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	<title>Vijender Mehra Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Vijender Mehra Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों और आंगनबाड़ी,मिड डे मील,आशा सहित लगभग 70 सामाजिक स्कीमों को खत्म करने की रच रही साज़िश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/28/ninth-conference-of-citu-concluded-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jul 2019 12:55:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-सीटू का नौंवा शिमला जिला सम्मेलन कालीबाड़ी हॉल शिमला में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में आगामी तीन वर्षों के लिए 47 सदसीय जिला कमेटी का गठन किया गया। कुलदीप डोगरा को अध्यक्ष,विजेंद्र मेहरा,बिहारी सेवगी,हिमी देवी,किशोरी ढटवालिया,विनोद बिरसांटा,राजेश कुमार,नीलदत्त को उपाध्यक्ष,अजय दुलटा को महासचिव,बाबू राम,बालक राम,दलीप सिंह,वीरेंद्र लाल,राकेश कुमार को सचिव,रमाकांत मिश्रा को कोषाध्यक्ष व रामप्रकाश रामू [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>सीटू का नौंवा शिमला जिला सम्मेलन कालीबाड़ी हॉल शिमला में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में आगामी तीन वर्षों के लिए 47 सदसीय जिला कमेटी का गठन किया गया। </p>
<p>कुलदीप डोगरा को अध्यक्ष,विजेंद्र मेहरा,बिहारी सेवगी,हिमी देवी,किशोरी ढटवालिया,विनोद बिरसांटा,राजेश कुमार,नीलदत्त को उपाध्यक्ष,अजय दुलटा को महासचिव,बाबू राम,बालक राम,दलीप सिंह,वीरेंद्र लाल,राकेश कुमार को सचिव,रमाकांत मिश्रा को कोषाध्यक्ष व रामप्रकाश रामू को सहायक कोषाध्यक्ष चुना गया। नरेंद्र देष्टा,सुरेंद्र बिट्टू,रीता देवी,कौशल्या,हेमलता,प्रेम लाल,पोविंद्र,कृष्ण चन्द,दीप राम,संदीप,मदन,नोख राम,विद्या गाजटा,पिंगला गुप्ता,आशा,पुष्पा,हेत राम,पवन शर्मा,संसार खलासटा,सुनील मेहता,सेठ चन्द,रिंकू राम,महेश कुमार,साक्षी,डिम्पल,प्रेम सिंघानिया,मोहन लाल,लोकेंद्र व ललिता को कमेटी सदस्य चुना गया।</p>
<p>सम्मेलन को सीटू राज्याध्यक्ष जगत राम ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि मोदी-2 सरकार ने सत्ता में आते ही मजदूरों पर हमले तेज कर दिए हैं। मोदी सरकार ने घोषणा की है कि वह 44 श्रम कानूनों को खत्म करके केवल 4 श्रम संहिताओं को अमल में लाएगी। इस से मजदूरों के अधिकारों का दमन होगा व पूंजीपतियों को भारी फायदा होगा। </p>
<p>जगत राम ने कहा कि इसके अलावा मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में ईपीएफ की 15 प्रतिशत राशि को शेयर मार्केट के हवाले करके पूंजीपतियों को पहले ही भारी फायदा पहुंचाया गया है। इसी सरकार ने ईएसआई की 75 हज़ार करोड़ राशि को अम्बानी के हवाले कर दिया है। इस तरह मोदी के दोनों कार्यकालों में पूंजीपतियों को भारी फायदा पहुंचाया गया है। </p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/CITU-Shimla-Conference.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/CITU-Shimla-Conference.jpg" alt="CITU Shimla Conference" width="1000" height="515" class="alignnone size-full wp-image-12832" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/CITU-Shimla-Conference.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/CITU-Shimla-Conference-300x155.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/CITU-Shimla-Conference-768x396.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p> नवनिर्वाचित जिला महासचिव अजय दुलटा ने प्रतिनिधियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में होने के कारण आगामी समय मजदूरों के लिए चुनौतियों भरा है। मोदी सरकार आंगनबाड़ी,मिड डे मील,आशा सहित लगभग 70 सामाजिक स्कीमों को खत्म करने की साज़िश रच रही है। दुलटा ने कहा कि यह सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार इन कर्मियों को मजदूर का दर्जा देने से भी मुकर रही है। खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाकर इस सरकार ने देश भर में काम कर रहे 2 करोड़ रेहड़ी,फड़ी व तयबजारी पर भी हमला बोल दिया है। यह सरकार बीमा,बैंक,बीएसएनएल आदि सार्वजनिक उपक्रमों को खत्म करने पर तुली हुई है।</p>
