong>सोलन-</strong> औद्योगिक क्षेत्र की बरोटीवाला पंचायत के दामोवाला में एक प्लाई बोर्ड-सनमाईका बनाने वाले उद्योग से निकले पानी के तालाब में गिराने से हजारों मछलियां मर गईं। ग्रामीणों ने मजदूर लगाकर करीब दो क्विंटल मरी हुई मछलियों को तालाब से बाहर निकालकर इसकी सफाई की। उद्योग की इस लापरवाही पर ग्रामीणों के विरोध के बाद आनन फानन में प्रदूषण बोर्ड की ओर से प्रारंभिक जांच कर बिजली कनेक्शन के टैंपरेरी डिस्कनेक्ट करने की सिफारिश बोर्ड चेयरमैन से की गई है।</p>
<p>प्रदूषण बोर्ड की ओर से मत्स्य विभाग द्वारा सैंपल उठाए जाने के बाद दूसरे दिन कार्रवाई को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों ने इस दौरान प्रदूषण बोर्ड पर समय रहते उद्योग के खिलाफ कार्रवाई न करने के आरोप भी लगाए। उद्योग तालाब से मात्र एक सौ मीटर की दूरी पर है। इसका केमिकल युक्त रंगीन पानी नाले में गिरकर सीधा तालाब की ओर आता है।</p>
<p>ग्रामीणों ने कहा कि उद्योग खुलेआम हाई कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है। प्रदूषण बोर्ड की ओर से भी मामले में समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। तालाब में 35000 मछलियों का बीज डाला था। इनमें से अधिकतर उद्योग के केमिकल युक्त पानी के कारण मर गयी।</p>
<p><strong>आक्सीजन की कमी से हुई मौत: सोमनाथ</strong></p>
<p>मत्सय विभाग के अधिकारी डॉ. सोमनाथ ने कहा कि तालाब में आक्सीजन की कमी से मछलियों की मौत हुई है। तालाब में बहुत अधिक मात्रा में गंदगी मौजूद है। पानी की टेस्टिंग के बाद ही सही तथ्य सामने आ पाएंगे। एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अतुल परमार ने कहा कि उद्योग का गंदा पानी तालाब की ओर जा रहा है। उद्योग की प्रारंभिक लापरवाही को देखते हुए बोर्ड चेयरमैन के पास टेंपरेरी डिस्कनेक्शन को रिपोर्ट भेज दी है।</p>
<p>Photo: Birmingham Mail/ Representational Purpose</p>
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			</item>
		<item>
		<title>खलीनी वार्ड के लोग दूषित बावड़ी का पानी पीने को मजबूर, प्रतिदिन 10 मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/03/water-contamination-in-shimla-water-resources-increasing-health-issues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 14:55:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Khalini Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Baoris]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Water Contamination]]></category>
		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यहां पर करीब आठ हजार लोग रहते हैं। नगर निगम ने झंझीड़ी स्थित बावड़ी के पास पानी पीने योग्य नहीं है सूचना पट्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नगर निगम नाकाम रहा है। </p>
<p>मजबूरन लोगों को इसी बावड़ी से पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र पूरी तरह पीलिया की चपेट में आया हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक लोगों को क्लोरिन की गोलियां नहीं दी गई हैं। हालांकि सीएमओ शिमला ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में चार स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे और क्लोरिन की गोलियां बांटेंगे लेकिन सीएमओ के आदेश भी कागजों में ही सिमटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेट दर्द के मामलों में हो रही वृद्धि</strong></p>
<p>दूषित पेयजल से लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में उल्ट, दस्त व बुखार के साथ पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र खलीनी में प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तीन से चार मरीज बुखार व उल्टी, दस्त से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों को रिपन अस्पताल टेस्ट के लिए भेजा जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p><strong>तीन माह से पेयजल किल्लत</strong></p>
<p>खलीनी में तीन माह से पेयजल किल्लत चल रही है। चार दिन बाद भी सिर्फ आधे घंटे के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस कारण मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
उमा दत्त</p>
<p><strong>पानी की आपूर्ति करने में निगम विफल</strong></p>
<p>जल जीवन है जल के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। नगर निगम पानी की आपूर्ति करने में विफल हो रहा है। मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
पूजा</p>
<p><strong>उबाल कर पीना पड़ रहा पानी</strong></p>
<p>प्रतिदिन पानी उबाल कर पी रहे हैं। नगर निगम पानी उपलब्ध करवा नहीं पा रहा है, तो मजबूरन दूषित पानी को उबाल कर पीना पड़ रहा है। ऐसे में सिलेंडर की खपत भी दुगनी हो गई है।<br />
निशा</p>
<p><strong>आम आदमी नहीं खरीद सकता पानी</strong></p>
<p>आम आदमी खरीद कर पानी ला नहीं सकता, नलकों में पानी आ नहीं रहा है। ऐसे में बावड़ी ही विकल्प है। मजबूरन यही से पानी भरना पड़ता है।<br />
पल्लवी</p>
<p><strong>टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी</strong></p>
<p>पहले नगर निगम ने लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब पानी दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बावड़ी ही एक विकल्प था, यहां पर भी पानी पीने योग्य नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी लोगों को नहीं मिल रहा है।<br />
विरेंद्र कुमार</p>
<p>Photo/Representational </p>
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