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	<title>HP IPH department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP IPH department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>आईपीएच विभाग का कारनामा: प्राकृतिक स्रोत में पाइप द्वारा डाल दिया नाले का पानी, स्रोत दूषित होने की कगार पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Nov 2016 11:14:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है कुल्लू- भले ही आईपीएच विभाग लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने का दावा करता है लेकिन जिला के कई इलाकों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है</strong></p>
<p><strong>कुल्लू-</strong> भले ही आईपीएच विभाग लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने का दावा करता है लेकिन जिला के कई इलाकों में आईपीएच विभाग की लापरवाही किसी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विभाग का एक ऐसा ही कारनामा जिला मुख्यालय से सटी खराहल घाटी के काईस से सटे शेयापानी स्थित प्राकृतिक जल स्रोत (जायरू) में देखने को मिल रहा है। </p>
<p>आईपीएच विभाग ने काफी समय पहले यहां पर पानी का टैंक तो बना दिया लेकिन अभी तक मुरम्मत करवाने की जहमत नहीं उठा रहा है। टैंक काफी पुराना होने से क्षतिग्रस्त हालत में है, जिस कारण प्राकृतिक जल स्रोत का पानी टैंक में स्टोर नहीं हो रहा है, ऐसे में लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने लोगों को अधिक पानी सप्लाई करने के चक्कर में नाले का पानी डाइवर्ट कर पाइप द्वारा प्राकृतिक स्रोत में डाल दिया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होने की कगार पर है।</p>
<p>इस प्राकृतिक जल स्रोत के पानी की सप्लाई काईस तथा बिष्टबेहड़ इलाकों में होती है। नाले के पानी की सप्लाई से ग्रामीण मटमैला पानी पीने को मजबूर है। मटमैला पानी पीने से लोगों को जलजनित बीमारी फैलने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि आईपीएच विभाग की लापरवाही भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों ने विभाग को चेताया है कि अगर नाले का पानी प्राकृतिक जल स्रोत से जल्द नहीं हटाया गया तो वे कुल्लू स्थित आईपीएच विभाग के उच्चाधिकारी का घेराव करेंगे।</p>
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		<title>कैग रिपोर्ट में खुलसा: हिमाचल निगम बोर्डों के अफसरों ने सरकार को लगया 469.97 का चूना</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/08/cag-report-himachal-exposes-himachal-pradesh-govnernment-boards/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Apr 2016 12:04:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Accountants General Himachal Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया,आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए,सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं,क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया,आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए,सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं,क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से हुआ 209 करोड़ का नुकसान,हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने प्रदेश सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> चेयरमैनों व वाइस चेयरमैनों के खर्चों का बोझ ढो रहे प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के बोर्ड व निगम हांफ रहे हैं। प्रदेश के कुल 19 क्रियाशील उपक्रमों में से दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया। खास बात यह है कि इन निगम व बोर्डों को होने वाला घाटा साल दर साल बढ़ता जा रहा है लेकिन सरकार घाटा रोकने के बजाय सिर्फ इन हांफते निगमों में करोड़ों रुपये का निवेश करती जा रही है।</p>
<p>सीएजी की रिपोर्ट ने कुछ ऐसे ही खुलासे किए हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार  साल 2014-15 में प्रदेश के कुल 21 सार्वजनिक उपक्रमों में से 19 क्रियाशील रहे। इनमें दस उपक्रमों ने प्रदेश सरकार का करीब 470 करोड़ रुपये डुबो दिया। जबकि सात बोर्ड-उपक्रमों ने 13.97 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। इनमें से सिर्फ एक उपक्रम हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने दस प्रतिशत की दर से लाभांष घोषित किया।</p>
<p>खास बात यह है कि घाटे में होने वाले दस निगम-बोर्डों में से तीन ऐसे उपक्रम रहे जिन्होंने अपने लेखों को न लाभ न हानि के आधार पर तैयार किया था। वहीं, व्यास घाटी विद्युत निगम ने अपने आडिट रिपोर्ट ही तैयार नहीं की। सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार का सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा क्षेत्र में रहा है। यही कारण है कि साल 2010-11 में जहां 4600 करोड़ का निवेश हुआ, वहीं साल 2014-15 में यह बढ़कर 8571 करोड़ हो गया।</p>
<p><strong>यहां जानिए किस विभाग ने क्या की गड़बड़ी</strong></p>
<p><strong>साढ़े बारह की जगह चार प्रतिशत का कर किया निर्धारित</strong><br />
आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार 183 करोड़ की बिक्री के बाइस मामले ऐसे सामने आए जिनमें साढ़े बारह से पौने चौदह प्रतिशत का कर लगाने के बजाय अधिकारियों ने चार से पांच प्रतिशत का कर निर्धारित कर दिया।</p>
<p>इसकी वजह से सरकार को करीब साढ़े तीन करोड़ का नुकसान हुआ। इसी तरह विभाग ने कई मामलों में कुल बिक्री का गलत निर्धारण कर दिया जिसकी वजह से सरकार को करीब छह करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिला। वहीं, विवरणियों के डाटाबेस का इंस्पेक्शन न करने और देर से भरने के चलते हुए साढ़े 38 करोड़ की वसूली को भी नहीं किया।</p>
<p><strong>लाइसेंस फीस की कम वसूली से लगा झटका</strong></p>
<p>आबकारी एवं कराधान विभाग ने साल 2013-14 के दौरान 28 शराब बिक्री केंद्रों के लाइसेंसधारकों से 17.25 करोड़ वसूला जाना था। लेकिन विभाग के अधिकारी सिर्फ 12.83 करोड़ की फीस ही वसूल सका। इसके चलते प्रदेश को साढ़े चार करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ।</p>
<p><strong>सीमेंट कंपनियों को दिया मुनाफा</strong></p>
<p>आडिट रिपोर्ट के अनुसार दो सीमेंट कंपनियां जिन्होंने सीमेंट व क्लीन्कर बनाने के लिए खनन क्षेत्रों से सीमेंट संयंत्रों तक चूना पत्थर व स्लेटी पत्थर का परिवहन किया। उनसे अतिरिक्त माल कर वसूला जाना चाहिए था। लेकिन विभाग ने उनसे यह कर नहीं वसूला जिसके चलते प्रदेश के खजाने को 59.90 करोड़ का नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>इन विभागों की भी कैग रिपोर्ट ने खोली पोल</strong></p>
<p><strong>पटवारियों ने किया गलत मूल्यांकन</strong><br />