<p>वनिर्वाचित जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा ने अपने सम्बोधन से दो दिवसीय सम्मेलन का समापन किया। उन्होंने सभी मजदूरों से आह्वान किया कि पूरे देश में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा 44 श्रम कानून को खत्म करके केवल 4 श्रम संहिताओं में बदलने के मजदूर विरोधी निर्णय के खिलाफ 2 अगस्त को देशभर में होने वाले आंदोलन में सभी मजदूर शिमला जिला के शिमला शहर,रामपुर व रोहड़ू में सैंकड़ों की तादाद में भाग लें। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि 30 जुलाई को शिमला जिला में ओवलोडिंग व ज़्यादा बसें चलाने की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शनों में मजदूर बढ़ चढ़कर भाग लेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि 3 अगस्त को होने वाले किसान प्रदर्शनों में भी सीटू के सदस्य भारी संख्या में भाग लेंगे। उन्होंने सभी मजदूरों से अपील की है कि वे 13 से 15 सितंबर को शिमला में होने वाले सीटू राज्य सम्मेलन को कामयाब बनाने के लिए गम्भीर प्रयास करें।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन, परन्तु ऑकलैंड स्कूल पर अनैतिक हथकंडे अपनाने का आरोप</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/22/pta-constituted-in-shimlas-tarahall-and-auckland-schools/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 14:37:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया है।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि ऑकलैंड स्कूल प्रबंधन ने पीटीए के गठन के दौरान कई अनैतिक हथकंडे अपनाए। पीटीए के गठन से पहले स्कूल प्रबंधन ने कई अभिभावकों को टेलीफोन करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए अनचाहा दबाव बनाया व उन्हें प्रबंधन के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। मंच ने कहा कि इस बात की पोल बॉयज स्कूल की कक्षा दो के चुनाव के दौरान खुल गयी जब एक उम्मीदवार ने अभिभावकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान साफ तौर पर बोला कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने खड़ा किया है इसलिए अभिभावक उन्हें वोट दें। इस पर विवाद हो गया व अभिभावकों ने उस उम्मीदवार के खिलाफ खुली बगावत करके दूसरे उम्मीदवार को भारी मतों से जिता दिया।</p>
<p>मंच ने कहा कि ऐसा ही एक उदाहरण कक्षा छः में आया जहां पर चुनाव रोस्टर को जानबूझ कर बदलकर महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस पर कक्षा छः की दोनों सेक्शनों के सभी अभिभावक खड़े हो गए व उन्होंने इसे फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि कक्षा छः से छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ही प्रतिनिधि होंगे। पूरी कक्षा ने बिना किसी चुनाव के ही विजेंद्र मेहरा को निर्विरोध चुन लिया जिसे बाद में अभिभावकों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को मानना पड़ा।</p>
<p>मंच ने आरोप लगाया कि यह चुनाव पूरी तरह धांधलियों से भरपूर रहा। चुनाव के बाद चुनी गई कार्यकारी कमेटी के चुनाव में स्कूल प्रबंधन के लगभग दस लोग घुस आए व उन्होंने चुनाव को जबरन पांच मिनट में ही निपटा दिया जिसमें उन्होंने पहले से ही प्रबंधन द्वारा फिक्स उनके कुछ चहेतों को अपनी योजना के तहत मुख्य जिम्मेवारी सौंप दी। मंच ने कहा कहा कि इस कमेटी के चुनाव में इन लोगों का जबरन घुसना व कमेटी सदस्यों पर अनचाहा दबाव बनाना व उन्हें प्रभावित करना गैर संवैधानिक है। कार्यकारी कमेटी के चुनाव का नामांकन भी नहीं करवाया गया व इसे केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया गया। बगैर किसी नामांकन व चुनाव के ही यह कमेटी गठित कर दी गयी।</p>
