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	<title>kullu Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>kullu Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>बिलासपुर : बलोह टोल प्लाजा के पास पति -पत्नि 4 किलो चरस के साथ गिरफ्तार, जांच जारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 12:13:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बिलासपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बिलासपुर: पुलिस थाना घुमारवीं की टीम ने बलोह टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी के दौरान 4.053 किलोग्राम चरस के साथ एक दंपती को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार कार मे सवार दंपती मंडी की तरफ से आ रहे थे। पुलिस ने जब कार को जांच के लिए रोका तो वे दोनों पुलिस को देखकर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर:</strong> पुलिस थाना घुमारवीं की टीम ने बलोह टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी के दौरान 4.053 किलोग्राम चरस के साथ एक दंपती को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार कार मे सवार दंपती मंडी की तरफ से आ रहे थे। पुलिस ने जब कार को जांच के लिए रोका तो वे दोनों पुलिस को देखकर घबरा गए। शक होने पर जब पुलिस ने कार की तलाशी ली तो डिग्गी से 4.053 किलोग्राम चरस बरामद की गई।</p>
<p>आरोपी की पहचान टेक सिंह निवासी गांव रोपा, डाकघर मंगलौर तहसील बंजार जिला कुल्लू के रूप में हुई है। साथ ही कार चालक की पत्नी प्रेमलता (30 वर्ष) को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने जानकारी देते हुए बताया कि इन दो लोगों की गिरफ़्तारी के अलावा बाद में तीसरे साथी को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में कुल तीन गिरफ्तारियां हुई है और जांच जारी है।</p>
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		<title>कुल्लू के अवैध कब्जाधारियों ने वन विभाग की जमीन पर बना डाले होटल व हट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/22/kullu-forest-area-encroachment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Nov 2016 09:58:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Pradesh High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कसोल में पैसा कमाने के लिए अवैध कब्जाधारियों के नए फार्मूले का खुलासा कुल्लू- हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद वन विभाग ने अवैध कब्जेधारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिला कुल्लू के कसोल में कब्जाधारियों के नए कारनामे सामने आए हैं। यहां पर कुछ लोगों ने वन विभाग की बेशकीमती भूमि [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कसोल में पैसा कमाने के लिए अवैध कब्जाधारियों के नए फार्मूले का खुलासा</strong></p>
<p><strong>कुल्लू-</strong> हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद वन विभाग ने अवैध कब्जेधारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिला कुल्लू के कसोल में कब्जाधारियों के नए कारनामे सामने आए हैं। यहां पर कुछ लोगों ने वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर होटल व हट बनाकर कई सालों के लिए लीज पर चढ़ा दिए हैं। इसका खुलासा तब हुआ है, जब वन विभाग ने इस भूमि की डिमार्केशन की। अब जिन लोगों ने लीज पर होटल व हट अवैध कब्जाधारियों से लिए हैं, उनमें भी हड़कंप मच गया है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/great-himalayan-national-park-illegal-encroachments/" target="_blank">पढ़ें: चौकाने वाला खुलासा: ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 1000 बीघा से अधिक जमीन पर अवैध कब्जे</a></p>
<p>वहीं, वन विभाग ने तुरंत जमीन को खाली करने के नोटिस अवैध कब्जाधारियों के साथ-साथ लीज धारकों को भी थमा दिए हैं। बता दें कि प्रदेश के जिला कुल्लू में किए गए अवैध कब्जों पर एक और होशियारी सामने आई है कि अवैध कब्जाधारियों ने इन पर हट की तरह बनाए गए छोटे-छोटे घरों को लीज पर दे दिया है। अवैध कब्जों पर धन कमाने के लिए बड़े-बडे़ कब्जाधारियों ने इस फार्मूले का इस्तेमाल किया है। अभी तक फिलहाल वन विभाग के हाथ इस तरह का एक मामला लगा है। बताया जा रहा है कि जिला कुल्लू की विभिन्न जगहों पर इस तरह के कई और मामले हैं, जिनका भी जल्द खुलासा होने वाला है। विभाग की कार्रवाई से अवैध कब्जाधारियोें में हड़कंप मच गया है।</p>
