<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>HP HEALTH SERVICES Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-health-services/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-health-services/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Wed, 09 Nov 2016 08:08:06 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>HP HEALTH SERVICES Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/hp-health-services/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Nov 2016 14:00:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=8643</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/">सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी खुलने जा रही है। इसके लिए काम भी शुरू हो गया है। इस दौरान उपचार करवाने आए मरीजों को ग्रीन हाऊस से बाहर कर दिया गया। इस कारण मरीजों को अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। </p>
<p>लोगों की सुविधा के लिए ग्रीन हाउस बनाया गया था और लोग ओपीडी में सुबह जल्दी बारी आने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से एक दिन पहले ही पहुंच जाते थे और रात ग्रीन हाउस में गुजारते थे। इतना ही नहीं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए मरीज जिन्हें अस्पताल में बैड नहीं मिल पाता था, वह भी यहीं पर बैड मिलने तक इंतजार करते थे। इसके अलावा रात को मरीज के साथ आए तीमारदार भी दिन के समय ग्रीन हाउस में आराम करते हैं। आइजीएमसी में 100 से अधिक मरीजों के लिए सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब यह सारी सुविधाएं मरीजों व तीमारदारों से छिन गई हैं और मरीजों को अस्पताल में अब मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा।</p>
<p>ग्रीन हाउस में ओपीडी का काम शुरू होने के बाद अब लोग प्रशासन को कोस रहे हैं कि गरीब आदमी का आइजीएमसी में उपचार के लिए आना मुश्किल हो जाएगा। सर्दियों में बाहर रात काटना भी मुश्किल है और गरीब लोगों के लिए कमरा भी महंगा पड़ता है, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए आना संभव नहीं होगा। दूरदराज से मरीज इसी उम्मीद से आइजीएमसी एक दिन पहले पहुंच जाते थे कि ग्रीन हाउस में रात गुजारने के बाद सुबह जल्दी ओपीडी में नंबर लगाएंगे, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>स्टेचर भी किए बाहर</strong></p>
<p>ग्रीन हाउस के अंदर मरीजों की सुविधा के लिए रखे गए स्टेचर व व्हील चेयर भी बाहर कर दी गई हैं और जल्द ही इसमें ओपीडी का ताला लग जाएगा। आर्थो ओपीडी भी जल्द ही खुल जाएगी। ऐसे में मरीजों को अब दर-दर भटकना पड़ेगा और रात गुजारना मुश्किल हो जाएगा।<br />
<strong><br />
क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p>जिला कुल्लू से आए ओपी नेगी ने कहा कि आइजीएमसी में पहले ही बैड की कमी है। मरीज दूरदराज से उपचार करवाने आते हैं। दो-तीन दिन यहां पर लग जाते हैं, ऐसे में अधिकतर लोग ग्रीन हाउस में ही ठहरते थे। गरीब लोगों के लिए यह बहुत बड़ा आसरा था।</p>
<p>सरकाघाट से आई संतोष ने कहा कि आईजीएमसी प्रशासन को चाहिए कि या तो इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवाई जाए या ओपीडी ही कहीं और बनाई जाए। गरीब लोगों पर आईजीएमसी प्रशासन का निर्णय बहुत भारी पड़ेगा।</p>
<p>कुपवी से आए संजय ने कहा कि हर आदमी के लिए होटल में कमरा लेना मुश्किल है। अधिकतर लोग इसी के सहारे आईजीएमसी आते हैं। पहले प्रशासन को इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवानी चाहिए, फिर ओपीडी का काम शुरू करना चाहिए था। बहुत मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/">सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में बर्न यूनिट के नाम पर जनरल सर्जरी में 4 बेड, एक ही प्लास्टिक सर्जन के सहारे पूरा प्रदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/01/igmc-shimla-lacks-burn-unit-and-plastic-surgeons/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Nov 2016 13:00:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Minister]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Plastic Surgeon]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla Burn unit]]></category>
