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	<title>IGMC  Administration Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>IGMC  Administration Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>सावधान: आइजीएम्सी में घूम रहा फर्जी डॉक्टरों का गिरोह, सस्ता इलाज कराने के नाम पर लोगों से ठगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Jul 2016 12:56:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[Deputy MS Shimla IGMC]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आइजीएम्सी में फर्जी डॉक्टरों के गिरोह घूमने का मामला सामने आया है। ये गिरोह मरीजों को सस्ता इलाज कराने के नाम पर उनसे ठगी करता है। यही नहीं फर्जी चिकित्सकों ने अपना मोबाईल नंबर भी मरीजों को दे रखा था जिसपर उनसे संपर्क किया जा सके। ये फर्जी चिकित्स्क [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आइजीएम्सी में फर्जी डॉक्टरों के गिरोह घूमने का मामला सामने आया है। ये गिरोह मरीजों को सस्ता इलाज कराने के नाम पर उनसे ठगी करता है। यही नहीं फर्जी चिकित्सकों ने अपना मोबाईल नंबर भी मरीजों को दे रखा था जिसपर उनसे संपर्क किया जा सके।</p>
<p>ये फर्जी चिकित्स्क अस्पताल के सभी वार्डो में घूमते है और मरीजों व तीमारदारों को अपना शिकार बनाते है। आईजीएमसी प्रशासन को मामले की सूचना मिलते ही सभी को अलर्ट कर दिया है और मामले की जाँच की जा रही है।</p>
<p><strong>जानिए क्या है मामला </strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक अस्पताल में पिछले कई दिनों से फर्जी चिकित्सकों का गिरोह काम कर रहा है जो मरीजों और तीमारदारों को अपना शिकार बना कर उनसे ठगी कर रहा था। मामले का पता तब चला जब गुरुवार रात को सर्जरी विभाग में दो डॉक्टर सुरेश और खयला जो की फर्जी है मरीजों को झांसा दे रहे थे और उनसे सस्ते उपकरण दिलाने की बात कर रहे थे तभी मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मी की नजर उस चिकित्स्क पर पड़ी लेकिन जब सुरक्षा कर्मी ने डॉक्टर की नेम प्लेट देखी तो उसमे सुरेश लिखा हुआ था।</p>
<p>सुरक्षा कर्मी ने यह बात अन्य चिकित्स्क को बताई। लेकिन मौके पर तैनात चिकित्सक व नर्स ने साफ कहा की इस तरह का कोई डॉ अस्प्ताल में नहीं है। गौरतलब है की आईजीएमसी में 1500 के लगभग चिकत्सक काम करते हैं लेकिन उमने से अधिकतर चिकत्सक ड्यूटी के समय भी ना तो अपना सफेद कोट डालते हैं और ना ही उनके पास कोई पहचान पत्र होता है। ऐसे में फर्जी चिकित्सक बनकर कोई भी आसानी से ठगी कर सकता है।   </p>
<p>इस सम्बन्ध में आईजीएमसी के डिप्टी एमएस ड्रॉ राहुल रॉय ने कहा कि अस्पताल में फर्जी डॉक्टर होने का मामला सामने आया है मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा की उनके पास दो फोन नंबर भी है जो पुलिस को दे दिया गया है उसे ट्रेस कर आसानी से उनतक पहुंचा सकेगा।</p>
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		<title>आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Food and Civil Supplies Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC  Administration]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Used Syringes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक सिरिंज की सूई मुड़ी हुई थी, जबकि एक अन्य सिरिंज में कुछ बाल मिले हैं। खराब सप्लाई मिलने के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने तुरंत सिरिंज की सप्लाई को रोक दी। स्टॉक को भी वापस कर दिया।</p>
<p><strong>जान से क्यों किया जा रहा खिलवाड़</strong></p>
<p>आईजीएमसी में खराब सिरिंज आने का मतलब सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इसमें एक सिरिंज में कुछ खून के धब्बे भी थे, मगर अधिकारियों का दावा है कि सिरिंज में वैक्यूम नहीं बन रहा था। ऐसे में सप्लाई को बंद किया गया है। मामले में अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी को एक मोहलत देकर छोड़ दिया गया है।</p>
<p><strong>सिविल सप्लाई को दिया है काम</strong></p>
<p>आईजीएमसी में सिरिंज की सप्लाई का कार्य सिविल सप्लाई काे दिया गया है। सिविल सप्लाई ही कंपनी को सिरिंज सप्लाई के लिए टेंडर करती है। रोजाना आईजीएमसी में आपातकाल समेत अन्य वार्डों में आने वाले सैकंडों मरीजों का ब्लड इन्हीं सिरिंज से लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सप्लाई आईजीएमसी में खराब सिरिंज की सप्लाई कर रहा है। यह सिरिंज आईजीएमसी के अपातकाल के अलावा आॅपरेशन थियेटर, वार्डों में में भी सप्लाई की जाती हैं।</p>
<p><strong>प्रशासन की लापरवाही</strong></p>