<p>गौर रहे कि जिला कुल्लू के मनाली, बंजार, कुल्लू, सैंज, मणिकर्ण आदि कई स्थानों पर लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। हालांकि जिला कुल्लू के मणिकर्ण को छोड़कर अन्य इलाकों में ज्यादातर लोगों ने अवैध भूमि कब्जाकर बागीचे तैयार किए हैं। कई अवैध कब्जों को वन विभाग ने छुड़वा भी लिया है। मणिकर्ण की बात करें तो यहां पर वन भूमि पर अवैध रूप से जमीन कब्जाकर लोगों ने आलीशान महल बनाए हैं। यही नहीं, वन भूमि पर कब्जा कर छोटे-छोटे हट भी बनाए गए हैं, जिन्हें लाखों में लीज पर दिया गया है। जानकारी के अनुसार अवैध कब्जाधारी ने बीघे के हिसाब से अवैध कब्जा कर रखा है।</p>
<p><strong>अवैध कब्जों पर 32 घर</strong></p>
<p>विभागीय जानकारी के मुताबिक मणिकर्ण घाटी में 32 के करीब घर अवैध कब्जा कर बनाए गए हैं। विभाग ने ऐसे मात्र तीन कब्जों को छुड़ाया है, लेकिन अभी 29 कब्जे वन विभाग के पास छुड़वाने बाकी रह गए हैं।</p>
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		<title>कुल्लू घाटी की  हवा निरंतर होती जा रही जहरीली, 239 % तक बढ़ा वायु प्रदूषण</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/12/air-pollution-in-kullu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2016 12:47:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Air Pollution]]></category>
		<category><![CDATA[DR J C Kuniyal]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
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		<category><![CDATA[National Institute of Himalayan Environment and Sustainable Development Mohal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्‍लू- दिवाली पर अंधाधुंध पटाखे व आतिशबाजी के बाद वहां वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या है जिसका असर अब कुल्लू घाटी में भी होने लगा है ! कुल्लू घाटी की हवा निरंतर जहरीली होती जा रही है! अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा व दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में वायु प्रदूषण 239.45 प्रतिशत तक बढ़ गया। मौहल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्‍लू-</strong> दिवाली पर अंधाधुंध पटाखे व आतिशबाजी के बाद वहां वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या है  जिसका असर अब  कुल्लू घाटी में भी होने लगा है ! कुल्लू घाटी की हवा निरंतर जहरीली होती जा रही है! अंतरराष्ट्रीय कुल्लू  दशहरा व  दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में  वायु प्रदूषण 239.45 प्रतिशत तक बढ़ गया। मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान की ओर से दशहरा एवं दिवाली से पहले और उसके बाद एकत्रित किए गए आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं।</p>
<p>आंकड़े के अनुसार वायु प्रदूषण के दो महत्वपूर्ण मानकों एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ एओडी और पारटीकुलेट मैटर पीएम यानि वायुमंडलीय कणों की मात्रा के ये आंकड़े कुल्लू घाटी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए घातक हैं। दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में एओडी के स्तर में 35 प्रतिशत और पीएम के स्तर में 337 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 23 सितंबर को घाटी की आबोहवा में एओडी लगभग 0.34 था, लेकिन दशहरा से लेकर दिवाली 31 अक्तूबर को यह 0.46 तक पहुंच गया।</p>
<p>इसी प्रकार 23 सितंबर को पीएम का स्तर 31.7 था जोकि दशहरा से दिवाली की रात 30 अक्तूबर को 138.7 तक पहुंच गया। इसके अलावा वायु मंडल में सभी तत्वों के मिश्रण (टीएसपी) की मात्रा भी 239.56 प्रतिशत तक बढ़ी है। 23 सितंबर तक कुल्लू घाटी की टीएसपी का स्तर 45.6 था। जो 31 अक्तूबर में 154.8 तक पहुंचा।</p>
<p>किसी भी स्थल या शहर में प्रदूषण के स्तर को मापने के मुख्यत दो मानक होते हैं। पीएम तथा एओडी या एओटी। हवा में मौजूद प्रदूषित पदार्थों को पारटीकुलेट मैटर यानि पीएम कहा जाता है। यह प्रदूषण को मापने का उचित पैमाना है। इसके अलावा एओडी (एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ) या एओटी (एयरोसोल ऑप्टिकल थिकनेस) के आधार पर भी हवा की शुद्धता का पता लगाया जा सकता है।</p>
