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	<title>HP Forest Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Forest Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>जो बन्दर मारेगा वो ही दफनाएगा, जानिए बन्दर मारने के लिए किन नियमो का  करना होगा पालन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/02/rules-for-monkey-culling-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2016 09:36:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे। शिमला- हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध दिए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बंदर को मारने वाले पर ही उसे दफनाने की भी जिम्मेदारी होगी। बंदरों को भले ही वर्मिन घोषित किया गया हो।</p>
<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या बच्चे वाली मादा को नहीं मार सकेंगे। बंदर पर निशाना साधने से पहले शिकारी को पता करना होगा कि मादा बंदर कहीं गर्भवती तो नहीं।</p>
<p><strong>कानूनी विवाद की सारी जिम्मेदारी बंदर मारने वाले पर </strong></p>
<p>बंदर अगर अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हुए है तो उसे भी नहीं मारा जा सकता। खास बात ये है कि बंदर को ऐसे मारा जाए जिससे बंदर पर निर्दयता न हो, यह कैसे संभव है इसका जिक्र गाइडलाइन में नहीं है।</p>
<p>सबसे दिलचस्प बात यह कि बंदर मारने के दौरान या बाद में अगर कोई कानूनी विवाद हुआ तो उसकी जिम्मेदारी भी बंदर मारने वाले पर होगी। ऐसे मामलों में वन विभाग पार्टी नहीं बनेगा। बंदर मारने के बाद संबंधित रेंज अफसर, फॉरेस्ट गार्ड को सूचना देनी होगी।</p>
<p>पहले से गठित कमेटी की निगरानी में बंदर को चयनित जगह पर ही दफनाया जाएगा। बंदर मारने से लेकर दफनाने तक वन विभाग सिर्फ मॉनीटरिंग रोल में रहेगा।</p>
<p><strong>तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने का प्रोसेस<br />
</strong><br />
बंदर मारने के बाद संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड, रेंज अफसर या डीएफओ को सूचित करना होगा। वन अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगा। इसके बाद बंदर को तय प्रक्रिया के तहत मारने वाले को दफनाना होगा। इसके बाद उसे तीन सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि मिलेंगे।</p>
<p>वर्मिन बंदरों को मारने के संबंध में एक प्रोटोकाल तैयार किया है। स्थानीय अफसरों के माध्यम से लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है ताकि मरने के बाद बंदर से किसी तरह की संक्रामक बीमारी न फैले। इसके लिए संबंधित रेंज व डिविजन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।- एसएस नेगी, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रिपोर्ट में खुलासा, रोहड़ू में जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़, शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों का सफाया</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/deodar-felling-in-rohru-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:44:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव शालन में शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों को काट दिया गया।</p>
<p>शवदाह के लिए नियमानुसार कैल के पेड़ काटने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं किया गया। धर्मशाला में कई जगह पेड़ों को इसलिए काटा गया कि पेड़ गाड़ी पार्किं ग में दिक्कतें पैदा कर रहे थे। धर्मशाला में अपर धर्मकोट इलाके में सिडार हिमालयन पैराडाइस का निर्माण तो पूरी तरह नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। पेड़ों को कंक्रीट में दबाया जा रहा है। नगर निगम धर्मशाला एवं वन विभाग की ओर से न के बराबर कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने इसी मामले में मंडी के कटौला वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई दो अगस्त को निर्धारित की है।</p>
<p>सरकार के लिए आंखें खोलने वाली है रिपोर्ट एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने पर कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए आंखें खोल देने वाली है। कोर्ट ने प्रदेश में लगातार हो रहे अवैध वन कटान की शिकायतों के मद्देनजर प्रदेश सरकार से इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए चार</p>
<p>सप्ताह का समय दिया है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वन काटुओं के खिलाफ कोर्ट के आदेशानुसार आपराधिक मामले दर्ज कर संबंधित न्यायालयों में अभियोजन चलाएं। पुलिस अधीक्षकों को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है।</p>
<p><strong>जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़</strong> </p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहडू़ तहसील के तहत टिक्कर कॉलेज भवन निर्माण के लिए जबरन भूमि चयन करवाने के लिए वन भूमि से 51 पेड़ काट लिए गए थे। पुलिस चौकी टिक्कर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर काटे गए इन पेड़ों में 49 पेड़ कैल के और एक-एक देवदार और रई के थे।</p>
