<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>करसोग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%97/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/करसोग/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Wed, 15 Dec 2021 12:34:39 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>करसोग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/करसोग/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आजादी के अमृतमहोत्सव से गायब है पांगना (मंडी) के अनाम स्वतंत्रता सेनानी नरसिंह दत्त की कहानी </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/14/narsingh-datt-unsung-freedom-fighter-from-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Dec 2021 08:08:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पब्लिक ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आजादी का अमृतमहोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[गगनदीप सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[नरसिंह दत्त]]></category>
		<category><![CDATA[निहरी]]></category>
		<category><![CDATA[पांगना]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश भाषा कला और संस्कृति विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली इतिहास यशवंत सिंह परमार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली स्वतंत्रता सेनानी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=14609</guid>

					<description><![CDATA[<p>ऐसे ही एक शख्स थे पांगना गांव के नरसिंह दत्त (चिन्गु) और अन्य नेतृत्वकारी नरसिंह दत्त (भाऊ लिडर) के दोस्त थे। नरसिंह दत्त के छोटे बेटे ज्ञानचंद (45) ने बताया कि उनके पिता हमेशा राजा के खिलाफ विद्रोह में लगे रहते थे। उन्होंने प्रजा मंडल के आंदोलन के संबंध में बिलासपुर, सुंदरनगर, सिरमौर, रामपुर बुशहर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/14/narsingh-datt-unsung-freedom-fighter-from-himachal-pradesh/">आजादी के अमृतमहोत्सव से गायब है पांगना (मंडी) के अनाम स्वतंत्रता सेनानी नरसिंह दत्त की कहानी </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ऐसे ही एक शख्स थे पांगना गांव के नरसिंह दत्त (चिन्गु) और अन्य नेतृत्वकारी नरसिंह दत्त (भाऊ लिडर) के दोस्त थे। नरसिंह दत्त के छोटे बेटे ज्ञानचंद (45) ने बताया कि उनके पिता हमेशा राजा के खिलाफ विद्रोह में लगे रहते थे। उन्होंने प्रजा मंडल के आंदोलन के संबंध में बिलासपुर, सुंदरनगर, सिरमौर, रामपुर बुशहर आदि जगहों पर यात्राएं की थी। राजा ने एक बार उनको सुंदरनगर कैद में भी रखा था। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण खुद यशवंत सिंह परमार ने उनको नौकरी दी थी। वह व्यक्तिगत रूप से उनको जानते थे।</strong></p>
<p><strong>शिमला</strong>-भारत सरकार आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में साल भर के लिए आजादी का अमृतमहोत्सव मना रही है। जगह-जगह लाखों रूपये खर्च कर के भव्य कार्यक्रम किये जा रहे हैं। लेकिन इन कार्यक्रमों के बीच स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों, उनके परिवारों और स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में नाम लिखवाने से रह गए अनाम सैनिकों की कोई पूछ-परख नहीं हो रही है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की करसोग, पांगना, निहरी जैसी तहसील, उप तहसिलों में हजारों की संख्या में सुकेत राजा के खिलाफ लोगों ने 1948 में विद्रोह किया था। उस में भाग लेने वाले 4000 हजार के करीब लोगों का ब्योरा सरकार के पास नहीं है। अगर कोई शोधार्थी, परिजन, समाजसेवी खोज कर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम सूची में जुड़वाना चाहे तो इसकी भी जानकारी नहीं है।</p>
<p>सुकेत रियासत पर लंबे समय तक सामंती राजाओं का शासन था। लिखित इतिहास के तथ्यों को देखें तो 1862 से 1948 तक लगातार पांगणा, करसोग च्वासी, मण्डी हिमाचल की जनता ने राजाओं के जुल्मों के खिलाफ विद्रोह किया था। 1948 में हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री रहे यशवंत सिंह परमार के प्रत्यक्ष नेतृत्व में राजा लक्ष्मण सेन के खिलाफ विद्रोह किया गया था।</p>