<p>मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.जेसी कुनियाल द्वारा किए गए शोध में चौंकाने वाले प्रदूषण की मात्रा को रोकने या इसके स्तर को कम करने के लिए ग्रीन बेल्ट का होना जरूरी है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जंगलों का संरक्षण, जंगलों में आगजनी को रोकना, वन कटान पर अंकुश के साथ वाहनों पर कंट्रोल आदि उपाय हो सकते हैं। उनके मुताबिक कुल्लू घाटी में बढ़ता प्रदूषण मुनष्य के जीवन के लिए खतरनाक है और इसे कैंसर जैसी बीमारी के साथ खांसी, गले की बीमारी हो सकती है।</p>
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		<item>
		<title>चौकाने वाला खुलासा:  ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 1000 बीघा से अधिक जमीन पर अवैध कब्जे</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/great-himalayan-national-park-illegal-encroachments/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Nov 2016 13:52:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्लू-विश्व धरोहर घोषित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में अवैध कब्जों ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पार्क में अवैध कब्जों की स्थिति ने सभी को चौंका दिया है। पार्क प्रबंधन हालांकि पहले अवैध कब्जों के प्रति उदासीन रहा, लेकिन बाद में अवैध कब्जों को चिन्हित करने के दबाव के चलते इस दिशा में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/great-himalayan-national-park-illegal-encroachments/">चौकाने वाला खुलासा:  ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 1000 बीघा से अधिक जमीन पर अवैध कब्जे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्लू-</strong>विश्व धरोहर घोषित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में अवैध कब्जों ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पार्क में अवैध कब्जों की स्थिति ने सभी को चौंका दिया है। पार्क प्रबंधन हालांकि पहले अवैध कब्जों के प्रति उदासीन रहा, लेकिन बाद में अवैध कब्जों को चिन्हित करने के दबाव के चलते इस दिशा में प्रयास तेज हुए तो 40 अवैध कब्जे पाए गए।</p>
<p>इन अवैध कब्जों के जरिए कब्जाधारकों ने 1000 बीघा से अधिक जमीन हड़पी हुई है। 1171 वर्ग किलोमीटर में फैले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में गोरल, लैपर्ड, स्नो लैपर्ड, कस्तूरी मृग सहित विभिन्न प्रजातियों के जंगली जानवर मौजूद हैं। पक्षियों की यहां 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के लिए विख्यात ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में अवैध कब्जों ने अधिकारियों की भी नींद उड़ा रखी है। नेशनल पार्क में खीरगंगा क्षेत्र को भी जोड़ा जा रहा है। इसका पूरा खाका तैयार कर दिया गया है, जैसे ही खीरगंगा क्षेत्र ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क से जुड़ जाएगा तो 710 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और बढ़ जाएगा। नेशनल पार्क में चिह्नित 40 अवैध कब्जों में फैसले आ चुके हैं। इनमें निशानदेही की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अन्य 23 मामले विचाराधीन हैं। मामलों को निपटाने की प्रक्रिया चल रही है।</p>
<p>2014 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। देश-विदेश से लोग इस पार्क को निहारने के लिए पहुंचते हैं। पार्क में ईको टूरिज्म की व्यवस्था के प्रबंधों के बीच चलने के लिए भी रास्ते चिह्नित किए गए हैं। ट्रैकिंग रूट्स भी अलग चिह्नित हैं और रहने व कैंपिंग के लिए स्थानों की अलग से व्यवस्था है। शोधार्थी भी यहां का रुख करते हैं।</p>
<p>नेशनल पार्क में 40 अवैध कब्जे चिह्नित हैं, जिनमें 17 में फैसले दे दिए गए हैं और उस जमीन को पार्क ने अपने कब्जे में लेने के लिए मुहिम शुरू कर दी है। अन्य 23 मामलों को निपटाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।</p>
<p>एम कृपा शंकर, डीएफओ, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल की ये बेटी सेलिंग बोट में विश्व का चक्कर लगा रचेगी इतिहास</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/25/lieutenant-commander-pratibha-jamwal-kullu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Jul 2016 07:36:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Navy]]></category>
		<category><![CDATA[kullu]]></category>
		<category><![CDATA[Lieutenant Commander Pratibha Jamwal]]></category>
		<category><![CDATA[Pratibha Jamwal]]></category>
		<category><![CDATA[Ravi Jambal]]></category>
