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	<title>HP Health Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Health Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>खलीनी वार्ड के लोग दूषित बावड़ी का पानी पीने को मजबूर, प्रतिदिन 10 मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/03/water-contamination-in-shimla-water-resources-increasing-health-issues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 14:55:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यहां पर करीब आठ हजार लोग रहते हैं। नगर निगम ने झंझीड़ी स्थित बावड़ी के पास पानी पीने योग्य नहीं है सूचना पट्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नगर निगम नाकाम रहा है। </p>
<p>मजबूरन लोगों को इसी बावड़ी से पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र पूरी तरह पीलिया की चपेट में आया हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक लोगों को क्लोरिन की गोलियां नहीं दी गई हैं। हालांकि सीएमओ शिमला ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में चार स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे और क्लोरिन की गोलियां बांटेंगे लेकिन सीएमओ के आदेश भी कागजों में ही सिमटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेट दर्द के मामलों में हो रही वृद्धि</strong></p>
<p>दूषित पेयजल से लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में उल्ट, दस्त व बुखार के साथ पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र खलीनी में प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तीन से चार मरीज बुखार व उल्टी, दस्त से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों को रिपन अस्पताल टेस्ट के लिए भेजा जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p><strong>तीन माह से पेयजल किल्लत</strong></p>
<p>खलीनी में तीन माह से पेयजल किल्लत चल रही है। चार दिन बाद भी सिर्फ आधे घंटे के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस कारण मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
उमा दत्त</p>
<p><strong>पानी की आपूर्ति करने में निगम विफल</strong></p>
<p>जल जीवन है जल के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। नगर निगम पानी की आपूर्ति करने में विफल हो रहा है। मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
पूजा</p>
<p><strong>उबाल कर पीना पड़ रहा पानी</strong></p>
<p>प्रतिदिन पानी उबाल कर पी रहे हैं। नगर निगम पानी उपलब्ध करवा नहीं पा रहा है, तो मजबूरन दूषित पानी को उबाल कर पीना पड़ रहा है। ऐसे में सिलेंडर की खपत भी दुगनी हो गई है।<br />
निशा</p>
<p><strong>आम आदमी नहीं खरीद सकता पानी</strong></p>
<p>आम आदमी खरीद कर पानी ला नहीं सकता, नलकों में पानी आ नहीं रहा है। ऐसे में बावड़ी ही विकल्प है। मजबूरन यही से पानी भरना पड़ता है।<br />
पल्लवी</p>
<p><strong>टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी</strong></p>
<p>पहले नगर निगम ने लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब पानी दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बावड़ी ही एक विकल्प था, यहां पर भी पानी पीने योग्य नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी लोगों को नहीं मिल रहा है।<br />
विरेंद्र कुमार</p>
<p>Photo/Representational </p>
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		<title>सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से सिर्फ 5 मौतें और 680 हेपेटाईटिस ई मामले : कौल सिंह</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/25/jaundice-deaths-in-shimla-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Feb 2016 12:15:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwani khud]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया के प्रकोप से हर कोई सन है मगर सरकारी रिकॉर्ड में अभी तक पीलिया से पांच मौतों का ही रिकॉर्ड दुरुस्त है, बाकि आठ मौतें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग के पास आई हैं, उन पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि वे किसी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में पीलिया के प्रकोप से हर कोई सन है मगर सरकारी रिकॉर्ड में अभी तक पीलिया से पांच मौतों का ही रिकॉर्ड दुरुस्त है, बाकि आठ मौतें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग के पास आई हैं, उन पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि वे किसी अन्य कारण से मरे हैं। एक्यूट क्रोनिक लिवर व हार्ट फेलियर इनकी मौत का कारण माना है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने अपने अधिकारियों की टीम के साथ बुधवार को हाई पावर कमेटी की समीक्षा बैठक में हवाला देते हुए पुष्टि की है कि पीलिया यानि हेपेटाइटिस ई से पांच मौतें हुई हैं, बाकि तो ऐसे मामलों की मौतें हुई हैं, जो दस या इससे अधिक सालों से बीमार रहे हैं। इनमें से कई अस्थमेटिक भी रहे हैं। यहीं नहीं अभी तक पीलिया के 1500 मामले नहीं, अपितु 680 मामले ही हेपेटाईटिस ई से ग्रस्त पाए गए हैं। 1500 तो पीलिया के लिए पॉजीटिव आए हैं।</p>
<p>बीते एक दिन पहले आयोजित पीलिया की निगरानी और इंतजामों को लेकर सचिवालय में हुई बैठक की जानकारी देते हुए कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2007 के बाद वर्ष 2010 में पीलिया का प्रकोप शिमला में रहा है। विधानसभा में ये मामले गूंजे थे। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तक सदन में पेश किए थे। अश्वनी खड्ड के गंदे पानी से फैले पीलिया पर सरकार ने नियंत्रण कर लिया हैं।</p>
<p>शिमला में हाइली कंटेमिनेटिड पानी से पीलिया फैला है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से 70 लाख रुपये स्टडी के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला में विशेष अत्याधुनिक लैब खोली जाएगी। आगामी छह माह के भीतर लैब तैयार होगी और पीलिया पर इससे स्टडी होगी। पूणे एनआईवी ने भी रिपोर्ट भेजी है, उसके मुताबिक निगरानी की जा रही है।</p>
<p>प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में पीलिया से ये हुई हैं मौतें बाकि अन्य मौतों के कारण भी बता रहा है विभाग।</p>
<p><strong>पता उम्र कौन डायग्नोसिस कब मौत</strong></p>
<p><strong><strong>विकासनगर 43 महिला अनियंत्रित मधुमेह 26 दिसंबर</strong></p>
<p><strong>शिमला 1 महिला एआरडीएस 14 जनवरी</strong></p>
<p> <strong>शिमला 62 पुरुष एल्कोहलिक सिरोसिस 16 जनवरी</strong></p>
<p><strong>छोटा शिमला 29 महिला हेपेटाईटिस ई 12 जनवरी</strong></p>
<p><strong>मंडी मानवा 23 महिला हेपेटाईटिस ई 19 जनवरी</strong></p>
<p><strong>संजौली 25 महिला हेपेटाईटिस ई 18 फरवरी</strong></p>
<p><strong>खलिनी 74 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 19 फरवरी</strong></p>
<p><strong>शिमला 61 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 8 फरवरी</strong></p>
<p><strong> शिमला 58 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 20 फरवरी</strong></p>
<p><strong> कांगड़ा 36 महिला क्रोनिक लिवर फेलियर 7 फरवरी</strong></p>
<p><strong>कांगड़ा 52 पुरुष हेपेटाईटिस ई 15 जनवरी</strong></p>
<p><strong> बलोह 55 पुरुष क्रोनिक लिवर फेलियर 20 फरवरी</strong></p>
<p><strong>बिलासपुर 43 पुरुष हेपेटाईटिस ई 19 फरवरी</strong></p>
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		<item>
		<title>शिमला में अब पीलिया के साथ डायरिया भी पसारने लगा पांव,</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/22/diarrhea-in-shimla-after-jaundice-outbreak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Feb 2016 05:29:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- यदि आप थकान महसूस कर रहे हैं, पेट में तेज दर्द हो रहा है और आपने इसे पीलिया के लक्षण समझते हुए टेस्ट करवाया है व रिपोर्ट नेगेटिव आई है तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। वजह यह है कि राजधानी शिमला में अब पीलिया के साथ डायरिया भी पांव पसारने लगा है। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  यदि आप थकान महसूस कर रहे हैं, पेट में तेज दर्द हो रहा है और आपने इसे पीलिया के लक्षण समझते हुए टेस्ट करवाया है व रिपोर्ट नेगेटिव आई है तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। वजह यह है कि राजधानी शिमला में अब पीलिया के साथ डायरिया भी पांव पसारने लगा है। पीलियाग्रसित लोग इस रोग के उपचार के बाद डायरिया की गिरफ्त में आ रहे हैं। आइजीएमसी शिमला में इस तरह के मामले प्रतिदिन सामने आ रहे हैं।</p>
