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	<title>HP Education Minister Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Education Minister Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>चम्बा की पाठशाला में कहीं 15 बच्चों लिए 3 अध्यापक, तो कहीं  44 बच्चों को पढ़ा रहा  सिर्फ 1अध्यापक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/hp-government-schools-in-chamba/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Nov 2016 12:35:29 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[चम्बा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है चम्बा- डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह में शिक्षा ग्रहण कर रहे 44 बच्चों के लिए नियुक्त 2 अध्यापकों में से एक को राजकीय [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है</strong></p>
<p><strong>चम्बा-</strong> डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह में शिक्षा ग्रहण कर रहे 44 बच्चों के लिए नियुक्त 2 अध्यापकों में से एक को राजकीय प्राथमिक पाठशाला जन्ना में शिक्षा विभाग ने तैनात कर लदवाह स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को पटरी से नीचे लाने का काम किया है।</p>
<p>जन्ना स्कूल में पहले से ही 2 अध्यापक मौजूद हैं, वहीं अब वहां 3 अध्यापक 15 बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं, ऐसे में जिला प्रशासन लदवाह स्कूल में शिक्षा की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने के लिए जन्ना स्कूल में तैनात अध्यापक को दोबारा स्कूल में भेजने के शिक्षा विभाग को निर्देश जारी करे। यह बात राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह की स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष रेखा देवी की अगुवाई में अन्य सदस्यों ने एडीएम चम्बा को इस संदर्भ में अपना मांग पत्र सौंपते हुए कही।</p>
<p>स्कूल की प्रबंधन समिति की अध्यक्ष ने बताया कि लदवाह स्कूल में 44 बच्चों पर 2 अध्यापक तैनात थे तो स्कूल की शिक्षा व्यवस्था सुचारू बनी हुई थी लेकिन जब से यहां के एक अध्यापक को जन्ना में तैनात किया है तो इस स्कूल के दोपहर के भोजन की व्यवस्था के साथ एक अध्यापक द्वारा 5 कक्षाओं को शिक्षा देना बेहद मुश्किल हो रहा है। सही शब्दों में कहें तो इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है।</p>
<p>जन्ना स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे महज 15 बच्चों के लिए पहले से ही वहां पर 2 अध्यापक नियुक्त थे लेकिन लदवाह स्कूल से एक अध्यापक को जन्ना के लिए स्थानांतरित करने से जन्ना से बदले गए अध्यापक अदालत में चले गए हैं, ऐसे में अब उक्त स्कूल में वर्तमान में 3 शिक्षक हो गए हैं। </p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे में तबादलों के इस खेल में लदवाह स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन शिक्षा विभाग को लदवाह से बदले गए अध्यापक के तबादला आदेश को रद्द करने के आदेश जारी करे ताकि इस स्कूल के 44 बच्चों की प्रभावित हुई पढ़ाई फिर से सुचारू हो पाए।</p>
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		<title>माननीय कुलपति जी का नया चमत्कार: रूसा के प्रथम सत्र के परीक्षा परिणाम में 98 % विद्यार्थी फेल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/30/hp-university-rusa-result-disaster-98-students-fail/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Aug 2016 08:25:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूसा प्रणाली को लागू किये हुए चौथा सत्र शुरू हो चुका है लेकिन प्रशासन न तो अभी तक इसका ठीक से सिलेब्स तैयार कर पाया है व न ही परीक्षा प्रणाली व मूल्यांकन प्रणाली को मूर्त रूप दे पाया है जो कि प्रदेश में शिक्षा ग्रहण कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रूसा प्रणाली को लागू किये हुए चौथा सत्र शुरू हो चुका है लेकिन प्रशासन न तो अभी तक इसका ठीक से सिलेब्स तैयार कर पाया है व न ही परीक्षा प्रणाली व मूल्यांकन प्रणाली को मूर्त रूप दे पाया है जो कि प्रदेश में शिक्षा ग्रहण कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।<br />
</strong><br />
<strong>शिमला- </strong> प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा घोषित प्रथम सत्र के परीक्षा परिणाम में की गयी खामियों की कड़ी निंदा करते हुए<br />