<p>सुकेत इतिहास के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा बताते हैं कि पांगणा पर जब सत्याग्रहियों द्वारा कब्जा किया गया था तो यहां पर 4000 के करीब सत्याग्रहियों  ने 19 फरवरी 1948 से 22 फरवरी 1948 तक प्रातः तीन दिन तक पांगणा में डेरा जमाया था। इस दौरान भारी बारिश हो रही थी तथा अगले निर्देशों तक पागंणा में रुकने की सलाह गृह मंत्री से मिली थी। पांगणा वासियों ने, महिलाओं ने सभी सत्याग्रहियों के लिए पांगणा में रहने, खाने और सोने का प्रबंध किया था। इस इलाके के सैकड़ों लोग सत्याग्रहियों की सेवा में शामिल थे।</p>
<p>ऐसे ही एक शख्स थे पांगना गांव के नरसिंह दत्त (चिन्गु) और अन्य नेतृत्वकारी नरसिंह दत्त (भाऊ लिडर) के दोस्त थे। नरसिंह दत्त के छोटे बेटे ज्ञानचंद (45) ने बताया कि उनके पिता हमेशा राजा के खिलाफ विद्रोह में लगे रहते थे। वह घर पर भी कम ही रहते थे। उन्होंने प्रजा मंडल के आंदोलन के संबंध में बिलासपुर, सुंदरनगर, सिरमौर, रामपुर बुशहर आदि जगहों पर यात्राएं की थी। राजा ने एक बार उनको सुंदरनगर कैद में भी रखा था। बिलासपुर के उनके साथ आंदोलन में रहे लोगों से जब हम मिले तो उन्होंने भी इसकी तस्दीक की थी।</p>
<p>वर्तमान में नरसिंह दत्त के परिवार में उनकी बड़ी बेटी मीना (60), टेक चंद (50) और ज्ञान चंद (45) जीवीत हैं। उनका कहना है कि सरकार बहुत सारे कार्यक्रम आजादी के लिए करती है लेकिन उनके पिता जो लगातार आजादी के लिए लड़ते रहे उनका नाम तक स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की सूची में नहीं है।</p>
<p>ज्ञान चंद ने हमें हिमाचल सरकार द्वारा उनके पिता को जारी किया गया होमगार्ड का कार्ड दिखाया, जिसमें नरसिंह दत्त का जन्म 1927 लिखा हुआ है। उनके पिता का नाम कृष्ण दत्त था। बटालियन नंबर 956 में उनको 1965 में नौकरी दी गई थी। उनका कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण खुद यशवंत सिंह परमार ने उनको नौकरी दी थी। वह व्यक्तिगत रूप से उनको जानते थे।</p>
<p>नरसिंह दत्त उर्फ चिन्गु के सितम्बर 1947 में लिपटी राम सहित रियासत मण्डी से शिमला भागकर भूमिगत होने का वर्णन हिमाचल भाषा, कला संस्कृति अकादमी द्वारा प्रकाशित स्मृतियाँ नामक किताब के 49 पृष्ठ पर भी दर्ज है। लेकिन इसके बाद इस परिवार को पूर्व सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं दी गई है।</p>
<p>स्वतंत्रता संग्राम के अनाम सैनिकों पर शोध कर रहे मनदीप कुमार का कहना है कि करसोग और पांगना में ऐसे लोग सैकड़ों की संख्या में हैं, जिनका नाम सूची में नहीं जुड़ पाया है। ऐसे लोगों पर खोज होनी चाहिए और स्थानीय प्रशासन को इसके लिए सहयोग देना चाहिए।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश भाषा कला और संस्कृति विभाग को इस की तरफ विशेष जोर देना चाहिए। बहुत सारे लोगों ने सूची में अपने नाम नहीं लिखवाए हैं। इस के कारणों का विश्लेषण करते हुए जगदीश शर्मा कहते हैं कि उस समय लोग अनपढ़ थे। सरकार और पुलिस अगर किसी का नाम, कागज पत्र मांगती थी तो लोग इस बात से डरते थे कि कहीं किसी मामले में जेल न हो जाए। इस लिए बहुत सारे लोगों ने जो विद्रोह में थे अपने नाम सरकार के पास नहीं भेजे। अभी सरकार को ऐसे लोगों का संज्ञान लेना चाहिए और सुकेत विद्रोह की याद में प्रशासन को चाहिए कि वह पांगना, करसोग, सुंदरनगर, मण्डी आदि क्षेत्रों में सर्वेक्षण करवाए और ऐसे लोगों के परिवारों को सम्मानित करें।</p>
<p><strong>लेखक: गगनदीप सिंह</strong>, एक लेखक, स्वतंत्र पत्रकार, शोधकर्ता, अनुवादक और डॉक्यूमेंटरी मेकर (Documentary maker)</p>
