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	<title>HP Pollution control board Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Pollution control board Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>बद्दी शमशान घाट के पास  पिछले 4 वर्षों से फैंका जा रहा औधोगिक कचरा, लोग बदबू से  परेशान, शिकायतों के वजूद कोई कार्यवाही नहीं</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/industrial-waste-baddi-solan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2016 12:36:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमपरिवेश पर्यावरण संरक्षण संगठन ने जिलाधीश सोलन को पत्र लिख कर कहा कि बद्दी, श्मशान घाट जो कन्टेनर डिपो को जाने वाली सड़क के किनारे है। वहां गांव थाना स्थित देवयानी फूड प्राइवेट लिमिटेड उद्योग द्वारा सरकारी भूमि में पिछले 4 वर्षों से औधोगिक कचरा फैंका जा रहा है। संगठन ने कहा कि स्थानीय [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमपरिवेश पर्यावरण संरक्षण संगठन ने जिलाधीश सोलन को पत्र लिख कर कहा कि बद्दी, श्मशान घाट जो कन्टेनर डिपो को जाने वाली सड़क के किनारे है। वहां गांव थाना स्थित देवयानी फूड प्राइवेट लिमिटेड उद्योग द्वारा सरकारी भूमि में पिछले 4 वर्षों से औधोगिक कचरा फैंका जा रहा है। </p>
<p><iframe width="800" height="450" src="https://www.youtube.com/embed/3Z1ZIHEtZmo" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>संगठन ने कहा कि स्थानीय निवासियों ने इसके विरुद्ध प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व विभाग, एसडीएम नालागढ़ एंव बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ औधोगिक प्राधिकरण को शिकायतें करी थी लेकिन किसी भी विभाग की तरफ से आज दिनांक 16 मार्च 2016 तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।</p>
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<p>संगठन ने जिलाधीश को अपने पत्र के माध्यम से बताया कि इस कचरे के ढेर से गन्दी बदबू आ रही है जिससे आस-पास के गांवों के निवासिओं के लिये परेशानी बना हुआ है। वर्तमान में बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ औधोगिक क्षेत्र इसी तरह के कचरे के ढेर में बदलता जा रहा है जहां भी उद्दयोगों को कोई भी खाली जगह दिखती है वो अपना खतरनाक औद्दोगिक कचरा फैंक देते हैं। संगठन ने अनुरोध किया कि है इस सर्न्दभ में जल्दी ही कोई कार्यवाही करें। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan.jpg" alt="industrial-waste-baddi-solan" width="1000" height="459" class="alignnone size-full wp-image-4421" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan-300x138.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan-768x353.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan-696x319.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/industrial-waste-baddi-solan-915x420.jpg 915w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
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		<item>
		<title>गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:05:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पीलिया मामले में अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसमें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला है। उनके खिलाफ केस चलना चाहिए। राज्य सरकार को पीलिया के कारण मौत के मुंह में समाए लोगों के परिजनों को अंतरिम राहत के तौर पर दो-दो लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पीलिया मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए कोर्ट को गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को दंडित करने के उद्देश्य से अलग-अलग मामले चलाने के भी आदेश पारित किए।</p>
<p><strong>एसआईटी रिपोर्ट में खामियां</strong></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले की जांच में जुटी एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूषित पानी पिलाने के गुनहगार अधिकारी कौन हैं। कोर्ट ने खेद जताया कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है या नहीं।</p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पानी चेक करते थे और उच्चाधिकारियों की पानी जांचने में कोई रुचि ही नहीं थी। नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने भी पानी जांचने की जहमत नहीं उठाई।</p>
<p><strong>ठेकेदार की पेमेंट रोकी</strong></p>
<p>कोर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की देखरेख के लिए रखे गए ठेकेदार अक्षय डोगर को 31 जनवरी तक जारी की जाने वाली बकाया राशि 99 लाख 45 हजार के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>कोर्ट ने नई स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में बताएं। पीलिया से मरने वाले और अन्य पीड़ितों का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है या नहीं। प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वे जनसाधारण को पीलिया के बारे में जागरूक करें व इससे बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्राथमिक शिक्षा से विश्वविद्यालय के छात्रों को स्वच्छ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करंे। प्रदेश में पर्याप्त स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्थान गठित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।</p>
