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	<title>HP MLAs Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>विधायकों, मंत्रियों के वेतन  में 40-70% बढ़ोतरी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/hp-mla-and-minister-salary-hike-row/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है, अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है,जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है शिमला- प्रदेश सरकार ने एक्ट में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है, अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है,जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश सरकार ने एक्ट में संशोधन कर मंत्री, सीपीएस और विधायकों के वेतन और भत्तों में 40 से 70 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन सदस्यों को यह भत्ता भी तभी मुहैया होगा जब यह बैठक में भाग लेंगे।</p>
<p>पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है। इसी तरह मेयर, डिप्टी मेयर, जिला परिषद अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्षों के मानदेय में नाममात्र बढ़ोतरी की है। पांच साल से लेकर अब तक इनके मानदेय में 1500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है।</p>
<p>इन नुमाइंदों की ओर से यह मामला सरकार के समक्ष भी उठाया गया लेकिन सरकार ने सिर से बला टालकर उनके मानदेय में आंशिक बढ़ोतरी की। जबकि यह नुमाइंदे भी विधायकों की तर्ज पर अपने अपने क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं।</p>
<p>हिमाचल में जनता के नुमाइंदों के मानदेय और वेतन में अलग-अलग मापदंड है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 में जिला परिषद अध्यक्ष के मानदेय में मात्र 15 सौ रुपये की बढ़ोतरी की। इसकी तरह से उपाध्यक्ष का मानदेय 4500 से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया।</p>
<p><strong>जानिए किसका कितना मानदेय बढ़ा</strong></p>
<p>पंचायत समिति अध्यक्ष का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का 2400 से बढ़ाकर 3500 रुपये किया गया। प्रधान के मानदेय में महज 900 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन्हें अब 3000 रुपये मानदेय किया गया।</p>
<p>इसी तरह उपप्रधान का मानदेय 1800 रुपये से बढ़ाकर 2200 रुपये किया गया है। शहरी निकाय की बात करें तो मेयर को पहले 6500 रुपये मानदेय मिलता था, इसे अब 8000 रुपये जबकि डिप्टी मेयर के लिए 4500 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये मानदेय किया गया है।</p>
<p>नगर पंचायत अध्यक्ष का मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 2800 रुपये किया गया। कई सालों से वेतन-भत्तों में कम बढ़ोतरी को लेकर पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि सरकार के समक्ष विरोध भी जता चुके हैं। अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है।</p>
<p> <strong>न के बराबर है मानदेय, प्रतिनिधियों ने जताया विरोध</strong></p>
<p>जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का मानदेय न के बराबर है। डेवलपमेंट ग्रांट बंद है। 14 वें वित्तायोग का पैसा सीधे पंचायतों को जाना है। जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पंचायतों में एमएलए की अपेक्षा परिषद के सदस्य ज्यादा जाते हैं। पंचायत समिति अध्यक्ष ठियोग मदनलाल वर्मा ने कहा कि विधायकों के मानदेय बढ़ाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष में सहमति बन जाती है, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। जनता के बीच जाना मुश्किल हो गया है।</p>
<p>Photo: Amar Ujala</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल के विधायक,मंत्री जनता के पैसे से उड़ा रहे ऐश, 4% ब्याज दर पर 50 लाख तक लोन लेने के पात्र, ऋण माफी की भी सुविधा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-legislator-eligible-for-loan-upto-50-lack-at-just-4-interest-rate/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Apr 2016 14:48:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं, विधायकों को चार प्रतिशत ब्याज पर 50 लाख लोन,मरने के बाद ऋण माफी की भी सुविधा,पूर्व विधायकों को भी इसी ब्याज दर मिलता है 15 लाख रुपये लोन शिमला- कर्ज लेने के मामले में विधायकों को किसानों की तरह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं, विधायकों को चार प्रतिशत ब्याज पर 50 लाख लोन,मरने के बाद ऋण माफी की भी सुविधा,पूर्व विधायकों को भी इसी ब्याज दर मिलता है 15 लाख रुपये लोन</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> कर्ज लेने के मामले में विधायकों को किसानों की तरह ट्रीट किया जाता है। चार फीसदी ब्याज पर किसानों को क्रेडिट कार्ड लोन मिलता है। इतनी ही ब्याज दर पर विधायकों को 50 लाख का लोन दिया जाता है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि लोन न चुका पाने की हालत में किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि विधायकों का कर्ज माफ हो सकता है। एक चुनाव जीतने के बाद नेताओं की जिन्दगी कितनी आसान हो जाती है इसका ये उदाहरण है।</p>
