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	<title>Monkey Culling Himachal Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Monkey Culling Himachal Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>बंदरों को वर्मिन घोषित कर मारने की अनुमति को ऐसिहासिक जीत बता हिमाचल किसान सभा मना  रही जशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/07/monkeys-declared-vermin-in-53-himachal-tehsils-to-allow-killing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Oct 2016 08:15:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हालाकिं हिमाचल किसान सभा बंदरों को वर्मिन घोषित करने के निर्णय को किसानों की जीत मान रही हो पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये मानवता की हार है! शिमला- प्रदेश के 53 विकास खण्डों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने के फैसले को लेकर हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हालाकिं हिमाचल किसान सभा बंदरों को वर्मिन घोषित करने के निर्णय को किसानों की जीत मान रही हो पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये मानवता की हार है!</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश के 53 विकास खण्डों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने के फैसले को लेकर हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव कुषाल भारद्वाज ने प्रदेशभर के किसानों के लम्बे संघर्श की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों विषेशकर बंदरों के प्रदेश भर में फैले आंतक व इससे मुक्ति के लिए विभिन्न सरकारों की उदासीनता के खिलाफ हिमाचल किसान सभा ने पिछले कई वर्षोंसे प्रदेश भर में निरंतर संघर्ष लड़ा, जिसमें अनेकों बार विधान सभा का घेराव भी शामिल है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Himachal-Kisan-Sabha.jpg" alt="Himachal Kisan Sabha" width="800" height="407" class="alignnone size-full wp-image-7836" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Himachal-Kisan-Sabha.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Himachal-Kisan-Sabha-300x153.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Himachal-Kisan-Sabha-768x391.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/10/Himachal-Kisan-Sabha-696x354.jpg 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>किसान सभा का यह भी कहना है कि बंदरों व सूअरों से मुक्ति दिलाने एवम् इन्हें वर्मिन घोषित करवाने की मांग पर जोगिन्दर नगर विधान सभा क्षेत्र की जोगिन्दर नगर व लडभड़ोल तहसीलों में तो अनेकों संघर्श लड़े। इसी वर्ष 18 मार्च को लगभग बारह सौ किसानों ने और 27 जून को लगभग दो हजार किसानों ने जोगिन्दर नगर में विषाल प्रदर्षन का आयोजन किया था। इसी वर्ष 26 अगस्त को शिमला में हुए विशाल  किसान प्रदर्षन में जोगिन्दर नगर से ही 800 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया था। </p>
<p>जिले की मंडी, पधर, सरकाघाट, धर्मपुर, चच्योट तहसीलों में भी किसान सभा ने संघर्श लड़ा। मनना है कि कुषाल भारद्वाज किसानों के के दबाव के कारण सरकार को बंदरों को वर्मिन घोषित करने का निर्णय लेना पड़ा। भारद्वाज ने इस जीत पर जोगिन्दर नगर, लडभड़ोल, पधर सरकाघाट व धर्मपुर तहसीलों के सभी किसानों समेत प्रदेष भर के किसानों को बधाई दी है। </p>
<p>सभा का कहना है कि अब जबकि बंदरों को वर्मिन घोशित किया जा चुका है तो सरकार को चाहिए कि सरकारी संसाधनों के बलबूते विभिन्न विभागों विषेशकर वन महकमें की जिम्मेवारी लगाकर सिद्वस्थ शिकारियों को इस काम पर लगाएं तथा बंदरों की साइंटिफिक किलिंग के लिए तुरंत अभियान चलाया जाए। सभा ने कहा कि अब आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए भी ठोस पहल करें तथा प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर गोसदनों का निर्माण कर उन्हें सरकारी संसाधनों से चलाया जाए।</p>
<p>हालाकिं हिमाचल किसान सभा बंदरों को वर्मिन घोषित करने के निर्णय को किसानों की जीत रही हो पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये मानवता की हार है!<
</p>
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		<title>अब बंदर मारने पर 500 रुपये, कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं, कोई भी मार सकता है गोली</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/21/monkey-culling-himachal-reward-for-killing-monkey-raised-to-rs-500/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Sep 2016 07:32:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>ज्ञात रहे की वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक ढंग नहीं अपनाया है जो की निन्दनियां है ! शिमला-हिमाचल में बंदरों के आतंक से निजात पाने के लिए लोगों से मांगे गए सुझावों पर चर्चा के लिए सोमवार को एक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता वनमंत्री [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ज्ञात रहे की वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक ढंग नहीं अपनाया है जो की निन्दनियां है !</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>हिमाचल में बंदरों के आतंक से निजात पाने के लिए लोगों से मांगे गए सुझावों पर चर्चा के लिए सोमवार को एक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने की।</p>
