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	<title>किन्नौर Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>किन्नौर Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>उपचुनाव: देश के प्रथम मतदाता श्याम सरण नेगी के स्वागत के लिए बिछाया गया रेड कारपेट</title>
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		<pubDate>Sat, 30 Oct 2021 17:29:25 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-स्वतंत्र भारत के प्रथम मतदाता श्याम सरण नेगी ने मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव के लिए शनिवार को मतदान किया। 104 वर्षीय श्याम सरण नेगी हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले से संबंधित है। नेगी ने मतदान केंद्र कल्पा में शनिवार दोपहर को मतदान किया। इस दौरान उनकी पौत्री मनीषा और पौत्र आकाश भी उनके साथ थे। जिला किन्नौर प्रशासन द्वारा नेगी के स्वागत के लिए विशेष रूप से रेड कारपेट बिछाया गया था। वहीं, पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ उनका स्वागत किया गया। उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने नेगी को टोपी एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।</p>
<p>जिला प्रशासन द्वारा मास्टर श्याम सरण नेगी को मतदान केंद्र तक लाने व घर छोड़ने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। नेगी ने बताया कि उन्होंने सभी चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।</p>
<p>फरवरी 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था, लेकिन किन्नौर में भारी बर्फबारी के कारण पांच महीने पहले सितंबर 1951 में ही चुनाव हो गए थे। उस समय श्याम सरण नेगी किन्नौर के मूरंग स्कूल में अध्यापक थे और चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। उन्होंने सुबह वोट देकर ड्यूटी पर जाने की इजाजत मांगी। वह सुबह-सुबह मतदान स्थल पर पहुंच गए और जल्दी मतदान करवाने का निवेदन किया। मतदान पार्टी ने रजिस्टर खोलकर उन्हें पर्ची दी तथा मतदान करते ही इतिहास बन गया और मास्टर श्याम सरण नेगी आजाद भारत के पहले मतदाता बन गए।</p>
<h3>नेगी का जीवन परिचय</h3>
<p>श्याम सरण नेगी का जन्म जुलाई 1917 को किन्नौर जिले के कल्पा में हुआ है। वह 10 साल की उम्र में स्कूल गए, इनकी पांचवीं तक की पढ़ाई कल्पा में हुई। इसके बाद वह पढ़ाई करने के लिए रामपुर गए। उस समय सुविधा का अभाव होने के कारण रामपुर जाने के लिए पैदल तीन दिन लगते थे। उन्होंने नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई रामपुर में ही की। इसके बाद उम्र ज्यादा होने के कारण इनको दसवीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिला। नेगी ने 1940 से 1946 तक वन विभाग में वन गार्ड की नौकरी की। उसके बाद शिक्षा विभाग में चले गए और कल्पा लोअर मिडल स्कूल में अध्यापक बने।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>किन्नौर का अस्तित्व बचाने के लिए एकजुट हुए हज़ारों लोग, जिले में जल विद्युत परियोजनाओं को रद्द करने लिए उठी आवाज़</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/kinnaur-voices-rise-against-hydropwer-projects/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Aug 2021 15:03:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर- प्रदेश के किन्नौर जिले में विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में व किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए किन्नौर के लोग एकत्रित हो गए हैं। गुरुवार को जनजातीय जिला किन्नौर के जिला मुख्यालय रिकांग पिओ में  हजारों जनजातिओं ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आह्वान रैली व जन सभा कर अपनी एकजुटता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर- </strong>प्रदेश के किन्नौर जिले में विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में व किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए किन्नौर के लोग एकत्रित हो गए हैं। गुरुवार को जनजातीय जिला किन्नौर के जिला मुख्यालय रिकांग पिओ में  हजारों जनजातिओं ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आह्वान रैली व जन सभा कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। जिले के युवाओं द्वारा चलाये जा रहे लोकप्रिय “नो मीन्स नो” अभियान व हाल में बटसेरी व निगुलसेरी में हुये भू-स्खलन समूचे किन्नौर को एकजुट करने के मुख्य कारण रहे हैं।</p>