भारत की जनवादी नौजवान सभा ने कहा कि कि विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परिणाम में 98 प्रतिशत से अधिक छात्रों का फेल होने का सीधा अर्थ है कि विवि के स्तर पर कई कमियां हैं। </p>
<p>हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहला अवसर है जब 98 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थी फेल हुए हैं। सभा ने कहा डीवाईएफआई पहले से प्रदेश में रूसा प्रणाली को छात्र विरोधी करार देती रही है क्योंकि वि0वि0 प्रशासन ने बिना किसी पूर्व तैयारी के रूसा प्रणाली को लागू किया है। अत: वि0वि0 प्रशासन तीन वर्षों तक रूसा प्रणाली को लेकर खुद अपने मुहं मनघडंत वाहवाही लेते रहे। </p>
<p>सभा ने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया वीरभद्र सिंह व प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति एडीएन वाजपेयी से आग्रह करती है कि इस परीक्षा परिणाम का सेहरा भी अपने सिर पर बांधें व गलत परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए प्रदेश की आम जनता व छात्र समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।</p>
<p>सभा का यह भी कहना है कि जब से प्रदेश विश्वविद्यालय में एडीएन वाजपेयी ने कुलपति का कार्यभार संभाला है तबसे  वि0वि0 का स्तर दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है। कार्यभार सँभालते वक्त वीसी वाजपेयी ने 25 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने का दावा किया था और यही दावा रूसा प्रणाली लागु करते वक्त भी किया गया था लेकिन अब हकीकत यह है कि एक परिणाम घोषित करने को वि0वि0 प्रशासन 9  से 12  महीने लगा रहा है।</p>
<p>सभा के अनुसार वीसी वाजपेयी का वि0वि0 में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का वास्तव में कोई इरादा नहीं है बल्कि वह विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर रहकर मात्र अपने राजनैतिक हित साध रहे हैं। सभा ने यह भी आरोप लगाया कि आज रूसा प्रणाली को लागू किये हुए चौथा सत्र शुरू हो चुका है लेकिन प्रशासन न तो अभी तक इसका ठीक से सिलेब्स तैयार कर पाया है व न ही परीक्षा प्रणाली व मूल्यांकन प्रणाली को मूर्त रूप दे पाया है जो कि प्रदेश में शिक्षा ग्रहण कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।</p>
<p>सभा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि हाल में घोषित कि गए परीक्षा परिणाम का पुनः मूल्यांकन किया जाये और पिछले तीन चार वर्षों से बार बार परीक्षा परिणाम में रह रही खामियों की न्यायिक जांच की जाए।</p>
<p>Photo: The Tribune</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल की करीब  679 प्राथमिक स्कूलों में नहीं बिजली, 340 स्कूलों में 5 से कम विद्यार्थी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/24/himachal-primary-schools-without-electricity/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Aug 2016 14:57:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दूसरे राज्यों को बिजली देकर रोशन करने वाले हिमाचल की कुल 10770 प्राथमिक पाठशालाओं में से 679 पाठशालाएं विद्युत रहित हैं। इसके साथ ही 2131 माध्यमिक पाठशालाओं में से 173 और 929 उच्च पाठशालाओं में से 4 पाठशालाओं में बिजली की व्यवस्था नहीं है। बिजली रहित पाठशालाओं के मामले में जिला शिमला शीर्ष पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> दूसरे राज्यों को बिजली देकर रोशन करने वाले हिमाचल की कुल 10770 प्राथमिक पाठशालाओं में से 679 पाठशालाएं विद्युत रहित हैं। इसके साथ ही 2131 माध्यमिक पाठशालाओं में से 173 और 929 उच्च पाठशालाओं में से 4 पाठशालाओं में बिजली की व्यवस्था नहीं है। बिजली रहित पाठशालाओं के मामले में जिला शिमला शीर्ष पर है। यहां 523 प्राथमिक पाठशालाओं में बिजली नहीं है।</p>
<p>इसी तरह सिरमौर की 51, सोलन की 12, बिलासपुर की 4, कुल्लू की 72 और जिला किन्नौर की 17 प्राथमिक पाठशालाएं विद्युत रहित हैं। इसके साथ ही जिला शिमला की 129 और जिला सिरमौर की 44 माध्यमिक पाठशालाएं तथा जिला शिमला की 4 राजकीय पाठशालाएं विद्युत रहित हैं। ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह लिखित जानकारी सदन में दी। इसमें कहा गया है कि प्रदेश के अंतर्गत 53 प्राथमिक और 47 माध्यमिक पाठशालाएं शौचालय रहित हैं।</p>
<p><strong>340 स्कूलों में 5 से कम विद्यार्थी</strong></p>