<p>खराब सिरिंज मामले की आईजीएमसी के विभिन्न वार्डों में दिनभर चर्चा रही। हर वार्ड में नर्सें व डाॅक्टरों के बीच खराब सिरिंज का मामला गर्माया रहा। हालांकि खुलकर इस मामले में कोई सामने नहीं आया। सूत्रों की माने तो इस तरह की सिरिंज पहले भी कई बार आईजीएमसी में आ चुकी है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। मामले में अधिकारियों का तर्क यह भी है कि आईजीएमसी में कई नर्सिंग काॅलेज से प्रशिक्षु नर्सें आती हैं। उन्हें ठीक ढंग से इंजेक्शन लगाना नहीं आता। ऐसे में सप्लाई के खराब होने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><strong>पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</strong></p>
<p>आईजीएमसी में इससे पहले भी यूज्ड सिरिंज का मामला आ चुका है। इससे पहले भी सितंबर, 2014 एक मरीज का तीमारदार ट्यूब काउंटर से सिरिंज खरीद कर लाया था, जैसे ही माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के लैब तकनीशियन ने सिरिंज का पैकेट खोला तो उसमें खून की कुछ बूंदें मौजूद थी। यह सिरिंज एक निजी काउंटर से लाई गई थी। उस समय भी प्रशासन ने काउंटर को सील कर दिया था। इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा था। अब दोबारा से खराब सिरिंज का मामला आने से सवालिया निशान उठने लगे हैं।</p>
<p>Photo: Trib Wpix/ Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/">आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>आईजीएमसी में घटिया स्तर की डेंटल चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख गोलमाल का अंदेशा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/igmc-shimla-dental-chair-scam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Feb 2016 08:14:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC  Administration]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Corruption]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Dental Chair Scam]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Dental College]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-डेंटल कालेज आईजीएमसी में डेंटल चेयर्ज खरीद में बड़ा गोलमाल सामने आया है। इन चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख तक के गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है। चेयर्ज खरीद में इस गड़बड़ी का पता उस समय चला जब यह दो जगह इंस्टाल हो चुकी थी। जब चेयर्ज तीसरी जगह इंस्टाल होने लगी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/09/igmc-shimla-dental-chair-scam/">आईजीएमसी में घटिया स्तर की डेंटल चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख गोलमाल का अंदेशा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong> शिमला</strong>-डेंटल कालेज आईजीएमसी में डेंटल चेयर्ज खरीद में बड़ा गोलमाल सामने आया है। इन चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख तक के गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है। चेयर्ज खरीद में इस गड़बड़ी का पता उस समय चला जब यह दो जगह इंस्टाल हो चुकी थी।</p>
<p>जब चेयर्ज तीसरी जगह इंस्टाल होने लगी तो इस बात का खुलासा हुआ कि ये वो चेयर्ज नहीं,जिसकी मंजूरी आरकेएस की बैठक में ली गई थी। बल्कि जो चेयर्ज मंजूर हुई थी, उसके मुकाबले यह चेयर्ज काफी निम्न स्तर की थी। इतना ही नही, जो चेयर्ज कालेज पहुंची, वह मंजूर हुई चेयर्ज के मुकाबले 20 हजार तक सस्ती थी।</p>
<p>पहली खेप में ऐसी 10 डेंटल चेयर्ज पहुंच चुकी थी। ऐसे में हर चेयर्ज पर सप्लायर 20 हजार बचाने के चक्कर में था यानी 10 चेयर्ज पर 20 लाख की बचत या गड़बड़ी। इस गोलमाल को अस्पताल प्रशासन काफी हल्के में ले रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि गलती से ऑर्डर की गई चेयर्ज की जगह दूसरी चेयर्ज आ गई।</p>
<p>इस बात का पता चलते ही चेयर्ज वापस कर दी गई, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऑर्डर की गई चेयर्ज की जगह घटिया स्तर की चेयर्ज सप्लाई करने वालों के खिलाफ अस्पताल क्यों कार्रवाई से गुरेज कर रहा है।</p>
<p>आरकेएस बैठक में दो स्तर की चेयर्ज पर बनी थी सहमति  पिछले वर्ष 18 सितंबर को आरकेएस की बैठक हुई थी। इसमें 40 डेंटल चेयर्ज को खरीदने का प्रस्ताव पास हुआ था। इनमें एक मॉडल की कीमत दो  लाख 40 हजार थी, जबकि दूसरी एक लाख 70 हजार के आसपास थी। दोनों ही किस्म की चेयर्ज डेंटल कालेज की जरूरतों के हिसाब से सही था। </p>
<p>आरकेएस का यह प्रस्ताव सरकार के पास गया और वहां से 2 लाख 40 हजार वाले मॉडल पर मंजूरी मिली। इसके बाद 10 चेयर्ज की और मंजूरी ली गई। गनीमत है कि पहली 10 चेयर्ज में ही इस बात का खुलासा हो गया कि चेयर्ज वो नहीं जो मंगवाई गई बल्कि उससे घटिया स्तर की है। अगर 50 की 50 चेयर्ज आ जाती तो यह गोलमाल कहीं और ज्यादा होता।<br />
<strong>Photo :Representational Image</strong></p>
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