<p>ये पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र कशैनी में बिना अनुमति केवल इसलिए काट लिए गए, जिससे उस भूमि पर कम से कम पेड़ नजर आएं और कॉलेज के लिए भूमि का चयन आसानी से हो जाए। इस क्षेत्र में डीएफओ की ओर से टीडी अधिकारों को निलंबित करने के निर्णय को एमिकस क्यूरी ने सही और तर्कसंगत ठहराया है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>फॉरेस्ट गार्ड भर्ती शुरू होने से पहले ही सवालों के घेरे में, आसान फिजिकल के चलते महिलाओं को मिल जाते हैं ज्यादा अंक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/09/hp-forest-guard-recruitment-2016-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jun 2016 06:49:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[HP Forest Guards Recruitment]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- वन विभाग में अगले कुछ समय में करीब साढ़े चार सौ फारेस्ट गार्ड की भर्ती होने जा रही है। वन मंत्री की सख्ती के बाद विभाग ने भर्ती की कवायद शुरू कर दी है। लेकिन शुरू होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। किसी भी विभाग की भर्ती [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  वन विभाग में अगले कुछ समय में करीब साढ़े चार सौ फारेस्ट गार्ड की भर्ती होने जा रही है। वन मंत्री की सख्ती के बाद विभाग ने भर्ती की कवायद शुरू कर दी है। लेकिन शुरू होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। किसी भी विभाग की भर्ती से इतर वन विभाग में गार्ड की भर्ती प्रक्रिया में महिला और पुरुषों के पदों की संख्या तो तय नहीं हैं।</p>
<p>लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए दोनों ही वर्गों के मानक अलग हैं। इसकी वजह से भर्ती में महिलाओं को पुरुषों से कम मेहनत पर भी लिखित परीक्षा में पहुंचने का मौका मिल रहा है। विभाग की इस व्यवस्था के बाद अब कुछ युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर, पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>इसलिए उठे भर्ती पर सवाल</strong></p>
<p>दरअसल, सिपाही भर्ती परीक्षा में कुल पदों में महिलाओं और पुरुषों के लिए पदों की संख्या तय रहती है। इसकी वजह से महिलाओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में मिलने वाली छूट का पुरुष अभ्यर्थियों की भर्ती पर असर नहीं पड़ता। वहीं, फारेस्ट गार्ड भर्ती प्रक्रिया में भर्ती के लिए पुरुष और महिला गार्डों के पद तय नहीं हैं।</p>
<p>जबकि भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम फिजिकल करना होता है। इसका नतीजा यह होता है कि आसान फिजिकल के चलते महिलाओं को ज्यादा अंक मिल जाते हैं जबकि पुरुष अभ्यर्थी असफल हो जाते हैं।</p>
<p><strong>नियमों में बदलाव को हुए थे प्रयास</strong></p>
<p>पिछले साल बड़ी संख्या में महिला गार्डों के भर्ती होने के बाद विभाग को कामकाज में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। सूत्रों की मानें तो ऐसा इसलिए हो रहा था कि कुछ अति पिछड़े इलाकों में अकेले महिला गार्ड को गश्त के लिए भेजा नहीं जा सकता था और पुरुष गार्ड की कमी थी।</p>
<p>इसकी समस्या के बाद इस साल होने वाली गार्ड भर्ती से पहले विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने की कवायद शुरू की थी। इसमें कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया का अवलोकन भी किया गया था। लेकिन कवायद बीच में ही रोक दी गई।</p>
<p><strong>पिछली भर्ती में भी हुई थी समस्या</strong></p>
<p>पिछले साल भी करीब चार सौ गार्डों के पदों पर भर्ती हुई थी। उस दौरान भी भर्ती प्रक्रिया में इस अनियमितता की वजह से बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थियों का चयन हो गया। जबकि ज्यादा मेहनत करने के बावजूद पुरुष अभ्यर्थी सेलेक्ट नहीं हो सके।</p>
<p>इसके बाद उस समय भी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे थे लेकिन तब यह कहकर मामला दबा दिया गया था कि फेल होने की वजह से अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं।</p>
<p>Photo: HP Forest Department </p>
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			</item>
		<item>
		<title>रोहड़ू के टिक्कर में वन माफिया ने देवदार, कायल के 30 पेड़ों पर चलाई कुल्हाड़ी, वन विभाग बेखबर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/23/rohru-illegal-tree-felling-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 May 2016 09:53:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DFO Rohru]]></category>
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		<category><![CDATA[Jungle Mafias]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुछ दिन पहले जुब्बल रेंज तथा बशला रेंज की सीमा पर वन विभाग ने 65 देवदार तथा कायल के स्लीपर किए थे बरामद। बड़े पैमाने पर कटान के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं शिमला- शिमला जिला के रोहड़ू की टिक्कर वन बीट के टिक्कर जंगल में वन माफिया की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुछ दिन पहले जुब्बल रेंज तथा बशला रेंज की सीमा पर वन विभाग ने 65 देवदार तथा कायल के स्लीपर किए थे बरामद। बड़े पैमाने पर कटान के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> शिमला जिला के रोहड़ू की टिक्कर वन बीट के टिक्कर जंगल में वन माफिया की कुल्हाड़ी चली है। करीब तीस पेड़ साफ कर दिए गए हैं। देवदार और कायल के पेड़ों पर कुल्हाड़ी बरसी है। सूचना के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं।</p>
<p>बड़े पैमाने पर कटान के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिन से जंगल में अवैध कटान चल रहा था। विभाग इससे बेखबर रहा। एसडीएम रोहड़ू और डीएफओ ने मौके का जायजा लिया है। पेड़ किसने काटे, अब तक विभाग को पता नहीं है।</p>
