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	<title>Tikender Panwar Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Tikender Panwar Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>खुलासा:गिरी परियोजना से शिमला शहर  तक 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/leakage-in-giri-water-scheme-for-shimla-city/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Oct 2016 14:32:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला शहर में गिरी परियोजना से आधे से भी कम पानी पहुंच रहा है। गिरी से रोजाना दो करोड़ लीटर पानी उठाया जा रहा है लेकिन शहर तक केवल 80 लाख लीटर पानी ही आ रहा है। 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद हो रहा है। इस बात का [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला शहर में गिरी परियोजना से आधे से भी कम पानी पहुंच रहा है। गिरी से रोजाना दो करोड़ लीटर पानी उठाया जा रहा है लेकिन शहर तक केवल 80 लाख लीटर पानी ही आ रहा है। 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी रास्ते में लीकेज में बर्बाद हो रहा है। इस बात का खुलासा आईपीएच और नगर निगम की वीरवार को हुई बैठक में हुआ। आईपीएच ने नगर निगम को आश्वस्त किया कि लीकेज बंद करने का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/13/shimla-water-shortage-giri-water-supply-scheme-leakage-being-fixed/" target="_blank">गिरी पेयजल योजना से रोजाना 4-6 एम एल डी पानी एक किलोमीटर के भीतर लीकेज मे हो रहा बर्बाद, पाइप बदलने का कार्य जारी: शिमला महापौर</a></p>
<p>आईपीएच का लक्ष्य 20 अक्तूबर तक सौ फीसदी काम पूरा करने का है। गिरी से पूरा पानी मिलने पर शहर में जल संकट नहीं रहेगा। नगर निगम के तहत आने वाले ऐसे इलाके जो अब तक सीवरेज कनेक्टिविटी से नहीं जुड़े हैं उन्हें जल्द कनेक्ट करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। इनमें टूटू और पंथाघाटी के तहत आने वाले मकान सबसे अधिक हैं। </p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-6" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7288" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-6-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>इन इलाकों में पीलिया फैलने का खतरा भी सबसे अधिक रहता है। शहर में व्यक्ति जितना पानी इस्तेमाल कर रहा है उतना ही वह बिल चुकाए इसके लिए पानी के मीटरों को जल्द लगाने का फैसला लिया गया है। मीटरों के लग जाने के बाद आम जनता को औसत बिल देने से छुटकारा मिल जाएगा। नगर निगम की यह बैठक आईपीएच के अधीक्षण अभियंता और अन्य अधिकारियों के साथ हुई। </p>
<p><strong>आठ साल बाद भी नहीं मुआवजा</strong></p>
<p>गिरी परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। केवल एक व्यक्ति को मुआवजा मिला है। पानी की लाइन से कुछ परिवार प्रभावित हो रहे हैं पानी की लीकेज से उनकी घासनियां बर्बाद हो रही है। कई बार प्रभावितों ने आईपीएच को इस बारे में अवगत करवाया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-7" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7289" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-7-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>ऐसे करीब बारह तेरह परिवार है इन्हें भी बैठक में बुलाया गया था। इनकी समस्या को सुना और संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस परियोजना से इनकी कितनी जमीन प्रभावित हो रही है इसका पूरा रिकार्ड जल्द दें ताकि प्रभावितों शीघ्र मुआवजा राशि दी जाए। </p>
<p>नगर निगम के उप महापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि प्रभावित परिवारों को साल 2008 से अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया यह हैरत की बात है केवल एक व्यक्ति को मुआवजा मिला है।<br />
<img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11.jpg" alt="mc-shimla-water-supply-giri-11" width="1024" height="576" class="alignnone size-full wp-image-7292" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/mc-shimla-water-supply-giri-11-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>यह मामला जब उनके ध्यान में आया तो प्रभावित परिवारों को भी बैठक में बुलाया गया था। इन्हें इनका हक शीघ्र देने का अब प्रयास किया गया है। गिरी परियोजना की लीकेज करीब 70 फीसदी ठीक हो गई है। 20 अक्तूबर तक सौ फीसदी ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। </p>
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		<item>