<p>जनता के भरोसे पर चुनाव जीतने वाले नेता पचास लाख रुपए जैसी भारी भरकम रकम के लिए क्वालीफाइड हो जाते हैं। यह मान लिया जाता है कि राजनेता बनने के बाद व्यक्ति 50 लाख का कर्ज चुकाने का पात्र हो गया है। कार और घर के लिए हिमाचल के किसी भी विधायक को 50 लाख रुपये का लोन सस्ती ब्याज दर पर मिल सकता है। इसे प्रदेश विधानसभा सचिवालय ही देता है। प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्य 50 लाख रुपये तक का एडवांस लेने के लिए पात्र हैं।</p>
<p> <strong>अचल संपत्ति गिरवी रखने का भी प्रावधान</strong></p>
<p>लोन के रूप में लिए गए इस एडवांस को विधायकों को 180 किश्तों में चुकाना होता है। इस पर चार फीसदी प्रति वर्ष की वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। इसी तरह से पूर्व विधायकों को भवन और मोटर एडवांस लोन 15 लाख रुपये तक देने की व्यवस्था है। हालांकि, शर्त ये है कि पूर्व विधायकों को पूर्व में लिए गए ऋण को ब्याज समेत पूरी तरह से चुकता करना होता है।</p>
<p>इसे पूर्व विधायकों को 60 बराबर किश्तों में देना होता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 के मुताबिक अगर किसी विधायक या पूर्व विधायक ने एडवांस यानी लोन लिया है और उसकी मौत हो जाती है तो ऐसी हालत में अगर राज्यपाल इस बात से संतुष्ट हों कि संबंधित परिवार की स्थिति लोन चुकाने की नहीं है तो इसे माफ किया जा सकता है।</p>
<p>नियमों के मुताबिक अगर परिवार के सदस्य लोन चुकाने की स्थिति में हों तो इसे विधायक या पूर्व विधायक की मौत पर उसके कानूनी वारिस से ब्याज सहित रिकवर किया जाएगा। हालांकि ये भी व्यवस्था है कि सरकार ऋण की वापसी नहीं कर पाने वाले विधायक या पूर्व विधायक की अचल संपत्ति गिरवी रख सकती है। इसे तब तक गिरवी रखा जाएगा, जब तक ये भुगतान पूरा नहीं कर दिया जाता है।</p>
<p>Photo: live Mint/Representational Image</p>
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		<item>
		<title>विधायक साहबान ने अधिनियम में संशोधन कर अपनी  पेंशन  भी बढ़ाई, 5 साल विधायक रहें या नहीं, ताउम्र 78, 000 से ज्यादा पेंशन लेने के हकदार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/14/himachal-pradehs-legislature-hike-their-pension-to-78000/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Apr 2016 12:40:14 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Legislature Pensions Act 1971]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं, अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है शिमला- सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं, अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं। एक बार शपथ हो गई तो उसके बाद पांच साल तक विधायक रहें या नहीं, ताउम्र पेंशन के लिए पात्र हो जाएंगे।</p>
<p>मृत्यु भी हो जाए तो भी विधवा या उनके माइनर बच्चे को पेंशन मिलती है। दूसरी बार विधायक बनने पर हर साल 1000 रुपये की दर से पेंशन बढ़ती है। हाल में हुए संशोधन के बाद अब विधायकी जाने के बाद किसी भी एमएलए की करीब 78 हजार रुपये की पेंशन लग जाएगी।</p>
<p>साल 1971 में बने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए 5000 रुपये की मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया था। बाद में कई संशोधनों के बाद अभी तक ये 22000 रुपये थी। अब इसे बढ़ाकर 36000 रुपये कर दिया गया है।</p>
<p><strong>डीए के साथ 78 हजार से भी ज्यादा पैंशन</strong></p>
<p>प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इसे बढ़ाने के लिए इस अधिनियम में संशोधन किया गया है। विधायक सुविधा समिति की संस्तुति के बाद सरकार ने पहले इसे 22 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये करने का फैसला किया था। सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों के इस बीच अनुरोध के बाद इसे बढ़ाकर 36 हजार रुपये मासिक कर दिया गया।</p>