		<category><![CDATA[Women Empowerment]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- देवभूमि की बेटी सेलिंग बोट में विश्व का चक्कर लगा इतिहास रचने जा रही हैं। जी हां हिमाचल की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्बाल इतिहास रचने जा रही हैं। कुल्लू शहर के मौहल क्षेत्र से संबंध रखने वाली प्रतिभा सागर की परिक्रमा कर विश्व का चक्कर लगाएगी। रोमांच और साहसिक गतिविधियों से भरी इस [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  देवभूमि की बेटी सेलिंग बोट में विश्व का चक्कर लगा इतिहास रचने जा रही हैं। जी हां हिमाचल की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्बाल इतिहास रचने जा रही हैं। कुल्लू शहर के मौहल क्षेत्र से संबंध रखने वाली प्रतिभा सागर की परिक्रमा कर विश्व का चक्कर लगाएगी। रोमांच और साहसिक गतिविधियों से भरी इस यात्रा में  प्रतिभा समेत देश के अन्य राज्यों से छह सदस्य होंगी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy.jpg" alt="Indian Navy" width="759" height="422" class="alignnone size-full wp-image-6615" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy.jpg 759w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-300x167.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-696x387.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-755x420.jpg 755w" sizes="(max-width: 759px) 100vw, 759px" /></p>
<p>खासियत यह है कि सागर परिक्रमा के लिए इंडियन नेवी की तरफ से पहली बार महिला टीम जा रही है। छह सदस्यीय टीम में हिमाचल से कुल्लू की प्रतिभा ने स्थान बनाया है। आठ माह तक जारी रहने वाली सागर परिक्रमा सेलिंग बोट में होगी। विश्वभर का चक्कर काटकर सेलिंग वोट वापस भारत लौटेगी। इससे पहले दो बार सागर परिक्रमा की जा चुकी हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal.jpg" alt="Pratibha Jamwal" width="3397" height="2027" class="alignnone size-full wp-image-6616" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal.jpg 3397w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-300x179.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-768x458.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-1024x611.jpg 1024w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-696x415.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-1068x637.jpg 1068w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Pratibha-Jamwal-704x420.jpg 704w" sizes="(max-width: 3397px) 100vw, 3397px" /></p>
<p><strong>हवाओं के रुख के साथ चलती है बोट</strong></p>
<p>लेकिन दोनों ही बार टीम में पुरुष थे। यह पहली बार है कि महिलाओं की टीम को प्रतिभा का लोहा मनवाने का मौका मिला है। सेलिंग बोट में किसी भी तरह का इंजन नहीं होता है। हवाओं के रुख के साथ ही बोट चलती है। प्रतिभा को नेवी में शुरुआत से ही सेलिंग बोटिंग का शौक रहा है। इसमें प्रतिभा अपने हुनर का लोहा भी मनवा चुकी हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy.jpg" alt="INSV Mhadei Indian Navy" width="800" height="601" class="alignnone size-full wp-image-6621" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-300x225.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-768x577.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-265x198.jpg 265w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-696x523.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-Indian-Navy-559x420.jpg 559w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><br />
इन दिनों ट्रेनिंग जारी है। टीम अगले साल अगस्त में रवाना होगी। बताया जा रहा है कि विश्वभर में अभी तक किसी भी नेवी की तरफ से महिला टीम को सागर परिक्रमा के लिए नहीं भेजा गया है। महिलाओं की टीम द्वारा सागर परिक्रमा करना महिला सशक्तिकरण की तरफ एक और कदम माना जा रहा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei.jpg" alt="INSV Mhadei" width="800" height="530" class="alignnone size-full wp-image-6619" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-300x199.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-768x509.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-696x461.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/INSV-Mhadei-634x420.jpg 634w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p><strong>बेहद कठिन है सागर परिक्रमा</strong></p>