		<category><![CDATA[Tanda Medical College]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=8426</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- आगजनी से पीडि़त लोगों के इलाज के लिए अस्पतालों में अलग बर्न यूनिट की व्यवस्था की जानी चाहिए, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में अभी तक यह सुविधा नहीं है। बर्न यूनिट के नाम पर जनरल सर्जरी में चार बेड लगाए गए हैं। यूनिट चलाने के लिए प्लास्टिक सर्जन का होना जरूरी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/01/igmc-shimla-lacks-burn-unit-and-plastic-surgeons/">प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में बर्न यूनिट के नाम पर जनरल सर्जरी में 4 बेड, एक ही प्लास्टिक सर्जन के सहारे पूरा प्रदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> आगजनी से पीडि़त लोगों के इलाज के लिए अस्पतालों में अलग बर्न यूनिट की व्यवस्था की जानी चाहिए, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में अभी तक यह सुविधा नहीं है। बर्न यूनिट के नाम पर जनरल सर्जरी में चार बेड लगाए गए हैं। यूनिट चलाने के लिए प्लास्टिक सर्जन का होना जरूरी है, लेकिन आईजीएमसी में एक ही प्लास्टिक सर्जन है। उसी के सहारे पूरा प्रदेश है।</p>
<p>टांडा अस्पताल की बात करें तो वहां एक कमरे में बर्न यूनिट खोल दिया गया है, लेकिन यहां प्लास्टिक सर्जन ही नहीं है। दोनों ही अस्पतालों में सर्जरी के डाक्टरों के सहारे ही काम चल रहा है। यूनिट चलाने के लिए न तो दोनों अस्पतालों में अभी तक स्टाफ पूरा है और न ही जगह। इसलिए बर्न यूनिट महज औपचारिकता ही बन गए हैं। दिवाली आने वाली है और इस मौके पर जलने के कई केस अस्पताल पहुंचते हैं।</p>
<p>आईजीएमसी के लिए बर्न यूनिट की मंजूरी काफी पहले मिल चुकी है, लेकिन अभी तक बर्न यूनिट नहीं खुल पाया। बर्न यूनिट के लिए जगह की कमी एक बार फिर आईजीएमसी प्रशासन के लिए रोड़ा बन रही है। केंद्र ने बर्न यूनिट के लिए सहमति तो दी, मगर आईजीएमसी के पास जगह ही नहीं है। एक ओर लाखों रुपए का प्रोजेक्ट इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ  इंडिया से मंजूर है, दूसरी ओर ये दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। जब केंद्र की टीम ने दौरा किया था तो आईजीएमसी प्रशासन ने हड़बड़ाहट में टीम को आश्वासन दिया कि वे एक माह के अंदर फाइनल  रिपोर्ट तैयार कर देंगे। अब  प्रशासन का तर्क है कि चम्याणा में आईजीएमसी को जो नया कैंपस खुलेगा, उसमें आधुनिक सुविधाआें से लैस बर्न यूनिट स्थापित किया जाएगा।</p>
<p><strong>ट्रॉमा वार्ड की हालत भी पस्त</strong></p>
<p>आईजीएमसी प्रदेश का राज्य स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र है, मगर अभी तक अस्पताल में न तो बर्न यूनिट बना है, न ही ट्रॉमा वार्ड की बेहतर सुविधाएं मरीजों को मिल रही हैं। ऐसे में मरीजों को पीजीआई के लिए रैफर किया जाता है, मगर अस्पताल में अब कई तरह की दिक्कतें मरीजों को पेश आ रही हैं। एक ओर मरीजों को सुविधाएं नहीं हैं, दूसरी ओर बाहरी राज्यों में मरीजों को दोगुने पैसे खर्च करने पड़ते हैं, जिससे गरीब मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/01/igmc-shimla-lacks-burn-unit-and-plastic-surgeons/">प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में बर्न यूनिट के नाम पर जनरल सर्जरी में 4 बेड, एक ही प्लास्टिक सर्जन के सहारे पूरा प्रदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जोगेंद्रनगर अस्पताल में 1.5 लाख आबादी के स्वस्थ्य का जिम्मा केवल  5 चिकित्सकों पर, 13 पद खाली, रोजाना सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ता है बिना इलाज़</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/15/jogindernagar-civil-hospital-staff-shortage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Oct 2016 10:50:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Civil Hospital jogindernagar]]></category>