<p><strong>अस्वीकरण</strong>: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। हिमाचल वाचर इस लेख से जुडी किसी भी जानकारी की सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता या वैधता के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। सभी जानकारी यथास्थिति के आधार पर प्रदान की जाती है। लेख में दी गई जानकारी, तथ्य या राय हिमाचल वाचर के विचारों को नहीं दर्शाती है और हिमाचल वाचर इसके लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व नहीं लेता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/14/narsingh-datt-unsung-freedom-fighter-from-himachal-pradesh/">आजादी के अमृतमहोत्सव से गायब है पांगना (मंडी) के अनाम स्वतंत्रता सेनानी नरसिंह दत्त की कहानी </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा की निशुल्क कोचिंग देंगी डीएसपी गीतांजलि ठाकुर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/12/free-coaching-by-dsp-gitanjali-thakur-for-karsog-youth/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Dec 2021 15:42:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[डीएसपी गीतांजलि ठाकुर]]></category>
		<category><![CDATA[निशुल्क कोचिंग]]></category>
		<category><![CDATA[पुलिस भर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी पुलिस]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश पुलिस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=14769</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211; करसोग उपमंडल की डीएसपी गीतांजलि ठाकुर करसोग के गरीब वर्ग के युवाओं को पुलिस में भर्ती होने में उनकी मदद करेंगी। पुलिस भर्ती की शारीरिक दक्षता भर्ती परीक्षा को उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए डीएसपी गीतांजलि खुद कोचिंग देंगी। कोचिंग लिए 13 दिसंबर से पंजीकरण शुरू होगा और 20 [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/12/free-coaching-by-dsp-gitanjali-thakur-for-karsog-youth/">पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा की निशुल्क कोचिंग देंगी डीएसपी गीतांजलि ठाकुर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong> करसोग उपमंडल की डीएसपी गीतांजलि ठाकुर करसोग के गरीब वर्ग के युवाओं को पुलिस में भर्ती होने में उनकी मदद करेंगी। पुलिस भर्ती की शारीरिक दक्षता भर्ती परीक्षा को उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए डीएसपी गीतांजलि खुद कोचिंग देंगी।</p>
<p>कोचिंग लिए 13 दिसंबर से पंजीकरण शुरू होगा और 20 दिसंबर से कोचिंग कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। अपनी निजी सुरक्षा कर्मी से मिले सुझाव के बाद डीएसपी गीतांजलि ठाकुर  ने गरीब वर्ग के युवाओं को निशुल्क कोचिंग देने को कहा है।</p>
<p>डीएसपी गीतांजलि ठाकुर ने कहा कि उनके पीएसओ (सुरक्षा कर्मी) ने उन्हें बताया कि गांव के गरीब बच्चे जो पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के लिए 5 से 10 हजार रुपये देकर लिखित परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। डीएसपी गीतांजलि ने कहा कि उनके सुरक्षा कर्मी के सुझाव के बाद उनके मन में इन बच्चों को कोचिंग देने का विचार आया है। उन्होंने बताया कि सोमवार से बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग आरंभ कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि करसोग क्षेत्र के करीब 100 बच्चों ने पुलिस की शारीरिक दक्षता परीक्षा पास की है। ऐसे में अगर कोचिंग लेने आने वाले युवाओं की संख्या 20 से 25 तक रहती है, तो वह थाना परिसर में ही ड्यूटी के बाद उनको कोचिंग देंगी, लेकिन अगर संख्या बढ़ जाती है तो इसके लिए कालेज में व्यवस्था की जाएगी। डीएसपी की इस पहल से गरीब बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<p>मंडी जिले में 194 पदों के लिए पुलिस भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा शनिवार को समाप्त हो गई है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/12/free-coaching-by-dsp-gitanjali-thakur-for-karsog-youth/">पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा की निशुल्क कोचिंग देंगी डीएसपी गीतांजलि ठाकुर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पुरे गाँव  को ठेंगा दिखा बगैला पंचायत प्रधान ने अपने घर के लिए बनवाली सडक,पर लोग पैदल चलने को मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/01/gram-panchayat-bagaila/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Mar 2017 07:32:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[कुफरीधार]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राम पंचायत बगैला]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल परिवहन निगम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=10355</guid>