रिपोर्ट में 189 ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें पटवारियों द्वारा संपत्तियों के मूल्यांकन प्रतिवेदनों को गलत तैयार किया गया। साथ ही संपत्ति के बाजार मूल्य का भी गलत निर्धारण किया गया जिसकी वजह से करीब 80 लाख रुपये के स्टांप शुल्क व पंजीकरण फीस की कम वसूली हुई। पट्टी राशि की भी अल्प वसूली के तीन मामले सामने आए जिसके चलते<br />
सरकारी खजाने को 4.24 करोड़ का नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>नहीं हुई वाहनों से प्रवेश कर की वसूली</strong><br />
सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं। साल 2010-11 से 2013-14 तक प्रवेश कर के लिए होेने वाली वसूली में अधिकारियों ने खेल किया। इसके चलते 17.73 करोड़ रुपये के सांकेतिक कर व प्रवेश कर की विभाग ने न तो मांग की और न ही वाहन मालिकों ने इसका भुगतान किया।</p>
<p><strong>वन मंडल अधिकारियों ने नहीं की रायल्टी की वसूली</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा करीब साढ़े तेरह करोड़ की रॉयल्टी भुगतान योग्य थी। लेकिन वन मंडल अधिकारियों ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रॉयल्टी का भुगतान समय पर और करीब पौने पांच करोड़ देर से जमा किया। लेकिन बकाया करीब सवा सात करोड़ की राशि की वसूली नहीं की गई।</p>
<p><strong>लकड़ी की ग्रेडिंग में भी हुआ खेल</strong></p>
<p>लकड़ी की ग्रेडिंग का काम वन निगम की बिक्री डिपुओं पर किया जाता है। लेकिन वन अधिकारियों ने .5 प्रतिशत को ही ए ग्रेड में रखा गया। लकड़ी के वर्गीकरण की प्रक्रिया में कोई भी जांच नहीं की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार लकड़ी के 25 प्रतिशत वर्गीकरण को ही गलत मानने से करीब 71 करोड़ से ज्यादा की संभावित राजस्व हानि होने की संभावना जताई।</p>
<p><strong>इन विभागों ने भी कराया बड़ा नुकसान</strong> </p>
<p><strong>ज्वालामुखी मंदिर न्यास को दिलाया 6.27 करोड़ का लाभ</strong><br />
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को ज्वालामुखी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बदलना था। लेकिन इस काम में भी अधिकारियों ने खेल किया और स्वास्थ्य केंद्र को श्री ज्वालामुखी मंदिर न्यास के भवन से बदलने में न्यास को करीब 6.27 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचा दिया।</p>
<p><strong>जलापूर्ति स्कीमों में गलत निवेश से डुबो दिए 56 करोड़</strong></p>
<p>आईपीएच विभाग ने जलापूर्ति स्कीमों को शुरू करने में ही देरी कर द। इसकी वजह से कई योजनाओं में 53.57 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वहीं, 3.31 करोड़ के ब्याज का भी सरकार को नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से हुआ 209 करोड़ का नुकसान</strong></p>
<p>जल विद्युत परियोजना के क्षमता संवर्धन का समय पर पता लगाने में बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत विभाग फेल साबित हुआ। समय पर पता न लगा पाने, अतिरिक्त मुफ्त विद्युत रॉयल्टी और स्थानीय विकास निधि के आधार पर करीब 209 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>37 प्रतिशत बजट नहीं खर्च सका उच्च शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>उच्च शिक्षा विभाग राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 348.47 करोड़ की कुल उपलब्ध निधियों में से कार्यक्रम के विभिन्न घटकों पर केवल 218.67 करोड़ ही खर्च कर सका। मार्च 2015 तक 129.80 करोड़ यानी 37 प्रतिशत बजट अप्रयुक्त ही रहा। 2013-15 के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तर पर आरएमएसए के तहत वार्षिक कार्य योजना को पाठशाला स्तर की विकासात्मक योजना पर विचार किए बिना तैयार किया गया।</p>
<p>पांच आदर्श पाठशालाओं के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी गई 7.23 करोड़ की राशि में से 4.70 करोड़ रुपये बाधामुक्त जमीन उपलब्ध न करवाने और कार्य की गति धीमी होने के कारण अप्रयुक्त रहे। 25 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>एचआरटीसी ने सरकार को लगाया करोड़ों का चूना</strong></p>
<p>हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने प्रदेश सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है। वर्ष 2013 से मार्च 2014 अवधि के बीच की 20.47 करोड़ रुपये की राशि मार्च 2015 तक दी जानी थी लेकिन निगम ने विशेष पथकर का यह पैसा सरकार के खाते में जमा नहीं कराया।</p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से विधानसभा के पटल पर रखी कैग रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवहन निगम का 20.47 करोड़ जबकि निजी स्टेज कैरिज से 167 मामलों में 91.15 लाख रुपये की राशि सरकार को देय थी।</p>
<p>निर्धारित समय में यह राशि न लिए जाने से प्रदेश सरकार को 21.38 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसी तरह वर्ष 2010-11 से 2013-14 के लिए 22,527 वाहनों के संदर्भ में 17.73 करोड़ के सांकेतिक कर एवं प्रदेश कर की न तो मांग की गई और न ही इन वाहन मालिकों की ओर से इसका भुगतान किया गया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>टुटू वासियो को 7-8 दिनो के बाद मिल रहा है सिर्फ एक बाल्टी पानी, गुस्साए लोगों ने किया चक्का जाम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/07/protest-in-shimla-city-over-water-shortage-people-chakkajaam-totu-nalagarh-road/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nagender Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Apr 2016 07:07:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Nagendra Gupta]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Totu]]></category>
		<category><![CDATA[Vikas Samiti Totu]]></category>
		<category><![CDATA[water shortage in Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[water-crisis]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- पीने के पानी की किल्लत को लेकर लोअर टुटू व आसपास की जनता ने बीच सड़क में चक्का जाम कर निगम व आईपीएच के खिलाफ विरोध प्रकट कर किया यह कहना है विकास समिति टुटू का! स्थानीय जनता का कहना है कि शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र टुटू की जनता कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  पीने के पानी की किल्लत को लेकर लोअर टुटू व आसपास की जनता ने बीच सड़क में चक्का जाम कर निगम व आईपीएच के खिलाफ विरोध प्रकट कर किया यह कहना है विकास समिति टुटू का!</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway.jpg" alt="totu shimla highway" width="900" height="624" class="alignnone size-full wp-image-4722" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway.jpg 900w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-300x208.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-768x532.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-100x70.jpg 100w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-218x150.jpg 218w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-696x483.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-highway-606x420.jpg 606w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" /></p>