<p><strong>सचिव साथियों को बचाने के लिए कोर्ट को कर रही गुमराह</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर को झूठा वक्तव्य देने का दोषी पाते हुए पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ गलत और विरोधाभासी वक्तव्य सामने रखने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाए। कोर्ट ने आशंका जाहिर की कि सचिव या तो अपने पुराने सहयोगियों, अधीनस्थ अधिकारियों को बचाने एवं उनके हक में मामला तैयार करने की कोशिश कर रहीं हैं या फिर कोर्ट को पूरी तरह गुमराह करने का प्रयत्न कर रही हैं। कोर्ट ने अधिकारी के वक्तव्य में पाया कि एक तरफ वह कह रही हैं कि अश्वनी खड्ड के बारे में कोर्ट की ओर से पारित पिछले आदेशों की अनुपालना की जाती रही और दूसरी तरफ कहती हैं कि अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट करने के बाद प्लांट का उचित ढंग से रखरखाव नहीं किया जा रहा था इसलिए सप्लाई गंदी होने के कारण प्लांट को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>सचिव प्रदूषण बोर्ड ने समय पर नहीं दी अश्वनी खड्ड की रिपोर्ट</strong></strong></p>
<p>कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार पर भी ऐसे ही मामले चलाने के आदेश दिए। बोर्ड के सदस्य सचिव ने कोर्ट के आदेशानुसार अश्वनी खड्ड संबंधित रिपोर्ट हर तीन माह में कोर्ट में पेश नहीं की।</p>
<p>उन्होंने 18 सितंबर 2014 के बाद केवल एक बार रिपोर्ट पेश की, वो भी झूठी और गुमराह करने वाली पाई गई। कोर्ट ने अन्य अधिकारियों को भी अवमानना का दोषी पाया है, जिन्हें शिमला शहर में शुद्ध व पर्याप्त पानी वितरण करने के लिए समय-समय पर कोर्ट ने आवश्यक आदेश दिए थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>कोर्ट ने महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह तीन दिन के भीतर ऐसे अधिकारियों के नाम अदालत को बताएं ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जा सके।</p>
<p> <strong>दर्जनों अधिकारी बनाए प्रतिवादी</strong></p>
<p>कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें मुख्य सचिव सहित शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को भी प्रतिवादी बनाया। वहीं जन संपर्क विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सभी जिला दंडाधिकारी, सभी पुलिस अधीक्षक और सभी सीएमओ को भी प्रतिवादी बनाया है।</p>
<p><strong>आईपीएच में इन्हें नोटिस</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर सुमन विक्रांत, सुनील जस्टा को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाए और क्यों न उनके खिलाफ झूठे हल्फनामे दायर करने के आरोप के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p> strong>सीएस आैर सचिव आईपीएच से 2007 से अब तक की रिपोर्ट तलब</strong></p>
<p>मुख्य सचिव व सचिव आईपीएच से कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि कौन से अधिकारी वर्ष 2007 से आईपीएच विभाग में स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। मुख्य अभियंता से चपरासी तक का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>ठेकेदार को हस्तांतरित धन, प्रक्रिया तथा उसके बिल पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।</p>
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		<item>
		<title>सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Feb 2016 06:11:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। </p>
<p>शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे मामले में एसआईटी के सामने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पीने के पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी सितंबर माह में एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। बोर्ड के इस जवाब से साफ हो गया है कि शहर में पीलिया फैलने से रुक सकता था और लगातार मौतें नहीं होतीं।</p>
<p>बोर्ड के इन दस्तावेजों के पेश करने पर एमसी और आईपीएच के कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई की संभावना अब और बढ़ गई है। 22 फरवरी के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। पीलिया मामले में गठित एसआईटी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सितंबर महीने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पीने के पानी में क्लोफॉम होने की लिखित सूचना नगर निगम और आईपीएच महकमे को दे दी गई थी।</p>
<p>इस रिपोर्ट से साफ था कि शहर में लोगों को पीने के लिए दूषित पानी की सप्लाई की गई। पानी के सैंपल कसुम्पटी स्थित आईपीएच के टैंक और संजौली से लिए गए थे। इस मामले में एसआईटी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। यह सनसनीखेज खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन और एसडीओ ने एसआईटी के समक्ष किया है। अपने दावे को मजबूत करने के लिए दस्तावेज भी पेश किए हैं।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एसआईटी के सामने तथ्य पेश करते हुए कहा कि जुलाई महीने में कसुम्पटी स्थित पानी के टैंक से सैंपल लिया गया। यह पानी अश्वनी खड्ड से ट्रीटमेंट के बाद टैंक में आता है। संजौली में भी पानी का सैंपल लिया गया, यहां पानी गिरी परियोजना से आता है। दोनों सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए वहां से उन्हें सितंबर में रिपोर्ट मिली।</p>
