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	<title>DDU Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Mon, 20 Jun 2016 13:27:45 +0000</lastBuildDate>
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	<title>DDU Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>पीलिया के बाद शिमला वायरल फीवर की चपेट में, रोजाना सैंकड़ों मरीज हो भर्ती</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/20/viral-fever-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jun 2016 12:33:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश की राजधानी में वायरल फीवर इन दिनों सक्रिय हो गया है। अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों मरीज इस बीमारी के भर्ती हो रहे हैं। शिमला के तीनों अस्पताल आईजीएमसी, केएनएच व दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में बच्चों सहित बड़े लोग वायरल फीवर की चपेट में आने से अपना उपचार करवा रहे हैं। यह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश की राजधानी में वायरल फीवर इन दिनों सक्रिय हो गया है। अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों मरीज इस बीमारी के भर्ती हो रहे हैं। शिमला के तीनों अस्पताल आईजीएमसी, केएनएच व दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में बच्चों सहित बड़े लोग वायरल फीवर की चपेट में आने से अपना उपचार करवा रहे हैं। यह वायरल मौसम में फेरबदल के कारण होता है।</p>
<p>इन दिनों राजधानी में कभी गर्मी तो कभी ठंड हो रही है, ऐसे में लोग अपने स्वास्थ्य का सही रूप से ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। इस वायरल की चपेट में छोटे बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े लोग भी आ रहे हैं। चिकित्सों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि वायरल से बचने के लिए जल्द ही चिकित्सकों को दिखाएं। वहीं शुक्रवार को आईजीएमसी में 100, के.एन.एच. 40 व डीडीयू में 60 के करीब वायरल के मरीज अपनी जांच करवाने पहुंचे। सभी अस्पतालों में रोगियों की संख्या में 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। रिपन अस्पताल में आम दिनों में रोजाना वायरल के करीब 300 केस पहुंचते थे, जबकि पिछले एक सप्ताह से विभिन्न ओपीडी में इनकी संख्या 400 तक पहुंच रही है। इसी तरह आईजीएमसी में भी वायरल के रोगी सामान्य से अधिक मात्रा में आ रहे हैं। हालांकि डाक्टरों के अनुसार वायरल से डरने की जरूरत नहीं है। हल्की सी सावधानी ही इससे बचा सकती है।</p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>वायरल बुखार के लक्षण</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>आखें लाल होना</td>
</tr>
<tr>
<td>बुखार में शरीर का ताप 101 से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है!</td>
</tr>
<tr>
<td>खांसी और जुकाम होना</td>
</tr>
<tr>
<td>जोड़ों में दर्द और सूजन होना</td>
</tr>
<tr>
<td>थकान और गले में दर्द होना</td>
</tr>
<tr>
<td>नाक बहना होना</td>
</tr>
<tr>
<td>बदन दर्द होना</td>
</tr>
<tr>
<td>भूख न लगना</td>
</tr>
<tr>
<td>लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना व सिरदर्द होना आदि</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>ऐसे करें बचाव </strong></p>
<p>डाक्टरों के अनुसार हल्का वायरल होने पर घबराने की जरूरत नहीं होती। इसमें दवाइयां लेने की भी आवश्यकता नहीं होगी। वायरल होने पर नमक व पानी के गरारे करें, इसके अलावा स्टीम लेने से भी यह आसानी से ठीक हो जाता है। वहीं इस मौसम में किनू, संतरा या आंवला आदि खाने चाहिए। इसके अलावा खाने-पीने का खास ध्यान रखें, ताजा खाना ही खाएं। यदि वायरल अधिक हो जाए तो डॉक्टरों की सलाह लें, क्योंकि इससे चेस्ट इंफेक्शन होने का डर बना रहता है।</p>
<p>बता दें कि मौसम बदलाव के कारण अस्पतालों में वायरल के रोगियों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। रिपन अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से 20 से 30 फीसदी तक रोगी बढ़े हैं। वायरल होने पर रोगियों को घबराना नहीं चाहिए। डाक्टरों की सलाह से आसानी से वायरल ठीक हो जाता है।</p>
<p>With Inputs from Eenaduindia</p>
<p>Photo: Health Zone5/Representational Image</p>
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			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jun 2016 11:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donors]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Watcher Blood Donors]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Secretary]]></category>
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		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Blood Banks]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता। </p>
<p>फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को <em>&#8220;रूटीन का मामला&#8221;</em> बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/wvMb4H9U5KE" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।</p>
<p>आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण <em>&#8220;रक्त की कम मात्रा&#8221;</em> बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।</p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।</p>