<p>शनिवार को अस्पताल में तीन नए मामले इस तरह के सामने आए हैं। यह लोग पहले पीलिया से ग्रसित थे और उसके बाद डायरिया से पीड़ित हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गंदे पानी के कारण ही डायरिया का जीवाणु शरीर में प्रवेश करता है। ऐसे में पीलिया के बाद डायरियां होने का खतरा अधिक हो जाता है। इसके चलते डॉक्टर पीलिया ठीक होने के बाद भी एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि डायरिया का बैक्टीरिया पीलिया से पहले भी शरीर पर आक्रमण कर सकता है। ऐसे में एहतियात बरतना अति आवश्यक है।</p>
<p><strong>डायरिया के लक्षण</strong></p>
<p>आमतौर पर डायरिया से पीड़ित व्यक्ति एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। अगर यह इससे ज्यादा समय तक रहे तो क्रॉनिक डायरिया कहलाता है। इसका इलाज समय पर न होने से यह खतरनाक भी हो सकता है, लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरतकर ठीक भी किया जा सकता है। इसके लिए डायरिया के लक्षण जानना काफी जरूरी हैं।</p>
<p>शरीर के अंदर का तापमान कम होने से उल्टी और दस्त की शिकायत हो जाती है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। इसके अलावा भी कई कारण हैं जिनकी वजह से डायरिया हो सकता है। पीलिया ग्रसित मरीज का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। इस कारण उसके शरीर में कुछ टिक नहीं पाता और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में वह व्यक्ति भी डायरिया की चपेट में आ जाता है।</p>
<p><strong>क्या है परहेज</strong></p>
<p>सही समय पर इलाज करवाने से इससे आसानी से निजात भी पाई जा सकती है। दस्त लगने पर शरीर में से पानी और खनिज लवण बाहर निकल जाते हैं, वहीं शरीर को पोषण भी समुचित रूप से नहीं मिल पाता। ठंड से परहेज रखें। दूषित पानी पीने से डायरियां का बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए उबला हुआ पानी पियें, तरल पदार्थ व हल्का भोजन ज्यादा लें।</p>
<p>डायरियां दूषित पानी के सेवन से अधिक होता है। पीलिया के मरीजों का लीवर काफी कमजोर रहता है, इसलिए ऐसे मरीजों में यह बीमारी अधिक पनपती है। अस्पताल में ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं। डायरिया या पीलिया के लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।</p>
<p>डा. राजेश कश्यप, प्रोफेसर मेडिसन, आईजीएमसी शिमला।</p>
<p>Image:slidesharecdn</p>
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		<item>
		<title>ऊना में लाखों की दवाइयाँ लोगों में बंटने के बजाये अस्पताल स्टोर में ही एक्सपायर, नष्ट करने की थी तैयारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/13/chintpurnai-civil-hospital-drug-stock-scam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Feb 2016 11:31:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[ऊना]]></category>
		<category><![CDATA[Chintpurni Civil Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Corruption]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ऊना- सरकारी अमले की लापरवाही की हद तो देखिए। एक ओर जहां अस्पतालों में लोगों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं, वहीं लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाएं स्टोर में ही पड़ी- पड़ी एक्सपायर हो गईं। जिला ऊना के चिंतपूर्णी सिविल अस्पताल में रखीं दवाइयां न तो मरीजों को बांटी गईं और न ही उच्चाधिकारियों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ऊना- सरकारी अमले की लापरवाही की हद तो देखिए। एक ओर जहां अस्पतालों में लोगों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं, वहीं लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाएं स्टोर में ही पड़ी- पड़ी एक्सपायर हो गईं। जिला ऊना के चिंतपूर्णी सिविल अस्पताल में रखीं दवाइयां न तो मरीजों को बांटी गईं और न ही उच्चाधिकारियों को इनके एक्सपायर होने की समय पर जानकारी दी गई। </p>
<p>उल्टा इन्हें इकट्ठा कर नष्ट करने का प्रयास किया गया। कुछ दवाइयां अप्रैल माह में एक्सपायर होनी थीं, उन्हें भी नष्ट करने की तैयारी कर ली गई। ऐन मौके पर जिला चिकित्सा अधिकारी डा. निखिल शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर सन्नी कौशल और बीएमओ डॉ. एसके वर्मा को भनक लग गई और वे मौके पर पहुंच गए।<br />
स्टोर में ही एक्सपायर हो चुकी दवाइयों में एंटी बॉयोटिक, टैबलेट, ग्लूकोज, ओआरएस सैशे, एनलप्रिल डोपामीन जैसी कई जीवनरक्षक दवाइयां पाई गईं। इनमें अधिकतर दवाओं की डेट एक्सपायर होने की पुष्टि विभागीय अधिकारियों ने की है। अब जांच के लिए एक कमेटी गठित कर अस्पताल में दवाइयों के स्टोर को सील कर दिया है। </p>
