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	<title>HP Art Language Cultural Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Art Language Cultural Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Mar 2016 12:47:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Culture Club Urni Kinnaur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आज की अन्तिम प्रस्तुुति में धू्रव शिखर, शिमला द्वारा नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक रंजीत कपूर तथा निर्देशक प्रवीण चांदला है। चैनपुर की दास्तान का कथानक उस वक्त का जब देश में बेईमानी थी, रिश्वत खोरी थी और भ्रष्टाचार था। अंग्रेजो की कैद से देश आजाद हुआ। पूरा मुल्क सदियों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/28/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-2016-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae/">हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> आज की अन्तिम प्रस्तुुति में धू्रव शिखर, शिमला द्वारा नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक रंजीत कपूर तथा निर्देशक प्रवीण चांदला है। चैनपुर की दास्तान का कथानक उस वक्त का जब देश में बेईमानी थी, रिश्वत खोरी थी और भ्रष्टाचार था। अंग्रेजो की कैद से देश आजाद हुआ। पूरा मुल्क सदियों से पड़ी गुलामी की जंजीरें तोड़-आजादी की सांसे ले रहा था। हर तरफ उमंग और जोश था।</p>
<p>आजादी का जश्न मनाने के बाद देश के नेताओं को महसूस हुआ कि आजादी हासिल कर लेना आसान था लेकिन उसे बनाए रखना बहुत मुश्किल है। सभी रियासतें हिन्दुस्तान में शामिल हो चुकी थी। लेकिन पुरानी बिमारियां, नौकरशाही लेन-देन, रिश्वतखोरी, जमाखोरी की हवा बह रही थी। इन कुरीतियों के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए गए, कानून बनाए गए, कई धमकियों दी गई लेकिन सारी बुराईयों से बेखबर एक रियासत ऐसी भी थी जहां लोग बडे प्यार से इन बुराईयों को गले लगाकर चैन की बंसी बजा रहे थे। यह रियासत थी चैनपुर। चैनपुर में क्या हो रहा था, कैसे हुआ, कैसे होगा इन सभी घटनाओं को पिरोकर हास्य व्यंग्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/category/%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF/" target="_blank">हिम रंग महोत्सव-2016की सभी प्रस्तुतियां पढ़ने के लिए क्लिक करें </a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; में दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। होरिंग्फो (हिरण-फो) नृत्य जिला किन्नौर के ग्राम उरनी में देवता श्री बद्री नरायण मन्दिर में किया जाता है।</p>
<p>यह नृत्य वैसाखी से 10 दिन पूर्व हर शाम को मन्दिर परिसर में होता है। वैसाखी के दिन यह नृत्य दोपहर के समय देवता श्री बद्री नारायण जी के समक्ष होता है। ग्रामवासी अत्यन्त प्रसन्ता से हर शाम को हिरण-फो नृत्य देखने आते है। यह नृत्य प्राचीन समय से चला आ रहा है। इस नृत्य में एक हिरण, राहुला व लाड़ा होता है।</p>
<p>राहुला विशेषता भूत-प्रेत व शिकारी होते है जो कि हिरण के साथ लड़ते है। दूसरी ओर राहुला स्वयं आपस में लड़कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते है। राहुला जिन्होंने पारम्पिरिक आभूषण पहना है वे परी की भूमिका अदा करते है तथा हिरण के साथ नृत्य करते है। आधुनिकता के इस दौर में भी यह नृत्य आज भी देवता श्री बद्री नारायण जी के मन्दिर परिसर में हिरण-फो नृत्य किया जाता है। ग्रामवारियों ने अपनी इस विरासत को बनाए रखा है ताकि आने वाली पीढ़ी इस नृत्य व संस्कृति का अनुसरण करते हुए इसे सुरक्षित रख सके।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/28/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-2016-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae/">हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2016 14:40:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। ये [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में  गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।<br />