<p>जन सभा के दौरान किन्नौर जिला में सतलुज नदी में सभी प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं को निरस्त करने की मांग जोरों से उठाई गयी। 804 मेगावाट जंगी ठोपन परियोजना के विरोध में बात रखते हुये जंगी संघर्ष समिति के रोशन लाल नेगी ने कहा की ‘प्रशासन, सरकार और वैज्ञानिकों के साथ बहुत बात चीत हो चुकी है। वैज्ञानिक इन आपदाओं को लगातार कुदरती बताते हुये जल विद्युत परियोजनाओं को क्लीन चिट देते आए हैं। परंतु जंगी ठोपन परियोजना का क्षेत्र खदूरा भूस्खलन का बड़ा ज़ोन है और ऐसे में किसी प्रकार कि छेड़ छाड़ करना इलाके और यहाँ के निवासियों के लिए घातक साबित हो सकता है।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13295" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg" alt="kinnaur hydropower project protest" width="1000" height="655" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest-300x197.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest-768x503.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>हंगरंग संघर्ष समिति के सदस्य शांता कुमार नेगी ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं का विरोध करने पर राष्ट्र विरोधी जैसे लेबल स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर लगा कर कंपनी और प्रशासन मिल कर जनता को डराना और तोड़ना चाहते हैं।</p>
<p>पूंजीवादी मुनाफाखोर विकास कि अंधी दौड़ में न केवल पर्यावरण का विनाश हुआ बल्कि देश के अंदर असमानताएँ भी बढ़ीं हैं। इस मॉडल में कंपनियों का दबदबा चलता है और राजनैतिक पार्टियां इनके लिए बिचौलिये का काम करती हैं।</p>
<p>“हमारे संसाधनों का बड़े पैमाने पर निजीकरण हो रहा है और इससे मुट्ठी भर कंपनियों का विकास हो रहा है और आम जनता को अपनी आजीविकाओं से हाथ धोना पड़ रहा है।&#8221;</p>
<p>हिमधरा पर्यावरण समूह कि मांशी आशर ने कहा कि हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह ने सम्पूर्ण हिमालय क्षेत्र में विनाशकारी विकास के मॉडल पर सवाल उठाते हुये कहा कि अगर आज सत्ता में बैठी सरकार ने किन्नौर में बांधों पर रोक नहीं लगाई तो इतिहास में उन्हें कातिल माना जाएगा ।</p>
<p>हिमाचल के जन जातीय क्षेत्रों में वन अधिकार कानून 2006 और नौतोड़ को लागू करने में सरकार के निराशाजनक रवैये पर भी मंच पर सभी वक्ताओं ने बात रखी। ज़िला वन अधिकार समिति के अध्यक्ष जिया लाल नेगी ने प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना दागते हुये कहा कि उनको कानून के प्रावधानों और मूल्यों के बारे में कोई समझ नहीं है। <span lang="HI">जल जंगल जमीन पर कानूनी अधिकार दोनों पेसा और वन अधिकार कानून देते हैं और इनको लागू करने की मांग पिछले कई  वर्षों से हिमाचल के जन जातीय क्षेत्र के लोग उठा रहे हैं। “किन्नौर का संघर्ष पूरे जन जातीय क्षेत्र का आंदोलन है और लाहौल और स्पीति के लोग अपना पूरा समर्थन करते हुये इस आंदोलन को बाकी जन जातीय जिलों में भी आगे ले जाएंगे</span>’,<span lang="HI"> स्पीति सिविल सोसाइटी के ताकपा तेंजिन और सोनम तारगे ने कहा।</span></p>
<p>जंगी क्षेत्र की निवासी और ज़िला परिषद सदस्य प्रिया ने कहा कि किन्नौर का यह आंदोलन पार्टीबाजी से ऊपर उठ कर किन्नौर के अस्तित्व के लिए लड़ा जाएगा। खदरा गाँव और रारंग संघर्ष समिति के सुंदर नेगी ने मंच से आह्वान किया कि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं माने तो आने वाले चुनावों में इसका परिणाम किन्नौर कि जनता दिखा देगी। जनजातीय जिला होने के बावजूद जनजातीय कानूनों को ताख पर रख कर गैर जनजातीय व्यक्ति को जनजातीय संपत्ति का हस्तांतरण का मुद्दा भी खासा गरम और स्थानीय लोगों में रोष देखने को मिला। जन सभा के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रेषित किया गया।</p>
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		<title>निगुलसरी बचाव अभियान : सातवें दिन तीन और शवों को निकाला गया, मृतकों की संख्यां 28 पहुंची</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Aug 2021 16:08:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर&#8211; किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने से हुए हादसे के बाद बचाव अभियान के सातवें दिन मंगलवार को तीन और लोगों के शवों को निकाल लिया गया है। निकाले गए शवों की पहचान बलराम कुमार पुत्र सुरेश कुमार निवासी दहलान जिला ऊना और सूर्यवंश पुत्र बागजीत निवासी गांव ननसपो [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर</strong>&#8211; किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने से हुए हादसे के बाद बचाव अभियान के सातवें दिन मंगलवार को तीन और लोगों के शवों को निकाल लिया गया है। निकाले गए शवों की पहचान बलराम कुमार पुत्र सुरेश कुमार निवासी दहलान जिला ऊना और सूर्यवंश पुत्र बागजीत निवासी गांव ननसपो पीओ तरंडा तहसील निचार किन्नौर के रूप में हुई है। तीसरे शव की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।</p>