<p>स्थानीय जनता का कहना है कि शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र टुटू की जनता कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग कई दिनो से पीने के पानी की आपूर्ति ठीक तरीके से नहीं कर रहा है और सात-आठ दिनो के बाद एक बाल्टी पानी की जनता को मिलो रही है! स्थानीय जनता का कहना है कि नगर निगम शिमला भी बेहतर सुविधाएं देने के लिए बड़े बड़े दावे करता है लेकिन सब दावे खोखले नजर आ रहे हैं! </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply.jpg" alt="shimla water supply" width="900" height="782" class="alignnone size-full wp-image-4720" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply.jpg 900w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply-300x261.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply-768x667.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply-696x605.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/shimla-water-supply-483x420.jpg 483w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" /></p>
<p>वहीं विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेंद्र गुप्ता ने कहा की पिछले एक महीने से सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को कई मर्तवा पानी की सप्लाई नियमित करने की गुहार की जा चुकी है और जनता के विरोध से भी कई मर्तवा अवगत करवा दिया गया है लेकिन संबन्धित विभाग के आला अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती!  </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla.jpg" alt="Chakka jam Totu" width="900" height="736" class="alignnone size-full wp-image-4723" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla.jpg 900w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-300x245.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-768x628.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-696x569.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/totu-shimla-514x420.jpg 514w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" /></p>
<p>गुप्ता का कहना है कि पता चला है की आंदरी पानी की स्कीम में पिछले दिनो दो खड्डों में से एक खड्ड का पानी दूषित होने पर उसे बंद कर दिया गया है जिस कारण पानी की किल्लत आम जनता को सहनी पड़ रही है !</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla.jpg" alt="MC Shimla" width="900" height="744" class="alignnone size-full wp-image-4719" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla.jpg 900w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla-300x248.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla-768x635.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla-696x575.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/mc-shimla-508x420.jpg 508w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px" /></p>
<p>समिति  अध्यक्ष ने कहा कि किसी समय टुटू क्षेत्र में राशन कार्ड पर प्रति व्यक्ति आधा तीन पानी मिला करता था और कब होगा सुधार विभाग का ढीलमुल रवैया यह दर्शाता है की कब सुधार होगा! कहीं राशन कार्ड पर पानी बांटने की नौबत दोबारा तो नहीं आ जाएगी! </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla.jpg" alt="water shortage in shimla" width="1000" height="612" class="alignnone size-full wp-image-4724" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla-300x184.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla-768x470.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla-696x426.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/water-shortage-in-shimla-686x420.jpg 686w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/07/protest-in-shimla-city-over-water-shortage-people-chakkajaam-totu-nalagarh-road/">टुटू वासियो को 7-8 दिनो के बाद मिल रहा है सिर्फ एक बाल्टी पानी, गुस्साए लोगों ने किया चक्का जाम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
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		<title>नही मिल रहा पीने का पानी , शिमला में गहरा सकता है पेयजल संकट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/water-problem-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2016 12:39:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Boileauganj]]></category>
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		<category><![CDATA[Water Rationing in Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पिछले चार दिन से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। आइपीएच विभाग की ओर से पानी की कम आपूर्ति किए जाने के कारण नगर निगम के जल भंडारण टैंकों का जलस्तर निम्न हो गया है। नगर निगम के आयुक्त पंकज राय ने बताया कि होली पर काफी संख्या में पर्यटक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में पिछले चार दिन से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। आइपीएच विभाग की ओर से पानी की कम आपूर्ति किए जाने के कारण नगर निगम के जल भंडारण टैंकों का जलस्तर निम्न हो गया है।</p>
<p>नगर निगम के आयुक्त पंकज राय ने बताया कि होली पर काफी संख्या में पर्यटक शिमला पहुंचे थे। इससे शहर में पानी का संकट गहरा गया। हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में पानी का संकट और ज्यादा हो सकता है। ऐसे में शिमला में चौथे से पांचवें दिन पानी की आपूर्ति हो सकती है। अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां चौथे से पांचवें दिन पानी की आपूर्ति हो रही है। </p>
<p>शुक्रवार को छोटा शिमला, लांगवुड, संजौली, टुटू, बालूगंज, खलीणी, कुसुम्पटी, पंथाघाटी, मैहली, न्यू शिमला, विकासनगर आदि प्रमुख स्थानों पर पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई। शिमला में शहरवासियों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। नगर निगम के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि आइपीएच विभाग की ओर से पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो रही है। इस कारण पेयजल आपूर्ति कुछ क्षेत्रों में बाधित हो रही है। </p>
