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	<title>MC Shimla Commissioner Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>MC Shimla Commissioner Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला आयुक्त जनता को बताए मलेशिया दौरे से शहर मे क्या बदलाव लाने वाले है : कॉंग्रेस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 May 2016 15:12:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- जिला कॉंग्रेस कमेटी शिमला शहरी इकाई के महासचिव व उपप्रधान ने मलेशिया दौरे से वापस आए आयुक्त महोदय का स्वागत किया है और पूछा है कि आयुक्त महोदय शिमला की जनता को बताए की विदेश के दौरे से वह शिमला मे क्या बदलाव लाने वाले है? आयुक्त जो विदेशी दौरे से सीख कर आए [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> जिला कॉंग्रेस कमेटी शिमला शहरी इकाई  के महासचिव व उपप्रधान ने मलेशिया दौरे से वापस आए आयुक्त महोदय का स्वागत किया है और पूछा है कि आयुक्त महोदय शिमला की जनता को बताए की विदेश के दौरे से वह शिमला मे क्या बदलाव लाने वाले है? </p>
<p>आयुक्त जो विदेशी दौरे से सीख कर आए है उसे सार्वजनिक करे ताकि जनता भी जान सके कि हमारा निगम शहर कि जनता के लिए क्या योजनाए बना रहा है। कॉंग्रेस ने कहा कि आयुक्त सार्वजनिक करे की विदेश दौरो मे जो ट्रेनिंग लेकर वह आए है शिमला की जनता की समस्याओ को सुलझाने मे उन्हे  किस तरह अमल मे लाया जाएगा ?</p>
<p>कॉंग्रेस का यह भी कहना है कि ये बड़ी हैरानी का विषय है की आयुक्त महोदय विदेश से वापस भी आ गए जबकि महापौर अभी उसी स्टडि टूर पर है। कॉंग्रेस ने बताया कि करीब छ: माह पूर्व भी इसी तरह का विदेशी दौरा आयुक्त द्वारा किया गया था जिस पर मीडिया मे यह सफाई दी गई थी कि आयुक्त महोदय वहाँ से पानी कि लीकेज को जाँचने कि कोई नई तकनीक देख कर आए है जिस यंत्र द्वारा पानी कि लीकेज का तुरंत पता करके पानी कि बरबादी को रोका जा सकता है, परंतु आज तक न तो व यंत्र निगम मे दिखाई दिये न ही ऐसी  कोई तकनीक का ज़िकर दुबारा किया गया है। </p>
<p>कॉंग्रेस ने आरोप लगाया कि निगम मे स्टडी टूर के नाम पर इस तरह के विदेशी दौरो को बनया जा रहा है जिसका कोई भी ओचित्य नहीं है  , जिसका जनता कोई लाभ नहीं होने वाला अपितु जनता कि जेब से ऐश परस्ती कि जा रही है। कॉंग्रेस ने आरोप लगते हुए कहा की हवाई किले और हवाई यात्राए ही सीपीआईए(म) के महापौर व उपमहापौर कि पहचान बन गए है। </p>
<p>कॉंग्रेस ने कहा कि पिछले 4 वर्षो मे निगम के महापौर व उप-महापौर द्वारा तकरीबन 9 विदेशी दौरे किए जा चुके है।  निगम मे विकास के नायाब तरीको को सीखने के नाम पर सेर सपाटा ज़ोर पर है। </p>
<p>कॉंग्रेस का यह भी कहना है कि अपने पूरे कार्यकाल मे  महापौर व उपमहापौर द्वारा मीडिया मे केवल चिकनी चुपड़ी बाते ही की गई है व शहर की समस्याओ को दरकिनार करते हुए केवल अपने मन मर्जी  के पिकनिक स्पॉट पर यात्राए की जाती रही है, मलेशिया के दौरे के बाद महापौर चीन व हॉलैंड की यात्रा पर जाने को तेयार बेठे है  जनता की पानी की समस्या को सुलझाने के स्थान पर पिकीन सपाट का चयन जोरों पर है।</p>
<p>कॉंग्रेस का कहना है कि कि वे हिमाचल प्रदेश  सरकार से ये आग्रह करना चाहती है कि निगम के देश विदेश के दौरो पर लगाम लगाई जाए तथा निगम के यदि कोई स्टडि टूर बनाए जाते है तो उसपर किसी टेक्निकल स्टाफ का होना अनिवार्य किया जाए महज घूमने फिरने को देश विदेश कि यात्रों पर पूर्णता प्र्तिबंध लगाया जाए। निगम के सभी कर्मचारियों कि ज़िमेवारी सुनिश्चित कि जाये तथा अनावश्यक दौरो को तुरंत निरस्त किया जाए।</p>