<p>यह तीनों शव बचाव दल को घटनास्थल से करीब 150 मीटर नीचे ढांक में मिले। इस हादसे के मृतकों की संख्या 28 पहुंच गई है। प्रशासन की ओर से जारी लापता लोगों की सूची के हिसाब से अब सभी शवों को निकाल लिया गया है। हालांकि, प्रशासन ने कहा है की सर्च ऑपरेशन अभी दो दिन तक जारी रहेगा।</p>
<p>बता दें कि बीते 11 अगस्त को भावानगर से 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे -5 पर निगुलसरी के पास यात्रियों से भरी एचआरटीसी बस,  टिपर, दो कारों सहित अखबार की गाड़ी पर चट्टानें गिर गई थी। जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बस यात्रियों समेत अन्य लोग मलबे में दब गए थे। बहरहाल, घटनास्थल पर पहाड़ी से पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>किन्नौर: पहाड़ी से भारी चट्टानें गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा, 9 लोगों की मौत, तीन लोग घायल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/07/25/massive-landslide-in-kinnour-district/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jul 2021 16:24:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर-  रविवार को प्रदेश के किन्नौर जिले के बटसेरी के गुंसा के पास सांगला-छितकुल मार्ग पर भूस्खलन होने के कारण पहाड़ी से पत्थर गिरने से कई वाहन इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में पर्यटकों से भरी ट्रैवलर गाड़ी पर भारी पत्थर गिरने से उसमें सवार नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर- </strong> रविवार को प्रदेश के किन्नौर जिले के बटसेरी के गुंसा के पास सांगला-छितकुल मार्ग पर भूस्खलन होने के कारण पहाड़ी से पत्थर गिरने से कई वाहन इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में पर्यटकों से भरी ट्रैवलर गाड़ी पर भारी पत्थर गिरने से उसमें सवार नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तीन लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं। घायलों को सीएचसी सांगला रेफर किया गया है। हादसा इतना भयानक था कि वाहन को चट्टानों ने हवा में ही उड़ा दिया और वाहन बास्पा नदी के किनारे दूसरी सड़क पर जा गिरा।</p>
<p><iframe title="Kinnaur: Massive Landslide Caught on Camera, Kills 9, Injures 3" width="740" height="416" src="https://www.youtube.com/embed/4k1liXjW3DY?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>बताया जा रहा है कि गाड़ी में सवार पर्यटक दिल्ली,राजस्थान,छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र के थे जो हिमाचल में प्रदेश घूमने आए थे। सभी पर्यटक दिल्ली से ट्रैवल एजेंसी के वाहन में किन्नौर घूमने आए थे। इस भरी भरकम भूस्खलन के कारण बस्पा नदी पर बना 120 मीटर लम्बा पुल भी टूट गया है।</p>
<p>हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। किन्नौर जिले के डीसी आबिद हुसैन सादिकऔर एसपी एस.आर राणा मौके पर मौजूद रहे। यह हादसा उसी जगह हुआ जहां एक दिन पहले शनिवार को पहाड़ी से पत्थर गिरने से पर्यटकों की कार चकनाचूर हो गई थी तथा लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई थी। प्रशासन ने पत्थर हटवाकर मार्ग बहाल कर दिया और दूसरे दिन ही दोपहर को यह हादसा हो गया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">किन्नौर के बटसेरी में पहाड़ी दरकने से हुए हादसे में पर्यटकों के एक वाहन में 9 की मृत्यु व 2 घायल तथा 1 अन्य राहगीर के घायल होने की सूचना दुःखद है। <a href="https://t.co/MbbVBmSHAY">pic.twitter.com/MbbVBmSHAY</a></p>
<p>&mdash; CMO HIMACHAL (@CMOFFICEHP) <a href="https://twitter.com/CMOFFICEHP/status/1419255595840860167?ref_src=twsrc%5Etfw">July 25, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p class=""><strong>मृतकों की सूची</strong></p>
<p class="">1-अनुराग बियानी (31) सिकर,राजस्थान</p>
<p class="">2-माया देवी बियानी (55) सिकर,राजस्थान</p>
<p class="">3-ऋचा बियानी (25) शिकार,राजस्थान</p>