<p>राज्य की 340 प्राथमिक पाठशाला ऐसी है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 5 से कम है। इसी तरह 922 प्राथमिक पाठशाला ऐसी है, जिनमें केवल एक ही अध्यापक कार्यरत है। राज्य की 53 प्राथमिक और 47 माध्यमिक पाठशाला शौचालय रहित है। इनमें जिला सिरमौर की 34, मंडी की 12, सोलन की 2, कुल्लू की 5 राजकीय प्राथमिक पाठशाला शौचालय रहित है। इसके साथ ही जिला सिरमौर की 38, शिमला की 2, मंडी की 6 और सोलन की 1 माध्यमिक पाठशाला शौचालय रहित है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/08/24/himachal-primary-schools-without-electricity/">हिमाचल की करीब  679 प्राथमिक स्कूलों में नहीं बिजली, 340 स्कूलों में 5 से कम विद्यार्थी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>बारिश में भवन ढहने के बाद 3 साल से खुले मैदान में लग रही कुल्लू के प्राइमरी स्कूल की कक्षायें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/01/govt-primary-school-khalyani-kullu/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jun 2016 10:23:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुल्लू]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्लू- कड़कड़ाती सर्दी, बारिश हो या तेज धूप, खुले मैदान में पिछले साढ़े 3 सालों से बच्चे जहां पढ़ रहे हैं। बता दें कि ये नजारा कुल्लू के प्राइमरी स्कूल खल्याणी का है। जहां नौनिहाल खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह स्कूल प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक पहुंच गया है। बीते [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्लू-</strong> कड़कड़ाती सर्दी, बारिश हो या तेज धूप, खुले मैदान में पिछले साढ़े 3 सालों से बच्चे जहां पढ़ रहे हैं। बता दें कि ये नजारा कुल्लू के प्राइमरी स्कूल खल्याणी का है। जहां नौनिहाल खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह स्कूल प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक पहुंच गया है। बीते करीब 23 महीने के बीच सरकार के मंत्री दो बार यहां पहुंचे, लेकिन छत उड़े और क्षतिग्रस्त स्कूल की तरफ ध्यान नहीं दिया। स्कूल में बार-बार मंत्री और विधायक के दौरे का क्या फायदा, इसका कायाकल्प नहीं हो रहा है। स्कूल प्रबंधन, पंचायत और एसएमसी भी शिक्षा विभाग और प्रशासन से पत्राचार कर थक गए हैं। </p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School.jpg" alt="HP Govt School" width="800" height="563" class="alignnone size-full wp-image-5818" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School-300x211.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School-768x540.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School-100x70.jpg 100w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School-696x490.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-School-597x420.jpg 597w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p><strong>2013 में बारिश से ढह गया था स्कूल </strong></p>
<p>यहां तैनात अध्यापक ने कार्यालय के लिए मिडल स्कूल से छोटा सा एक कमरा किराए पर लिया है। कभी मजबूरी में 5 कक्षाओं को इसी कमरे में ही पढ़ाना पड़ रहा है। खल्याणी स्कूल का यह भवन 6 फरवरी, 2013 को बारिश से ढह गया था। इसे ठीक नहीं किया जा रहा है। नौनिहाल खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे हैं। </p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department.jpg" alt="HP Govt Eelementary Department" width="800" height="520" class="alignnone size-full wp-image-5817" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department.jpg 800w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department-300x195.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department-768x499.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department-696x452.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/06/HP-Govt-Eelementary-Department-646x420.jpg 646w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>स्कूल प्रबंधन समिति की प्रधान रीता देवी ने कहा कि 2013 में ही क्षेत्र के 45 लोगों ने हस्ताक्षर कर मांगपत्र सर्व शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट ऑफिसर को सौंपा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। 16 मई, 2015 को उपायुक्त को भी एस्टीमेट बनाकर सौंपा था, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।</p>