<p>लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्बाल ने कहा कि ऐतिहासिक टीम का हिस्सा होना गौरवान्वित करता है। ऐसा मौका आसानी से नहीं मिल पाता है। यह मेरे लिए बेहद खास है। यह सपने को सच करने जैसा है। वहीं, प्रतिभा के पिता रवि जम्बाल ने कहा कि बेटी का सागर परिक्रमा के लिए चयन होना खुशी भरा है। बेटी प्रतिभा पर उन्हें नाज है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei.jpg" alt="Indian Navy Women-Crew- Mhadei" width="800" height="452" class="alignnone size-full wp-image-6618" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei-300x170.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei-768x434.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei-696x393.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/Indian-Navy-Women-Crew-Mhadei-743x420.jpg 743w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>सागर परिक्रमा को बेहद कठिन माना जाता है। सेलिंग बोट में होने वाली सागर परिक्रमा के लिए खुद को तैयार करना पड़ता है। सागर परिक्रमा के तहत निर्धारित किलोमीटर तय करने होते हैं। आठ माह तक सेलिंग बोट में सफर तय कर परिक्रमा करने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।</p>
<p>Photos: Indian Express/Shyamgopan/The Hindu/In Today</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/25/lieutenant-commander-pratibha-jamwal-kullu/">हिमाचल की ये बेटी सेलिंग बोट में विश्व का चक्कर लगा रचेगी इतिहास</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>ब्यास में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक रिवर रॉफ्टिंग पर पूर्ण प्रतिबन्ध, जल स्तर बढ़ने से हादसों का बढ़ा डर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/02/ban-on-river-rafting-on-beas-river-due-to-monsoon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Jul 2016 12:54:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- मानसून की दस्तक के साथ जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग अलर्ट हो गया है। बरसाती मौसम में कोई अनहोनी न हो, इसके लिए 15 जुलाई से ब्यास की धारा पर रिवर राफ्टिंग की गतिविधियां अगले दो माह तक के लिए बंद रहेंगी। इस बीच अगर मौसम खराब रहा और ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  मानसून की दस्तक के साथ जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग अलर्ट हो गया है। बरसाती मौसम में कोई अनहोनी न हो, इसके लिए 15 जुलाई से ब्यास की धारा पर रिवर राफ्टिंग की गतिविधियां अगले दो माह तक के लिए बंद रहेंगी। इस बीच अगर मौसम खराब रहा और ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ा तो तय समय से पहले भी रॉफ्टिंग को बंद किया जा सकता है। </p>
<p>बहरहाल, अभी ब्यास की धारा में करीब 200 राफ्टें विभिन्न राफ्टिंग प्वाइंटों में चल रही हैं। जिसमें रोजाना सैकड़ों सैलानी ब्यास की धारा में अठखेलियां कर रहे हैं। हालांकि अब समर सीजन ढलान पर है और रिवर राफ्टिंग करने वाले लोगों की संख्या में कमी आ गई है। लेकिन पर्यटन सीजन के यौवन पर रहने से रोजाना 1500 से 2000 पर्यटक इसका आनंद लेते आए हैं। राफ्टिंग गतविधियों से जुड़े 225 गाइडों समेत करीब 700 युवा इस रोजगार से जुड़े हैं।</p>
<p>इस साल अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ है। विभाग ने उन्हीं रॉफ्टर संचालकों को लाइसेंस दिए हैं, जो रिवर रॉफ्टिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हैं। बरसात के मौसम को देखते हुए 15 जुलाई से 15 सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंद रहेगा। इसके अलावा रा¨फ्टग मौसम पर निर्भर रहेगी। राफ्टिंग का आनंद लेने वाले सैलानियों की जान को कोई खतरा न हो। इसके लिए बनाई गई तकनीकी कमेटी समय-समय पर राफ्टों का निरीक्षण करती है। इसमें तय मानकों के रूप खासकर रॉफ्टिंग जैकेट व हेलमेट उम्दा होने चाहिए और सभी राफ्टरों को इन मानकों के तहत के लाइसेंस दिए गए हैं।</p>
<p>रतन गौतम, जिला पर्यटन अधिकारी</p>
<p><strong>ये हैं रॉफ्टिंग प्वाइंट</strong></p>