<p>हालांकि, विभाग दावा कर रहा है कि जल्द है कटान करने वाले सलाखों के पीछे होंगे। टिक्कर पीएचसी के समीप बाजार से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में करीब तीस कायल और देवदार के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली है। बताया जा रहा है कि तीन दिन से अवैध कटान चल रहा था।</p>
<p>किसी व्यक्ति ने मामले की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को डीएफओ रोहड़ू तथा एसडीएम रोहड़ू मौके पर पहुंचे। कटे हुए पेड़ों को कब्जे में लेकर डीएफओ ने पेड़ कटान मामले की जांच शुरू कर दी है। अब तक मामले को लेकर किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तार नहीं हुई है।</p>
<p><strong>जुब्बल, बशला में मिले 65 पेड़</strong></p>
<p>कुछ दिन पहले जुब्बल रेंज तथा बशला रेंज की सीमा पर वन विभाग ने 65 देवदार तथा कायल के स्लीपर बरामद किए थे। डीएफओ रोहड़ू चमन लाल ने  बताया कि टिक्कर के समीप जंगल में पेड़ काटने की सूचना उन्हें मिली थी। मौके पर जाकर छानबीन शुरू कर दी गई है। आगामी कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/23/rohru-illegal-tree-felling-case/">रोहड़ू के टिक्कर में वन माफिया ने देवदार, कायल के 30 पेड़ों पर चलाई कुल्हाड़ी, वन विभाग बेखबर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग पर एनजीटी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर सरकार से मांगा जवाब</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/05/himachal-forest-fires-ngt-issues-showcause-notice-to-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 May 2016 05:54:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Fires]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Forest Fire]]></category>
		<category><![CDATA[HP Forest Dept]]></category>
		<category><![CDATA[justice swatanter kumar]]></category>
		<category><![CDATA[National Green Tribunal]]></category>
		<category><![CDATA[NGT]]></category>
		<category><![CDATA[Prakash Javadekar]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Forest Fire]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कारण बताओ नोटिस जारी कर अपने निर्देश में राज्यों से पूछा है कि वे वन्य क्षेत्र और संपदा को आग व अन्य आपदाओं से बचाने के लिए कौन सी नीति अपना रहे हैं शिमला- उत्तराखंड और हिमाचल के जंगलों में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/05/himachal-forest-fires-ngt-issues-showcause-notice-to-government/">हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग पर एनजीटी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर सरकार से मांगा जवाब</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कारण बताओ नोटिस जारी कर अपने निर्देश में राज्यों से पूछा है कि वे वन्य क्षेत्र और संपदा को आग व अन्य आपदाओं से बचाने के लिए कौन सी नीति अपना रहे हैं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  उत्तराखंड और हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दोनों राज्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पर्यावरण मंत्रालय और अन्य प्राधिकरण वन क्षेत्र में आग की घटनाओं को बहुत हल्के में ले रहे हैं।</p>
<p>यह बहुत ही चौंकाने वाला है। बेंच ने निर्देश में कहा कि दोनों राज्यों के संबंधित सचिव हलफनामा दाखिल कर बताएं कि आग की घटना के कारण क्या थे? आग लगने के बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई 10 मई को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को मामले पर स्वत:संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पेश वकील ने कहा कि आग की घटना के बाद वहां वायुसेना और अन्य स्थानीय प्राधिकरणों की मदद से स्थिति पर काबू पाया जा रहा है। इस पर बेंच ने मंत्रालय और राज्यों की ओर से पेश वकील को कहा कि घटना न हो इसके लिए आपकी पूर्व तैयारी क्या थी? अगली सुनवाई पर इस संबंध में स्पष्ट निर्देश लेकर ट्रिब्यूनल के समक्ष आएं।</p>
<p><strong>हिमाचल से पूछा, एमपी वाली नीति का क्या हुआ?</strong></p>
<p>बेंच ने अपने निर्देश में राज्यों से पूछा है कि वे वन्य क्षेत्र और संपदा को आग व अन्य आपदाओं से बचाने के लिए कौन सी नीति अपना रहे हैं। वहीं, इससे पहले सुनवाई के दौरान हिमाचल की ओर से पेश वकील को फटकार लगाते हुए बेंच ने कहा कि आपने एक वर्ष पहले कहा था कि हम मध्य प्रदेश में वन्य क्षेत्र के लिए मौजूद बचाव व प्रबंधन नीति को अपने सूबे में लागू करेंगे। आखिर इस नीति का क्या हुआ? हलफनामे में जवाब के अलावा प्राधिकरण इस पहलू पर भी जवाब दें।</p>
<p><strong>2016 में वन क्षेत्र के भीतर बढ़ी आग की घटनाएं</strong></p>
<p>केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा था कि 2016 के पहले चार महीने (जनवरी-अप्रैल) के बीच वन क्षेत्र में आग लगने की करीब 20 हजार घटनाएं हुई हैं। जबकि 2015 की समान अवधि में 16 हजार घटनाएं दर्ज हुई थीं। वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं के मामले में उत्तराखंड के पौड़ी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग और टिहरी सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/05/himachal-forest-fires-ngt-issues-showcause-notice-to-government/">हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग पर एनजीटी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर सरकार से मांगा जवाब</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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