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	<title>अजय श्रीवास्तव Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>अजय श्रीवास्तव Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>प्रदेश हाईकर्ट के आदेश के बाद भी हमीरपुर में बेसहारा मनोरोगी का नहीं किया गया रेस्क्यू: उमंग  फाउंडेशन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Feb 2022 15:56:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरोगी]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाईकर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हमीपुर शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू करने के सन्दर्भ में प्रदेश राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमीरपुर में फाउंडेशन की सदस्य चंद्रिका चौहान ने शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हमीपुर शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू करने के सन्दर्भ में प्रदेश राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमीरपुर में फाउंडेशन की सदस्य चंद्रिका चौहान ने शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू कराने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रही हैं। </p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने हैरानी जताते हुए कहा कि मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधान के इस कानून के बारे में न तो जिला प्रशासन और न ही  पुलिस को  कुछ  पता  है। </p>
<p>उन्होने कहा कि चंद्रिका निराश होकर राज्य मानवाधिकार आयोग को भी एक मनोरोगी को रेस्क्यू कराने के लिए पत्र भेजा था और आयोग ने जिला उपायुक्त को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद भी पुलिस और प्रशासन उसे रेस्क्यू नहीं करा सका। </p>
<p>फाउंडेशन ने कहा कि राज्य मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बावजूद कड़ाके की ठंड में सड़कों पर बेसहारा दर-दर की ठोकरें खा रहे मनोरोगियों की परवाह न तो पुलिस को है और न ही हमीरपुर जिला प्रशासन को है।</p>
<p>प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का इस तरह का रवैया हाईकोर्ट के जून 2015 के आदेश का भी खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और  पुलिस यदि कोई कार्रवाई नहीं करती है तो फाउंडेशन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगी।</p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 5 जून 2015 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर अपने फैसले में कहा था की सड़कों पर घूमने वाले मनोरोगियों को कानून के तहत रेस्क्यू करने और अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेवारी जिला पुलिस अधीक्षक की है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि एक आम नागरिक के नाते चंद्रिका बेसहारा मनोरोगियों के कानूनी अधिकारों का संरक्षण चाहती हैं। लेकिन प्रशासन कानून की जानकारी ना होने के कारण अदालत की अवमानना भी कर रहा है। उनका कहना है कि यदि यही रवैया रहा तो वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।</p>
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		<title>कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर मेला लग सकता है लेकिन रक्तदान शिविर नहीं: उमंग फाउंडेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/17/umang-foundation-register-complaint-against-the-nalagarh-peer-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jan 2022 15:18:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी ब्लड बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एसडीएम नालागढ़]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना नियम]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[पीर बाबा मेला नालागढ़]]></category>
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		<category><![CDATA[मुख्य सचिव राम सुभग सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[रक्तदान शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता। शिमला- उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने नालागढ़ में हुए पीर बाबा के मेले में हज़ारों लोगों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने नालागढ़ में हुए पीर बाबा के मेले में हज़ारों लोगों के इक्कठा होने को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह से शिकियत दर्ज की है।</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर प्रशासन की सांठगांठ से यह मेला लगा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कोविड के बहाने से उमंग फाउंडेशन को नालागढ़ में <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/12/umang-foundation-blood-donation-camp/" target="_blank" rel="noopener">रक्तदान शिविर</a> लगाने की मंजूरी नहीं दी थी।</p>