		<category><![CDATA[Health Staff Shortage]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[Jitendra Chauhan]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=7966</guid>

					<description><![CDATA[<p>जोगेंद्रनगर- नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में शुक्रवार को उपचार करवाने आए करीब सौ से अधिक मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। अस्पताल में तैनात कुल पांच चिकित्सकों में से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन सेवा में तैनात दो चिकित्सक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/15/jogindernagar-civil-hospital-staff-shortage/">जोगेंद्रनगर अस्पताल में 1.5 लाख आबादी के स्वस्थ्य का जिम्मा केवल  5 चिकित्सकों पर, 13 पद खाली, रोजाना सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ता है बिना इलाज़</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जोगेंद्रनगर-</strong>  नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में शुक्रवार को उपचार करवाने आए करीब सौ से अधिक मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। अस्पताल में तैनात कुल पांच चिकित्सकों में से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन सेवा में तैनात दो चिकित्सक ही देर शाम तक मरीजों की जांच करते दिखे। इसके बावजूद कुछ मरीजों का इलाज नहीं हो पाया। अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों को परीक्षा के लिए भेजा गया था, जबकि एक चिकित्सक रात्रि कालीन सेवा के बाद अवकाश पर था।</p>
<p>अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व आपातकालीन ओपीडी को छोड़कर अन्य सभी ओपीडी को चिकित्सकों के न होने के कारण बंद रखना पड़ा। अस्पताल में चल रही चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को लगातार निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दोपहर 12 बजे तक करीब दो सौ ओपीडी अस्पताल में दर्ज हो चुकी थी। इनमें कुछ ही मरीजों का उपचार हो पाया तथा अन्य को बिना उपचार ही लौटना पड़ा।</p>
<p>अस्पताल में स्वीकृत 19 पदों में से 13 पद खाली हो चुके हैं। अस्पताल में शिशु विशेषज्ञ का तबादला करीब एक सप्ताह पहले कर दिया गया है। अस्थायी तौर पर सेवा दे रही महिला चिकित्सक को भी नागरिक अस्पताल से हटा दिया गया है। मौजूदा समय में कुल पांच चिकित्सकों पर ही क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख आबादी के स्वास्थ्य जांचने का जिम्मा है। रोजाना की तरह शुक्रवार को भी अस्पताल में मरीजों का आना सुबह नौ बजे से ही शुरू हो गया था। ओपीडी के बाहर देर शाम तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ा। अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक ओपीडी दर्ज की जा रही है, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। </p>
<p>अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के बारे में लगातार स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी को पूरा नहीं किया जा सका है। अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों को मरीजों का उपचार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। शुक्रवार को भी मरीजों का उपचार अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों को ही करना पड़ा। </p>
<p>जितेंद्र चौहान, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर</p>
<p>Photo: NBC News/Representational </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/15/jogindernagar-civil-hospital-staff-shortage/">जोगेंद्रनगर अस्पताल में 1.5 लाख आबादी के स्वस्थ्य का जिम्मा केवल  5 चिकित्सकों पर, 13 पद खाली, रोजाना सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ता है बिना इलाज़</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चम्बा की कौशल्या ने की मिसाल कायम, 31साल से गांव-गांव घूमकर चला रही मातृत्व सुरक्षा मिशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/29/kaushalya-meet-himachals-award-winning-maternal-health-worker-with-31-years-of-service-in-remote-villages/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Apr 2016 11:08:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[BHARMOUR]]></category>