<p class="">4- दीपा शर्मा (34) जयपुर</p>
<p class="">5 -सतीश (34) छत्तीसगढ़</p>
<p class="">6 -अमोघ बापट (27) कोरबा ड्ररी, छत्तीसगढ़</p>
<p class="">7 -प्रतीक्षा सुनील पाटिल (27)सद्भावना नगर,नागपुर,महाराष्ट्र</p>
<p class="">8 -उमराव सिंह- वाहन चालक (42) दिल्ली</p>
<p class="">9 &#8211; कुमार उल्लास वेदपाठक (37 )</p>
<p class=""><strong>घायल लोगों की सूची </strong></p>
<p class="">1- श्रीरील ओबराय (39) वेस्ट दिल्ली</p>
<p class="">2- नवीन भारद्वाज (37) खरल पंजाब</p>
<p class="">3- रणजीत सिंह (45) बटसेरी सांगला (किन्नौर)</p>
<div class="jsx-3665801037 fakeYtPlayer-GTN1SGOzxyg"></div>
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		<title>अपने ही वायदे से पलटे किनौर के विधायक,  प्रभावित परिवारों को 6 करोड़ मुआवजा देने की थी घोषणा पर अब थमा दिए सिर्फ 2 करोड़ 66 लाख : नेगी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/compensation-to-families-affected-by-tashang-hydro-project/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Dec 2016 13:58:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[कड़छम-वांगतू मैगावाट परियोजना]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर किन्नौर विधायक जगत सिंह नेगी]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर- किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी ने किन्नौर के विधायक एवं विधान सभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी को आड़े हाथों लेते हुए काशंग परियोजना के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को निर्माण कम्पनी द्वारा 2 करोड़ 66 लाख रू0 मुआवजा देने की घोषणा को हास्यास्पद व दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। नेगी ने कहा कि चार वर्ष [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/compensation-to-families-affected-by-tashang-hydro-project/">अपने ही वायदे से पलटे किनौर के विधायक,  प्रभावित परिवारों को 6 करोड़ मुआवजा देने की थी घोषणा पर अब थमा दिए सिर्फ 2 करोड़ 66 लाख : नेगी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर-</strong>  किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी ने किन्नौर के विधायक एवं विधान सभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी को आड़े हाथों लेते हुए काशंग परियोजना के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को निर्माण कम्पनी द्वारा 2 करोड़ 66 लाख रू0 मुआवजा देने की घोषणा को हास्यास्पद व दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। </p>
<p>नेगी ने कहा कि चार वर्ष बीतने के पश्चात भी स्थानीय विधायक ने जिला किन्नौर के लोगों को गुमराह करने के अलावा कुछ नहीं किया। जगत सिंह नेगी ने पांगी गांव को पहले 6 करोड़ रू0 देने की घोषणा की थी और आज वह अपने वायदे से मुकर गए और 2 करोड़ 66 लाख रू0 देने में भी असफल हुए हैं। इस तरह 2012 विधान सभा चुनावों के दौरान पग्रामडं के पंचायत चगांव, ऊरनी, मीरू व यूला गांव को 68 करोड़ मुआवजा राशि देने की बात कही थी परन्तु बीते चार वर्षों में एक रूपया राशि देने में भी स्थानीय विधायक विफल हुए हैं। प्रदुषण की जो राशि जारी हुई है वह पूर्व भाजपा सरकार की देन है जिसकी स्वीकृति व आधी राशि में पूर्व भाजपा सरकार के समय ही बंट गई थी। </p>
<p>पूर्व विधायक ने कहा कि इसी तरह कड़छम-वांगतू 1000 मैगावाट परियोजना के अंतर्गत आने वाली पंचायतों जिसमें काफनू, यांगपा, कटगांव, पानवी, रामणी, पूनंग, किल्बा, सापनी, ब्रुआ, शौंग, चासू, कामरू व रोगी पंचायत को 75 हजार रू0 की राशि हर परिवार को देने के चुनावी वायदे को भी इन चार वर्षों में पूरा नहीं कर पाये और इन चार वर्षों में स्थानीय विधायक किन्नौर में चल रही पन विद्युत परियोजनाओं से लाडा के अंर्तगत जो पैसा मिलना है उस पैसे को लेने में भी पूरी तरह असफल साबित हुए हैं जिसके कारण प्रभावित पंचायतों के विकास कार्य भी पूरी तरह ठप्प पड़े हैं। </p>
<p>स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए  नेगी नेगी ने कहा कि स्थानीय विधायक पटेल कम्पनी के साथ पूरी तरह मिले हुए हैं और अपने भाई के अवैध तरीके से खनन कार्य को बढ़ावा देने तथा भाई-भतीजावाद तथा ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं। एक ओर तो किन्नौर के सभी नदी किनारे खनन जो पंचायत एवं स्थानीय लोगों का अधिकार है उस पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और पंचायतों में मनरेगा के काम प्रभावित हुए हैं साथ स्थानीय लोगों के मकान कार्य भी प्रभावित हुए है। एक ओर जहां आम आदमी को रेत, बजरी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रिकांगपिओं के बाजार में लैंटर पर लैंटर डाल रहे हैं।</p>