<p>उन्होंने अपनी शिकायत में सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नालागढ़ के एसडीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध संक्रमण फैलाने के मामले में केस दर्ज कर उन्हें निलंबित करने की मांग की है।</p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने कहा कि मेला एक सप्ताह से बेरोकटोक चल रहा है और अब तक उसमें कई हजार लोग शामिल हो चुके हैं।</p>
<p>अपनी शिकायत में उन्होंने प्रमाण के तौर पर समाचार पत्रों की खबरें भी लगाई हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा है कि यह डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन है। मेले में 2 गज की दूरी, मास्क एवं सैनिटाइजर जैसे सुरक्षा उपाय दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रशासन की नाक तले इतनी बड़ी व्यापारिक गतिविधि चलाने में भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी नजर आती है।</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा कि वह मुख्य सचिव से मांग करते है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नालागढ़ के एसडीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।उन्होंने यह भी कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और सोलन जिला प्रशासन ने लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है।</p>
<p>प्रो.श्रीवास्तव ने कहा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 मार्च 2020 और 17 मई 2021 को रक्तदान शिविरों को कोविड-19 के तहत मंजूरी देने के के निर्देश सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को दिए गए थे। इसके बावजूद सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नालागढ़ के एसडीएम ने उमंग फाउंडेशन को रक्तदान शिविर लगाने की मंजूरी नहीं दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी की गई,लेकिन यही अधिकारी एक हफ्ते तक पीर स्थान में मेला चलवाते रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उमंग फाउंडेशन मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से लेकर अभी तक कोरोना नियमों का पालन करते हुए 23 रक्तदान शिविर लगा कर आईजीएमसी शिमला को सेकंड यूनिट रक्त दे चुका है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/17/umang-foundation-register-complaint-against-the-nalagarh-peer-mela/">कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर मेला लग सकता है लेकिन रक्तदान शिविर नहीं: उमंग फाउंडेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिमाचल में महिलाओं से ज्यादा पुरुष होते हैं साइबर अपराधों का शिकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/10/victims-of-cybercrime-in-himachal-pradesh-include-more-males-than-females/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Jan 2022 15:40:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इंटरनेट से होने वाले अपराधों की सूचना तुरंत टोल फ्री नंबर 155260 पर या हिमाचल पुलिस के व्हाट्सऐप नंबर 9805953670 पर दी जा सकती है। शिमला- आज सोमवार को मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन के साप्ताहिक वेबीनार जिसका बिषय &#8220;साइबर अपराधों से सुरक्षा का अधिकार&#8221; में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक(साइबर क्राइम) नरवीर सिंह राठौर ने यह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंटरनेट से होने वाले अपराधों की सूचना तुरंत टोल फ्री नंबर 155260 पर या हिमाचल पुलिस के व्हाट्सऐप नंबर 9805953670 पर दी जा सकती है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> आज सोमवार को मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन के साप्ताहिक वेबीनार जिसका बिषय &#8220;साइबर अपराधों से सुरक्षा का अधिकार&#8221; में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक(साइबर क्राइम) नरवीर सिंह राठौर ने यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में महिलाओं से ज्यादा पुरुष साइबर अपराधों का शिकार होते हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में हिमाचल पुलिस के पास साइबर अपराधों की 8500 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 77% शिकायतें पुरुषों की थीं। इंटरनेट के जरिए होने वाले अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है।</p>