<p>शिमला में पीलिया फैलने के बाद अश्विनी खड्ड परियोजना जनवरी महीने से बंद है। इस कारण शहर में 30 से 31 एमएलडी पानी ही आपूर्ति हो रहा है जबकि शिमला शहर की मांग 43 से 45 एमएलडी पानी की है।</p>
<p>Representational Image</p>
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		<title>आरटीआई में खुलासा: करोड़ों के क़र्ज़ में डूबे हिमाचल के मंत्री सपरिवार कर रहे विदेश की सैर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/09/rti-on-hp-government-expenditure-on-foreign-trips/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Mar 2016 10:44:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Minister Thakur Singh Bharmouri]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP Industry Minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
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		<category><![CDATA[vidya stokes]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
		<category><![CDATA[World Bank]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरटीआई में खुलासा: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स को छोड़ सभी ने क्लेम किया लाखों का डीए,सपरिवार की विदेश की सैर या फिर जमे रहे हलकों में, शांडिल को छोड़ किसी को नहीं मिली सचिवालय में बैठने की फुरसत संसाधनों की कमी से साल दर साल करोड़ों के कर्ज में दब कर गरीब होते [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आरटीआई में खुलासा: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स को छोड़ सभी ने क्लेम किया लाखों का डीए,सपरिवार की विदेश की सैर या फिर जमे रहे हलकों में, शांडिल को छोड़ किसी को नहीं मिली सचिवालय में बैठने की फुरसत</strong></p>
<p>संसाधनों की कमी से साल दर साल करोड़ों के कर्ज में दब कर गरीब होते हिमाचल प्रदेश के विकास की इबारत विश्व बैंक, नाबार्ड और भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों से उधार लेकर लिखी जा रही है। लेकिन कई मंत्री मंत्री इस हालत को जानते हुए भी समझने को तैयार नहीं हैं। हां, विद्या स्टोक्स की तरह दरियादिली कोई नहीं दिखा रहा। सचिवालय प्रशासन विभाग का 2015 में छह माह का रिकॉर्ड बताता है कि दौरों में मंत्रियों की कमाई भी मोटी हो रही है। </p>
<p>मंत्री सिडनी, बैंकॉक, दुबई, न्यूयार्क, बोस्टन, यूरोप, स्पेन, इंग्लैंड जैसे देशों की सैर करने में रुचि दिखा रहे हैं लेकिन शिमला सचिवालय के कार्यालयों बैठना अधिकतर को पंसद नहीं।</p>
<p>क्लेम किया जा रहा डीए सरकारी खजाने में लाखों की सेंध लगा रहा है। प्रदेश या अन्य राज्यों में विभागीय कार्यों की एवज में जो दैनिक भत्ते मंत्री क्लेम कर रहे हैं, उन पैसों को लेने में तो जैसे मंत्रियों में होड़ लगी हैं। अन्य राज्यों में भी जनसुनवाई के हवाले से लाखों वसूले जो रहे हैं। </p>
<p>एक मंत्री ने प्रदेश के बाहर अपना नियमित स्वास्थ्य चैकअप और टेस्ट जहां करवाए, उस राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान के निदेशक और दूसरे पदाधिकारियों से बैठक का हवाला डीए क्लेम करने के लिए दिया। अगले ही दिन साहब उस राज्य के निजी स्वास्थ्य संस्थान में दाखिल हुए।<br />
कई मंत्रियों ने उडनख़टोलों में की विदेशों की सैर के लिए लाखों रुपये का डीए लिया। एक मंत्री ने देश के भीतर अपने पूरे परिवार को दिल्ली से हिमाचल की सैर उडनख़टोले में करवाई पर खर्चा पूरा सरकार से ही लिया। एक अन्य मंत्री ने जीवन संगिनी को सैर करवाई। कई ने विदेश जाकर निजी दौरे के नाम पर कई दिन सरकारी घोषित किए। वहां की योजनाएं यहां के पहाड़ पर कितनी चढ़ीं, जनता उसे जानती है और इंतजार में है। और तो और, शताब्दी में खाए खाने का भी डीए लिया। काबिले-जिक्र यह कि यह डीए, गाडिय़ों, पेट्रोल, मंत्री स्टाफ सहित अन्य के लाखों खर्च का यह मात्र चुटकी भर है।</p>
<p><strong>हिमाचल मंत्रियों का चंद दिनों का दैनिक भत्ता</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th></th>
<th>मंत्री का नाम</th>
<th>दैनिक भत्ता (रुपये)</th>
<th>अवधि</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/virbhadra-singh_.jpg" alt="Virbhadra-Singh_" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4189" /></td>
<td>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह</td>
<td>1,39,248</td>
<td>85</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/mukesh-agnihotri.jpg" alt="mukesh-agnihotri" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4195" /></td>
<td>उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री</td>
<td>93,000</td>
<td>32</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/thakur-singh-bharmouri.jpg" alt="Thakur Singh Bharmouri" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4196" /></td>
<td>वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी</td>
<td>2,49,802</td>
<td>134</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/urban-development-minister-sudhir-sharma.jpg" alt="Urban-Development-Minister-Sudhir-Sharma" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4197" /></td>
<td>शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा</td>
<td>2,83,018</td>
<td>174</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/dhani-ram-shandil.jpg" alt="Dhani-Ram-Shandil" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4198" /></td>
<td>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग धनीराम शांडिल</td>
<td> 1,67,335</td>
<td>185</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/panchayati-raj-minister-anil-sharma.jpg" alt="panchayati raj minister Anil Sharma" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4200" /></td>
<td>पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा</td>
<td>3,70,750</td>
<td>177</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/gs-bali.jpg" alt="GS Bali" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4201" /></td>
<td>परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली</td>
<td>2,51,637</td>
<td>76</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/prakash-choudhary-minister-of-excise-and-taxation-himachal.jpg" alt="Prakash-Choudhary-Minister-Of-Excise-and-Taxation-himachal" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4205" /></td>
<td>आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी</td>
<td> 2,74,627</td>
