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	<title>हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>कोटखाई केस: चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में ,कंडा जेल शिफ्ट होंगे चारों आरोपी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/28/kotkhai-rape-and-murder-case-accused-shifted-to-kanda-jail/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jul 2017 06:13:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[कंडा जेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सीबीआई हाई कोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने से पहले कुछ भी सार्वजनिक नहीं करेगी शिमला- सीबीआई ने बिटिया मर्डर केस में अपनी कस्टडी में लिए चार आरोपियों को ठियोग के अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी हरमेश कुमार की अदालत के समक्ष पेश किया। न्यायालय में पेश होने से पहले आरोपियों का ठियोग सिविल अस्पताल में मेडिकल [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/28/kotkhai-rape-and-murder-case-accused-shifted-to-kanda-jail/">कोटखाई केस: चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में ,कंडा जेल शिफ्ट होंगे चारों आरोपी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सीबीआई हाई कोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने से पहले कुछ भी सार्वजनिक नहीं करेगी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> सीबीआई ने बिटिया मर्डर केस में अपनी कस्टडी में लिए चार आरोपियों को ठियोग के अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी हरमेश कुमार की अदालत के समक्ष पेश किया। न्यायालय में पेश होने से पहले आरोपियों का ठियोग सिविल अस्पताल में मेडिकल भी करवाया गया। </p>
<p>उसके बाद चारों आरोपियों राजेंद्र सिंह उर्फ राजू,सुभाष बिस्ट,लोकजन उर्फ छोटू और दीपक को शिमला की कंडा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। मामले से जुड़े एक आरोपी आशीष चौहान को बीते दिन ही न्यायालय में पेश किया गया था जहां से उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।</p>
<p>सीबीआई ने बीते मंगलवार को पांचों आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। गुड़िया मामले के आरोपियों को अब सत्र न्यायाधीश शिमला के समक्ष ही पेश किया जाएगा क्योंकि यहीं पर इनका ट्रायल भी चलना है।</p>
<p><a href="http://www.amarujala.com/shimla/crime/kotkhai-gangrape-and-murder-case-four-accused-sent-to-judicial-custody" target="_blank">दैनिक हिंदी समाचार पत्र के अनुसार: </a>मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई ने इन आरोपियों से पूछताछ पूरी कर ली है। इसी के चलते इन आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। गौर हो कि मामले से जुड़े सभी पांचों आरोपियों को सीबीआई ने मंगलवार को अपनी कस्टडी में लिया था।</p>
<p>इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था और इनमें से एक आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में मौत हो गई थी। गौरतलब है कि कोटखाई के गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड मामले की छानबीन में जुटी सीबीआई की टीम अब काफी तेजी से हर पहलु को खंगाल रही है और एक कड़ी से दूसरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।</p>
<div id="attachment_11569" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img fetchpriority="high" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-11569" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team.jpg" alt="kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team" width="800" height="491" class="size-full wp-image-11569" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team-300x184.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team-768x471.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team-696x427.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/kotkhai-gangrape-case-cbi-investigation-team-684x420.jpg 684w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-11569" class="wp-caption-text">चित्र: अमर उजाला</p></div>
<p>सीबीआई की टीम ने दो दिन पहले ही आईजीएमसी में अपनी देखरेख में इस घटना के एक आरोपी के शव का पोस्टमार्टम करवाया था। साथ ही सीबीआई का एक बड़ा दल दांदी के जंगल गया था और वहां पर अपने तरीके से जांच की थी।</p>
<p><a href="http://www.amarujala.com/shimla/kotkhai-gangrape-and-murder-case-cbi-probe-indicates-heinous-crime-by-a-mastermind?pageId=5" target="_blank">दैनिक हिंदी समाचार पत्र के मुताबिक:</a> सीबीआई ने शुरुआती छानबीन में इस बात को मान लिया है कि गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड किसी सामान्य अपराधी का काम नहीं है, बल्कि ये किसी मास्टर माइंड का ही काम है।</p>
<p>एक बागवान के नौकर राजू को असल मुजरिम साबित करने के ठोस सबूत जुटाने या मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। </p>