<p>अभिभावक मंच ने कहा कि ऑकलैंड स्कूल का पीटीए का चुनावी रोस्टर गैर संवैधानिक था। चुनाव की प्रक्रिया नर्सरी से शुरू न करवाकर जान बूझकर प्लस टू से शुरू करवाई गई। किसी भी रोस्टर में सामान्य श्रेणी से शुरुआत होकर आरक्षित श्रेणी तक जाती है परन्तु यहां पर जान बूझ कर इस रोस्टर को बदल दिया गया ताकि प्रबंधन के चहेते चुनाव में जीतें।</p>
<p>मंच ने निदेशक उच्चतर शिक्षा से मांग की है कि भविष्य में निजी स्कूलों में होने वाले पीटीए के गठन को और ज़्यादा पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार कानून 2009,हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 व नियम 2003 तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ का पूर्णतः पालन हो व ऑकलैंड स्कूल की तर्ज़ पर पीटीए गठन में धांधली न हो।</p>
<p>अभिभावक मंच ने कहा कि 153 साल पुराने ऑकलैंड स्कूल में आज पहली मर्तबा पीटीए का गठन हुआ। यह छात्र अभिभावक मंच की पहली जीत है व इस जैसे सभी निजी स्कूलों के गाल पर करारा तमाचा है। निजी स्कूलों की तानाशाही के दी दिन अब लद रहे हैं। मंच ने कहा है कि संघर्ष जारी है और अगला पड़ाव निजी स्कूलों में भारी फीसों व अन्य विषयों को संचालित करने के लिए विधेयक लाने का है जिसका प्रारूप उच्चतर शिक्षा निदेशक ने बना दिया है। सम्भवतः इस विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश हो जाएगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शिमला शहर के 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के मजदूरों के 70 लाख रुपये ईपीएफ खाते नहीं हुए जमा, मजदूरों का प्रदर्शन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/shimla-stp-workers-union-protest-over-epf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jul 2019 07:12:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
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		<category><![CDATA[EPF Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वर्करज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू ने शिमला शहर में संचालित किए जा रहे छः प्लांटों के 170 मजदूरों के लगभग 70 लाख रुपये की ईपीएफ राशि मजदूरों के खाते में जमा नहीं होने के खिलाफ ईपीएफओ रीजनल कमिश्नर कार्यालय कसुम्पटी के बाहर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद यूनियन का [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/shimla-stp-workers-union-protest-over-epf/">शिमला शहर के 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के मजदूरों के 70 लाख रुपये ईपीएफ खाते नहीं हुए जमा, मजदूरों का प्रदर्शन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वर्करज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू ने शिमला शहर में संचालित किए जा रहे छः प्लांटों के 170 मजदूरों के लगभग 70 लाख रुपये की ईपीएफ राशि मजदूरों के खाते में जमा नहीं होने के खिलाफ ईपीएफओ रीजनल कमिश्नर कार्यालय कसुम्पटी के बाहर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद यूनियन का प्रतिनिधिमंडल सीटू जिला महासचिव विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में क्षेत्रीय आयुक्त से मिला व दो मांग पत्र सौंपे।</p>
<p>सीटू जिला महासचिव विजेंद्र मेहरा,यूनियन अध्यक्ष दलीप कुमार व महासचिव मदन लाल ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि क्षेत्रीय आयुक्त ने भरोसा दिया है कि इन 170 मजदूरों का लगभग 70 लाख रुपये उनके खाते में 19 जुलाई से पहले जमा कर दिए जाएंगे व उन्हें न्याय प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर मजदूरों का पैसा 19 जुलाई से पहले उनके ईपीएफ खाते में जमा न किया गया तो आंदोलन तेज होगा। उन्होंने ईपीएफओ पर आरोप लगाया कि वह जान बूझ कर ठेकेदारों व मालिकों के प्रति नरम रहता है। इसी कारण वर्ष 2016 से लगातार तीन वर्षों से मजदूरों के लाखों रुपयों पर ठेकेदार व ईपीएफ विभाग कुंडली मार कर बैठे हैं। इस तरह कई वर्षों से मजदूरों का भारी शोषण हो रहा है।</p>