		<title>शिमला निगम महापौर ने 30% सीवरेज सेस के साथ पानी के बिल जारी करने पर लगायी रोक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/11/shimla-mc-sewerage-cess/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Jan 2016 06:54:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
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		<category><![CDATA[MC Commissioner Pankaj Rai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शहर की जनता को 30 फीसद सीवरेज सेस के साथ पानी का बिल जारी नहीं किया गया है। नगर निगम के महापौर संजय चौहान ने बिल जारी करने पर रोक लगा दी है। इस मामले को इस माह होने वाले मासिक बैठक में सदन में रखा जाएगा। सदन की मंजूरी के बाद ही फैसला [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शहर की जनता को 30 फीसद सीवरेज सेस के साथ पानी का बिल जारी नहीं किया गया है। नगर निगम के महापौर संजय चौहान ने बिल जारी करने पर रोक लगा दी है। इस मामले को इस माह होने वाले मासिक बैठक में सदन में रखा जाएगा। सदन की मंजूरी के बाद ही फैसला लिया जाएगा। असल में सरकार ने सेस 50 से कम कर 30 फीसद कर दिया है लेकिन नगर निगम ने इसे स्वीकार नहीं किया है।</p>
<p>निगम ने 15 फीसद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है मगर सरकार ने 30 फीसद सेस को मंजूरी दी है। ऐसे में अब दोबारा मासिक सदन में इस मामले पर हंगामा हो सकता है। 2005 की अधिसूचना के अनुसार शहर में 50 फीसद सीवरेज सेस देना अनिवार्य था। नगर निगम 15 फीसद सीवरेज सेस अदा करने का फैसला सदन में कर चुका है। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए हैं कि सेस 50 फीसद से कम किया जाए। सारा मामला अधिकारियों के हाथ में गया तो 30 फीसद करने का फैसला लिया गया। बैठक में नगर निगम के आयुक्त पंकज राय भी विशेष तौर से मौजूद रहे। उन्होंने 15 फीसद सेस करने की बात कमेटी के समक्ष रखी पर अधिकारियों ने निगम के तर्क को स्वीकार ही नहीं किया। साथ ही तर्क दिया कि नगर निगम सदन में 15 फीसद का फैसला लिया है। शहर में सीवरेज सेस की अधिसूचना पिछले 10 वष से इस अधिसूचना को नगर निगम शिमला लागू नहीं कर रहा था। नगर निगम का पंकज राय ने कार्यभार संभालते ही अधिसूचना को लागू करने का फैसला लिया मगर महापौर व उपमहापौर समेत सभी पार्षदों ने इसका विरोध किया।</p>
<p><strong>सेस पर हो रही राजनीति</strong></p>
<p>सीवरेज सेस को लेकर राजनीति भी काफी सक्रिय हो गई है। कांग्रेस समर्थित पार्षद सीवरेज सेस कम करवाकर वाहवाही लूटना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने सेस कम करने के आदेश पहले ही दिए थे तो उसके बाद कांग्रेस समर्थित पार्षद अगले दिन मुख्यमंत्री से मिले। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया। सीवरेज सेस का एक ऐसा मामला है जो कि शहर की 90 फीसद आबादी को प्रभावित कर रहा है। अगर सेस कम हो गया तो विपक्ष के पाले से अहम मुद्दा छिटक जाएगा। </p>
<p><em>&#8216;हमने 15 फीसद सीवरेज सेस करने की मांग रखी है। इससे अधिक हमें स्वीकार नहीं होगा। सदन का फैसला सर्वोपरी है।&#8217;</em><br />
-टिकेंद्र पंवर, उपमहापौर नगर निगम शिमला</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अब शिमला में भी ‘ऑड-ईवन’ की तैयारी, योजना बनाने में  जुटा नगर निगम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/06/odd-even-formula-in-shimla-city/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Jan 2016 10:38:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Odd-Even Formula]]></category>
		<category><![CDATA[Parking in Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla traffic]]></category>
		<category><![CDATA[Tikender Panwar]]></category>
		<category><![CDATA[Traffic Plan Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी में यातायात को कम करने और ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए नगर निगम दिल्ली की तर्ज पर सम-विषम फॉर्मूला शिमला में भी लागू कर सकता है। नगर निगम ऑड और ईवन फॉर्मूले को लेकर योजना बनाने में जुट गया है। एम.सी. से मिली जानकारी के मुताबिक यातायात को कम करने के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी में यातायात को कम करने और ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए नगर निगम दिल्ली की तर्ज पर सम-विषम फॉर्मूला शिमला में भी लागू कर सकता है। नगर निगम ऑड और ईवन फॉर्मूले को लेकर योजना बनाने में जुट गया है। एम.सी. से मिली जानकारी के मुताबिक यातायात को कम करने के लिए एम.सी. शिमला दिल्ली सरकार की इस पहल को शिमला में बिल्कुल कारगर मान रहा है। </p>