<p>हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो की यह विशेष टीम पुलिस तफ्तीश में निकली कहानी को भी सिरे से खारिज नहीं कर रही है, बल्कि फिलहाल इसी छानबीन को आधार बनाकर इसे पुष्ट करने के साक्ष्य ढूंढ रही है। </p>
<p>सबूत मैच नहीं करने पर ही सीबीआई अपनी जांच को नई दिशा देगी। इसी बीच सीबीआई संदिग्धों की फोन कॉल डिटेल से लेकर तमाम साइंटिफिक एविडेंस जुटाने में लगी है।</p>
<p>सीबीआई ने गुड़िया मर्डर केस के आरोपी आशीष को बुधवार को ठियोग कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने अतिरिक्त दंडाधिकारी हरमेश कुमार की कोर्ट में बताया कि आशीष से हमारी पूछताछ पूरी हो गई है। </p>
<p><strong>पहले पुलिस की बनाई कहानी को ही किया जा रहा रीप्ले</strong></p>
<p>पुलिस जांच के मुताबिक लाश को सबसे पहले गुड़िया के मामा ने स्पॉट पर देखा था। सीबीआई ने भी इसी आधार पर मंगलवार को सबसे पहले गुड़िया के दोनों मामा को स्पॉट पर ले जाकर पूछताछ की। पुलिस ने राजू पर थाने के भीतर सूरज की हत्या का आरोप लगाया है।</p>
<p>सीबीआई पिछले दिन ही कोटखाई थाने के भीतर वारदात वाली जगह का मुआयना कर पुलिस की थ्योरी समझने की कोशिश कर चुकी है। इसी तरह पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इस मामले के आरोपी राजू, गढ़वाली सुभाष, दीपक, छोटू नेपाली और सह आरोपी आशीष चैहान हैं।</p>
<p>सीबीआई भी प्रथम दृष्टया इन्हीं को आरोपी मानकर चल रही है। मगर इन्हें वास्तविक आरोपी साबित करने के लिए पुलिस के बताए सबूतों को वेरिफाई भी कर रही है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि जब तक पूरे प्रमाण न हों, पुलिस की तफ्तीश को खारिज नहीं किया जा सकता है। इसीलिए आरंभिक जांच में पुलिस की बनाई कहानी को ही रीप्ले कर रही है। </p>
<p><strong>पुलिस के अनुसार हत्या के दिन भी इस वाहन का प्रयोग किया गया</strong></p>
<p>पुलिस जांच के मुताबिक दांदी जंगल में जहां लाश दो लिंक सड़कों के बीच फेंकी गई थी, वहां से मुख्य आरोपी राजू का डेरा महज तीन सौ मीटर की ही दूरी पर है। इतने घने और दूर-दूर तक फैले जंगल में राजू को क्या अपने घर के पास ही लाश फेंकने को गड्ढा मिला?</p>
<div id="attachment_11564" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-11564" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/HP-Police.jpg" alt="HP Police" width="800" height="402" class="size-full wp-image-11564" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/HP-Police.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/HP-Police-300x151.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/HP-Police-768x386.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/07/HP-Police-696x350.jpg 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-11564" class="wp-caption-text">चित्र:अमर उजाला</p></div>
<p>जबकि यहीं पला-बढ़ा राजू इस जंगल के चप्पे से परिचित है। गुड़िया की लाश अगर चार तारीख को ही फेंक दी गई थी तो इस क्षेत्र में जीवित बछड़ों तक को खा जाने वाले लावारिस कुत्तों को उसके शव की गंध क्यों नहीं आई? ऐसे कई सवाल आगामी दिनों में जांच जा रुख मोड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>सीबीआई ने सूरज की बॉडी से लिए चार सैंपल</strong></p>
<p>सीबीआई ने मृतक सूरज की बॉडी से चार सैंपल जुटाए हैं। साढ़े तीन घंटे तक चले पोस्टमार्टम की रि-एग्जामिन प्रक्रिया के दौरान मृतक की बॉडी में कट मारकर सिर, गुप्तांग, गले और सीने से चार सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को सीबीआई अपने साथ ले गई है। बताया जा रहा है कि सीबीआई अपने स्तर पर इन सैंपलों की फोरेंसिक लैब में जांच-पड़ताल करेगी।</p>
<p>इसके साथ टीम ने पहले किए पोस्टमार्टम और फिर से किए रि-एग्जामिन की रिपोर्ट की जांच की है। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई की टीम ने गुड़िया के पोस्टमार्टम का रिकॉर्ड भी खंगाला है।</p>
<p>कंप्यूटर में फीड गुड़िया के शरीर पर घाव की रिपोर्ट जांची गई है। अलग-अलग एंगल के करीब 172 फोटो देखे गए। सीबीआई की टीम ने इस दौरान डॉक्टरों से भी गुड़िया और सूरज के मामले में लंबी बातचीत की। इसके बाद टीम ने फिर डिपार्टमेंट में आने की बात कही है। </p>
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		<item>
		<title>कोटखाई केस: सीबीआई की टीम पहुंची  शिमला, शुरू की जांच</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/22/cbi-starts-probe-in-kotkhai-murder-and-rape-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Jul 2017 08:21:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[कोटखाई केस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला के कोटखाई में गुड़िया गैंगरेप एंड मर्डर केस में दिल्ली से सीबीआई की टीम शनिवार को शिमला पहुंच गई है।उन्होंने अपनी जांच टीम बना ली है। दैनिक समाचार-पत्र में छपी खबर के मुताबिक: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई के एसपी राम गोपाल इस टीम के प्रमुख हैं। एसपी राम गोपाल इसके [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला के कोटखाई में गुड़िया गैंगरेप एंड मर्डर केस में दिल्ली से सीबीआई की टीम शनिवार को शिमला पहुंच गई है।