<p>ब्यास नदी की धारा में रायसन, बेबली तथा पिरड़ी मुख्य राफ्टिंग प्वाइंट हैं। पीक सीजन होने पर इन जगहों पर राफ्टिंग के शौकीनों का खूब हुजूम रहता है, लेकिन अब समर सीजन ढलान पर है। ऐसे में रिवर राफ्टिंग का आनंद उठाने वालों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है।</p>
<p>Photo: Triplords</p>
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		<item>
		<title>कुल्लू में 1978 से निर्माणाधीन 6 किलोमीटर लंबी सड़क आज दिन तक नहीं हो पाई पूरी, फिर भी मुख्यमंत्री जी ने कर दिया उद्घाटन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/29/virbhadra-inaugurates-bridge-on-road-under-construction-since-1978/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jun 2016 07:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
		<category><![CDATA[District kullu]]></category>
		<category><![CDATA[Himanshu Bisht]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लोगों में रोष है कि जब सड़क ही अधूरी है तो इस पुल का क्या फायदा उन्हें मिलेगा शिमला- हिमाचल के जिला कुल्‍लू में वर्ष 1978 से निर्माणाधीन छह किलोमीटर लंबी सड़क आज दिन तक पूरी नहीं हो पाई है। हालांकि इस सड़क पर बने पुल का रविवार को लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री से [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लोगों में रोष है कि जब सड़क ही अधूरी है तो इस पुल का क्या फायदा उन्हें मिलेगा</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल के जिला कुल्‍लू में वर्ष 1978 से निर्माणाधीन छह किलोमीटर लंबी सड़क आज दिन तक पूरी नहीं हो पाई है। हालांकि इस सड़क पर बने पुल का रविवार को लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री से बाकायदा उद्घाटन करवा दिया।</p>
<p>वहीं लोगों में रोष है कि जब सड़क ही अधूरी है तो इस पुल का क्या फायदा उन्हें मिलेगा। वे तो आज भी पैदल ही सफर करने के लिए बाध्य है, आपात स्थिति में उन्हें मरीज को अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी आती हैं।</p>
<p>स्थानीय निवासी टेक राम, जगदीश ठाकुर और योगराज का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने आनन-फानन में पुल से आगे आधा किलोमीटर सड़क का निर्माण कर तारकोल बिछा दिया है। तलाड़ा पुल का निर्माण विभाग ने सिर्फ मुख्यमंत्री के लिए किया है।</p>
<p>सड़क को पुल से कुछ दूरी आगे तक पक्का किया गया। जहां पर मुख्यमंत्री ने उठाऊ पेयजल योजना का शिलान्यास किया। इसके आगे की सड़क बुरी तरह से उखड़ी हुई है और इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। यह सड़क चलने योग्य तक नहीं है।</p>
<p><strong>अभी भी चारपाई पर उठा ले जाते हैं मरीज</strong></p>
<p>देवगढ़ गोही और भलाण-2 के सैकड़ों लोगों को सड़क सुविधा नहीं होने के कारण खासी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में ग्रामीणों के अधिकतर उत्पाद घर पर भी सड़ जाते हैं और गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे चारपाई में उठाकर लाना पड़ता है।</p>
<p>लोक निर्माण विभाग 1978 से आज दिन तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से तलाड़ा-कुड़ागाड़ सड़क का कार्य शीघ्र करवाने की मुख्यमंत्री से मांग की है।</p>
<p>इस संदर्भ में लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता हिमांशु विष्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री ने पुल का उद्घाटन कर दिया है। अब बचा हुआ सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर दिया जाएगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>प्रतिबंध  के बाद भी हिमाचल में  हो रहा है प्लास्टिक का  प्रयोग, नॉन वोवेन बैग में  पाया जाता है 98% प्लास्टिक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/03/non-woven-bags-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jun 2016 13:53:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
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		<category><![CDATA[Sandeep Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक प्रयोग पर राज्य सरकार तलब शिमला- हिमाचल में प्लास्टिक बैन होने के बाद भी इसके इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कुल्लू निवासी द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक प्रयोग पर राज्य सरकार तलब</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल में प्लास्टिक बैन होने के बाद भी इसके इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कुल्लू निवासी द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पारित किए। </p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://यहां तक कि हिमाचल में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद  भी इससे पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल सका" target="_blank">यहां तक कि हिमाचल में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद  भी इससे पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल सका</a></p>