<td>154</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/thakur-kaul-singh.jpg" alt="Thakur Kaul Singh" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4202" /></td>
<td>स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह</td>
<td>2,18,576</td>
<td>151</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/sujan-singh-pathania.jpg" alt="sujan-singh-pathania" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4203" /></td>
<td>ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया</td>
<td>1,40,850</td>
<td>163</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/vidya-stokes.jpg" alt="vidya-stokes" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4204" /></td>
<td>आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स</td>
<td>&#8211;</td>
<td>&#8211;</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>राहत यह है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस लिहाज से समझदार हैं। विद्या स्टोक्स ऐसा कोई पैसा नहीं लेती तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस मामले में सबसे शालीन हैं। उन्होंने सबसे कम दैनिक भत्ता क्लेम किया है। दूसरे नंबर पर ऊर्जा मंत्री व तीसरे स्थान पर धनी राम शांडिल हैं। जबकि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अधिकतर मंत्रियों ने वहां डीए क्लेम नहीं किया हैं। एक मंत्री की जानकारी देने में जीएडी ने गुरेज किया।</p>
<p><strong> प्रकाश चौधरी ने की विदेश की सैर</strong></p>
<p>प्रकाश चौधरी औसतन बीस प्रतिशत ही शिमला में सचिवालय में अपने स्टाफ के साथ बैठे। अस्सी फीसद दौरे उनके विदेश, दिल्ली, चंड़ीगढ़ सहित अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही रहे। 24 सितंबर को शिमला से विदेश के लिए रवाना हुए। एक दिन बाद दिल्ली एयरपोर्ट से बैंकाक के लिए निकले, फिर यहां से सिडनी पहुंचे। इतने सफर तक उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार के डॉलर खर्चे। मगर इसके बाद सिडनी में वेलिंगटन घूमे। चार से लेकर दस अक्टूबर तक उन्होंने टीए-डीए क्लेम नहीं किया और ऑकलैंड में रुके। उन्होंने यह निजी दौरा बताया है। वापस दिल्ली पहुंचे। 14 अक्टूबर को शिमला पहुंचे। धर्मशाला में शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान अपने दम पर रहे, कोई सरकारी खर्च नहीं लिया।</p>
<p><strong>भरमौरी को भाता है भरमौर में रहना</strong></p>
<p>प्रदेश के वन मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के बीच रहना पंसद करते हैं। अक्तूबर में तो दो दिन ही वन मंत्री शिमला आए हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ के दौरों पर भी कम ही जाते हैं। घरेलू एयरपोर्ट से चंडीगढ़ दिल्ली में हवाई सेवाएं अगस्त महीने में बैठकों के लिए उपयोग की। मुख्यमंत्री के साथ हेलीकॉप्टर में भी घूमे, उनके साथ जनसभाओं में गए। दिल्ली दौरे के दौरान हालांकि अपने साथ एक सहयोगी को भी हवाई यात्रा सरकारी खर्च पर करवाई। अपने विधानसभा क्षेत्र में दौरे किए। 19 से लेकर 23 नवंबर 2015 तक निजी गाड़ी में घूमे, मगर डीए लेना नहीं भूले।</p>
<p><strong>सचिवालय में बैठने का रिकॉर्ड शांडिल के नाम</strong></p>
<p>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अधिक सचिवालय में बैठना पंसद करते हैं। अन्य मंत्रियों में सबसे अधिक सचिवालय में बैठने का उनका रिकॉर्ड रहा हैं। जुलाई महीने में 27 दिन तक वह शिमला सचिवालय में बैठे, एक साथ इतने दिनों तक सचिवालय में मौजूदगी का रिकॉर्ड उपरोक्त अवधि में अन्य किसी के नाम नही रहा हैं। अन्य महीनों में औसतन 6 माह में तीस फीसद तक सचिवालय में मौजूद रहे जबकि पचास प्रतिशत तक अपने विधानसभा क्षेत्र और शेष में बाहरी राज्यों के दौरों और मंत्रालय के साथ बैठकों में गए। नई दिल्ली और चंडीगढ़ दौरों के दौरान बोर्डिंग पास पर 5500 रुपये के लिए क्लेम सरकार से लिया। सितंबर में प्रदेश के बाहर के दौरों के लिए हवाई सेवा टिकट क्लेम किया है। विदेश दौरे पर नहीं गए।</p>
<p><strong>अक्टूबर में एक ही दिन शिमला रहे सुधीर</strong></p>
<p>शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा अधिकतम समय शिमला से बाहर ही रहें हैं। दिल्ली चड़ीगढ़ के दौरे विभागीय बैठकों के नाम पर थे। इस दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से हिमाचल में एयरपोर्ट विस्तार, विभाग की विभिन्न योजनाओं के फॉलोअप कई मंत्रालयों में किए। अक्तूबर में तो सिर्फ एक दिन शिमला सचिवालय में बैठे। बैजनाथ में पैराग्लाइडिंग वल्र्ड कप की मेजबानी में भी व्यस्तता रही। नौ अक्टूबर को शिमला से दिल्ली रवाना हुए और फिर पूरे महीने शिमला ही नहीं आए। हां दिल्ली में मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहे।<br />
नवंबर अंत से लेकर मध्य दिसंबर तक चंडीगढ़ दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहे। 21 नवंबर को धर्मशाला से गग्गल तक 10,955 रूपए की टिकट , फिर 22 से लेकर 28 नवंबर तक विभिन्न मंत्रालयों में योजनाओं का फीडबैक लिया और प्रदेश का पक्ष रखा। अगले दिन अपनी बेटी आध्या और पत्नी रीना के साथ दिल्ली से गग्गल पहुंचे। इस दौरान 8,027 रूपए क्लेम किए। शीतकालीन विधानसभा सत्र के बाद सात दिसंबर को परिवार सहित दिल्ली गए, 21 हजार रुपए की टिकट लगी और वापसी 13 दिसंबर को भी हवाई सेवा से की उसके टिकट भी 16000 के आसपास दिए। </p>
<p><strong>दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में गए सुजान</strong></p>
<p>प्राप्त जानकारी में सुजान सिंह पठानिया ने एक टुअर ऐसा भी डीए के लिए क्लेम किया हैं जिसका जिक्र अन्य मंत्रियों ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान नहीं किया हैं। 19 सितंबर को शिमला से दिल्ली सरकारी गाड़ी में रवाना हुए और बीस को वहां कैबिनेट बैठक में भाग लिया और मुख्यमंत्री के साथ रहे। उसके बाद अगले दिन शिमला पहुंचे। विदेश सैर नहीं की, शिमला सचिवालय में बैठना भी अधिक पंसद नहीं किया। मगर दिल्ली चंडीगढ़ का दौरे विभागीय कार्यो के लिए हवाई सेवाओं के जरिए खूब की। फतेहपुर में ही अधिक जमे रहे।</p>
<p><strong>अपना खर्च करते हैं मुख्यमंत्री</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला में कम बैठे, दिल्ली, चंडीगढ़ के दौरे विभागीय कार्यो के चलते अधिक किए। अन्य राज्यों में भी गए मगर, उन्होंने अन्य मंत्रियों के लिए मिसाल कायम की कि निजी दौरों के लिए सरकारी खर्च के लिए क्लेम नहीं किया। अधिकतर दौरों का स्वयं भुगतान किया, जो निजी दौरे घोषित किए हैं। 19 जुलाई को लखनऊ बाई एयर, 25 जुलाई को सड़क मार्ग से जालंधर, मगर स्वयं खर्च उठाया।</p>
<p><strong>दिल्ली, चंडीगढ़ और नगरोटा में रहे बाली</strong></p>