उन्होंने अपनी जांच टीम बना ली है। <a href="http://himachal.punjabkesari.in/himachal-pradesh/news/kotkhai-case-fir-to-enter-with-the-cbi-has-handled-command-649772" target="_blank">दैनिक समाचार-पत्र में छपी खबर के मुताबिक:</a> सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई के एसपी राम गोपाल इस टीम के प्रमुख हैं। एसपी राम गोपाल इसके प्रमुख हैं। बताया ये भी जा रहा है कि जांच एजेंसी ने इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है। साथ ही विभिन्‍न धाराओं के तहत केस भी दर्ज कर लिया गया है हालांकि, अभी इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सीबीआई सबसे पहले मामले से संबंधित सभी अहम जानकारी पहले शिमला पुलिस से हासिल करेगी। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेज, हत्या आदि की रिपोर्ट भी अपने अधीन लेगी।इसके बाद मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि सीबीआई उन लोगों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है जो अभी तक पुलिस जांच के दायरे में नहीं आए थे। सीबीआई की टीम गुड़िया के परिजनो से बातचीत कर सकती है। साथ ही घटनास्थल का मुआयना भी करेगी। </p>
<p><strong>सीबीआई के लिए सबसे अहम कड़ी सूरज की पत्नी</strong></p>
<p>सूत्रों के अनुसार सीबीआई के लिए सबसे अहम कड़ी सूरज की पत्नी नेपाली मूल की महिला को माना जा रहा है। इसका पति गुड़िया मामले में खुद आरोपी रहा है लेकिन लोग इसे निर्दोष करार दे रहे थे। इसकी कोटखाई थाने में ही हिरासत में हत्या कर दी थी। यह हत्या मंगलवार आधी रात को हुई थी। इसे लेकर एक अन्य आरोपी राजेंद्र उर्फ राजू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद मृतक की पत्नी ने जिस तरह का बयान मीडिया में दिया है, उसने पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। </p>
<p>सीबीआइ ने लॉकअप में मारे गए आरोपी सूरज की पत्नी का बयान दर्ज किया। सूरज की पत्नी को सुरक्षा भी प्रदान की गई है। सूरज की पत्नी ने कहा था कि उसके पति को कुछ रसूखदारों ने मोहरा बनाया था, जबकि उसका कोई कसूर नहीं था। </p>
<p>हालांकि अगले दो दिनों में महिला का बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज करवाया जाएगा। हालांकि अभी सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। लेकिन पुलिस से सारा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। सीबीआइ ने चंडीगढ़ के एसपी रामगोपाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआइटी का गठन किया है। गौरतलब है कि सीबीआइ को हाईकोर्ट ने जांच के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस बीच मामले में अन्य आरोपियों को 27 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।</p>
<p>बीती रात आरोपियों को अदालत में पेश किया गया था। जांच को हाथ में लेने के बाद सीबीआई गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ करने के साथ साथ सोशल मीडिया से इनपुट्स भी जुटाएगी। सूरज की पत्नी के संगीन रहस्योद्घाटन के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षा दे दी है।सूरज की पत्नी के साथ हर समय चार महिला व चार पुरुष पुलिस कांस्टेबल और एक सीबीआइ इंस्पेक्टर भी रहेगा। ममता से पूछताछ कोटखाई थाने में हुई। एसपी शिमला सौम्या ने सुरक्षा देने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्षता से जांच होगी। ममता व उसके बच्चों को शिमला लाकर गुप्त स्थान पर रखा गया है।</p>
<p><strong>सूरज के शरीर पर बेल्ट व डंडों के निशान</strong></p>
<p><a href="http://www.jagran.com/himachal-pradesh/shimla-kotkhai-rape-case-16413216.html" target="_blank">दैनिक समाचार-पत्र में छपी खबर के मुताबिक</a>: कोटखाई थाने के लॉकअप में मारे गए आरोपी सूरज की पीठ व अन्य हिस्सों पर बेल्ट के निशान थे। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक ऐसा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल रहा है। सिर पर किसी तेज हथियार से हमला करने के बारे में कोई भी सबूत नहीं है। सूरज के गुप्तांग में मामूली चोटें रिपोर्ट में साफ जाहिर हुई हैं। आरोपी को जेल के अंदर रखा जाता है, उसकी बेल्ट, कलम या अन्य संवेदनशील वस्तुओं को अलग रख लिया जाता है। ऐसे में सूरज के शरीर पर उक्त निशान कैसे आए। उसकी दोनों टांगों में डंडों के निशान भी हैं। सवाल उठ रहा है कि सूरज की मौत कहीं पुलिस रिमांड में मारपीट से तो नहीं हुई। हालांकि पुलिस महानिदेशक ने किसी भी आरोपी को थर्ड डिग्री से इन्कार किया था। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक सूरज को दो आरोपियों सुभाष और राजू से अलग रखा था, लेकिन मौत से करीब एक घंटे पूर्व ही इन्हें एक लॉकअप में लाया गया। जिस लॉकअप में शव मिला था, वहां खून के निशान भी नहीं पाए गए। अगर राजू का सिर जमीन पर पटका गया तो फिर सिर से खून क्यों नहीं निकला।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल में बेसहारा भटकते मनोरोगियों के लिए इन्साफ की लड़ाई में प्रशासन और पुलिस कर रही हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/18/mental-health-activist-of-himachal-pradesh-subhash-kumar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Feb 2017 11:56:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[मानसिक पीड़ित]]></category>