<p>Photo: TNS</p>
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		<title>शिमला निगम ने बिना निरिक्षण थमा दिए सेप्टिक टैंक/सोक पिट न होने पर बिजली, पानी कनेक्शन काटने के नोटिस: विकास समिति टूटू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/02/mc-shimla-notice-to-homeowners-over-sceptik-tanksoak-pit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Mar 2016 12:40:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- विकास समिति टूटू के पदाधिकारियों का कहना है की इन दिनों शिमला शहर में पीलिया के बढ़ते प्रकोप से पीछा छुड़ाने के मकसद से नगर निगम शिमला ने टुटू निगम वार्ड के भवन मालिको को सीवरेज टैंकों की उचित व्यवस्था न होने के नोटिस भेजकर अपनी गेंद भवन मालिकों के पाले में डालने की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला-  विकास समिति टूटू के पदाधिकारियों का कहना है की इन दिनों शिमला शहर में पीलिया के बढ़ते प्रकोप से पीछा छुड़ाने के मकसद से नगर निगम शिमला ने टुटू निगम वार्ड के भवन मालिको को सीवरेज टैंकों की उचित व्यवस्था न होने के नोटिस भेजकर अपनी गेंद भवन मालिकों के पाले में डालने की कोशिश की है!</p>
<p>समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता व् महासचिव ठाकुर सिंह वर्मा ने एक सांझे ब्यान में कहा है कि स्थानीय भवन मालिकों ने उनके ध्यान में लाया है कि भवन मालिकों को आयुक्त नगर निगम की ओर से जारी नोटिस प्राप्त हुए हैं जिसमे उचित सेप्टिक टैंक व् सोक पिट न होने पर बिजली पानी के कनेक्शन काटने की धमकी दी गई है! </p>
<p>समिति अध्यक्ष ने कहा की जारी नोटिस में निगम स्टाफ द्वारा मौके का दौरा कर सैप्टिक टैंक सही न पाने की बात की गई है जो कि आधारहीन है! उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में टुटू निगम क्षेत्र के अधिकतर भवन मालिकों ने लाया है कि उनके घरों में नगर निगम का एक भी कर्मचारी और अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं आया है और नोटिस में जारी किया गया ब्यान आधारहीन है!</p>
<p>समिति अध्यक्ष का कहना है कि नोटिस में यह पूछा गया है कि क्या सैप्टिक टैंक ठीक से बना हुआ है,क्या सोकपिट बनाया गया है या सेप्टिक टैंक को कितनी मर्तवा खाली करवाया गया इसकी भी जानकारी भवन मालिक नोटिस के जवाब में दे! वहीँ  विकास समिति टुटू के पदाधिकारियों ने कहा है कि इस प्रकार की जानकारी निगम के संबंधित विभाग को अपने तकनीकी कर्मचारियों व अधिकारियों को तैनात कर भवन मालिको से लेनी चाहिए और मौके की टेकनीकल रिपोर्ट निरीक्षण के बाद देनी चाहिए ताकि पीलिया की रोकथाम सही प्रकार से हो सके!</p>
<p>समिति अध्यक्ष ने कहा कि नोटिस पढ़ने से तो ऐसा प्रतीत होता है कि सिर्फ कागजों की खानापूर्ती की जा रही है और सारी जिम्मेवारी भवन मालिकों के सिर पर डाल दी गयी है! उन्होंने कहा कि भवन मालिक यदि झूटी रिपोर्ट देकर अपना हित साधता है तो उससे पीलिया की रोकथाम नहीं होने वाली जिस उद्देश्य से निर्माणाधीन सेप्टिक टैंको की रिपोर्ट माँगी गई है! </p>
<p>गुप्ता ने कहा कि इलाके में भवन मालिकों ने सोकपिट बनाये है या नहीं या सीवरेज का गंदा पानी खुले में या सड़कों में बह रहा है इसकी रिपोर्ट नगर निगम खुद अनुभवी तकनीकी अधिकारियों व् कर्मचारियों को तैनात कर के तैयार करे! </p>