<p>वेबीनार में उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों पर राज्य में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाएगी।इंटरनेट और साइबर सुरक्षा अब सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट के जरिए कोई अपराध होने पर तुरंत क्या कदम उठाए जाए जाने चाहिए।</p>
<p>नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि देश में 72 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें 67% पुरुष और 33% महिलाएं हैं। इंटरनेट यूजर में से 62% लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य अदालतें यह स्पष्ट कर चुकी है कि इंटरनेट का इस्तेमाल और साइबर सुरक्षा किसी भी व्यक्ति या संस्थान का मौलिक अधिकार है। उन्होंने हैकिंग और अन्य साइबर अपराधों से सुरक्षा के कई उपाय भी बताए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। अज्ञानता में साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों में उच्च शिक्षित व्यक्ति जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और बड़े अफसर भी शामिल हैं। हिमाचल में होने वाले साइबर अपराधों के 95% संचालक दूसरे राज्यों या विदेशों के होते हैं। अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी भी व्यक्ति की फोटो ही नहीं बल्कि नकली आवाज भी तैयार कर लेते हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इंटरनेट से होने वाले अपराधों की सूचना तुरंत टोल फ्री नंबर 155260 पर या हिमाचल पुलिस के व्हाट्सऐप नंबर 9805953670 पर दी जा सकती है।</p>
<p>राठौर ने यह भी बताया कि साइबर अपराधों में पैसों की ठगी, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर के फिरौती मांगना, महिलाओं और बच्चों के नग्न अथवा अर्ध नग्न फोटोग्राफ एवं वीडियो भेजना अथवा देखना,अश्लील संदेश भेजना, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सामग्री एकत्र करना और भेजना, नकली रेल टिकट अथवा बिजली के बिल बनाना एवं इसी तरह के अन्य अपराध शामिल हैं। ये सभी दंडनीय अपराध हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि साइबर अपराध करने के लिए शातिर कई तरह के वायरस और मालवेयर भेज कर आपके डाटा पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसलिए अनेक स्थानों पर उपलब्ध फ्री वाईफाई की सुविधा का इस्तेमाल करने में सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध पोस्ट या लिंक पर क्लिक करने से बचें, किसी भी हालत में अपने बैंक अकाउंट या वित्तीय लेनदेन से संबंधित मामलों की कोई भी जानकारी फोन या इंटरनेट पर अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें। ऐसा करते ही आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है। उन्होंने कहा की ठगी के शिकार हुए 90% लोग स्वयं दोषी होते हैं।</p>
<p>अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया की हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी यह अभियान जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसमें सभी वर्गों के लोगों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को जोड़ा जाएगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि मोबाइल से पढ़ने वाले स्कूली बच्चों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि शातिर अपराधी उनका शोषण न कर सकें। इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश के अलावा चंडीगढ़, दिल्ली, झारखंड, बिहार और उत्तराखंड के लगभग 80 युवाओं ने हिस्सा लिया।</p>
<p>Photo by <a href="https://unsplash.com/@towfiqu999999?utm_source=unsplash&amp;utm_medium=referral&amp;utm_content=creditCopyText">Towfiqu barbhuiya</a> on <a href="https://unsplash.com/s/photos/cyber-crime?utm_source=unsplash&amp;utm_medium=referral&amp;utm_content=creditCopyText">Unsplash</a></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/10/victims-of-cybercrime-in-himachal-pradesh-include-more-males-than-females/">हिमाचल में महिलाओं से ज्यादा पुरुष होते हैं साइबर अपराधों का शिकार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/21/hp-high-court-judgment-in-homeless-mentally-ill-people/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Feb 2017 08:22:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन शिमला निवासी सुभाष कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[बेघर मनोरोगि]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरोगी]]></category>
		<category><![CDATA[मानसिक रोग]]></category>