<h3>तेरह मई को फेंका गया रक्त</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25646</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25764</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25700</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25775</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25789</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>यह है सोलह मई का आंकड़ा</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25664</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25649</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25679</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25677</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25682</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25683</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25687</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25696</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25731</td>
<td>एबी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25737</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25724</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25728</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25722</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25735</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25716</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25707</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25699</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25734</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
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			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला के ब्लड बैंक ने कूड़ेदान में फ़ेंक दिया 21 यूनिट रक्त, रक्तदाताओं की भावनाएं आहत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/shimla-ddu-hospital-blood-bank-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 May 2016 05:23:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। </p>
<p>प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि डीडीयू अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त फेंके जाने से रक्तदाताओं की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं। उन्होंने डीडीयू और कमलानेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद करके वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोलने और स्टाफ को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक को मज़बूत बनाने में लगाने की मांग की।</p>
<p>फाउंडेशन ने बताया कि गत 25 मार्च से 3 मई के बीच डीडीयू ब्लड बैंक ने 21 यूनिट रक्त इसलिए फ़ेंक दिया क्योकि वह 35 दिन की मियाद पूरी कर चुका था। फेंका गया रक्त संक्रमित नहीं था और उसे समय रहते आईजीएमसी या किसी अन्य ब्लड बैंक को दिया जा सकता था। रक्त फेंकना एक घृणित अपराध है क्योंकि रक्तदाता निस्वार्थ भाव से दूसरों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद 87 बार खून दान कर चुके हैं।</p>
<p>फाउंडेश का यह भी कहना है कि डीडीयू अस्पताल ब्लड बैंक से आईजीएमसी ब्लड बैंक मुश्किल से आधे घंटे की दूरी पर है जहाँ रक्त की अक्सर कमी रहती है और रोज़ाना औसत खपत 40 से 60 यूनिट की है। वहां रक्त आसानी से भेजा जा सकता था। लेकिन डीडीयू ब्लड बैंक ने इस ओर कोई प्रयास नहीं करता है और 35 दिन के बाद बड़ी आसानी से खून कूड़ेदान में फ़ेंक देता है। वहां 6 यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेश ने सुझाव देते हुए कहा कि डीडीयू और कमला नेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद कर के वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोले जाएं। इन दोनों ब्लड बैंकों के स्टाफ को आईजीएमसी में शिफ्ट कर के उसे और मज़बूत बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>फाउंडेश ने प्रदेश में ब्लड कंपोनेंट थेरेपी को बढ़ावा देने की मांग की ताकि एक यूनिट रक्त को कई मरीजों के काम में लाया जा सके। अभी ये सुविधा आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज और मंडी के अस्पताल में ही उपलब्ध हैं जहाँ इसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है।   </p>
<p>Photo: Mental Floss/Representational Image</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:45:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP IPH department]]></category>
		<category><![CDATA[Juandice]]></category>
		<category><![CDATA[KNH Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है। सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/">पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में रोजाना पीलिया से आने वाले मामलों को स्वास्थ्य महकमा साइट पर गलत आंकड़े पेश कर रहा है। रोजाना अस्पतालों से पीलिया के आए आंकड़ों को अपडेट करने का जिम्मा एक जिम्मेदार अधिकारी को सौंपा है।</p>
<p>सरकारी साइट पर पीलिया के आंकड़ों को अपडेट तो हो रही है लेकिन अगले दिन। राजधानी में पीलिया से हुई मौतों पर शहर के अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले पर बोलने से मना कर दिया था। वहीं इन अधिकारियों ने भी ड्यूटी पर गाज न गिरे इसलिए उन्होंने भी मीडिया और प्रेस के फोन सुनने बंद कर दिए थे।<br />
मंगलवार शाम सवा छह बजे के करीब स्टेट सर्विलेंस अधिकारी डा. राकेश रोशन भारद्वाज से जब पीलिया के पॉजिटिव मामलों की जानकारी प्राप्त की तो उन्होंने बताया कि दिनभर में उनके पास अठारह पॉजिटिव मामलों की सूची आई है।</p>