<p>मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव सहित सचिव गृह और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। पत्र में आरोप लगाया है कि हिमाचल एक ऐसा प्रदेश है, जिसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंध है। यह एक ऐसा राज्य है, जहां पर नॉन वोवेन बैग बनाए जाते हैं, जिसमें कि 98 प्रतिशत प्लास्टिक पाया जाता है। इस तरह के बैग दिल्ली में वर्ष 2008 से प्रतिबंधित है।</p>
<p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी इस तरह के बैग के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि नॉन वोवेन बैग में प्लास्टिक पाया जाता है। बावजूद इसके हिमाचल एक ऐसा राज्य है, जहां पर इस तरह के बैग बनाने वाली 40 से अधिक फैक्टरियां हैं। प्रार्थी ने अदालत से गुहार लगाई है कि प्रदेश में प्लास्टिक के इस्तेमाल न करने के बारे में राज्य सरकार को सख्त आदेश पारित किए जाएं।</p>
<p>File Photo: Himachal Watcher </p>
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			</item>
		<item>
		<title>कुल्लू घाटी के लिए अगस्त से  दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर के बीच एयर इंडिया शुरू करेगा एक और विमान सेवा, 7,000  रुपये प्रति सीट होगा किराया</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/01/air-india-starts-one-more-new-flight-to-kullu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jun 2016 15:04:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्लू- कुल्लू घाटी के लिए अगस्त से एक और हवाई सेवा शुरू होने जा रही है। पहले से ही दिल्ली-भुंतर के बीच अपनी सेवा दे रही एयर इंडिया अब दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर के बीच नई विमान सेवा शुरू कर रही है। हालांकि एयर इंडिया के भुंतर कार्यालय ने चंडीगढ़ से भुंतर के बीच अतिरिक्त 70 सीटर विमान [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/01/air-india-starts-one-more-new-flight-to-kullu/">कुल्लू घाटी के लिए अगस्त से  दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर के बीच एयर इंडिया शुरू करेगा एक और विमान सेवा, 7,000  रुपये प्रति सीट होगा किराया</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्लू-</strong>  कुल्लू घाटी के लिए अगस्त से एक और हवाई सेवा शुरू होने जा रही है। पहले से ही दिल्ली-भुंतर के बीच अपनी सेवा दे रही एयर इंडिया अब दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर के बीच नई विमान सेवा शुरू कर रही है। हालांकि एयर इंडिया के भुंतर कार्यालय ने चंडीगढ़ से भुंतर के बीच अतिरिक्त 70 सीटर विमान सेवा शुरू करने की प्रपोजल एयर इंडिया के दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजी है। यहां से दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर के बीच इस सेवा को शुरू करने के भी संकेत मिले हैं। एयर इंडिया अगस्त से सेवा शुरू करने का विचार कर रहा है। लेकिन भुंतर एयरपोर्ट स्थित एयर इंडिया के कार्यालय ने अपनी प्रपोजल में विमान सेवा को जुलाई से ही शुरू करने की मांग की है। एयर इंडिया के इस 70 सीटर विमान की अतिरिक्त उड़ान से कुल्लू-मनाली के पर्यटन कारोबार को और भी पंख लगेंगे।</p>
<p>भुंतर स्थित एयर इंडिया के स्टेशन मैनेजर दिनेश भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली-भुंतर के बीच पहले से ही 70 सीटर विमान सेवा चल रही है। ऐसे में उन्होंने कुल्लू से चंडीगढ़ के बीच एयर इंडिया की अतिरिक्त हवाई उड़ान शुरू करने की प्रपोजल भेजी है। वह इसकी स्वीकृति का इंतजार करे रहे हैं। हालांकि एयर इंडिया के मुख्यालय से दिल्ली-चंडीगढ़-भुंतर नई विमान सेवा अगस्त से शुरू करने के संकेत मिले हैं।</p>
<p><strong>सात हजार होगा भुंतर-चंडीगढ़ का किराया</strong></p>