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		<title>जंग लगी मशीनों से हो रही शिमला पेयजल की जांच, शहर में सभी प्रयोगशालाएं चौपट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/24/jaundice-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jan 2016 11:22:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[HP State Pollution Control Board]]></category>
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		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शहर में पीलिया फैला है। पानी की तमाम जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने को राजधानी में स्थापित भी प्रयोगशालाएं खस्ताहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की प्रयोगशालाओं में जंग लगी मशीनों से पेयजल की जांच हो रही है। हालात इतने बदतर हैं कि रिपोर्ट टाइप करने तक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला- शहर में पीलिया फैला है। पानी की तमाम जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने को राजधानी में स्थापित भी प्रयोगशालाएं खस्ताहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की प्रयोगशालाओं में जंग लगी मशीनों से पेयजल की जांच हो रही है। हालात इतने बदतर हैं कि रिपोर्ट टाइप करने तक की व्यवस्था नहीं है।</p>
<p>पानी की जांच रिपोर्ट हाथ से लिख कर जारी की जा रही हैं। गलत रीडिंग दर्ज होने पर की गई कटिंग रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। </p>
<p>एक बार फिर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने अपनी नाकामियां छिपाने के लिए टीम को ढली स्थित प्रयोगशाला में एंट्री करने से रोका। गौरतलब है कि शहर में पीलिया के हर रोज पचास से साठ मामले आ रहे हैं।<br />
<strong><br />
डीडीयू लैब</strong></p>
<p>दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की लैब के बाहर टेस्ट करवाने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं। लैब के भीतर कर्मचारी मरीजों के सैंपल ले रहे हैं। पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब के दरवाजे के ठीक सामने आटोक्लेव मशीन लगाई गई थी। जिंदल कंपनी की सालों पुरानी इस मशीन में बुरी तरह जंग लगा हुआ है। पानी की जांच के लिए वाटर मीडिया तैयार करने में इस मशीन का इस्तेमाल होता है। लैब में पानी की जांच के बाद हाथ से रीडिंग नोट की जाती है।</p>
<p><strong>नगर निगम लैब</strong></p>
<p>रिज मैदान के पास नगर निगम की प्रयोगशाला में कर्मचारी ब्लड सैंपल की जांच कर रहे हैं। यह पूछने पर कि पानी के सैंपलों की जांच कैसे की जाती है। कर्मचारी ने लैब की अलमारी से क्लोरीन की जांच में इस्तेमाल होने वाला उपकरण क्लोरोस्कोप निकाल कर दिखाया।</p>
<p>क्लोरोफार्म की जांच के लिए आटोक्लेव मशीन भी लैब में मौजूद थी। डीडीयू की आटोक्लेव मशीन की तुलना में नगर निगम की मशीन की हालत बेहतर थी, हालांकि मशीन में तैयार किए गए वाटर मीडिया की ट्यूब, जंग लगी स्टैंड में रखी गई थी।</p>
<p><strong>आईपीएच लैब ढली</strong>  आईपीएच की लैब में तैनात कर्मचारियों ने यह कह कर टीम को भीतर आने से रोक दिया कि ‘बड़े साहब के आदेश हैं, मीडिया वालों को अंदर न आने दिया जाए’ कर्मचारियों ने आग्रह किया कि उनकी नौकरी का सवाल है कृपया भीतर न जाएं।</p>
<p>कर्मचारियों में अपने अफसरों का खौफ साफ दिख रहा था। अपनी नालायकी छिपाने के लिए आईपीएच के बड़े अधिकारियों ने लैब में तैनात कर्मचारियों को मीडिया से बात तक न करने के निर्देश दिए थे। इसलिए मीडिया कर्मियों से कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर बात तक नहीं की। न ही किसी तरह की कोई टिप्पणी की।</p>