		<category><![CDATA[मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य सचिव वीसी फारका]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल मनोरोगी अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- भारत अभी भी नागरिकों को सही मायने में साक्षर बनाने में बहुत पिछड़ा हुआ है! सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छुपी नहीं है! सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ना और लिखना तो सीख जाते हैं पर सही मायने में साक्षर नागरिक नहीं बना पाते! कान्वेंट और निजी स्कूल बच्चों को करियर ओरिएंटेड ( Career Oriented) [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/18/mental-health-activist-of-himachal-pradesh-subhash-kumar/">हिमाचल में बेसहारा भटकते मनोरोगियों के लिए इन्साफ की लड़ाई में प्रशासन और पुलिस कर रही हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> भारत अभी भी नागरिकों को सही मायने में साक्षर बनाने में बहुत पिछड़ा हुआ है! सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छुपी नहीं है! सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ना और लिखना तो सीख जाते हैं पर सही मायने में साक्षर नागरिक नहीं बना पाते! कान्वेंट और निजी स्कूल बच्चों को करियर ओरिएंटेड ( Career Oriented) ही बना पाते हैँ! पर इन स्कूलों की भरी-भरकम फीस भी आम आदमी की पहुँच से दूर होती जा रही हैँ! गैर सरकारी संस्थाओ और कुछ सामाजिक कार्यकर्तों को छोड़ कर आम आदमी का रूझान सामाजिक कार्यों की ओर बहुत कम देखने को मिलता है! एक नागरिक का सही अर्थों में साक्षर होना समाज के लिए वरदान साबित हो सकता है! और शिमला के रहने वाले एक संवेदनशील नागरिक, सुभाष कुमार (43), इसी बात का प्रमाण हैँ!</p>
<p>हाल ही में शिमला की एक गैर सरकारी संस्था ने हिमाचल की सड़कों पर घूमते, बेघर, और बेसहारा मानसिक रोगियों का संवेदनशील मुद्दा उठाया! जिला प्रशाशन और पुलिस पर यह आरोप लगा की ऐसे लोगों के बारें में जानकारी मिलने पर भी कोई कदम नहीं उठाया जाता! प्रशाशन व पुलिस दोनों ही अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते पाए गए ! संस्था ने एक प्रेस वार्ता में यंहा तक कहा की उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों ने संविधान के मानसिक शवस्थ्य अधिनियम, 1987 की जानकारी होने से इंकार कर दिया! ऐसे कई वाक्य हैं जहाँ जिला पुलिस को बेसहारा मनोरोगियों की जानकारी दी गयी है परंतु पुलिस को कोई परवाह नहीं है!</p>
<p>इससे सड़कों पर भटकते बेसहारा मनोरोगियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो तो हो ही रहा है पर इसी के साथ यह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवमानना का मामला भी है। प्रशानिक अधिकारी और पुलिस चाहे कुछ भी कहे लेकिन सच कुछ और ही है!</p>
<p>ये पहली बार का वाकया नहीं है! साल 2011 में सुभाष ने इसी मुद्दे को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (CWPIL 18/2011) दायर कर पहली बार मनोरोगियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण का अहम् मुद्दा उठाया! सुभाष के जहन में ये बात पहली बार तब उठी जब उन्होंने एक मानसिक रूप से बीमार और बेसहारा वृद्धा को फटे कपड़ों में नाहन बाजार की सड़क पर घूमते देखा! जब सुभाष ने नजदीकी पुलिस चौकी में इसकी इत्तिला देकर इस वृद्धा की मदद की मांग की तो थाना प्रभारी ने ऐसे किसी भी प्रावधान के बारें में जानकारी होने से इंकार कर दिया व उस वृद्धा को बचाने में असमर्थता व्यक्त की!</p>
<p>सुभाष को इस बात पर विश्वाश नहीं हुआ की भारत के संविधान में कंही इन लाचार और अभागे नागरिकों के लिए कोई प्रावधान नहीं है! सुभाष ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रशाशन से इन लोगों के बचाव पर पुलिस की भूमिका पर जानकारी मांगी! जवाब में यह स्पष्ट शब्दों में कहा गया था कि मानसिक स्वस्थ्य अधिनियम 1987 के अध्याय 4, अनुभाग 23 के तहत कोई भी थाना प्रभारी ऐसे लोगों को अपनी सुरक्षा में लेकर न्यायालय में पेश कर सकता है व उसके बाद न्यायालय आगे की करवाई के आदेश दे सकता है !</p>
<p>जवाब पाते ही सुभाष ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्या न्यायाधीश को एक भावुक परंतु तथ्यों पर आधारित एक पत्र लिखा और कहा,</p>
<p><em><strong>हम हमेशा लोगों के कल्याण (welfare) की, विकास, नौकरीयों और जीने के लिए बेहतर वातवरण की मांग करते हैं ! सब अपनी मांगों को लेकर एक लंबी कतार में खड़े हैँ ! इन्ही सब लोगों के बीच जो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं कुछ ऐसे भी अभागे हैं जो अपने अधिकारों के लिए खुद नहीं लड़ सकते क्योंकि मानसिक रूप से वे इस काबिल ही नहीं के ये समझ सकें की मौलिक अधिकार क्या चीज़ है या &#8221; वेलफेयर&#8221; (welfare) का क्या अर्थ है !</strong></em></p>
<p><em><strong>हमे अक्सर मानसिक बीमारियों से ग्रस्त ऐसे लोग सड़कों पर अमानवीय हालात में, कई बार अर्धनग्न अवस्था में, कूड़े से खाना ढूंढते और फुटपाथ पर सोते मिलते हैं जिनका कोई सहारा नहीं ! मैंने एसी ही एक वृद्धा के संरक्षण हेतु पुलिस के पास पहुंचा लेकिन पुलिस अधिकारी ने ऐसी किसी भी जिम्मेदारी होने की बात से इनकार किये जिसके तहत ऐसे मनोरोगियों को बचाया जा सके!</strong></em></p>