<p>अध्यापक राजकुमार ने कहा कि स्कूल में पहली से पांचवीं तक 36 बच्चे पढ़ते हैं। 3-4 कमरों वाला भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। बच्चों को बारिश और धूप के दौरान पढ़ाने में काफी समस्या आती है। एक अध्यापक सालों से 5 कक्षाओं को पढ़ा रहा है। यदि शिक्षा महकमा अनदेखी कर रहा है तो विभागीय अधिकारी से जवाबतलबी की जाएगी। </p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण खली हो रहे स्कूल, परिजनों को लूट फायद उठा रहे निजी स्कूल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/15/hp-government-school-education-standards-advantage-for-private-schools/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Apr 2016 11:35:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[Private Schools Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Sarva Shiksha Abhiyan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर तथा निजी स्कूलों की तर्ज पर मिल रही सुविधा का स्तर न बढ़ाया गया तो आने वाले कुछ सालों में सरकारी स्कूल पूरी तरह खाली हो जाएंगे। क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते? यहां तक कि सरकारी स्कूलों में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/15/hp-government-school-education-standards-advantage-for-private-schools/">हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण खली हो रहे स्कूल, परिजनों को लूट फायद उठा रहे निजी स्कूल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर तथा निजी स्कूलों की तर्ज पर मिल रही सुविधा का स्तर न बढ़ाया गया तो आने वाले कुछ सालों में सरकारी स्कूल पूरी तरह खाली हो जाएंगे। क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते? यहां तक कि सरकारी स्कूलों में सेवारत ज्यादातर शिक्षकों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों की बजाय निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।</p>
<p>प्रदेश में सरकारी स्कूलों का मौजूदा शिक्षा स्तर चिंताजनक है। सर्वशिक्षा अभियान के गत वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो प्राथमिक स्तर पर जो आंकड़ा 45.8 फीसदी है, वह मिडिल स्तर पर गिरकर 32.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। यही हाल ग्रेडिंग सिस्टम का है। यहां प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 60 फीसदी बच्चे गणित विषय में कमजोर पाए गए हैं।</p>
<p>अंग्रेजी, हिंदी तथा विज्ञान विषयों के हालात भी सुखद नहीं हैं। प्राथमिक स्कूलों में तालीम का स्तर और भी चिंतनीय है। यहां ज्यादातर छात्रों को अक्षर ज्ञान तक नहीं है। छठी से दसवीं कक्षा तक के छात्रों को बेसिक की बहुत बड़ी कमजोरी पाई गई है। अंग्रेजी के टेंस तथा गणित में बेसिक गणित का ज्यादातर तक छात्रों को ज्ञान नहीं है।</p>
<p>यह हालात सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक पक्ष को बेहद कमजोर साबित करने के लिए काफी है। प्राथमिक स्कूलों में हर साल करीब दो हजार छात्र कम हो रहे हैं। नए छात्र दाखिल नहीं होंगे तो मिडिल, उच्च तथा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं होगा।</p>
<p><strong>निशुल्क भी नहीं पढ़ाना चाहते अभिभावक </strong></p>
<p>प्राथमिक स्कूलों में कोई दाखिला शुल्क नहीं है। वर्दी, पुस्तकें, दोपहर का भोजन तक सरकार मुहैया करवा रही है। बावजूद इसके अभिभावक निजी स्कूलों का रुख क्यों कर रहे हैं, यह चिंतन एवं मनन का विषय है। सर्वशिक्षा अभियान डाइट देहलां के प्रिंसिपल कमलदीप सिंह ने कहा कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में कई खामियां हैं।</p>
<p>बच्चों के गृहकार्य का अवलोकन सहीं ढंग से हो, टीचर डायरी लिखी जाए, पढ़ाई के प्रति शिक्षकों की इच्छाशक्ति हो, अध्यापन कार्य में शिक्षकों के पास एंजेडा हो, निजी स्कूलों से सरकारी शिक्षकों में प्रतिस्पर्धा की भावना हो, जो सुविधाएं निजी स्कूलों में हैं, उसी तर्ज पर सुविधाएं मिलें तो घटती तादाद पर रोक लग सकती है।</p>
<p><em>Photo: New Indian Express/ Representational Image</em></p>
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