</strong></p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां-राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>आज की प्रस्तुुति में प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा नाटक &#8220;बरसी&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक डाॅ. वयला वासुदेवन पिल्लै ने किया है। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन संजीव कुमार अरोड़ा ने किया है। इस नाटक में दर्शाया गया कि शस्त्र विद्या का जो प्रयोग युद्ध में होता आया है उसमें अब विज्ञान की,विद्या में अग्नि उगलने वाले नई खोज अर्थात परवाणु विस्फोटन की पताका फहरा रही है। झोंपडि़यां तक जल जाती है। विध्वंस के अंत में मृत्यु मंत्र रह जाता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>      बूंद भर पेयजल, मिलता नहीं जो अणुमुक्त हो।<br />
      जली लाशें बह रही है, जिन नदि नालों से हो।।</p>
<p>युग बदले,समय बदला,युद्ध का स्वरूप बदला किन्तु इससे मिलने वाले घाव,पीड़ा,उत्पीड़न और वेेदना यथावत है। युद्ध में पड़े सैंकड़ों शवों ने क्या पाया। धर्म या अधर्म,उन्होंने क्या सीखा, सत्य या असत्य, उन्होंने किसे अनाथ किया, महाराज को कोई भी चक्रवर्ती सम्राट युद्ध के बाद अनाथ नहीं होता। अनाथ होती है तो अबलाएं, अकिंचन ही जड़ से उखड़ जाती हैं। इनी सवालों के उत्तर खोजता ये नाटक एक प्रयोग है प्रणव थियेटर, बियोंड थियेटर सोलन का। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां- हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>हिमाचल प्रदेश को देव भूमि के नाम से जाना जाता है। देवी-देवताओं की पूजा एवं मान्यताओं के लिए यहां अनेक पर्व व त्योहार मनाएं जाते हैं। जिनमें अनेक परम्पारिक कार्यक्रम किए जाते है। सोलन जिला का करयाला भी देव परम्परा से जुड़ा लोकनाट्य है जो लोग अपने आराध्यों की स्तुति अथवा अपनी मन्नत पूरी होने पर करते हैं। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 23 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a></p>
<p>करयाला की उत्पति भी सोलन जिला से मानी जाती है। करयाला लोक नाट्य काफी प्राचीन समय से आयोजित किया जा रहा है जिसके माध्यम से वर्तमान समाज में फैली कुरीतियों को लोक भाषा में विभिन्न स्वांगों के माध्यम से ऊजागर किया जाता है जिससे लोगों का मनोरंजन भी होता है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 24 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन</a></p>
<p>पूजा, चन्द्रावली नृत्य,साधु का स्वांग, नट-नटिनी का स्वांग,लम्बरदार,ढ़ोंगी साधू, डाकिनी का स्वांग,झाड़ फूंक करने वालों के स्वांग के माध्यम से समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों को दर्शाया जाता है। यह लोनाट्य पूरी रात चलता है जिसमें लोगों के मनोंरंजन के लिए गीत-संगीत का कार्यक्रम लगातार चलता रहता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 25 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के छठे दिन नाटक ‘”सुन्नी भुंकू” और लोकनाट्य “जिजीविषा” तथा “दाहाजा” का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Mar 2016 13:27:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Active Monal Cultural Association Kullu]]></category>
		<category><![CDATA[Brijeshwar Kariyala Mandal Kuthar Solan]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsav 2016]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal culture]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Theater Groups]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Gaiety Theater]]></category>
		<category><![CDATA[Una]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>26 मार्च को इसी क्रम में बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; एम्फी थियेटर मे अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का आठवां नाटक &#8220;बरसी&#8221; प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। शिमला- आज की प्रस्तुुति में एक्टिव [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/">हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>26 मार्च को इसी क्रम में बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; एम्फी थियेटर मे अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का