					<description><![CDATA[<p>करसोग- कैसे लगता है जब आपके द्वारा ही चुने गए प्रतिनिधि एक तरफ आपको विकास जैसे झूठे वायदे कर के भ्रमित कर रहे हों और दूसरी तरफ आपको अपने विश्वास में लेकर आपके साथ खिलवाड कर रहे हों तो इससे ज्यादा घटिया और शर्म की बात क्या हो सकती है। ऐसा ही मामला करसोग ग्राम [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/01/gram-panchayat-bagaila/">पुरे गाँव  को ठेंगा दिखा बगैला पंचायत प्रधान ने अपने घर के लिए बनवाली सडक,पर लोग पैदल चलने को मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>करसोग-</strong> कैसे लगता है जब आपके द्वारा ही चुने गए प्रतिनिधि एक तरफ आपको विकास जैसे झूठे वायदे कर के भ्रमित कर रहे हों और दूसरी तरफ आपको अपने विश्वास में लेकर आपके साथ खिलवाड कर रहे हों तो इससे ज्यादा घटिया और शर्म की बात क्या हो सकती है। ऐसा ही मामला करसोग ग्राम पंचायत बगैला में देखने को मिला जहाँ की प्रधान भुवनेश्वरी आरोपण ने अपने फायदे के लिए सरकारी सडक काट कर अपने घर के लिए सडक तैयार कर दी जिसके कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड रहा है। यह कहना है ग्राम पंचायत बगैला के स्थानीय निवसियों का। </p>
<p>लोगो का कहना है कि करसोग से कुफरीधार सडक पर ग्राम पंचायत बगैला के प्रधान के द्वारा सडक काट कर अपने घर को सडक बनाई गई। लोगों को सडक सुविधा होने के बाबजूद अपने घरों के लिए पैदल सफर करना पड रहा है। </p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जब वह सड़क की शिकयात पंचायत प्रधान से करते हैं तो वह इनसे सीधे मुंह बात नहीं करती, यहाँ तक कि जब ग्रामीण इस बात पर आपत्ति जतातें हैं तो प्रधान लोगो को यह तक कह देती है कि &#8220;<em><strong>जो करना है कर लो</strong></em>&#8221; </p>
<p> लोगो का यह भी कहना है कि इस सडक पर हिमाचल परिवहन निगम की एक बस सुबह के समय और एक बस शाम के समय ही चलती है।</p>
<p>स्थानीय लोगो का कहना है कि शिवरात्रि के चलते लोग ने अपने घरों के लिए समान की खरीदारी की थी। तथा शिवरात्रि के ठीक एक दिन पहले शाम के समय जाने वाली बस कुफरीधार से पहले लगभग 3 किलो मीटर पीछे से लोग बस से उतर गए क्योंकि रास्ता ठीक नहीं होने की वजह से बस का आगे जाना संभव नहीं था। जिस कारण लोगों को सड़क होने के बावजूद शिवरात्रि का सामान अपनी पीठ पर लाद कर बाकी का रास्ता पैदल ही तय करना पडा। यहाँ तक कि कुछ लोगो को निजी वाहनों से घर जाने के लिए 300रुपये तक खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा! जिस कारण लोगो को भारी परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।</p>
<p>एक तरफ लोगों के द्वारा चुने गए  प्रतिनिधी अपनी पंचायत का विकास का वायदा कर के लोगों को विश्वास मे ले लिया जाता है। और वहीँ  दूसरी और जनता के हितों और उनके विश्वास के साथ खिलवाड किया जा रहा है। जिस कारण आम जनता बुरी तरह से त्रस्त है</p>
<p>स्थानीय लोगो का कहना है कि पंचायत का तो विकास ही पूरी तरह से ठप पडा हुआ है! लोगो ने कहा कि  पंचायत प्रधान का घर वाला भी सरकारी कर्मचारी है। सता के नशे मे चुर हो कर सरकारी सम्पति का नुकसान किया जा रहा है। जिसका उदहारण सरकारी सडक को ही काट दिया गया है और बडी गाडियों का आवागमन भी पूरी तरह से ठप पडा हुआ है जिस कारण हिमाचल परिवहन निगम को भी रोज का नुकसान उठाना पड रहा है। </p>
<p>लोगो ने कहा कि सम्भन्दित विभाग इस पर अम्ल कर उचित कार्यवाही करे। ताकि बस कुफरीधार तक पहुंच सके,और लोगों को आवागमन मे सुविधा मिल सके। </p>