<p>इस याचिका में सुभाष ने न्यायालय से इन मनोरोगियों के लिए न्याय की मांग उठाई! इसी याचिका (CWPIL 18/2011) का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने 4 जून 2015 को अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया और प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 के अनुछेद 23 के पालन को सख्त निर्देश दिए!</p>
<p>कोर्ट ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को कहा कि अनुछेद 23 के अन्तर्गत हर पुलिस अधीक्षक का दायित्व होगा कि वह अपने ज़िले में बेसहारा, इधर-उधर घूमने वाले मनोरोगियों को अपने संरक्षण में लेकर 24 घंटे के भीतर निकटतम न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करे। इसके बाद धारा 24 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट मनोरोगी व्यक्ति की चिकित्सा के सन्दर्भ में कानून के अनुसार आदेश जारी कर उपयुक्त कार्यवाही कर सकता है।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने याचिका पर दिए गए निर्देशों में यह स्पष्ट शब्दों में लिखा था कि,</p>
<p><em><strong>मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 (Mental Health Act,1987) क्लॉज़ (clause) 2 (l) के अंतर्गत मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति का मतलब है वह व्यक्ति जिसे किसी भी तरह के मानसिक रोग के कारण उपचार की जरुरत हो ! क्लॉज़ (clause) 2(q) के अंतर्गत मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति के इलाज व देखभाल के लिए मनोरोगी अस्पताल या नर्सिंग होम का प्रावधान है ! इन अस्पतालों का मतलब है कि जो या तो सरकार द्वारा बनाये गए हों और जिनके रखरखाव का जिम्मा भी सरकार का हो या ऐसा अस्पताल जो किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा मानसिक रोगियों के इलाज और देखभाल के लिये बनाया गया हो!</strong></em></p>
<p>यही मुद्दा साल 2017 में शिमला की एक गैर सरकारी संगठन, उमंग फाउंडेशन, द्वारा भी उठाया गया जिसमे स्नष्टा ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस सड़क पर बेसहारा घूमने वाले मनोरोगियों के बारे में प्रदेश हाईकोर्ट के इस आदेश को नकारने में भी नहीं हिचकिचा रही !</p>
<p>सुभाष की याचिका पर दिए इस निर्देश के आधार पर संस्था प्रदेश के मुख्य सचिव वीसी फारका के पास पहुंची जिसे देखने के बाद विवश होकर मुख्य सचिव को यह आश्वाशन देना पड़ा कि राज्य सरकार संविधान, कानून और हाईकोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन करवाएगी। उन्होंने कहा की बेसहारा घूमने वाले मनोरोगियों के संरक्षण, सुरक्षा, इलाज और पुनर्वास उनकी निजी प्राथमिकता रहेगा।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh.jpg"><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh.jpg" alt="mentally ill in Himachal Pradesh" width="650" height="495" class="alignnone size-full wp-image-10306" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh.jpg 650w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh-300x228.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2017/02/mentally-ill-in-Himachal-Pradesh-552x420.jpg 552w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></a></p>
<p>सुभाष ने इस बात पर ख़ुशी जाहिर कि है इस संस्था ने इस मुहीम को आगे बढ़ाया है और इन मानसिक रूप से लाचार लोगों के मौलिक अधिकारों कि सुरक्षा के लिए आवाज उठाई है! सुभाष की सभी नागरिकों से भी यही प्राथर्ना है कि जब भी लोग किसी सड़क पर भटकते या फुटपाथ पड़े मनोरोगी को देखें तो नज़दीकी पुलिस थाने में जाकर थाना प्रभारी को इसकी इत्तला देने से न कतरायें क्योंकि पुलिस कानूनी तौर पर ऐसे लोगों का संज्ञान लेने के लिए बाध्य है ! अगर कोई अधिकारी इंकार करे तो उन्हें सिर्फ इस याचिका पर दिए गए उच्च न्यायालय के आदेश कि एक प्रति देने कि जरूरत है ! साथ ही साथ सुभाष का यह भी कहना है कि जादू टोने और भूत प्रेत में फसे सभी लोगों को मनोचिकित्सा की जरूरत है! समय पर इलाज़ न मिलने पर रोगियों की हालात बिगड़ सकती है!  सुभाष का मनना है की वो इस अभियान को और आगे बढ़ाएंगे और ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आते रहेंगे!</p>
<p>उल्लेखनीय है की ऐसे मामलों में इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाती है। ठीक होने के बाद मनोरोगी यदि अपने परिवार वालों का पता बताता है तो उसे सरकारी खर्चे पर उसके घर भेजने का भी कानूनी प्रावधान है। यदि ठीक होने के बाद वह किसी कारण से अपने घर नहीं लौट सकता है तो सरकार को उसके पुनर्वास केंद्र में रहने का प्रबंध करना पड़ता है।</p>
<p>संस्था का कहना है कि दुर्भाग्यवश हिमाचल में कुछ अपवादों को छोड़कर बेसहारा मनोरोगियों से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के प्रावधानों का पालन बिल्कुल नहीं किया जा रहा। संस्था ने कई जिला पुलिस अधीक्षकों को ऐसे मनोरोगियों की जानकारी दी, परंतु पुलिस को कोई परवाह नहीं है। इससे इन बेसहारा मनोरोगियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और यह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवमानना का मामला भी है।</p>
