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	<title>HPPCB Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HPPCB Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>मंडी प्रशासन के नाक तले एनजीटी के आदेशों का उलंघन, सुकेती  खड्ड  में फेंका जा रहा मलबा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/27/illegal-dumping-in-suketi-khad-in-mandi-district/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Oct 2016 14:44:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Public Works Department]]></category>
		<category><![CDATA[HPPCB]]></category>
		<category><![CDATA[Mandi City Council]]></category>
		<category><![CDATA[Suketi Khad Illegal Dumping]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मंडी- जिला मुख्यालय में प्रशासन के नाक तले एनजीटी के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है। शहर के बाईपास के समीप सुकेती खड्ड में दिनरात मलबा फेंका जा रहा और प्रशासन चैन की नींद सोया हुआ है। नगर परिषद की रामनगर वार्ड के लोगों ने बीती रात जागकर काटी। रामनगर के ठीक सामने बाइपास [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंडी-</strong>  जिला मुख्यालय में प्रशासन के नाक तले एनजीटी के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है। शहर के बाईपास के समीप सुकेती खड्ड में दिनरात मलबा फेंका जा रहा और प्रशासन चैन की नींद सोया हुआ है।</p>
<p>नगर परिषद की रामनगर वार्ड के लोगों ने बीती रात जागकर काटी। रामनगर के ठीक सामने बाइपास पर पूरी रात ट्रैक्टरों से मलबे की डंपिंग की जाती रही। टिप्परों के डाले को खोलने व मलबे को पलटने से आने वाली तीखी आवाजों के कारण लोग रातभर नहीं सो सके। बीमार व बुजुर्ग लोग पूरी रात परेशान रहे। लोगों ने आवाजें देकर व टार्च आदि से रोशनी करके इन्हें ललकारा भी, मगर रात 11 से सुबह सात बजे तक बदस्तूर यह सिलसिला जारी रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने (एनजीटी) के साफ आदेश है कि किसी भी खड्ड व नाले या नदी में मलबे की डंपिंग नहीं हो सकेगी। ऐसा करने पर एक लाख जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना करने की शक्तियां प्रशासन, पुलिस, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, वन, लोक निर्माण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को दी गई हैं। बावजूद इसके इन आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए यहां दिन रात डंपिंग की जा रही है।</p>
<p>रामनगर के स्थानीय लोगो ने पुलिस को भी फोन पर सूचना दी गई तथा कार्रवाई करने की मांग की गई। इन लोगों ने बताया कि यह मलबा रामनगर में ही बनाए जा रहे एक प्लाट से उठाया जा रहा था जो कुछ ही दूरी पर जाकर फेंका गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सात टिप्पर इस अवैध डंपिंग के कार्य को अंजाम दे रहे थे। </p>
<p>आधा शहर इससे परेशान हो उठा था। मगर पुलिस प्रशासन को यह नजर नहीं आया। लोगों का कहना है कि उन्हें किसी के प्लाट बनाने से एतराज नहीं है, मगर कम से कम मलबा तो डंपिंग साइट पर या ऐसी जगह फेंका जाए जहां पर आबादी न हो या फिर दिन के समय यह काम किया जाए, ताकि लोगों की नींद हराम न हो। लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन ने इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की तो वे सीधे एनजीटी व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को इसकी शिकायत भेजेंगे।</p>
<p>उधर, शहरी पुलिस चौकी प्रभारी राम लाल ठाकुर का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। अवैध रूप से सुकेती खड्ड में मलबा फेंकने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल की 8 नदियों का पानी प्रदूषित, सबसे अधिक प्रदूषित हिस्सा ब्यास नदी का</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/20/himachal-pradesh-rivers-pollution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Oct 2016 09:26:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Central Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[himachal rivers]]></category>
		<category><![CDATA[HPPCB]]></category>
		<category><![CDATA[Industrial Waste]]></category>
		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती खड्ड, बिनवा और मारकंडा नदियों के पानी में बॉयोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड तय मानकों से कम पाया गया।</p>
<p>सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार इस दूषित पानी में किसी भी तरह के जीव-जंतुओं के अलावा मनुष्यों के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। मनुष्य अगर लगातार इस पानी का सेवन करें तो वह कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाएगा। </p>
<p>ब्यास नदी सबसे ज्यादा 80 किलोमीटर एरिया में प्रदूषित होकर बह रही है। हिमाचल की आठ नदियों के 12 स्ट्रैच को प्रदूषित आंका गया है। इन 12 स्थानों में नदी के जल में सुधार लाने के लिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। हिमाचल की आठ नदियों का 136 किलाेमीटर का स्ट्रैच प्रदूषित पाया गया है।<br />