<p>किन्नौर के पूर्व विधायक  नेगी ने कहा कि शोंगठंग-कड़छम 412 मैगावाट परियोजना निर्माण क्षेत्र की प्रभावित पंचायतों जिसमें पुआरी, बारंग, मेवर व शुदारंग शामिल है, को भी 500 दिन के रोजगार की मुआवजा राशि देन में स्थानीय विधायक पूर्णतः विफल हुए हैं। श्रम कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और परियोजना निर्माण से प्रभावित परिवारों के लोगों को रोजगार भी नहीं दिया जा रहा है। </p>
<p>उन्होनें यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक लाडा के चेयरमैन होने के नाते कम्पनी प्रबन्धनो से लाडा के अंतर्गत जो डेढ़ प्रतिशत जो राशि मिलनी थी उसको लेने में भी असफल हुए हैं। जिसकी वजह से जिला किन्नौर का विकास पूरी तरह ठप्प हो गया है। कोई भी नई योजना लाने में विधायक असफल हुए हैं। केवल पूर्व भाजपा सरकार के समय में स्वीकृत योजनाओं का शिलान्यास व उदघाटन करने के सिवा उन्होनें कोई अन्य नहीं कार्य नहीं किया। </p>
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		<title>पर्यावरण में बदलाव के कारण किन्नौर के जंगलों में लगी भीषण आग, करोड़ों की अमूल्य वन सम्पदा राख</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/15/kinnaur-forest-fires-due-to-climate-change/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Dec 2016 06:11:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश अग्निशमन विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर &#8211; पर्यावरण में बदलाव आने के कारण प्रदेश का सबसे सर्द और दुर्गम जनजातीय क्षेत्र किन्नौर के जंगलो में पिछले एक महीने से भयानक आग लगी हुई है जिस कारण पुरे ज़िले के जंगल आग की चपेट में आ गए हैं। आग लगने के कारण सबसे अधिक नुक्सान चिलगोजा के दुर्लभ पेड़ों को हुआ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर &#8211;</strong> पर्यावरण में बदलाव आने के कारण प्रदेश का सबसे सर्द और दुर्गम जनजातीय क्षेत्र किन्नौर के जंगलो में पिछले एक महीने से भयानक आग लगी हुई है जिस कारण पुरे ज़िले के जंगल आग की चपेट में आ गए हैं। आग लगने के कारण सबसे अधिक नुक्सान चिलगोजा के दुर्लभ पेड़ों को हुआ है। चिलगोजा के जिस ये पेड़ भारत में केवल किन्नौर में पाए जाते हैं जबकि एशिया में इनका दूसरा ठिकाना अफगानिस्तान में है। आग से देवदार, चिलगोजा और चीड़ के हजारों पेड़ जलकर खाक हो चुके हैं तथा करोड़ों की अमूल्य वन सम्पदा आग में राख हो गयी है। हालांकि आग पर काबू पाने के लिए अग्निशामन विभाग के कर्मचारी सहित स्थानीय लोग जुटे हुए हैं लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।</p>
<div id="attachment_9619" style="width: 810px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-9619" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur.jpg" alt="forest-fire-kinnaur" width="800" height="450" class="size-full wp-image-9619" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur-300x169.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur-768x432.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur-696x392.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/12/Forest-Fire-Kinnaur-747x420.jpg 747w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><p id="caption-attachment-9619" class="wp-caption-text">चित्र: किन्नौर पेज/फेसबुक<br /></p></div>
<p><strong>जिला में सूखे जैसे हालात, घरों के जलने का बढ़ा खतरा  </strong></p>
<p>किन्नौर में इस साल केवल सामान्य से कम मानसून के दौरान बारिश हुई है जिससे जिला में सूखे जैसे हालात हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक किन्नौर जिला में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से 60 फीसदी कम वर्षा हुई है। वहीं जंगलों में लगी इस भयंकर आग के कारण पूरे जिला में धुआं ही धुआं है। जंगलों में लगी आग से स्थानीय लोग भी खोफ के साये में हैं। लोगों को अब घरों के जलने का खतरा पैदा हो गया है। लोग सरकार से आग पर काबू पाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं निकाल पा रही है जिससे दिन प्रतिदिन आग भयानक रूप लेती जा रही है।    </p>