<p><strong>आईपीएच की हां, नगर निगम की ना</strong></p>
<p>आईपीएच ने माना कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उन्हें सूचना मिली थी और टेस्ट भी करवाए थे जो ठीक निकले। उधर, नगर निगम ने एसआईटी को लिखित में जवाब दिया कि उन्हें यह सूचना मिली ही नहीं है उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद अब एसआईटी हर पहलू पर जांच कर रही है।</p>
<p><strong>22 फरवरी को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई</strong></p>
<p>इस तरह के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय में साल 2007 और साल 2014 में भी जनहित याचिका दायर हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया है। इसके बाद साल 2015 में एक और जनहित याचिका दाखिल हुई है जिस पर सुनवाई चल रही है।</p>
<p>प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों की कितनी अनुपालना की गई और क्या उस दिशा में भी एसआईटी जांच कर रही है इस बारे में पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया गया है। 22 फरवरी को प्रदेश उच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़े केस की सुनवाई होगी और पुलिस प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।</p>
<p><strong>स्लज उठाने वाले ठेकेदार से पूछताछ </strong></p>
<p>सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई। इस ठेकेदार के पास कब से कब तक ठेका था इसकी जानकारी ली गई। ठेकेदार कैसे स्लज उठाता था और आईपीएच के साथ उसका क्या करार था, इन बिंदुओं पर पूछताछ हुई। ठेकेदार को एसआईटी ने फिर से पूछताछ के लिए बुलाया है। </p>
<p><strong>बोर्ड से अफसरों से हुई पूछताछ:नेगी</strong></p>
<p>एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ हुई है। सीवेज ट्रूीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम और आईपीएच से भी जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
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		<item>
		<title>मलयाणा वाटर  सैंपल फिर से टेस्टिंग में फेल, आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/29/ashwani-khud-water-sample-testing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2016 09:58:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला— पीलिया के कहर से त्रस्त शिमला के लिए फिर से यह बुरी खबर है कि मलयाणा का जो फिल्टरेट अश्बनी खड्ड में मिल रहा है, उसके सैंपल फिर से फेल हुए हैं। लिहाजा आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से नोटिस थमा दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/29/ashwani-khud-water-sample-testing/">मलयाणा वाटर  सैंपल फिर से टेस्टिंग में फेल, आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला— पीलिया के कहर से त्रस्त शिमला के लिए फिर से यह बुरी खबर है कि मलयाणा का जो फिल्टरेट अश्बनी खड्ड में मिल रहा है, उसके सैंपल फिर से फेल हुए हैं। लिहाजा आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से नोटिस थमा दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी महीने तक हर दिन फिल्टरेट के सैंपल लिए जाते रहेंगे। </p>
<p>हालांकि प्रावधान यही है कि हर तीन महीने बाद टेस्टिंग होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा परवाणु प्रयोगशाला में जो सैंपल 20 जनवरी को भेजे गए थे, वे फेल पाए गए हैं। इस सैंपल की रिपोर्ट बुधवार को ही पहुंची है। यानी दावों के विपरीत अब भी अश्बनी खड्ड का पानी पीने योग्य नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p>वाटर टेस्टिंग के लिए क्योंकि ज्यादा समय लग रहा है, इसलिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब फैसला लिया है कि शिमला में ही एक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जाए, ताकि हर तीसरे या दूसरे दिन राजधानी में स्थापित किए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के फिल्टरेट की बाकायदा तय समय अवधि में टेस्टिंग हो सके और लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता न करना पड़े। अभी तक यह सुविधा बड़ी लैब के तौर पर परवाणु में ही मुहैया करवाई गई है।</p>
<p>शिमला में पीलिया से प्रभावित लोग इतने सहमे हुए हैं कि राजधानी में गन्ने बेचने वालों की भी चांदी हो रही है। शिमला के बाजारों में गन्ने के रस का एक गिलास 20 रुपए में बिक रहा है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग बोतलों में भरकर गन्ने का रस ले जा रहे हैं। यही आलम पीलिया झाड़ने वालों के घरों का भी है, जहां लोग कतारों में दिनभर खड़े रहते हैं।</p>
<p><strong>विभागों की सुस्ती</strong></p>
<p>मोदी सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट में एक वर्ष पहले हिमाचल को भी शामिल किया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए आईपीएच व शहरी विकास विभाग को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए लिखा था, ताकि संवदेनशील इलाकों में सीवरेज ट्र्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा सकें। हैरानी की बात है कि प्रोजेक्ट तैयार करना तो दूर, संबंधित सरकारी महकमों ने प्रतिक्रिया तक नहीं दी।</p>
<p>Photo: Hindustan Times/Representational image </p>
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