<strong>कहां पर कितना हिस्सा प्रदूषित</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>नदी</th>
<th>प्रदूषित स्ट्रैच</th>
<th>कस्बा</th>
<th>किलोमीटर</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>ब्यास</td>
<td>कुल्लू से गोपीपूर </td>
<td>स्नोट, कुल्लू</td>
<td>80</td>
</tr>
<tr>
<td>टौंस</td>
<td>किलाड़ से तिलवारी</td>
<td>डांडा, हरिपूर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरसा</td>
<td>नालगढ़ से सोलन</td>
<td>सोरी, रडयाली</td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>स्वां</td>
<td>ऊना से संतोषगढ</td>
<td>अरनैला, प्रेमनगर</td>
<td>10</td>
</tr>
<tr>
<td>सुखना</td>
<td>सुखना से परमाणू</td>
<td>भगवानपूरा, किशनगढ </td>
<td>15</td>
</tr>
<tr>
<td>सुकेती</td>
<td>मंडी से बैहना</td>
<td>समखेतर,करतापूर </td>
<td>6</td>
</tr>
<tr>
<td>बिनवा</td>
<td>पपरोला से बैजनाथ</td>
<td>खतरेहड</td>
<td>5</td>
</tr>
<tr>
<td>मारकंडा</td>
<td>कालाअंब से नारायणपूर </td>
<td>कालाअंब, आगली</td>
<td>4</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>इसमें से ब्यास नदी का सबसे अधिक 80 किलोमीटर का स्ट्रेच प्रदूषित पाया गया है। पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने का मतलब यह है कि पानी में किसी ऑक्सीजन की कमी है और किसी प्रकार का जीव इसमें जीवित नहीं रह सकता। देश भर में सीपीसीबी की ओर से मॉनिटर की गई नदियों में से 275 नदियों में प्रदूषण पाया गया है। सीपीसीबी ने 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित राज्यों की 445 नदियों को मॉनिटर किया था। इनमें से 302 स्ट्रैच में बीओडी के स्तर को सही नहीं आंका गया है।</p>
<p><strong>प्रदूषण के कारण</strong></p>
<p>नदियों में जल प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट और सीवरेज है। नदियों में प्लास्टिक और कूड़ा कचरा फेंके जाने से प्रदूषण बढ़ गया है। नदियों में मरे हुए पशु, नदियों के किनारे मल जल का त्याग करने और पशुओं को नहलाना से भी पानी की गुणवत्ता में असर पड़ता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>प्रतिबंध  के बाद भी हिमाचल में  हो रहा है प्लास्टिक का  प्रयोग, नॉन वोवेन बैग में  पाया जाता है 98% प्लास्टिक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/03/non-woven-bags-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jun 2016 13:53:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Ban polythene]]></category>
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		<category><![CDATA[HPPCB]]></category>
		<category><![CDATA[kullu]]></category>
		<category><![CDATA[Mansoor Ahmad Mi]]></category>
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		<category><![CDATA[Non Biodegradable]]></category>
		<category><![CDATA[Polythene Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Sandeep Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक प्रयोग पर राज्य सरकार तलब शिमला- हिमाचल में प्लास्टिक बैन होने के बाद भी इसके इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कुल्लू निवासी द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक प्रयोग पर राज्य सरकार तलब</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल में प्लास्टिक बैन होने के बाद भी इसके इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कुल्लू निवासी द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पारित किए। </p>
<p>ये भी पढ़ें: <a href="http://यहां तक कि हिमाचल में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद  भी इससे पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल सका" target="_blank">यहां तक कि हिमाचल में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद  भी इससे पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल सका</a></p>
<p>मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव सहित सचिव गृह और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। पत्र में आरोप लगाया है कि हिमाचल एक ऐसा प्रदेश है, जिसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंध है। यह एक ऐसा राज्य है, जहां पर नॉन वोवेन बैग बनाए जाते हैं, जिसमें कि 98 प्रतिशत प्लास्टिक पाया जाता है। इस तरह के बैग दिल्ली में वर्ष 2008 से प्रतिबंधित है।</p>
<p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी इस तरह के बैग के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि नॉन वोवेन बैग में प्लास्टिक पाया जाता है। बावजूद इसके हिमाचल एक ऐसा राज्य है, जहां पर इस तरह के बैग बनाने वाली 40 से अधिक फैक्टरियां हैं। प्रार्थी ने अदालत से गुहार लगाई है कि प्रदेश में प्लास्टिक के इस्तेमाल न करने के बारे में राज्य सरकार को सख्त आदेश पारित किए जाएं।</p>
<p>File Photo: Himachal Watcher </p>
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