आठवां नाटक &#8220;बरसी&#8221; प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  आज की प्रस्तुुति में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन, कुल्लू द्वारा नाटक &#8220;सुन्नी भुंकू&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक तथा निर्देशक  केहर सिंह ठाकुर है। इस नाटक की कहानी सुन्नी भुंकू के पे्रम की है जो हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में आज भी गाथागीतों में प्रचलित है और इन्हें लैला-मजनू, हीर-रांझा तथा सोहनी-महिवाल जैसे प्रेमी समझा जाता है। तेजि़ंन,सुन्नी को पाने के लिए भुंकू के साथी गेशू से जान की धमकी देकर झूठ बुलवाता है कि भुंकू मर गया है। यह खबर सुनते ही सुन्नी चन्द्रभागा नदी में जो प्रेम की नदी मानी जाती है छलांग लगा लेती है और उसी के साथ उम्मीदें धूमिल हो जातीं हैं। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां-राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>अपने मायके के देस जाने की सुन्नी की मुहूंबोली भाभी की जो यह कहानी सुनाती है जिसे अब लड़कियां चाची कहतीं हैं, जो प्रेम में पड़कर यहां आई थी लेकिन अब उसका पति मर चुका है और लौटना चाहती है सुन्नी और भुंकू के साथ अपने मायके के देस क्योंकि भुंकू अपनी भेड़ें चराने उसके मायके के देस भी जाता है। </p>
<p>यह नाटक सुन्नी भुंकू के अमर प्रेम को दर्शाता है। जिस पर आज भी पहाड़ के लोगों की प्रबल आस्था है कि प्रेम कभी नहीं मिटता। प्रेम तो दो आत्माओं का मिलन है जो आपस में मिलकर परमात्मा में लीन हो जातीं हैं। पहाड़ों पर से बादलों के बीच से मृत सुन्नी की आवाज़ भुंकू के लिए आना और भुंकू का पहाड़ों की धुंद में सुन्नी-सुन्नी पुकारते हुए गुम हो जाना उन्हें अमरत्व प्रदान करता है। नाटक में गेशू का पागल हो जाना स्थिति का बस से बाहर हो जाना दिखाता है। अन्ततः तेंजि़न का लामा के परिवेश में दिखना इन्सान का भगवान बुद्व की शरण में जाकर किए पापों का प्रायश्चित दिखाता है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>नाटक में एक और महत्वपूर्ण पहलू है जिसमें भुंकू का मित्र काली माता का सोने का छत्र चोरी करता है और बाद में सामने आता है यह कहते हुए कि मैंने चोरी नहीं की है बल्कि माता से छत्र मांगा है क्योंकि मेरी जन्म देने वाली मां बीमार है उसका इलाज करने के लिए मैंने मंदिर वाली माता से छत्र मांगा है और इसे गिरवी रख कर मैं मेरी जन्म देने वाली मां का इलाज़ करूंगा और जब ठीक हो जाएगी तो धीरे धीरे कमाकर छत्र मंदिर वाली माता को लौटा दूंगा। मैंने कोई चोरी नहीं की बल्कि एक माता से मांग कर दूसरी माता की ज़रूरत पूरी करने की कोशिश कर रहा हूं। </p>
<p>नाटक की यह घटना वर्तमान में भी लागू होती है कि हम मंदिरों में तो सोना आस्था के नाम पर चढ़ा देते हैं जहां उसकी कोई ज़रूरत नहीं होती। लेकिन गरीब ज़रूरतमंद को ईलाज के लिए कोई मदद नहीं देता।	</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर 1 बजकर 30 मिनट में धाजा मण्डली, ऊना द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;दाहाजा&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। यह नाट्य द्वापर युग में कृष्ण और सिद्ध चानों बली का युद्ध हुआ था। </p>
<p>जिसमें कृष्ण भगवान के हाथों सिद्ध चानों मारा गया था। यह नाट्य श्री कृष्ण भगवान की आरती से शुरू होता है। जिसमें चद्रावलियां (सखिया) श्री कृष्ण भगवान जी की आरती उतारती है। और नृत्य करती है। श्री कृष्ण भगवान जी के आगे प्रार्थना करती है कि हमें सिद्ध चानों बनी जी के दर्शन चाहिए। श्री कृष्ण भगवान सिदचिनों बली जी के बोरासाई को बुलाते है और बौरा साई सिद्ध चानों बली हस वाली की सवारी करके स्मेला थान से चलते है। और अखाडे में पहुचकर लोगो को दर्शन देते है। यह नाट्य दाहाजा चद्रावली नाम से प्रसिद्ध है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां- हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की दूसरी कड़ी में दोपहर बहस नाट्य एवं कला मंच, कुल्लू द्वारा सुप्रसिद्ध लोक शैली पर आघारित लोकनाट्य ‘‘जिजीविषा’’ गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश का कबायली क्षेत्र लाहौल तक पहुंचने के लिए बर्फीले रोहतांग दर्रे का सामना, नेपाली मजदूरो का काम की तलाश में लाहौल पहुंचना एक कभी न खत्म होने वाला सिलसिला है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 23 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a></p>
