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	<title>HP Food and Civil Supplies Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Food and Civil Supplies Dept Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>अब सब्जी व फल विक्रेताओं को 3 फुट लम्बे व 2 फुट चौडे बोर्ड पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Oct 2016 11:01:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किसी भी शिकायत एवं सुझाव के लिए कार्यालय जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले ऊना के दूरभाष नम्बर 01975-226016 पर संपर्क कर सकते हैं। ऊना- अब उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सभी विक्रेताओं को रेट लिस्ट को तीन फुट लम्बे व दो फुट चौडे बोर्ड में प्रदर्शित करना सुनिश्चित करना होगा ताकि उस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किसी भी शिकायत एवं सुझाव के लिए कार्यालय जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले ऊना के दूरभाष नम्बर 01975-226016 पर संपर्क कर सकते हैं।<br />
</strong></p>
<p><strong>ऊना-</strong> अब उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सभी विक्रेताओं को रेट लिस्ट को तीन फुट लम्बे व दो फुट चौडे बोर्ड में प्रदर्शित करना सुनिश्चित करना होगा ताकि उस पर लिखे रेट ग्राहकों द्वारा स्पष्ट रुप से पढ़े जा सकें। इस निर्देश के अन्तर्गत जिला ऊना के सभी फल व सब्जी विक्रेता जिसमें रिटेल, दुकान, रेहडी, गाडी या सब्जी मंडी वाले शामिल हैं!</p>
<p>निर्देश जारी करते हुए जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले लक्ष्मण सिंह कनेट ने बताया कि विभाग द्वारा सब्जी एवं फलों की दुकानों पर रेट लिस्ट एवं सही मूल्य पर सब्जी बिकने के निरीक्षण का अभियान चलाया हुआ है जिसके माध्यम से ध्यान में आया है कि सब्जी व फल विक्रेताओं द्वारा रेट लिस्ट छोटे से कागज पर लिख कर लगा दी जाती है जो अक्सर ग्राहकों को ठीक ढंग से नजर नहीं आती। इससे रेट लिस्ट को प्रदर्शित करने का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। </p>
<p>डीएफएससी ने बताया कि अब विभाग द्वारा निरीक्षकों के माध्यम से रेट लिस्ट का समरूप प्रारूप सभी दुकानदारों में बांटा जाएगा तथा जिसमें स्कैच से रेट लिस्ट लिखी जाएगी तथा इसके नीचे दिनांक एवं दुकानदार के हस्ताक्षर होना अनिवार्य होंगें। साथ ही रेट लिस्ट बोर्ड को दुकानदार अपनी दुकान में ऐसी जगह लगाना सुनिश्चित करें जहां पर यह आसानी से सभी उपभोक्ताओं को नजर आ सके।</p>
<p>जिला के सभी फल व सब्जी विक्रेताओं के पास सब्जी एवं फलों के खरीद के बिल दुकान पर उपलब्ध होना अनिवार्य है। इसके आधार पर ही दुकानदार इस खरीद मूल्य में अपने खर्च जोडक़र फलों एवं ठोस सब्जियों (आलू, अदरक, अरबी व प्याज) पर अधिकतम 15 प्रतिशत मार्जिन ले सकता है। </p>
<p>अन्य सब्जियों पर अधिकतम 20 प्रतिशत मार्जिन ले सकता है तथा हरी पत्तेदार सब्जियों (पालक, साग) पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक मार्जिन ले सकता है। उन्होंने बताया कि इससे अधिक मार्जिन वसूल करने पर दुकानदार के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>डीएफएसी ने इस संबंध में सभी से सहयोग की अपेक्षा की है तथा किसी भी शिकायत एवं सुझाव के लिए कार्यालय जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले ऊना के दूरभाष नम्बर 01975-226016 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
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		<title>आईजीएमसी स्टॉक में  मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/21/used-syringes-found-at-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Apr 2016 12:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Food and Civil Supplies Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Dept]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC  Administration]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Used Syringes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक सिरिंज की सूई मुड़ी हुई थी, जबकि एक अन्य सिरिंज में कुछ बाल मिले हैं। खराब सप्लाई मिलने के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने तुरंत सिरिंज की सप्लाई को रोक दी। स्टॉक को भी वापस कर दिया।</p>
<p><strong>जान से क्यों किया जा रहा खिलवाड़</strong></p>
<p>आईजीएमसी में खराब सिरिंज आने का मतलब सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इसमें एक सिरिंज में कुछ खून के धब्बे भी थे, मगर अधिकारियों का दावा है कि सिरिंज में वैक्यूम नहीं बन रहा था। ऐसे में सप्लाई को बंद किया गया है। मामले में अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी को एक मोहलत देकर छोड़ दिया गया है।</p>
<p><strong>सिविल सप्लाई को दिया है काम</strong></p>
<p>आईजीएमसी में सिरिंज की सप्लाई का कार्य सिविल सप्लाई काे दिया गया है। सिविल सप्लाई ही कंपनी को सिरिंज सप्लाई के लिए टेंडर करती है। रोजाना आईजीएमसी में आपातकाल समेत अन्य वार्डों में आने वाले सैकंडों मरीजों का ब्लड इन्हीं सिरिंज से लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सप्लाई आईजीएमसी में खराब सिरिंज की सप्लाई कर रहा है। यह सिरिंज आईजीएमसी के अपातकाल के अलावा आॅपरेशन थियेटर, वार्डों में में भी सप्लाई की जाती हैं।</p>
<p><strong>प्रशासन की लापरवाही</strong></p>
<p>खराब सिरिंज मामले की आईजीएमसी के विभिन्न वार्डों में दिनभर चर्चा रही। हर वार्ड में नर्सें व डाॅक्टरों के बीच खराब सिरिंज का मामला गर्माया रहा। हालांकि खुलकर इस मामले में कोई सामने नहीं आया। सूत्रों की माने तो इस तरह की सिरिंज पहले भी कई बार आईजीएमसी में आ चुकी है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। मामले में अधिकारियों का तर्क यह भी है कि आईजीएमसी में कई नर्सिंग काॅलेज से प्रशिक्षु नर्सें आती हैं। उन्हें ठीक ढंग से इंजेक्शन लगाना नहीं आता। ऐसे में सप्लाई के खराब होने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><strong>पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला</strong></p>
<p>आईजीएमसी में इससे पहले भी यूज्ड सिरिंज का मामला आ चुका है। इससे पहले भी सितंबर, 2014 एक मरीज का तीमारदार ट्यूब काउंटर से सिरिंज खरीद कर लाया था, जैसे ही माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के लैब तकनीशियन ने सिरिंज का पैकेट खोला तो उसमें खून की कुछ बूंदें मौजूद थी। यह सिरिंज एक निजी काउंटर से लाई गई थी। उस समय भी प्रशासन ने काउंटर को सील कर दिया था। इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा था। अब दोबारा से खराब सिरिंज का मामला आने से सवालिया निशान उठने लगे हैं।</p>
<p>Photo: Trib Wpix/ Representational Image</p>
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