<p>एयर इंडिया के भुंतर कार्यालय से चंडीगढ़-भुंतर के बीच उड़ान शुरू करने की प्रपोजल के अनुसार भुंतर से चंडीगढ़ के बीच का किराया सात हजार रुपये प्रति सीट होगा। इस उड़ान में 60 से 65 सवारियां दोनों तरफ के लिए उड़ान भर सकती हैं।</p>
<p><strong>हवाई सेवाओं से और चमकेगा पर्यटन कारोबार</strong></p>
<p>मनाली होटलियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप ठाकुर ने कहा कि एसोसिएशन घाटी के लिए ज्यादा से ज्यादा हवाई उड़ानें शुरू करने की पहले से मांग उठा रही है। एयर इंडिया की अतिरिक्त उड़ान से घाटी में पर्यटन कारोबार को और बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p>Photo: Himachal Travel Blog</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अब ऊना, बिलासपुर, मंडी, सुंदरनगर, व कुल्लू जिले में भी चलेंगी सीएनजी बसें, सीएनजी स्टेशन भी किए जाएंगे स्थापित</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/23/cng-buses-in-himachal-now-mandi-sundernagar-una-bilaspur-kullu-also-in-list/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Apr 2016 08:14:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[ऊना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- रोहतांग के अलावा अब ऊना, बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, कुल्लू जिले में सीएनजी बसें चलेंगी। इन जिलों में सीएनजी स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे। एनजीटी के आदेशानुसार प्रदेश सरकार की ओर से रोहतांग के लिए सीएनजी बसें चलाने के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। परिवहन मंत्री जीएस बाली ने यह जानकारी शुक्रवार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/23/cng-buses-in-himachal-now-mandi-sundernagar-una-bilaspur-kullu-also-in-list/">अब ऊना, बिलासपुर, मंडी, सुंदरनगर, व कुल्लू जिले में भी चलेंगी सीएनजी बसें, सीएनजी स्टेशन भी किए जाएंगे स्थापित</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  रोहतांग के अलावा अब ऊना, बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, कुल्लू जिले में सीएनजी बसें चलेंगी। इन जिलों में सीएनजी स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे। एनजीटी के आदेशानुसार प्रदेश सरकार की ओर से रोहतांग के लिए सीएनजी बसें चलाने के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है।</p>
<p>परिवहन मंत्री जीएस बाली ने यह जानकारी शुक्रवार को नई दिल्ली में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ बैठक में दी। बाली ने कहा कि राज्य सरकार सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रोहतांग दर्रे के लिए पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए सीएनजी बसें चलाने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय गैस प्राधिकरण प्राइवेट लिमिटेड (गेल) की ओर से ऊना जिले के टाहलीवाल और मनाली में सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। इसके लिए गेल ने 17.50 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश सरकार से मांगी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इन स्टेशनों को स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध करवा रही है। सीएनजी बसें प्रदेश के विभिन्न भागों ऊना, बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी और कुल्लू से होकर गुजरेंगी। इन सभी स्थानों पर सीएनजी स्टेशन स्थापित होंगे।</p>
<p><strong>गेल के प्रस्ताव में खामियां</strong></p>
<p>परिवहन मंत्री ने कहा कि गेल के प्रस्ताव में कुछ खामियां हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि गेल हिमाचल प्रदेश सरकार की मदद से इस संबंध में पुन: से बिजनेस मॉडल तैयार करेगा। टाहलीवाल और मनाली के साथ साथ ऊना, बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी और कुल्लू में सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बैठक में हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग के सचिव आरएन बत्ता भी इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p>Representational Image </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/23/cng-buses-in-himachal-now-mandi-sundernagar-una-bilaspur-kullu-also-in-list/">अब ऊना, बिलासपुर, मंडी, सुंदरनगर, व कुल्लू जिले में भी चलेंगी सीएनजी बसें, सीएनजी स्टेशन भी किए जाएंगे स्थापित</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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