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		<item>
		<title>राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में किन्नौर की खिलाड़ी ने जीता सिल्वर मेडल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/28/himachali-boxer-bags-silver-in-national-women-boxing-championship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Nov 2016 13:25:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में किन्नौर की अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी शशि कला नेगी प्रदेश को सिल्वर मेडल दिलवाने में कामयाब रही। इस प्रतियोगिता में खेलने के लिए गई हिमाचल की नौ सदस्यीय टीम में से पांच खिलाड़ियों ने शुरुआती मुकाबलों में जीत दर्ज कर अच्छा आगाज किया, मगर वे क्वार्टर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में किन्नौर की अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी शशि कला नेगी प्रदेश को सिल्वर मेडल दिलवाने में कामयाब रही। इस प्रतियोगिता में खेलने के लिए गई हिमाचल की नौ सदस्यीय टीम में से पांच खिलाड़ियों ने शुरुआती मुकाबलों में जीत दर्ज कर अच्छा आगाज किया, मगर वे क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं जा पाई।</p>
<p>इस एक सिल्वर मेडल के साथ ही संतोष करना पड़ा। इतना जरूर है कि प्रदेश की यह होनहार बॉक्सर एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की टीम में शामिल किए जाने के लिए पहला पड़ाव पार कर चुकी है। शशि कला का राष्ट्रीय स्तर के कैंप में चुना जाना तय है।</p>
<p>शशि कला इससे पूर्व भी दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। हरिद्वार में आयोजित की गई इस राष्ट्रीय महिला बाक्सिंग प्रतियोगिता में पांच खिलाड़ियों जमुना 51 किलोग्राम, दया 60 किलोग्राम भार वर्ग में और रेखा 75 किलोग्राम में, किरण वर्मा ने 57 और प्रतिभा ने 81 किलोग्राम भार वर्ग में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफलता हासिल की।</p>
<p>जबकि दो अन्य खिलाड़ी पल्लवी ने 48 किलोग्राम भार वर्ग में जबकि अंकिता ने 64 किलोग्राम में पहले राउंड में जीत कर दूसरे राउंड में प्रवेश किया। जहां वे जीत दर्ज कर आगे जाने में असफल रहीं। प्रदेश बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष राजेश भंडारी और सचिव सुरेंद्र शांडिल ने शशि कला और अन्य खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन पर बधाई दी।</p>
<p>उनका कहना है कि इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिमाचल की नौ सदस्यीय टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा है। शांडिल का कहना है कि राष्ट्रीय कैंप के लिए चयनित खिलाड़ियों के नामों की घोषणा जल्द होनी है। जिसमें मेडल विजेता शशि कला के अलावा इन पांच खिलाड़ियों में से भी किसी का चयन हो सकता है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना है मेरा लक्ष्य</strong></p>
<p>69 किलो भार वर्ग की हिमाचल की बॉक्सर शशि कला नेगी जीत से उत्साहित है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व वर्ल्ड स्तर की प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीतना है।</p>
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		<item>
		<title>2 हफ्ते से  धधक रहे किन्नौर के जंगल , चिलगोजा और दियार समेत करोड़ों की वन सम्पदा जल कर राख</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/21/kinnaur-forest-fire/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Nov 2016 15:25:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Fire]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Forest Fires]]></category>
		<category><![CDATA[Kinnaur Forest Fire]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किन्नौर- हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्र की 3 पंचायतों के जंगल 2 हफ्तों से धधक रहे हैं लेकिन सरकारी स्तर पर आग पर काबू पाने के कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नही हुए हैं। इस घटनाक्रम में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्षेत्र के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर-</strong>  हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्र की 3 पंचायतों के जंगल 2 हफ्तों से धधक रहे हैं  लेकिन सरकारी स्तर पर आग पर काबू पाने के कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नही हुए हैं। इस घटनाक्रम में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार विलुप्तप्राय: चिलगोजा और दियार के हजारों छोटे-बड़े पेड़ अब तक आग की भेंट चढ़ चुके हैं। करोड़ों की वन सम्पदा स्वाह हुई है। हालांकि आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ आईटीबीपी, होमगार्ड, वन और अग्निशमक विभाग ने भी प्रयास किए लेकिन आग अब भी बेकाबू है। </p>