<p>मरीजों को परेशानी न हो इसलिए एक महीने की दवाइयों का स्टॉक भी स्टोर से निकलवा अलग रख लिया है। स्टोर इंचार्ज से चार्ज छीनने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि उक्त कर्मचारी 29 फरवरी को रिटायर होने वाला है। ड्रग इंस्पेक्टर सन्नी कौशल ने डस्टबिन में फेंकी दवा के पाउडर के सैंपल भी एकत्रित किए हैं। </p>
<p>कई दवाइयां तो मरीजों के लिए रोजमर्रा प्रयोग में लाई जाने वाली हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निखिल ने बताया कि पूरे स्टॉक की जांच की जाएगी। इसके बाद पूरी रिपोर्ट सीएमओ को प्रेषित की जाएगी। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नियमानुसार अमल में लाई जाएगी।<br />
सीएमओ डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि चिंतपूर्णी अस्पताल में दवाओं को खुर्द-बुर्द करने के प्रयास का मामला सामने आया है। घटना की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। चिंतपूर्णी अस्पताल जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं, वहीं ऐसा हाल है तो अन्य अस्पतालों में भी ऐसी स्थिति हो सकती है। </p>
<p>इस पर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. डीएस गुरुंग ने कहा कि मामला संगीन है। अन्य सरकारी अस्पतालों में भी दवाओं के स्टॉक की स्थिति है, इका पता लगाया जाएगा। दवाइयां समय पर क्यों मरीजों को नहीं बांटी जा रही हैं इसकी भी जांच होगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/13/chintpurnai-civil-hospital-drug-stock-scam/">ऊना में लाखों की दवाइयाँ लोगों में बंटने के बजाये अस्पताल स्टोर में ही एक्सपायर, नष्ट करने की थी तैयारी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:45:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है। सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है।</p>
<p>सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी में पीलिया से हुई मौतों पर शहर के अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले पर बोलने से मना कर दिया था। वहीं इन अधिकारियों ने भी ड्यूटी पर गाज न गिरे इसलिए उन्होंने भी मीडिया और प्रेस के फोन सुनने बंद कर दिए थे।<br />
मंगलवार शाम सवा छह बजे के करीब स्टेट सर्विलेंस अधिकारी डा. राकेश रोशन भारद्वाज से जब पीलिया के पॉजिटिव मामलों की जानकारी प्राप्त की तो उन्होंने बताया कि दिनभर में उनके पास अठारह पॉजिटिव मामलों की सूची आई है।</p>
<p>डीडीयू अस्पताल में पीलिया के कुल अठारह मामले पॉजिटिव आए जोकि स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर के हवाले से तो ठीक बैठते हैं लेकिन बाकी के अस्पतालों के आंकड़ों को लिया जाए तो पॉजिटिव मामलों में बढ़ोतरी हो गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ गया है?</p>
<p>विभाग और अस्पतालों के बीच सामंजसय की कमी है। केएनएच अस्पताल में भी पीलिया के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। हालांकि अगर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में पीलिया के पॉजिटिव मामलों के आंकड़े लिए जाए तो इनमें और बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/">पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>रिपन अस्पताल में एक्सपायरी डेट की दवाएं  मुफ्त देकर वाहवाही लूट रही सरकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/free-medicins-in-himachal-hospitals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:19:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Expired medicins]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Hp Health Director]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है। डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है।</p>
<p>डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन की इस बेखबरी से मुफ्त दवाओं की सरकारी खरीद पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय (रिपन) के पांच नंबर कमरे में डिस्पेंसरी खोली गई है।</p>
<p>डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाले कई दवाएं इस डिस्पेंसरी से मुफ्त में दी जा रही है। डिस्पेंसरी से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि अस्पताल प्रशासन की अनुमति पर यह दवाएं खरीदी जाती हैं। डाक्टरों के पर्ची पर दवा लिखने के बाद डिस्पेंसरी से दवा दी जाती है।</p>