<p>यूनियन के प्रतिनिधिमंडल इस दौरान सात बार ईपीएफ अधिकारियों से मिल चुके हैं परन्तु इसके बावजूद भी मजदूरों के पैसे को उन्हें आबंटित नहीं किया गया है। यूनियन का आरोपी है कि इस से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि ईपीएफ अधिकारी ठेकेदारों व मालिकों से मिले हुए हैं व मजदूरों के अधिकारों को कुचल रहे हैं।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल में विजेंद्र मेहरा,रमाकांत मिश्रा,यूनियन अध्यक्ष दलीप,महासचिव मदन लाल,भारत भूषण,इंद्र,क्षितिज,केवल राम व अंकुश आदि शामिल रहे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/shimla-stp-workers-union-protest-over-epf/">शिमला शहर के 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के मजदूरों के 70 लाख रुपये ईपीएफ खाते नहीं हुए जमा, मजदूरों का प्रदर्शन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/22/make-inspection-report-of-himachals-private-schools-public-student-parent-forum/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 14:08:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education Directorate]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/22/make-inspection-report-of-himachals-private-schools-public-student-parent-forum/">किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा था। प्रदेश भर के निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन के 14 दिन का समय अब खत्म हो गया है। अधिसूचना के हिसाब से अब सभी निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा निदेशक के टेबल पर होनी चाहिए। इस अधिसूचना के तहत प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर स्थित निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन 9 व 10 अप्रैल को निर्धारित की गई थी। उच्चतर शिक्षा निदेशक की अधिसूचना में स्पष्ट था कि दो दिनों की इंस्पेक्शन के बाद 11 अप्रैल को जिला मुख्यालयों के स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को सौंप दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने शिक्षा निदेशक से पूछा है कि वे इन स्कूलों की रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं और रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने के पीछे उनपर आखिर किसके दबाव है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों के निजी स्कूलों के अलावा अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य भी अब खत्म हो गया है। जिला मुख्यालयों के इतर अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन की टाइम लिमिट भी 22 अप्रैल को खत्म हो गई है।</p>
<p>मंच ने कहा है कि शिक्षा विभाग अब जनता व अभिभावकों को स्पष्ट करे कि इंस्पेक्शन रिपोर्ट में निजी स्कूलों के संदर्भ में क्या आंकड़े व तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों की रिपोर्ट तुरन्त सार्वजनिक करें अन्यथा अभिभावकों का रोष उनको झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक केवल कागजी कार्यवाही व लीपापोती से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।</p>
<p>मंच ने कहा है किअभिभावकों को जमीनी स्तर पर निजी स्कूलों की लूट व मनमानी के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहिए। अगर शिक्षा विभाग ने इस पूरे मसले पर संतोषजनक कार्रवाई न की तो निश्चित तौर पर शिक्षा विभाग के खिलाफ अभिभावक और ज़्यादा मुखर होकर दोबारा से सड़कों पर उतर आएंगे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/22/make-inspection-report-of-himachals-private-schools-public-student-parent-forum/">किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>सालाना 1000 हज़ार 200 करोड़ के व्यापार में कमीशनखोरी के साथ 625 करोड़ शुद्ध मुनाफा कमा रहे हिमाचल के निजी स्कूल: अभिभावक मंच</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/21/private-education-a-1000-crores-business-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2019 13:55:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-छात्र अभिभावक मंच नें आज एक प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी कर कहा कि निजी स्कूल हिमाचल प्रदेश में सालाना 1000 हज़ार 200 करोड़ रुपये के व्यापार कर रहे हैं। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के नाम पर खुला व्यापार चल रहा है। प्रदेश में निजी स्कूलों में फीसों के नाम [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/21/private-education-a-1000-crores-business-in-himachal-pradesh/">सालाना 1000 हज़ार 200 करोड़ के व्यापार में कमीशनखोरी के साथ 625 करोड़ शुद्ध मुनाफा कमा रहे हिमाचल के निजी स्कूल: अभिभावक मंच</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-छात्र अभिभावक मंच नें आज एक प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी कर कहा कि निजी स्कूल हिमाचल प्रदेश में सालाना 1000 हज़ार 200 करोड़ रुपये के व्यापार कर रहे हैं।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के नाम पर खुला व्यापार चल रहा है। प्रदेश में निजी स्कूलों में फीसों के नाम पर व्यापार लगभग 1000 हज़ार 200 करोड़ रुपये का है जिसमें शुद्ध मुनाफा लगभग 525 करोड़ रुपये का है।</p>
<p>मेहरा ने कहा कि अभिभावकों पर हर वर्ष किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों के नाम पर भी अभिभावकों को बुरी तरह से ठगा जा रहा है। इन चीजों की बिक्री पर कम से कम 10 से लेकर 300 प्रतिशत तक की कमीशनखोरी है।</p>
<p>निजी स्कूलों में किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों में प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये अभिभावकों से किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों की कमीशन के रूप में वसूले जा रहे हैं। इस तरह फीसों के रूप में निजी स्कूलों द्वारा 525 पच्चीस करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी में कमीशनखोरी के 100 करोड़ जोड़ दिए जाएं तो प्रतिवर्ष शुद्ध मुनाफा 625 करोड़ रुपये हो जाता है। मंच का का कहना है कि इस तरह पूरा शिक्षा तंत्र एक बाजार में तब्दील हो गया है जिसे प्रदेश सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को संचालित करने के लिए निजी शिक्षण स्थान(नियामक आयोग) अधिनियम 2010 लागू किया गया लेकिन निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए कोई रेगुलेटरी कमीशन नहीं बनाया गया। अगर शिक्षा के इस बाजार पर रोक लगानी है ताकि शिक्षा अधिकार के बजाए विशेषाधिकार न बने तो फिर ठोस कानून ही इस शिक्षा माफिया पर नकेल लगा सकता है।</p>
<p>अभिभावकों कि मांग है कि इसलिए प्रदेश सरकार को अगले विधानसभा सत्र में हर हाल में निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए ठोस कानून पटल पर प्रस्तुत करना चाहिए ताकि शिक्षा के व्यापारीकरण पर रोक लग पाए।</p>
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		<title>हर वर्ष एडमिशन फीस का बोझ डाल गर्ल एजुकेशन की राह में बाधाएं उत्पन्न कर रहा शिमला का निजी स्कूल: अभिभावक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/19/chelsea-school-shimla-charging-annual-admission-fees-faces-protest-from-parents/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Apr 2019 12:15:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Chelsea school Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दसवीं में एनुअल फीस उन्नतीस हज़ार रुपये थी परन्तु जब उन्हीं छात्राओं ने प्लस वन में एडमिशन ली तो उनकी फीस में सीधा पच्चीस हजार रुपये का इज़ाफ़ा करके उनसे चौबन हज़ार रुपये वसूले गए&#124; शिमला&#8211;प्राइवेट स्कूलों में इन्स्पेक्शन्स के बावजूद शिकायतें सामने आ रही है जंहा से पता चल रहा है कि फीसों में [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दसवीं में एनुअल फीस उन्नतीस हज़ार रुपये थी परन्तु जब उन्हीं छात्राओं ने प्लस वन में एडमिशन ली तो उनकी फीस में सीधा पच्चीस हजार रुपये का इज़ाफ़ा करके उनसे चौबन हज़ार रुपये वसूले गए|</strong></p>