<p>जैसा की आपको पता होगा की जंगलो में आग लगना कोई नई बात नही हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के जंगल भी बरसो से भयानक आग की चपेट में आ रहे है तथा  इन जगंलो में रह रहे स्थानीय लोग भी अपने  खेतो  में आग लगा देते है जो की भड़क कर जंगलो के भीतर  पहुँच जाती है।   आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश सरकार के पास जंगलो में लगने वाली आग पर काबू पाने  के लिए कोई पुख्ता इंतेज़ाम नहीं है! जंगलो में <a href="https://himachalwatcher.com/2016/06/04/himachal-wildfires-ruin-plantations-worth-rs-1-35-crore-affecting-11774-hectares-till-today/" target="_blank">आग लगने से वहां रह रहे पशु, पक्षियों, वन सम्पदा </a>को तो नुकसान पहुंचता  ही है बल्कि जान पर भी खतरा मंडराने लगता है। अगर पर्यावरण की दृष्टि से भी यह नुकसान दायक है।<br />
<a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/19/shimla-forest-fire-destroys-crores/" target="_blank">पढ़ें:शिमला के जंगल फिर भयानक आग की चपेट में, करोड़ों रुपये का नुकसान</a><br />
लोगों का कहना है कि 6 नवम्बर को पूर्वणी के जंगल में आग लगी जिसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी। लोगों ने वनरक्षक को मौके का मुआयना करने के लिए कहा लेकिन वनरक्षक ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया। 7 नवम्बर को तूफान के करण आग ने जंगल के बड़े हिस्से को घेर लिया और धीरे-धीरे आग बेकाबू होती गई। वन विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास न किए जाने का भी लोग आरोप लगा रहे हैं।<br />
 लोगों का यह भी कहना है कि हजारों पेड़-पौधे इस क्षेत्र में जल गए लेकिन वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में अब तक नहीं पहुंचे हैं। </p>
<p>बताया जा रहा है कि आग पूर्वणी, आशपा, किब्बर से होते हुए रिब्बा के जंगलों तक पहुंची। उसके बाद उसने जिला मुख्यालय के ठीक सामने पोवारी के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया। 2 दर्जन से अधिक आईटीबीपी के जवान व होमगार्ड के जवान भी आग बुझाने में लगे रहे  लेकिन वन विभाग अपने आधा दर्जन  कर्मी भी इस आगजनी को काबू पाने के लिए नही भेज पाया है।  रिब्बा, पूर्वणी और पोवारी के लोग भी यथासम्भव आग बुझाने जा रहे हैं। जंगल में पानी की उपलब्धता न होने और आधुनिक उपकरण न होने से सभी प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।  </p>
<p>र्वणी पंचायत के प्रधान शेर सिंह और उपप्रधान महेश ने बताया कि 6 नवम्बर से जंगल में आग लगी है। आग को बुझाने के लिए ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आईटीबीपी, होमगार्ड और वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मी भी इस प्रयास में जुटे हैं लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया है। वहीं इस बारे वन अरण्यपाल रामपुर अनिल ठाकुर ने बताया कि आग को बुझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन विकट क्षेत्र होने के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/21/kinnaur-forest-fire/">2 हफ्ते से  धधक रहे किन्नौर के जंगल , चिलगोजा और दियार समेत करोड़ों की वन सम्पदा जल कर राख</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शौंगटोंग परियोजना में निजी कंपनी के कर्मचारियों पर पत्थरों से हमला, 10 से ज्यादा कर्मचारी घायल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/16/attack-on-shongtong-project-employees-10-injured/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Jul 2016 10:29:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Citu]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Police]]></category>
		<category><![CDATA[kinnaur]]></category>
		<category><![CDATA[Kinnuar hydro project]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla IGMC]]></category>