<p>पैरासिटामौल की दवा में एक्सपायरी डेट अप्रैल 2016 लिखी गई है। जबकि लैसीपरो 500 दवा में एक्सपायरी डेट फरवरी 2016 लिखी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल प्रशासन की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि जिसके तहत खराब होने वाली दवाओं को बांटा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि फरवरी एक्सपायरी डेट की दवा अभी एक्सपायर नहीं हुई है। मार्च में इसे एक्सपायर माना जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डा. डी एस गुरंग ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी।</p>
<p>सभी सीएमओ को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि एक साल की लाइफ वाली दवाओं की ही खरीद की जाए। डीडीयू में अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है।</p>
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		<title>शिमला, सोलन के बाद अब सिरमौर के लोग पीलिया की चपेट में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/29/jaundice-cases-in-sirmaur-district/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2016 10:07:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[jaundice in Sirmaur]]></category>
		<category><![CDATA[Sirmaur District]]></category>
		<category><![CDATA[Solan city]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश की राजधानी शिमला को हिलाकर रख देने वाले पीलिया की सनसनी से अभी प्रदेश उभरा नहीं है कि प्रदेश की राजधानी के पड़ोसी जिले भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। जिला सिरमौर में भी पीलिया के मामले प्रकाश में आए हैं। केवल नाहन अस्पताल में ही करीब आठ मामले ऐसे प्रकाश में [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश की राजधानी शिमला को हिलाकर रख देने वाले पीलिया की सनसनी से अभी प्रदेश उभरा नहीं है कि प्रदेश की राजधानी के पड़ोसी जिले भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। जिला सिरमौर में भी पीलिया के मामले प्रकाश में आए हैं। केवल नाहन अस्पताल में ही करीब आठ मामले ऐसे प्रकाश में आए हैं।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक पिछले करीब दो सप्ताह से जो लोग शिमला गए थे तथा शिमला में फैले पीलिया की बीमारी का कुछ असर उनमें भी देखने को मिला है। जिला के गिरिपार क्षेत्र में भी पीलिया ने अपने लक्षण दिखाने शुरू कर दिए हैं। </p>
<p>क्षेत्र में करीब दो दर्जन के आसपास लोग पीलिया की चपेट में हैं जो जिला के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के विकासनगर व देहरादून में उपचार करवा रहे हैं। यही नहीं, कुछ लोग निजी क्लीनिकों व झाड़-फूंक का भी सहारा ले रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिला के हरिपुरधार, जरवा, भलाड़, हलाहं, घुंडवी, चाड़ना, भवाई, सेंज व खूड़ द्राबिल समेत दर्जनों गांव में दो दर्जन से अधिक लोग पीलिया की बीमारी की चपेट में हैं। </p>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से आईपीएच विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक नाहन अस्पताल में जिन लोगों में पीलिया के लक्षण पाए गए हैं उनमें से अधिकतर ऐसे लोग हैं जो या तो शिमला में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं या वहां पर किसी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।</p>
<p>जिला सिरमौर के हरिपुरधार क्षेत्र के गांव बांदल निवासी वैद्य सबला राम शर्मा ने बताया कि उनके पास पीलिया रोग से पीडि़त रोजाना 10 से 12 मरीज पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान वह 40 से अधिक पीलिया मरीजों का इलाज कर चुके हैं। </p>
<p>पीलिया से पीडि़त चाड़ना निवासी रविंद्र नेगी, सतपाल, योगराज व कोटी कंडा निवासी तुलाराम आदि ने विभाग से मांग की है कि ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में उचित दवाइयों का प्रबंध किया जाए तथा चिकित्सकों की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी जाए। उधर, इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संजय शर्मा ने बताया कि करीब आधा दर्जन मामले पीलिया के सामने आए हैं, परंतु इन लोगों की हिस्ट्री शिमला से जुड़ी हुई है।<br />
विभाग स्थिति से निपटने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।<br />
<strong><br />
सोलन में छह नए मामले आए सामने</strong><br />
  सोलन शहर के बाद अब पीलिया आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पांव पसारने लगा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सोमवार को 17 मरीजों के खून की जांच की गई, जिसमें से छह रोगियों में पीलिया होने की पुष्टि हुई है। विभाग द्वारा सभी मरीजों को क्षेत्रीय अस्पताल में टेस्ट किया गया था</p>