<p><strong>राजधानी में पीलिया 30 नए मामले</strong></p>
<p>राजधानी शिमला में शनिवार को पीलिया के 30 नए मामले सामने आए। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि यह मामले शहर के तीनों अस्पतालों में उपचार के लिए आए पीलिया रोगियों के पॉजिटिव मामलों के आंकड़े हैं। अब तक एक हजार से अधिक लोग पीलिया की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>वहीं घोड़ा चौकी से डीडीयू अस्पताल में पीलिया का टेस्ट करवाने आए नरेश कुमार ने बताया कि कुछ दिनों से पीलिया रोग ने शहर में कोहराम मचा रखा है। उन्हें भी पीलिया हुआ है इसलिए टेस्ट करवाने आए हैं। समरहिल से डीडीयू लैब में पीलिया का टेस्ट करवाने आए अनिल और चांदनी ने बताया कि उनके क्षेत्रों से भी भारी संख्या में रोग पीलिया रोग की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>अस्पताल में रोजाना भारी संख्या में पीलिया के रोगी उनके क्षेत्रों से उपचार के लिए आ रहे हैं। लक्कड़ बाजार में रहने वाले मुश्ताक ने बताया कि उपचार के लिए अस्पताल आया हूं। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें भी पीलिया रोग न हो जाए इसलिए टेस्ट करवाने आया हूं।</p>
<p><strong>इलाज से संतुष्ट नहीं पीलिया के मरीज</strong></p>
<p>शहर में फैले पीलिया ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों को कटघरे में ला खड़ा किया है। डीडीयूएच की मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति रोष प्रकट करते हुए एक होटल में कार्यरत अर्की के पीलिया पीड़ित टेकचंद ने बताया कि वह एक सप्ताह से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p>लेकिन उन्हें उचित इलाज नहीं मिल रहा। उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं है। इस कारण उनकी सेहत दिनप्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। बेटे के इलाज के लिए आए पंथाघाटी निवासी पंकज शर्मा ने बताया कि उन्हें अस्पताल में लंबी कतारों में धक्के खाने पड़े। बाद में टेस्ट के लिए लिखा लेकिन तब तक समय हो चुका था।</p>
<p>बताया कि अस्पताल प्रशासन सिफारिशों के बल पर मरीजों का इलाज कर रहा है। इसकी शिकायत वह डीसी से कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई मांगेंगे। पनीश गांव की सत्या देवी ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज को लेकर कोताही बरतने और महंगी दवाइयों के नाम पर ठगने का आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>सीवरेज प्लांट के लिए नहीं बनी सड़क, कैसे हटे मैला</strong></p>
<p>विजय खाची, शिमला। मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर नीचे है। शोधन के बाद हर रोज सैकड़ों कुंतल सूखा मैला यहां जमा होता है। इसे हटाने के लिए प्लांट तक एक सड़क चाहिए ताकि ट्रक में भरकर इसे बाहर निकाला जाए। लेकिन जब से प्लांट लगा तब से यहां कोई सड़क नहीं बनी।</p>
<p>मैला वहीं पड़ा रहता है और बारिश में यह पानी के साथ बह कर अश्वनी खड्ड की तरफ चला जाता है। हिमाचल हाईकोर्ट ने जुलाई 2009 को आदेश दिए दिए थे यहां तुरंत सड़क बनाई जाए। लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही देखिए सड़क के लिए एक गैंती तक नहीं चली।</p>
<p>सड़क न बनाने की वजह जो भी रही हो लेकिन यह तय है कि सरकार में बैठे जिम्मेदार अफसरों को आम जनता के स्वास्थ्य की कितनी चिंता है। ट्रीटमेंट प्लांट को सड़क से जोड़ना इसलिए जरूरी था ताकि यहां से स्लज की ढुलाई गाड़ी से की जा सके। सड़क न होने से स्लज प्लांट के पास ही पड़ा है।</p>