<p>संस्था के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों को देखने के बाद मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया है की कानूनी प्रावधानों और न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इनमें पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को संबंधित कानूनों और अदालती फैसलों की जानकारी देना, आम जनता तथा विद्यार्थियों को मनोरोगियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना, पुलिस थाना स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से मनोरोगियों की पहचान करना एवं हर थाने में मनोरोगी से संबंधित मामलों को देखने के लिए एक अधिकारी को दायित्व देना शामिल है।</p>
<p>मानसिक स्वस्थ्य और इससे जुड़ी बिमारियों के बारें में लोगों में जागरूकता न होना बहुत बड़ी चिंता का विषय है! हाल ही में में एक ऐसा मामला सामने आया जिसमे <a href="https://himachalwatcher.com/2017/02/03/miscreants-beat-mentally-ill-man-in-shimla-police-and-district-admin-allegedly-denied-rescue/">एक भटके हुए मानसिक रोगी को</a> जिला शिमला में कई जगह लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा और उनके लातों और घूंसों को भी सहन पड़ा! मानसकि रोगों के लक्षण लोगों को डरा सकते हैँ और मानसिक स्वस्थ्य के बारे में जागरूकता न होने के कारण ये रोगी लोगों की गलतफमी का शिकार हो सकते हैँ ! पर असल में एक सभ्य और लोकतान्त्रिक समाज में इस तरह के व्यव्हार से अमानवीय कुछ नहीं हो सकता जिसमे एक मानसिक रूप से लाचार इंसान को अज्ञानता के कारण लोगों का गुस्सा सहन पड़े!</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/18/mental-health-activist-of-himachal-pradesh-subhash-kumar/">हिमाचल में बेसहारा भटकते मनोरोगियों के लिए इन्साफ की लड़ाई में प्रशासन और पुलिस कर रही हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल के अवैध भवनों को नियमित करने का रास्ता साफ, विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक पास</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/25/himachal-tcp-bill-approved/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jan 2017 09:13:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध भवन]]></category>
		<category><![CDATA[टीसीपी संशोधन विधेयक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेम कुमार धूमल]]></category>
		<category><![CDATA[राज्यपाल आचार्य देवव्रत]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला शहर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल विधानसभा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल शहरी विकास एवं आवास मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बावजूद मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आखिरकार सूबे के अवैध भवनों को वैध करने वाले विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इससे राज्य में अवैध तरीके से बने हजारों अवैध भवनों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले राज्यपाल [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बावजूद मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आखिरकार सूबे के अवैध भवनों को वैध करने वाले विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इससे राज्य में अवैध तरीके से बने हजारों अवैध भवनों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले राज्यपाल ने विधेयक के कुछ बिन्दुओं पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। इस पर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि अगस्त, 2016 में विधानसभा से संशोधन विधेयक को पारित किया गया था। इसके बाद संशोधन विधेयक को राजभवन से अनुमति न मिलने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्यपाल से मामला उठाया था। मुख्यमंत्री के बाद शहरी विकास एवं आवास मंत्री सुधीर शर्मा ने 27 अक्तूबर, 2016 को विभागीय अधिकारियों के साथ राज्यपाल से भेंट की थी।</p>
<p><strong>सुधीर शर्मा ने राज्यपाल को पत्र लिखकर किया था यह आग्रह</strong></p>
<p>इस भेंट के बाद जब राजभवन से विधेयक को मंजूरी नहीं मिली तो शहरी विकास एवं आवास मंत्री ने राज्यपाल को पत्र लिखकर संशोधन विधेयक को लौटाने या फिर इसे स्वीकार करने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि विधेयक के लटकने से राज्य में अवैध निर्माण को बल मिला है। उनके पत्र के बाद राजभवन की तरफ से कुछ बिन्दुओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसके बाद अब जाकर इसे मंजूरी मिल पाई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने भी विधेयक को लेकर पहले राज्यपाल के समक्ष अपना पक्ष रखा था। राजभवन से संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य में हजारों अवैध भवनों को नियमित करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो जाएगी। </p>
<p><strong>पढ़िए क्या है संशोधन विधेयक का प्रारूप</strong></p>