<p>बैठक में वन मंत्री ने बताया कि बंदरों को मारने पर अब तीन सौ रुपये के बजाय पांच सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा बैठक में तय हुआ कि बंदरों को आतंक से निपटने के लिए अब पंचायत स्तर पर नोडल टीमें गठित की जाएंगी।</p>
<p>ज्ञात रहे की वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक ढंग नहीं अपनाया है जो की निन्दनियां है !</p>
<p>यह टीमें वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से बंदरों को मारने के अलावा उन्हें भगाने और क्षेत्र विशेष तक सीमित रखने के लिए काम करेगी। बैठक के दौरान यह भी निर्णय हुआ कि बंदरों को वर्मिन घोषित कराने के साथ ही उनके एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए नए सिरे से केंद्र सरकार से संपर्क किया जाएगा।</p>
<p><strong>70 हजार बंदूकों के लाइसेंस, नहीं कर रहे शिकार</strong></p>
<p>प्रधान सचिव तरुण कपूर ने बताया कि प्रदेश में वैसे तो 70 हजार से ज्यादा बंदूकों के लाइसेंस जारी हुए हैं। लेकिन बंदूक चलाने या शिकार करने वालों की संख्या बेहद कम हैं। ऐसे में अब पंचायत स्तर पर टीम बनाई जाएगी ताकि शिकारी वर्मिन घोषित क्षेत्रों में बंदरों को मार सके।</p>
<p>बैठक के दौरान वन मंत्री व प्रधान सचिव वन के अलावा शिमला के महापौर संजय चौहान, वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।</p>
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		<title>जो बन्दर मारेगा वो ही दफनाएगा, जानिए बन्दर मारने के लिए किन नियमो का  करना होगा पालन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/02/rules-for-monkey-culling-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2016 09:36:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[HP Forest Dept]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे। शिमला- हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध दिए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बंदर को मारने वाले पर ही उसे दफनाने की भी जिम्मेदारी होगी। बंदरों को भले ही वर्मिन घोषित किया गया हो।</p>
<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या बच्चे वाली मादा को नहीं मार सकेंगे। बंदर पर निशाना साधने से पहले शिकारी को पता करना होगा कि मादा बंदर कहीं गर्भवती तो नहीं।</p>
<p><strong>कानूनी विवाद की सारी जिम्मेदारी बंदर मारने वाले पर </strong></p>
<p>बंदर अगर अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हुए है तो उसे भी नहीं मारा जा सकता। खास बात ये है कि बंदर को ऐसे मारा जाए जिससे बंदर पर निर्दयता न हो, यह कैसे संभव है इसका जिक्र गाइडलाइन में नहीं है।</p>
<p>सबसे दिलचस्प बात यह कि बंदर मारने के दौरान या बाद में अगर कोई कानूनी विवाद हुआ तो उसकी जिम्मेदारी भी बंदर मारने वाले पर होगी। ऐसे मामलों में वन विभाग पार्टी नहीं बनेगा। बंदर मारने के बाद संबंधित रेंज अफसर, फॉरेस्ट गार्ड को सूचना देनी होगी।</p>
<p>पहले से गठित कमेटी की निगरानी में बंदर को चयनित जगह पर ही दफनाया जाएगा। बंदर मारने से लेकर दफनाने तक वन विभाग सिर्फ मॉनीटरिंग रोल में रहेगा।</p>
<p><strong>तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने का प्रोसेस<br />
</strong><br />
बंदर मारने के बाद संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड, रेंज अफसर या डीएफओ को सूचित करना होगा। वन अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगा। इसके बाद बंदर को तय प्रक्रिया के तहत मारने वाले को दफनाना होगा। इसके बाद उसे तीन सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि मिलेंगे।</p>
<p>वर्मिन बंदरों को मारने के संबंध में एक प्रोटोकाल तैयार किया है। स्थानीय अफसरों के माध्यम से लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है ताकि मरने के बाद बंदर से किसी तरह की संक्रामक बीमारी न फैले। इसके लिए संबंधित रेंज व डिविजन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।- एसएस नेगी, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/02/rules-for-monkey-culling-in-himachal/">जो बन्दर मारेगा वो ही दफनाएगा, जानिए बन्दर मारने के लिए किन नियमो का  करना होगा पालन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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