<p><strong>शिमला</strong>&#8211;<a href="http://hindi.himachalwatcher.com/tag/private-schools/">प्राइवेट स्कूलों में इन्स्पेक्शन्स</a> के बावजूद शिकायतें सामने आ रही है जंहा से पता चल रहा है कि फीसों में बढ़ोतरी जारी है। स्कूल अभी भी छात्रों से सालाना एडमिशन फीस वसूल रहे हैं ।छात्र-अभिभावक मंच ने चेलसी स्कूल में प्लस वन क्लास में दस हज़ार रुपये एडमिशन फीस वसूलने पर विरोध प्रकट किया है। मंच ने स्कूल की रसीद की एक फोटो मीडिया को दी है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike.jpg"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12607" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike.jpg" alt="chelsea school shimla annual fee hike" width="1000" height="650" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike-300x195.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike-768x499.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike-696x452.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/chelsea-school-shimla-annual-fee-hike-646x420.jpg 646w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>मंच ने तुरन्त इस फीस को कुल फीस में मर्ज करने की मांग की है और कहा है कि अन्यथा चेलसी स्कूल के बाहर अभिभावक मोर्चेबन्दी करेंगे।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि चेलसी स्कूल लगातार मनमानी व लूट करता रहा है। इस स्कूल की तानाशाही व मनमानी कुछ वर्ष पूर्व भी छात्राओं की मानसिक प्रताड़ना पर सवालों के घेरे में रही थी। कई राष्ट्रीय स्तर की मानवाधिकार संस्थाओं व बच्चों की संस्थाओं ने भी स्कूल की कार्यप्रणाली पर प्रश्रचिन्ह लगाया था। परन्तु यह स्कूल इसके बावजूद भी मनमानी करने से नहीं रुक रहा है व मनमानी जारी है।</p>
<p>अभिभावकों का कहना है कि इस स्कूल स्कूल से ही दसवीं करने के बाद जब छात्राओं ने जब प्लस वन में एडमिशन ली तो उनसे एडमिशन फीस के मद में दस हज़ार रुपये वसूले गए। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि यह स्कूल नर्सरी,पहली,छठी,नौंवी व ग्यारहवीं कक्षाओं में छात्राओं से एडमिशन फीस लेकर ही लगभग पचहत्तर लाख रुपये का डाका अभिभावकों की जेब पर डालता है।</p>
<p>अभिभावकों का कहना है कि पिछले दिनों शिक्षा विभाग द्वारा की गई इंस्पेक्शन में भी इन सब बातों पर पर्दा डाला गया है। दसवीं में इस स्कूल की एनुअल फीस उन्नतीस हज़ार रुपये थी परन्तु जब उन्हीं छात्राओं ने प्लस वन में एडमिशन ली तो उनकी फीस में सीधा पच्चीस हजार रुपये का इज़ाफ़ा करके उनसे चौबन हज़ार रुपये वसूले गए। संयोजक मेहरा ने कहा कि इस तरह दस हज़ार रुपये एडमिशन फीस की लूट के साथ ही एक वर्ष में पच्चीस हजार रुपये की सीधी लूट की गई। मेहरा ने आरोप लगाया है कि चेल्सी स्कूल ने पच्चीस हज़ार रुपये की फीस बढ़ोतरी करके अभिभावकों का आर्थिक व मानसिक शोषण किया है। छात्राएं लगातार नर्सरी से इसी स्कूल में पढ़ रही हैं परन्तु बार-बार उनसे एडमिशन फीस लेने का क्या तुक बनता है।</p>
<p>उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पूछा है कि इंस्पेक्शन की रिपोर्ट कब आएगी। क्या तब जब सारे अभिभावक ठगे जा चुके होंगे। अभिभावकों ने शक ज़ाहिर किये है कि कहीं इंस्पेक्शन प्रक्रिया व इंस्पेक्शन रिपोर्ट अभिभावकों से छलावा तो नहीं। उन्होंने पुछा है कि आखिर कब तक अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी,लूट व भारी फीसों के लिए बलि का बकरा बनते रहेंगे।</p>
<p>मंच का आरोप है कि शिक्षा विभाग क्यों जानबूझकर इंस्पेक्शन रिपोर्ट में देरी कर रहा है। मेहरा ने कहा कि चेलसी स्कूल सीबीएसई की 2005 की गाइडलाइनज़ की भी पालना नहीं कर रहा है जिसके अनुसार अगर किसी की दो ही बेटियां हैं व वे दोनों बेटियां एक ही स्कूल में पढ़ती हैं तो एक बेटी की फीस बिल्कुल माफ़ होनी चाहिए।</p>