<p>दर्रे का केवल छै महीने के लिए खुलना,मौसम बदलते ही यातायात के साधनों का चलना बन्द होना एक बड़ी भौगोलिक विवशता है। गर्मियों में भी जो दर्रा अपनी ठण्डक से हड्डियों तक को कंपा देता है उसी दर्रे को जिजीविषा की विवशता में लाहौल निवासी और गोरखे मज़दूरो को पार करना पड़ता है बिना किसी साधन के अक्सर पैदल।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 24 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन</a></p>
<p>कंपकंपाती ठण्ड़ बर्फीली हवाओं,धुंध और किसी भी क्षण तेजी से बदलते मौसम के बीच जान हथेली पर रखे आदमी की दर्रा पार करने की कोशिश में कई बार जिन्दगी हार जाती है। इसी तरह जीने की इच्छा व मौत के बीच जूझते एक मजदूर गोरखा दम्पति (गर्भवती नेपाली महिला) की जिन्दगी व मौत के संघर्ष की सत्य घटना पर आधारित नाटक है-‘जिजीविषा’</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/">हिम रंग महोत्सव-2016- के  छठे दिन नाटक ‘&#8221;सुन्नी भुंकू&#8221; और लोकनाट्य  &#8220;जिजीविषा&#8221; तथा &#8220;दाहाजा&#8221; का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन  नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Mar 2016 07:31:34 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsva 2016]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Theater Groups]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[KBDS Theater Group Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Samvad Yuva Mandal Mandi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 23 मार्च,2016 को प्रातः ग्यारह बजे गेयटी सेमीनार कक्ष में दिनांक 23 मार्च,2016 शाम पांच बजकर तीस मिनट में उत्सव शिमला- आज की प्रस्तुुति में केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक मोहन राकेश तथा निर्देशक सुश्री देवेन जोशी है। ‘‘आधे-अधूरे’’ नाटक समकालीन व यर्थाथपरक नाटक है। इस नाटक की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/">हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन  नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिनांक 23 मार्च,2016 को प्रातः ग्यारह बजे गेयटी सेमीनार कक्ष में दिनांक 23 मार्च,2016 शाम पांच बजकर तीस मिनट में उत्सव</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  आज की प्रस्तुुति में केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक मोहन राकेश तथा निर्देशक सुश्री देवेन जोशी है। ‘‘आधे-अधूरे’’ नाटक समकालीन व यर्थाथपरक नाटक है। इस नाटक की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी भाषा है इसमें वह सामथ्र्य है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां- राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>आधे-अधूरे एक स्त्री-पूरूष के बीज के तनावों का दस्तावेज़ है। इस परिवार की मुख्य पात्रा सावित्री एक बेल की भांति है जो अपने जीवन में एक पुरूष की तलाश में है जो सम्पूर्ण पुरूष हो। इसलिए इस नाटक की लेखनी इस प्रकार है कि पुरूष पात्र का कोई नाम नहीं है बस पुरूष एक,दो व तीन है। इसमें पुरूष पात्र का स्वरूप,भाव व चेहरा बदल रहा है परन्तु स्त्री पात्र की परिस्थिीतियां,स्थान व समय नहीं। पुरूष सम्पूर्ण नाटक में एक अनिश्चित पात्र होते हुए भी एक निश्चित पात्र है। सावित्री का महेद्रं नाथ का अधिक नज़दीक से जानने से अब उससे वितृष्णा होने लगी है। क्योंकि जीवन से सावित्री की अपेक्षाएं बहुमुखी और अनन्त है पर यह अकांक्षा पूरी नहीं हो पाती, क्योंकि सम्पूर्णता की तलाश ही वाजि़ब नहीं।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>पुरूष एक सावित्री का पति महेद्रं नाथ का गुबार कुछ इस तरह से निकलता है। परिवार के सभी सदस्यों के द्वारा हर वक़्त की धुत्कार, हर वक़्त की कोचं बस यही कमाई है मेरी इतने सालों की। वह कहता है कि आज घर में उसकी हालत बस एक नौकर के समान है। अब वह केवल रबर स्टेम्प का टप्पा है जो सिर्फ घिसता चला जाता है। वह अपनी पत्नी के पुरूष मित्रों को जानता है और कभी-कभी उनका जि़क्र करके अपने दिल की भड़ास निकालता रहता है।</p>