		<category><![CDATA[chamba]]></category>
		<category><![CDATA[FEMALE FOETICIDE]]></category>
		<category><![CDATA[HEALTH WORKER KAUSHALYA]]></category>
		<category><![CDATA[HLFPPT]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[KALSUIN HEALTH SUB CENTRE CHAMBA]]></category>
		<category><![CDATA[MATERNAL HEALTHCARE]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=5172</guid>

					<description><![CDATA[<p>चम्बा- कौशल्या की उम्र गांव-गांव घूमकर मातृत्व की सुरक्षा के लिए उपाय करने की नहीं रही लेकिन इसके बावजूद वह तमाम परेशानियों के बावजूद बीते 31 साल से चम्बा जिले के गांवों की महिलाओं को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया कराने के मिशन में जुटी हैं। कौशल्या मुख्य रूप से प्रसव, बाल स्वास्थ्य सेवा, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/29/kaushalya-meet-himachals-award-winning-maternal-health-worker-with-31-years-of-service-in-remote-villages/">चम्बा की कौशल्या ने की मिसाल कायम, 31साल से गांव-गांव घूमकर चला रही मातृत्व सुरक्षा मिशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चम्बा- </strong>  कौशल्या की उम्र गांव-गांव घूमकर मातृत्व की सुरक्षा के लिए उपाय करने की नहीं रही लेकिन इसके बावजूद वह तमाम परेशानियों के बावजूद बीते 31 साल से चम्बा जिले के गांवों की महिलाओं को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया कराने के मिशन में जुटी हैं। कौशल्या मुख्य रूप से प्रसव, बाल स्वास्थ्य सेवा, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन और गर्भनिरोध से जुड़े अन्य साधनों को महिलाओं तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।</p>
<p>58 साल की कौशल्या कालसुइन उप स्वास्थय केंद्र में कार्यरत हैं। यह चम्बा से 17 किलोमीटर दूर है। वह इस दुरुह स्थान पर बीते 28 साल से कार्यरत हैं। कौशल्या ने कहा कि, &#8220;यह अंत: प्रेरणा और अंतर्रात्मा की आवाज है, जो मुझे प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को मदद पहुंचाने के लिए मुझे बाध्य करती है। मुझे दफ्तर का काम खत्म होने के बाद भी काम करने में कोई परहेज नहीं। खराब मौसम भी कभी मेरी राह में आड़े नहीं आता। मैं 24 घंटे मातृत्व सम्बंधी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए तैयार रहती हूं। &#8221;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1.jpg" alt="kaushalya-himachal-health-worker-2 (1)" width="800" height="312" class="alignnone size-full wp-image-5174" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-300x117.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-768x300.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/kaushalya-himachal-health-worker-2-1-696x271.jpg 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>अपनी नौकरी के दौरान कौशल्या ने 3000 से अधिक प्रसव कराए हैं। साथ ही वह इससे कहीं अधिक प्रसव सम्बंधी कार्य कर चुकी हैं। खास बात यह है कि कौशल्या ने जितने भी मामलों में हाथ लगाया है, वहां उन्हें 100 फीसदी सफलता मिली है और एक भी मामले में जच्चा या बच्चा की मौत नहीं हुई है और न ही कोई गर्भपात हुआ है।</p>