<p>इस सडक को 2-3 साल पहले भी काटा गया था। लेकिन विभाग के द्वारा कोई भी कार्यवाही अमल मे नही लाई गई। और न ही उस जगह से सडक को ठीक किया गया। जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान किया जाए। ताकी जनता को आने जाने मे सुविधा हो सके। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/01/gram-panchayat-bagaila/">पुरे गाँव  को ठेंगा दिखा बगैला पंचायत प्रधान ने अपने घर के लिए बनवाली सडक,पर लोग पैदल चलने को मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गरीब भी नहीं तोड़ पायी हिमाचल के इस छात्र का  होंसला ,  प्रदेश  के टॉप-10 मेधावी छात्रों की सूची में हुआ शामिल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/13/himachal-pradesh-education-board/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Feb 2017 06:21:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग उपमंडल]]></category>
		<category><![CDATA[चेतन राजपूत करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करसोग उपमंडल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=10159</guid>

					<description><![CDATA[<p>मंडी- कहते हैं कि मेहनत करने वालों की कभी हर नहीं होती,मेहनत करने वाले कठिन से कठिन काम भी आसानी से पूरा कर देते हैं और इसी कहावत को सच कर दिखाया है करसोग के 16 वर्षीय चेतन राजपूत ने। करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सनारली के गांव कुट्टी के चेतन राजपूत ने मार्च, 2016 [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/13/himachal-pradesh-education-board/">गरीब भी नहीं तोड़ पायी हिमाचल के इस छात्र का  होंसला ,  प्रदेश  के टॉप-10 मेधावी छात्रों की सूची में हुआ शामिल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंडी-</strong> कहते हैं कि मेहनत करने वालों की कभी हर नहीं होती,मेहनत करने वाले कठिन से कठिन काम भी आसानी से पूरा कर देते हैं और इसी कहावत को सच कर दिखाया है करसोग के 16 वर्षीय चेतन राजपूत ने। करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सनारली के गांव कुट्टी के चेतन राजपूत ने मार्च, 2016 की दसवीं की वार्षिक परीक्षा में हिमाचल प्रदेश के टॉप-10 मेधावी छात्रों की सूची में अपना नाम दर्ज करवा कर अपने माता-पिता का नाम ही बल्कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के साथ-साथ पूरे उपमंडल के लोगों का भी सिर गर्व से ऊंचा किया है। अपनी गरीबी को ताकत बना कर मेहनत व समय के सदुपयोग व दिन-रात कड़ी मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है।</p>
<p><strong>पिता किसान, माता मिड-डे मील कार्यकर्ता</strong></p>
<p>चेतन राजपूत के पिता ज्ञान चन्द किसान तथा माता प्रभा देवी स्कूल में मिड-डे मील कार्यकर्ता हैं। उनका मानना है कि राज्य सरकार द्वारा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियां प्रदान करना तथा मेधावी छात्रों को प्रोत्साहिन करने के लिए आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं से प्रभावित होकर ही उनके बेटे ने यह मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में चेतन राजपूत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करसोग से शिक्षा ग्रहण कर रहा है। चेतन राजपूत का कहना है कि वह जमा दो की पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/13/himachal-pradesh-education-board/">गरीब भी नहीं तोड़ पायी हिमाचल के इस छात्र का  होंसला ,  प्रदेश  के टॉप-10 मेधावी छात्रों की सूची में हुआ शामिल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सड़क न होने के कारण  करसोग पंचायत में पालकी से सड़क तक पहुंचाए जाते हैं मरीज, कुछ आधे रास्ते में ही तोड़ देते हैं दम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/kasog-panchayat-in-shimla-without-road-facility/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Dec 2016 09:05:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[विधायक मनसा राम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश आईपीएच विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=9701</guid>