<p>यह नाटक एक पारिवारिक विघटन की गाथा भी है। एक अभिशप्त कुटुम्ब जिसका हर पात्र अपने जीवन में आधा-अधूरा है व इस भव सागर में निर्जन सा जीवन जी रहे है। कहानी एक विशेष परिवार की है जिसकी परिस्थितियां विशेष है और सभी सदस्य उन्हीं उल्लझनों में उल्लझे रहते हैं अपने-अपने अस्तिव की तलाश में सभी के विचार हर घड़ी एक-दुसरे से टकराते रहते है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>एक अन्य स्तर पर यह नाटय-रचना मानवीय सन्तोष के अधूरेपन का रेखांकन है। जो जीवन में सम्पूर्णता को प्राप्त नही कर पाते। </p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1.jpg" alt="Shimla Gaiety Theater" width="1000" height="685" class="alignnone size-full wp-image-4578" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-300x206.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-768x526.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-100x70.jpg 100w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-218x150.jpg 218w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-696x477.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-1-613x420.jpg 613w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ की पहली कड़ी में दोपहर बाद संवाद युवा मण्डल, मण्ड़ी द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य ‘‘बांठड़ा’’  गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश में जहां 25-30 किलोमीटर बाद भाषा के स्वरूप में अन्तर आ जाता है वहीं लोकनाट्यों के नाम उन्हें अभिनीत करने की शैली भी बदल जाती है। लोकधर्मी नाट्य परम्परा बांठड़ा मण्डी में बहुत प्रचलित है। </p>
<p><a href="http://ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>बांठड़ा में पौराणिक मिथकों की कथा,सामाजिक,धार्मिक,सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक घटनाओं के अंश लोकनाट्य बांठड़ा के माध्यम से दर्शाए गए हैं। भारतीय नाट्य विधाओं में एक बहुत महत्वपूर्ण विधा रही स्वाँग, जिसमें कलाकार सामाजिक कुरितीयों पर बहुत साधारण और सटीक तरीके से मजाक-मजाक में तीखे प्रहार करते हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसे प्रदर्शनों में कलाकारों ने राजाओं तक पर तीखे प्रहार किए हैं। यह विधा अलग-अलग प्रांतो में अलग नामों से जानी जाती है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/">हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन  नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Mar 2016 14:11:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Chureshwar Lok Nritya Sanskritik Mandal Jalag]]></category>
		<category><![CDATA[Gaiety Theatre Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsav 2016]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[Lok Nritya Sanskritik Mandal Jalag]]></category>
		<category><![CDATA[Utsav United theater Society Mandi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>23 मार्च को इसी क्रम में संवाद युवा मण्डल, मण्ड़ी द्वारा लोकनाट्य ‘‘बांठड़ा’’ एम्फी थियेटर मंे सायं 3 बजकर 30 पर प्रस्तुत किया जायेगा व उसके बाद सायं 5 बजकर 30 मिनट पर गेयटी के ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का पांचवा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। शिमला- आज की प्रस्तुुति [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/">हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>