		<category><![CDATA[Shongtong Hydro project]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल के जिला किन्‍नौर में कड़छम शौंगटोंग परियोजना में लगे निजी कंपनी के कर्मचारियों पर देर रात हमला हो गया। घटना में कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इन्हें रामपुर और शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार शौंगटोंग प्रोजेक्ट में लगे पटेल कंपनी के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल के जिला किन्‍नौर में कड़छम शौंगटोंग परियोजना में लगे निजी कंपनी के कर्मचारियों पर देर रात हमला हो गया। घटना में कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इन्हें रामपुर और शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।</p>
<p>प्रारंभिक सूचना के अनुसार शौंगटोंग प्रोजेक्ट में लगे पटेल कंपनी के ये कर्मचारी बस में सवार होकर शिफ्ट पर जा रहे थे। देर रात करीब आठ बजे के बाद कुछ अज्ञात लोगों ने इनकी बस रोक दी और पथराव शुरू कर दिया।</p>
<p>इसके बाद जैसे ही कर्मचारी बस से बाहर निकले कि हमलावरों ने डंडों के साथ इनकी पिटाई शुरू कर दी। कुछ कर्मचारियों ने यहां से भाग कर अपनी जान बचाई। बेरहमी से पीटने के बाद आरोपी फरार हो गए।</p>
<p><strong>शिमला रैफर किए गए कई घायल</strong></p>
<p>हमले की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। घायलों को किन्‍नौर और रामपुर के अस्पतालों में भर्ती किया गया है। करीब 10 से ज्यादा कर्मचारी घायल हैं। कुछेक कर्मचारियों को गंभीर हालत में शिमला के आईजीएमसी अस्पताल रैफर किया गया है।</p>
<p>हमलावर कौन थे और किस कारण कर्मचारियों को निशाना बनाया गया, अभी इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, कर्मचारियों ने इस हमले के पीछे सीटू कार्यकर्ताओं का हाथ होने का भी अंदेशा जताया है। लेकिन केस में अभी किसी को नामजद नहीं किया गया है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>किन्नौर के उरनी  में  नहीं टूट रही सतलुज में बनी झील, खतरा बढ़ने के बाद रेड अलर्ट जारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/23/lake-in-urni-in-kinnaur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jun 2016 14:49:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly Vice Speaker]]></category>
		<category><![CDATA[kinnaur]]></category>
		<category><![CDATA[Mohan Mehta]]></category>
		<category><![CDATA[sutlej River]]></category>
		<category><![CDATA[Urni Kinnaur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है शिमला- हिमाचल के किन्नौर के उरनी ढांक में भूस्खलन के कारण बनी झील से पानी निकालने का कार्य जान जोखिम में डालकर किया जा रहा है। प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल के किन्नौर के उरनी ढांक में भूस्खलन के कारण बनी झील से पानी निकालने का कार्य जान जोखिम में डालकर किया जा रहा है। प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है।</p>
<p>सतलुज का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। नदी पर बने पुल को बचाना एनएच प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के लिए बेहद कठिन हो गया है। ऊपरी पहाड़ी से भूस्खलन के कारण झील से पानी की निकासी बहुत कम हो गई है।</p>
<p>झील के पानी की निकासी के लिए कश्ती में जाकर ब्लास्टिंग की जा रही है। ब्लास्टिंग के तुरंत बाद भूस्खलन के कारण दोबारा मलबा इकट्ठा हो रहा है। इस कारण झील में बराबर खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>लगातार जारी है ब्लास्टिंग मगर नहीं हट रही झील </strong></p>
<p>मजदूर झील के किनारे किश्ती में जाकर बड़े पत्थरों को ड्रिल कर ब्लास्ट कर रहे हैं। इसमें ब्लास्टिंग करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग रहा है। विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी कार्य का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मौके पर पहुंचे।</p>
<p>झील में पानी इतना बढ़ गया है कि वहां बिना कश्ती के ब्लास्टिंग कार्य नहीं हो सकता। विस उपाध्यक्ष ने एनएच प्राधिकरण के अधिकारियों को एहतियात बरतने के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए।</p>
<p>नेशनल हाईवे के कनिष्ठ अभियंता मोहन मेहता ने कहा कि चोलिंग की ओर लगे बैली ब्रिज को दो मीटर ऊंचा उठाने का कार्य तेजी से चल रहा है।  एसडीएम सुरेंद्र मोहन ने लोगों से बरसात का मौसम खत्म होने तक सतलुज किनारे न जाने का आह्वान किया है।</p>
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