					<description><![CDATA[<p>लोगों को राशन, सिलेंडर और रोजमर्रा जरूरत की चीजों को घोड़ों या पीठ पर लाद कर घर तक पहुंचाना पड़ता है,पानी की सप्लाई भी आती है कभी कभार मंडी- उपमंडल करसोग के सरत्यौला पंचायत के लोगों का आज तक सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। इस पंचायत के गांवों में 800 के करीब आबादी है, [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/kasog-panchayat-in-shimla-without-road-facility/">सड़क न होने के कारण  करसोग पंचायत में पालकी से सड़क तक पहुंचाए जाते हैं मरीज, कुछ आधे रास्ते में ही तोड़ देते हैं दम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लोगों को राशन, सिलेंडर और रोजमर्रा जरूरत की चीजों को घोड़ों या पीठ पर लाद कर घर तक पहुंचाना पड़ता है,पानी की सप्लाई भी आती है कभी कभार</strong></p>
<p><strong>मंडी-</strong> उपमंडल करसोग के सरत्यौला पंचायत के लोगों का आज तक सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। इस पंचायत के गांवों में 800 के करीब आबादी है, जिसे दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों को बीमार होने की सूरत में पालकी से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कुछ रोगी वक्त पर उपचार न मिलने के कारण आधे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।</p>
<p>सरत्यौला पंचायत के बालू, पलैड, चिमुतिर, पराड़ी, चलाहौणी, मांजू मगांण गांव के ग्रामीण वार्ड मेंबर व अन्य लोगो ने बताया कि सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सरत्यौला पंचायत सड़क से नहीं जुड़ पाई। पंचायत के गांवों में रोगियों को प्रथम उपचार के लिए कोई उप-स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं खोला गया। वहीं मिडल तक तो स्कूल की व्यवस्था है, उससे आगे पढ़ने के लिए स्कूली बच्चों को मांजू से माहूंनाग स्कूल पहुंचने के लिए सात किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के वक्त प्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं। चुनाव संपन्न हो जाने के बाद यह अपने वायदे भूल जाते हैं। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही सरकारें सरत्यौला पंचायत को सड़क जैसी सुविधा नहीं दे पाई। लोगों को राशन, सिलेंडर और रोजमर्रा जरूरत की चीजों को घोड़ों या पीठ पर लाद कर घर तक पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द इस पंचायत को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाए, नहीं तो ग्रामीणों के पास गांव से पलायन करने के सिवा कोई और रास्ता नहीं दिखाई दे रहा।</p>
<p><strong>पानी की सप्लाई भी आती है कभी कभार</strong></p>
<p>सरत्यौला पंचायत के बाढू, चलौनी, पलैड़, गांव में कई महीनों तक लोगों के नल से एक भी बूंद पानी की नहीं टपकती। पंचायत की ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पास करके आईपीएच विभाग को कई बार अवगत करवाया गया। लेकिन आईपीएच विभाग इस दिशा में कोई भी गौर नहीं कर रहा है। जिससे रोजमर्रा की जरूरतों में पानी न मिलने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>दीये की तरह जलते हैं बिजली बल्ब</strong></p>
<p>सरत्यौला पंचायत के कुछ गांवों में विद्युत का भी संकट है। यहां पर लाइट की रोशनी दीये से भी कम होती है। जिससे स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। लो वोल्टेज के कारण कोई भी विद्युत उपकरण नहीं चल पाते। जिस कारण आटा पिसाई, धान पिसाई आदि के लिए 6-7 किलोमीटर दूर पहुंचना पड़ता है।</p>
<p><strong>क्या कहते है सीपीएस मनसाराम</strong></p>
<p>विधायक एवं सीपीएस मनसा राम ने कहा कि सरत्यौला तक सड़क की डीपीआर तैयार है। एफआरए में यह केस भेजा गया है। जैसे ही एफआरए की मंजूरी मिलती है, सरत्यौला को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। पानी की समस्या दूर करने के लिए 11 करोड़ की लिफ्ट स्कीम परलोग खड्ड से माहुंनाग का कार्य चला हुआ है।</p>
<p><strong>इनसेट</strong></p>