<p>राज्य विधानसभा से पारित टीसीपी संशोधन विधेयक में ‘‘जहां हैं, जैसे हैं’’ के आधार पर नियमित करने की बात कही गई थी। इसके अनुसार पार्किंग मंजिल को यदि किसी अन्य उपयोग के लिए भी परिवर्तित किया गया हो तो वैकल्पिक पार्किंग जगह उपलब्ध करवाने पर नियमितीकरण के लिए माना जाएगा। जिन लोगों ने मकानों के नक्शे पास करवाए हैं, उन्हें विचलन शुल्क नगर निगम क्षेत्र में 800 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से फ्लैट रेट पर जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 400 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से वसूले जाने की बात कही गई थी। पूर्णरूप से अवैध निर्माण के लिए ये दरें शहरी क्षेत्रों में 1,200 रुपए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 600 रुपए प्रति वर्ग मीटर रखने की बात कही गई थी।</p>
<p><strong>60 दिनों के भीतर प्रस्तुत करना होगा आवेदन </strong></p>
<p>विधेयक में संशोधित अधिनियम के प्रकाशन के 60 दिनों के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना प्रस्तावित है। आवेदकों को इस आशय का शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा कि उन्होंने किसी व्यक्ति अथवा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है तथा लोक निर्माण अथवा राष्ट्रीय उच्च मार्गों की नियंत्रित चौड़ाई पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया है। नगर निगम अथवा शहरी एवं नगर नियोजन क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों के लोगों को नियमितीकरण के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p><strong>सरकार के अनुसार 13 हजार अवैध भवन</strong></p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में अधिसूचित योजना और विशेष क्षेत्रों में मार्च, 2016 तक करीब 13 हजार अनधिकृत भवन हैं। इससे पहले सरकार की तरफ से पहले दी गई रियायत के आधार पर 6090 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में अनधिकृत निर्माण को गिराना उचित नहीं है, इसलिए इसके लिए नियमों में संशोधन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>कांग्रेस ने पूरा किया वायदा- नरेश चौहान</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मीडिया विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र के अनुरूप जनता से किए गए वायदे को पूरा कर दिखाया है। इससे राज्य के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भाजपा ने ऐसा वायदा किया था लेकिन सत्ता में आने पर इसे मंजूरी प्रदान नहीं की। इससे सरकार की कथनी और करनी में अंतर का पता चलता है।</p>
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		<title>हिमाचल में संचालित 326 क्रशर मालिकों ने दबाए सरकार के 1 अरब 38 करोड़ 22 लाख रुपये</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/mining-in-himachal-pradesh-crusher-owners-owe-millions-to-hp-govt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Dec 2016 10:03:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री]]></category>
		<category><![CDATA[विधायक महेंद्र सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[सरकाघाट विधाक इंद्र सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विधानसभा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कांगड़ा- हिमाचल में संचालित हो रहे 326 क्रशर मालिकों ने सरकार के डेढ़ अरब रुपये दबा रखे हैं। अभी तक इन स्टोन क्रशरों ने कंपाउंडिंग फीस और जुर्माना के रूप में इनती धनराशि की सरकार को अदायगी नहीं की है। अदायगी सरकार ने क्रशर मालिकों को नोटिस भेजे थे। इनके जवाब सरकार को मिल गए [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/mining-in-himachal-pradesh-crusher-owners-owe-millions-to-hp-govt/">हिमाचल में संचालित 326 क्रशर मालिकों ने दबाए सरकार के 1 अरब 38 करोड़ 22 लाख रुपये</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कांगड़ा-</strong> हिमाचल में संचालित हो रहे 326 क्रशर मालिकों ने सरकार के डेढ़ अरब रुपये दबा रखे हैं। अभी तक इन स्टोन क्रशरों ने कंपाउंडिंग फीस और जुर्माना के रूप में इनती धनराशि की सरकार को अदायगी नहीं की है। अदायगी सरकार ने क्रशर मालिकों को नोटिस भेजे थे। इनके जवाब सरकार को मिल गए हैं। इनका अभी परीक्षण किया जाना है।</p>
<p>वहीं, कई क्रशर मालिकों ने शपथ पत्र देकर लंबित धनराशि को शीघ्र जमा करवाने की बात कही है। प्रदेश में स्टोन क्रशरों से उत्पादित की जाने वाली रैत और बजरी के मूल्य निर्धारण का कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह और सरकाघाट के विधाक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि 2013-14 में प्रदेश के किसी भी स्टोन क्रशर से कंपाउंडिंग शुल्क वसूलना शेष नहीं है।</p>