<p>परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली इस अवधि में औसतन दस प्रतिशत ही सचिवालय में रहे। अधिकतर अपने विधानसभा क्षेत्र और दिल्ली चंडीगढ़ के दौरे पर रहे। सभी दौरों में दिल्ली चंडीगढ़ में अपनी निजी गाड़ी का प्रयोग किया, मगर डीए का लाभ लेना परिवहन मंत्री नहीं भूले हैं। सरकारी गाड़ी का प्रयोग नहीं किया।</p>
<p><strong>अरे वाह पेरिस, इंग्लैंड घूम आए अनिल शर्मा</strong></p>
<p>अनिल शर्मा का लंदन और पेरिस में निजी दौरे पर रहे हैं। इस दौरान उनकी पत्नी सुनीता शर्मा उनके साथ रहीं। कालका से दिल्ली शताब्दी एक्सप्रैस में नौ जुलाई को गए और 23 को दिल्ली से इसी माध्यम से वापस चंडीगढ़ पहुंचे। उसके बाद सरकारी गाड़ी में शिमला पहुंचे। टीए नियम दो सेक्शन एक के तहत दो लाख रुपये की एवज में 208500 रुपये दो सीटों के लिए क्लेम किए। 14 से 27 नवंबर तक इंग्लैंड की यात्रा पर रहे,सरकारी खर्चा नहीं मांगा।</p>
<p><strong>बस दिल्ली, चंडीगढ़ में ही रहे मुकेश</strong></p>
<p>उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अस्सी प्रतिशत तक दिल्ली चंडीगढ़ में ही रहे। दस प्रतिशत शिमला और इतनी ही फीसद में अपने हलके में गए। जीएडी ने उनकी जानकारी मात्र 32 दिनों की ही दी है। जून अंत से लेकर जुलाई 2015 तक की जानकारी सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में दी हैं।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर दुबई, न्यूयार्क घूमे</strong></p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने विदेश दौरा किया। हालांकि इस अवधि में बीमार भी थे। विधानसभा क्षेत्र में तीस प्रतिशत तक ही जा पाए। 8 नवंबर को दुबई रवाना हुए। 14 नवंबर को वापस दिल्ली आए। इसके बाद विशाखापतनम, हैदराबाद, तिरुपति के लिए उड़ान भरी, डीए भी लिया। विशाखापटनम के लिए 11843 रुपये फ्लाइट टिकट के लिए क्लेम किया। यहां रात्रि विश्राम रहा और अगले दिन 19 नवंबर को डिजास्टर मैनेजमेंट विषय पर दूसरे विश्व सम्मेलन में पहुंचे। यहां से हैदराबाद गए, इसके लिए 5177 तथा तिरुपति के लिए 2883 रुपये क्लेम किए। रोचक यह रहा कि ट्रीटमेंट पर जाने से पहले जब चंडीगढ़ में रहे तो पीजीआई निदेशक और अन्य अथॉरिटी के साथ मैराथन बैठकें की थी। 10 से 14 जुलाई तक वे वहीं रुके। इस दौरान पांच दिन का डीए 1500 रुपये के हिसाब से लिया। अगले दिन से वह फोर्टिस में दाखिल हुए और 3 अगस्त तक वहीं रहे। इस दौरान टीए, डीए एडवांस में लिया था। दो सितंबर को शताब्दी से ट्रेन से दिल्ली गए।</p>
<p><strong>स्टोक्स नहीं लेती कोई खर्च</strong></p>
<p>सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स सरकारी खर्चा दौरों के लिए लेती ही नहीं हैं। शिमला में अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अधिक वह सचिवालय कार्यालय में मौजूद रहती हैं। प्रदेश से बाहर दौरों पर कम ही रही है,अपने विधानसभा क्षेत्र में भी शिमला से कम दिखी है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/09/rti-on-hp-government-expenditure-on-foreign-trips/">आरटीआई में खुलासा: करोड़ों के क़र्ज़ में डूबे हिमाचल के मंत्री सपरिवार कर रहे विदेश की सैर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>6 दिन मे सिर्फ एक दिन 20 मिनट पानी की सप्लाई, पीने के पानी के लिए भी तरस रही टुटू की जनता : विकास समिति टुटू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/05/water-shortage-in-totu-in-shimla-troubles-residents/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Mar 2016 13:32:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- इन दिनों टुटू शहर को आईपीएच विभाग छठे दिन पानी की आपूर्ति कर रहा है जिस कारण स्थानीय जनता पीने के पानी की पर्याप्त आपूर्ति को लेकर परेशानी में हैं ये कहना है विकास समिति टुटू का! समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने इस विषय को लेकर विभाग के संबधित अधिकारियों को सूचित कर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  इन दिनों टुटू शहर को आईपीएच विभाग छठे दिन पानी की आपूर्ति कर रहा है जिस कारण स्थानीय जनता पीने के पानी की पर्याप्त आपूर्ति को लेकर परेशानी में हैं ये कहना है विकास समिति टुटू का! समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने इस विषय को लेकर विभाग के संबधित अधिकारियों को सूचित कर दिया है! </p>
<p>समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें इलाके के भिन्न भिन्न क्षेत्रों टुटू चौक,लोअर टुटू,गोविन्द मोहल्ला,पुराने बाज़ार इत्यादि से शिकायतें मिल रही हैं की कुछ इलाकों को पानी की पर्याप्त वितरण उचित नहीं की जा रहा है और मात्र आधा घंटा पानी और कुछ इलाकों को दिन-रात पानी की सप्लाई जारी है!</p>
<p>समिति का ये भी कहना है कि कहा कि इस संदर्भ में जनता की शिकायत को संबंधित सहायक अभियंता घणाहट्टी उपमंडल व् अधिशासी अभियंता कसुम्पटी के ध्यान में लाया गया है! समिति अध्यक्ष ने कहा कि मात्र आधा घंटा पानी की सप्लाई छोड़ने से दस मिनट तो लाईनो में हवा ही आती है जिस कारण केवल 20 मिनट में प्रति व्यक्ति के हिस्से में छै दिनों के बाद सिर्फ 20 लीटर पानी ही मिल पाता है!</p>
<p>समिति ने यह भी कहा कि  बीस लीटर पानी से या तो सब्जी-भाजी ही बना लो या फिर अन्य कार्यों के लिए ही उसे इस्तेमाल कर लो! उन्होंने कहा कि पानी की पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण ही हैपेटाईटस/पीलिया जैसी बीमारियां शिमला शहर में दस्तक दे रही हैं!</p>
<p>समिति ने कहा कि टुटू इलाके को उचित पानी सप्लाई करने के लिए न तो नगर निगम शिमला गंभीर है और न ही आईपीएच विभाग! समिति अध्यक्ष ने कहा कि दोनों विभाग दो-दो प्रशासनिक व्यवस्थाओं के चलते एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा कर मात्र अपना टाइम पास कर रहे हैं और पिछले 10-15 सालों से टुटू क्षेत्र को पानी की उचित व्यवस्था करने में नाकामयाब रहे हैं!</p>
<p>Image: Representational </p>
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		<title>गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:05:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पीलिया मामले में अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसमें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला है। उनके खिलाफ केस चलना चाहिए। राज्य सरकार को पीलिया के कारण मौत के मुंह में समाए लोगों के परिजनों को अंतरिम राहत के तौर पर दो-दो लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पीलिया मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए कोर्ट को गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को दंडित करने के उद्देश्य से अलग-अलग मामले चलाने के भी आदेश पारित किए।</p>