		<category><![CDATA[मानसिक स्वस्थ्य अधिनियम 1987]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश पुलिस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बेघर मानसिक रोगियों को बचाने में  हिमाचल पुलिस अधिकारी  कर रहे आनाकानी, कोर्ट की अवमानना का नहीं कोई डर शिमला- शिमला की गैर-सरकारी संस्था, उमंग फाउंडेशन, का आरोप है की हिमाचल प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षकों पर 2015 में उच्च न्यायाल द्वारा शिमला निवासी, सुभाष कुमार, द्वारा सडकों पर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/21/hp-high-court-judgment-in-homeless-mentally-ill-people/">बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बेघर मानसिक रोगियों को बचाने में  हिमाचल पुलिस अधिकारी  कर रहे आनाकानी, कोर्ट की अवमानना का नहीं कोई डर</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>शिमला की गैर-सरकारी संस्था, उमंग फाउंडेशन, का आरोप है की हिमाचल प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षकों पर 2015 में उच्च न्यायाल द्वारा <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/18/mental-health-activist-of-himachal-pradesh-subhash-kumar/">शिमला निवासी, सुभाष कुमार,</a> द्वारा सडकों पर बेसहारा भटकते मानसिक रोगयीओं के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु की गई याचिका पर दिए गए आदेशों का भी कोई फर्क नहीं दिख रहा है!</p>
<p>हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मनोरोगियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अभियान के बारे में छपी खबरों का व्यापक असर हुआ है। आम लोग अपने आसपास के बेसहारा मनोरोगियों के बारे में स्थानीय पुलिस एवं संस्था को फोन पर सूचना दे रहे हैं। लेकिन पुलिस का रवैया नकारात्मक बना हुआ है। संस्था ने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को रविवार को इस बारे में पत्र लिखा है और चेताया है कि यदि पुलिस ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत बेसहारा मनोरोगियों के मानवाधिकार संरक्षण की कार्यवाही नहीं की तो हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर किया जाएगा।</p>
<p>संस्था ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने मनोरोगियों से संबंधित सूचनाओं पर कार्रवाई न की तो वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर करेंगे।</p>
<p>समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में बेसहारा मनोरोगियों के अधिकारों की खबर पढ़ने के बाद चंबा सोलन, कुल्लू, सिरमौर, बिलासपुर, धर्मशाला, ज्वाला जी बैजनाथ, शाहपुर ,सुंदर नगर, बद्दी, कुमार सेन, पौंटा साहिब, सुन्नी आदि स्थानों से उनके पास फोन आए। फोन करने वालों ने अपने क्षेत्र में बेसहारा मनोरोगियों की दयनीय हालत के बारे में बताया। उनमें से कई मनोरोगी तो डस्टबिन से खाना निकाल कर खाने को मजबूर हैं । लगभग सभी लोगों ने कहा कि सूचना देने के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।</p>
<p>चंबा जिले के गांव सिद्धपुरा निवासी सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी जीत सिंह ने बताया कि वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के पास एक मनोरोगी रहता है। वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के कैंपस और आसपास घूमता है तथा लोगों से बिस्कुट और रोटी मांग कर खा लेता है। उसकी उम्र करीब 30 साल है और शायद बिहार का रहने वाला है । उन्होंने कहा कि जब इसकी सूचना उन्होंने स्थानीय थाने में दी तो पुलिस कर्मचारियों ने उनका ही मजाक उड़ाया और कोई कार्यवाही नहीं की।</p>
<p>धर्मशाला से रविंदर ने बताया की पुलिस थाने के ठीक सामने लगभग 45 वर्षीय मनोरोगी रहता है जो डस्टबिन से खाना ढूंढ कर खाता है लेकिन पुलिस सब कुछ जानने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने बताया कि इसी तरह चामुंडा नगरी रोड पर लगभग 25 वर्षीय मनोरोगी दयनीय हालत में घूमता दिखता है । बद्दी से वीर सिंह ठाकुर ने कहा की नालागढ़ में बस स्टैंड के पास करीब 40 वर्ष का एक बेसहारा मनोरोगी रहता है जो दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है।</p>
<p>सोलन से सतीश सिक्का ने बताया की सुबाथू रोड पर लाइट वाले चौक से 2 किलोमीटर दूर एक मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो सड़क पर सोता है और कूड़ेदान से खाना बीनकर खाता है ।लोग अक्सर उसको तंग करते हैं और कूड़ेदान से भी खाना नहीं निकालने देते। कुल्लू से सुदर्शना चौहान ने कहा कि कटराई-जटेड़ रोड पर लगभग 35 वर्षीय मनोरोगी रहता है और सड़क पर ही सोता है।</p>