<p>कई मौकों पर कौशल्या ने ऐसे हालात का भी सामना किया है, जहां कन्या भ्रूण हत्या के लएि जोर दिया गया लेकिन कौशल्या ने साहस के साथ ऐसे लोगों को समझाया है। कौशल्या के अथक प्रयासों का नतीजा है कि छोटे और मझौले किसानों से युक्त इस इलाके में राज्य सरकार ने चुरी प्रखंड में स्थित कालसुइन उप स्वास्थ्य केंद्र को राज्य के एकमात्र &#8216;प्रसव केंद्र&#8217; का दर्जा दिया है। राज्य सरकार ने महिला प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है।</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba.jpg" alt=" Kalsuin health sub-centre" width="650" height="303" class="alignnone size-full wp-image-5176" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba.jpg 650w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/04/chamba-300x140.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>इस केंद्र में पांच बिस्तर हैं। यहां एक प्रसव कक्ष भी है और एक बेबी केयर रूम भी है। यहां एक महिला एवं एक पुरुष स्वास्थय कर्मी कार्यरत हैं। कौशल्या के मुताबिक बीते एक दशक में उन्होंने 2500 से अधिक प्रसव किए हैं तथा जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं के अंदर 257 अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक साधन स्थापित किए हैं। कौशल्या का उप स्वास्थय केंद्र 18 गावों के 2000 लोगों को सेवाएं उपलब्ध कराता है।</p>
<p>अधिकांश समय में कौशल्या इस केंद्र पर कार्यरत एकमात्र स्वास्थयकर्मी होती हैं। यहां एक पुरुष स्वास्थय कर्मी की भी नियुक्ति का प्रावधान है लेकिन यहां कोई महिला रोग विशेषज्ञ या फिर बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं होती। कौशल्या ने यहां कई आपातकालीन मामलों को सफलतापूर्वक निपटाया है क्योंकि इस केंद्र में नियुक्त विशेषज्ञों को समय-समय पर यहां से हटा लिया जाता है।</p>
<p>इस साल दिसम्बर में सेवानिवृत हो रहीं कौैशल्या ने कहा, &#8220;मैंने यहां प्रसव से पूर्व और प्रसव के बाद के सभी काम बखूबी किए हैं।&#8221; साल 1985 में कौशल्या ने महिला स्वास्थ्य कर्मी के तौर पर राज्य स्वास्थ्य विभाग में काम शुरू किया था। शुरुआत में वह चम्बा जिले के बारमोर प्रखंड के डाल्ली में कार्यरत थीं।</p>
<p>तीन साल बाद कौशल्या को कालसुइन स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय यहां का उप स्वास्थ्य केंद्र पंचायत की इमारत में था। इस केंद्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। कौशल्या ने तमाम कोशिशों के बाद इस स्वास्थ केंद्र को उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित किया। बाद में यह स्वास्थ्य केंद्र नई इमारत में स्थानांतरित किया।</p>
<p>हिंदुस्तान लेटेक्स फेमिली प्लानिंग प्रोमोशन ट्रस्ट ने कौशल्या को प्रसव और बाल स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रशिक्षित किया है। 1995 से कौशल्या ने घरों में जाकर प्रसव और बाल स्वास्थ्य सेवा का काम शुरू किया। 2005 से कौशल्या अपने उप केंद्र में प्रसव का काम देख रही हैं। राज्य सरकार ने कौशल्या के काम को पहचान देते हुए उन्हें 2010 में जिला स्तरीय पुरस्कार दिया और फिर 2011 में राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 2011 की जनगणना के मुताबिक 89.96 प्रतिशत लोग आज भी गावों में रहते हैं। कौशल्या के काम को समझने के लिए किसी को काम्पट्रोलर एंड आडिटर जनरल ऑफ इंडिया की ताजातरीन रिपोर्ट को पढ़ने की जरूरत है, जिसमें कहा गया है कि स्वास्थय सेवा मुहैया कराने की दिशा में हिमाचल की स्थिति इतनी खराब है कि राष्ट्रीय ग्राणी स्वास्थ्य मिशन के तहत इसके 84 फीसदी प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों में 24 घंटे प्रसव सुविधा नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 500 स्वास्थ्य केंद्रों में से 308 में प्रसव कक्ष नहीं है और 493 केंद्रों पर नवजात की देखभाल के लिए सुविधा नहीं है। 2010-2015 के दौरान राज्य में कुल 668,442 महिलाओं के गर्भवती होने का पंजीकरण कराया गया था। इनमें से 53 फीसदी (354,022) को ही सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपयुक्त प्रसव सेवा मिल सकी जबकि लक्ष्य 70 फीसदी (467.909) का रखा गया था।   </p>
<p>Photo: Himachal Watcher/The Hans India</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/29/kaushalya-meet-himachals-award-winning-maternal-health-worker-with-31-years-of-service-in-remote-villages/">चम्बा की कौशल्या ने की मिसाल कायम, 31साल से गांव-गांव घूमकर चला रही मातृत्व सुरक्षा मिशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