<p>अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है। यानी, अब पूर्व विधायक इतनी या इससे ज्यादा पेंशन के हकदार हो जाएंगे। जो दो टेन्योर में विधायक रहे हैं, उनके लिए ये पेंशन अब हर साल 1000 रुपये की दर से बढ़ती रहेगी।</p>
<p>यानी, नई बढ़ोतरी के बाद ही कई पूर्व विधायकों की पेंशन 80 हजार से भी पार हो जाएगी। अगर पेंशन ले रहे पूर्व विधायक की मौत हो जाती है तो उसका परिवार भी पेंशन लेने का हकदार हो जाता है। परिवार में विधवा पत्नी या पत्नी के न होने पर कानूनी तौर पर वारिस माइनर बच्चे को आधी पेंशन मिलती है।</p>
<p><strong>लगातार विधायक रहे हों या नहीं, पेंशन मिलेगी ही</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 की धारा 6 बी में ये व्यवस्था की गई है कि पेंशन का हकदार हर वह आदमी होगा, जो पांच साल के कार्यकाल तक विधानसभा का सदस्य रहा हो। वह चाहे लगातार पांच साल तक सदस्य रहा हो या नहीं।</p>
<p><em>Photo: Amar Ujala</em></p>
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			</item>
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		<title>प्रदेश  भारी क़र्ज़ में पर हिमाचल के  विधायक सिर्फ 50 रुपए में खा रहे 500 रुपए का शाही खाना, उसका भी नहीं चुकाते पूरा पैसा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/13/debt-burden-himachal-spending-on-lavish-food-for-legislatures/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Apr 2016 08:08:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[HPTDC]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया, पनीर, सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती, सलाद के महज 40 रुपये,आम आदमी को साढ़े चार से पांच सौ रुपये में मिलेगी खाने की ऐसी थाली,नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम देता है [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/13/debt-burden-himachal-spending-on-lavish-food-for-legislatures/">प्रदेश  भारी क़र्ज़ में पर हिमाचल के  विधायक सिर्फ 50 रुपए में खा रहे 500 रुपए का शाही खाना, उसका भी नहीं चुकाते पूरा पैसा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया, पनीर, सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती, सलाद के महज 40 रुपये,आम आदमी को साढ़े चार से पांच सौ रुपये में मिलेगी खाने की ऐसी थाली,नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम देता है खाना, कई रियायतों के बावजूद कम वेतन-भत्तों का हवाला देकर बढ़ा ली सैलरी</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  अपने वेतन-भत्तों को मनमाने तरीके से बढ़ाकर पब्लिक के निशाने पर आए सूबे के विधायक 500 रुपये का खाना भी 40 से 50 रुपये में खाते हैं। विधानसभा के हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया।</p>
<p>एक विधायक को वेज थाली में पनीर की सब्जी, एक अन्य सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती और सलाद जबकि नॉनवेज थाली में वेज आइटम के साथ एक नॉनवेज आइटम परोसी गई। बदले में विधायकों से महज 40 से 50 रुपये लिए गए।</p>
<p>औसतन हर दूसरे साल अपना वेतन और भत्ते बढ़ाने वाले विधायकों को सरकार जो खाना परोसती है, वह आम आदमी से दस गुना तक ज्यादा सस्ता है।</p>
<p><strong>सत्र के दौरान खाने का पूरा पैसा भी विधायक नहीं चुकाते</strong></p>
<p>आम आदमी को भले ही थाली का खाना खाने के लिए साढ़े चार से पांच सौ रुपये तक चुकाने पड़ते हों लेकिन विधायकों को वही थाली 40 से 50 रुपये में मिल रही है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम नो प्रॉफिट नो लॉस को ध्यान में रखकर कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायकों को खाना मुहैया कराता है।</p>
<p>खाने के भी नहीं चुकाते पूरे पैसे- सत्र के दौरान खाने का पूरा पैसा भी विधायक नहीं चुकाते। साठ प्रतिशत पैसा वह खुद चुकाते हैं, जबकि बाकी पैसा विधानसभा चुकाती है। सूत्र बताते हैं कि कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायक को परोसे जाने वाले खाने का खर्च 75 रुपये प्रति वेज थाली और 90 रुपये प्रति नॉन वेज थाली होता है।</p>
<p>लेकिन इन दोनों ही तरह की थालियों के खाने के लिए विधायकों से सिर्फ 40 से 50 रुपये लिए जाते हैं। इसी थाली को सामान्य लोगों को साढ़े चार सौ से पांच सौ रुपये में परोसा जाता है।</p>
<p>Photo: Raj Govt.org/Representational Image</p>
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