<p><strong>एसआईटी रिपोर्ट में खामियां</strong></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले की जांच में जुटी एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूषित पानी पिलाने के गुनहगार अधिकारी कौन हैं। कोर्ट ने खेद जताया कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है या नहीं।</p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पानी चेक करते थे और उच्चाधिकारियों की पानी जांचने में कोई रुचि ही नहीं थी। नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने भी पानी जांचने की जहमत नहीं उठाई।</p>
<p><strong>ठेकेदार की पेमेंट रोकी</strong></p>
<p>कोर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की देखरेख के लिए रखे गए ठेकेदार अक्षय डोगर को 31 जनवरी तक जारी की जाने वाली बकाया राशि 99 लाख 45 हजार के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>कोर्ट ने नई स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में बताएं। पीलिया से मरने वाले और अन्य पीड़ितों का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है या नहीं। प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वे जनसाधारण को पीलिया के बारे में जागरूक करें व इससे बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्राथमिक शिक्षा से विश्वविद्यालय के छात्रों को स्वच्छ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करंे। प्रदेश में पर्याप्त स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्थान गठित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।</p>
<p><strong>सचिव साथियों को बचाने के लिए कोर्ट को कर रही गुमराह</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर को झूठा वक्तव्य देने का दोषी पाते हुए पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ गलत और विरोधाभासी वक्तव्य सामने रखने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाए। कोर्ट ने आशंका जाहिर की कि सचिव या तो अपने पुराने सहयोगियों, अधीनस्थ अधिकारियों को बचाने एवं उनके हक में मामला तैयार करने की कोशिश कर रहीं हैं या फिर कोर्ट को पूरी तरह गुमराह करने का प्रयत्न कर रही हैं। कोर्ट ने अधिकारी के वक्तव्य में पाया कि एक तरफ वह कह रही हैं कि अश्वनी खड्ड के बारे में कोर्ट की ओर से पारित पिछले आदेशों की अनुपालना की जाती रही और दूसरी तरफ कहती हैं कि अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट करने के बाद प्लांट का उचित ढंग से रखरखाव नहीं किया जा रहा था इसलिए सप्लाई गंदी होने के कारण प्लांट को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>सचिव प्रदूषण बोर्ड ने समय पर नहीं दी अश्वनी खड्ड की रिपोर्ट</strong></strong></p>
<p>कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार पर भी ऐसे ही मामले चलाने के आदेश दिए। बोर्ड के सदस्य सचिव ने कोर्ट के आदेशानुसार अश्वनी खड्ड संबंधित रिपोर्ट हर तीन माह में कोर्ट में पेश नहीं की।</p>
<p>उन्होंने 18 सितंबर 2014 के बाद केवल एक बार रिपोर्ट पेश की, वो भी झूठी और गुमराह करने वाली पाई गई। कोर्ट ने अन्य अधिकारियों को भी अवमानना का दोषी पाया है, जिन्हें शिमला शहर में शुद्ध व पर्याप्त पानी वितरण करने के लिए समय-समय पर कोर्ट ने आवश्यक आदेश दिए थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>कोर्ट ने महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह तीन दिन के भीतर ऐसे अधिकारियों के नाम अदालत को बताएं ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जा सके।</p>
<p> <strong>दर्जनों अधिकारी बनाए प्रतिवादी</strong></p>
<p>कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें मुख्य सचिव सहित शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को भी प्रतिवादी बनाया। वहीं जन संपर्क विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सभी जिला दंडाधिकारी, सभी पुलिस अधीक्षक और सभी सीएमओ को भी प्रतिवादी बनाया है।</p>
<p><strong>आईपीएच में इन्हें नोटिस</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर सुमन विक्रांत, सुनील जस्टा को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाए और क्यों न उनके खिलाफ झूठे हल्फनामे दायर करने के आरोप के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p> strong>सीएस आैर सचिव आईपीएच से 2007 से अब तक की रिपोर्ट तलब</strong></p>
<p>मुख्य सचिव व सचिव आईपीएच से कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि कौन से अधिकारी वर्ष 2007 से आईपीएच विभाग में स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। मुख्य अभियंता से चपरासी तक का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>ठेकेदार को हस्तांतरित धन, प्रक्रिया तथा उसके बिल पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।</p>
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		<item>
		<title>प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिनरल वाटर मुहैया करवाये सरकार : हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/provide-mineral-water-to-students-in-shimla-hp-high-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 09:51:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी शिमला- शिमला में पीलिया से मरने वाले लोगों के परिवारों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दो-दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिक्षा सचिव से कहा कि वह प्राथमिक स्कूलों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  शिमला में पीलिया से मरने वाले लोगों के परिवारों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दो-दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिक्षा सचिव से कहा कि वह प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को साफ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करे।</p>
<p>हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों का ब्योरा मांगा है जो 19 सितंबर, 2014 से आज तक सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य (आईपीएच) विभाग में पानी की सप्लाई को साफ व स्वच्छ मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। ताकि उनके खिलाफ पिछली याचिका में दिए निर्देशों की अवहेलना करने का मामला चलाया जाए। </p>