<p>पूर्व विधायक हीरा लाल ने कहा कि दरल तक सड़क भाजपा के समय में निकली है। भाजपा के समय में ही बस लगी है। कांग्रेस सरकार इन चार सालों में एफआरए प्राप्त नहीं कर पाई। जोकि एक चिंता का विषय है। पानी की किल्लत दूर करने के लिए परलोग खड्ड से माहूंनाग लिफ्ट स्कीम का कार्य युद्ध स्तर पर होना चाहिए। जिन गांवों में बिजली की लो वोल्टेज है, वहां पर ट्रांसफार्मर लगने चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/22/kasog-panchayat-in-shimla-without-road-facility/">सड़क न होने के कारण  करसोग पंचायत में पालकी से सड़क तक पहुंचाए जाते हैं मरीज, कुछ आधे रास्ते में ही तोड़ देते हैं दम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जान हथेली पर रखकर करसोग के बिंदला गांव के निवासी आज भी सतलुज नदी पर बने झूले से नदी पार करने को मजबूर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/10/karosg-bindla-panchayat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Dec 2016 06:19:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[बिंदला पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश लोग निर्माण विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=9531</guid>

					<description><![CDATA[<p>मंडी जिला मंडी के उपमंडल करसोग की बिंदला पंचायत में आज भी झूले से जिंदगी चल रही है। जान हथेली पर रखकर लोग सतलुज नदी पर बने झूले से इसे आर-पार करते हैं। सरकार और लोग निर्माण विभाग की अनदेखी से बिंदला पंचायत के लोग परेशानियां झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि आस पड़ोस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/10/karosg-bindla-panchayat/">जान हथेली पर रखकर करसोग के बिंदला गांव के निवासी आज भी सतलुज नदी पर बने झूले से नदी पार करने को मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंडी</strong> जिला मंडी के उपमंडल करसोग की बिंदला पंचायत में आज भी झूले से जिंदगी चल रही है। जान हथेली पर रखकर लोग सतलुज नदी पर बने झूले से इसे आर-पार करते हैं। सरकार और लोग निर्माण विभाग की अनदेखी से बिंदला पंचायत के लोग परेशानियां झेल रहे हैं। </p>
<p>हालात यह हैं कि आस पड़ोस की पंचायतों के लोगों ने इस पंचायत में झूला न चढ़ने के डर से शादी ब्याह में आना जाना तक छोड़ दिया है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी तहसील करसोग में पड़ने वाली बिंदला पंचायत सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है। इस पंचायत के तहत आधा दर्जन से अधिक गांवों के 2500 के लगभग लोगों को सरकार की अनदेखी के चलते मूलभूत सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।</p>
<p>पंचायत के गांव मरौला, खड्ड, डबारू, रोपड़, खडैहन, फुलू, करैल गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर झूले के सहारे सतलुज नदी को पार करने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भले ही प्रदेश में सड़कों के जाल बिछाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। असलियत में आज भी सैकड़ों परिवार सड़क सुविधा से महरूम हैं।</p>
<p>हालांकि सरकार ने 1998 से बिंदला पंचायत को सड़क से जोड़ने की कवायद शुरू की थी। वर्ष 2007 तक शाकरा गांव से कुछ दूरी तक सड़क का निर्माण भी हुआ लेकिन 2007 के बाद इस मार्ग का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। जिसके चलते ग्रामीणों की रोजमर्रा की चीजें झूले में डाल कर घर ले जानी पड़ती हैं। </p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क का निर्माण न किया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता जितेंद्र वैद्य ने कहा कि फोरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण परेशानी पेश आ रही है। जल्द ही तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/10/karosg-bindla-panchayat/">जान हथेली पर रखकर करसोग के बिंदला गांव के निवासी आज भी सतलुज नदी पर बने झूले से नदी पार करने को मजबूर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