<p>प्रशासन का मानना है कि यदि प्रयोग सफल रहता है तो जल्द ही शिमला शहर में इस योजना को लागू किया जा सकता है। शिमला की आबादी 2 लाख से अधिक है जबकि करीब 25 हजार लोग यहां अन्य क्षेत्रों से आते हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था का प्रभावित होना लाजिमी है। उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि दिल्ली की तर्ज पर शिमला शहर में भी सम-विषम फॉर्मूले को शुरू किया जा सकता है। इस बारे में प्लान तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। ट्रैफिक से निजात पाने का यह एक बेहतर विकल्प है।<br />
<strong><br />
पार्किंग सुविधा की कमी बड़ी समस्या</strong><br />
शहर में पार्किंग की उचित व्यवस्था न होना भी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। हालांकि नगर निगम शहर के भीतर कई बड़ी पार्किंग का निर्माण कर रहा है, साथ ही वार्ड स्तर पर भी नगर निगम पार्किंग बनाने की योजना तैयार कर रहा है। पार्किंग की कमी के कारण भी शहर में यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/06/odd-even-formula-in-shimla-city/">अब शिमला में भी ‘ऑड-ईवन’ की तैयारी, योजना बनाने में  जुटा नगर निगम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नगर निगम ने सरकार पर लगाया 25 लाख दबाने का आरोप</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/07/mc-shimla-blame-hp-govt-over-amrit-mission/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2015 06:55:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[amrit mission]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[MC Shiml]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Smart City]]></category>
		<category><![CDATA[Tikender Panwar]]></category>
		<category><![CDATA[Urban Development Minister Sudhir Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: स्मार्ट सिटी परियोजना के बाद अब अमृत मिशन को लेकर भी प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रशासन आमने सामने आ गए हैं। नगर निगम ने प्रदेश सरकार पर अमृत मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिले 25 लाख रुपये दबाने का आरोप लगाया है। नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने शहरी विकास [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला: स्मार्ट सिटी परियोजना के बाद अब अमृत मिशन को लेकर भी प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रशासन आमने सामने आ गए हैं। नगर निगम ने प्रदेश सरकार पर अमृत मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिले 25 लाख रुपये दबाने का आरोप लगाया है।</p>
<p>नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को पत्र लिख कर अमृत मिशन के लिए सर्विस लेबल इंप्लिमेंटेशन प्लान बनाने को मिली 25 लाख रुपये की राशि जारी करने की मांग की है। टिकेंद्र पंवर ने अपने पत्र में कहा है कि बार बार आग्रह के बावजूद प्रदेश सरकार अमृत मिशन के तहत मिला पैसा नगर निगम को जारी नहीं कर रही है।</p>
<p>पहले शिमला शहर को गलत तरीके अपना कर स्मार्ट सिटी से बाहर कर दिया गया और अब जबकि शहर अमृत मिशन में शामिल हो गया है तो वांछित सहयोग नहीं दिया जा रहा। अमृत मिशन के तहत पैसा लेने के लिए नगर निगम को पहले सर्विस लेवल इंप्लिमेंटेशन प्लान तैयार करना है। यदि तय समय में प्लान तैयार नहीं होता तो मिशन के तहत मिलने वाली राशि लैप्स हो सकती है।</p>
<p>यदि पैसा लैप्स हुआ तो शहरी विकास विभाग की लापरवाही का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ेगा। लिहाजा नगर निगम के लिए यह पैसा जल्द जारी करना चाहिए ताकि इसे पैसे का सदुपयोग किया जा सके।</p>
<p><strong>गहरी नींद में है मंत्री का विभाग</strong></p>
<p>डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर का कहना है कि शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का महकमा गहरी नींद में है। नगर निगम की ओर से लगातार फोन कॉल, ई मेल और दर्जनों पत्रों से भी नींद नहीं खुल रही। पहले गलत तरीके अपनाकर शिमला से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट छीन लिया गया और अब अमृत मिशन के लिए सर्विस लेवल इंप्लिमेंटेशन प्लान के लिए आया पैसा नगर निगम को नहीं दिया जा रहा है।</p>
<p>शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कहना है कि एमसी के मेयर, डिप्टी मेयर की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण पहले स्मार्ट सिटी योजना शिमला के हाथ से फिसली और अब अगर यही हाल रहा तो अमृत मिशन का पैसा जाएगा। जहां तक बात रही 25 लाख की तो यह राशि तभी जारी होगी जब एमसी अमृत मिशन के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लेगा। नगर निगम को बताना होगा कि यह पैसा वह कहां खर्च करना चाहता है।</p>
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