<p>इसके अलावा आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत व सुनील जस्टा को झूठा हलफनामा दायर करने के मामले में नोटिस जारी किया गया है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वे जनसाधारण को पीलिया के खिलाफ जागरूक करें। लोगों को पीलिया से बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/provide-mineral-water-to-students-in-shimla-hp-high-court/">प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिनरल वाटर मुहैया करवाये सरकार : हाईकोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Feb 2016 11:11:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के उपनगरों में लोगों को पेयजल की समस्या के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन बाद पेयजल सप्लाई हो रहा है। गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन लोगों को पेयजल की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। उपनगर टुटू, समरहिल, बालूगंज और विकासनगर के लोग पानी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/">शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> राजधानी शिमला के उपनगरों में लोगों को पेयजल की समस्या के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन बाद पेयजल सप्लाई हो रहा है। गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन लोगों को पेयजल की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। उपनगर टुटू, समरहिल, बालूगंज और विकासनगर के लोग पानी के लिए या तो बावड़ियों पर निर्भर हैं या फिर निजी वाहनों से पानी मंगवा रहे हैं। </p>
<p>लोगों ने कहा कि सर्दी में ही पानी की समस्या है तो गर्मियों में उन्हें पानी की समस्या से खासी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अश्वनी खड्ड से पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों में शिमला शहर के लिए जल आपूर्ति करने वाली योजनाओं में पानी कम हो जाता है। पर्याप्त बर्फबारी और बारिश न होने के कारण प्राकृतिक जल स्द्दोतों में भी पानी जमा नहीं सका है। इस कारण गर्मियों में और भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>शिकायत करने पर भी नहीं हो रही कार्रवाई</strong></p>
<p>समरहिल के साथ लगते सांगटी क्षेत्र में भी पेयजल की बहुत कम मात्रा में सप्लाई हो रही है। लोगों ने कहा कि वह बावड़ी से पानी लाने के मजबूर हैं। बावड़ी का पानी पीने से पीलिया जैसी बीमारी के लिए खतरा बना हुआ है। रामपाल ने बताया कि उन्हें तीन दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है लेकिन सिर्फ दो बाल्टियां ही पीने का पानी उन्हें उपलब्ध होता है। उन्होंने आईपीएच विभाग में शिकायत भी की है, लेकिन समस्या वैसी ही बनी हुई है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/water-shortage-in-shimla/">शिमला में गर्मियों से पहले ही पेयजल संकट, लोग प्रदूषित बावड़ियों पे निर्भर, निजी वाहनों से पानी मंगवाने पे मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Feb 2016 06:11:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla Police SIT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/">सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। </p>
<p>शिमला शहर में फैले पीलिया पर एमसी और आईपीएच की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। पूरे मामले में एसआईटी के सामने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कह दिया है कि पीने के पानी में फिक्ल कॉलीफार्म होने की जानकारी सितंबर माह में एमसी और आईपीएच को दे दी गई थी। बोर्ड के इस जवाब से साफ हो गया है कि शहर में पीलिया फैलने से रुक सकता था और लगातार मौतें नहीं होतीं।</p>
<p>बोर्ड के इन दस्तावेजों के पेश करने पर एमसी और आईपीएच के कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई की संभावना अब और बढ़ गई है। 22 फरवरी के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। पीलिया मामले में गठित एसआईटी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सितंबर महीने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पीने के पानी में क्लोफॉम होने की लिखित सूचना नगर निगम और आईपीएच महकमे को दे दी गई थी।</p>
<p>इस रिपोर्ट से साफ था कि शहर में लोगों को पीने के लिए दूषित पानी की सप्लाई की गई। पानी के सैंपल कसुम्पटी स्थित आईपीएच के टैंक और संजौली से लिए गए थे। इस मामले में एसआईटी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। यह सनसनीखेज खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन और एसडीओ ने एसआईटी के समक्ष किया है। अपने दावे को मजबूत करने के लिए दस्तावेज भी पेश किए हैं।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एसआईटी के सामने तथ्य पेश करते हुए कहा कि जुलाई महीने में कसुम्पटी स्थित पानी के टैंक से सैंपल लिया गया। यह पानी अश्वनी खड्ड से ट्रीटमेंट के बाद टैंक में आता है। संजौली में भी पानी का सैंपल लिया गया, यहां पानी गिरी परियोजना से आता है। दोनों सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए वहां से उन्हें सितंबर में रिपोर्ट मिली।</p>
<p><strong>आईपीएच की हां, नगर निगम की ना</strong></p>
<p>आईपीएच ने माना कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उन्हें सूचना मिली थी और टेस्ट भी करवाए थे जो ठीक निकले। उधर, नगर निगम ने एसआईटी को लिखित में जवाब दिया कि उन्हें यह सूचना मिली ही नहीं है उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद अब एसआईटी हर पहलू पर जांच कर रही है।</p>
<p><strong>22 फरवरी को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई</strong></p>
<p>इस तरह के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय में साल 2007 और साल 2014 में भी जनहित याचिका दायर हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया है। इसके बाद साल 2015 में एक और जनहित याचिका दाखिल हुई है जिस पर सुनवाई चल रही है।</p>
<p>प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों की कितनी अनुपालना की गई और क्या उस दिशा में भी एसआईटी जांच कर रही है इस बारे में पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया गया है। 22 फरवरी को प्रदेश उच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़े केस की सुनवाई होगी और पुलिस प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।</p>
<p><strong>स्लज उठाने वाले ठेकेदार से पूछताछ </strong></p>
<p>सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई। इस ठेकेदार के पास कब से कब तक ठेका था इसकी जानकारी ली गई। ठेकेदार कैसे स्लज उठाता था और आईपीएच के साथ उसका क्या करार था, इन बिंदुओं पर पूछताछ हुई। ठेकेदार को एसआईटी ने फिर से पूछताछ के लिए बुलाया है। </p>
<p><strong>बोर्ड से अफसरों से हुई पूछताछ:नेगी</strong></p>
<p>एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ हुई है। सीवेज ट्रूीटमेंट प्लांट मल्याणा में स्लज उठाने वाले ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम और आईपीएच से भी जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/hp-state-pollution-control-board-on-shimla-jaundice/">सितंबर माह से एमसी और आईपीएच को थी पानी दूषित होने की जानकारी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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