<p>डीडीयू अस्पताल में पीलिया के कुल अठारह मामले पॉजिटिव आए जोकि स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर के हवाले से तो ठीक बैठते हैं लेकिन बाकी के अस्पतालों के आंकड़ों को लिया जाए तो पॉजिटिव मामलों में बढ़ोतरी हो गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ गया है?</p>
<p>विभाग और अस्पतालों के बीच सामंजसय की कमी है। केएनएच अस्पताल में भी पीलिया के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। हालांकि अगर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में पीलिया के पॉजिटिव मामलों के आंकड़े लिए जाए तो इनमें और बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/shimla-jaundice-outbreak-4/">पीलिया के आंकड़ों की दी जा रही गलत जानकारी, अधिकारियों ने मीडिया और प्रेस के फोन सुनने किये बंद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रिपन अस्पताल में एक्सपायरी डेट की दवाएं  मुफ्त देकर वाहवाही लूट रही सरकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/free-medicins-in-himachal-hospitals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:19:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Expired medicins]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Hp Health Director]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है। डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है।</p>
<p>डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन की इस बेखबरी से मुफ्त दवाओं की सरकारी खरीद पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय (रिपन) के पांच नंबर कमरे में डिस्पेंसरी खोली गई है।</p>
<p>डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाले कई दवाएं इस डिस्पेंसरी से मुफ्त में दी जा रही है। डिस्पेंसरी से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि अस्पताल प्रशासन की अनुमति पर यह दवाएं खरीदी जाती हैं। डाक्टरों के पर्ची पर दवा लिखने के बाद डिस्पेंसरी से दवा दी जाती है।</p>
<p>पैरासिटामौल की दवा में एक्सपायरी डेट अप्रैल 2016 लिखी गई है। जबकि लैसीपरो 500 दवा में एक्सपायरी डेट फरवरी 2016 लिखी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल प्रशासन की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि जिसके तहत खराब होने वाली दवाओं को बांटा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि फरवरी एक्सपायरी डेट की दवा अभी एक्सपायर नहीं हुई है। मार्च में इसे एक्सपायर माना जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डा. डी एस गुरंग ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी।</p>
<p>सभी सीएमओ को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि एक साल की लाइफ वाली दवाओं की ही खरीद की जाए। डीडीयू में अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है।</p>
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		<title>शिमला में पीलिया पीड़ित रोगियों का आंकड़ा 600 के पार, टेस्ट के लिए लगी रहीं लंबी कतारें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Jan 2016 08:08:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice Cases Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Ripon Hospital]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- रिपन अस्पताल शिमला में मंगलवार को पीलिया के 36 नए मामले आए। ऐसे में शिमला में इस महीने पीलिया से पीड़ित रोगियों का आंकड़ा 600 से पार हो गया है। शिमला के अस्पतालों में पीलिया के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। डीडीयू में पीलिया के टेस्ट करवाने के लिए लैब [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  रिपन अस्पताल शिमला में मंगलवार को पीलिया के 36 नए मामले आए। ऐसे में शिमला में इस महीने पीलिया से पीड़ित रोगियों का आंकड़ा 600 से पार हो गया है। शिमला के अस्पतालों में पीलिया के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। डीडीयू में पीलिया के टेस्ट करवाने के लिए लैब के बहार लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।</p>
<p>लोग टेस्ट के लिए घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हैं। पीलिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभाग भी जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया की रोकथाम के लिए अस्पतालों में पुख्ता इंतजाम किए हैं। लोग भी पीलिया को लेकर पूरी सावधानी बरत रहे हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस बार पीलिया के आंकड़े कहीं ज्यादा चौकाने वाले हैं। वहीं, हकीमों के घरों में कई लोग पीलिया की झाड़-फूंक करवाने आ रहे हैं।</p>
<p>चिकित्सकों का मानना है कि पीलिया सामान्य रोग है जो दूषित पानी व संक्रमण से फैलता है और झाड़-फूंक से ठीक नहीं होता है। पीलिया के लक्षण दिखने पर तुंरत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। पीलिया के ज्यादातर मामले विकास नगर, न्यू शिमला व चौड़ा मैदान से आ रहे हैं। सर्दियों में पीलिया के ज्यादा मामले सामने आते हैं। इस रोग से बचने के लिए लोगों को पानी उबाल कर पीना चाहिए।</p>
<p>पीलिया से निपटने के लिए अस्पताल में पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। बुखार होने पर जरूरी नहीं कि आदमी को पीलिया हो ही जाए। लोग पानी उबाल कर पीएं तो इस रोग से बचा जा सकता है।</p>
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