<p>बारिश के दौरान यह रिसकर अश्वनी खड्ड की ओर जाने वाले नाले में मिल जाता है। शासन में बैठे हुक्मरानों और अफसरों के खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करती है इस पर जनता की नजरें टिकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि मल्याणा सीवरेज प्लांट तक जब सड़क की सुविधा ही नहीं है तो प्लांट से स्लज को कैसे किसी दूसरी जगह पर ले जाया जाता।</p>
<p>आईपीएच के सामने ऐसी क्या दिक्कतें थी कि वह आज तक सड़क नहीं निकाल पाया। जन एवं सिंचाई स्वास्थ्य विभाग शिमला के अफसरों ने कभी मल्याणा सीवरेज प्लांट तक सड़क का निर्माण करने की जरूरत नहीं समझी। क्या अफसरों को लगता है कि खुले में जमा स्लज को खड्ड में बहाना चाहिए।</p>
<p><strong>ठेकेदार पुलिस की पकड़ से दूर, अग्रिम जमानत की फिराक में</strong></p>
<p>गिरफ्तारी के डर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। जमानत पर 27 जनवरी को सुनवाई होगी। अदालत ने शनिवार को इस मामले में गिरफ्तार जेई प्रणीत कुमार और सुपरवाइजर मनोज वर्मा को भी पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस हिरासत में 48 घंटे रहने पर आरोपी डीम्ड सस्पेंड हो गए हैं।</p>
<p>पुलिस की अब पूरी कोशिश है कि वह ठेकेदार को गिरफ्तार कर लें ताकि इस मामले से जुड़े कई और सफेदपोशों के चेहरों से पर्दा उठ पाए। हालांकि शुरुआती पूछताछ में एसआईटी को पकड़े गए आरोपी से कई अहम जानकारियां मिली हैं जो इस केस में कई और अफसरों को जांच के दायरे में लाकर खड़ा कर रहे हैं।</p>
<p>एसआईटी अब तक ठेकेदार को पकड़ नहीं पाई है। ठेकेदार के परिजनों से पूछताछ की गई है। पुलिस को अंदेशा है कि परिजनों को ठेकेदार के बारे में पता है। आरोपी जेई और सुपरवाइजर ने पूछताछ में खुद को बेकसूर बताया है। ठेकेदार पर आरोपों का ठीकरा फोड़ा है। आईपीएच कर्मचारी संघ भी गिरफ्तारी के विरोध में आ गए हैं। उपायुक्त को ज्ञापन सौंप कर कहा गया है कि बेवजह निचले स्तर के कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में खराब मशीनों और दूसरी कमियों के बारे में आईपीएच के उच्च अफसरों को इत्तला कर दी गई थी इस स्थिति में पुलिस उन अफसरों को गिरफ्तार करें और कर्मचारियों को तंग न करें। उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन पुलिस अधीक्षक को आगामी कार्रवाई के लिए दे दिया है।</p>
<p>अगर ठेकेदार आने वाले दिनों में पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता तो आरोपी को जमानत के लिए 27 जनवरी को खुद पेश होना होगा। इस मामले में शिकायत कर्ता डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर के भी आने वाले दिनों में एसआईटी बयान लेगी। उधर, इस बारे में एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि दोनों आरोपी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर हैं और ठेकेदार की तलाश की जा रही है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य विभाग भी लेगा पानी के सैंपल</strong></p>
<p> शहर में बढ़ते पीलिया मामलों को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी पूरे जिले भर में पानी के सैंपल लेने जा रहा है। यह जिम्मेवारी विभाग ने बीएमओ को सौंप गई है और वह अपने रोजाना पानी के सैंपल लेकर पानी की गुणवत्ता जांच करेंगे। स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि आईपीएच, नगर निगम के साथ स्वास्थ्य महकमा भी पानी के सैंपल एकत्र करेगा।</p>