<p>सोलन जिले संजय शर्मा ने बताया की में कुनिहार नालागढ़ रोड पर राम शहर की ओर जाने वाले रास्ते पर झंडू गांव में एक मनोरोगी रहता है जो श्मशान घाट के पास सोता है ।बैजनाथ से भरत शर्मा ने फोन पर बताया की मंडी रोड पर पेट्रोल पंप के पास करीब 40 वर्षीय मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो पेट्रोल पंप के आसपास घूमता दिखता है। जिला शिमला के कुमार से कपिल शर्मा ने कहा कि वहां शणाद गाँव का नरेश मनोरोगी होने के बाद दयनीय हालत में रहता है। वह अपने घर जाने की बजाए इधर-उधर से खाना मांग कर गुजर बसर करता है।</p>
<p>कांगड़ा जिले के रैत में करीब 7 वर्ष की दक्षिण भारत की एक मनोरोगी महिला बुरी हालत में रह रही है उसके पास ना तो पर्याप्त कपड़े हैं और नहीं सिर ढकने को छत। रैत से गुरनाम सिंह ने बताया कि उसकी बोली कोई नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा की इस महिला को तुरंत सहारे की जरूरत है।</p>
<p>पौंटा साहिब के पास बद्रीपुर में आंगनवाड़ी वर्कर बलजीत कौर ने कहा की नजदीकी गांव भोपुर में करीब 25 साल का मनोरोगी लड़का खराब हालत में सड़क पर ही पड़ा रहता है।</p>
<p>ज्वालाजी से सपना ने बताया की बस स्टैंड के पास कई मनोरोगी बेसहारा हालत में रहते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत है। ढली शिमला से रवि कुमार दलित ने बताया कि संजौली में एक नेपाली युवक नशे के कारण मानसिक संतुलन खो कर इधर-उधर चिल्लाता रहता है पुलिस वालों ने पहले उसे पकड़ा और कुछ देर बाद छोड़ दिया जबकि वह पूरी तरह से मनोरोगी है।</p>
<p>संस्था ने कहा कि इन सभी मामलों में स्थानीय पुलिस का नकारात्मक रवैया देखते हुए उन्होंने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करने का अनुरोध किया है ।</p>
<p>इस कानून के मुताबिक संबंधित थाना अध्यक्ष का दायित्व है कि वह बेसहारा मनोरोगी को देखकर उसे पुलिस संरक्षण में ले और नजदीकी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में 24 घंटे के भीतर पेश करें। इसके बाद अदालत मनोरोगी को मनोचिकित्सक को दिखाने का आदेश पारित करती है। उसका इलाज एवं पुनर्वास निशुल्क करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 23 और 24 के सख्ती से पालन के लिए 4 जून 2015 को हाई कोर्ट बिल्कुल स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/21/hp-high-court-judgment-in-homeless-mentally-ill-people/">बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>25 वर्ष की पीड़ा के बाद पहली बार अस्पताल पहुंची अनीतू, जांच के बाद मशोबरा नारी सेवा सदन भेजा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/06/disabled-himachal-village-girl-hifted-to-mashobra-nari-sewa-sadan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Dec 2016 16:44:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[अनीतू]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कुंगल बाल्टी]]></category>
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		<category><![CDATA[दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[मानसिक रोगी]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सामजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला उमंग फाउंडेशन द्वारा विकलांग लड़की अनीतू का मामला उठाए जाने और राष्ट्रीय महिला आयोग के संज्ञान लेने के बाद आज उसे शिमला लाकर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में उसकी डॉक्टरी जांच की गई। बाद में उसे मशोबरा स्थित राज्य सरकार के नारी सेवा सदन भेजा दिया गया। वह जीवन में पहली बार दुर्गम गांव कुंगल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला </strong>उमंग फाउंडेशन द्वारा विकलांग लड़की अनीतू का मामला उठाए जाने और राष्ट्रीय महिला आयोग के संज्ञान लेने के बाद आज उसे शिमला लाकर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में उसकी डॉक्टरी जांच की गई। बाद में उसे मशोबरा स्थित राज्य सरकार के नारी सेवा सदन भेजा दिया गया। वह जीवन में पहली बार दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी से बाहर आई और पहली बार उसे डॉक्टरों ने देखा। डॉक्टरों ने कहा कि वह मंदबुद्धि है और शारीरिक रूप से भी विकलांग है।</p>
