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	<title>Sandeep kadam Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Sandeep kadam Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>बैंकों में पैसे नहीं, कैश खत्म होने पर खाली हाथ लौटे लोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2016 12:27:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मंडी- जिला मंडी के अधिकतर बैंकों में शुक्रवार को लोगों को पैसा नहीं मिल पाया। लोगों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा। 500 व 1000 के नोट बदलने, जमा करवाने व पैसा निकालने के लिए दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। लोग राहत मिलने की उम्मीद लेकर दूर-दूर से बैंक आए थे, लेकिन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंडी-</strong> जिला मंडी के अधिकतर बैंकों में शुक्रवार को लोगों को पैसा नहीं मिल पाया। लोगों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा। 500 व 1000 के नोट बदलने, जमा करवाने व पैसा निकालने के लिए दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। लोग राहत मिलने की उम्मीद लेकर दूर-दूर से बैंक आए थे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। </p>
<p>स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व पंजाब नेशनल बैंक को छोड़ अन्य किसी बैंक में दोपहर तक कैश उपलब्ध नहीं था। लोग पैसे बदलने व निकालने का फार्म भर हाथ में पकड़ कर इधर-उधर भटकते रहे। जिस बैंक में कैश होने की भनक लगी, उसकी तरफ लोगों के कदम बढ़ गए।</p>
<p>वीरवार के बजाय शुक्रवार को जिला के सभी बैंकों में ज्यादा भीड़ देखने को मिली। लोग इस उम्मीद के साथ शहर में पहुंचे थे कि यहां एटीएम की संख्या भी अधिक है और पैसे मिल जाएंगे। लेकिन दोपहर तक किसी भी बैंक का एटीएम नहीं चला। दोपहर बाद एक-दो बैंकों के एटीएम शुरू हुए तो वहां लोगों की कतारें लग गई। घंटों इंतजार के बाद कुछेक की बारी आई तो कैश खत्म होने पर कई लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।</p>
<p>शुक्रवार को मंडी शहर के लोगों को 2000 के नोट के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 2000 का नोट बैंक से 1000 की नकदी निकालने वालों दिए गए। पुराने नोट बदलने की एवज में 100-100 के नोट दिए गए। बाजारों में चहलपहल तो देखने को मिली, लेकिन कारोबार मंदा रहा। इससे व्यापारियों के चेहरे पर शिकन देखी गई। तीन दिन की छुट्टी पर परिवार सहित घूमने का कार्यक्रम बना चुके सरकारी कर्मचारियों को भी मायूसी का सामना करना पड़ा। पैसे न मिलने से घूमने के कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए।</p>
<p>उपायुक्त संदीप कदम का कहना है कि लोगों को कम से कम समस्या हो इसके लिए बैंक प्रबंधन को कारगर कदम उठाने को कहा गया है।</p>
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		<title>रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/cadets-falls-ill-at-ncc-camp-in-rewalser-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:49:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[Colonel Piyush Agarwal]]></category>
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		<category><![CDATA[Sandeep kadam]]></category>
		<category><![CDATA[SHO Sanjeev Sood]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और  स्कूल के पानी का सैंपल फेल  हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>  रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg" alt="NCC Battalion Mandi" width="800" height="535" class="alignnone size-full wp-image-6583" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-300x201.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-768x514.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-696x465.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/07/NCC-Battalion-Mandi-628x420.jpg 628w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।</p>
<p>फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया।  तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।</p>
<p><strong>26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट</strong></p>
<p>newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर</strong></p>
<p>एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई। </p>
<p><strong>रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल</strong></p>
<p>एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।</p>
<p>सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p>सवाल यह भी</p>
<p>रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।</p>
<p>मुहिम को झटका</p>
<p>रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।</p>
<p>Photo: TNS/Divya Himachal </p>
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		<title>मंडी बना हिमाचल का पहला खुला शौचमुक्त जिला, मंडी में बने 1,52,204 व्यक्तिगत शौचालय: प्रशाशन का दावा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/02/mandi-becomes-firsts-open-defecation-free-district-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Jul 2016 12:48:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[DC Mandi]]></category>
		<category><![CDATA[Lahaul]]></category>
		<category><![CDATA[Mandi]]></category>
		<category><![CDATA[Ministry of Rural Development]]></category>
		<category><![CDATA[Nirmal Bharat Abhiyan]]></category>
		<category><![CDATA[Open Defecation]]></category>
		<category><![CDATA[Sandeep kadam]]></category>
		<category><![CDATA[Spiti]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंडी जिला को खुला शौचमुक्त घोषित कर दिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक टीम ने गत माह जिला प्रशासन के दावों की सत्यतता जानने के लिए सभी 469 पंचायतों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद टीम ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। मंडी जिला [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंडी जिला को खुला शौचमुक्त घोषित कर दिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक टीम ने गत माह जिला प्रशासन के दावों की सत्यतता जानने के लिए सभी 469 पंचायतों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद टीम ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। </p>
<p>मंडी जिला के खुला शौचमुक्त होने के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने उपायुक्त संदीप कदम को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के समारोह के लिए बुलाया है। देश के चार राज्यों हिमाचल, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक व सिक्किम ने अपने 16 जिलों के खुला शौचमुक्त होने का दावा पेश किया था। पहले चरण में आठ जिले बाहर हो गए थे। इसमें हिमाचल का लाहौल स्पीति जिला भी शामिल था। दूसरे चरण में आठ जिलों का आकलन किया गया। इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र चौधरी पहले ही उपायुक्त संदीप कदम को दिल्ली में बुलाकर उनकी पीठ थपथपा चुके हैं।</p>
<p><strong>सरकार ने करवाया था निरीक्षण</strong></p>
<p>प्रदेश सरकार ने प्रशासन के इस दावे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर जिले की सभी 469 पंचायतों का 18 से 31 जनवरी तक निरीक्षण करवाया था। इसके बाद केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रेषित की थी।</p>
<p><strong>मंडी में बने 1,52,204 व्यक्तिगत शौचालय</strong></p>
<p>मंडी की 469 पंचायतों में 2,41,703 परिवार हैं। निर्मल भारत अभियान के प्रथम चरण में जिले में 1,52,204 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हुआ था। 2015 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने के बाद जिलेभर में 15249 शौचालयों का निर्माण करवाया गया था।</p>
<p><strong>लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए गए थे अभियान</strong></p>
<p>लोगों को शौचालय निर्माण के प्रति जागरूक करने के लिए हर पंचायत में महिला मंडल, युवक मंडल, स्वयं सहायता समूह व पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए गए। इसमें कला जत्थों का भी योगदान लिया गया। प्रथम व द्वितीय चरण के अभियान में जिले भर के लोगों ने 1,67,453 व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए।</p>
<p>केंद्र सरकार ने मंडी जिला को खुला शौचमुक्त घोषित किए जाने की घोषणा की है। यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p>संदीप कदम, उपायुक्त मंडी</p>
<p>Photo: Wikimapia </p>
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