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		<title>अश्वनी खड्ड सीवरेज प्लांट देख दंग रह गई केंद्रीय टीम, योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी हो रहा संचालन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/13/ashwani-khad-inspection-by-central-mission-team/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Jan 2016 08:04:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Malyana Sewage Treatment plant]]></category>
		<category><![CDATA[MC Shimla Commissioner]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला शहर में भारत मिशन के तहत निरीक्षण करने पहुंची केंद्र की तीन सदस्यीय टीम अश्वनी खड्ड में बने सीवरेज प्लांट को देखकर दंग रह गई। टीम के सदस्य हैरान थे कि सीवरेज का ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी संचालन हो रहा है। टीम ने रिपन अस्पताल और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला शहर में भारत मिशन के तहत निरीक्षण करने पहुंची केंद्र की तीन सदस्यीय टीम अश्वनी खड्ड में बने सीवरेज प्लांट को देखकर दंग रह गई। <em>टीम के सदस्य हैरान थे कि सीवरेज का ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता योग्य एवं आधुनिक न होने के बाद भी संचालन हो रहा है। </em>टीम ने रिपन अस्पताल और नगर निगम का भी दौरा किया। </p>
<p>मंगलवार को टीम के तीन सदस्य पहले मल्याणा स्थित अश्वनी खड्ड के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पानी के सैंपल भी लिए। फिर ढली के प्लांट का भी निरीक्षण किया। इसके साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछा कि आखिर पीलिया का शिकार शहर की जनता हो रही है। ऐसे में आप किस क्षेत्र और किस माध्यम का पेयजल स्त्रोत इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन भी लोगों से पूछताछ की है। उनका पूरा पता टीम ने अपने रिकॉर्ड में रखा है, साथ ही साथ खुले में बहने वाली सीवरेज को मुआयना किया। </p>
<p>हालांकि टीम स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी को अपने साथ नहीं ले जा रही है। अकेले ही हर मौके का निरीक्षण कर रही है। टीम ने रिपन अस्पताल की लैब का निरीक्षण भी किया है। जहां पर पीलिया के टेस्ट हो रहे थे। उन्होंने इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर चिंता जताई है। टीम अभी दो दिन तक शिमला में ही रहेगी। देर शाम को टीम ने नगर निगम आयुक्त पंकज राय के साथ बैठक की । बैठक में पिछले एक साल में शहर में स्वच्छता को लेकर क्या क्या प्रयास किए गए। इसमें कितना सुधार हुआ है। इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में स्वच्छता मिशन को लेकर क्या योजना बनाई गई है। </p>
<p><strong>पीलिया पर फोकस है टीम</strong></p>
<p>पिछले दो दिनों से शिमला में पहुंची टीम मुख्य तौर पर पीलिया को लेकर काफी चिंतित है। सोमवार शाम को आते ही सबसे रिपन में पीलिया के मामले का औचक निरीक्षण लिया था। मंगलवार सुबह भी टीम ने उन क्षेत्रों को दौरा किया जहां से अधिकतर पीलिया ग्रस्त मरीज है। यहां से पानी के सैंपल लिए है। इन्हें दिल्ली जांच के लिए ले जाया जाएगा। </p>
<p>टीम शिमला के विभिन्न हिस्सों को औचक निरीक्षण किया है। टीम के साथ बैठक हुई है। इसके स्वच्छता मिशन के तहत हुए कार्यो के बारे में समीक्षा की गई है।</p>
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