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<div id="attachment_9448" style="width: 1010px" class="wp-caption alignnone"><img fetchpriority="high" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9448" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1.jpg" alt="world-disability-day" width="1000" height="600" class="size-full wp-image-9448" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1-300x180.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1-768x461.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1-696x418.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/World-Disability-Day-1-700x420.jpg 700w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p id="caption-attachment-9448" class="wp-caption-text">जाँच के लिए जाती अनीतू</p></div>
<p>उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि रामपुर के तहसील कल्याण अधिकारी शशि ठाकुर उप तहसील ननखड़ी में अनीतू के गांव कल रात में ही पहुँच गए थे। अनीतू के साथ उसकी दो मौसियां पार्वती और बिंदु भी आई हैं। </p>
<p>पढ़ें: <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/05/story-of-a-disabled-himachal-village-girl-seeking-shelter/" target="_blank">हिमाचल के दुर्गम गाँव में 25 वर्ष से मानसिक और शारीरिक अपंगता से जूझ रही मासूम की सरकार से एक आशियाने की फरियाद</a></p>
<div id="attachment_9447" style="width: 1010px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9447" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla.jpg" alt="umang-foundation-shimla" width="1000" height="600" class="size-full wp-image-9447" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-300x180.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-768x461.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-696x418.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-700x420.jpg 700w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p id="caption-attachment-9447" class="wp-caption-text">अनीतू की दो मौसियां पार्वती और बिंदु डीडीयू अस्पताल में</p></div>
<p>अनीतू को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. राकेश शांडिल ने देखा। इस मौके पर हड्डीरोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेन्द्र मोकटा और चिकित्सा अधीक्षक भी उपस्थित थीं। डॉ. शांडिल और डॉ. मोकटा का कहना था कि अनीतू को तुरंत किसी दवा इलाज की जरूरत नहीं है।<br />
<div id="attachment_9444" style="width: 1010px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9444" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla.jpg" alt="ddu-shimla" width="1000" height="600" class="size-full wp-image-9444" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla-300x180.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla-768x461.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla-696x418.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/DDU-Shimla-700x420.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p id="caption-attachment-9444" class="wp-caption-text">डीडीयू में नीतू की जाँच करते डॉक्टर</p></div>
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<p>जिला कल्याण अधिकारी केशू राम गर्ग ने कहा कि फिलहाल अनीतू को मशोबरा के नारी  सेवा ददन में अस्थाई तौर पर भर्ती किया है। बाद में उसे कुल्लू के कलाथ में एक स्वयंसेवी  संस्था द्वारा चलाये जारहे अनाथ महिलाओं के आश्रम में भेज दिया जाएगा। इस मौके पर उमंग फाउंडेशन की और से अजय श्रीवास्तव के अलावा ट्रस्टी विमला ठाकुर, सुरेन्द्र कुमार और हिमाचल वॉचर से तरुण शारदा भी मौजूद थे।<br />
<div id="attachment_9447" style="width: 1010px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9447" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla.jpg" alt="umang-foundation-shimla" width="1000" height="600" class="size-full wp-image-9447" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-300x180.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-768x461.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-696x418.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/umang-foundation-shimla-700x420.jpg 700w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p id="caption-attachment-9447" class="wp-caption-text">अनीतू की दो मौसियां पार्वती और बिंदु डीडीयू अस्पताल में</p></div>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/06/disabled-himachal-village-girl-hifted-to-mashobra-nari-sewa-sadan/">25 वर्ष की पीड़ा के बाद पहली बार अस्पताल पहुंची अनीतू, जांच के बाद मशोबरा नारी सेवा सदन भेजा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिमाचल के दुर्गम गाँव में 25 वर्ष से मानसिक और शारीरिक अपंगता से जूझ रही मासूम की सरकार से एक आशियाने की फरियाद</title>