<strong>23 मार्च को इसी क्रम में संवाद युवा मण्डल, मण्ड़ी द्वारा लोकनाट्य ‘‘बांठड़ा’’ एम्फी थियेटर मंे सायं 3 बजकर 30 पर प्रस्तुत किया जायेगा व उसके बाद सायं 5 बजकर 30 मिनट पर गेयटी के ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का पांचवा नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ केबीडीएस रंगमंच शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।</strong></p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla.jpg" alt="The Ridge Shimla" width="1000" height="650" class="alignnone size-full wp-image-4527" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla-300x195.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla-768x499.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla-696x452.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/The-Ride-Shimla-646x420.jpg 646w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  आज की प्रस्तुुति में उत्सव युनाईटिड थियेटर सोसायटी, मण्डी द्वारा नाटक ‘‘बेबस लाश’’ मंचित किया किया। जिस की शुरूआत दो लोगों के  लेखक  प्रफुल्ल रथ तथा निर्देशक सुश्री दक्षा शर्मा है। नाटक झगड़े से होती है जो एक लाश को लेकर आपस में बेहस कर रहे हैं। नाटक का पात्र चैरसिया जो एक पान का खोखा चलाता है। उस लाश को देख के कोई प्रतिक्रिया नही देता न ही उस लाश के बारे में किसी से बात करता है। किरन जो चैरसिया का ग्राहक है इन्सानियत की दुहाई देकर और अपने नैतिक मुल्यों का वास्ता देकर उस बेबस लाश की सहायता करना चाहता है ताकि दाह संस्कार हो सके। जैसे-जैसे नाटक आगे बड़ता है और पात्र नाटक में आते हैं। वो सब भी उस लाश को अलग-अलग धर्म का बताकर उस बेबस लाश की सहायता नही करना चाहता। ये नाटक आपसी वैचारिक मतभेद रिश्तों के नाम पे संस्कृति के नाम पर इन्सानियत के नाम पर धर्म के नाम पर और राजनीति की आड़ में धार्मिक प्रपंच को दर्शाता है ये एक नाटक। अंत में एक बहुत ही मार्मिक  संदेश दर्शकों को देता है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें</strong> <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें </a></p>
<p>हिम रंग महोत्सव-2016 की पहली कड़ी में दोपहर बाद चुड़ेश्वर लोक नृत्य मण्डल जालग, सिरमौर द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य करयाला’’ गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater.jpg" alt="Gaiety Theatre Shimla" width="1000" height="629" class="alignnone size-full wp-image-4526" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-300x189.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-768x483.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-696x438.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-668x420.jpg 668w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>दिनांक 22 मार्च,2016 को प्रातः 11:00 बजे गेयटी सेमीनार कक्ष में दिनांक 21 मार्च,2016 सायं 5 बजकर 30 मिनट पर मकसद कल्चरल एण्ड वेलफेयर सोसायटी, सिरमौर द्वारा मंचित नाटक ‘‘सद्गति’’ पर परिचर्चा-समीक्षा की गई। जिसमें समीक्षकों द्वारा नाटक सद्गति को भविष्य में और अच्छी प्रकार से मंचित करने की हिदायत दी गईं। </p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department.jpg" alt="HP State Art, Language  and Culture Department" width="1000" height="673" class="alignnone size-full wp-image-4524" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department-300x202.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department-768x517.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department-696x468.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/HP-State-Art-Language-and-Culture-Department-624x420.jpg 624w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें</strong> <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a> </p>
<p>।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater.jpg" alt="Shimla Gaiety Theater" width="1000" height="629" class="alignnone size-full wp-image-4526" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-300x189.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-768x483.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-696x438.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/Shimla-Gaiety-Theater-668x420.jpg 668w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/">हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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