<p>मंच का ये भी आरोप है कि इस स्कूल में केंद्र व प्रदेश सरकार की सिंगल गर्ल चाइल्ड पॉलिसी के तहत भी फीस में कोई छूट नहीं दी जा रही है। इस तरह गर्ल एजुकेशन को प्रोमोट करने के लिए यह स्कूल कोई कार्य नहीं कर रहा है। इसके विपरीत हर वर्ष एडमिशन फीस का बोझ बच्चियों पर डाल कर गर्ल एजुकेशन की राह में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/19/chelsea-school-shimla-charging-annual-admission-fees-faces-protest-from-parents/">हर वर्ष एडमिशन फीस का बोझ डाल गर्ल एजुकेशन की राह में बाधाएं उत्पन्न कर रहा शिमला का निजी स्कूल: अभिभावक</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ को नहीं मिल रहा न्यूनतम व अतिरिक्त कार्य का वेतन, ईपीएफ में भी गड़बड़ी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/17/igmc-contractual-workers-union-alleges-exploitation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Apr 2019 14:03:10 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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		<category><![CDATA[Vijender Mehra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन ने आईजीएमसी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला है। यूनियन ने आज एक बैठक कर प्रबंधन और ठेकेदारों पर कर्मचारियों को शोषित करने के आरोप लगाए हैं। यूनियन के महासचिव नोख राम ने कहा कि आईजीएमसी में सफाई कर्मचारियों का भारी शोषण किया जा रहा है। इन्हें चेंजिंग रूम व छुट्टियों की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/17/igmc-contractual-workers-union-alleges-exploitation/">आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ को नहीं मिल रहा न्यूनतम व अतिरिक्त कार्य का वेतन, ईपीएफ में भी गड़बड़ी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन ने आईजीएमसी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला है। यूनियन ने आज एक बैठक कर प्रबंधन और ठेकेदारों पर कर्मचारियों को शोषित करने के आरोप लगाए हैं। </p>
<p>यूनियन के महासचिव नोख राम ने कहा कि आईजीएमसी में सफाई कर्मचारियों का भारी शोषण किया जा रहा है। इन्हें चेंजिंग रूम व छुट्टियों की पूर्ण व्यवस्था नहीं की जा रही है। इनसे अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है परन्तु उसके बदले इन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। इनके ईपीएफ में भी गड़बड़ी है। इन्हें ईएसआई की सुविधा सही से लागू नहीं की जा रही है। डेंटल कॉलेज़ में इन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। इस तरह सफाई कर्मचारियों का शोषण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।</p>
<p>यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र लाल ने कहा कि यूनियन ने लगभग छः महीने पहले आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदारों को मांग पत्र सौंपा था मगर उस पर अभी तक कोई भी अमल नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड अटेंडेंटों को अकुशल श्रेणी में रख कर उन  का भारी शोषण किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि वार्ड अटेंडेंटों की श्रेणी अकुशल मजदूर के बजाए अति कुशल की जाए क्योंकि वे एक्सरे,ड्रेसिंग,प्लास्टर,ऑक्सीजन लगाने,पेशेंट शिफ्टिंग,किचन,कुकिंग,टेलीफोन एक्सचेंज,इमरजेंसी,स्टिचिंग आदि बेहद कुशल कार्य करते हैं।</p>
<p>बैठक में निर्णय लिया गया कि आईजीएमसी प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज होगा।</p>
<p>बैठक सीटू कार्यालय शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष वीरेन्द्र लाल ने की। बैठक में सीटू जिला महासचिव विजेंद्र मेहरा,राज्य कोषाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा,यूनियन महासचिव नोख राम,जगत,लेखराज,सोहन लाल,मोहन,विद्या गाजटा,सुरेन्द्रा,शालू,मीरा,सीता,मीना,सुरेंद्र गाजटा,प्रवीण आदि मौजूद रहे।</p>
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