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		<pubDate>Mon, 05 Dec 2016 14:02:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- बचपन कैसे बीता और कब वह 25 वर्ष की हो गई, उसे पता ही न चला। अविवाहित माँ ने जन्म देने बाद उसे नाना -नानी के हवाले कर कहीं और घर बसा लिया। वह खड़ी भी नहीं हो सकती, कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलना ही उसकी नियति है। सुनती सब है [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/05/story-of-a-disabled-himachal-village-girl-seeking-shelter/">हिमाचल के दुर्गम गाँव में 25 वर्ष से मानसिक और शारीरिक अपंगता से जूझ रही मासूम की सरकार से एक आशियाने की फरियाद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> बचपन कैसे बीता और कब वह 25 वर्ष की हो गई, उसे पता ही न चला। अविवाहित माँ ने जन्म देने बाद उसे नाना -नानी के हवाले कर कहीं और घर बसा लिया। वह खड़ी भी नहीं हो सकती, कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलना ही उसकी नियति है। सुनती सब है पर ठीक से बोल नहीं पाती, आँखें विकृत हैं और ठीक से देख नहीं पाती। 4 फुट X 3 फुट के ढारे में उसे अलग इसलिए रखा जाता है कि बुजुर्ग हो चुकी नानी अब उसे शौच आदि कराने में असमर्थ है।</p>
<p>यह कोई कहानी नहीं एक हकीकत है अपने कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलने वाली अपनी उमीदों और भविष्य को अपने विकृत आँखें से देखने वाली यह कहानी है मासूम अनीतू (उर्फ़ नूनी) की है! अनीतू  मंग फाउंडेशन ने उसे सुरक्षित किसी नारी निकेतन में भिजवाने का बीड़ा उठाया है।<br />
शिमला से करीब 110 किलोमीटर दूर 40 किलोमीटर का कच्चा रास्ता तय कर ननखड़ी उप तहसील के दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी में मासूम अनीतू उर्फ़ नूनी का हाल जानने उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, महासचिव यशवंत राय और तरुण शारदा पहुंचे तो हैरान रह गए। नूनी जुर्ग नाना राम सिंह और नानी केम्पू देवी के साथ रहती है।  </p>
<p>नाना रामसिंह ने बताया कि अनीतू का नाम पंचायत के परिवार रजिस्टर में भी दर्ज नहीं है। उसके पिता के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम और माँ ने कहीं और घर बसा लिया। गांव के लोग कहते हैं कि उसे पोलियो है पर गरीबी, अज्ञानता और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण उसे कभी किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया गया। उसे एक नहीं, कई विक्लांगताएं हैं। अनीतू पहाड़ी बोली समझती तो है पर बोलने में असमर्थ है। आखों में विकृति है और मुंह से हर समय लार निकालती रहती है। </p>
<h3>विडियो </h3>
<p><iframe loading="lazy" width="691" height="346" src="https://www.youtube.com/embed/ex9Ty_Yxt1U" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>रामसिंह ने यह भी बताया की अनीतू हर बात को बहुत ध्यान से समझती है और याद रखती है जब कभी उसकी माँ उसे मिलने आती है तब वह अपनी माँ को सारी बातें बताती है। अनीतू की बुजुर्ग नानी केम्पू देवी बताती हैं कि उनकी दोती को खाने में चपाती पसन्द है और वो  चावल नहीं खाती  वह अपनी माँ को भी याद करती है।</p>
<p>अनीतू की हालात पर उसके नाना रामसिंह ने कहा कि वे अब उसकी संभाल नहीं सकते। अजय श्रीवास्तव और हिमाचल वॉचर से बात करते हुए  अनीतू की नानी केम्पू देवी और नाना रामसिंह ने कहा कि  वे चाहते हैं कि अनीतू को किसी आश्रम या उस जगह में भेज दिया जाये जहाँ उसका ध्यान रखा जाये। अपनी पोती के प्रति उन्होंने अपनी नम आँखों से चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद उस मासूम का दायित्व कौन संभालेगा।  </p>
<p>उमंग फाउंडेशन के चेयरमैन ने सामजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सचिव को पत्र लिखकर अनीतू की व्यथा बताई है और माँग की है कि 15 दिसंबर से पहले उसे गाँव से निकालकर उसकी डाक्टरी जांच कराई जाए और किसी नारी सेवासदन में रखा जाए। 15 दिसंबर के बाद कभी भी बर्फ पड़ सकती है और रास्ते बंद हो जाएंगे। उन्होंने संवेदनशील एडवोकेट बलवंत ठाकुर कास धन्यवाद किया जो यह मामला उनके ध्यान में लाये।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/05/story-of-a-disabled-himachal-village-girl-seeking-shelter/">हिमाचल के दुर्गम गाँव में 25 वर्ष से मानसिक और शारीरिक अपंगता से जूझ रही मासूम की सरकार से एक आशियाने की फरियाद</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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