<p>लेकिन, कोर्ट के आदेशानुसार स्टोन क्रशरों पर करीब एक अरब 42 करोड़ 54 लाख 47 हजार 502 रुपये कंपाउंडिंग फीस और जुर्माना लगाया गया था। इसमें से चार करोड़ 31 लाख 82 हजार 979 रुपये क्रशर मालिकों ने जमा करवा दिए हैं, जबकि करीब एक अरब 38 करोड़ 22 लाख 64 हजार 523 रुपये अभी नहीं जमा करवाए हैं।  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/mining-in-himachal-pradesh-crusher-owners-owe-millions-to-hp-govt/">हिमाचल में संचालित 326 क्रशर मालिकों ने दबाए सरकार के 1 अरब 38 करोड़ 22 लाख रुपये</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>कुफरी की खस्ताहाली,गंदगी व पर्यटकों से दु‌र्व्यवहार पर हाई कोर्ट सख्त,मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी हुए तलब</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/hp-hc-summon-officials-over-ugly-condition-of-kufari/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Dec 2016 06:09:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[कुफरी]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रेवल हिमाचल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल पर्यटक स्थल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=9622</guid>

					<description><![CDATA[<p>घोड़ों को चलाने के लिए कारोबारियों ने अधिकतर नेपालियों के नाबालिग बच्चों को काम पर रखा है जो पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। शिमला- हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कुफरी में स्थानीय कारोबारियों के घोड़ों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी व पर्यटकों के साथ आए दिन हो रहे दु‌र्व्यवहार से उत्पन्न कानूनी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/hp-hc-summon-officials-over-ugly-condition-of-kufari/">कुफरी की खस्ताहाली,गंदगी व पर्यटकों से दु‌र्व्यवहार पर हाई कोर्ट सख्त,मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी हुए तलब</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>घोड़ों को चलाने के लिए कारोबारियों ने अधिकतर नेपालियों के नाबालिग बच्चों को काम पर रखा है जो पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>   हिमाचल प्रदेश के  प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कुफरी में स्थानीय कारोबारियों के घोड़ों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी व पर्यटकों के साथ आए दिन हो रहे दु‌र्व्यवहार से उत्पन्न कानूनी अव्यवस्था से संबंधित मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव सहित गृह सचिव, शिमला के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ व स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी कुफरी के निदेशक को तलब किया। इन प्रतिवादियों को 19 दिसंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।</p>
<p><a href="https://himachalwatcher.com/urnewz/popular-kufri-turning-into-garbage-heap/" target="_blank">पढ़ें:लोकप्रिय पर्यटन स्थल कुफरी कचरा के ढेर में तब्दील</a></p>
<p>प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। शिमला शहर के समीप प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कुफरी में घोड़ों द्वारा रोजाना गंदगी फैलाई जा रही है। इस गंदगी व प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण अव्यवस्था का आलम है। घोड़ों की गंदगी से इस क्षेत्र में आम जनता व पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुफरी निवासी राकेश मेहता ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उपरोक्त क्षेत्र की समस्याओं से अवगत करवाते हुए सरकार व स्थानीय प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए जाने की गुहार लगाई थी।<br />
<div id="attachment_9624" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9624" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage.jpg" alt="kufri-garbage" width="800" height="592" class="size-full wp-image-9624" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage-300x222.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage-768x568.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage-80x60.jpg 80w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage-696x515.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Kufri-garbage-568x420.jpg 568w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></a><p id="caption-attachment-9624" class="wp-caption-text">चित्र:. फाइल फोटो/हिमाचल वॉचर</p></div>
प्रार्थी के अनुसार घोड़ों द्वारा उपरोक्त क्षेत्र में फैलाई जा रही गंदगी से जनता व पर्यटकों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित अधिकारी इस बात की जानकारी होते हुए भी उपयुक्त कदम नहीं उठा रहे हैं। सरकार की ओर से भी इस क्षेत्र के विकास के पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं मगर इस क्षेत्र में न तो पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए और न ही गंदगी से छुटकारा दिलाने के लिए कार्य हुए। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि घोड़ों को चलाने के लिए कारोबारियों ने अधिकतर नेपालियों के नाबालिग बच्चों को काम पर रखा है जो पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। मामले पर सुनवाई 19 दिसंबर को होगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/hp-hc-summon-officials-over-ugly-condition-of-kufari/">कुफरी की खस्ताहाली,गंदगी व पर्यटकों से दु‌र्व्यवहार पर हाई कोर्ट सख्त,मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी हुए तलब</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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