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		<item>
		<title>शिमला मे पीलिया के 60 नए मामले,  एक महिला की मौत, अआईजीएमसी व केएनएच ने साधी चुप्पी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/14/jaundice-death-at-igmc-shimla/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jan 2016 11:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है। शिमला के निगम विहार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/14/jaundice-death-at-igmc-shimla/">शिमला मे पीलिया के 60 नए मामले,  एक महिला की मौत, अआईजीएमसी व केएनएच ने साधी चुप्पी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है।</p>
<p>शिमला के निगम विहार की रहने वाली सुनीता (29) की मौत पीलिया से आईजीएमसी में हुई है। रिपोर्ट में हेपेटाईटिस ई होने का हवाला दिया गया है। आईजीएमसी में मंगलवार देर रात को सुनीता की मौत हुई है। सुनीता गर्भवती थी व उसका पति रॉबिन सिंह आठ जनवरी को उसे केएनएच में ले गया। वहां चिकित्सकों ने चेकअप करने पर बताया कि सुनीता को पीलिया है। ऐसे में प्रसव में काफी परेशानी हो सकती है। यहां तक कि मां या बच्चे में से एक की मौत भी हो सकती है। नौ जनवरी को सुबह छह बजे सुनीता ने बेटे को जन्म दिया व इसके बाद कोमा में चली गई। </p>
<p>10 जनवरी को केएनएच की चिकित्सकों ने सुनीता को आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। उसे आईसीयू में रखा गया। वह तीन दिन आईजीएमसी में रही। मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। वहीं बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बच्चे को पीलिया है या नहीं। इस मामले पर आईजीएमसी व केएनएच दोनों अस्तपाल प्रबंधनों ने चुप्पी साध ली है। हालांकि चिकित्सकों का तर्क है कि प्रसव के दौरान लीवर फेल होने से सुनीता की मौत हुई है मगर यह बात उसके परिजन मान नहीं रहे हैं।</p>
<p>पति रॉबिन सिंह ने कहा कि डॉक्टरों ने डिलीवरी के दौरान सुनीता को पीलिया की बीमारी बताई थी। उन्होंने बताया था कि नार्मल डिलीवरी के बाद सुनीता का लीवर खराब हो गया था। वहीं, वाल्मीकि महासभा के महासचिव ने कहा है कि रॉबिन सिंह गरीब परिवार से संबंध रखता है। उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। शहर में पीलिया काफी फैलता जा रहा है। इस पर रोकथाम जरूरी है।</p>
<p><em>अभी मैं बैठक में हूं। इस मामले में बाद में बात करता हूं।<br />
डॉ. एलएस चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक,केएनएच</em></p>
<p>राजधानी शिमला में बुधवार को पीलिया के 60 नए मामले सामने आए। अकेले डीडीयू अस्पताल में पीलिया के 26 मामले सामने आए  हैं। करीब 100 लोगों कें सैंपल लिए गए थे। इनमें से 60 सैंपल पॉजीटिव आए हैं।</p>
<p>पीलिया से शिमला शहर में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। प्रशासन अब तक पीलिया पर काबू पाने में नाकाम रहा है व अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। लैब्स के बाहर लोगों को टेस्ट करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लोग अब शिमला शहर का पानी पीने से भी डरने लगे हैं। </p>
<p>सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों से पानी पीने से शिमला के लोग परहेज कर रहे हैं। अस्पतालों में आए मरीज और तीमारदार अपने साथ पानी की बोतल साथ ला रहे हैं। शहर में पीलिया फैले को एक महीना होने को है। अश्वनि खड्ड से पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इसके बावजूद शहर में पीलिया के मामलों का आना चिंता का विषय है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजना राव ने बताया कि पीलिया के 60 नए मामले सामने आए हैं। लोगों को स्वच्छ और उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए। </p>
<p><strong>शहर में नहीं हुआ अलर्ट जारी</strong></p>
<p>हैरानी इस बात की है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया को लेकर कोई जागरूकता अभियान शहर में नहीं चलाया है। यहां तक कि शहर में कोई अलर्ट भी जारी नहीं किया है। लोगों को पीलिया से बचने के संबंध में उपाय भी नहीं बताए जा रहे हैं। वहीं अधिकारी कार्यालय में बैठ कर फाइलों को निपटाने में लगे हुए हैं। नगर निगम शहर के कुछ हिस्सों में जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है।</p>
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